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अल नीनो की चुनौती पर शिवराज सिंह चौहान हर हफ्ते कर रहे है मीटिंग

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

अल नीनो के संभावित प्रभाव से उपजी मानसून की अनिश्चितता के बीच पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में केंद्र सरकार पूरी तैयारी के साथ हालात को संभालने में जुटी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि जून में 33 प्रतिशत कम बारिश के बाद जुलाई में स्थिति में सुधार आया है और अब यह कमी घटकर 24 प्रतिशत रह गई है। हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई है, जिससे कम वर्षा वाले जिलों की संख्या 262 से घटकर 178 रह गई है।

केंद्रीय मंत्री ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद दिल्ली में मीडिया से चर्चा में कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। उम्मीद है कि जुलाई में बारिश और रफ्तार पकड़ेगी, जिससे खरीफ बुवाई में तेजी आएगी।

शिवराज सिंह ने बताया कि फिलहाल 350.85 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 91.95 लाख हेक्टेयर कम है। मानसून में देरी का असर सोयाबीन और कपास पर पड़ा है, लेकिन किसानों को मक्का, बाजरा और मूंग जैसी कम अवधि और कम पानी वाली फसलों की बुवाई की सलाह दी गई है।

शिवराज सिंह ने कहा कि सरकार ने इस चुनौती के लिए पहले ही अप्रैल से तैयारी शुरू कर दी थी। ICAR के सहयोग से प्रभावित होने की संभावना वाले जिलों के लिए कंटिंजेंसी प्लान तैयार कर राज्यों के साथ साझा किए गए हैं। जून महीने में चलाए गए “खेत बचाओ अभियान” के तहत 1.24 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और 80 लाख से ज्यादा किसानों तक सीधे पहुंच बनाई गई।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए करीब 1.75 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार तैयार रखा गया है, ताकि किसी भी स्थिति में बुवाई प्रभावित न हो। साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड अभियान को तेज करते हुए 30 जून तक प्राप्त 1.14 लाख आवेदनों में से 94 हजार से अधिक को स्वीकृति दी जा चुकी है।

मंत्री ने बताया कि अल-नीनो मॉनिटरिंग सेल, क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप, राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम और नियुक्त अधिकारी लगातार मानसून, बुवाई, फसल और बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश में विकसित भारत जी-राम जी योजना का किया शुभारंभ

आंध्र प्रदेश / सत्ता संदेश

आंध्र प्रदेश के तिरुपति ज़िले के मुक्कावरिपल्ली गाँव से “विकसित भारत जी राम जी योजना” का आज राष्ट्रीय शुभारंभ हुआ, जहाँ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी और श्री कमलेश पासवान तथा सांसद विधायक और हजारों की संख्या में जनसमुदाय उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर के गरीब मजदूरों, किसानों और गाँवों के लिए रोज़गार की गारंटी, ग्राम विकास के लिए बड़े वित्तीय आवंटन और पारदर्शी व्यवस्था के साथ एक नया मॉडल पेश किया गया।

भगवान वेंकटेश्वर के चरणों में नमन से शुरू वीबी- जी राम जी

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपना संबोधन “नमः वेंकटेश्वराय” और “गोविंदा, गोविंदा” के जयकारों के साथ शुरू करते हुए कहा कि इस पावन धरती से विकसित भारत जी राम जी योजना लागू होना गरीबों और मजदूरों के लिए भगवान की कृपा की वर्षा जैसा है। उन्होंने प्रार्थना की कि देश में कोई भी गरीब मजदूर बिना काम के न रहे, हर हाथ को काम और हर पेट को रोटी मिले। इसी संकल्प को ज़मीन पर उतारने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को हृदय से धन्यवाद दिया।

मनरेगा से आगे वीबी- जी राम जी– 100 से 125 दिन रोजगार की छलांग

श्री शिवराज सिंह चौहान ने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के समय शुरू हुई मनरेगा में सिर्फ 100 दिन रोज़गार की गारंटी दी जाती थी। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री श्री मोदी की नई रणनीति के तहत विकसित भारत- जी राम जी योजना में मजदूरों के लिए पूरे 125 दिन तक काम की पक्की गारंटी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दिनों की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि सोच में बदलाव है, अब लक्ष्य यह है कि कोई हाथ खाली न रहे। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि नई योजना के लागू होते ही पहले दिन ही देशभर में लाखों मजदूरों को काम मिला है और मनरेगा को बेहतर स्वरूप में बदलकर वीबी- जी राम जी के रूप में लागू किया जा रहा है।

पहले ही साल में 1.51 लाख करोड़ रु. का प्रावधान, 5 साल में 7.5 लाख करोड़ रु. का लक्ष्य

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने योजना के वित्तीय पक्ष पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि विकसित भारत- जी राम जी योजना के पहले ही वर्ष में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 95,000 करोड़ रु. से अधिक रहेगी और राज्यों की 40% हिस्सेदारी जोड़कर यह वार्षिक व्यय 1.51 लाख करोड़ रु. के आसपास पहुँचता है। श्री शिवराज सिंह ने बताया कि अगले 5 साल में इस योजना के तहत कुल 7.5 लाख करोड़ रु. खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है। यह धन देश की 2.86 लाख पंचायतों तक पहुँचकर हर पंचायत को प्रति वर्ष औसतन 2 करोड़ रु. से ज़्यादा की राशि देगा जिससे गाँवों में रोजगार भी बढ़ेगा और स्थायी परिसंपत्तियाँ भी बनेंगी।

