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बेमौसम बारिश के बावजूद बढ़ेगा गेहूं उत्पादन, 2025-26 में 12.06 करोड़ टन रहने का अनुमान

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

देश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि जैसी मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद गेहूं उत्पादन में वृद्धि का अनुमान जताया गया है। केंद्र सरकार द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, फसल सत्र 2025-26 में देश का गेहूं उत्पादन 2.29 प्रतिशत बढ़कर 12.06 करोड़ टन रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के उत्पादन की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी मानी जा रही है।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में देश में गेहूं का उत्पादन 11.79 करोड़ टन दर्ज किया गया था, जबकि चालू फसल सत्र के लिए प्रारंभिक अनुमान 12.02 करोड़ टन का लगाया गया था। अब जारी नवीनतम अनुमान इस प्रारंभिक आकलन के लगभग अनुरूप है, जिससे संकेत मिलता है कि प्रतिकूल मौसम के बावजूद उत्पादन पर बड़ा असर नहीं पड़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बीज, आधुनिक खेती तकनीकों, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और किसानों द्वारा वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने के कारण गेहूं उत्पादन में यह बढ़ोतरी संभव हो सकी है। हालांकि कई राज्यों में फसल कटाई के दौरान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान की खबरें सामने आई थीं, फिर भी कुल राष्ट्रीय उत्पादन में गिरावट नहीं आई।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में अच्छी पैदावार दर्ज की गई है। खासकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में उत्पादन वृद्धि ने कुल राष्ट्रीय आंकड़ों को मजबूत आधार दिया है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि देश में खाद्यान्न सुरक्षा बनाए रखने के लिए गेहूं उत्पादन का स्थिर और बढ़ता स्तर बेहद महत्वपूर्ण है। भारत दुनिया के प्रमुख गेहूं उत्पादक देशों में शामिल है और घरेलू खपत के साथ-साथ सरकारी भंडारण व्यवस्था के लिए भी पर्याप्त उत्पादन आवश्यक माना जाता है।

सरकार का मानना है कि उत्पादन बढ़ने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए गेहूं की उपलब्धता बेहतर बनी रहेगी। इसके अलावा उत्पादन बढ़ने से बाजार में आपूर्ति मजबूत होने और कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।

हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन और असामान्य मौसम की घटनाएं भविष्य में कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में मौसम अनुकूल खेती, फसल बीमा, जल प्रबंधन और तकनीकी सहायता को और मजबूत करने की जरूरत होगी।

कृषि मंत्रालय द्वारा जारी यह अनुमान किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यदि आगामी महीनों में भंडारण और खरीद प्रक्रिया सुचारू रहती है, तो इससे देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर सवार है कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय- श्री शिवराज सिंह चौहान


दिल्ली / सत्ता संदेश

किसान-गरीब को भटकना नहीं पड़े, शिकायत निवारण को दें वरीयता- श्री शिवराज सिंह चौहान

हर महीने होगी समीक्षा, केवल डिस्पोजल नहीं, जमीन पर समाधान चाहिए- श्री शिवराज सिंह

नियम-प्रक्रिया को बनाएं सरल; एआई, डेटा और डिजिटल गवर्नेंस से कृषि-ग्रामीण विकास को देंगे नई धार- श्री शिवराज

कोर्ट केस, फाइल कल्चर और ड्राफ्टिंग पर श्री शिवराज सिंह का बड़ा सुधार एजेंडा

पीएम मोदी के ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और इनफॉर्म’ मंत्र से किसानों के जीवन में भरेंगे खुशियां- केंद्रीय कृषि मंत्री

2047 विजन, राज्यों से साझेदारी और 12 साल की उपलब्धियों के प्रस्तुतीकरण पर श्री शिवराज सिंह ने दिया जोर

