ब्रेकिंग न्यूज़
लुधियाना की मशहूर मिठाई की दुकान के कुल्चे से निकला कोकरोच; ग्राहक ने वीडियो बनाकर खोली पोल, प्रशासन से की जांच की मांग

पंजाब डेस्क: लुधियाना में खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता पर एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। शहर की एक बेहद प्रतिष्ठित और पुरानी मिठाई की दुकान ‘लायलपुर’ (Lyallpur Sweets) से मंगवाए गए कुल्चे में मरा हुआ कोकरोच मिलने से हड़कंप मच गया है। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार ने प्रशासन से बड़े ब्रांडों की जांच करने की अपील की है।

तीसरी बाइट में मिला कोकरोच: ग्राहक जसप्रीत सिंह ने बताया कि उन्होंने ‘लायलपुर स्वीट्स’ से कुल्चे ऑर्डर किए थे। जब वे कुल्चा खा रहे थे, तो तीसरी बाइट लेते समय उन्हें कुल्चे के अंदर मरा हुआ कोकरोच दिखाई दिया।

मैनेजर से शिकायत और वीडियो: ग्राहक ने तुरंत इस घटना का वीडियो बनाया और दुकान के मैनेजर से इसकी शिकायत की। जसप्रीत सिंह ने सवाल उठाया कि इतने बड़े ब्रांड से ऐसी लापरवाही की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने चिंता जताई कि यदि उनके परिवार को फूड पॉइजनिंग हो जाती, तो इसका जिम्मेदार कौन होता?

मैनेजर का पलटवार: दुकान के मैनेजर अजीत कुमार ने स्वीकार किया कि ग्राहक ने कोकरोच की शिकायत की थी, लेकिन उन्होंने आरोपों को पूरी तरह सही नहीं माना। मैनेजर का कहना है कि उनकी दुकान में सफाई और पेस्ट कंट्रोल के नियमों का सख्ती से पालन किया जाता है।

ब्रांड को निशाना बनाने का दावा: मैनेजर ने यह भी तर्क दिया कि ग्राहक के दुकान से बाहर जाने के बाद पैकिंग खोलने पर क्या हुआ, इस बारे में वे कुछ नहीं कह सकते। उन्होंने दावा किया कि उनका ब्रांड पिछले 70-72 सालों से चल रहा है और उन्हें लगता है कि उनके ब्रांड की छवि खराब करने के लिए उसे निशाना बनाया जा रहा है।

प्रशासन से अपील: पीड़ित ग्राहक ने लुधियाना के डीसी (DC) और प्रशासन से मांग की है कि ऐसे बड़े संस्थानों की समय-समय पर जांच की जाए ताकि लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो सके।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…09-04-2026

पंजाब डेस्क: पंजाब-चंडीगढ़ टॉप 10 खबरें: कोटकपूरा गोलीकांड चंडीगढ़ ट्रांसफर, स्कूलों में ऑनलाइन हाजिरी और तलाक पर नाची पत्नी। आए चुटकियों में पढ़े दिनभर की अहम 10 खबरें।

1. कोटकपूरा गोलीकांड की सुनवाई अब चंडीगढ़ में: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कोटकपूरा गोलीकांड मामले की सुनवाई को फरीदकोट से चंडीगढ़ कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया है। आरोपी पुलिस अफसर चरणजीत सिंह की सुरक्षा याचिका पर यह फैसला लिया गया है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल भी आरोपी हैं।

2. सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम: पंजाब सरकार ने राज्य के 18 हजार सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन अटेंडेंस ट्रैकर लागू किया है। अब बच्चा स्कूल से गैरहाजिर रहेगा तो सीधा पेरेंट्स को मैसेज जाएगा और 3 दिन से ज्यादा अनुपस्थित रहने पर फोन कॉल की जाएगी।

