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केंद्र का बड़ा एक्शन: 23 और व्यक्तियों को घोषित किया गया ‘आतंकवादी’

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत एक और बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 23 और व्यक्तियों को ‘आतंकवादी’ घोषित किया है. यह कार्रवाई केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में की गई है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारत और देशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर आतंकी मॉड्यूल को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सरकार की नीति स्पष्ट है और किसी भी आतंकी गतिविधि या उसके समर्थकों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी.

मंत्रालय ने बताया कि ये व्यक्ति भारत-विरोधी गतिविधियों, आतंकी हमलों की साजिश और उन्हें अंजाम देने, आतंकवाद को बढ़ावा देने, हथियारों की तस्करी, सीमा पार से घुसपैठ कराने, प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की सहायता करने, आतंकवाद के लिए धन जुटाने तथा आतंकवादियों की भर्ती जैसे गंभीर मामलों में संलिप्त रहे हैं.

गृह मंत्रालय का मानना है कि इन व्यक्तियों को ‘आतंकवादी’ घोषित किए जाने से उनके वित्तीय नेटवर्क, आवाजाही, भर्ती क्षमता और अन्य आतंकी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी. साथ ही, ये कदम आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को कमजोर करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा.

गृहमंत्रालय ने जिन 23 आतंकियों प्रतिबंधित किया है उनका विस्तृत डिटेल :

