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भारत–ब्रिटेन FTA को बढ़ावा, हरियाणा से ब्रिटेन के लिए फास्टनर्स की पहली शिपमेंट रवाना

हरियाणा / सत्ता संदेश

भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते को मिली नई उड़ान, यूपीएस ने हरियाणा से फास्टनर्स की पहली शिपमेंट ब्रिटेन के लिए रवाना

भारत–ब्रिटेन के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद हरियाणा से फास्टनर्स की पहली निर्यात शिपमेंट आज यूपीएस से ब्रिटेन के लिए रवाना की गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के अधिकारियों एवं यूपीएस के अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में डीजीएफटी की सहायक निदेशक हेमलता हेड़ाऊ, सहायक निदेशक हीरा लाला, अनुभाग प्रमुख योगेंद्र मीणा तथा यूपीएस के निदेशक अमित जैन विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने कहा कि भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता भारतीय विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे विशेष रूप से एमएसएमई एवं विनिर्माण उद्योगों को वैश्विक बाजारों में नई संभावनाएँ प्राप्त होंगी तथा भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता और अधिक सशक्त होगी।

उन्होंने कहा कि इस समझौते से हरियाणा सहित पूरे देश के उद्योगों को निर्यात बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा। फास्टनर उद्योग के लिए यह एक नए युग की शुरुआत है, जो ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

इस अवसर पर यूपीएस के निदेशक अमित जैन ने कहा कि कंपनी के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है कि भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते के बाद हरियाणा से पहली फास्टनर्स निर्यात शिपमेंट उनके संसथान से ब्रिटेन के लिए रवाना की जा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता भारतीय उद्योगों के लिए नए व्यापारिक अवसरों के द्वार खोलेगा तथा देश के निर्यात को नई गति प्रदान करेगा।

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर फास्टनर्स की पहली निर्यात शिपमेंट को ब्रिटेन के लिए रवाना किया। उपस्थित सभी अतिथियों ने इस उपलब्धि को भारतीय उद्योग, निर्यात क्षेत्र और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। इस अवसर पर राजीव जैन, सन्नी निझावन , बलजीत सिंह, रविंदर , शिमला रानी आदि मौजूद रहे |

भारत ने 13वीं आसियान-भारत व्यापार समझौता सयुंक्त समिति की बैठक की मेजबानी की

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत ने 6 से 10 जुलाई तक नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में 13वीं आसियान-भारत व्यापार समझौता (AITIGA) संयुक्त समिति और संबंधित बैठकों की मेजबानी की, जिसमें AITIGA समीक्षा के तहत वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा की गई। ये बैठकें हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित की जा रही हैं।

एआईटीआईजीए संयुक्त समिति के अंतर्गत आने वाली आठ उप-समितियों में से तीन की बैठकें वर्तमान में 13वीं संयुक्त समिति की बैठक के दौरान समानांतर रूप से आयोजित की जा रही हैं। इनमें सीमा शुल्क प्रक्रिया एवं व्यापार सुगमता उप-समिति (SC-CPTF), राष्ट्रीय व्यवहार एवं बाजार पहुंच उप-समिति (SC-NTMA) और उत्पत्ति नियम उप-समिति (SC-ROO) शामिल हैं। ये बैठकें भारत और आसियान के बीच सहयोग को गहरा करने, आपसी समझ को मजबूत करने और रचनात्मक संवाद को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य कर रही हैं।

संयुक्त समिति ने उप-समितियों को उनके संबंधित कार्यक्षेत्रों में रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया और उनसे AITIGA समीक्षा के अंतर्गत लंबित अध्यायों को अंतिम रूप देने में तेजी लाने का आग्रह किया। वार्ता की गति बनाए रखने के लिए, उप-समितियों को समयबद्ध कार्य सौंपे गए और उन्हें सहमत समयसीमा के भीतर ठोस परिणाम प्राप्त करने हेतु मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

7 जुलाई, को आयोजित 13वीं AITIGA संयुक्त समिति की बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में वाणिज्य विभाग के अपर सचिव नितिन कुमार यादव और मलेशिया के निवेश, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय की उप महासचिव मस्तुरा अहमद मुस्तफा ने की। इस बैठक में आसियान के सभी सदस्य देशों ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया।

