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भूमि शासन एवं वाटरशेड प्रबंधन में सहयोग को लेकर भूमि संसाधन विभाग और एडीबी के बीच चर्चा


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भूमि संसाधन विभाग के सचिव ने एडीबी के साथ बैठक में भूमि शासन सुधारों और डिजिटल पहलों पर प्रकाश डाला

नई दिल्ली, 21 मई: ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) के सचिव श्री नरेन्द्र भूषण ने आज एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की कंट्री डायरेक्टर सुश्री मियो ओका के नेतृत्व में एडीबी प्रतिनिधिमंडल के साथ एक परिचयात्मक बैठक की। बैठक के दौरान, श्री नरेन्द्र भूषण ने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के सरकार के विजन के अनुरूप भूमि प्रशासन, भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण और जलसंभर विकास के क्षेत्रों में भूमि संसाधन विभाग द्वारा की जा रही प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला।

सचिव ने कहा कि भूमि संसाधन विभाग को देश में भूमि अभिलेख प्रबंधन और भूमि प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि कुशल भूमि प्रशासन और भूमि संसाधनों का अधिकतम उपयोग आर्थिक विकास को गति देने, भूमि संपत्तियों के मूल्य को उजागर करने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

भूमि प्रशासन में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका पर बल देते हुए, श्री भूषण ने प्रतिनिधिमंडल को सूचित किया कि डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) के तहत महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की गई है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रिकॉर्ड्स ऑफ राइट्स का डिजिटलीकरण लगभग पूर्ण हो चुका है, जबकि देश भर में लिखित भूमि अभिलेखों को जमाबंदी नक्शों से जोड़ने में महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त की गई हैं।

उन्होंने बताया कि विभाग कार्यक्रम के अगले चरण, डीआईएलआरएमपी 3.0 लागू करने की प्रक्रिया में है, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी उपाय, भूमि अभिलेखों के गतिशील अद्यतन और भूमि संबंधी डेटाबेस के बेहतर एकीकरण के माध्यम से भूमि शासन प्रणालियों को और सुदृढ़ करना है। सचिव ने देश भर में भूमि पार्सलों को विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (यूएलपीआईएन), जिसे “भू-आधार” भी कहा जाता है, के आवंटन में हुई प्रगति को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 66 प्रतिशत कृषि भूमि पार्सलों के लिए यूएलपीआईएन जारी किए जा चुके हैं।

श्री भूषण ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) की अगली परत के रूप में एक व्यापक “लैंड स्टैक” विकसित करने के विभाग के विजन को साझा किया, जिसमें भूमि अभिलेख, पंजीकरण, म्यूटेशन, भूमि उपयोग और अन्य संबंधित सेवाओं को अंतरसंचालनीय डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से एकीकृत करके बेहतर शासन और सेवा वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने शहरी क्षेत्रों में आधुनिक भूमि शासन पद्धतियों के विस्तार के लिए विभाग की चल रही पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें मानचित्रण और प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान शामिल हैं।

जलसंभर विकास के विषय पर, सचिव ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ भूमि एवं जल प्रबंधन पद्धतियों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने देश भर में जलसंभर विकास पहलों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए नवीन वित्तपोषण मॉडल, प्रौद्योगिकी उपाय और संयोजन-आधारित दृष्टिकोणों की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में भूमि प्रशासन, जलसंभर विकास, डिजिटल शासन और सतत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में वैश्विक सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर भी विचार-विमर्श किया गया। शासन के परिणामों में सुधार के लिए भू-स्थानिक प्रणालियों, डिजिटल प्लेटफार्मों, रिमोट सेंसिंग और डेटा-आधारित योजना सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर चर्चा हुई।

सुश्री मियो ओका ने सचिव को भारत में विभिन्न क्षेत्रों में एशियाई विकास बैंक द्वारा समर्थित विभिन्न पहलों और परियोजनाओं तथा राज्य सरकारों के साथ जारी सहयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल कृषि, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, जलसंभर प्रबंधन और संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में एडीबी के कार्यों पर प्रकाश डाला और आपसी हित के क्षेत्रों में भूमि संसाधन विभाग के साथ सहयोग करने में एडीबी की गहरी रुचि व्यक्त की।


दोनों पक्षों ने देश में सतत भूमि और जलसंभर प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए तकनीकी सहायता, नीतिगत समर्थन, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण सहित भविष्य में सहयोग के अवसरों पर चर्चा की।

