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भारत–जापान स्वास्थ्य सहयोग को नई मजबूती: भारत मंडपम में संयुक्त समिति की तीसरी बैठक

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

भारत और जापान के बीच स्वास्थ्य संबंधी संयुक्त समिति की तीसरी बैठक मंगलवार को भारत मंडपम में आयोजित की गई। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और जापान की स्वास्थ्य नीति प्रभारी मंत्री किमी ओनोदा ने मिलकर बैठक की अध्यक्षता की।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और जापान के बीच साझेदारी आपसी सम्मान, विश्वास और भविष्य के लिए साझा दृष्टिकोण पर आधारित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत-जापान के बीच सहयोग ज्ञापन के अंतर्गत आयोजित संयुक्त समिति की बैठक नियमित संवाद और गहन आपसी समझ के माध्यम से इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई है और उन्होंने यह विश्वास भी व्यक्त किया कि इस दौरान रचनात्मक और दूरदर्शितापूर्ण विचार-विमर्श होंगे।

नड्डा ने इस दौरान भारत और जापान के बीच एक सदी से अधिक समय से चले आ रहे बहुआयामी संबंधों का उल्लेख किया जो विभिन्न क्षेत्रों में सहभागिता पर आधारित हैं और उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास” के मार्गदर्शक सिद्धांत के अंतर्गत समावेशी विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संयुक्त समिति की बैठक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच है।

ओनोदा ने बैठक को संबोधित करते हुए नवाचार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने में जापान की निरंतर भागीदारी पर बल दिया और इसके साथ ही द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

बैठक के दौरान प्राथमिकता वाले प्रमुख क्षेत्रो पर चर्चा की गई, जो इनमें शामिल है।

गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की रोकथाम, निदान, उपचार और पुनर्वास:

बैठक में भारतीय प्रतिनिधियों ने बीमारियों से बढ़ती कष्टकारी स्थिति के बारे में जानकारी दी जिसमें गैर-संचारी रोगों के बढ़ते प्रसार पर बल दिया गया और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप उनकी जांच-पड़ताल, निरंतर देखभाल और सतत स्वास्थ्य संवर्धन पर आधारित व्यापक प्रतिक्रिया की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। वहीं, जापानी प्रतिनिधियों ने इस मामले में सहयोग के लिए पहले से चल रही पहलों के बारे में बताया जिनमें कैंसर की पहचान के लिए जांच, शीघ्र निदान और तकनीकी सहयोग तथा संस्थागत क्षमता विकास के माध्यम से उपचार प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर केंद्रित परियोजनाएं शामिल हैं।

आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना और उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच:

भारतीय प्रतिनिधियों ने दवा और चिकित्सा उपकरण संबंधी अपने क्षेत्रों की व्यापकता और उनकी क्षमता का उल्लेख किया जिसमें उनके घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने, निर्भरता कम करने और लक्षित नीतिगत उपायों के माध्यम से सस्ती दर पर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। जापानी प्रतिनिधियों ने चिकित्सा उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण और सुव्यवस्थित साझेदारी के माध्यम से प्रौद्योगिकी के उपयोग को सुगम बनाने के उद्देश्य से समन्वित सार्वजनिक-निजी सहयोग के अपने मॉडल के बारे में विस्तार से बताया।

डिजिटल स्वास्थ्य:

भारतीय प्रतिनिधियों ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के अपने दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की जिससे अंतरसंचालनीय, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य के अनुरूप परिवेश विकसित हो जिसको अपनाने और एकीकरण में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। जापानी प्रतिनिधियों ने उभरते डिजिटल प्लेटफार्मों का लाभ उठाते हुए प्रणालियों को आपस में जोड़ने, एआई-सक्षम चिकित्सा प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान में सहयोग के माध्यम से डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाने के संबंध में अपने अनुभव साझा किए।

मानव संसाधन विकास और आदान-प्रदान:

भारतीय प्रतिनिधियों ने कुशल और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य सेवा कार्यबल में सहायक अपनी नीति और नियामक प्रणाली के साथ-साथ आदान-प्रदान संबंधी कार्यक्रमों, संयुक्त प्रशिक्षण और दक्षताओं की पारस्परिक मान्यता के लिए सुव्यवस्थित मार्गों और तौर-तरीकों का उल्लेख किया। जापानी प्रतिनिधियों ने चिकित्सा क्षेत्र में संयुक्त रूप से अनुसंधान, कर्मियों के आदान-प्रदान और सहयोग के आधार पर वैज्ञानिक गतिविधियों में सहायता के लिए काम कर रहे तंत्र के बारे में विस्तृत विवरण दिया।

