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डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्लोबल यूथ फेडरेशन, इंडिया ने पंजाब के मोहाली में स्थित सरकारी स्कूलों में चार नए कंप्यूटर लैब सफलतापूर्वक स्थापित किए हैं।

मोहाली / सत्ता संदेश

डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्लोबल यूथ फेडरेशन, इंडिया ने पंजाब के मोहाली में स्थित सरकारी स्कूलों में चार नए कंप्यूटर लैब सफलतापूर्वक स्थापित किए हैं। ये कंप्यूटर लैब ग्लोबल यूथ फेडरेशन द्वारा पुकार – द वॉइस ऑफ ह्यूमैनिटी एनजीओ के सहयोग से, सेज फाउंडेशन और आईवॉलंटियर इंडिया के बहुमूल्य समर्थन से विकसित किए गए हैं और इन्हें माय भारत (युवा मामले एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार) को समर्पित किया गया है, जो युवा विकास और डिजिटल समावेशन को मजबूत करने की दिशा में ग्लोबल यूथ फेडरेशन की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कंप्यूटर लैब सरकारी हाई स्कूल, सनेटा (एस.ए.एस. नगर), सरकारी हाई स्कूल, माताउर (सेक्टर-70), सरकारी हाई स्कूल, मौली बैदवान और सरकारी हाई स्कूल, बाल्टाना में स्थापित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों को आधुनिक तकनीक तक पहुंच प्रदान करना और उनकी डिजिटल शिक्षण क्षमताओं को बढ़ाना है। उम्मीद है कि यह पहल डिजिटल विभाजन को पाटने और छात्रों को आज की तेजी से बदलती दुनिया में आवश्यक कौशल से लैस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उद्घाटन समारोह में सेज के निदेशक श्री महेश गर्ग सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। श्री आनंद कदुर, कंट्री हेड, SAGE; सुदीप्ति रस्तोगी, लर्न एंड डेवलपमेंट हेड और ग्लोबल SAGE फाउंडेशन एंबेसडर; प्रो. (डॉ.) रेणु त्रिखा, चीफ एडवाइजर, ग्लोबल यूथ फेडरेशन; श्रीमती गिन्नी दुग्गल, जिला शिक्षा अधिकारी, मोहाली; सुश्री ईशा गुप्ता, जिला युवा अधिकारी, MY भारत, मोहाली; श्री रोहित कुमार, निदेशक और सीईओ, ग्लोबल यूथ फेडरेशन; और श्रीमती शिवानी रैना, संस्थापक और अध्यक्ष, पुकार – द वॉइस ऑफ ह्यूमैनिटी एनजीओ। उनकी उपस्थिति ने शिक्षा क्षेत्र में सार्थक और स्थायी प्रभाव पैदा करने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों के महत्व को उजागर किया।

यह पहल प्रभावी साझेदारी का एक सशक्त उदाहरण है, जहां SAGE फाउंडेशन और iVolunteerIndia ने अपना निरंतर सहयोग दिया, और ग्लोबल यूथ फेडरेशन ने पुकार – द वॉइस ऑफ ह्यूमैनिटी के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर सुचारू कार्यान्वयन सुनिश्चित किया। MY भारत को समर्पित ये कंप्यूटर लैब युवाओं को अवसरों, प्रौद्योगिकी और कौशल विकास तक पहुंच के माध्यम से सशक्त बनाने के साझा दृष्टिकोण को और मजबूत करती हैं।

इस अवसर पर बोलते हुए, ग्लोबल यूथ फेडरेशन के निदेशक एवं सीईओ रोहित कुमार ने कहा, “हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक छात्र को अवसरों की समान पहुँच मिले और वह भविष्य के लिए आवश्यक कौशलों से लैस हो। ये कंप्यूटर लैब केवल बुनियादी ढाँचा नहीं हैं; ये अवसर, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर मार्ग का प्रतीक हैं।”

