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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय 22 मई, 2026 को “सुचारू रूप से कार्य करने वाली देखभाल अर्थव्यवस्था का सृजन” विषय पर एक आभासी कार्यक्रम का आयोजन करेगा


कर्नाटक/ सत्ता संदेश

केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार वरिष्ठ नागरिकों के लिए जीवन ऐप और केयरगिवर डैशबोर्ड का शुभारंभ करेंगे

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग 22 मई, 2026 को सुबह 10:00 बजे “सुचारू रूप से कार्य करने वाली देखभाल अर्थव्यवस्था का सृजन” विषय पर एक आभासी कार्यक्रम का आयोजन करेगा।

कार्यक्रम का शुभारंभ संयुक्त सचिव (वरिष्ठ नागरिक) के स्वागत भाषण से होगा जिसके बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव श्री सुधांश पंत का संबोधन होगा।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले भी प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे।

इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण वरिष्ठ नागरिकों के लिए जीवन ऐप और केयरगिवर डैशबोर्ड का शुभारंभ होगा, जिसे केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार द्वारा शुभारंभ किया जाएगा। डॉ. वीरेंद्र कुमार मुख्य भाषण देंगे, जिसमें वे वरिष्ठ नागरिकों के लिए देखभाल व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से मंत्रालय की पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे।

इस कार्यक्रम में कर्नाटक और केरलम राज्यों से स्वास्थ्य सेवा अर्थव्यवस्था में सर्वोत्तम प्रथाओं पर प्रस्तुतियां भी शामिल होंगी। इस कार्यक्रम में गहन चर्चा के लिए चार विषयगत क्षेत्रों की पहचान की गई है। प्रतिभागी निर्दिष्ट वर्चुअल चर्चा कक्षों में शामिल होंगे, जहां मॉडरेटर, पैनलिस्ट और प्रख्यात वक्ता प्रमुख नीतिगत मुद्दों, कार्यान्वयन में कमियों, उभरती पहलों, सर्वोत्तम प्रथाओं और निर्धारित समयसीमा के साथ कार्रवाई योग्य सिफारिशों पर विचार-विमर्श करेंगे।

इस पहल का उद्देश्य भारत की बढ़ती बुजुर्ग आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकी और सामुदायिक भागीदारी का लाभ उठाते हुए देखभाल सेवाओं के लिए एक व्यापक ढांचा विकसित करना है।

सतारा से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र को दी सौगात: महाराष्ट्र के 5 लाख ग्रामीण परिवारों को पक्के घरों का गौरवपूर्ण गृह प्रवेश

महाराष्ट्र /सत्ता संदेश


शिवराज सिंह ने दी महाराष्ट्र को PMAY-G के लिए 8,368.50 करोड़ रुपए की बड़ी केंद्रीय सहायता, ग्रामीण विकास को नई रफ्तार

शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी 35 ग्रामीण सड़क परियोजनाओं को मंजूरी: 122.98 करोड़ रु. से 35 बसावटों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

शिवराज ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘हर गरीब को पक्की छत’ का भरोसा दोहराया, बोले- बचे हुए पात्र परिवारों को भी मिलेगा आवास

1 जुलाई से विकसित भारत जी राम जी योजना की शुरुआत, गांवों के समग्र विकास को मिलेगी नई दिशा- शिवराज सिंह

प्याज किसानों को बड़ी राहत: आज से NAFED 12.35 रु. प्रति किलो की दर से खरीदी शुरू करेगा- शिवराज सिंह

शिवराज सिंह ने गन्ना उत्पादकों की समस्याओं के समाधान का दिया भरोसा: केंद्र और राज्य मिलकर निकालेंगे रास्ता

महा आवास अभियान में रिकॉर्ड समय में आवास पूर्ण कर महाराष्ट्र ने पेश किया सुशासन का मॉडल- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज महाराष्ट्र के सतारा स्थित सैनिक स्कूल ग्राउंड में आयोजित “प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) लाभार्थी सम्मेलन एवं महा आवास अभियान राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह” में 5 लाख पूर्ण ग्रामीण आवासों के गृह प्रवेश का शुभारंभ किया, 5 लाभार्थियों को आवास की चाबियां सौंपीं और महाराष्ट्र के ग्रामीण विकास को नई गति देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णयों की घोषणा की। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्री जयकुमार गोरे, पर्यटन, खननकर्म एवं माजी सैनिक कल्याण मंत्री तथा सतारा के पालकमंत्री श्री शंभूराज देसाई, सार्वजनिक बांधकाम मंत्री श्री शिवेंद्रसिंह भोसले, मदद एवं पुनर्वसन मंत्री श्री मकरंद जाधव (पाटील), ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज्य मंत्री श्री योगेश कदम तथा स्थानीय सांसद श्रीमंत छत्रपति उदयनराजे भोसले उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि देश में कोई भी गरीब कच्चे मकान में न रहे और प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक पक्की छत मिले। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने PMAY-G के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय कार्य करते हुए रिकॉर्ड समय में 5 लाख आवास पूर्ण कर सुशासन, संवेदनशीलता और परिणामोन्मुख प्रशासन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। 