  • मसूद इलियास कश्मीरी उर्फ मुफ्ती मसूद इलियास उर्फ मसूद इलियास उर्फ अबु मोहम्मद उर्फ एम. मसूद इलियास की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है और वह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह मौलाना मसूद अज़हर का विश्वासपात्र और कश्मीर में घुसपैठ का मुख्य समन्वयक है. वह सोशल मीडिया के ज़रिए युवाओं को आतंकी गुटों में भर्ती करने और टेरर फंडिंग जुटाने में सक्रिय है. उसने अप्रैल 2022 में जम्मू के संजवान में PDP कार्यालय के पास नाका पार्टी पर हुए हमले को अंजाम दिया था.
  • मोहम्मद मुसादिक उर्फ डॉक्टर उर्फ अब्दुल मनन उर्फ सज्जाद उर्फ हमज़ा उर्फ वाहिद ख़ान की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह लसिंयाकोट सेक्टर का लॉन्चिंग कमांडर है जो सीमा पर सुरंगों के माध्यम से घुसपैठ कराता है. वह ड्रोन के जरिए हथियारों और गोला-बारूद की खेप भारत भेजने में शामिल रहा है. इसके अलावा, वह अयोध्या के आर.जे.बी. परिसर, नागपुर के आरएसएस मुख्यालय और पानीपत की आई.ओ.सी.एल. रिफाइनरी जैसे रणनीतिक स्थानों की टोह लेने में संलिप्त था.
  • मुफ्ती मोहम्मद असग़र खान उर्फ अबू साद उर्फ साद जिमी की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह PoK में JeM का अमीर और सैन्य विंग का प्रमुख है. वह जम्मू के नगरोटा में भारतीय सेना के कैंप पर हुए आतंकवादी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है. वह मुज़फ्फराबाद में आतंकियों को जेहादी और सैन्य प्रशिक्षण देने के लिए कैंप चलाता है.
  • हाफ़िज़ अब्दुल शकूर उर्फ कारी जर्रार की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) / हरकत-उल-मुजाहिद्दीन (HuM) से संबंध रखता है. उसने नगरोटा सेना शिविर पर हमले के लिए सांबा-कठुआ सेक्टर से तीन पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ कराई थी. उसने 1995/96 के दौरान अफगान युद्ध में भाग लिया था और वह आईएसआई (ISI) की मदद से आतंकी गतिविधियों का समन्वय करता है. वह JeM की शासी परिषद (शूरा) का सदस्य है.
  • अब्दुल्ला जिहादी उर्फ शाहनवाज़ उर्फ अल हिजामा की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह मुफ्ती असगर खान का सह-षड्यंत्रकारी है और उत्तरी कश्मीर क्षेत्र में आतंकियों की घुसपैठ की सुविधा प्रदान करता है. उसने भारत सरकार के खिलाफ घृणा और असंतोष फैलाने के प्रयास किए हैं. वह कुपवाड़ा और बारामूला जिलों में स्थित कई लॉन्चिंग कैंपों का प्रबंधन संभालता था.
  • फ़िरदौस अहमद भट की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – पाकिस्तान) है तथा लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखता है. वह लश्कर-ए-तैयबा का लॉन्चिंग कमांडर है जो वर्ष 2018 में वैध दस्तावेजों के सहारे वाघा सीमा से पाकिस्तान चला गया था. वह नियंत्रण रेखा (LoC) के पार विदेशी आतंकवादियों के लिए सुरक्षित मार्ग का प्रबंधन करता है. इसके साथ ही, वह ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को हथियार मुहैया कराने और दक्षिण कश्मीर के युवाओं को भड़काकर आतंक में भर्ती करने का काम करता है.
  • गुलाम फरीद उर्फ गुलशन कुमार उर्फ फरीद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद से संबंध रखता है. उसने वर्ष 2001 से 2005 तक पाकिस्तानी सेना में सेवा की थी. इसके बाद वह सितंबर 2008 में बांग्लादेश के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ. दिसंबर 2008 में उसे जम्मू से गिरफ्तार किया गया था और बाद में जुलाई 2019 में उसे पाकिस्तान वापस निर्वासित कर दिया गया.
  • हारून रशीद गनई उर्फ शुनू की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – पाकिस्तान) है तथा लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखता है. वह मार्च 2018 में वैध दस्तावेजों के साथ पाकिस्तान गया और वहां लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हो गया. वह कश्मीर घाटी के युवाओं को आतंकी रैंकों में शामिल होने के लिए प्रेरित करता है और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ओवर ग्राउंड वर्कर्स को हथियार तथा गोला-बारूद की आपूर्ति करता है.
  • बिलाल अहमद मीर उर्फ अहमद भाई की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – मुज़फ्फराबाद, PoK) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से संबंध रखता है. वह सीमा पार (पाकिस्तान/PoK) से बैठकर स्थानीय कश्मीरी युवाओं को जिहाद के लिए उकसाने और भड़काने की साजिश रचता है. इसके अलावा, वह कश्मीर घाटी में हथियारों, गोला-बारूद और रसद की अवैध आपूर्ति श्रृंखला के प्रबंधन में सीधे तौर पर शामिल है.