3. तलाक के बाद पत्नी का डांस, पति डिप्रेशन में: मेरठ की एक महिला द्वारा तलाक मिलने पर ढोल पर नाचने का वीडियो वायरल होने के बाद जालंधर में तैनात उनके पति मेजर गौरव अग्निहोत्री डिप्रेशन में हैं। मेजर के माता-पिता का आरोप है कि बहू ने उन पर झूठे आरोप लगाकर पूरे देश में बदनाम किया है।

4. विधायक की शिकायत पर अफसर का तबादला: बठिंडा की विधायक बलजिंदर कौर की शिकायत के बाद जिले के मुख्य कृषि अधिकारी (CAO) हरबंस सिंह का तबादला फाजिल्का कर दिया गया है। विधायक का आरोप था कि अधिकारी फोन नहीं उठाते और काम में सहयोग नहीं करते।

5. विधायक पठानमाजरा बठिंडा जेल शिफ्ट: रेप केस में आरोपी आम आदमी पार्टी के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा को सुरक्षा कारणों से पटियाला जेल से बठिंडा सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। बठिंडा जेल को सुरक्षा के लिहाज से अधिक सुरक्षित माना जाता है।

6. राघव चड्ढा के समर्थन में शंकराचार्य: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाए गए राघव चड्ढा का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि राघव देश के ‘एसेट’ हैं और उन्हें पद से हटाकर आप (AAP) अपना ही नुकसान कर रही है।

7. लुधियाना में दंपती की सुसाइड की धमकी: लुधियाना में दीपा और संजीव शर्मा नामक दंपती ने वीडियो बनाकर आत्महत्या की चेतावनी दी है। महिला का आरोप है कि पड़ोसी उसे टॉर्चर कर रहे हैं और पुलिस उनकी बात नहीं सुन रही है।

8. श्री आनंदपुर साहिब हेरिटेज स्ट्रीट प्रोजेक्ट रद्द: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की आपत्तियों के बाद सरकार ने श्री आनंदपुर साहिब में बनने वाली हेरिटेज स्ट्रीट परियोजना को रद्द कर दिया है। मंत्री हरजोत बैंस ने कहा कि एसजीपीसी को डर था कि इस प्रोजेक्ट का क्रेडिट सरकार को न मिल जाए।

9. पूर्व मंत्री भुल्लर पर एक और धारा: डीएम गगनदीप रंधावा सुसाइड केस में जेल में बंद पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर पर सबूत मिटाने की एक और धारा (201) जोड़ दी गई है। उन पर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगा है।

10. पुलिस का डंडा-टोपी ले भागा युवक: जालंधर के नकोदर में एक नशेड़ी युवक नाके से पुलिस का डंडा और टोपी लेकर भाग गया। उसने पुलिस की गाड़ी भी चुराने की कोशिश की, लेकिन गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई। बाद में पुलिस ने उसे गांव से दबोच लिया।

भारत के अंतिम छोर पर स्थित स्वास्थ्य एवं कल्याण इकोसिस्टम को मजबूत बनाना
  • श्री प्रतापराव जाधव

अब जबकि भारत सभी के लिए न्यायसंगत, समावेशी और समग्र स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, हमें एक मौलिक प्रश्न पूछना होगा: हम अंतिम गांव के अंतिम व्यक्ति तक सही समय पर गुणवत्तापूर्ण देखभाल पहुंचना कैसे सुनिश्चित करें?

इसका जवाब केवल बुनियादी ढांचे के विस्तार या उन्नत प्रौद्योगिकियों के उपयोग में ही नहीं, बल्कि उन प्रणालियों को मजबूत करने में भी निहित है जो स्वाभाविक रूप से सुलभ, सस्ती और समुदायों के भरोसे पर खरे उतरते हों। इस संदर्भ में, होम्योपैथी भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के साथ-साथ एक मौन लेकिन शक्तिशाली ताकत के रूप में उभर रही है और जमीनी स्तर पर समग्र स्वास्थ्य से जुड़े बुनियादी ढांचे को बदल रही है।