श्री नड्डा ने अपने समापन भाषण में कहा कि विचार-विमर्श ने भारत-जापान स्वास्थ्य साझेदारी को नई गति प्रदान की है। उन्होंने प्राथमिकता वाले प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि चर्चाओं ने सामर्थ्यवान और समावेशी स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए स्पष्ट दिशा निर्धारित की है।

उन्होंने यह भी कहा कि बैठक के परिणाम दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत आधार प्रदान करेंगे। उन्होंने आपसी विचारों को दोनों देशों के नागरिकों के लिए सार्थक परिणामों में बदलने के उद्देश्य से जापान के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

सुश्री ओनोदा ने आपसी सहयोग को और आगे बढ़ाने के प्रति जापान की प्रतिबद्धता पर बल देते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के जापान के संकल्प को दोहराया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दुर्लभ रोगों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का किया उद्घाटन

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंगलावर को नई दिल्ली में 5 और 6 मई को आयोजित होने वाले दो दिवसीय राष्ट्रीय दुर्लभ रोग सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह दुर्लभ रोगों से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के तरीके को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस मौके पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि इस सम्मेलन के आयोजन का मुख्य उद्देश्य हितधारकों के समक्ष आने वाली चुनौतियों को समझना, नवाचारों को प्रोत्साहित करना और देश में दुर्लभ रोगों से निपटने के तरीके को सुदृढ़ करने के लिए नए विचार उत्पन्न करना है। उन्होंने कहा कि दुर्लभ रोगों से निपटने की आवश्यकता को सर्वप्रथम राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 में प्रमुखता से शामिल किया गया था और बाद में दुर्लभ रोगों के लिए राष्ट्रीय नीति, 2021 के शुभारम्भ के माध्यम से इसे संस्थागत रूप दिया गया, जिसने हमारे भारत को दुर्लभ रोगों के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचा रखने वाले देशों में स्थान दिलाया है।

उन्होंने बताया कि यह नीति देश भर के प्रमुख तृतीयक अस्पतालों- उत्कृष्टता केंद्रों (सीई) के माध्यम से लागू की जाती है। पूर्वोत्तर भारत में दो उत्कृष्टता केंद्रों सहित इसकी संख्या कुछ वर्षों में 8 से बढ़कर 15 हो गई है, जिससे नैदानिक ​​देखभाल और सहायता के लिए राष्ट्रीय ढांचा मजबूत हुआ है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने बीमारियों के शीघ्र निदान और रोकथाम के महत्व पर जोर देते हुए, आनुवंशिक विश्लेषण, प्रारंभिक पहचान और सुविचारित नैदानिक ​​प्रबंधन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दुर्लभ बीमारियों के लिए सभी हितधारकों के सामूहिक और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है, और इस क्षेत्र में प्रगति केवल सुदृढ़ सहयोग के माध्यम से ही संभव है।

उन्होंने आनुवंशिक विकारों के प्रबंधन के लिए विशिष्ट पद्धतियों की पहल अपने एनआईडीएएन केंद्रों के माध्यम से  परिचालन में आ रही है, आनुवंशिक परामर्श सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है, और दुर्लभ रोग नीति के तहत लगभग 1,800 रोगियों को पहले ही उपचार सहायता मिल चुकी है। उन्होंने प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और उपचारों तक पहुंच में सुधार लाने के लिए नियामक निकायों और अन्य मंत्रालयों के साथ किए जा रहे सहयोगात्मक प्रयासों की भी सराहना की।

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) के सचिव और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने पिछले तीन दशकों में दुर्लभ रोगों के क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में, किसी संदिग्ध दुर्लभ रोग से पीड़ित रोगी की पहचान होने पर उसकी सहायता मुश्किल होती थी क्योंकि बीमारी का निदान अत्यंत कठिन था और उपचार के विकल्प लगभग अनुपलब्ध थे। आज, हालांकि उपचारों की उच्च लागत को देखते हुए प्रति रोगी 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी अपर्याप्त लग सकती है, फिर भी यह उल्लेखनीय प्रगति है कि देश अब दुर्लभ रोगों से पीड़ित बच्चों को सार्थक सहायता प्रदान करने में सक्षम है।

