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स्वदेशी ‘अस्त्र’ मिसाइल का दुनिया में बढ़ा दबदबा, 6 देशों ने दिखाई खरीद में रुचि

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल स्वदेशी ‘अस्त्र’ बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल अब कई देशों की पहली पसंद बन गई है। हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अपनी मारक क्षमता साबित करने के बाद, अस्त्र मिसाइल को खरीदने के लिए दुनिया के 6 देशों ने रुचि दिखाई है। सूत्रों के अनुसार, भारत ने हाल ही में इंडोनेशिया के साथ इस मिसाइल को लेकर एक समझौता किया है। इसके अलावा, आर्मेनिया और सऊदी अरब सहित कुल 6 देश इस मिसाइल को अपनी वायु सेना में शामिल करने के लिए भारत के साथ बातचीत कर रहे हैं।

आर्मेनिया पहले ही भारत से आकाश मिसाइल, पिनाका रॉकेट सिस्टम और स्वाति रडार जैसे हथियार खरीद चुका है। अब वह अपने Su-30SM लड़ाकू विमानों में अस्त्र मिसाइल को इंटीग्रेट करने के लिए बातचीत के अंतिम चरण में है।

​सऊदी अरब अपनी रॉयल एयर फोर्स के F-15 और यूरोफाइटर टाइफून विमानों के साथ अस्त्र मिसाइल को जोड़ने की संभावनाओं पर भारत से चर्चा कर रहा है।

​क्यों है अस्त्र मिसाइल इतनी खास?

अस्त्र मिसाइल कई मामलों में चीन की PL-15 मिसाइल से बेहतर है। इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। किफायती: ये वैश्विक स्तर पर उपलब्ध समान श्रेणी की मिसाइलों के मुकाबले 70 फीसदी तक सस्ती है। मारक क्षमता: ये मिसाइल Mach 4.5 की गति से प्रहार करती है और इसकी मारक दूरी 80 से 110 किलोमीटर तक है। एडवांस तकनीक: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने इसके MK-2 वर्जन का भी सफल परीक्षण कर लिया है, जो 240 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। भविष्य में MK-3 वर्जन पर काम चल रहा है, जिसकी रेंज 300 किलोमीटर से ज्यादा होगी।

​उत्पादन बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र की एंट्री​

अस्त्र मिसाइल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को देखते हुए भारत सरकार ने अब इसके उत्पादन में निजी क्षेत्र को भी शामिल करने का निर्णय लिया है। अब तक इसका उत्पादन केवल ‘भारत डायनेमिक्स लिमिटेड’ द्वारा किया जा रहा था, लेकिन अब उत्पादन क्षमता बढ़ाकर भारत अपनी घरेलू जरूरतों के साथ-साथ विदेशी ऑर्डर्स को भी समय पर पूरा करने की तैयारी कर रहा है।

​भारत की ये सफलता रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जो वैश्विक हथियारों के बाजार में भारत की साख को तेजी से बढ़ा रही है।

रक्षा मंत्री ने DRDO की वित्तीय शक्तियों में बड़ा सुधार किया, रणनीतिक R&D परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन को वित्तीय शक्तियों का प्रत्यायोजन’ जारी किया, जो रणनीतिक अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं के समय पर निष्पादन, दक्षता और जवाबदेही को बढ़ाने के लिए एक बड़ा सुधार है। रक्षा मंत्री ने कहा कि डीएफपी-2026 अनुसंधान और विकास इकोसिस्टम से विकसित होने वाली प्रणालियों, प्लेटफार्मों और प्रौद्योगिकियों के शीघ्र उत्पादन तथा उन्हें सशस्त्र बलों में तेजी से शामिल किया जाने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि यह नया ढांचा उद्योग और शिक्षा जगत के साथ अधिक सशक्त सहयोग को बढ़ावा देगा, जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को और मजबूती मिलेगी।