हम यह दिखाई दे रहा है कि होम्योपैथी कैसे जनजातीय क्षेत्रों, ग्रामीण इलाकों और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी वाले शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण कमियों को दूर कर रही है। इसके प्रभाव का पता केवल व्यापकता से ही नहीं, बल्कि सबसे अधिक जरूरत वाले स्थानों – यानी अंतिम छोर – तक पहुंचने की क्षमता से भी चल रहा है।

अब जबकि हर वर्ष 10 अप्रैल को मनाया जाने वाला ‘विश्व होम्योपैथी दिवस’ करीब है, यह इस बात पर विचार करने का एक सही मौका है कि यह प्रणाली केवल व्यक्तिगत कल्याण ही नहीं बल्कि समग्र कल्याण का एक ऐसा मॉडल बनाने में भी योगदान दे रही है जो किफायती, पर्यावरण के अनुकूल और सामाजिक रूप से समावेशी हो। इस वर्ष विश्व होम्योपैथी दिवस की थीम “सतत स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी” है।

18वीं शताब्दी में सैमुअल हैनिमैन द्वारा विकसित और 19वीं शताब्दी में भारत लाई गई, होम्योपैथी “सिमिलिया सिमिलिबस क्यूरेंचर” यानी “समान से समान का उपचार” के सिद्धांत पर आधारित है। दशकों से एक समग्र और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए, यह भारत की बहुआयामी स्वास्थ्य एवं कल्याण प्रणाली का एक अभिन्न अंग बन गई है।

जमीनी स्तर पर होम्योपैथी की सबसे बड़ी खूबी इसकी निरंतर देखभाल सुनिश्चित करने की क्षमता है। कई पिछड़े इलाकों में स्वास्थ्य सेवा टुकड़ों में बिखरी हुई नहीं होती, बल्कि निरंतर  और रिश्तों से सचालित होती है। होम्योपैथी का व्यक्ति-केन्द्रित उपचार का दृष्टिकोण, खासतौर पर पुरानी बीमारियों, बार-बार होने वाले संक्रमणों और जीवनशैली संबंधी विकारों के प्रबंधन के क्रम में चिकित्सक और रोगी के बीच दीर्घकालिक जुड़ाव को बढ़ावा देता है। यह निरंतरता उपचार के प्रति रोगी के समर्पण और समग्र स्वास्थ्य से जुड़े नतीजों में उल्लेखनीय सुधार करती है।

आज भारत में 290 से अधिक होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हैं। साथ ही, देशभर में चिकित्सकों का एक विशाल नेटवर्क भी उपलब्ध है। फिर भी, होम्योपैथी के असली प्रभावों को संस्थानों में नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर – झारखंड के जनजातीय जिलों, छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में और हिमाचल प्रदेश की दूरदराज की बस्तियों में – बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। वहां एक अकेला चिकित्सक भी सामुदायिक स्वास्थ्य से जुड़े नतीजों में बदलाव ला सकता है।

होम्योपैथी की प्रमुख खूबियों में से एक इसकी सरलता भी है। दवाइयां किफायती होती हैं, इन्हें लाना-ले जाना आसान होता है और इनके भंडारण के लिए किसी जटिल भंडारण संरचना की जरूरत ही नहीं होती है। कमजोर आपूर्ति श्रृंखलाओं और सीमित स्वास्थ्य सेवा कर्मियों वाले इलाकों में, होम्योपैथी की ये विशेषताएं अनमोल हो जाती हैं।

जनजातीय समुदायों, जो हमारी आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और अक्सर बीमारियों का बेमेल बोझ झेलते हैं, के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को सांस्कृतिक रूप से भी अनुकूल होना चाहिए। होम्योपैथी का सौम्य और गैर-आक्रामक रवैया पारंपरिक उपचार पद्धतियों के अनुरूप है, जिससे यह अपेक्षाकृत अधिक स्वीकार्य और सुलभ हो जाता है।