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुरुवार शाम मंत्रिपरिषद की बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अगले ही दिन आज अपने दोनों मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाले विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक लेकर साफ कहा कि सरकार का काम फाइलों में नहीं, जनता के जीवन में दिखना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसान, गरीब, ग्रामीण और आम नागरिक को योजनाओं का लाभ पाने या शिकायतों के समाधान के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए योजनाबद्ध, समयबद्ध और परिणाममुखी व्यवस्था तुरंत खड़ी की जाए।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आम आदमी को लड़ना न पड़े, उसे दर-दर भटकना न पड़े और उसे योजनाओं का लाभ सहज, सरल और समय पर मिलना चाहिए। इसी को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर समेत संबंधित इकाइयों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत, प्रभावी और जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि अभी विभिन्न योजनाओं और विभागों में शिकायतों के निपटारे की अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं, जैसे अलग पोर्टल, अलग तंत्र और अलग प्रणाली, लेकिन अब इस व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी और परिणामकारी बनाने की जरूरत है। इसके लिए कृषि और ग्रामीण विकास, दोनों विभागों में कम से कम 10-10 अधिकारियों की टीम गठित करने को कहा गया, जो प्रतिदिन शिकायतों, जनसमस्याओं, पत्रों, जनप्रतिनिधियों के प्रतिवेदनों और विभिन्न पोर्टलों पर आई समस्याओं की समीक्षा करे।

श्री चौहान ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शिकायतों का समाधान केवल कागज पर “डिस्पोजल” दिखाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह देखा जाए कि लाभार्थी को वास्तविक राहत मिली या नहीं, योजना का लाभ वास्तव में पहुंचा या नहीं, और कहीं ऐसा तो नहीं कि रिकॉर्ड में वितरण दिख रहा हो लेकिन जमीन पर लाभार्थी को कुछ मिला ही न हो।

बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने अपने उस अनुभव का भी उल्लेख किया, जिसमें लाभार्थियों को फोन कर सत्यापन करने पर कुछ मामलों में कागज और वास्तविकता के बीच अंतर सामने आया था। उन्होंने साफ कहा कि यह समस्या आसान नहीं, बल्कि जटिल है, इसलिए शिकायतों की प्रकृति, क्षेत्रवार प्रवृत्ति और योजनावार अड़चनों की पहचान कर तंत्र में आवश्यक बदलाव करना होगा।

उन्होंने निर्देश दिया कि हर महीने शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि महीने के पहले सोमवार को समीक्षा की जाएगी, हालांकि जून में खरीफ कार्यों की व्यस्तता को देखते हुए दूसरे सोमवार को विस्तृत समीक्षा की जाएगी, लेकिन तब तक तंत्र और अधिक व्यवस्थित, उत्तरदायी और प्रभावी हो जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा रिफॉर्म्स पर दिए जा रहे लगातार जोर का उल्लेख करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब हर डिवीजन, हर योजना और हर विभाग अपने स्तर पर यह पहचाने कि आखिर कठिनाई कहां है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क योजना, कृषि योजनाएं, बागवानी, बीमा, विपणन या अन्य कार्यक्रमों में जहां कहीं लाभार्थी बेवजह चक्कर काट रहा है, वहां नियम, प्रक्रिया, तंत्र और कार्यप्रणाली को सरल बनाना ही होगा।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने साफ कहा कि प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जाए और पुराने-अप्रासंगिक रेगुलेशंस को खत्म करना अब जरूरी है। उन्होंने पूछा कि हर चीज के लिए लाइसेंस की जरूरत क्यों हो, कई जगह पंजीकरण या आसान प्रणाली से काम क्यों नहीं हो सकता। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर विभिन्न योजनाओं में बाधा पैदा करने वाले प्रावधानों, जटिल प्रक्रियाओं और सुधार योग्य बिंदुओं की पहचान कर ली जाए, ताकि आगे त्वरित निर्णय लिया जा सके।

बैठक में एआई और टेक्नोलॉजी के उपयोग पर महत्वपूर्ण रूप से बात करते हुए श्री चौहान ने कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर सहित सभी क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा शेयरिंग, डेटा आधारित निर्णय, मॉनिटरिंग और इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए अलग टीम बनाकर अध्ययन करने और उपयोगी प्रस्ताव उनके सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए विभागों के बीच साझा कामकाज और डेटा इंटीग्रेशन जरूरी है। बैठक में यह भी सामने आया कि विभिन्न शिकायत डेटाबेस को जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है, ताकि केवल एक पोर्टल की नहीं बल्कि समेकित शिकायत-प्रणाली के आधार पर विभागीय मूल्यांकन हो सके।