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने महाराष्ट्र के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत वित्त वर्ष 2026-27 हेतु 8,368.50 करोड़ रु. की केंद्रीय अंश सहायता जारी किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह राशि राज्य में ग्रामीण गरीबों के आवास निर्माण अभियान को और तेज करेगी तथा बेघर-मुक्त ग्रामीण महाराष्ट्र के संकल्प को मजबूत आधार देगी। 

श्री चौहान ने यह भी कहा कि जिन पात्र परिवारों का नाम अब तक छूट गया है, उनके लिए भी रास्ता खुला है और सर्वे तथा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यकतानुसार और आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार का लक्ष्य केवल मकान बनाना नहीं, बल्कि बिजली, जल, स्वच्छता और सम्मानपूर्ण जीवन के साथ समग्र ग्रामीण जीवन-स्तर को ऊंचा उठाना है। 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV के अंतर्गत महाराष्ट्र के लिए 122.98 करोड़ रु. की लागत वाली 35 सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति भी मुख्यमंत्री श्री फडणवीस को सौंपी। 95.99 किलोमीटर लंबाई की इन परियोजनाओं से राज्य की 35 ग्रामीण बसावटों को लाभ मिलेगा और शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार तथा अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच अधिक सुगम होगी। 

शिवराज सिंह चौहान ने ‘महा आवास अभियान’ के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों, इकाइयों और अधिकारियों को मुख्यमंत्री श्री फडणवीस के साथ सम्मानित करते हुए कहा कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक दक्षता और जनकल्याण का भाव साथ आता है, तब विकास अभियान जनआंदोलन बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने ग्रामीण आवास के क्षेत्र में जिस गति और प्रतिबद्धता का परिचय दिया है, वह अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरक है। 

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने विकसित भारत जी राम जी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि 1 जुलाई से शुरू होने जा रही यह पहल गांवों के समग्र और सुनियोजित विकास की नई आधारशिला बनेगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से ग्राम पंचायतें अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास की व्यापक रूपरेखा तैयार करेंगी, जिससे गांवों के बुनियादी ढांचे, जनसुविधाओं और आजीविका से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों को गति मिलेगी तथा विकसित भारत के राष्ट्रीय संकल्प को विकसित गांवों के मजबूत आधार पर आगे बढ़ाया जा सकेगा।

किसानों के मुद्दों पर विशेष रूप से बोलते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने प्याज उत्पादक किसानों को बड़ी राहत दी। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ने और निर्यात संबंधी परिस्थितियों के कारण बाजार भाव प्रभावित हुए हैं, इसलिए आज से ही NAFED द्वारा 12 रु. 35 पैसे प्रति किलो की दर से प्याज की खरीदी शुरू की जाएगी, ताकि किसानों को तत्काल सहारा मिल सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केंद्र सरकार किसानों को संकट में अकेला नहीं छोड़ेगी और खरीदी व्यवस्था को प्रभावी, पारदर्शी तथा व्यवस्थित बनाने पर बल दिया। श्री चौहान ने अधिकारियों को सतर्क निगरानी रखने के निर्देश भी दिए, ताकि खरीदी प्रक्रिया सुचारु रहे और वास्तविक किसानों को उसका लाभ मिल सके। 

गन्ना उत्पादकों से जुड़े मुद्दों पर श्री चौहान ने भरोसा दिलाया कि केंद्र और महाराष्ट्र सरकार मिलकर समस्याओं का समाधान निकालेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री फडणवीस के साथ इस विषय पर चर्चा हुई है और संबंधित मंत्रालयों के स्तर पर आवश्यक विमर्श कर व्यावहारिक समाधान की दिशा में पूरी कोशिश की जाएगी, क्योंकि किसान देश की अर्थव्यवस्था का आधार हैं। 

श्री चौहान ने यह भी रेखांकित किया कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा हैं। उन्होंने MSP में हालिया बढ़ोतरी, तिलहन-दलहन खरीदी, कपास मिशन, फार्मर आईडी, किसान-केंद्रित व्यवस्थाओं और ग्रामीण आधारभूत संरचना के विस्तार जैसे उपायों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों और ग्रामीण गरीबों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। 

शिवराज सिंह चौहान ने सतारा की पावन धरती को छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता, स्वाभिमान और सुशासन की प्रेरणास्थली बताते हुए कहा कि शिवाजी महाराज केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के नायक हैं। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने देश को यह संदेश दिया कि सुशासन का अर्थ गरीबों के आँसू पोंछना, माताओं-बहनों का सम्मान सुनिश्चित करना, किसानों को समृद्ध बनाना और समाज के अंतिम व्यक्ति को गले लगाना है; प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इसी जनकल्याणकारी और संवेदनशील शासन-दृष्टि को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सहयोग से महाराष्ट्र को रिकॉर्ड 30 लाख आवासों की स्वीकृति मिली और राज्य ने रिकॉर्ड समय में 5 लाख घर पूर्ण कर आज लाभार्थियों को समर्पित किए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आवासों की गुणवत्ता बढ़ाने, सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली सुविधा उपलब्ध कराने और जमीनविहीन पात्र परिवारों को भी सहायता देकर इस अभियान को व्यापक सामाजिक सुरक्षा के मॉडल में बदला है। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र का लक्ष्य बेघर-मुक्त राज्य का निर्माण है और आने वाले समय में और अधिक परिवारों को आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने प्याज किसानों के लिए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान द्वारा घोषित NAFED खरीदी का स्वागत किया तथा गन्ना एवं चीनी उद्योग से जुड़े मुद्दों पर केंद्र-राज्य समन्वय से समाधान निकालने का भरोसा व्यक्त किया। 