  • आबिद कयूम लोन की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – PoK) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह फरवरी 2020 में अटारी चेक पोस्ट के माध्यम से पाकिस्तान गया और वापस नहीं लौटा. वह जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमलों की योजना बनाने और लश्कर के लिए धन जुटाने का काम करता है. वह नियंत्रण रेखा (LoC) पर एक संगठित सिंडिकेट के माध्यम से पाकिस्तान से भारत में बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों (नारकोटिक्स) की तस्करी करता है, जिससे प्राप्त धन का उपयोग आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए किया जाता है.
  • नज़ीर अहमद गुज्जर उर्फ अबू मनाज़िल की राष्ट्रीयता भारत (वर्तमान पता – इस्लामाबाद, पाकिस्तान) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह वर्ष 2006 में नियंत्रण रेखा पार कर PoK चला गया था. उसने डोडा और किश्तवाड़ क्षेत्रों में आतंकी गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए स्थानीय युवाओं को भर्ती किया. वह ड्रोन का उपयोग करके सांबा और आर.एस. पुरा सेक्टर से भारतीय क्षेत्र में हथियारों और गोला-बारूद की खेप भेजने का मुख्य ऑपरेटर रहा है.
  • अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रौफ उर्फ हाफिज अब्दुर रौफ की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) / फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (FIF) से संबंध रखता है. वह 1999 से लश्कर का एक वरिष्ठ नेता है और आतंकी हाफिज सईद की सीधी कमान के अधीन काम करता है. वह ‘फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन’ (FIF) और अल-मदीना वेलफेयर ट्रस्ट जैसे धर्मार्थ संगठनों की आड़ में लश्कर के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन और जनसमर्थन जुटाने का काम करता है. संयुक्त राज्य अमेरिका ने उसे ‘विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी’ (SDGT) घोषित किया है.
  • अशफाक अहमद उर्फ इशफाक अहमद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह वर्ष 2000 में जैश में शामिल हुआ और बहावलपुर में ‘शुआबा हदीस’ और अल-रहमत ट्रस्ट (जैश का चैरिटी विंग) का प्रभारी है. उसे पाक-अधिकृत कश्मीर में जेहादी प्रशिक्षण मिला था. वह जनवरी 2016 के पठानकोट वायुसेना स्टेशन हमले के दौरान इस्तेमाल किए गए पाकिस्तानी मोबाइल नंबरों के ग्राहकों में से एक पाया गया था.
  • हाफिज खालिद वालीद उर्फ हाफिज खालिद नाइक उर्फ खालिद वालिद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. वह लश्कर प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद का दामाद है और वर्ष 2003 से लश्कर की केंद्रीय सलाहकार समिति का सदस्य रहा है. वह जून 2016 में हुए पम्पोर हमले का मुख्य मास्टरमाइंड था, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के आठ जवान शहीद हुए थे. अगस्त 2012 में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा उसे वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित किया गया था.
  • मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की उर्फ मौलाना इमदाद उर्फ इमदाद भाई उर्फ मौलाना इमददुल्लाह की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. वह जैश के कैदियों के विंग (शोबा-ए-असीरन) का अमीर और संगठन के कानूनी मामलों का प्रमुख है. वह मौलाना मसूद अज़हर और उसके डिप्टी मुफ्ती अब्दुल रऊफ असघर का बेहद करीबी सहयोगी है. वह जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमला करने वाले आतंकवादियों के साथ वास्तविक समय में समन्वय स्थापित करने में शामिल था.
  • मौलाना सैफुल्लाह खालिद उर्फ वलियुल उर्फ मोहम्मद सलीम उर्फ वाजिद की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) से संबंध रखता है. वह पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग का महासचिव है और पहले मिल्ली मुस्लिम लीग (MML) का अध्यक्ष रह चुका है. उसने लश्कर और जमात-उद-दावा के कई विंग्स (जैसे प्रचार विभाग, नियंत्रण और सुधार विंग) के प्रमुख के रूप में कार्य किया है. अप्रैल 2018 में अमेरिका ने उसे वैश्विक आतंकवादी (SDGT) सूची में शामिल किया था.
  • मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा उर्फ समामा इल्यास उर्फ वारिस अली की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह वर्तमान में इस्लामाबाद (चट्टा बख्तावर) से लश्कर के ऑपरेशन कमांडर के रूप में काम कर रहा है. वह भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कश्मीर घाटी में सक्रिय अन्य लश्कर कैडरों के साथ वित्तीय और साजो-सामान (लॉजिस्टिक्स) सहायता का समन्वय करता है. इसके खिलाफ श्रीनगर के CI कश्मीर पुलिस स्टेशन में विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA) के अधीन मामला दर्ज है.