इसी क्षमता को पहचानते हुए, भारत सरकार ने होम्योपैथी को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं साथ जोड़ने के लिए कई कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत, 12,500 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) स्थापित किए गए हैं, जो सामुदायिक स्तर पर होम्योपैथी सहित व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि होम्योपैथी भारत में गैर-संक्रामक रोगों से निपटने में भी योगदान दे रही है। केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) ने मधुमेह, हृदय रोग और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों से निपटने से संबंधित राष्ट्रीय कार्यक्रमों में होम्योपैथी को जोड़ा है। यह प्राथमिक देखभाल से परे इसकी प्रासंगिकता को दर्शाता है।

आपूर्ति के नए-नए मॉडल भी उतने ही उत्साहजनक हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के अंतर्गत सेवाओं के एक ही स्थान पर उपलब्ध होने की सुविधा ने पहुंच और विश्वास दोनों को बेहतर बनाया है। चलंत चिकित्सा इकाइयां जहां दूरदराज के इलाकों तक पहुंच रही हैं, वहीं सामुदायिक सहायता से जुड़ी पहलों और महामारी से निपटने से संबंधित कार्यक्रमों ने विभिन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य परिदृश्यों में होम्योपैथी की अनुकूलता को प्रदर्शित किया है।

शायद सबसे कारगर मॉडल बुनियादी होम्योपैथी में प्रशिक्षित सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का है। सही ज्ञान और रेफरल सिस्टम के सहयोग से, ये कार्यकर्ता न्यूनतम लागत पर स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार कर सकते हैं। स्वास्थ्य रक्षा जैसे कार्यक्रम और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीसीआरएच) द्वारा संचालित संपर्क संबंधी पहलों ने पहले ही दिखा दिया है कि समुदाय-आधारित दृष्टिकोण सार्थक नतीजे दे सकते हैं।

भविष्य को देखते हुए, सतत स्वास्थ्य एवं कल्याण के महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता। स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत, पुरानी बीमारियों का बढ़ता बोझ और रोगाणुरोधी प्रतिरोध जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने हेतु ऐसे समाधानों की जरूरत है जो न केवल कारगर हों बल्कि आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से व्यवहारिक भी हों।

होम्योपैथी इस दृष्टिकोण के साथ स्वाभाविक रूप से मेल खाती है। इसके कम लागत वाले उपचार परिवारों और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों पर वित्तीय बोझ को कम करते हैं। जबकि इसका न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार स्वास्थ्य और कल्याण संबंधी कार्यप्रणालियों का समर्थन करता है।

अब हमारा ध्यान इन प्रयासों को व्यापक स्तर पर कार्यान्वित करने पर होना चाहिए।  इन प्रयासों में कम सुविधा वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षण को मजबूत करना, दवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना, गहन अनुसंधान एवं दस्तावेजीकरण को बढ़ावा देना और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना शामिल है।

विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब भौगोलिक स्थिति या सामाजिक-आर्थिक हैसियत की परवाह किए बिना गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रत्येक नागरिक तक पहुंचेगी। होम्योपैथी, अपने गहरे सामुदायिक जुड़ाव और टिकाऊ दृष्टिकोण के साथ, इस लक्ष्य को हासिल  करने का मार्ग प्रशस्त करती है।

हमारी स्वास्थ्य प्रणाली की असली पहचान उसकी अत्याधुनिक सुविधाओं में नहीं, बल्कि हाशिए  पर रहने वाले लोगों की सेवा करने की उसकी क्षमता में निहित है। जब एक सरल और किफायती उपाय किसी दूरदराज के गांव में एक परिवार को राहत पहुंचाता है, तो यह इस    सशक्त विचार को पुष्ट करता है – कि भारत में स्वास्थ्य सेवाएं अधिक समावेशी, अधिक मानवीय और वास्तव में सार्वभौमिक होती जा रही हैं।

[लेखक आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं]

एनएसटीएफडीसी 10 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में अपना 25वां स्थापना दिवस मनाएगा