कार्यक्रम में ग्रामीण विकास से जुड़े जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, लाभार्थियों और बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिकों की उपस्थिति रही।

भारत के बच्चों को भोजन के अलावा भी और चीजों की आवश्यकता है
  • डॉ. सरथ गोपालन

कुछ समय पहले मेरे क्लिनिक में पांच साल की एक बच्ची लाई गई। वह अपनी उम्र के बच्चों की तुलना में विकास के कई चरणों में पीछे लग रही थी। उसकी बोलने की गति धीमी थी और वह अपने हमउम्र बच्चों जितनी सक्रिय या जुड़ी हुई नहीं दिख रही थी। उसके विकास के आकलन में वह तीन साल की बच्ची के स्तर पर पाई गई। उसकी मां बहुत चिंतित थीं। बच्ची बीमार नहीं थी। कोई ऐसी बीमारी या निदान नहीं था जो इसकी वजह समझा सके। लेकिन जब हमने कोविड-19 के पिछले दो वर्षों के बारे में बात की, तो तस्वीर साफ होने लगी। लंबे लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद रहे, वह ज्यादातर समय घर पर रही, खेल की जगह स्क्रीन ने ले ली और भोजन पहले की तुलना में अधिक साधारण और सीमित हो गया। उन शांत वर्षों में उसके मस्तिष्क को वह सब नहीं मिल पाया जिसकी उसे बढ़ने के लिए जरूरत थी। वह कोई अपवाद नहीं थी। अलग-अलग क्लिनिकों में बाल रोग विशेषज्ञ और विकास विशेषज्ञ एक ही तरह की स्थिति देख रहे थे-ऐसे बच्चे जो शारीरिक रूप से स्वस्थ थे, लेकिन विकास में पीछे रह गए थे। यह वायरस की वजह से नहीं था, बल्कि उसके बाद पैदा हुई परिस्थितियों की वजह से था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मस्तिष्क का 90% विकास पांच वर्ष की आयु से पहले ही हो जाता है, जिससे प्रारंभिक वर्ष बच्चे के संज्ञानात्मक, भावनात्मक और सामाजिक भविष्य को आकार देने का सबसे बड़ा अवसर बन जाते हैं। इस दौरान बनने वाले तंत्रिका संबंध सीखने, भाषा, स्मृति और जीवन भर के लिए लचीलेपन को मजबूत करते हैं।

इस अवधि में सही पोषण प्राप्त करना सबसे शक्तिशाली निवेशों में से एक है जो हम कर सकते हैं। आयरन, जिंक और सेलेनियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व, जिन्हें अक्सर तंत्रिका पोषक तत्व कहा जाता है, स्वस्थ मस्तिष्क विकास और कार्य के लिए आवश्यक हैं। फिर भी आंकड़े एक चिंताजनक कहानी बयां करते हैं। अकेले आयरन की कमी भारत में पांच वर्ष से कम आयु के लगभग 50% बच्चों को प्रभावित करती है ( एनएफएचएस-5)। पांच वर्ष से कम आयु के 67.1% बच्चों में एनीमिया दर्ज किया गया, जो पिछले सर्वेक्षण से अधिक है। 12-59 महीने की आयु के बच्चों के राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधि विश्लेषण सहित हाल के साक्ष्यों से पता चला है कि 60% से अधिक बच्चों में एनीमिया के साथ या उसके बिना सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी थी। यह अकेले हीमोग्लोबिन की संख्या से कहीं अधिक व्यापक पोषण संबंधी अंतर की ओर इशारा करता है।

डोकोसाहेक्सानोइक एसिड (डीएचए), एक ओमेगा-3 फैटी एसिड, मस्तिष्क की संरचना, स्मृति निर्माण और दृश्य विकास में सहायक होता है। कोलीन, एक अन्य आवश्यक पोषक तत्व, अब मस्तिष्क के विकास के लिए अनिवार्य माना जाता है। जब माताएं गर्भावस्था के दौरान कोलीन का सेवन करती हैं, तो यह स्वस्थ जीन गतिविधि और कोशिका संरचना, तथा मस्तिष्क के प्रमुख क्षेत्रों – जिनमें स्मृति और चिंतन के लिए जिम्मेदार क्षेत्र शामिल हैं – के विकास में सहायक होता है। ये पोषक तत्व बच्चे के आहार में वैकल्पिक नहीं हैं, बल्कि उनकी क्षमता के लिए मूलभूत हैं।