  • मौलाना यूसुफ ताईबी उर्फ मोहम्मद यूसुफ की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. यह LeT/JuD का एक केंद्रीय नेता है जो वर्तमान में संगठन के नियंत्रण और सुधार (दावत-ओ-इस्लाह) विंग से जुड़ा हुआ है. वह पूर्व में कराची स्थित LeT/JuD से संबद्ध संस्था ‘जामिया अल-दीरासत अल-इस्लामिया ट्रस्ट’ (JADIAT) का प्रभारी रह चुका है. वर्तमान में वह लाहौर के ‘अल-क़दसिया इस्लामिक सेंटर’ से जुड़ा है और पंजाब के सरगोधा मरकज़ में शुक्रवार को धार्मिक उपदेश (खुतबा) देने का काम करता है.
  • ओवैस फारूज़ उर्फ ओवैस अहमद मीर उर्फ ओवैस फारूज़ मीर की राष्ट्रीयता भारत है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध रखता है. वह अप्रैल 2018 में वैध भारतीय पासपोर्ट पर वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान गया और LeT के आतंकवादी रैंक में शामिल हो. जनवरी 2023 में उसके भाई फरज़ान फिरोज़ को श्रीनगर पुलिस ने 450 ग्राम हेरोइन (कीमत लगभग 9.95 लाख रुपये) और LeT के लेटर पैड के साथ गिरफ्तार किया था. उसके खिलाफ NIA कोर्ट, पुलवामा ने धारा 82 CrPC के अधीन उद्घोषणा आदेश जारी किया है.
  • क़ारी याक़ूब शेख उर्फ क़ारी मोहम्मद याक़ूब शेख उर्फ याक़ूब शेख उर्फ क़ारी शेख मुहम्मद याकूब उर्फ मोहम्मद याकूब की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा पाकिस्तान मरकाजी मुस्लिम लीग (PMML) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. वह JuD का एक केंद्रीय नेता और उसकी केंद्रीय ‘दवाती टीम’ का सदस्य है. उसने 2018 के पाकिस्तानी आम चुनाव में मिल्ली मुस्लिम लीग (MML) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. वह सऊदी अरब में लश्कर और JuD के लिए फंड इकट्ठा करने के मिशनों में प्रमुखता से शामिल रहा है. अगस्त 2012 में अमेरिका ने उसे वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित किया था.
  • राणा इफ्तिखार उर्फ राणा वलीद आतिफ उर्फ राणा इफ्तिखार हैदर उर्फ राणा इफ्तिखार अहमद उर्फ हैदर खान की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / जमात-उद-दावा (JuD) से संबंध रखता है. वह LeT प्रमुख हाफिज़ सईद का अत्यंत करीबी और उसके कश्मीर ऑपरेशन्स के वित्त (Finance) का मुख्य प्रबंधक है. वह मारे गए और भारतीय जेलों में बंद आतंकियों के परिवारों के कल्याण के लिए काम करने वाले विंग ‘शोबा-ए-असीरन’ का प्रभारी है. वर्ष 1993 में जम्मू-कश्मीर के मेंढर सेक्टर में एक मुठभेड़ के दौरान घायल होने पर उसे गिरफ्तार किया गया था और यह 2004 तक भारतीय जेल में बंद रहा.
  • वसीम नूर जाट उर्फ क़ारी वसीम की राष्ट्रीयता पाकिस्तान है तथा जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से संबंध रखता है. यह जैश का एक लॉन्चिंग कमांडर है जो कोटली व्यवस्था संभालता है. वह वर्ष 2021-22 के दौरान ड्रोन के माध्यम से भारतीय क्षेत्र में हथियार और गोला-बारूद गिराने की गतिविधियों में शामिल रहा है. उसे पहले अक्टूबर 2008 में सुरक्षा बलों द्वारा गिरफ्तार किया गया था और वह 2012 से 2015 तक कोट भलवाल सेंट्रल जेल, जम्मू में बंद था, जहाँ से रिहा होने के बाद उसे पाकिस्तान निर्वासित कर दिया गया था.
  • मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ उस्ताद उर्फ मुहांदीस उर्फ ज़ाकिर की राष्ट्रीयता पाकिस्तान (मूल रूप से भारतीय, वर्तमान में रावलपिंडी में सक्रिय) है तथा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) / अल-कायदा / ISIS से संबंध रखता है. वह वर्ष 2012 के बेंगलुरु LeT साजिश मामले और 2013 के नांदेड़ LeT मामले का मुख्य मास्टरमाइंड और हैंडलर है, जिसमें दक्षिणपंथी राजनेताओं और पत्रकारों की लक्षित हत्याओं (Target Killings) की साजिश रची गई थी. वह वर्ष 2013 में आतंकी फरहतुल्लाह गोरी की मदद से पाकिस्तान भाग गया. जांच के अनुसार, वह रामेश्वरम कैफे विस्फोट मामले (2024), मंगलुरु कुकर विस्फोट और अल-हिंद ISIS मॉड्यूल मामले में एक ऑनलाइन हैंडलर के रूप में शामिल रहा है. वह सोशल मीडिया और यूट्यूब /टेलीग्राम चैनलों (जैसे ‘सवत अल हक’) पर राष्ट्र-विरोधी और जिहादी वीडियो के जरिए युवाओं को भर्ती करने का काम करता है.
संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार, कहा- सीमा पार आतंकवाद की कीमत चुकानी होगी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