इस बैठक में अपर सचिव श्री आर आनंद; संयुक्त सचिव श्री पी. नरहरि; संयुक्त सचिव श्री नितिन खाडे; आर्थिक सलाहकार श्री पी.के. अब्दुल करीम; और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वीडन के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता की

दिल्ली /सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वीडन के गोथेनबर्ग में प्रधानमंत्री महामहिम श्री उल्फ क्रिस्टरसन के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस महारानी विक्टोरिया ने भी इस बैठक में भाग लिया और महामहिम राजा कार्ल सोलहवें गुस्ताफ और रानी सिल्विया की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने महामहिम राजा के 80वें जन्मदिन पर अपनी हार्दिक शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

दोनों नेताओं ने भारत-स्वीडन संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की और व्यापार एवं निवेश, नवाचार, हरित परिवर्तन, उभरती प्रौद्योगिकियों, रक्षा और सुरक्षा, डिजिटलीकरण, एसएमई, अंतरिक्ष, अनुसंधान, शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी मेलजोल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में बढ़ती गति को स्वीकार किया। उन्होंने इन संबंधों को मजबूत करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं और नवाचार, स्थिरता तथा आर-एंड-डी संबंधों से प्रेरित हैं। उन्होंने इस बढ़ते सहयोग को दिशा देने के लिए नियमित रूप से उच्च-स्तरीय राजनीतिक संपर्क और संस्थागत संवाद बनाए रखने के महत्व पर ज़ोर दिया।

भारत-स्वीडन संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर, दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की। यह रणनीतिक साझेदारी चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी: स्थिरता और सुरक्षा के लिए रणनीतिक संवाद; अगली पीढ़ी की आर्थिक साझेदारी; उभरती प्रौद्योगिकियां और विश्वसनीय संपर्क; और साथ मिलकर भविष्य का निर्माण– लोग, ग्रह, स्वास्थ्य और लचीलापन। इस रणनीतिक साझेदारी को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए, दोनों नेताओं ने भारत-स्वीडन संयुक्त कार्य योजना 2026-2030 को अपनाया, जो राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी, सुरक्षा, जलवायु और लोगों के आपसी जुड़ाव के क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करती है।

दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि हाल ही में संपन्न हुए भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते ने आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों में एक नया अध्याय शुरू किया है, और वे व्यापार, निवेश तथा तकनीकी संपर्कों को और मजबूत बनाने के लिए इसके शीघ्र कार्यान्वयन हेतु प्रयास जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नवाचार, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों, उन्नत विनिर्माण, सतत गतिशीलता और डिजिटल परिवर्तन सहित रणनीतिक क्षेत्रों में भारत के साथ स्वीडन के निरंतर सहभागिता की सराहना की। प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन ने डिजिटल परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) के क्षेत्र में भारत द्वारा की जा रही प्रगति की सराहना की। उन्होंने स्वीडन की अर्थव्यवस्था और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में भारतीय समुदाय के सकारात्मक योगदान का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की विकास गाथा में स्वीडन की और अधिक भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।

दोनों नेताओं ने आपसी हित के प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ(यूएनओ) और अन्य बहुपक्षीय संगठनों में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में स्वीडन के मजबूत समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। दोनों नेताओं ने शांति, स्थिरता, सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया।

भारत–जापान स्वास्थ्य सहयोग को नई मजबूती: भारत मंडपम में संयुक्त समिति की तीसरी बैठक

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

भारत और जापान के बीच स्वास्थ्य संबंधी संयुक्त समिति की तीसरी बैठक मंगलवार को भारत मंडपम में आयोजित की गई। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और जापान की स्वास्थ्य नीति प्रभारी मंत्री किमी ओनोदा ने मिलकर बैठक की अध्यक्षता की।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और जापान के बीच साझेदारी आपसी सम्मान, विश्वास और भविष्य के लिए साझा दृष्टिकोण पर आधारित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत-जापान के बीच सहयोग ज्ञापन के अंतर्गत आयोजित संयुक्त समिति की बैठक नियमित संवाद और गहन आपसी समझ के माध्यम से इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई है और उन्होंने यह विश्वास भी व्यक्त किया कि इस दौरान रचनात्मक और दूरदर्शितापूर्ण विचार-विमर्श होंगे।