रोज़गार की कानूनी गारंटी– 15 दिन में काम, वरना बेरोज़गारी भत्ता

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत- जी राम जी योजना में मजदूरों के अधिकारों को कानूनी ताकत दी गई है। किसी भी मजदूर द्वारा काम माँगने पर 15 दिन के भीतर उसे रोज़गार देना अनिवार्य होगा और यदि निर्धारित समय में काम नहीं दिया गया तो संबंधित मजदूर को बेरोज़गारी भत्ता देना पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब मजदूर के पसीने से कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता। मजदूरी देने में देरी होने की पुरानी समस्या को खत्म करने के लिए योजना में यह प्रावधान किया गया है कि देर से मज़दूरी देने पर मजदूर को ब्याज समेत विलंबित मजदूरी दी जाएगी। यह सब इसलिए कि मजदूरों के पसीने की पूरी कीमत मिले और गरीबों की सेवा को ही भगवान की पूजा मानने वाला “मोदी मंत्र” ज़मीन पर दिखाई दे।

सिस्टम मज़बूत करने के लिए 9% प्रशासनिक व्यय, मैदानी कर्मचारियों को पूरा वेतन

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बताया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक व्यय को 6% से बढ़ाकर 9% कर दिया गया है। इसके तहत लगभग 13,000 करोड़ रु. से ज़्यादा की राशि ग्राम रोजगार सहायकों, मैट्स और अन्य जमीनी कर्मचारियों के वेतन और सुविधा के लिए रखी गई है। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी गाँवों में मजदूरों और विकास के कामों को संभालेंगे, उन्हें समय पर पूरा वेतन मिलना ज़रूरी है ताकि वे भटकने से बचें और सिस्टम मज़बूत रहे। इस तरह यह योजना मजदूरों के साथ साथ प्रशासनिक ढाँचे को भी सुदृढ़ करने का काम करेगी।

गाँव का फैसला गाँव में– ग्राम सभा तय करेगी काम

श्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि किस गाँव में कौन सा काम होगा, यह दिल्ली या अमरावती से तय नहीं किया जाएगा। काम तय करने का अधिकार ग्राम पंचायत और ग्राम सभा के पास रहेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गाँव की जनता खुद तय करेगी कि उन्हें आंगनवाड़ी बनानी है, स्कूल, अस्पताल या सड़क चाहिए, खेत सड़क बनानी है, एफपीओ के लिए संरचना करनी है, तालाब, जैक डैम, बाँध या प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिए कोई सुरक्षा दीवार बनानी है– यह सब निर्णय गाँव में बैठकर ग्राम सभा करेगी। गाँव का फैसला गाँव में होगा, यही जी राम जी योजना की आत्मा है।

पिछड़ी पंचायतों को अतिरिक्त मदद, आंध्र प्रदेश के लिए 7,707 करोड़ रु. की विशेष राशि

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने राज्यों से कहा कि वे अपनी पंचायतों का ग्रेडेशन कर A, B, C श्रेणियों में बाँट सकते हैं और जो पंचायत विकास में पीछे हैं, उन्हें अधिक राशि देकर तेज़ी से काम करवा सकते हैं। इससे इंटीरियर और पिछड़े इलाकों के गाँवों में विकास की रफ्तार बढ़ेगी। आंध्र प्रदेश के संदर्भ में उन्होंने बताया कि केवल 9 महीने की अवधि के लिए विकसित भारत- जी राम जी योजना के तहत केंद्र से 7,707 करोड़ रु. की विशेष राशि दी जा रही है। राज्य सरकार के हिस्से के साथ यह पैकेज आंध्र प्रदेश को देश में शीर्ष राज्यों में लाएगा और गाँवों में रोज़गार एवं विकास के लिए बड़ी ताकत देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री श्री चंद्रबाबू नायडू और उप मुख्यमंत्री श्री पवन कल्याण के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश ग्राम विकास का एक मॉडल बनकर उभरेगा।

प्रधानमंत्री आवास और ग्रामीण सड़कों पर बड़ी सौगात– स्वीकृति पत्र मंच से सौंपे

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश के गरीब परिवारों और गाँवों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना IV के तहत बड़ी सौगातों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 74,212 नए पक्के मकान स्वीकृत किए गए हैं ताकि कोई भी पात्र गरीब परिवार कच्चे मकान में न रहे और सभी को सम्मानजनक आवास मिल सके। इसी के साथ उन्होंने उन गाँवों की चिंता भी दूर की जो अभी तक पक्की सड़कों से नहीं जुड़े हैं। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि ऐसे इलाकों के लिए 146 नई सड़कें और 19 पुलों के निर्माण के लिए कुल 422 करोड़ रु. से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। श्री शिवराज सिंह चौहान ने मंच से ही इन स्वीकृतियों के पत्र मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री को सौंपते हुए आश्वासन दिया कि गाँव बढ़ेगा तो भारत बदलेगा और केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश के संपूर्ण ग्रामीण विकास में कोई कमी नहीं छोड़ेगी।