केंद्रीय मंत्री श्री जुएल ओराम इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे; अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को सम्मानित किया जाएगा
सरकार के जनजातीय मामलों के मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम (एनएसटीएफडीसी), 10 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली स्थित विश्व युवा केंद्र में अपना 25वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है 

वर्ष 2001 में स्थापित, एनएसटीएफडीसी देशभर में अनुसूचित जनजातियों के आर्थिक विकास के लिए समर्पित एक सर्वोच्च संगठन के रूप में कार्य करता है। निगम आय सृजन गतिविधियों के लिए राज्य चैनलिंग एजेंसियों के माध्यम से रियायती वित्तीय सहायता प्रदान करके आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

जनजातीय मामलों के माननीय केंद्रीय मंत्री श्री जुएल ओराम इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में जनजातीय मामलों के माननीय राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइके और जनजातीय मामलों के मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा के साथ-साथ पूर्व सीएमडी, वरिष्ठ अधिकारी और विशिष्ट अतिथि भी शामिल होंगे। उपस्थित लोगों का स्वागत एनएसटीएफडीसी के सीएमडी श्री टी. रूमुआन पैते करेंगे ।

समारोह के अंतर्गत, एनएसटीएफडीसी भारत भर के उन सफल अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को सम्मानित करेगा जिन्होंने एनएसटीएफडीसी योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करके स्थायी उद्यम स्थापित किए हैं। ये लाभार्थी विभिन्न जनजातीय समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्होंने पारंपरिक व्यंजन, स्वास्थ्य सेवाएँ, मुर्गी पालन, डेयरी, हस्तशिल्प, मत्स्य पालन, खुदरा व्यवसाय, सिलाई आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उद्यम स्थापित किए हैं।

इस कार्यक्रम में आदिवासी नृत्यों और नुक्कड़ नाटक सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल होंगे , जो आदिवासी समुदायों की समृद्ध विरासत और परंपराओं को दर्शाते हैं।

एनएसटीएफडीसी के अधिकारी इस समारोह का आयोजन बड़े उत्साह के साथ कर रहे हैं और आदिवासी सशक्तिकरण और समावेशी विकास की दिशा में समर्पित सेवा के 25 वर्षों के इस महत्वपूर्ण अवसर पर गणमान्य व्यक्तियों, हितधारकों और प्रतिभागियों का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ‘विश्व नवकार महामंत्र दिवस’ पर नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए

जिस समय विश्व के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, ऐसे समय में समस्त विश्व के कल्याण के लिए नवकार मंत्र का सामूहिक जाप करना अत्यंत सार्थक और प्रासंगिक है

आज जब विश्व को शांति की आवश्यकता है, ऐसे में नवकार मंत्र का सामूहिक उच्चारण वातावरण की शुद्धि के साथ-साथ मन के विकारों को शांत करने में भी सहायक होगा

नवकार मंत्र पूर्णतः निराकार, निरपेक्ष और सार्वभौमिक प्रार्थना है, जिसमें काल, जाति, क्षेत्र या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है

जब लोग श्रद्धापूर्वक एक ही मंत्र का सामूहिक जाप करते हैं, तो उससे न केवल व्यक्ति, बल्कि समूचे देश और विश्व का भी कल्याण होता है

भारत विविध संप्रदायों और धर्मों का देश है, जहाँ प्रत्येक परंपरा में मंत्रों की विशेष महत्ता और आध्यात्मिक शक्ति का वर्णन मिलता है

जब व्यक्ति नमन करता है, तभी से उसके अहंकार के पिघलने की शुरुआत हो जाती है

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ‘विश्व नवकार महामंत्र दिवस’ पर नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