India ने संयुक्त राष्ट्र में Pakistan को सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा संदेश देते हुए साफ कहा है कि आतंकवाद को प्रायोजित करने के गंभीर “परिणाम” भुगतने पड़ते हैं। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि उसे पड़ोसी देश की ओर से प्रायोजित आतंकवादी हमलों से अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में वह किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगा।

संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधियों ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है, जिससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता प्रभावित हुई है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट और सख्त रुख अपनाने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी देश को आतंकवाद को विदेश नीति के औजार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

भारत की ओर से यह भी कहा गया कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई आत्मरक्षा का वैध अधिकार है और अंतरराष्ट्रीय कानून भी इसकी अनुमति देता है। भारतीय प्रतिनिधियों ने जोर देकर कहा कि जब निर्दोष नागरिकों और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होता है, तब किसी भी संप्रभु राष्ट्र को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के खिलाफ उसकी सख्त नीति को दोहराता है। हाल के वर्षों में भारत लगातार पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है और वैश्विक मंचों पर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता आया है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भारत का यह कड़ा रुख ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। भारत यह संदेश देना चाहता है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति स्पष्ट और निर्णायक है तथा वह अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार है।

‘भारत आतंकवाद के आगे कभी नहीं झुकेगा’: पहलगाम हमले की पहली बरसी पर पीएम मोदी का कड़ा संदेश

नेशनल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की पहली बरसी (22 अप्रैल) पर जान गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी है। इस मौके पर उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख को स्पष्ट करते हुए दुनिया को एक कड़ा संदेश दिया है।

आतंकियों के मंसूबे कभी नहीं होंगे कामयाब: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस हमले में अपनी जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को राष्ट्र कभी नहीं भुला सकता। उन्होंने लिखा, “एक राष्ट्र के तौर पर, हम दुख और संकल्प में एकजुट हैं। भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के आगे कभी नहीं झुकेगा और आतंकवादियों के नापाक मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे”। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं भी व्यक्त कीं।

भारतीय सेना का जवाब: ‘न्याय होकर रहेगा’ इस अवसर पर भारतीय सेना ने भी आतंकवादियों और उनके आकाओं को चेतावनी दी है। सेना ने स्पष्ट किया कि भारत के खिलाफ किसी भी घिनौनी हरकत का जवाब मिलना तय है और न्याय हमेशा मिलकर रहेगा। सेना ने ‘ऑपरेशन महादेव’ का भी जिक्र किया, जिसके तहत पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकियों को ढेर कर दिया गया था।

पहलगाम हमले का काला दिन : गौरतलब है कि पिछले साल (2025) जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में पर्यटकों को निशाना बनाकर यह कायरतापूर्ण हमला किया गया था। इस घटना में कई निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च कर सीमा पार आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था।

राजनाथ सिंह की आतंकियों को चेतावनी: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी खत्म नहीं हुआ है, हम आतंकी सोच को खत्म कर देंगे

नेशनल डेस्क: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को जयपुर के SMS स्टेडियम में आयोजित ‘शौर्य संध्या’ प्रोग्राम के दौरान आतंकियों को कड़ी चेतावनी दी। इंडियन आर्मी डे के मौके पर बोलते हुए उन्होंने ऐलान किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी खत्म नहीं हुआ है और जब तक आतंकी सोच पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती, भारत की शांति की कोशिशें जारी रहेंगी।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ हिम्मत और संयम का प्रतीक है राजनाथ सिंह ने कहा कि इस ऑपरेशन को इतिहास में भारत की हिम्मत, ताकत और संयम के प्रतीक के तौर पर याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आतंकियों के खिलाफ यह कार्रवाई बहुत सोच-समझकर और इंसानी मूल्यों को ध्यान में रखकर की गई थी। उनके मुताबिक, आतंकियों ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि भारतीय सेना इतनी बहादुरी और तेज़ी से जवाब देगी।

आत्मनिर्भर भारत और डिफेंस प्रोडक्शन देश की बढ़ती मिलिट्री ताकत और आत्मनिर्भरता पर ज़ोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा:2014 में घरेलू डिफेंस प्रोडक्शन 46,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ रुपये हो गया है।डिफेंस एक्सपोर्ट 1,000 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 24,000 करोड़ रुपये हो गया है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक भारतीय सेना को दुनिया की सबसे ताकतवर सेना बनाने का लक्ष्य है।

महिलाओं की बढ़ती भूमिका और मिलिट्री विरासत पर प्रोग्राम के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि अब महिलाओं को सेना में परमानेंट कमीशन दिया जा रहा है और उनके लिए नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के दरवाज़े भी खोल दिए गए हैं।