तोता परी आम के किसानों के लिए राहत– मार्केट इंटरवेंशन से उचित दाम की गारंटी

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने आंध्र प्रदेश के तोता परी आम उत्पादक किसानों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि तोता परी आम के दाम गिरने से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है, इसलिए केंद्र सरकार ने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के तहत बड़ी मात्रा में तोता परी आम खरीदने का फैसला किया है ताकि किसानों को उचित कीमत मिल सके और उनका मेहनताना सुरक्षित रहे। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि आईसीआर की वैज्ञानिक टीम राज्य सरकार की टीम के साथ मिलकर ड्राफ्टिंग और वैरायटी बदलने की तकनीक पर काम करेगी ताकि आम बागानों की उत्पादकता बढ़े और बाजार में बेहतर वैरायटी उपलब्ध हो सके।

पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

श्री शिवराज सिंह चौहान ने लोगों से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने की अपील करते हुए कहा कि वे खुद रोज़ पेड़ लगाते हैं और जनता से आग्रह किया कि कम से कम अपने जन्मदिन पर एक पेड़ ज़रूर लगाएँ। उन्होंने मंच से लोगों विकसित गाँव, विकसित आंध्र प्रदेश और विकसित भारत के लिए सामूहिक संकल्प दिलाया।

विकसित भारत- जी राम जी योजना गाँवों और ग्रामीण जीवन स्तर में परिवर्तनकारी

मुख्यमंत्री श्री चंद्रबाबू नायडू ने अपने संबोधन में विकसित भारत- जी राम जी योजना को गाँवों और ग्रामीण जीवन स्तर में परिवर्तन लाने वाला कार्यक्रम बताया। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा ने रॉयलसीमा से शुरुआत कर देश को एक मॉडल दिया था, अब उसी आधार पर लेकिन अधिक सशक्त स्वरूप में VB G RAM G योजना शुरू होकर स्वर्ण आंध्र प्रदेश और विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि 125 दिन की रोज़गार गारंटी के साथ खेत सड़क, तालाब, ड्रेनेज आदि सुविधाएँ और भूमिहीन मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा जैसे कामों से ग्रामीण जीवन स्तर में सीधा सुधार होगा।

डिजिटल मॉनिटरिंग से फर्जीवाड़े पर लगाम, ग्राम सभाओं से विकास की योजना

श्री चंद्रबाबू नायडू ने बताया कि इस नई योजना में डिजिटल मास्टर रोल, आधार आधारित भुगतान, रियल टाइम मॉनिटरिंग और जियो टैगिंग जैसी तकनीकों से कामों की निगरानी होगी। इससे काम न करके भी कागज़ पर हिसाब जैसी पुरानी प्रवृत्तियों पर रोक लगेगी और पैसा सही जगह खर्च होगा। उन्होंने राज्य में हाल के वर्षों में श्री पवन कल्याण के नेतृत्व में हुई ग्राम सभाओं, CC रोडों, गोशालाओं, पानी के टैंकों, पम्प पोंड्स और आदिवासी क्षेत्रों में बने सड़कों का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन्हीं अनुभवों के आधार पर अब वीबी- जी राम जी योजना को सबसे बेहतर तरीके से लागू करके आंध्र प्रदेश को देश का मॉडल राज्य बनाया जाएगा।

हॉर्टिकल्चर हब के लिए बड़ा निवेश

मुख्यमंत्री ने रायलसीमा क्षेत्र को हॉर्टिकल्चर हब बनाने के अपने विज़न को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि Purvodaya कार्यक्रम के तहत लगभग 40,000 करोड़ रु. के सार्वजनिक/सरकारी निवेश और लगभग 60,000 करोड़ रु. के निजी निवेश का लक्ष्य रखा गया है ताकि सिंचाई परियोजनाओं, सड़क कनेक्टिविटी, वेयरहाउस और इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से रायलसीमा को फलों और बागवानी के लिए देश का बड़ा केंद्र बनाया जा सके। उन्होंने इस विज़न को स्वर्ण आंध्र प्रदेश की दिशा में एक निर्णायक कदम बताते हुए कहा कि ग्रामीण रोजगार, हॉर्टिकल्चर, इंडस्ट्री निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर– सब मिलकर आंध्र प्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने में योगदान देंगे।

अमरावती, पोलावरम और इंडस्ट्री निवेश से स्वर्ण आंध्र प्रदेश

श्री चंद्रबाबू नायडू ने अमरावती को “देवताओं की राजधानी” बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार की मदद से राजधानी परियोजना, पोलावरम, विशाखापत्तनम स्टील प्लांट, डेटा सेंटर और फाइटर जेट प्रोजेक्ट जैसे कामों के ज़रिये आंध्र प्रदेश की ब्रांड इमेज को फिर से ऊँचा किया गया है। उन्होंने कहा कि राइट लीडर, राइट प्लेस, राइट टाइम– यही नरेंद्र मोदी हैं और 2047 तक भारत को नंबर वन देश बनाने के विज़न के साथ स्वर्ण आंध्र प्रदेश की दिशा में भी तेज़ी से काम हो रहा है।

कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि वीबी जी राम जी में काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 दिन तो किये ही गए हैं, साथ ही काम न मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते का भी प्रावधान है। इससे हर कामगार को काम मिलना सुनिश्चित होगा। वहीं केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि वीबी जी राम जी योजना विकसित भारत की नींव बनेगी। इस योजना में 300 से ज्यादा तरह के काम होंगे जो ग्रामीण भारत को सशक्त- समृद्ध बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल, संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भाजीभाकरे भी मौजूद रहीं।

केंद्र के सहयोग से आंध्र प्रदेश को मिली मजबूती

उपमुख्यमंत्री श्री पवन कल्याण ने कहा कि शिवराज जी, आपका 49 वर्षों का सार्वजनिक जीवन जनसेवा, किसानों और ग्रामीण भारत के प्रति समर्पण का प्रतीक है। आपने 6 बार सांसद और 4 बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में देश की सेवा कर एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए आपका संघर्ष और जेल यात्रा हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आपके मार्गदर्शन और प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश को ग्रामीण विकास के लिए 12,845 करोड़ रु. की स्वीकृति मिली है। आपके सहयोग से राज्य में पंचायत राज व्यवस्था को मजबूती मिली है तथा जनजातीय क्षेत्रों में प्लांटेशन सहित कई महत्वपूर्ण विकास कार्य आगे बढ़े हैं और आंध्र प्रदेश आरजीएसए की राष्ट्रीय रैंकिंग में 24वें स्थान से प्रथम स्थान तक पहुँचा है। उन्होंने कहा कि VB- G RAM G के राष्ट्रीय शुभारंभ के लिए आंध्र प्रदेश को चुनकर आपने हमारे राज्य के प्रत्येक नागरिक का सम्मान बढ़ाया है।

कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री श्री नायडू और केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने फार्म पॉन्ड गतिविधि स्थल पर पहुँचकर पूजा और ग्राउंड ब्रेकिंग की, पौधरोपण किया, “मैजिक ड्रेन” डेमोंस्ट्रेशन देखा और आंध्र प्रदेश की उपलब्धियों व पहलों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

बाढ़ प्रभावित अरुणाचल का शिवराज सिंह चौहान, किरेन रिजिजू और पेमा खांडू ने किया हवाई व जमीनी दौरा

अरुणाचल प्रदेश / सत्ता संदेश

अरुणाचल प्रदेश में आई भीषण बाढ़ के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के साथ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई और जमीनी दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।

केंद्रीय मंत्री ने केयी पान्योर जिले समेत कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके साथ ही वे सड़क मार्ग से भी गांवों में पहुंचे और प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा और जिनके घर बह गए हैं, उनके लिए नए मकान बनवाए जाएंगे। खेतों में हुए नुकसान, फसलों की बर्बादी, पशुधन हानि; सभी का आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाएगा। तत्काल राहत के रूप में राशन और आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।

दौरे के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने स्थानीय लोगों द्वारा किए जा रहे सामुदायिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत और सुरक्षा दीवार बनाने के काम में खुद भी हाथ बंटाया और कहा कि समाज की यह भागीदारी प्रेरणादायक है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बाढ़ से भारी तबाही हुई है और नुकसान का लगातार आकलन किया जा रहा है, लेकिन इसके बीच सबसे सराहनीय बात यह है कि स्थानीय समुदाय ने सरकार का इंतजार किए बिना खुद आगे बढ़कर समाधान की पहल की है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार पूरी तत्परता से कार्य कर रही है और प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार भी हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी ताकि प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन जल्द से जल्द सामान्य हो सके।

अमित शाह नई दिल्ली में NAFED के ऑक्शन पोर्टल ‘NAFEX.in’ का शुभारंभ करेंगे

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 23 जून को नई दिल्ली स्थित अटल अक्षय ऊर्जा भवन में NAFED के ऑक्शन पोर्टल ‘NAFEX.in’ का शुभारंभ करेंगे। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान अमित शाह NAFED की कई महत्वपूर्ण डिजिटल और किसान-केंद्रित पहलों का शुभारंभ करेंगे। इनमें किसानों के बच्चों के लिए NAFED-KALYAN छात्रवृत्ति, दलहन एवं तिलहन के इन्वेंटरी मैनेजमेंट के लिए DRISHTI पोर्टल, एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग को मजबूत करने के लिए ERP पोर्टल और ऑक्शन पोर्टल NAFEX.in शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान ऑक्शन पोर्टल पर लाइव पंजीकरण का प्रदर्शन और नीलामी प्रक्रिया का शुभारंभ भी किया जाएगा।

NAFEX.in का शुभारंभ नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और संचालन की सुगमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पोर्टल नीलामी से संबंधित गतिविधियों को व्यवस्थित करने और किसानों, सदस्य संस्थाओं तथा हितधारकों के हित में NAFED की समग्र कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगा।