आसियान भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक है, जो भारत के वैश्विक व्यापार का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा है। भारत और आसियान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 के दौरान 128 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो दोनों पक्षों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी को दर्शाता है और व्यापार एवं निवेश सहयोग को और बढ़ाने के अवसर प्रदान करता है।

‘ब्रिक्स वैश्विक इकोनॉमी का नया पावरहाउस, हाई-टेक निर्यात में एक-तिहाई हिस्सेदारी’, पुतिन

इंटरनेशनल डेस्क / सत्ता संदेश

दुनिया में आर्थिक मोर्चे पर एक नया बदलाव दिख रहा है और ब्रिक्स देश इसके विकास का मुख्य इंजन बन चुके हैं। 29वें सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (एसपीआईईएफ) के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में वैश्विक जीडीपी वृद्धि का लगभग आधा हिस्सा (49 प्रतिशत) ब्रिक्स देशों से आया है। यह आंकड़े बताते हैं कि उभरते बाजार अब वैश्विक पटल पर एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित हो रहे हैं। 

व्यापार और अर्थव्यवस्था पर ब्रिक्स का दबदबा

वर्तमान में, क्रय शक्ति समता के आधार पर वैश्विक जीडीपी में ब्रिक्स का योगदान लगभग 40 प्रतिशत हो गया है। इसके अलावा, व्यापारिक मोर्चे पर भी इन देशों ने तेजी से प्रगति की है। पुतिन ने कहा है कि ब्रिक्स के अस्तित्व में आने के बाद से वैश्विक माल व्यापार में इसकी हिस्सेदारी दोगुनी से अधिक हो गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है।

प्रमुख आंकड़े और क्षेत्रीय प्रभाव

  • जीडीपी में योगदान: वैश्विक जीडीपी वृद्धि (पिछले 5 वर्षों में) का 49 प्रतिशत हिस्सा ब्रिक्स से आया।
  • क्रय शक्ति: पीपीपी के संदर्भ में वैश्विक जीडीपी का 40 प्रतिशत हिस्सा ब्रिक्स के पास।
  • आपसी व्यापार: ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार एक ट्रिलियन डॉलर के पार।
  • तकनीकी निर्यात: वैश्विक हाई-टेक निर्यात में ब्रिक्स की हिस्सेदारी एक-तिहाई से अधिक। 

तकनीक और इनोवेशन में भारत-चीन का नेतृत्व

ब्रिक्स देश अब केवल पारंपरिक व्यापार या कमोडिटी निर्यात तक सीमित नहीं हैं। वैश्विक हाई-टेक निर्यात में इनकी हिस्सेदारी एक-तिहाई से अधिक हो गई है। राष्ट्रपति पुतिन ने तकनीकी क्षेत्र में विशिष्ट देशों की ताकत का उल्लेख करते हुए बताया कि वैश्विक सॉफ्टवेयर उद्योग में भारत की स्थिति बेहद मजबूत है। वहीं, चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पेटेंट के मामले में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। रूस भी डिजिटल प्लेटफॉर्म, वित्तीय तकनीक और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। 

बहुध्रुवीय विश्व और समान विकास की वकालत

आर्थिक विकास के साथ-साथ इस मंच पर वैश्विक समानता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। पुतिन ने कहा, “दुनिया तब अधिक न्यायसंगत बनती है जब आर्थिक विकास उन अरबों लोगों तक पहुंचता है जो पहले वैश्विक अर्थव्यवस्था के हाशिये पर थे”। इसी कड़ी में चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग ने वैश्विक प्रशासन की एक निष्पक्ष प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन और रूस संप्रभु समानता, अंतर्राष्ट्रीय कानून और वास्तविक बहुपक्षीय सहयोग पर आधारित बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

उभरते बाजारों का भविष्य: अफ्रीका और मध्य एशिया

इस आर्थिक महाकुंभ में अफ्रीका और मध्य एशिया जैसे क्षेत्रों की विकास क्षमता को भी रेखांकित किया गया। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव ने बताया कि रूस और उज्बेकिस्तान के बीच सहयोग अब केवल व्यापारिक नहीं रहा, बल्कि यह तकनीकी गठबंधन और संयुक्त उत्पादन परियोजनाओं में बदल गया है, जिसका कुल पोर्टफोलियो 50 अरब डॉलर से अधिक है। 

तंजानिया की राष्ट्रपति सामिया सुलुहू हसन ने भविष्य के अफ्रीका का खाका खींचते हुए कहा कि 2050 तक दुनिया का हर चौथा व्यक्ति अफ्रीकी होगा। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में दुनिया की 20 सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से नौ अफ्रीका में होंगी।