इन कंप्यूटर लैब की सफल स्थापना डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने और समावेशी शिक्षण वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो कुशल और भविष्य के लिए तैयार पीढ़ी के निर्माण के व्यापक लक्ष्य में योगदान देती है।

BCM स्कूल के छात्रों का DPR0 कार्यालय दौरा, मीडिया कार्यप्रणाली की मिली जानकारी

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना स्थित जिला जनसंपर्क कार्यालय (डीपीआरओ) में आज बी.सी.एम. आर्य मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के कक्षा 12 (पत्रकारिता) के 26 छात्रों के लिए एक विशेष मीडिया एक्सपोजर दौरे का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को मीडिया जगत की कार्यप्रणाली से परिचित कराना और उन्हें जनसंचार के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था।

इस शैक्षणिक दौरे का समन्वय उप निदेशक प्रभदीप सिंह नथोवाल, जिला जनसंपर्क अधिकारी (डीपीआरओ) पुनीत पाल सिंह गिल तथा सहायक जनसंपर्क अधिकारी (एपीआरओ) जतिंदर कोहली और गुरमुख सिंह द्वारा किया गया। अधिकारियों ने छात्रों के साथ संवाद स्थापित करते हुए मीडिया के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार सरकारी नीतियों, योजनाओं और उपलब्धियों को आम जनता तक पहुंचाने में जनसंपर्क विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

अधिकारियों ने छात्रों को प्रेस विज्ञप्ति तैयार करने की प्रक्रिया, मीडिया समन्वय के तरीके और सूचना प्रसार की रणनीतियों के बारे में भी अवगत कराया। इस दौरान छात्रों को यह समझाया गया कि एक प्रभावी प्रेस नोट कैसे तैयार किया जाता है और उसे विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक कैसे पहुंचाया जाता है। साथ ही, डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर भी चर्चा की गई, जिससे छात्रों को आधुनिक मीडिया परिदृश्य की बेहतर समझ मिली।

दौरे के दौरान छात्रों ने जनसंपर्क विभाग के कार्यों को नजदीक से देखा और जाना कि किस प्रकार विभिन्न सरकारी गतिविधियों की जानकारी मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचाई जाती है। छात्रों को मीडिया समन्वय, समाचार लेखन, और सरकारी संचार तंत्र की बारीकियों के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई।

छात्रों ने इस अनुभव को बेहद उपयोगी और प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि इस दौरे के माध्यम से उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए नई दिशा और प्रेरणा मिली है। कई छात्रों ने यह भी साझा किया कि अब वे मीडिया और जनसंचार के क्षेत्र को और गंभीरता से अपनाने के लिए उत्साहित हैं।

इस अवसर पर अधिकारियों ने छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि पत्रकारिता एक जिम्मेदार पेशा है, जिसमें निष्पक्षता, सत्यता और समाज के प्रति जवाबदेही अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने कौशल को निरंतर विकसित करें और बदलते मीडिया परिवेश के साथ खुद को अपडेट रखें।

यह मीडिया एक्सपोजर दौरा छात्रों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक साबित हुआ। इस पहल ने न केवल छात्रों को वास्तविक दुनिया के अनुभव से रूबरू कराया, बल्कि उन्हें पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं को समझने में भी मदद की।

उच्च शिक्षा विभाग ने मिशन साधना सप्ताह 2026 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) पर एक संवादपूर्ण सत्र का आयोजन किया

उच्च शिक्षा विभाग ने 2 अप्रैल से 8 अप्रैल, 2026 तक मनाए गए स्ट्रेंथनिंग एडैप्टिव डेवलपमेंट एंड ह्यूमेन एप्टिट्यूड फॉर नेशनल एडवांसमेंट (साधना) सप्ताह 2026 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) पर एक संवादपूर्ण सत्र का सफलतापूर्वक आयोजन किया।

यह सप्ताह क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) के स्थापना दिवस तथा नागरिक-केंद्रित सुशासन के लिए भारत की एक महत्वपूर्ण पहल, मिशन कर्मयोगी के पाँच वर्ष पूरे होने का प्रतीक है।