नड्डा ने इस दौरान भारत और जापान के बीच एक सदी से अधिक समय से चले आ रहे बहुआयामी संबंधों का उल्लेख किया जो विभिन्न क्षेत्रों में सहभागिता पर आधारित हैं और उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास” के मार्गदर्शक सिद्धांत के अंतर्गत समावेशी विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संयुक्त समिति की बैठक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच है।

ओनोदा ने बैठक को संबोधित करते हुए नवाचार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने में जापान की निरंतर भागीदारी पर बल दिया और इसके साथ ही द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

बैठक के दौरान प्राथमिकता वाले प्रमुख क्षेत्रो पर चर्चा की गई, जो इनमें शामिल है।

गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की रोकथाम, निदान, उपचार और पुनर्वास:

बैठक में भारतीय प्रतिनिधियों ने बीमारियों से बढ़ती कष्टकारी स्थिति के बारे में जानकारी दी जिसमें गैर-संचारी रोगों के बढ़ते प्रसार पर बल दिया गया और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप उनकी जांच-पड़ताल, निरंतर देखभाल और सतत स्वास्थ्य संवर्धन पर आधारित व्यापक प्रतिक्रिया की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। वहीं, जापानी प्रतिनिधियों ने इस मामले में सहयोग के लिए पहले से चल रही पहलों के बारे में बताया जिनमें कैंसर की पहचान के लिए जांच, शीघ्र निदान और तकनीकी सहयोग तथा संस्थागत क्षमता विकास के माध्यम से उपचार प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर केंद्रित परियोजनाएं शामिल हैं।

आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना और उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच:

भारतीय प्रतिनिधियों ने दवा और चिकित्सा उपकरण संबंधी अपने क्षेत्रों की व्यापकता और उनकी क्षमता का उल्लेख किया जिसमें उनके घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने, निर्भरता कम करने और लक्षित नीतिगत उपायों के माध्यम से सस्ती दर पर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। जापानी प्रतिनिधियों ने चिकित्सा उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण और सुव्यवस्थित साझेदारी के माध्यम से प्रौद्योगिकी के उपयोग को सुगम बनाने के उद्देश्य से समन्वित सार्वजनिक-निजी सहयोग के अपने मॉडल के बारे में विस्तार से बताया।

डिजिटल स्वास्थ्य:

भारतीय प्रतिनिधियों ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के अपने दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की जिससे अंतरसंचालनीय, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य के अनुरूप परिवेश विकसित हो जिसको अपनाने और एकीकरण में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। जापानी प्रतिनिधियों ने उभरते डिजिटल प्लेटफार्मों का लाभ उठाते हुए प्रणालियों को आपस में जोड़ने, एआई-सक्षम चिकित्सा प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान में सहयोग के माध्यम से डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाने के संबंध में अपने अनुभव साझा किए।

मानव संसाधन विकास और आदान-प्रदान:

भारतीय प्रतिनिधियों ने कुशल और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य सेवा कार्यबल में सहायक अपनी नीति और नियामक प्रणाली के साथ-साथ आदान-प्रदान संबंधी कार्यक्रमों, संयुक्त प्रशिक्षण और दक्षताओं की पारस्परिक मान्यता के लिए सुव्यवस्थित मार्गों और तौर-तरीकों का उल्लेख किया। जापानी प्रतिनिधियों ने चिकित्सा क्षेत्र में संयुक्त रूप से अनुसंधान, कर्मियों के आदान-प्रदान और सहयोग के आधार पर वैज्ञानिक गतिविधियों में सहायता के लिए काम कर रहे तंत्र के बारे में विस्तृत विवरण दिया।

श्री नड्डा ने अपने समापन भाषण में कहा कि विचार-विमर्श ने भारत-जापान स्वास्थ्य साझेदारी को नई गति प्रदान की है। उन्होंने प्राथमिकता वाले प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि चर्चाओं ने सामर्थ्यवान और समावेशी स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए स्पष्ट दिशा निर्धारित की है।

उन्होंने यह भी कहा कि बैठक के परिणाम दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत आधार प्रदान करेंगे। उन्होंने आपसी विचारों को दोनों देशों के नागरिकों के लिए सार्थक परिणामों में बदलने के उद्देश्य से जापान के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

सुश्री ओनोदा ने आपसी सहयोग को और आगे बढ़ाने के प्रति जापान की प्रतिबद्धता पर बल देते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के जापान के संकल्प को दोहराया।