यह आर्थिक सत्र इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पश्चिमी देशों के एकाधिकार से परे, ब्रिक्स देश और उभरते बाजार अब केवल वैश्विक विकास के भागीदार नहीं, बल्कि उसके मुख्य संचालक बन गए हैं। तकनीक, आपसी व्यापार और नई रणनीतिक साझेदारियों के बलबूते यह समूह भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था की दशा और दिशा तय करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

टी20 सीरीज में भारत की दमदार शुरुआत, इंग्लैंड को 38 रन से हराया; रोड्रिग्स, यास्तिका और नंदनी चमकीं

लंदन / सत्ता संदेश

India women’s national cricket team ने इंग्लैंड दौरे की टी20 श्रृंखला में शानदार शुरुआत करते हुए England women’s national cricket team को 38 रन से हराकर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। भारतीय टीम की जीत में Jemimah Rodrigues, Yastika Bhatia और पदार्पण कर रहीं Nandini Kashyap का प्रदर्शन बेहद अहम रहा।

भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए संतुलित और आक्रामक बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। जेमिमा रोड्रिग्स ने मध्यक्रम में शानदार पारी खेलकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। उन्होंने तेज रन गति बनाए रखते हुए इंग्लैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया।

यास्तिका भाटिया ने भी महत्वपूर्ण योगदान देते हुए टीम की पारी को स्थिरता दी। दोनों बल्लेबाजों के बीच हुई साझेदारी ने भारत को प्रतिस्पर्धी स्कोर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।

मैच की सबसे खास बात रही युवा खिलाड़ी नंदनी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण। पहली बार भारतीय टीम की ओर से खेलते हुए उन्होंने आत्मविश्वास से भरा प्रदर्शन किया और अपने खेल से सभी का ध्यान आकर्षित किया। क्रिकेट विशेषज्ञों ने उनके प्रदर्शन को भारतीय महिला क्रिकेट के लिए सकारात्मक संकेत बताया।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने लगातार संघर्ष करती नजर आई। भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा और नियमित अंतराल पर विकेट हासिल किए। इंग्लैंड की बल्लेबाजी कभी भी लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ती नहीं दिखी।

भारतीय टीम की क्षेत्ररक्षण भी बेहद प्रभावशाली रही। खिलाड़ियों ने कैच पकड़ने और रन बचाने में शानदार तालमेल दिखाया, जिससे इंग्लैंड की टीम पर दबाव लगातार बना रहा।

इस जीत के साथ भारत ने श्रृंखला में बढ़त हासिल कर ली है और टीम का आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा खिलाड़ियों और अनुभवी बल्लेबाजों के संयोजन ने भारतीय टीम को संतुलन दिया है।

महिला क्रिकेट में भारत का लगातार बेहतर प्रदर्शन यह संकेत देता है कि टीम आने वाले बड़े टूर्नामेंटों के लिए मजबूत तैयारी कर रही है। अब सभी की नजर श्रृंखला के अगले मुकाबले पर टिकी है, जहां इंग्लैंड वापसी की कोशिश करेगा जबकि भारत अपनी बढ़त मजबूत करना चाहेगा।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में तेजी, अंतरिम समझौते के करीब पहुंचे दोनों देश: पीयूष गोयल

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और United States के बीच चल रही व्यापार वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने कहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत “उत्साहजनक” दिशा में आगे बढ़ रही है और एक अंतरिम व्यापार समझौता जल्द होने की संभावना है।

गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच विभिन्न व्यापारिक मुद्दों पर लगातार सकारात्मक चर्चा हो रही है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्ष कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहमति के करीब पहुंच चुके हैं और जल्द ही एक अंतरिम व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देश वस्तुओं, सेवाओं, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और निवेश के क्षेत्र में व्यापक आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। व्यापार वार्ता का उद्देश्य शुल्क, बाजार पहुंच, आपूर्ति श्रृंखला और निवेश से जुड़े मुद्दों को सरल बनाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरिम समझौता होता है तो इससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई गति मिल सकती है। भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिलने की संभावना है, वहीं अमेरिकी कंपनियों को भी भारत के बड़े उपभोक्ता बाजार तक अधिक पहुंच मिल सकती है।