बच्चे के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण पोषण संबंधी हस्तक्षेप जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है। मस्तिष्क का विकास भ्रूण अवस्था में ही शुरू हो जाता है, और मां की पोषण स्थिति सीधे तौर पर उस तंत्रिका आधार को आकार देती है जिससे बच्चा जन्म लेता है। डीएचए गर्भ में तंत्रिका संपर्क को सहारा देता है; गर्भावस्था के दौरान आयरन और फोलिक एसिड का सेवन कम जन्म वजन और विकास में देरी के जोखिम को कम करता है। फिर भी, भारत में केवल 44% गर्भवती महिलाओं ने अनुशंसित 180 या उससे अधिक दिनों तक आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंट का सेवन किया (एनएफएचएस-5), जो एक बहुत बड़ा और लक्षित करने योग्य अवसर प्रस्तुत करता है।

यही कारण है कि किशोरियों में निवेश करना अगली पीढ़ी में निवेश करना है। एक स्वस्थ लड़की स्वस्थ मां बनती है, और एक स्वस्थ मां अपने बच्चे को सर्वोत्तम संभव शुरुआत देती है। भारत में 59% किशोरियों में एनीमिया की समस्या है, इसलिए स्कूलों, सामुदायिक कार्यक्रमों और लक्षित पूरक आहार के माध्यम से इस समूह को प्राथमिकता देना संपूर्ण स्वास्थ्य सेवा में प्रभावी उपायों में से एक है।

हालांकि पोषण महत्वपूर्ण है, मस्तिष्क के विकास के लिए दो समानांतर इनपुट आवश्यक हैं: पर्याप्त पोषण और भावनात्मक-सामाजिक उत्तेजना। महामारी ने इसे सशक्त रूप से प्रदर्शित किया। यूनिसेफ का अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर सात में से एक बच्चे ने कोविड-19 के दौरान विकास या सीखने में महत्वपूर्ण हानि का अनुभव किया, जो मुख्य रूप से बीमारी के कारण नहीं, बल्कि साथियों के साथ मेलजोल, बातचीत और खेल की कमी के कारण हुआ। स्क्रीन ने मानवीय संपर्क का स्थान ले लिया, और भाषा, शारीरिक और सामाजिक विकास प्रभावित हुआ।

संवेदनशील देखभाल, मौखिक संवाद, स्पर्श संबंधी जुड़ाव और एक उत्तेजक वातावरण तंत्रिका तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं और स्वस्थ मस्तिष्क संरचना के लिए आवश्यक हैं। प्रारंभिक बचपन के कार्यक्रम जो पोषण संबंधी सहायता और विकासात्मक उत्तेजना दोनों को एकीकृत करते हैं, ऐसे परिणाम देते हैं जो इनमें से कोई भी अकेले प्राप्त नहीं कर सकता। भारत की कार्यक्रम संरचना इस पर अमल करने के लिए अच्छी स्थिति में है। पोषण अभियान और पीएम पोषण जैसे कार्यक्रम पहले से ही देश भर में लाखों माताओं और छोटे बच्चों तक पहुंच रहे हैं। पोषण पखवाड़ा जैसी पहल पोषण के इर्द-गिर्द निरंतर, सामुदायिक स्तर पर लामबंदी की शक्ति को दर्शाती है। वितरण संरचना, जिसमें आंगनवाड़ी नेटवर्क, अग्रिम पंक्ति के कर्मचारी और सामुदायिक स्तर पर पहुँच शामिल है, स्थापित है। अब अवसर यह है कि इस ढांचे से मिलने वाले लाभों को और अधिक बढ़ाया जाए।

उचित प्रशिक्षण और सहयोग से, वे शारीरिक विकास पर नज़र रखने से लेकर माता-पिता को प्रारंभिक प्रोत्साहन, संवेदनशील देखभाल और बाल विकास प्रथाओं पर मार्गदर्शन देने तक अपनी भूमिका का विस्तार कर सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ के नर्चरिंग केयर फ्रेमवर्क को एकीकृत करना, जो पोषण, स्वास्थ्य, सुरक्षा, प्रारंभिक शिक्षा और देखभाल को एक सुसंगत इकाई में जोड़ता है, इस विकास के लिए एक स्पष्ट और वैज्ञानिक रोडमैप प्रदान करता है। यह लक्ष्य को केवल बच्चों को भोजन कराने से आगे बढ़ाकर उन्हें वास्तव में फलने-फूलने में मदद करने की ओर ले जाता है।

शुरुआती बचपन में पोषण किसी भी देश के लिए सबसे अधिक लाभ देने वाला निवेश है। जब बच्चों को उनके विकसित होते मस्तिष्क के लिए जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व, सही देखभाल का वातावरण और सही मानसिक व सामाजिक प्रोत्साहन मिलता है तो उसका लाभ पूरी जिंदगी मिलता है। ऐसे बच्चे बेहतर विद्यार्थी बनते हैं, आगे चलकर अधिक सक्षम और उत्पादक नागरिक बनते हैं, और समाज भी अधिक मजबूत और सक्षम बनता है। भारत के पास विकसित भारत का सपना है। उसके पास व्यवस्थाएं हैं। उसके पास विज्ञान है। अब जरूरत इस बात की है कि शुरुआती बचपन के पोषण को केवल कल्याणकारी योजना का हिस्सा न माना जाए, बल्कि उसे उस बुनियाद के रूप में देखा जाए, जिस पर बाकी सब कुछ टिका है।