इस अवसर पर श्री अमित शाह ने कहा कि जब विश्व के विभिन्न हिस्सों में अपने विचारों को स्थापित करने के लिए संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, ऐसे समय में यहां से समस्त विश्व के कल्याण हेतु नवकार मंत्र का सामूहिक जाप किया जाना अत्यंत सार्थक और प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि भारत विविध संप्रदायों और धर्मों का देश है, जहाँ प्रत्येक परंपरा में मंत्रों की विशेष महत्ता और आध्यात्मिक शक्ति का वर्णन मिलता है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मंत्र मानव जीवन को उच्च दिशा प्रदान करते हैं, हमारे चैतन्य को जागृत करते हैं और शुभ संकल्पों को सुदृढ़ बनाते हैं। उन्होंने कहा कि जब लोग श्रद्धापूर्वक एक ही मंत्र का सामूहिक जाप करते हैं, तो उससे न केवल व्यक्ति, बल्कि समूचे देश और विश्व का भी कल्याण होता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि हमारे सिद्धों ने पीढ़ियों तक अथक साधना कर समस्त मानवता के कल्याण के लिए इन मंत्रों की रचना की है। हमें श्रद्धापूर्वक स्वीकार इन्हें कर उनका अनुकरण भी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नवकार मंत्र पूर्णतः निराकार, निरपेक्ष और सार्वभौमिक प्रार्थना है, जिसमें काल, जाति, क्षेत्र या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता है। विश्व में इस प्रकार की समावेशी और सर्वमान्य प्रार्थना मिलना अत्यंत दुर्लभ है। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रार्थना उन महान आत्माओं के गुणों की वंदना है, जिन्होंने अपने कर्मों पर विजय प्राप्त कर आत्मज्ञान और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया। इस महामंत्र में ‘नमो’ शब्द का अर्थ पूर्ण समर्पण है, जो साधक को अपने भीतर के अहंकार का परित्याग कर आत्मशुद्धि की दिशा में अग्रसर करता है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जब व्यक्ति नमन करता है, तभी से उसके अहंकार के पिघलने की शुरुआत हो जाती है। उन्होंने कहा कि ‘अरिहंत’ वह होता है जो ‘अरि’ अर्थात् आंतरिक शत्रुओं का ‘हंत’ करता है। ये शत्रु शरीर, मन, भाव, स्वभाव और प्रकृति में निहित वे विकार हैं, जो मोक्ष की प्राप्ति में बाधक बनते हैं। जो साधक इन आंतरिक शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर लेता है, वही अरिहंत कहलाता है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि केवल ज्ञान की प्राप्ति, क्रोध, मान, माया और लोभ पर पूर्ण विजय और जैन शास्त्रों में वर्णित 12 दिव्य गुणों से परिपूर्ण व्यक्ति को ‘अरिहंत’ माना गया है, और हम ऐसे अरिहंतों को नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि यहां ‘सिद्धों’ को भी नमन किया गया है। जो आत्मा पूर्ण रूप से मुक्त अवस्था को प्राप्त कर लेती है, उसे सिद्ध कहा जाता है। जिन्होंने आठ कर्मों का क्षय कर जन्म-मृत्यु के चक्र से ऊपर उठकर आठ शुद्ध गुणों को प्राप्त किया है, वे सिद्ध कहलाते हैं। हम ऐसे असंख्य सिद्धों को नमन करते हुए उनसे आशीर्वाद की कामना करते हैं।