स्वागत भाषण उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव (प्रशासन) सैयद एकराम रिज़वी द्वारा दिया गया, जिन्होंने मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत क्षमता विकास आयोग की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि यह नागरिक-केंद्रित सुशासन के लिए ज्ञान, कौशल और क्षमता बढ़ाने हेतु विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध कराता है।

यह सत्र समकालीन शिक्षा, अनुसंधान और शासन में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता पर संरचित सहकर्मी अधिगम (पियर लर्निंग) तथा सार्थक विचार-विमर्श को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार किया गया था। इसमें यह भी रेखांकित किया गया कि भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपराएँ समस्या-समाधान, नवाचार और नीतिनिर्माण के आधुनिक दृष्टिकोणों को कैसे दिशा प्रदान कर सकती हैं।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण आईआईटी हैदराबाद के बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहन राघवन् का संबोधन था। ये हेरिटेज साइंस एंड टैक्नोलॉजी विभाग के संस्थापक प्रमुख रहे हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से भी जुड़े हुए हैं। डॉ. राघवन् ने अपने अंतर्विषयी कार्य से प्राप्त अनुभव साझा किए, जो प्रौद्योगिकी, विज्ञान और भारत की ज्ञान परंपराओं के बीच सेतु का कार्य करते हैं।

प्रोफेसर महोदय ने रेखांकित किया कि भले ही भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) की बाजार संभावनाएँ व्यापक हैं, किंतु इसकी वास्तविक शक्ति उच्च शिक्षा में इसकी परिवर्तनकारी भूमिका में निहित है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आईकेएस को एक अलग विषय के रूप में नहीं, बल्कि एक बहु-विषयी रूपरेखा के रूप में देखा जाना चाहिए, जो विज्ञान, अभियांत्रिकी, मानविकी और प्रबंधन जैसे मौज़ूदा शैक्षणिक क्षेत्रों को समृद्ध कर सकती है। उच्च शिक्षा में आईकेएस के एकीकरण के माध्यम से विश्वविद्यालय रटने पर आधारित लर्निंग से आगे बढ़कर ऐसे समग्र मॉडल की ओर अग्रसर हो सकते हैं, जो ज्ञान, अनुप्रयोग और मूल्यों (धर्म) का समन्वय करता है। प्रोफेसर ने इस बात का भी उल्लेख किया कि यह दृष्टिकोण समकालीन शैक्षिक सुधारों के अनुरूप है, जो भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत पर आधारित अनुसंधान, नवाचार और समालोचनात्मक चिंतन को प्रोत्साहित करता है। आईकेएस को अपनाने वाले संस्थान अंतर्विषयी कार्यक्रम विकसित कर सकते हैं, मौलिक अनुसंधान को बढ़ावा दे सकते हैं तथा ऐसे स्नातक तैयार कर सकते हैं, जो न केवल दक्ष पेशेवर हों, बल्कि सांस्कृतिक रूप से सजग और सामाजिक रूप से उत्तरदायी नागरिक भी हों। उन्होंने बल दिया कि इस प्रकार का एकीकरण एक ऐसे शिक्षा तंत्र के निर्माण के लिए आवश्यक है, जो भविष्य के लिए तैयार हो, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो और अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ हो।

इसके पश्चात एक रोचक प्रश्नोत्तर सत्र के रूप में प्रतिभागियों के साथ संवाद हुआ। सत्र में एक समेकित शिक्षा प्रणाली को आकार देने में भारतीय ज्ञान प्रणाली की निरंतर प्रासंगिकता तथा सतत् राष्ट्रीय प्रगति के लिए शासन प्रक्रियाओं में पारंपरिक ज्ञान को समाहित करने के महत्व पर बल दिया गया।

इस सत्र में शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। विचार प्रवर्तक नेताओं और व्यवहारिक विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर, उच्च शिक्षा विभाग ने मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत ज्ञान-आधारित, अनुकूलनशील और मानवीय शासन तंत्र के संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की।