केंद्रीय मंत्री श्री जे. पी. नड्डा का नाईपर, मोहाली में दौरा

मोहाली / सत्ता संदेश

श्री जगत प्रकाश नड्डा, केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, ने शुक्रवार, 01 मई 2026 को राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाईप), मोहाली का दौरा किया।

माननीय मंत्री नाईपर कन्वेंशन सेंटर पहुंचे जहां उनके साथ रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग (DoP), भारत सरकार से सचिव श्री मनोज जोशी, अवर सचिव सुश्री गीता अशोक एवं उप सचिव डॉ. किन्नी सिंह भी उपस्थित रहे।

इसके बाद बोर्ड रूम बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें नाईपर, मोहाली के निदेशक प्रो. दुलाल पांडा ने संस्थान की दृष्टि, प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (KPI) तथा स्ट्रेटेजिक रोडमैप प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति में उत्कृष्टता केंद्रों जैसे COE-AVAB एवं COE-बायोफार्मास्यूटिकल्स, संस्थान के नवाचार तंत्र तथा लाइसेंसिंग अवसरों पर विशेष प्रकाश डाला गया।

प्रो. पांडा ने बताया कि नाईपर, मोहाली शोध उत्कृष्टता के लिए समर्पित है, जिसने उत्कृष्ट एलुमनाई   तैयार किए हैं और नाईपर, मोहाली राष्ट्रीय विकास में निरंतर महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान भारत सरकार के बायोफार्मा शक्ति मिशन को सुदृढ़ करने के लिए सेल एवं जीन थेरेपी, बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स, चिकित्सा उपकरण, एआई आधारित फार्माकोइन्फॉर्मेटिक्स तथा उन्नत औषधि वितरण प्रणालियों के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। इस दिशा में संस्थान ने बायोफार्मास्यूटिकल्स और रेगुलेटरी अफेयर्स में दो नए स्नातकोत्तर कार्यक्रम भी प्रारंभ किए हैं।

सचिव श्री मनोज जोशी ने संकाय एवं विद्यार्थियों के साथ संवाद किया और उद्योग सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा ट्रांसलेशनल रिसर्च को बढ़ाने के लिए सुझाव आमंत्रित किए। उन्होंने प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया तथा एक्सटर्नल फंडिंग प्राप्त करने वाले संकाय के लिए प्रोत्साहन एवं उद्योग-प्रायोजित अनुसंधान बढ़ाने की बात कही। उन्होंने “पेपर पेटेंट” से आगे बढ़कर वास्तविक अनुप्रयोग एवं कमर्शियलाइजेशन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

अपने संबोधन में माननीय मंत्री श्री जे. पी. नड्डा ने भारत को बायोफार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई, विशेष रूप से एपीआई, प्रमुख प्रारंभिक सामग्री, सिंथेसिस इंटरमीडिएट्स एवं बायोलॉजिक्स में। उन्होंने नाईपर, मोहाली में रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर  को सुदृढ़ करने हेतु पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया तथा संस्थान द्वारा उद्योग जगत के लिए तैयार पेशेवरों की सराहना की। अंत में उन्होंने नवाचार  एवं इनोवेशन  को गति देने के लिए निरंतर वित्तीय सहायता एवं नीतिगत सुधारों का आश्वासन दिया।

इसके उपरांत, दोपहर कन्वेंशन सेंटर के फोयर में एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जहां माननीय मंत्री जी ने ट्रांसलेशनल रिसर्च के परिणामों को दर्शाते पोस्टर एवं प्रोटोटाइप का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में नाईपर द्वारा किए जा रहे उद्योग सहयोग, पेटेंट तथा क्लिनिकल ट्रायल से संबंधित पहलु प्रदर्शित किये गए ।

माननीय मंत्री ने नाईपर, मोहाली के औषधीय रसीले पौधों (Medicinal Succulents) गार्डन का उद्घाटन भी किया तथा इसके पश्चात संस्थान की अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं का दौरा किया, जहां उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं से संवाद भी किया।

यह दौरा भारत सरकार की औषधि शिक्षा को सुदृढ़ करने, नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा बायोफार्मास्यूटिकल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को आगे बढ़ाने की सतत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।