श्री चौहान ने प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में बदलाव पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि फाइल नीचे से बनकर ऊपर आती है और कई बार नीचे का पुराना माइंडसेट ही पूरी प्रक्रिया को उलझा देता है। इसलिए केवल ऊपर के स्तर पर नहीं, बल्कि नीचे से फाइल निर्माण, नोटिंग, निर्णय-तैयारी और ड्राफ्टिंग की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत है। उन्होंने ड्राफ्टिंग को अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि विभागों में ऐसे अधिकारी विकसित किए जाएं जो फाइलें और नोट्स मजबूत, स्पष्ट और नीति-संगत तरीके से तैयार कर सकें। इसके लिए प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और दक्षता वृद्धि की व्यवस्था की जाए, ताकि फाइलें अनावश्यक रूप से न अटकें और निर्णय की गुणवत्ता भी बेहतर हो।

न्यायालयों में लंबित मामलों को लेकर भी केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई मामलों में सरकार इसलिए कमजोर पड़ जाती है क्योंकि सरकारी पक्ष समय पर और प्रभावी ढंग से अदालत में रखा ही नहीं जाता। उन्होंने सभी विभागों से कहा कि वे लंबित कोर्ट केसों की सूची निकालें, उनकी समीक्षा करें, नोडल अधिकारी तय करें, विधिक तैयारी मजबूत करें और जरूरत पड़े तो बेहतर वकीलों की व्यवस्था करें, क्योंकि सरकार की हार का सीधा नुकसान सार्वजनिक हित को होता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकास कार्यों में बाधाओं की पहचान और समाधान पर दिए गए संदेश को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि हर डिवीजन यह बताए कि काम किस वजह से अटकता है, कौन सी बाधाएं फैसलों, क्रियान्वयन और लाभ वितरण में देरी करती हैं, और उन्हें दूर करने के लिए क्या सुधार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह कवायद एक साथ चलनी चाहिए- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के साथ-साथ इन्फॉर्म भी।

उन्होंने कहा कि कई बार योजनाएं अच्छी होती हैं, सुधार भी किए जाते हैं, लेकिन जनता को जानकारी ही नहीं होती। इसलिए हितधारकों से संवाद, किसान संगठनों के साथ बैठक, मजदूरों और सरपंचों से बातचीत, जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सूचना, सोशल मीडिया, ग्राफिक्स, वीडियो, रील्स और रचनात्मक संचार माध्यमों से योजनाओं और सुधारों को जनता तक पहुंचाया जाए।

बैठक में यह भी कहा गया कि जो सुधार पहले ही किए जा चुके हैं, उनका “रिफॉर्म उत्सव” की तरह प्रचार-प्रसार होना चाहिए। श्री चौहान ने कहा कि केवल सुधार कर देना काफी नहीं है, बल्कि जिनके लिए सुधार किए गए हैं, उन्हें बुलाकर संवाद किया जाना चाहिए, बताया जाना चाहिए कि क्या बदला है, उससे क्या लाभ होगा और आगे क्या और किया जा सकता है।

श्री चौहान ने राज्यों के साथ साझेदारी को कृषि और ग्रामीण विकास की सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि असली काम राज्यों में होता है, इसलिए राज्यों के साथ रोडमैप आधारित साझेदारी, ज़ोनल कॉन्फ्रेंस, योजनावार समन्वय और समस्या-आधारित संवाद को और मजबूत किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि जो राज्य संकोच करते हैं, उनके साथ भी संवाद बढ़ाया जाएगा, क्योंकि केंद्र का दायित्व पूरे देश की जनता के प्रति है।

उन्होंने कृषि, पशुपालन, मत्स्य, फूड प्रोसेसिंग और अन्य संबद्ध क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय की भी जरूरत बताई। उनका कहना था कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और क्षेत्रीय कृषि रोडमैप जैसे मुद्दों पर अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों को साथ बैठकर काम करना होगा।

बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विभागीय विजन दस्तावेज तैयार करने पर भी बल दिया गया। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रत्येक विभाग अपना 2047 विजन, इस वर्ष के लक्ष्य, वार्षिक, छह-माही, तिमाही, साप्ताहिक और दैनिक कार्ययोजना तैयार करे, ताकि मॉनिटरिंग मजबूत हो और काम का आकलन स्पष्ट रूप से हो सके।

