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CBSE का बड़ा बदलाव: अब 9वीं में 3 भाषाएं पढ़ना अनिवार्य, 10वीं बोर्ड परीक्षा में नहीं होगा तीसरी लैंग्वेज का पेपर

नेशनल डेस्क : सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अपनी भाषा नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव की घोषणा की है। 15 मई 2026 को जारी नए सर्कुलर के अनुसार, अब कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं (Three Languages) पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नया नियम 1 जुलाई 2026 से सीबीएसई के सभी स्कूलों में पूरी तरह लागू हो जाएगा।

क्या है नया ‘भाषा गणित‘?अनिवार्य भारतीय भाषाएं: छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो मूल भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।

विदेशी भाषा का विकल्प: छात्र तीसरी भाषा के रूप में विदेशी भाषा तभी चुन सकते हैं जब उनकी बाकी दो भाषाएं भारतीय हों। विदेशी भाषा को चौथे अतिरिक्त विषय के रूप में भी लेने का विकल्प दिया गया है।

प्रभावी तिथि: यह नियम शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9 से शुरू होगा।

10वीं के छात्रों को बड़ी राहत: बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करने के लिए कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का कोई पेपर नहीं होगा। तीसरी भाषा का मूल्यांकन पूरी तरह से स्कूलों द्वारा आंतरिक (Internal Assessment) तौर पर किया जाएगा। इस विषय के नंबर फाइनल सर्टिफिकेट में दर्ज होंगे, लेकिन इसके कारण किसी भी छात्र को बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा।

शिक्षकों की कमी और स्कूलों को छूट: नियमों को लागू करने के लिए बोर्ड ने स्कूलों को काफी लचीलापन दिया है। भाषा शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए स्कूल हाइब्रिड टीचिंग (ऑनलाइन और ऑफलाइन), रिटायर शिक्षकों की सेवाएं लेने या अन्य स्कूलों के साथ संसाधन साझा करने जैसे विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

किसे मिलेगी छूट? दिव्यांग बच्चों को आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2016 के तहत दूसरी या तीसरी भाषा पढ़ने से छूट मिल सकती है। इसके अलावा, विदेश से लौटे छात्रों और भारत के बाहर स्थित सीबीएसई स्कूलों के लिए भी नियमों में ढील दी गई है।