ब्रेकिंग न्यूज़
‘AI नई न्यूक्लियर पावर है, इसके गुलाम न बनें’: PGIMER डायरेक्टर प्रो. विवेक लाल

PGIMER डायरेक्टर प्रो. विवेक लाल ने AI को ‘नई न्यूक्लियर पावर’ बताते हुए हेल्थकेयर में नैतिकता, जवाबदेही और मानवीय संवेदनाओं पर जोर दिया।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तेजी से हेल्थकेयर का हिस्सा बन रहा है, लेकिन इसके इस्तेमाल के साथ नैतिकता, जवाबदेही और मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखना बेहद जरूरी है। यह बात PGIMER चंडीगढ़ के डायरेक्टर प्रो. विवेक लाल ने GI सर्जरी, HPB और लिवर ट्रांसप्लांट विभाग के छठे फाउंडेशन डे समारोह के दौरान कही।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर कीनोट संबोधन देते हुए प्रो. विवेक लाल ने AI की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने AI को “नई न्यूक्लियर पावर” बताते हुए कहा कि इसकी क्षमता बहुत बड़ी है, लेकिन इसका इस्तेमाल जिम्मेदारी और सही उद्देश्य के साथ किया जाना चाहिए।

माल खतरनाक हो सकता है’

प्रो. विवेक लाल ने कहा कि जिस तरह न्यूक्लियर पावर का गलत इस्तेमाल विनाशकारी हो सकता है, उसी तरह AI का इस्तेमाल भी बिना नैतिक सोच और जिम्मेदारी के नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “AI नई न्यूक्लियर पावर है… अगर हमें AI का इस्तेमाल किसी अच्छे काम के लिए, किसी अच्छे मकसद के लिए करना है, तो एथिक्स बिल्कुल जरूरी है।”

उन्होंने हेल्थकेयर में AI के इस्तेमाल के दौरान नैतिकता और जवाबदेही को महत्वपूर्ण बताया।

AI डॉक्टरों के अनुभव का विकल्प नहीं

PGIMER डायरेक्टर ने कहा कि AI को डॉक्टरों के अनुभव और क्लिनिकल जजमेंट का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। उनके मुताबिक AI डॉक्टरों को क्लिनिकल निर्णय लेने में एक शक्तिशाली मदद दे सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय में चिकित्सकीय अनुभव और मानवीय समझ की महत्वपूर्ण भूमिका बनी रहेगी।

अपने लंबे क्लिनिकल अनुभव का जिक्र करते हुए प्रो. लाल ने खुद को मजाकिया अंदाज में “डायनासोर” बताते हुए कहा कि वह “NI यानी Natural Intelligence” में विश्वास करते हैं।

उन्होंने PGIMER में मिलने वाली कठिन ट्रेनिंग और लंबे क्लिनिकल अनुभव को संस्थान के डॉक्टरों की बड़ी ताकत बताया।

‘AI के गुलाम मत बनो’

प्रो. विवेक लाल ने डॉक्टरों और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को AI का इस्तेमाल समझदारी से करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि AI का इस्तेमाल करने के साथ यह समझना जरूरी है कि इसके आउटपुट को किस तरह जांचा और परखा जाए।

उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “AI के गुलाम मत बनो।”

उनका कहना था कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल इंसानी क्षमता को मजबूत करने के लिए होना चाहिए, न कि इंसानी निर्णय क्षमता को पूरी तरह उसके हवाले करने के लिए।

AI के सामने जवाबदेही का सवाल

प्रो. लाल ने हेल्थकेयर में AI से जुड़े एक महत्वपूर्ण नैतिक और कानूनी सवाल की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि AI की मदद से लिया गया कोई क्लिनिकल फैसला गलत साबित होता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

उन्होंने कहा कि AI के तेजी से मेडिकल सिस्टम में शामिल होने के साथ स्पष्ट एथिकल और लीगल फ्रेमवर्क की जरूरत भी बढ़ रही है।

‘AI में इमोशन की कमी, इंसान में यही ताकत’

प्रो. विवेक लाल ने कहा कि आधुनिक तकनीक डॉक्टरों को बड़ी तकनीकी क्षमता दे सकती है, लेकिन इंसानी भावनाओं और संवेदनाओं की जगह नहीं ले सकती।

उन्होंने कहा, “AI में यही कमी है—इमोशन। और यही एक कुदरती इंसान में बहुत ज्यादा होता है।”

उन्होंने मरीजों के इलाज में दया, संवेदना और मानवीय व्यवहार को चिकित्सा का अहम हिस्सा बताया।

PGIMER में हर साल करीब 35 लाख मरीज

PGIMER में भारी क्लिनिकल बोझ के बावजूद GI सर्जरी और संबंधित विभागों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए प्रो. लाल ने कहा कि संस्थान में हर साल करीब 35 लाख मरीज आते हैं।

उन्होंने कहा कि इतने बड़े मरीज भार और चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच विभाग द्वारा बेहतर क्लिनिकल और अकादमिक प्रदर्शन करना सराहनीय है। उन्होंने फैकल्टी, रेजिडेंट्स और छात्रों के योगदान की भी प्रशंसा की।

प्रो. लाल ने PGIMER के युवा डॉक्टरों, विशेषकर Gen Z डॉक्टरों की क्षमता और उत्साह को संस्थान के अकादमिक एवं क्लिनिकल वातावरण की ताकत बताया।