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री किसानों के बच्चों को NAFED-KALYAN छात्रवृत्ति के चेक भी वितरित करेंगे। यह पहल किसान कल्याण और किसानों के बच्चों की शिक्षा को सहयोग देने की दिशा में NAFED की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

शुभारंभ कार्यक्रम के बाद श्री अमित शाह NAFED के निदेशक मंडल के सदस्यों से भेंट करेंगे। इस बैठक में NAFED द्वारा अपनी गतिविधियों और प्रगति पर प्रस्तुति दी जाएगी, जिसमें केन्द्रीय मंत्री द्वारा पिछले दौरे के दौरान दिए गए निर्देशों पर की गई कार्रवाई तथा NAFED के भविष्य के रोडमैप पर चर्चा होगी ।

NAFED किसानों को सहयोग देने, कृषि विपणन, खरीद और सहकारिता आधारित कृषि व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन डिजिटल और कल्याणकारी पहलों का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सहकार से समृद्धि के विज़न को साकार करने और सहकारी संस्थाओं को तकनीक, पारदर्शिता तथा किसान-केंद्रित सुधारों के माध्यम से सशक्त बनाने के सरकार के प्रयासों के अनुरूप है।

20 जून को प. बंगाल में पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी करेंगे प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली/ सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से देशभर के करोड़ों किसानों को बड़ा तोहफा देंगे। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत 23वीं किस्त जारी करते हुए वे 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में लगभग 18,880 करोड़ रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर करेंगे।

इस संबंध में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का यह दौरा ‘विकसित भारत, विकसित पश्चिम बंगाल’ के संकल्प को नई गति देने वाला साबित होगा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान कृषि, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन, पशुपालन और रेलवे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पण किया जाएगा।

9.44 करोड़ किसानों के खातों में पहुंचेगी 18,880 करोड़ रुपये की राशि

श्री चौहान ने बताया कि पीएम-किसान की 23वीं किस्त के तहत देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिलेगा। पश्चिम बंगाल में 45.35 लाख से अधिक किसानों के खातों में लगभग 907 करोड़ रुपये की राशि पहुंचेगी। इसके साथ ही राज्य में योजना के तहत वितरित कुल राशि 15,055 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में योजना शुरू होने के बाद से अब तक देशभर में किसानों को 4.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है।

फसल बीमा और डिजिटल एग्रीकल्चर को मिलेगा बढ़ावा

प्रधानमंत्री इस अवसर पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) का भी शुभारंभ करेंगे। लगभग 12,200 करोड़ रुपये लागत वाली इन योजनाओं के तहत वित्त वर्ष 2026-27 में 1.10 करोड़ किसानों को 30 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर बीमा सुरक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके साथ ही डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के अंतर्गत एग्रीटेक प्लेटफॉर्म की शुरुआत भी की जाएगी। यह प्लेटफॉर्म उर्वरक वितरण, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) आधारित खरीद जैसी सेवाओं को एकीकृत डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराएगा।

प्राकृतिक खेती और धन-धान्य कृषि योजना का शुभारंभ

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन का भी शुभारंभ करेंगे। इसके तहत पश्चिम बंगाल में 17,300 हेक्टेयर क्षेत्र में 346 प्राकृतिक कृषि क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे, जिनसे 43,250 किसानों को लाभ मिलेगा।

इसके अलावा प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की शुरुआत भी करेंगे। यह योजना पुरुलिया, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और झाड़ग्राम जिलों में लागू होगी। योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना तथा भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं को मजबूत बनाना है।

ग्रामीण विकास और सड़क संपर्क को मिलेगा बल

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-III) के तहत 213 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 49 सड़क परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा। 315 किलोमीटर से अधिक लंबी ये सड़कें ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी और किसानों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी।

मत्स्य और पशुपालन क्षेत्र को नई मजबूती

कार्यक्रम के दौरान दक्षिण 24 परगना जिले के फ्रेजरगंज में आधुनिकीकृत मत्स्य बंदरगाह और बीरभूम में आधुनिक मत्स्य बाजार का उद्घाटन किया जाएगा। वहीं नादिया जिले के हरिणघाटा में 6 करोड़ रुपये से अधिक लागत से स्थापित रीजनल सीमन प्रोडक्शन लैबोरेटरी और बकरी सीमन बैंक का भी उद्घाटन होगा।

यह पूर्वी भारत की अपनी तरह की पहली सुविधा होगी, जो वैज्ञानिक पशु प्रजनन और पशुधन उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

591 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं की सौगात

प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल में लगभग 591 करोड़ रुपये लागत की विभिन्न रेल परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे। इनमें हावड़ा में 300 बिस्तरों वाले नए मंडलीय रेलवे अस्पताल की आधारशिला, पूर्व मेदिनीपुर में रोड ओवर ब्रिज का निर्माण तथा सांकराइल-सांतरागाछी थर्ड लाइन परियोजना का राष्ट्र को समर्पण शामिल है।

इन परियोजनाओं से रेल यातायात अधिक सुरक्षित और सुगम होगा, जबकि औद्योगिक विकास, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी।

