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ईरानी सेना ने अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर ट्रंप के दावे का उड़ाया मजाक

दुबई, 25 मार्च (एपी) ईरान की सेना के एक प्रवक्ता ने युद्धविराम समझौते से जुड़े अमेरिकी प्रयासों का बुधवार को मजाक उड़ाया जिससे यह सवाल उठने लगे कि क्या अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 15 सूत्रीय योजना के सफल होने की कोई संभावना है।

ईरान की नियमित सेना और अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड की संयुक्त रूप से कमान संभालने वाले ‘खातम अल-अन्बिया सेंट्रल हेडक्वार्टर’ के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जुल्फाघारी ने 15-सूत्रीय योजना को मध्यस्थों के जरिये ईरान को सौंपे जाने के बाद यह टिप्पणी की।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी अधिकारी इस योजना पर ईरान के साथ बातचीत कर रहे हैं लेकिन सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक बयान में जुल्फाघारी ने इस बात का संकेत दिया कि कोई बातचीत नहीं हो रही। जुल्फाघारी के पहले से रिकॉर्ड वीडियो के जरिए यह बयान जारी किया।

उन्होंने कहा, ‘‘क्या आपके आंतरिक मतभेद इस हद तक पहुंच गए हैं कि आप खुद से ही बातचीत कर रहे हैं?’’

जुल्फाघारी ने कहा, ‘‘पहले दिन से ही हमारी पहली और आखिरी बात यही रही है और यही रहेगी : हम जैसे लोग आप जैसे लोगों के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे। न अभी, न कभी।’’

एक अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि 15 सूत्रीय युद्धविराम योजना पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिये ईरान को सौंपी गई। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थता की पेशकश की है।

यह प्रस्ताव ऐसे समय आया जब अमेरिका की सेना 82वीं ‘एयरबोर्न डिवीजन’ से कम से कम 1,000 और सैनिकों को तैनात करने की तैयारी कर रही है ताकि क्षेत्र में पहले से मौजूद करीब 50,000 सैनिकों को और बल मिल सके।

सबसे पहले ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने यह खबर दी थी कि योजना ईरानी अधिकारियों को सौंप दी गई है।

अमेरिका के रक्षा मंत्रालय का मुख्यालय ‘पेंटागन’ दो ‘मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट’ की भी तैनाती की प्रक्रिया में है जिसके तहत क्षेत्र में करीब 5,000 मरीन एवं नौसेना के हजारों अन्य कर्मी और तैनात किए जाएंगे।

अधिकारी ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने की वकालत कर रहे इजराइली अधिकारी अमेरिकी प्रशासन द्वारा युद्धविराम योजना सौंपे जाने से हैरान हैं।

उन्होंने साथ ही कहा कि अमेरिका पश्चिम एशिया में अतिरिक्त सैनिक एवं मरीन भेज रहा है, ऐसे में युद्धविराम योजना के प्रस्ताव को ट्रंप की ऐसी रणनीति के तौर पर पेश किया जा रहा है कि भविष्य में क्या कदम उठाना है, इसे लेकर वह अपने विकल्प खुले रखना चाहते हैं।

अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ ने इस संबंध में टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया है।

इस बीच, जहां एक ओर ईरान पर हवाई हमले जारी हैं, वहीं दूसरी ओर ईरानी मिसाइलों और ड्रोन ने इजराइल एवं पूरे क्षेत्र में विभिन्न स्थानों को निशाना बनाया।

तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण उपभोक्ताओं पर पड़ रहे बोझ के बीच ट्रंप पर युद्ध खत्म करने का दबाव अमेरिका में बढ़ता जा रहा है।

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अंतरराष्ट्रीय नौवहन को बाधित कर दिया है जिसके कारण ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो गया है।

ईरानी सैन्य प्रवक्ता जुल्फाघारी ने कहा, ‘‘जिस रणनीतिक ताकत की बात आप किया करते थे, वह अब रणनीतिक विफलता में बदल गई है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जो देश खुद को वैश्विक महाशक्ति कहता है, अगर संभव होता तो वह इस संकट से अब तक निकल चुका होता। अपनी हार को समझौते का नाम मत दीजिए। खोखले वादों का आपका दौर अब समाप्त हो चुका है।’’

जो ट्रंप ने मादुरो के साथ किया, वही नरेन्द्र मोदी ने नीतीश के साथ किया: जयराम रमेश

नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा का सदस्य बनने के फैसले को लेकर शुक्रवार को भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो इस साल जनवरी में वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के साथ किया था, वही अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीतीश के साथ किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद के छोड़ने का फैसला जनादेश के साथ विश्वासघात है क्योंकि पिछले साल नवंबर में राज्य की जनता ने भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि नीतीश को ही फिर से मुख्यमंत्री बनाने के लिए वोट दिया था।

नीतीश कुमार ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में यह ऐलान किया था कि वह राज्यसभा जाने की इच्छा रखते हैं और बिहार में बनने वाली नई सरकार को उनका मार्गदर्शन मिलता रहेगा।

बिहार की राजनीति के इस बड़े घटनाक्रम के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘बिहार के चुनाव प्रचार के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे जी और राहुल गांधी जी ने कहा था कि नीतीश कुमार ज्यादा समय के लिए मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे क्योंकि भाजपा का मकसद यही है कि उनको हटाया जाए। आखिरकार यही हुआ। नीतीश को इस बार मुख्यमंत्री बने चार महीने भी नहीं हुए और उन्हें हटाया जा रहा है।’’