उन्होंने सरकारी भवनों और संस्थानों में पीएम सूर्य घर जैसी पहलों के अनुरूप सोलराइजेशन को भी आगे बढ़ाने की बात कही और कहा कि जहां काम हो चुका है और जहां बाकी है, उसका स्पष्ट आकलन तैयार कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा कार्यकाल के दो वर्ष और समग्र 12 वर्षों की उपलब्धियों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर भी बैठक में चर्चा हुई। श्री चौहान ने कहा कि विभाग अपनी उपलब्धियों को अभी से व्यवस्थित करें और प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ ही गांव स्तर तक जाने वाले कार्यक्रम, प्रेजेंटेशन, रचनात्मक कंटेंट, वीडियो और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जनता के बीच ले जाएं। उन्होंने सोशल मीडिया के प्रभाव को देखते हुए छोटे वीडियो, ग्राफिक्स, लाभार्थी कहानियों और योजनाओं से जीवन में आए बदलावों को केंद्र में रखने का सुझाव दिया। उनका मानना था कि अखबार और टीवी के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दमदार प्रस्तुतीकरण आज ज्यादा असरकारी हो सकता है।

बैठक में विदेश यात्राओं को लेकर भी प्रधानमंत्री श्री मोदी के निर्देशों का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने अधिकारियों से कहा कि अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचा जाए और केवल अत्यंत जरूरी मामलों में ही ऐसे प्रस्ताव आगे आएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय प्राथमिकता देश के भीतर काम की गति, गुणवत्ता और परिणाम को बेहतर बनाना है।

फाइलों के निस्तारण को लेकर श्री चौहान ने कहा कि उनकी प्राथमिकता केवल तेजी नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और परिणाममूलक निर्णय है। उन्होंने कहा कि कोई भी नियम या फाइल कई लोगों की जिंदगी पर असर डाल सकती है, इसलिए उसे समझकर, परखकर और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ निर्णय लेना जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे अनावश्यक देरी न हो और महत्वपूर्ण मामलों पर समय रहते चर्चा हो सके।

बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि कोई भी विभाग पीछे नहीं रहना चाहिए। शिकायत निवारण से लेकर रिफॉर्म, टेक्नोलॉजी, कोर्ट केस, राज्यों से समन्वय, जनसंवाद, 2047 रोडमैप और उपलब्धियों के प्रस्तुतीकरण तक हर मोर्चे पर सक्रिय, समयबद्ध और जवाबदेह कार्यशैली अपनानी होगी, ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सुशासन विजन के अनुरूप सरकार का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर 19 मई को भुवनेश्वर में होगा पूर्वी क्षेत्र का कृषि सम्मेलन


ओडिशा के मुख्य़मंत्री श्री मोहन चरण मांझी भी पूर्वी क्षेत्र का कृषि सम्मेलन में शामिल होंगे।

पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन, कृषि विकास एवं किसान कल्याण के विभिन्न मुद्दों पर होगा व्यापक मंथन

ओडिशा / सत्ता संदेश

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 19 मई, 2026 को भुवनेश्वर, ओडिशा में पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। सम्मेलन में ओडिशा के मुख्य़मंत्री श्री मोहन चरण मांझी सहित विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, किसान प्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), स्टार्टअप, बैंकों एवं अन्य हितधारकों की भागीदारी होगी।

इस सम्मेलन का उद्देश्य कृषि क्षेत्र के समग्र विकास, किसानों की आय वृद्धि तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करना है। सम्मेलन के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा।

सम्मेलन के दौरान किसान रजिस्ट्री की प्रगति, बागवानी क्षेत्र की संभावनाएं, दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मिशन, राष्ट्रीय खाद्य तेल–तिलहन मिशन (NMEO-OS), पीएम-आशा, राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन, फार्म क्रेडिट एवं किसान क्रेडिट कार्ड से संबंधित मुद्दों पर विशेष चर्चा की जाएगी।

इसके अतिरिक्त नकली कीटनाशकों एवं उर्वरकों पर नियंत्रण, उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श होगा।

सम्मेलन में विभिन्न राज्यों द्वारा कृषि क्षेत्र में अपनाई गई सफल पहलों एवं नवाचारों की प्रस्तुति भी दी जाएगी। ओडिशा राज्य कृषि विस्तार कार्यों, पश्चिम बंगाल बीज उत्पादन की श्रेष्ठ पद्धतियों, झारखंड एफपीओ आधारित मूल्य श्रृंखला एवं कृषि स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र तथा बिहार मक्का उत्पादन एवं विपणन संबंधी सफल अनुभवों को साझा करेगा।

यह सम्मेलन किसानों के हित में कृषि क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान, नवाचारों के आदान-प्रदान तथा कृषि क्षेत्र के सतत विकास के लिए भविष्य की रणनीति तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध होगा। सम्मेलन के पश्चात केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री मीडिया को संबोधित करेंगे।