विकसित पश्चिम बंगाल की दिशा में बड़ा कदम

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की जाने वाली ये परियोजनाएं कृषि, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन, पशुपालन, स्वास्थ्य और परिवहन क्षेत्रों में व्यापक बदलाव लाने का आधार बनेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और विकसित पश्चिम बंगाल तथा विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

आंध्र प्रदेश से होगी ‘विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका मिशन’ की राष्ट्रीय शुरुआत: शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की है कि ‘विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ का राष्ट्रीय शुभारंभ 1 जुलाई को आंध्र प्रदेश से किया जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस कार्यक्रम में देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री विभिन्न फील्ड स्थलों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। कार्यक्रम के दौरान ग्राम पंचायत विकास योजना की जानकारी साझा की जाएगी तथा आंध्र प्रदेश द्वारा विकसित मॉडल पंचायतों और जीरो-वेस्ट ग्राम पंचायतों के सफल कार्यों को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने राज्य में चल रहे ग्रामीण विकास कार्यों और योजनाओं की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण विकास योजनाओं के अंतर्गत किए जा रहे सभी कार्यों को जियो-टैग किया गया है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त हो। उन्होंने बताया कि लाभार्थियों के सत्यापन के लिए फेस रिकॉग्निशन आधारित प्रणाली का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है।

पवन कल्याण ने कहा कि राज्य में ग्रामीण सड़कों के निर्माण और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत आवास निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसके अलावा प्रत्येक पंचायत में मवेशियों के लिए पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे पशुपालकों को लाभ मिल रहा है।

उन्होंने VB-G RAM-G पहल के अंतर्गत आंध्र प्रदेश को 7,700 करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्ड अंतरिम राशि उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार और ग्रामीण विकास मंत्रालय का आभार भी व्यक्त किया।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि आंध्र प्रदेश में VB-G RAM-G के तहत कॉफी बागान गतिविधियों को शामिल किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर पैदा होंगे। राज्य सरकार तटीय क्षेत्रों में मॉडल पंचायतों के विकास की दिशा में भी विशेष प्रयास कर रही है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने कहा कि तटीय क्षेत्रों में मॉडल पंचायतों के विकास के लिए मंत्रालय हरसंभव सहयोग देगा। उन्होंने बताया कि ये पंचायतें ग्रामीण विकास और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग का उदाहरण बनेंगी।

बैठक के दौरान महिला स्वयं सहायता समूहों, जिन्हें ‘लखपति दीदी’ के नाम से जाना जाता है, के लिए वाहन खरीद संबंधी पहल को भी समर्थन देने की जानकारी दी गई। इसके लिए दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत आवश्यक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर सवार है कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय- श्री शिवराज सिंह चौहान


दिल्ली / सत्ता संदेश

किसान-गरीब को भटकना नहीं पड़े, शिकायत निवारण को दें वरीयता- श्री शिवराज सिंह चौहान

हर महीने होगी समीक्षा, केवल डिस्पोजल नहीं, जमीन पर समाधान चाहिए- श्री शिवराज सिंह

नियम-प्रक्रिया को बनाएं सरल; एआई, डेटा और डिजिटल गवर्नेंस से कृषि-ग्रामीण विकास को देंगे नई धार- श्री शिवराज

कोर्ट केस, फाइल कल्चर और ड्राफ्टिंग पर श्री शिवराज सिंह का बड़ा सुधार एजेंडा

पीएम मोदी के ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और इनफॉर्म’ मंत्र से किसानों के जीवन में भरेंगे खुशियां- केंद्रीय कृषि मंत्री

2047 विजन, राज्यों से साझेदारी और 12 साल की उपलब्धियों के प्रस्तुतीकरण पर श्री शिवराज सिंह ने दिया जोर

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुरुवार शाम मंत्रिपरिषद की बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अगले ही दिन आज अपने दोनों मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाले विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक लेकर साफ कहा कि सरकार का काम फाइलों में नहीं, जनता के जीवन में दिखना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसान, गरीब, ग्रामीण और आम नागरिक को योजनाओं का लाभ पाने या शिकायतों के समाधान के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए योजनाबद्ध, समयबद्ध और परिणाममुखी व्यवस्था तुरंत खड़ी की जाए।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आम आदमी को लड़ना न पड़े, उसे दर-दर भटकना न पड़े और उसे योजनाओं का लाभ सहज, सरल और समय पर मिलना चाहिए। इसी को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर समेत संबंधित इकाइयों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत, प्रभावी और जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि अभी विभिन्न योजनाओं और विभागों में शिकायतों के निपटारे की अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं, जैसे अलग पोर्टल, अलग तंत्र और अलग प्रणाली, लेकिन अब इस व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी और परिणामकारी बनाने की जरूरत है। इसके लिए कृषि और ग्रामीण विकास, दोनों विभागों में कम से कम 10-10 अधिकारियों की टीम गठित करने को कहा गया, जो प्रतिदिन शिकायतों, जनसमस्याओं, पत्रों, जनप्रतिनिधियों के प्रतिवेदनों और विभिन्न पोर्टलों पर आई समस्याओं की समीक्षा करे।