(लेखक, नई दिल्ली के मधुकर रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में बाल चिकित्सा गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के वरिष्ठ सलाहकार और न्यूट्रिशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (एनएसआई) के अध्यक्ष हैं।)

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय 24 से 26 अप्रैल, 2026 तक चंडीगढ़ में “अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब- विकसित भारत के संकल्प के साथ” विषय-वस्‍तु पर राष्ट्रीय चिंतन शिविर का आयोजन करेगा

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

केंद्र और राज्य सरकारें तीन दिवसीय शिविर में सामाजिक न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श करेंगी

केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार राज्य मंत्रियों की उपस्थिति में चिंतन शिविर की अध्यक्षता करेंगे

शिविर में समावेश पोर्टल, एनएमबीए 2.0, सेतु और स्‍माइल ऐप्स सहित कई प्रमुख ऐप्स लॉन्च किए जाएंगे
चंडीगढ़, 23 अप्रैल, 2026: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर 24 से 26 अप्रैल, 2026 तक चंडीगढ़ में “अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब– विकसित भारत @2047” विषय-वस्‍तु पर तीन दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन करेगा। यह विषय-वस्‍तु अमृत काल और विकसित भारत के विजन के अनुरूप समावेशी सशक्तिकरण के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस शिविर का उद्देश्य सामाजिक न्याय संबंधी पहलों के क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना, प्रमुख योजनाओं के अंतिम चरण कार्यान्वयन में सुधार करना और हाशिए पर पड़े समुदायों के समावेशी और सतत सशक्तिकरण के लिए एक व्यावहारिक रूप-रेखा विकसित करना है।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार करेंगे। इस अवसर पर राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा और श्री रामदास अठावले भी उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों तथा अधिकारियों के साथ-साथ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी भी भाग लेंगे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं की प्रदर्शनी से होगा। इस अवसर पर, समावेश पोर्टल, एनएमबीए 2.0 ऐप, सेतु ऐप और स्‍माइल ऐप सहित कई महत्वपूर्ण डिजिटल और नीतिगत पहलों का शुभारंभ किया जाएगा। मनोभ्रंश (डिमेंशिया) देखभाल गृहों के लिए न्यूनतम मानकों और भिक्षुक गृहों के लिए आदर्श दिशानिर्देशों पर एक पुस्तक का भी विमोचन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संस्थान और विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

तीन दिनों तक चलने वाले चिंतन शिविर में संरचित विषयगत चर्चाएं और समूह सत्र आयोजित किए जाएंगे। समूह सत्रों में प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। 25 अप्रैल को छात्रवृत्ति वितरण और शिक्षा तक पहुंच, नशा मुक्त भारत इकोसिस्‍टम, स्वच्छता कार्य में गरिमा और मिशन ज़ीरो के तहत स्वच्छता संबंधी मौतों, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और विकलांग बच्चों के लिए प्रारंभिक युक्ति जैसे विषयों पर चर्चा होगी। 26 अप्रैल को क्षेत्र आधारित सामाजिक-आर्थिक विकास, हाशिए पर पड़े समुदायों का समावेशन और पहचान, ऋण तक पहुंच और वित्तीय सशक्तिकरण, दिव्‍यांगजनों के लिए सुलभता और प्रमाणन जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे।

प्रत्येक समूह कार्यान्वयन की वर्तमान स्थिति का आकलन करेगा, कमियों की पहचान करेगा और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों तथा नवोन्‍मेषी समाधानों को साझा करेगा। समूह निर्धारित समयसीमाओं के साथ अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक अनुशंसाएं प्रस्तुत करेंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गई है ताकि चर्चाएं संरचित, साक्ष्य-आधारित और परिणाम-उन्मुख रहें।

चिंतन शिविर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सफल मॉडलों के आदान-प्रदान और समन्वय को सुदृढ़ करने के लिए एक सहयोगी मंच के रूप में कार्य करेगा। इससे प्राप्त परिणामों से सामाजिक न्याय कार्यक्रमों में संयोजन, डिजिटल नवोन्‍मेषण और बेहतर शासन पर केंद्रित व्यावहारिक सुधार एजेंडा में योगदान मिलने की उम्मीद है।

इन विचार-विमर्शों के परिणामस्वरूप बेहतर समन्वय, सामुदायिक भागीदारी और प्रौद्योगिकी-आधारित कार्यान्वयन के माध्यम से भारत के सामाजिक न्याय ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार होगा। समापन दिवस पर एक प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी जिसमें प्रमुख परिणामों और भविष्‍य की रणनीति को साझा किया जाएगा।

ट्रैक से संसद तक:

क्यों भारत के भविष्य का नेतृत्व महिलाओं को करना चाहिए

डॉ. पी टी ऊषा

मैंने अपना पूरा जीवन भागदौड़ में ही बिताया है, पहले केरल की कच्ची सड़कों पर, फिर वैश्विक मंचों पर और अब सार्वजनिक जीवन के गलियारों में। हर कदम पर मुझे कई मुश्किलो का सामना करना पड़ा है, कुछ प्रत्यक्ष और कुछ अनकही बाधाओं का भी, जिन्होंने महिलाओं को यह बताया कि उनका यहाँ कोई स्थान नहीं है। मैंने यह भी देखा है कि जब ये बाधाएं टूटने लगती हैं तो क्या होता है। अवसर परिणामों को बदल देता है और इससे भी ज़रुरी बात यह है कि यह लोगों की सोच को बदल देता है।

यही कारण है कि संविधान (एक सौ अट्ठाईसवाँ संशोधन) विधेयक, 2023—नारी शक्ति वंदन अधिनियम—केवल एक विधायी उपलब्धि नहीं है। यह एक लंबे समय से प्रतीक्षित संरचनात्मक सुधार है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना न तो कोई रियायत है और न ही दिखावा। यह अधिक प्रतिनिधि और प्रभावी लोकतंत्र की दिशा में एक ज़रुरी कदम है।

खेलों ने हमें क्या सिखाया है

जब मैंने 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में हिस्सा लिया और कुछ ही सेकंड के अंतर से पदक से चूक गई, तब बहुत कम भारतीय लड़कियां थीं, जो वैश्विक मंच पर खुद को देख पाती थीं। लेकिन पिछले कई दशकों में यह स्थिति बदली है। प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे और पहचान तक पहुंच में सुधार के साथ, भारतीय महिलाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता हासिल करने लगीं है।

पी.वी. सिंधु, मीराबाई चानू, विनेश फोगाट और मैरी कॉम जैसी एथलीटें अकेले नहीं उभरीं। वे एक ऐसी व्यवस्था का परिणाम हैं, जिसने धीरे-धीरे ही सही, पहुंच को व्यापक बनाना शुरू किया। प्रतिनिधित्व आकांक्षाएं पैदा करता है और आकांक्षा, जब समर्थित होती है, तो उपलब्धि दिलाती है।

सबक साफ है। जब महिलाओं को स्थान दिया जाता है, तो वे व्यवस्था में केवल भाग नहीं लेतीं, वे शानदार प्रदर्शन भी कर दिखाती हैं।

हर भारतीय के लिए बेहतर शासन

भारत में जमीनी स्तर पर महिलाओं के नेतृत्व का प्रभाव पहले ही देखा जा चुका है। 73वें संवैधानिक संशोधन द्वारा पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किए जाने के बाद से, विभिन्न राज्यों में किए गए कई अध्ययनों से पता चला है कि महिला प्रतिनिधियों के नेतृत्व वाले क्षेत्रों में पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच में सुधार हुआ है।

ये महज़ “महिलाओं के मुद्दे” नहीं हैं, बल्कि ये राष्ट्रीय प्राथमिकताएं हैं। महिला नेता अक्सर सुरक्षित सार्वजनिक स्थान, सुचारू रूप से चलने वाले स्कूल, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी शासन से जुड़ी उन रोजमर्रा की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करती हैं, जो परिवारों और समुदायों को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं।

इस प्रतिनिधित्व को राज्य विधानसभाओं और संसद तक विस्तारित करना केवल निष्पक्षता की बात नहीं है। यह शासन की गुणवत्ता में सुधार से जुड़ा है।

प्रतिनिधित्व का आर्थिक महत्व

भारत में महिला श्रम बल की भागीदारी विश्व में सबसे कम है, जो लगभग 25 प्रतिशत के आसपास है। यह केवल एक सामाजिक चिंता नहीं, बल्कि एक आर्थिक समस्या भी है।

विधानसभाओं में महिलाओं का अधिक प्रतिनिधित्व उन नीतियों को प्राथमिकता देने में मदद कर सकता है, जो इस अप्रयुक्त क्षमता को उजागर करती हैं, जैसे किफायती बाल देखभाल, सुरक्षित कार्यस्थल, ऋण तक पहुंच और महिला उद्यमियों के लिए समर्थन। मैकिन्से ग्लोबल इंस्टीट्यूट का अनुमान है कि लैंगिक समानता को बढ़ावा देने से भारत की जीडीपी में 700 बिलियन डॉलर तक की वृद्धि हो सकती है।

अधिक समावेशी संसद न केवल एक लोकतांत्रिक आवश्यकता है, बल्कि एक आर्थिक अनिवार्यता भी है।

सुरक्षा, गरिमा और भागीदारी

भारत भर में लाखों महिलाओं के लिए, सार्वजनिक जीवन में भागीदारी अभी भी सुरक्षा, भेदभाव और असमान पहुंच की चिंताओं से प्रभावित है। चाहे खेल हो, शिक्षा हो या कार्यस्थल, ये समस्याएं हमारे समाज में गहराई से जड़ें जमा चुकी हैं।