गोयल ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और व्यावहारिक समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बदलते व्यापारिक समीकरणों और आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन के बीच भारत और अमेरिका के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। तकनीक, रक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग तेजी से बढ़ा है।

फिलहाल व्यापार जगत की नजर इस संभावित अंतरिम समझौते पर टिकी है, क्योंकि इससे निवेश माहौल और निर्यात क्षेत्र को सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को मिलेगी रफ्तार, एक जून से चार दिवसीय दौरे पर आएगा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल एक जून से चार दिवसीय भारत दौरे पर आएगा। इस महत्वपूर्ण वार्ता को दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस दौरे के दौरान दोनों देशों के अधिकारी व्यापार और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। बातचीत में अंतरिम व्यापार समझौते के ब्योरे को अंतिम रूप देने के साथ-साथ बाजार पहुंच, गैर-शुल्क बाधाएं, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आसान बनाने, व्यापार सुविधा, निवेश प्रोत्साहन और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे।

भारत और अमेरिका पिछले कुछ वर्षों से आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध तेजी से बढ़े हैं और अमेरिका भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। ऐसे में प्रस्तावित समझौते को द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देने वाला कदम माना जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि इस वार्ता का उद्देश्य केवल व्यापारिक अड़चनों को दूर करना ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करना भी है। खासतौर पर डिजिटल व्यापार, विनिर्माण, कृषि उत्पादों की पहुंच, तकनीकी सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत और अमेरिका अपने व्यापारिक संबंधों को अधिक मजबूत और स्थिर बनाना चाहते हैं। यही कारण है कि दोनों देश चरणबद्ध तरीके से व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि अंतरिम समझौते के तहत कुछ क्षेत्रों में तत्काल राहत और सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी, ताकि व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में सकारात्मक माहौल तैयार हो सके। इससे दोनों देशों के निर्यातकों और उद्योगों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारत लंबे समय से अमेरिकी बाजार में अपने उत्पादों की बेहतर पहुंच और कुछ गैर-शुल्क प्रतिबंधों में राहत की मांग करता रहा है। वहीं अमेरिका भी भारत में निवेश और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर अधिक स्पष्टता और सहूलियत चाहता है। ऐसे में आगामी वार्ता को दोनों देशों के व्यापारिक हितों के संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो इससे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी और दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल कनाडा जाने वाले व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे


व्यापार, निवेश और सीईपीए वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए ओटावा और
टोरंटो में द्विपक्षीय बैठकें

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल कनाडा जाने वाले भारतीय व्यापारिक प्रमुखों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यह प्रतिनिधिमंडल 25 मई को ओटावा में और 26 से 27 मई तक टोरंटो में दो दिवसीय कार्यक्रम में भाग लेगा। यह यात्रा मार्च 2026 में प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा के दौरान भारत और कनाडा के प्रधानमंत्रियों द्वारा दिए गए जनादेश को आगे बढ़ाती है और व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और जन-जन संबंधों के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को नई गति प्रदान करने का प्रयास है।

इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) की वार्ता को आगे बढ़ाना है। प्रधानमंत्री कार्नी की मार्च 2026 में भारत यात्रा के दौरान इसकी शर्तों पर हस्ताक्षर किए गए थे। वार्ता का पहला दौर मार्च में वर्चुअल माध्यम से आयोजित हुआ और दूसरा दौर 8 मई, 2026 को संपन्न हुआ। इस यात्रा के दौरान, वार्ता का एक और दौर 25 से 29 मई तक ओटावा में होगा। दोनों पक्ष 2026 के अंत तक एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी सीईपीए को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिसका साझा लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 बिलियन कनाडाई डॉलर (लगभग 4.65 लाख करोड़ रुपये) तक बढ़ाना है। वित्त वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 8.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। इसमें सभी क्षेत्रों में विस्तार की अपार संभावनाएं हैं।

प्रतिनिधिमंडल प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता; स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज; फार्मास्यूटिकल्स और जैव प्रौद्योगिकी; एयरोस्पेस और रक्षा; और खाद्य प्रसंस्करण और कृषि-तकनीक क्षेत्रों सहित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में कनाडाई समकक्षों के साथ विचार-विमर्श करेगा इन क्षेत्रों में भारत और कनाडा के पास अत्यधिक समान क्षमताएं हैं और इनमें संयुक्त निवेश, अनुसंधान एवं विकास और आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी के अवसर सबसे महत्वपूर्ण हैं।