इस इवेंट में मार्शल आर्ट, कलारीपयट्टू, मल्लखंभ और नेपाल आर्मी बैंड ने अपनी कला दिखाई। इस मौके पर राजस्थान के गवर्नर हरिभाऊ बागड़े, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और सीनियर आर्मी ऑफिसर भी मौजूद थे।

पहलगाम हमला: NIA ने पाकिस्तान बेस्ड LeT/TRF समेत 7 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट की फाइल

नेशनल डेस्क: नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने सोमवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए पहलगाम आतंकी हमला मामले में कुल सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की। यह हमला इसी साल 22 अप्रैल को हुआ था। 1597 पेज की चार्जशीट में पाकिस्तान बेस्ड आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसके फ्रंट ऑर्गनाइजेशन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का भी नाम है। NIA ने LeT/TRF को एक लीगल एंटिटी के तौर पर आरोपी बनाया है, क्योंकि एजेंसी के मुताबिक, इसी ऑर्गनाइजेशन ने इस भयानक आतंकी हमले की साजिश रची, इसे अंजाम देने में मदद की और आतंकियों को निर्देश दिए।

जांच के दौरान यह साफ हो गया है कि हमले की साजिश पूरी तरह से पाकिस्तान में रची गई थी।इस हमले में धर्म के आधार पर चुन-चुनकर 25 टूरिस्ट और एक लोकल नागरिक की हत्या कर दी गई थी। चार्जशीट में पाकिस्तान बेस्ड आतंकी हैंडलर साजिद जट्ट का नाम भी शामिल है। इसके अलावा, NIA ने जुलाई 2025 में श्रीनगर के दाचीगाम इलाके में ‘ऑपरेशन महादेव’ के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों पर भी आरोप लगाया है। उनकी पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिबरान और हमजा अफगानी के रूप में हुई है।

दो स्थानीय आरोपियों, परवेज अहमद और बशीर अहमद जोथाड, जिन्हें 22 जून, 2025 को आतंकवादियों को पनाह देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की गई है। दोनों ने पुष्टि की कि हमले में शामिल तीनों हथियारबंद आतंकवादी पाकिस्तानी नागरिक थे और प्रतिबंधित LeT संगठन से जुड़े थे।

आरोपियों पर इंडियन पीनल कोड (IPC) 2023, आर्म्स एक्ट 1959, अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट – UAPA 1967 और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। NIA ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच अभी भी जारी है।

सिडनी के बॉन्डी बीच पर बड़ा आ.तंकी ह.मला, 12 लोगों की मौ.त, PM मोदी बोले- ‘यह इंसानियत पर ह.मला’

इंटरनेशनल डेस्क: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बॉन्डी बीच पर रविवार शाम को हुए एक भयानक आतंकी हमले में 12 लोगों की मौत हो गई। यह घटना तब हुई जब यहां हनुक्का का इवेंट चल रहा था और दो हमलावरों ने भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी।

हादसे की डिटेल्स: चश्मदीदों के मुताबिक, शाम करीब 6:40 बजे दो हमलावर एक गाड़ी से उतरे और बॉन्डी पैवेलियन के पास फायरिंग शुरू कर दी, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई। न्यू साउथ वेल्स पुलिस की तुरंत कार्रवाई में एक हमलावर मौके पर ही मारा गया और दूसरे को गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों ने इसे देश की सबसे जानलेवा घटनाओं में से एक बताया है।

यहूदी समुदाय को निशाना बनाया गया: ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीस ने इस हमले को “बहुत भयानक आतंकी घटना” बताया और कहा कि यह खास तौर पर यहूदी ऑस्ट्रेलियाई लोगों को निशाना बनाकर किया गया एक खुला यहूदी विरोधी काम था। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भी यहूदी समुदाय को निशाना बनाए जाने पर गहरा दुख जताया है। हमले में शामिल एक हमलावर की पहचान 24 साल के नवीद अकरम के तौर पर हुई है।इज़राइली विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कन्फर्म किया है कि यहूदी समुदाय के जाने-माने नेता आर्सेन ओस्ट्रोव्स्की गोलीबारी में घायल हो गए हैं।

PM मोदी ने दुख जताया: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दुखद घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने इसे इंसानियत पर हमला बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह भारत के लोगों की तरफ से पीड़ितों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताते हैं और भारत इस दुख की घड़ी में ऑस्ट्रेलिया के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। कतर ने भी हमले की कड़ी निंदा की है।