संसद में अधिक महिलाओं का मतलब है कि कानून और नीतियां महज़ समझ से नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की हकीकत से आकार लेती हैं। इसका मतलब है प्रवर्तन के लिए मजबूत वकालत, सहायता प्रणालियों के लिए संसाधनों का बेहतर आवंटन और एक न्याय ढांचा, जो उत्तरदायी और सुलभ हो।

शासन तभी अधिक प्रभावी होता है, जब वह उन लोगों के अनुभवों को दर्शाता है, जिनकी वह सेवा करता है।

प्रतिनिधित्व और आकांक्षाओं की शक्ति

भारत में सत्ता की छवि लंबे समय से मुख्य रूप से पुरुष प्रधान रही है। उस छवि को बदलना केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह एक बदलावकारी प्रक्रिया है।

जब मणिपुर, झारखंड, राजस्थान या भारत के किसी भी हिस्से की कोई युवती अपने जैसी दिखने वाली, अपने जैसी बोलने वाली और समान पृष्ठभूमि से आने वाली किसी महिला को देश के कानूनों को आकार देते हुए देखती है, तो यह सिर्फ प्रेरणा ही नहीं देता, बल्कि यह संभावनाओं के प्रति उसके विश्वास को भी बदल देती है।

आकांक्षा ही सामाजिक परिवर्तन का आधार है। विधानसभाओं में आरक्षण से स्तर कम नहीं होता, बल्कि अवसरों का दायरा बढ़ता है।

भारत की महिलाओं ने खेल जगत, सशस्त्र बलों, विमानन और व्यावसायिक पदों पर पहले ही कई बाधाओं को पार कर लिया है। विधायी प्रतिनिधित्व इस यात्रा का स्वाभाविक अगला कदम है।

अब है कार्यवाही का वक्त

राज्यसभा में सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त करने के बाद, मैंने प्रत्यक्ष रूप से देखा है कि कैसे विविध दृष्टिकोण बहस और निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत बनाते हैं। फिर भी, आज लोकसभा में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल लगभग 15 प्रतिशत है, जो वैश्विक औसत से काफी कम है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हो चुका है। अब बस इसे पूरी तरह, निष्ठापूर्वक और बिना देर किए लागू करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति की ज़रुरत है।

भारत अपनी आधी आबादी को सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकायों में कम प्रतिनिधित्व देते हुए, विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षा नहीं रख सकता। आधी प्रतिभा को दरकिनार करके विकसित भारत का निर्माण नहीं किया जा सकता, न ही आधी आवाज़ पर सच्चा लोकतंत्र फल-फूल सकता है।

आगे का रास्ता साफ है। सवाल यह है कि क्या हम उस पर चलने का दृढ़ संकल्प रखते हैं।

(लेखक राज्यसभा सांसद, भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष और राष्ट्रमंडल खेल संघ, भारत की अध्यक्ष हैं।)

IAS हिमांशु जैन ने शिमलापुरी अवलोकन गृह में ‘नवी रोशनी’ कार्यक्रम का शुभारंभ कर आशा जगाई

लुधियाना/सत्ता सदेंश

समग्र पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, लुधियाना के उपायुक्त हिमांशु जैन ने शिमलापुरी स्थित किशोर अवलोकन गृह में “नवी रोशनी” कार्यक्रम के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया। इस चरण में सपना मित्तल के नेतृत्व में आर्ट लाइफ एंड बियॉन्ड सोसाइटी के सहयोग से प्रमाण पत्र पाठ्यक्रमों का एक संरचित पाठ्यक्रम शुरू किया गया है।

नवी रोशनी कार्यक्रम का द्वितीय चरण किशोरों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर विशेष प्रमाण पत्र पाठ्यक्रमों के माध्यम से ध्यान केंद्रित करता है, जिनमें शामिल हैं:

1) योग: शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए।

2) भांगड़ा और गायन: सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाने और रचनात्मक भावनात्मक अभिव्यक्ति प्रदान करने के लिए।

3) कला और शिल्प: धैर्य, सटीकता और कलात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने के लिए।

इन पाठ्यक्रमों को नियमित करने का उद्देश्य किशोरों के दैनिक जीवन में अनुशासन और व्यवस्था की भावना पैदा करना है। निरंतर और लक्ष्य-उन्मुख गतिविधियों में संलग्न होकर, निवासी आलस्य से दूर होकर सक्रिय भागीदारी वाली जीवनशैली की ओर अग्रसर होते हैं। ये कार्यक्रम केवल मनोरंजन मात्र नहीं हैं; ये सफल सामाजिक पुनर्एकीकरण के लिए आवश्यक गुणों जैसे एकाग्रता, टीम वर्क और आत्मसम्मान के निर्माण हेतु चिकित्सीय उपकरण के रूप में कार्य करते हैं। मुख्य प्रशासन अधिकारी, अंबर बंदोपाध्याय और प्रशासन फेलो, नवप्रीत सिद्धू भी इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का हिस्सा हैं। यह पहल शिमलापुरी स्थित अवलोकन गृह में प्रत्येक व्यक्ति की सुधार यात्रा को प्राथमिकता देने वाले सहायक वातावरण प्रदान करने के लिए लुधियाना प्रशासन की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