श्री चौहान ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शिकायतों का समाधान केवल कागज पर “डिस्पोजल” दिखाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह देखा जाए कि लाभार्थी को वास्तविक राहत मिली या नहीं, योजना का लाभ वास्तव में पहुंचा या नहीं, और कहीं ऐसा तो नहीं कि रिकॉर्ड में वितरण दिख रहा हो लेकिन जमीन पर लाभार्थी को कुछ मिला ही न हो।

बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने अपने उस अनुभव का भी उल्लेख किया, जिसमें लाभार्थियों को फोन कर सत्यापन करने पर कुछ मामलों में कागज और वास्तविकता के बीच अंतर सामने आया था। उन्होंने साफ कहा कि यह समस्या आसान नहीं, बल्कि जटिल है, इसलिए शिकायतों की प्रकृति, क्षेत्रवार प्रवृत्ति और योजनावार अड़चनों की पहचान कर तंत्र में आवश्यक बदलाव करना होगा।

उन्होंने निर्देश दिया कि हर महीने शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि महीने के पहले सोमवार को समीक्षा की जाएगी, हालांकि जून में खरीफ कार्यों की व्यस्तता को देखते हुए दूसरे सोमवार को विस्तृत समीक्षा की जाएगी, लेकिन तब तक तंत्र और अधिक व्यवस्थित, उत्तरदायी और प्रभावी हो जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा रिफॉर्म्स पर दिए जा रहे लगातार जोर का उल्लेख करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब हर डिवीजन, हर योजना और हर विभाग अपने स्तर पर यह पहचाने कि आखिर कठिनाई कहां है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क योजना, कृषि योजनाएं, बागवानी, बीमा, विपणन या अन्य कार्यक्रमों में जहां कहीं लाभार्थी बेवजह चक्कर काट रहा है, वहां नियम, प्रक्रिया, तंत्र और कार्यप्रणाली को सरल बनाना ही होगा।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने साफ कहा कि प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जाए और पुराने-अप्रासंगिक रेगुलेशंस को खत्म करना अब जरूरी है। उन्होंने पूछा कि हर चीज के लिए लाइसेंस की जरूरत क्यों हो, कई जगह पंजीकरण या आसान प्रणाली से काम क्यों नहीं हो सकता। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर विभिन्न योजनाओं में बाधा पैदा करने वाले प्रावधानों, जटिल प्रक्रियाओं और सुधार योग्य बिंदुओं की पहचान कर ली जाए, ताकि आगे त्वरित निर्णय लिया जा सके।

बैठक में एआई और टेक्नोलॉजी के उपयोग पर महत्वपूर्ण रूप से बात करते हुए श्री चौहान ने कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर सहित सभी क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा शेयरिंग, डेटा आधारित निर्णय, मॉनिटरिंग और इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए अलग टीम बनाकर अध्ययन करने और उपयोगी प्रस्ताव उनके सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए विभागों के बीच साझा कामकाज और डेटा इंटीग्रेशन जरूरी है। बैठक में यह भी सामने आया कि विभिन्न शिकायत डेटाबेस को जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है, ताकि केवल एक पोर्टल की नहीं बल्कि समेकित शिकायत-प्रणाली के आधार पर विभागीय मूल्यांकन हो सके।

श्री चौहान ने प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में बदलाव पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि फाइल नीचे से बनकर ऊपर आती है और कई बार नीचे का पुराना माइंडसेट ही पूरी प्रक्रिया को उलझा देता है। इसलिए केवल ऊपर के स्तर पर नहीं, बल्कि नीचे से फाइल निर्माण, नोटिंग, निर्णय-तैयारी और ड्राफ्टिंग की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत है। उन्होंने ड्राफ्टिंग को अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि विभागों में ऐसे अधिकारी विकसित किए जाएं जो फाइलें और नोट्स मजबूत, स्पष्ट और नीति-संगत तरीके से तैयार कर सकें। इसके लिए प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और दक्षता वृद्धि की व्यवस्था की जाए, ताकि फाइलें अनावश्यक रूप से न अटकें और निर्णय की गुणवत्ता भी बेहतर हो।

न्यायालयों में लंबित मामलों को लेकर भी केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई मामलों में सरकार इसलिए कमजोर पड़ जाती है क्योंकि सरकारी पक्ष समय पर और प्रभावी ढंग से अदालत में रखा ही नहीं जाता। उन्होंने सभी विभागों से कहा कि वे लंबित कोर्ट केसों की सूची निकालें, उनकी समीक्षा करें, नोडल अधिकारी तय करें, विधिक तैयारी मजबूत करें और जरूरत पड़े तो बेहतर वकीलों की व्यवस्था करें, क्योंकि सरकार की हार का सीधा नुकसान सार्वजनिक हित को होता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकास कार्यों में बाधाओं की पहचान और समाधान पर दिए गए संदेश को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि हर डिवीजन यह बताए कि काम किस वजह से अटकता है, कौन सी बाधाएं फैसलों, क्रियान्वयन और लाभ वितरण में देरी करती हैं, और उन्हें दूर करने के लिए क्या सुधार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह कवायद एक साथ चलनी चाहिए- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के साथ-साथ इन्फॉर्म भी।

