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खेत बचाओ अभियान’ बना जन-आंदोलन, 9.42 लाख से अधिक किसानों ने अपनाया संतुलित उर्वरक उपयोग

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी की उर्वरता संरक्षण तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जन-जागरूकता गतिविधियां जारी हैं। बृहस्पतिवार तक अभियान के अंतर्गत 9.42 लाख से अधिक किसानों को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जोड़ा जा चुका है।

अभियान के तहत देशभर में अब तक 17,834 जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें लगभग 6.983 लाख किसानों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त 3,698 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 1,57,438 प्रतिभागियों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा वैज्ञानिक खेती की तकनीकों की जानकारी प्रदान की गई।

किसानों को व्यवहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 8,850 प्रदर्शनों का आयोजन किया गया, जिनमें जैविक एवं वैकल्पिक पोषक स्रोतों के उपयोग तथा समेकित पोषक तत्व प्रबंधन संबंधी तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।

अभियान के अंतर्गत पंचायत स्तर तक जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए 5,237 पंच, सरपंच एवं जिला परिषद सदस्यों को भी जोड़ा गया। वहीं, उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग के संदेश को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए 9,609 इनपुट डीलरों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए।

किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों तथा किसान हित समूहों के माध्यम से भी अभियान को मजबूती मिली है। अब तक 8,383 किसान-सदस्यों ने इन कार्यक्रमों में भाग लेकर वैज्ञानिक पोषक प्रबंधन की जानकारी प्राप्त की है।

व्यापक जनसंपर्क गतिविधियों के अंतर्गत देशभर में 60,477 स्थानों पर बैनर, पोस्टर एवं होर्डिंग्स प्रदर्शित   किए गए। इसके साथ ही 1,027 रेडियो एवं सामुदायिक रेडियो वार्ताओं तथा 240 टीवी एवं डिजिटल मीडिया कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों और आमजन तक अभियान का संदेश पहुंचाया गया।

सोशल मीडिया मंचों के प्रभावी उपयोग से अभियान की पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से अब तक लगभग 3.505 करोड़ लोगों तक अभियान का संदेश पहुंच चुका है।

अभियान का उद्देश्य संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने, मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देने, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने तथा भावी पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और उत्पादक कृषि भूमि का संरक्षण सुनिश्चित करना है।