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘जो ट्रंप ने मादुरो के साथ किया, यहां मोदी जी ने नीतीश कुमार के साथ किया है।’’

उल्लेखनीय है कि इस साल तीन जनवरी को अमेरिका के विशेष सुरक्षा बलों ने वेनेजुएला में एक सैन्य कार्रवाई करते हुए वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़कर अमेरिका ले गए थे। अब इनके खिलाफ अमेरिका में कानूनी कार्रवाई चल रही है।

रमेश ने नीतीश कुमार के मामले को लेकर दावा किया, ‘‘यह तो तख्तापलट है। यह तो होना ही था। यह बिहार की जनता और उसके जनादेश के साथ विश्चासघात है।’’

उनके मुताबिक, जनादेश भाजपा का मुख्यमंत्री बनाने के लिए नहीं था, जनादेश नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के लिए था।

रमेश ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू पर भी कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘हो सकता है कि कल नायडू को भी तख्तापलट कर राज्यसभा में लाया जाए और मंत्री बना दिया जाए। महाराष्ट्र में भी तो तख्लापलट हुआ था…यह सब ‘जी2’ का कमाल है।’’

ट्रंप ने अमेरिकी एजेंसियों को एंथ्रोपिक की एआई तकनीक का इस्तेमाल बंद करने का आदेश दिया

वाशिंगटन, 28 फरवरी (एपी) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने शुक्रवार को देश की सभी सरकारी एजेंसियों को एआई कंपनी एंथ्रोपिक की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक का उपयोग बंद करने का आदेश दिया और अन्य कड़े दंडात्मक कदम भी उठाए।

यह निर्णय सरकार और कंपनी के बीच एआई सुरक्षा को लेकर जारी विवाद के बाद लिया गया।

राष्ट्रपति ट्रंप, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और अन्य अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर एंथ्रोपिक की आलोचना की। उनका आरोप है कि कंपनी ने शुक्रवार तक की समयसीमा के भीतर सेना को अपनी एआई तकनीक के असीमित उपयोग की अनुमति नहीं दी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

इससे पहले, एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डारियो अमादेई ने इन चिंताओं को लेकर सेना के साथ काम करने से इनकार कर दिया था कि कंपनी के उत्पादों का उपयोग ऐसे तरीकों से किया जा सकता है जो उसके सुरक्षा उपायों का उल्लंघन करेंगे।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘हमें कंपनी की तकनीक की जरूरत नहीं है और भविष्य में उससे कोई कारोबार नहीं किया जाएगा।’’

रक्षा मंत्री हेगसेथ ने एंथ्रोपिक को ‘‘आपूर्ति श्रृंखला जोखिम’’ घोषित किया, जो आमतौर पर विरोधी देशों की कंपनियों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला दर्जा है।

कंपनी ने इस कदम को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि किसी अमेरिकी कंपनी को इस तरह चिह्नित करना कानूनी रूप से गलत है और खतरनाक मिसाल बनेगा।

एंथ्रोपिक ने कहा कि कंपनी केवल यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि उसका एआई चैटबॉट ‘क्लाउड’ अमेरिकी नागरिकों की सामूहिक निगरानी या पूरी तरह स्वायत्त हथियारों में इस्तेमाल न किया जाए। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने कहा कि तकनीक का उपयोग केवल कानूनी उद्देश्यों के लिए किया जाएगा, लेकिन उसने बिना किसी सीमा के पहुंच की मांग की।

यह विवाद राष्ट्रीय सुरक्षा में एआई की भूमिका को लेकर बढ़ती बहस के बीच सामने आया है।

सिलिकॉन वैली में भी इस फैसले पर प्रतिक्रिया देखने को मिली।

ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने कंपनी के सुरक्षा संबंधी रुख का समर्थन किया, जबकि टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने ट्रंप प्रशासन का पक्ष लिया।

पाकिस्तान के साथ मेरे अच्छे संबंध हैं और वे बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं: ट्रंप

न्यूयॉर्क/वाशिंगटन, 28 फरवरी (भाषा) पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनके पाकिस्तान के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं और वह देश ‘‘बहुत अच्छा’’ प्रदर्शन कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान के साथ मेरे संबंध बहुत अच्छे हैं। आपके पास एक महान प्रधानमंत्री हैं, एक महान जनरल हैं। आपके पास एक अच्छा नेता हैं, दो ऐसे लोग जिनका मैं वास्तव में बहुत सम्मान करता हूं और मुझे लगता है कि पाकिस्तान बहुत बढ़िया प्रदर्शन कर रहा है।’’

ट्रंप से पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के खिलाफ शुरू किए गए ‘‘खुले युद्ध’’ को लेकर सवाल किया गया था और यह भी पूछा गया था कि क्या वह लड़ाई रोकने के लिए हस्तक्षेप करेंगे।

अमेरिका की राजनीतिक मामलों की उप विदेश मंत्री एलिसन हुकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने शुक्रवार को पाकिस्तान की विदेश मंत्री आमना बलूच से बात की तथा ‘‘पाकिस्तान और तालिबान के बीच हाल में हुए संघर्ष में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

उन्होंने कहा, ‘‘हम स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और तालिबान के हमलों के खिलाफ आत्मरक्षा करने के पाकिस्तान के अधिकार के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हैं।’’