भारत–केन्या संयुक्त व्यापार समिति की 10वीं बैठक नैरोबी में आयोजित, द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर

केन्या के लिए भारत एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार के रूप में उभरा; व्यापार बढ़कर 4.31 अरब अमेरिकी डॉलर हुआ

दिल्ली /सत्ता संदेश

भारत-केन्या संयुक्त व्यापार समिति (जेटीसी) का 10वां सत्र 27-28 अप्रैल, 2026 को नैरोबी, केन्या में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग की समीक्षा और उसे मजबूत करना था। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के सचिव श्री राजेश अग्रवाल और केन्या गणराज्य के व्यापार राज्य विभाग की प्रधान सचिव सुश्री रेजिना अकोटा ओम्बम ने की।

दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि का उल्लेख किया, जिसमें भारत केन्या के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक के रूप में उभरा है। भारत और केन्या के बीच कुल व्यापार 2025-26 में 4.31 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो 2024-25 के 3.45 अरब अमेरिकी डॉलर से 24.91 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। चर्चा व्यापार विविधीकरण को बढ़ाने, बाजार पहुंच संबंधी मुद्दों को हल करने और इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में पूरकर्ताओं का लाभ उठाने पर केंद्रित थी।

समिति ने मानकीकरण और अनुरूपता मूल्यांकन में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) और केन्या मानक ब्यूरो (केईबीएस) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) सहित चल रही व्यापार सुविधा पहलों पर प्रगति की समीक्षा की। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) और केन्या राजस्व प्राधिकरण (केआरए) के बीच आगमन से पहले सीमा शुल्क सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए, जिसमें सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और व्यापार करने में आसानी में सुधार पर जोर दिया गया।

जेटीसी बैठक के दौरान, व्यापार, निवेश और उद्योग सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और भारत-केन्या वाणिज्य एवं उद्योग चैंबर के बीच एक और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

दोनों पक्षों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान को बढ़ावा देने की संभावना को स्वीकार किया। यह उल्लेख किया गया कि केन्याई बैंकों ने भारतीय बैंकों के साथ विशेष रुपी वोस्त्रो खाते (एसआरवीए) खोले हैं, और इस व्यवस्था का अधिक उपयोग द्विपक्षीय लेनदेन को सुगम बना सकता है। स्थानीय मुद्रा निपटान (एलसीएस) तंत्र अपनाने की संभावना पर भी चर्चा की गई।

उभरते क्षेत्रों में क्षेत्रीय सहयोग पर विचार-विमर्श किया गया। इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षेत्र में, ऑटोमोबाइल, मशीनरी और निर्माण उपकरणों के निर्यात को बढ़ाने के अवसरों पर प्रकाश डाला गया, साथ ही ऑटोएक्सपो केन्या और द बिग 5 कंस्ट्रक्ट केन्या जैसी प्रदर्शनियों में भागीदारी पर भी चर्चा हुई। रेलवे सहित अवसंरचना विकास में सहयोग पर भी विचार किया गया, जिसमें भारत ने केन्या की मानक गेज रेलवे के लिए व्यवहार्यता अध्ययन, परियोजना प्रबंधन और रोलिंग स्टॉक की आपूर्ति में सहायता प्रदान करने की पेशकश की। भारतीय शिपयार्डों के साथ जहाज निर्माण में सहयोग के अवसरों की भी खोज की गयी।

फार्मास्यूटिकल्स में, भारत ने सस्ती जेनेरिक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी भूमिका पर प्रकाश डाला और बिजनेस-टू-बिजनेस जुड़ाव बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। दोनों पक्षों ने स्वच्छता और पादप स्वच्छता बाधाओं को दूर करते हुए कृषि उत्पादों में व्यापार बढ़ाने पर भी चर्चा की।

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में, भारत ने सौर और पवन परियोजनाओं सहित केन्या की स्वच्छ ऊर्जा पहलों का समर्थन करने की तत्परता व्यक्त की। केन्याई पक्ष ने सूचित किया कि उसने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर करने का अपना निर्णय बता दिया है और वह जल्द से जल्द इस पर हस्ताक्षर करने के लिए उत्सुक है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर हुई चर्चा में यूपीआई जैसी भुगतान प्रणालियों, भारत कनेक्ट और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाले डिजिटल प्लेटफार्मों पर सहयोग शामिल था।

