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ट्रंप का बड़ा यू-टर्न: ईरानी तेल से हट सकता है अमेरिकी बैन, वैश्विक स्तर पर कम होंगी कच्चे तेल की कीमतें

बिजनेस डेस्क: दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अमेरिका से एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को संकेत दिया कि अमेरिका जल्द ही समुद्र में टैंकरों में फंसे लगभग 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटा सकता है।

आम जनता को मिलेगी बड़ी राहत: अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले दो हफ्तों से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। प्रतिबंध हटने से ग्लोबल सप्लाई में इजाफा होगा, जिससे कीमतों को कम करने में मदद मिलेगी। स्कॉट बेसेंट के अनुसार, यह तेल अगले 10 दिनों से लेकर दो हफ्तों तक की सप्लाई सुनिश्चित कर सकता है।

कीमतें बढ़ने की मुख्य वजह: कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल का मुख्य कारण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) का बंद होना है। इस समुद्री रास्ते के बंद होने से प्रतिदिन 10 से 14 मिलियन बैरल तेल की कमी पैदा हो गई है। इसी कमी को पूरा करने के लिए अमेरिका फिजिकल सप्लाई बढ़ाने के कदम उठा रहा है।

रूस के बाद अब ईरान पर नरम रुख: इससे पहले अमेरिकी ट्रेजरी ने इसी तरह का कदम उठाते हुए टैंकरों में फंसे प्रतिबंधित रूसी तेल को बेचने की अनुमति दी थी, जिससे ग्लोबल सप्लाई में 130 मिलियन बैरल का इजाफा हुआ था।

इसके अतिरिक्त, अमेरिका अपने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (Strategic Petroleum Reserve) से भी भंडार जारी करने की योजना बना रहा है, जो पिछले हफ्ते G7 देशों द्वारा जारी किए गए 400 मिलियन बैरल के अलावा होगा।

जापान के साथ महत्वपूर्ण बैठक: इस मुद्दे पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गुरुवार को व्हाइट हाउस में जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची से भी मुलाकात करेंगे। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ से जहाजों के सुरक्षित गुजरने को सुनिश्चित करना और जापान के रणनीतिक भंडार से अतिरिक्त तेल जारी करने पर चर्चा करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को बड़ा झटका: IEEPA के जरिए टैरिफ लगाने पर रोक, जवाब में राष्ट्रपति ने तत्काल लागू किया 10% ग्लोबल टैरिफ

इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा कानूनी झटका लगा है, जिसमें कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर दूसरे देशों पर टैरिफ लगाने के उनके फैसले पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 से यह फैसला सुनाया कि ट्रंप प्रशासन ने बड़े पैमाने पर इंपोर्ट टैरिफ लगाने के लिए 1977 के इस एक्ट का इस्तेमाल करके अपने कानूनी अधिकार का उल्लंघन किया है। कोर्ट के अनुसार, IEEPA अथॉरिटीज का इस्तेमाल रेवेन्यू जुटाने के लिए नहीं किया जा सकता।

ट्रंप की जवाबी कार्रवाई और 10% ग्लोबल टैरिफ: सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को ट्रंप ने “बहुत बुरा फैसला” करार दिया है। हालांकि, इस कानूनी शिकस्त के तुरंत बाद ट्रंप ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 10% ग्लोबल टैरिफ को “तत्काल प्रभाव” से लागू करने की घोषणा कर दी है। इसके लिए उन्होंने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं, जो उन्हें 150 दिनों के लिए अस्थायी इंपोर्ट सरचार्ज लगाने की अनुमति देता है।

वित्त मंत्री ने दिया वैकल्पिक रास्तों का भरोसा : अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि भले ही IEEPA के इस्तेमाल पर रोक लगी है, लेकिन टैरिफ रेवेन्यू में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन अब सेक्शन 232 और सेक्शन 301 जैसी वैकल्पिक कानूनी शक्तियों (Alternative Legal Authorities) का इस्तेमाल करेगा। प्रशासन का अनुमान है कि इन अन्य तरीकों को अपनाने से 2026 में टैरिफ से होने वाली कमाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

क्या है IEEPA कानून? इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) 1977 में बनाया गया एक अमेरिकी संघीय कानून है। यह राष्ट्रपति को ‘नेशनल इमरजेंसी’ के दौरान अंतरराष्ट्रीय आर्थिक लेनदेन को रेगुलेट करने, एसेट्स फ्रीज करने और अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले देशों के साथ व्यापार पर रोक लगाने के व्यापक अधिकार देता है। अब तक अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने इसका इस्तेमाल 77 बार नेशनल इमरजेंसी घोषित करने के लिए किया है।