छह साल का सफर और विभाग की उपलब्धियां

कार्यक्रम में GI सर्जरी, HPB और लिवर ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख प्रो. राजेश गुप्ता ने विभाग की छह साल की यात्रा और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि विभाग को 4 अगस्त 2020 को स्वतंत्र विभाग के रूप में स्थापित किया गया था। हालांकि, इसकी नींव वर्ष 2004 में सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डिवीजन की स्थापना के साथ रखी गई थी। इसके बाद 2005 में MCh प्रोग्राम शुरू किया गया।

पिछले छह वर्षों के दौरान विभाग ने पेशेंट केयर, टीचिंग, रिसर्च और एडवांस्ड सर्जिकल सर्विसेज के क्षेत्र में लगातार प्रगति की है।

रोबोटिक सर्जरी की दिशा में आगे बढ़ता विभाग

प्रो. राजेश गुप्ता ने विभाग की वार्षिक क्लिनिकल गतिविधियों की जानकारी देते हुए पिछले वर्ष किए गए विभिन्न प्रकार के सर्जिकल प्रोसीजर और उनकी जटिलता पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में जहां अधिकांश प्रोसीजर अपेक्षाकृत सरल सर्जरी से जुड़े थे, वहीं यह कार्यक्रम PGIMER में रोबोटिक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत साबित हो रहा है।

विभाग की ओर से अकादमिक और रिसर्च गतिविधियों पर भी लगातार काम किया जा रहा है।

फाउंडेशन डे कार्यक्रम के दौरान AI, आधुनिक सर्जिकल तकनीक, क्लिनिकल अनुभव और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन को चिकित्सा के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

HBCHRC ने छह महीने से भी कम समय में पूरी कीं 100 रोबोटिक कैंसर सर्जरियां

न्यू चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

होमी भाभा कैंसर अस्पताल और अनुसंधान केंद्र (HBCHRC), पंजाब ने मरीजों को बिना किसी अतिरिक्त लागत के महज छह महीनों में 100 से अधिक जटिल रोबोटिक सर्जरियां सफलतापूर्वक पूरी कर ली हैं। HBCHRC भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत टाटा मेमोरियल सेंटर की एक इकाई है। यह मील का पत्थर हासिल करने वाला केंद्र सरकार का यह अस्पताल पंजाब के न्यू चंडीगढ़ में स्थित है।

रोबोटिक सर्जरी सुविधा की योजना की घोषणा पिछले साल अगस्त में होमी भाभा कैंसर कॉन्क्लेव के दौरान पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश (UT) के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया द्वारा की गई थी। इस उपलब्धि को साझा करते हुए, HBCHRC के निदेशक डॉ. आशीष गुलिया ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी पूरे उत्तर भारत में केवल सीमित अस्पतालों में ही उपलब्ध है।

डॉ. गुलिया ने कहा, “शुरुआत के समय, हमने पहले 80 मरीजों को मुफ्त में रोबोटिक सर्जरी प्रदान करने का वादा किया था। हमें यह साझा करते हुए गर्व हो रहा है कि हमने न केवल छह महीने से भी कम समय में 100 सफल रोबोटिक सर्जरियां पूरी कीं, बल्कि सभी 100 मरीजों को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के यह इलाज मिला।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे न्यू चंडीगढ़ परिसर में रोबोटिक सर्जरी सुविधा उन्नत चिकित्सा तकनीक से लैस है और अब अन्य निजी स्वास्थ्य संस्थानों की तुलना में काफी कम लागत पर इलाज की पेशकश कर रही है।”

ओंकोसर्जरी (Oncosurgery) विभाग के प्रमुख डॉ. विक्रम सिंह ने स्पष्ट किया कि रोबोटिक सर्जरी सर्जन की जगह नहीं लेती है। उन्होंने कहा, “पूरी प्रक्रिया के दौरान सर्जन का ही पूरा नियंत्रण रहता है और सभी महत्वपूर्ण निर्णय ऑपरेटिंग सर्जन द्वारा ही लिए जाते हैं। रोबोट केवल सर्जरी को अधिक सटीकता के साथ करने में मदद करता है।”

रोबोटिक सर्जरी के फायदों पर प्रकाश डालते हुए, ओंकोसर्जन डॉ. अरविंद गुरु ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी सर्जनों को पहुंच से दूर वाले क्षेत्रों में अधिक सटीकता के साथ काम करने की अनुमति देती है, जबकि इसमें केवल छोटे कीहोल (keyhole) के आकार के चीरों की आवश्यकता होती है। इसके परिणामस्वरूप खून कम बहता है, दर्द कम होता है और मरीज जल्दी ठीक होते हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल ने एक 80 वर्षीय मरीज की भी सफल रोबोटिक सर्जरी की है, जिसे आईसीयू में कम समय बिताना पड़ा और वे तेजी से स्वस्थ हुए।
विश्व स्तरीय सुविधाओं के साथ कैंसर का इलाज

आपको बता दें कि पंजाब और आसपास के राज्यों को बेहतरीन कैंसर इलाज देने के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अगस्त 2022 में इस अस्पताल को राष्ट्र को समर्पित किया था। भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आने वाले टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई द्वारा करीब 660 करोड़ की लागत से बना यह 300 बेड वाला अस्पताल हर आधुनिक सुविधा (जैसे सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट) से लैस है। यह अस्पताल एक मुख्य केंद्र (Hub) की तरह काम करता है, जबकि संगरूर वाला 150 बेड का अस्पताल इसकी एक शाखा (Spoke) के रूप में मरीजों की सेवा कर रहा है।