क्षमता निर्माण को सहयोग के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में पहचाना गया। भारत ने भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम जैसी पहलों के तहत खनन, भूविज्ञान, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान किए। उच्च शिक्षा, डिजिटल शिक्षण प्लेटफार्मों और कौशल विकास में सहयोग के साथ-साथ “स्टडी इन इंडिया” कार्यक्रम के अंतर्गत छात्र गतिशीलता को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की गई।

दोनों पक्षों ने विविधतापूर्ण, संतुलित और भविष्योन्मुखी आर्थिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की और व्यापार को सुगम बनाने, लंबित मुद्दों को हल करने और व्यापार-से-व्यापार जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।

संयुक्त व्यापार सम्मेलन (जेटीसी) के दौरान, भारत-केन्या संयुक्त व्यापार मंच का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और केन्या राष्ट्रीय वाणिज्य एवं उद्योग चैंबर (केएनसीसीआई) के प्रतिनिधियों सहित प्रमुख भारतीय और केन्याई व्यवसायों ने भाग लिया। भारत सरकार के वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल और केन्या गणराज्य की व्यापार प्रधान सचिव सुश्री रेजिना अकोता ओम्बम ने मुख्य भाषण दिए। उनके साथ केएनसीसीआई के अध्यक्ष और इन्वेस्टकेन्या के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी उपस्थित थे। इस मंच ने उद्योग जगत के नेताओं को विनिर्माण, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, अवसंरचना, डिजिटल प्रौद्योगिकी और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में व्यापार और निवेश संबंधों का विस्‍तार करने के लिए एक मंच प्रदान किया।

इसके अतिरिक्त, बैठक के दौरान, भारत-केन्या चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के सचिव श्री राजेश अग्रवाल की अध्यक्षता में स्थानीय भारतीय व्यापार समुदाय के साथ एक संवाद का आयोजन किया। इस संवाद में स्थानीय भारतीय व्यापार समुदाय और उनके साथ आए सीआईआई व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया और केन्या में व्यापार करने से संबंधित अवसरों और अनुभवों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को बड़ा झटका: IEEPA के जरिए टैरिफ लगाने पर रोक, जवाब में राष्ट्रपति ने तत्काल लागू किया 10% ग्लोबल टैरिफ

इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा कानूनी झटका लगा है, जिसमें कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर दूसरे देशों पर टैरिफ लगाने के उनके फैसले पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 से यह फैसला सुनाया कि ट्रंप प्रशासन ने बड़े पैमाने पर इंपोर्ट टैरिफ लगाने के लिए 1977 के इस एक्ट का इस्तेमाल करके अपने कानूनी अधिकार का उल्लंघन किया है। कोर्ट के अनुसार, IEEPA अथॉरिटीज का इस्तेमाल रेवेन्यू जुटाने के लिए नहीं किया जा सकता।

ट्रंप की जवाबी कार्रवाई और 10% ग्लोबल टैरिफ: सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को ट्रंप ने “बहुत बुरा फैसला” करार दिया है। हालांकि, इस कानूनी शिकस्त के तुरंत बाद ट्रंप ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 10% ग्लोबल टैरिफ को “तत्काल प्रभाव” से लागू करने की घोषणा कर दी है। इसके लिए उन्होंने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं, जो उन्हें 150 दिनों के लिए अस्थायी इंपोर्ट सरचार्ज लगाने की अनुमति देता है।

वित्त मंत्री ने दिया वैकल्पिक रास्तों का भरोसा : अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि भले ही IEEPA के इस्तेमाल पर रोक लगी है, लेकिन टैरिफ रेवेन्यू में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन अब सेक्शन 232 और सेक्शन 301 जैसी वैकल्पिक कानूनी शक्तियों (Alternative Legal Authorities) का इस्तेमाल करेगा। प्रशासन का अनुमान है कि इन अन्य तरीकों को अपनाने से 2026 में टैरिफ से होने वाली कमाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

क्या है IEEPA कानून? इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) 1977 में बनाया गया एक अमेरिकी संघीय कानून है। यह राष्ट्रपति को ‘नेशनल इमरजेंसी’ के दौरान अंतरराष्ट्रीय आर्थिक लेनदेन को रेगुलेट करने, एसेट्स फ्रीज करने और अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले देशों के साथ व्यापार पर रोक लगाने के व्यापक अधिकार देता है। अब तक अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने इसका इस्तेमाल 77 बार नेशनल इमरजेंसी घोषित करने के लिए किया है।