उन्होंने कहा कि कई बार योजनाएं अच्छी होती हैं, सुधार भी किए जाते हैं, लेकिन जनता को जानकारी ही नहीं होती। इसलिए हितधारकों से संवाद, किसान संगठनों के साथ बैठक, मजदूरों और सरपंचों से बातचीत, जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सूचना, सोशल मीडिया, ग्राफिक्स, वीडियो, रील्स और रचनात्मक संचार माध्यमों से योजनाओं और सुधारों को जनता तक पहुंचाया जाए।

बैठक में यह भी कहा गया कि जो सुधार पहले ही किए जा चुके हैं, उनका “रिफॉर्म उत्सव” की तरह प्रचार-प्रसार होना चाहिए। श्री चौहान ने कहा कि केवल सुधार कर देना काफी नहीं है, बल्कि जिनके लिए सुधार किए गए हैं, उन्हें बुलाकर संवाद किया जाना चाहिए, बताया जाना चाहिए कि क्या बदला है, उससे क्या लाभ होगा और आगे क्या और किया जा सकता है।

श्री चौहान ने राज्यों के साथ साझेदारी को कृषि और ग्रामीण विकास की सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि असली काम राज्यों में होता है, इसलिए राज्यों के साथ रोडमैप आधारित साझेदारी, ज़ोनल कॉन्फ्रेंस, योजनावार समन्वय और समस्या-आधारित संवाद को और मजबूत किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि जो राज्य संकोच करते हैं, उनके साथ भी संवाद बढ़ाया जाएगा, क्योंकि केंद्र का दायित्व पूरे देश की जनता के प्रति है।

उन्होंने कृषि, पशुपालन, मत्स्य, फूड प्रोसेसिंग और अन्य संबद्ध क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय की भी जरूरत बताई। उनका कहना था कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और क्षेत्रीय कृषि रोडमैप जैसे मुद्दों पर अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों को साथ बैठकर काम करना होगा।

बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विभागीय विजन दस्तावेज तैयार करने पर भी बल दिया गया। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रत्येक विभाग अपना 2047 विजन, इस वर्ष के लक्ष्य, वार्षिक, छह-माही, तिमाही, साप्ताहिक और दैनिक कार्ययोजना तैयार करे, ताकि मॉनिटरिंग मजबूत हो और काम का आकलन स्पष्ट रूप से हो सके।

उन्होंने सरकारी भवनों और संस्थानों में पीएम सूर्य घर जैसी पहलों के अनुरूप सोलराइजेशन को भी आगे बढ़ाने की बात कही और कहा कि जहां काम हो चुका है और जहां बाकी है, उसका स्पष्ट आकलन तैयार कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा कार्यकाल के दो वर्ष और समग्र 12 वर्षों की उपलब्धियों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर भी बैठक में चर्चा हुई। श्री चौहान ने कहा कि विभाग अपनी उपलब्धियों को अभी से व्यवस्थित करें और प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ ही गांव स्तर तक जाने वाले कार्यक्रम, प्रेजेंटेशन, रचनात्मक कंटेंट, वीडियो और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जनता के बीच ले जाएं। उन्होंने सोशल मीडिया के प्रभाव को देखते हुए छोटे वीडियो, ग्राफिक्स, लाभार्थी कहानियों और योजनाओं से जीवन में आए बदलावों को केंद्र में रखने का सुझाव दिया। उनका मानना था कि अखबार और टीवी के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दमदार प्रस्तुतीकरण आज ज्यादा असरकारी हो सकता है।

बैठक में विदेश यात्राओं को लेकर भी प्रधानमंत्री श्री मोदी के निर्देशों का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने अधिकारियों से कहा कि अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचा जाए और केवल अत्यंत जरूरी मामलों में ही ऐसे प्रस्ताव आगे आएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय प्राथमिकता देश के भीतर काम की गति, गुणवत्ता और परिणाम को बेहतर बनाना है।

फाइलों के निस्तारण को लेकर श्री चौहान ने कहा कि उनकी प्राथमिकता केवल तेजी नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और परिणाममूलक निर्णय है। उन्होंने कहा कि कोई भी नियम या फाइल कई लोगों की जिंदगी पर असर डाल सकती है, इसलिए उसे समझकर, परखकर और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ निर्णय लेना जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे अनावश्यक देरी न हो और महत्वपूर्ण मामलों पर समय रहते चर्चा हो सके।

बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि कोई भी विभाग पीछे नहीं रहना चाहिए। शिकायत निवारण से लेकर रिफॉर्म, टेक्नोलॉजी, कोर्ट केस, राज्यों से समन्वय, जनसंवाद, 2047 रोडमैप और उपलब्धियों के प्रस्तुतीकरण तक हर मोर्चे पर सक्रिय, समयबद्ध और जवाबदेह कार्यशैली अपनानी होगी, ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सुशासन विजन के अनुरूप सरकार का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।