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केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने हरिद्वार में नशा विरोधी जनजागरूकता अभियान का नेतृत्व किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

नशा मुक्त भारत सप्ताह के दौरान 1.31 करोड़ से अधिक नागरिकों ने विभिन्न जन-जागरूकता एवं सामुदायिक जनभागीदारी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। 17 जून से 26 जून 2026 तक मनाए गए इस अभियान के अंतर्गत नशा मुक्ति मित्र पंजीकरण अभियान, सेमिनार और वेबिनार, बच्चों एवं युवाओं के लिए प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, लघु नाटिकाएं, स्लोगन लेखन प्रतियोगिताएं, ई-प्रतिज्ञाएं, जन-जागरूकता रैलियां, योग सत्र, हस्ताक्षर अभियान, निबंध लेखन प्रतियोगिताएं, चित्रकला प्रतियोगिताएं तथा सामुदायिक सहभागिता से जुड़े अनेक अन्य कार्यक्रम आयोजित किये गए।

नशा मुक्त भारत सप्ताह का आयोजन मादक पदार्थों के दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में किया गया। इस सप्ताह का समापन 26 जून 2026 को उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय (डीएसवीवी) में आयोजित राष्ट्रीय जन-जागरूकता कार्यक्रम के साथ हुआ।

इस कार्यक्रम की शोभा केन्‍द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार, देव संस्कृति विश्वविद्यालय (डीएसवीवी) के प्रो वाइस चांसलर डॉ. चिन्मय पंड्या तथा अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति से बढ़ी।

कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. वीरेन्द्र कुमार के नेतृत्व में नशा मुक्त रैली आयोजित की गई, जिसमें लगभग 4,000 नागरिकों ने भाग लिया। यह भागीदारी नशे के दुरुपयोग के विरुद्ध राष्ट्रीय अभियान के प्रति जनता के व्यापक समर्थन का प्रतीक रही। इस अवसर पर केन्‍द्रीय मंत्री ने उपस्थित लोगों को ‘नशा मुक्ति की शपथ’ तथा ‘गरिमापूर्ण वृद्धावस्था की शपथ’ दिलाई। इसके माध्यम से सरकार ने नशा-मुक्त, समावेशी और संवेदनशील समाज के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।इस कार्यक्रम में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से हजारों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों में छात्र, युवा, विभिन्न आध्यात्मिक संगठनों के स्वयंसेवक, उत्तराखंड सरकार के प्रतिनिधि तथा अन्य स्थानीय हितधारक शामिल थे। इसके अलावा, देशभर के राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों, विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों, अनुदान सहायता प्राप्त संस्थानों, नशा मुक्ति एवं व्यसन उपचार केन्‍द्रों तथा अन्य संबंधित हितधारकों ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर ‘नशा मुक्त भारत’ के निर्माण के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा अखिल विश्व गायत्री परिवार के बीच नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) और अटल वयो अभ्युदय योजना (एवीवाईएवाई) के अंतर्गत समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर करना रहा। इन समझौतों का उद्देश्य जन-जागरूकता बढ़ाने, सामुदायिक एकजुटता को मजबूत करने, मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने तथा ‘गरिमापूर्ण वृद्धावस्था’ के संदेश के माध्यम से देशभर में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम के दौरान नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में राज्यों एवं केन्‍द्र शासित प्रदेशों, जिलों, विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों तथा अनुदान सहायता प्राप्त संस्थानों द्वारा किए गए प्रयासों स्‍वीकृत करते हुए उनकी सराहना की गई। साथ ही, ‘नशा मुक्ति मित्रों’ को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने और समुदायों को अभियान से जोड़ने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत राज्य सरकारों द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विभिन्न हितधारकों को नशामुक्त समाज के निर्माण में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

नशा मुक्त भारत सप्ताह–2026 तथा मादक पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस के सफल आयोजन ने ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ की सहभागिता पर आधारित दृष्टिकोण से सरकार की नशा-मुक्त समाज के निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने सभी नागरिकों, संस्थानों, युवा संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों तथा सामुदायिक हितधारकों से इस राष्ट्रीय जनआंदोलन में सक्रिय रूप से सहभागी बनने और “नशा मुक्त भारत, खुशहाल भारत” के संकल्प को साकार करने में अपना योगदान देने का आह्वान किया।

असम में UCC पर सियासी संग्राम तेज, विपक्ष ने बताया ‘भाजपा का एजेंडा’; व्यापक चर्चा के बिना कानून लाने का विरोध

गुवाहाटी / सत्ता संदेश

Assam विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। बुधवार को सदन में पेश किए गए ‘द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, 2026 विधेयक’ पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे Bharatiya Janata Party का “राजनीतिक एजेंडा” करार दिया। विपक्षी विधायकों ने कहा कि इतने संवेदनशील विषय पर बिना व्यापक सामाजिक और कानूनी परामर्श के कानून लागू करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा।

विपक्ष के नेताओं ने सदन में कहा कि प्रस्तावित यूसीसी विधेयक राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकता है। उनका आरोप था कि यह कानून समाज के एक विशेष वर्ग के अधिकारों और परंपराओं को कमजोर करने की कोशिश है। विपक्ष ने मांग की कि सरकार को सभी धार्मिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, विधि विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा करनी चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा न हो।

चर्चा के दौरान कई विपक्षी सदस्यों ने कहा कि असम जैसे बहु-सांस्कृतिक और बहुभाषी राज्य में किसी भी समान नागरिक संहिता को लागू करने से पहले स्थानीय परंपराओं, जनजातीय रीति-रिवाजों और विभिन्न समुदायों की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को आगे बढ़ा रही है।

वहीं सरकार की ओर से विधेयक का समर्थन करते हुए कहा गया कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानून सुनिश्चित करना है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने दावा किया कि यह कानून महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा और सामाजिक न्याय की दिशा में अहम कदम साबित होगा। सरकार ने यह भी कहा कि प्रस्तावित कानून संविधान की भावना के अनुरूप है और इससे राज्य में कानूनी समानता को बढ़ावा मिलेगा।

विधानसभा में हुई तीखी बहस के बीच यह मुद्दा अब राज्य की राजनीति का प्रमुख विषय बनता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यूसीसी को लेकर असम में राजनीतिक बयानबाजी और जनचर्चा और तेज हो सकती है। विपक्ष जहां इसे सामाजिक विभाजन का मुद्दा बता रहा है, वहीं सरकार इसे सुधारवादी कदम के रूप में पेश कर रही है।