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बच्चों को भीख मांगने से रोकने के लिए विशेष अभियान, 6 बच्चों को बचाया गया

लुधियाना / सत्ता संदेश

जिला प्रशासन लुधियाना द्वारा बच्चों को भीख मांगने जैसी सामाजिक बुराई से बचाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन के निर्देशों के तहत प्रोजेक्ट जीवनजोत के अंतर्गत बुधवार को शहर के विभिन्न इलाकों में जागरूकता एवं बचाव अभियान चलाया गया।

इस अभियान की अगुवाई जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ) रश्मि ने की। उनके नेतृत्व में जिला बाल संरक्षण इकाई की टीम, शिक्षा विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से बस स्टैंड, भारत नगर चौक, दुर्गा माता मंदिर, पवेलियन चौक, भलाव चौक, पुरानी कचहरी सहित शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर विशेष जांच अभियान चलाया।

अभियान के दौरान लोगों को बच्चों से भीख न दिलवाने और बाल अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। टीम ने भीख मांगते हुए पाए गए 6 बच्चों को सुरक्षित बचाकर उन्हें संरक्षण प्रदान किया।

बचाव के बाद सभी बच्चों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी), लुधियाना के समक्ष पेश किया गया, जहां उनके पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा संबंधी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

जिला बाल संरक्षण अधिकारी रश्मि ने बताया कि बच्चों को भीख मांगने के लिए मजबूर करना उनके अधिकारों का हनन है और प्रशासन इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए गंभीरता से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे विशेष अभियान और सरप्राइज चेकिंग भविष्य में भी लगातार जारी रहेंगी ताकि किसी भी बच्चे को भीख मांगने के लिए मजबूर न होना पड़े।

उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि यदि कहीं कोई बच्चा भीख मांगता दिखाई दे तो इसकी सूचना संबंधित विभाग या चाइल्ड हेल्पलाइन को दें, ताकि बच्चे को सुरक्षित वातावरण और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराया जा सके।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बच्चों के संरक्षण, शिक्षा और पुनर्वास को प्राथमिकता देते हुए उन्हें भीख मांगने जैसी परिस्थितियों से बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

मामा के घर आए बच्चों के लिए काल बना तरबूज, 15 साल के किशोर की मौत, 3 अन्य गंभीर

नेशनल डेस्क: : छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के घुरकोट गांव से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां तरबूज खाने के बाद एक 15 साल के लड़के की जान चली गई और तीन अन्य बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं।

पूरी घटना: मामा के घर आए थे बच्चेमृतक की पहचान 15 वर्षीय अखिलेश धीवर के रूप में हुई है, जो अपने परिजनों के साथ मामा के घर घूमने आया था। रविवार शाम को घर में रखा तरबूज खाने के बाद अखिलेश और तीन अन्य बच्चों—श्री धीवर (4), पिंटू धीवर (12) और हितेश धीवर (13)—की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें उल्टी, दस्त और सांस लेने में तकलीफ होने लगी।सोमवार को जब हालत ज्यादा बिगड़ी, तो उन्हें एम्बुलेंस से जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने अखिलेश को मृत घोषित कर दिया। अन्य तीनों बच्चों का इलाज फिलहाल जिला अस्पताल में जारी है।

डॉक्टरों की चेतावनी: कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती?जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एस कुजूर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह मामला फूड पॉइजनिंग का लग रहा है। उन्होंने एक बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करते हुए कहा कि बच्चों ने सुबह का कटा हुआ तरबूज कई घंटों बाद शाम को खाया था।डॉक्टर के अनुसार, फल को काटकर लंबे समय तक रखने से उसमें संक्रमण (infection) होने की आशंका बढ़ जाती है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।

जांच जारी:प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और विसरा के नमूने सुरक्षित रखे गए हैं। साथ ही, घर में रखे दूसरे तरबूज को प्रयोगशाला जांच के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग को भेजा गया है ताकि मौत के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

प्रेमी के साथ बाधा बन रहे थे बच्चे, कलयुगी मां ने जहर देकर ली जान; बहन के साथ गिरफ्तार

बठिंडा: पंजाब के बठिंडा जिले के गाँव रामपुरा फूल में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक मां ने अपने ही दो मासूम बच्चों की चूहे मारने वाली दवा देकर हत्या कर दी। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि महिला के किसी अन्य व्यक्ति के साथ प्रेम संबंध थे और बच्चे उसमें बाधा बन रहे थे।15 दिनों के भीतर दो मौतें वारदात का सिलसिला करीब 15 दिन पहले शुरू हुआ जब 12 वर्षीय बेटी सुखप्रीत कौर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

उस समय परिवार ने इसे सामान्य मौत समझकर अंतिम संस्कार कर दिया था। लेकिन शुक्रवार रात जब 8 साल का बेटा फतेहवीर सिंह अचानक बेहोश होकर गिरा और अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया, तो पिता बुध सिंह और ग्रामीणों को मां जस्सी कौर पर शक हुआ।पुलिस जांच और गिरफ्तारी ग्रामीणों और बच्चों के पिता की शिकायत पर पुलिस ने जब जस्सी कौर को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

जस्सी ने बताया कि उसने अपनी बहन मोटो के साथ मिलकर बच्चों के खाने में चूहे मारने वाली दवाई मिला दी थी। बठिंडा एसपी (डी) जसमीत सिंह ने पुष्टि की है कि आरोपी मां और उसकी बहन को गिरफ्तार कर लिया गया है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आगामी जांच शुरू कर दी है और बच्चों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

गाजियाबाद सुसाइड केस के बाद सोनू सूद की चेतावनी: ‘बच्चों से मोबाइल फोन वापस ले लो’

मनोरंजन डेस्क: गाजियाबाद में तीन मासूम बच्चियों द्वारा खुदकुशी किए जाने की दुखद घटना के बाद, बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने माता-पिता के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है,। उन्होंने अपील की है कि बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए उनसे *मोबाइल फोन वापस ले लेने चाहिए,।

ऑनलाइन गेमिंग का ‘अदृश्य दबाव

खबरों के अनुसार, गाजियाबाद की ये तीनों बच्चियां ऑनलाइन गेमिंग की बुरी तरह आदी (एडिक्ट) थीं, जिसे उनकी मौत का मुख्य कारण माना जा रहा है,। इस घटना पर दुख जताते हुए सोनू सूद ने कहा, “गाजियाबाद में तीन मासूमों की जान चली गई। यह मौत किसी हिंसा या गरीबी के कारण नहीं, बल्कि ऑनलाइन गेमिंग और **डिजिटल नशे** के अदृश्य दबाव के कारण हुई है”।

सोनू सूद का संदेश: ‘बचपन इंतजार नहीं कर सकता’**सोनू सूद ने सोशल मीडिया पर माता-पिता को सलाह दी कि वे अपने बच्चों को मोबाइल से दूर रखें ताकि वे एक स्वस्थ जीवन जी सकें। उन्होंने एक मर्मस्पर्शी बात साझा करते हुए कहा, **”सोशल मीडिया इंतजार कर सकता है, लेकिन बचपन नहीं”**।

मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

सूत्रों के अनुसार, आज के दौर में हर कोई मोबाइल का आदी हो चुका है, जिससे लोग **मानसिक रोगों** का शिकार हो रहे हैं। मोबाइल के अत्यधिक उपयोग के कारण बच्चे अपनी पारंपरिक खेलों और शारीरिक गतिविधियों से दूर हो रहे हैं, जिससे उन्हें कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।