सरकार ने बालिकाओं के शैक्षिक, सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अपनाया बहुआयामी दृष्टिकोण

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, बाल लिंग अनुपात (सीएसआर) और बालिकाओं व महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों के समाधान में मदद करता है। यह योजना विभिन्न हितधारकों को सूचित, प्रभावित, प्रेरित और सशक्त बनाकर बालिकाओं के प्रति मानसिकता और व्यवहार में बदलाव लाने का प्रयास करती है। 15वें वित्त आयोग की अवधि (यानी 2021-22 से 2025-26) में बीबीबीपी योजना का पुनर्गठन किया गया है और अब यह ‘मिशन शक्ति’ की ‘संभल’ उप-योजना का एक घटक है। बीबीबीपी का विस्तार देश के सभी जिलों में कर दिया गया है, जिसमें बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेपों के माध्यम से उन गतिविधियों पर अधिक खर्च करने को प्रोत्साहित किया जाता है जिनका ज़मीनी स्तर पर प्रभाव पड़ता है।

बीबीबीपी के तहत इन पहलों ने एक रिकॉल वैल्यू स्थापित की है और विभिन्न हितधारकों—जिनमें सरकारी एजेंसियां, मीडिया, नागरिक समाज और आम जनता शामिल है—को लामबंद करके इसे एक नीतिगत पहल से एक राष्ट्रीय आंदोलन में बदल दिया गया है। इस आंदोलन का उद्देश्य न केवल जन्म के समय लिंग अनुपात और लिंग आधारित भेदभाव से संबंधित तत्काल चिंताओं को दूर करना है, बल्कि बालिकाओं को महत्व देने और उनके अधिकारों व अवसरों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक सांस्कृतिक बदलाव लाना भी है।

मिशन शक्ति अम्ब्रेला योजना और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ से संबंधित इसके घटकों सहित मंत्रालय की योजनाओं का दो बार—2020 में और पुनः 2025 में—नीति आयोग के माध्यम से थर्ड पार्टी मूल्यांकन किया गया है। इन अध्ययनों ने योजना की प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और निरंतरता को संतोषजनक पाया है।

सरकार देश भर में बालिकाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। इस उद्देश्य के लिए, सरकार ने बालिकाओं के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के समाधान हेतु एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है।

समग्र शिक्षा प्री-स्कूल से कक्षा XII तक की स्कूली शिक्षा के लिए एक एकीकृत योजना है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के कार्यान्वयन में सहायता प्रदान करती है। यह योजना प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा, बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता, एक समग्र और समावेशी पाठ्यक्रम, लर्निंग आउटकम में सुधार, सामाजिक और लैंगिक अंतराल को पाटने, और शिक्षा के सभी स्तरों पर समानता और समावेश सुनिश्चित करने पर जोर देती है।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) योजना कक्षा XII तक की लड़कियों के लिए आवासीय स्कूली सुविधाएँ प्रदान करके स्कूली शिक्षा में लैंगिक और सामाजिक श्रेणी के अंतराल को पाटने का प्रयास करती है। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अल्पसंख्यक समुदायों और बीपीएल  परिवारों की 10-18 वर्ष की आयु वर्ग की लड़कियों को शामिल किया जाता है।

विज्ञान ज्योति कार्यक्रम लैंगिक संतुलन में सुधार के लिए लड़कियों को स्टेम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) क्षेत्रों में शिक्षा और करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह कक्षा IX से कक्षा XII तक की मेधावी छात्राओं को लक्षित करता है और इसमें छात्र-अभिभावक परामर्श, करियर परामर्श, अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता कक्षाएं, टिंकरिंग गतिविधियां, विशेष व्याख्यान, वैज्ञानिक संस्थानों, प्रयोगशालाओं, उद्योगों के भ्रमण और विज्ञान शिविर व कार्यशालाएं शामिल हैं।

बालिकाओं के लिए आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, सरकार ने व्यापक कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए स्किल इंडिया मिशन शुरू किया है। सरकार ने देश भर में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत ‘प्रधानमंत्री कौशल केंद्र’ भी स्थापित किए हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के अंतर्गत महिलाओं को कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

सरकार ने देश में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं हेतु कई पहल/उपाय किए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), स्टैंड-अप इंडिया योजना, स्टार्टअप इंडिया, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई), ग्रामीण स्वरोजगार और प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई), प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव आदि शामिल हैं।

दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत महिला स्वयं सहायता समूह रोजगार और स्वरोजगार के लिए ग्रामीण परिदृश्य को बदल रहे हैं। इसी प्रकार, शहरी क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) संचालित है।

सरकार महिलाओं की रोजगार क्षमता में सुधार के लिए महिला-केंद्रित योजनाएं भी लागू कर रही है, जैसे कि नमो ड्रोन दीदी, लखपति दीदी, वूमेन इन साइंस एंड इंजीनियरिंग- किरण (डब्लूआईएसई-किरण), सर्ब-पावर (खोजपूर्ण अनुसंधान में महिलाओं के लिए अवसरों को बढ़ावा देना) आदि।

यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर द्वारा लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी गई।