डीएफपी-2026 का उद्देश्य रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के भीतर विभिन्न स्तरों पर कार्यात्मक सशक्तिकरण को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाना है। संशोधित ढांचा कई महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करता है, जिनमें परीक्षण अभियानों, परीक्षणों और मूल्यांकन गतिविधियों के लिए समर्पित वित्तीय प्रावधान, परियोजना-पूर्व अनुसंधान एवं विकास पहलों को मंजूरी देने का अधिकार तथा बाह्य अनुसंधान परियोजनाओं, रक्षा नवाचार त्वरक-उत्कृष्टता केंद्र व संबंधित अनुसूचियों के तहत प्रौद्योगिकी विकास कोष परियोजनाओं से संबंधित अनुदान सहायता के लिए वित्तीय शक्तियों का स्पष्ट पृथक्करण शामिल है।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि; रक्षा सचिव एवं रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह; रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार; पूर्व सैनिक कल्याण सचिव सुकृति लिखी; रक्षा लेखा महानियंत्रक अनुग्रह नारायण दास; डीआरडीओ के महानिदेशक (नौसेना प्रणाली एवं सामग्री) आरवी हारा प्रसाद; संसाधन एवं प्रबंधन महानिदेशक डॉ. रविंद्र सिंह; वित्त एवं सामग्री प्रबंधन निदेशालय की निदेशक डॉ. मैया दीन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

भारत की सामरिक शक्ति में जबरदस्त इजाफा: DRDO ने किया MIRV तकनीक वाली एडवांस अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण

नेशनल डेस्क: भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए एडवांस अग्नि मिसाइल (Advanced Agni Missile) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। 8 मई 2026 को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आईलैंड से किए गए इस टेस्ट ने विश्व को भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता का एक कड़ा संदेश दिया है।

MIRV तकनीक से लैस: इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेड री-एंट्री व्हीकल) टेक्नोलॉजी है। इसका मतलब यह है कि यह मिसाइल एक ही लॉन्च में कई अलग-अलग पेलोड्स के साथ अलग-अलग दुश्मन ठिकानों को एक साथ निशाना बना सकती है।

सटीक निशाना और ट्रैकिंग: परीक्षण के दौरान मिसाइल के पेलोड्स को हिंद महासागर क्षेत्र में विभिन्न लक्ष्यों की ओर भेजा गया। ग्राउंड और शिप-बेस्ड ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए इसकी पूरी ट्रेजेक्टरी पर नजर रखी गई, जिसमें सभी मिशन उद्देश्य सफलतापूर्वक पूरे हुए।

दुश्मन के लिए अभेद्य: विशेषज्ञों के अनुसार, एक साथ कई टारगेट हिट करने की क्षमता के कारण इस मिसाइल को किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए रोकना नामुमकिन जैसा होगा। यह एडवांस सिस्टम DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योगों के सहयोग से स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।

रक्षा मंत्री की बधाई: सफल परीक्षण के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, भारतीय सेना और रक्षा उद्योग को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि बढ़ते सुरक्षा खतरों के बीच भारत की रक्षा तैयारियों को और अधिक मजबूत करेगी।इस सफल परीक्षण के साथ भारत ने अपनी उस क्षमता को फिर से सिद्ध किया है जिससे वह एक ही मिसाइल से कई लक्ष्यों को नेस्तनाबूद कर सकता है।

DRDO और IAF ने TRA हथियार का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और भारतीय वायु सेना ने गुरुवार को ओडिशा के तट पर सामरिक उन्नत रेंज संवर्धन हथियार का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। टीएआरए एक मॉड्यूलर रेंज एक्सटेंशन किट है, जो भारत की पहली स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली है। टीएआरए अनिर्देशित वारहेड को सटीक निर्देशित हथियारों में बदल देती है।

टीएआरए को हैदराबाद स्थित इमारात अनुसंधान केंद्र (RCI) ने DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं के सहयोग से डिज़ाइन और विकसित किया है। इसका उद्देश्य ज़मीनी लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए कम लागत वाले हथियार की मारक क्षमता और सटीकता को बढ़ाना है। यह अत्याधुनिक कम लागत वाली प्रणालियों का उपयोग करने वाला पहला ग्लाइड हथियार है। इस किट का निर्माण विकास सह उत्पादन साझेदारों (DCPP) और अन्य भारतीय उद्योगों के सहयोग से किया गया है। इसका उत्पादन कार्य शुरू कर दिया गया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रथम उड़ान परीक्षण के लिए DRDO, IAF, DCPP और उद्योग जगत को बधाई दी है और इसे भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस सफल उड़ान परीक्षण से जुड़ी टीमों को बधाई दी।