श्री अमित शाह ने कहा कि यहां आचार्यों को भी नमन किया जाता है, जो संघ के प्रमुख होते हैं। अनुशासन की स्थापना, महाव्रतों का पालन तथा समस्त साधकों को मार्गदर्शन प्रदान करना आचार्य की प्रमुख जिम्मेदारी होती है। जिनके आचरण का अनुसरण कर मुक्ति का मार्ग प्राप्त हो, वही आचार्य कहलाते हैं। जैन शास्त्रों के अनुसार 36 गुणों से युक्त व्यक्ति को आचार्य पद की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार उपाध्यायों, यानी शिक्षक संतों को भी नमन किया जाता है। उनका दायित्व शास्त्रों का गहन अध्ययन करना तथा उनके ज्ञान का व्यापक प्रचार-प्रसार करना होता है। निर्धारित 25 गुणों की सिद्धि के पश्चात ही वे उपाध्याय पद को प्राप्त करते हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि साधु, तपस्वी और साधक वे होते हैं, जो संयम, त्याग, महाव्रत और तप का पालन करते हुए क्रमशः अपने भीतर 27 गुणों का विकास करते हैं; ऐसे गुणों से युक्त व्यक्ति को साधु कहा जाता है। उन्होंने कहा कि यह मंत्र पांच परमेष्ठियों को नमन करने का प्रतीक है। इसके मूल भाव के अनुसार इन पांच परमेष्ठियों को दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहली श्रेणी ‘देव’ की है, जिसमें वे महापुरुष आते हैं जो सामान्य मानव से ऊपर उठकर अरिहंत और सिद्ध की अवस्था को प्राप्त कर चुके हैं। दूसरी श्रेणी ‘गुरु’ की है, जिसमें आचार्य, उपाध्याय और साधु सम्मिलित हैं। उन्होंने कहा कि इन दोनों श्रेणियों के सभी पांचों प्रकार के महान व्यक्तित्वों को नमन कर उनके गुणों को आत्मसाध करने तथा उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने की भावना ही नवकार मंत्र का मूल सिद्धांत है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हम 108 गुणों को सामूहिक रूप से नमन करते हैं, जो अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु में निहित होते हैं। इन सभी के गुणों को एक साथ स्मरण और वंदन करने का प्रयास अत्यंत अल्प समय में किया जाता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि भले ही इस मंत्र का गूढ़ अर्थ उन्हें तुरंत पूर्णतः समझ में न आए—जिसकी गहराई को किसी आचार्य, मुनि या विद्वान संत के मार्गदर्शन में ही भलीभांति समझा जा सकता है—फिर भी इसका अभ्यास कभी न छोड़ें।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नवकार मंत्र की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है, जिसमें 24 तीर्थंकरों और उनके अनुयायियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रारंभ में यह मंत्र मौखिक रूप से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ता रहा,  उसके बाद शिलालेखों के माध्यम से और बाद में विभिन्न ग्रंथों में इसे स्थान प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि इस मंत्र के संरक्षण और प्रसार के लिए समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के जीवन को दिव्यता और सकारात्मक दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि आज जब विश्व को शांति की आवश्यकता है, ऐसे में नवकार मंत्र का सामूहिक उच्चारण वातावरण की शुद्धि के साथ-साथ मन के विकारों को शांत करने में भी सहायक होगा। इससे परस्पर समझ, सौहार्द और एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता को भी बल मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री श्री प्रतापराव जाधव विश्व होम्योपैथी दिवस-2026 के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले दो-दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन करेंगे

आयुष मंत्रालय 10 अप्रैल, 2026 को विज्ञान भवन में विश्व होम्योपैथी दिवस-2026 मनाएगा।  इस अवसर पर दो-दिवसीय संवादात्मक संगोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा। इस संगोष्ठी में प्रमुख नीति निर्माता, शोधकर्ता, चिकित्सक और प्रतिनिधि एक साथ आकर सतत स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण में होम्योपैथी की उभरती भूमिका पर विचार-विमर्श करेंगे।

इस संगोष्ठी का विषय सतत स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी” है। इस वर्ष का आयोजन इस बात पर प्रकाश डालेगा कि होम्योपैथी किस प्रकार स्वास्थ्य सेवा के लिए एक समग्र, लागत प्रभावी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण प्रदान करती है – जो सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों, विशेष रूप से अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण पर सतत विकास लक्ष्य 3 (एसडीजी 3) जैसी वैश्विक प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

इस कार्यक्रम में आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा के साथ-साथ देश भर के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और प्रख्यात विशेषज्ञ उपस्थित रहेंगे।

केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में होम्योपैथी के क्षेत्र में प्रमुख अनुसंधान उन्नयन, जन स्वास्थ्य पहल और नीतिगत विकास को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें वैज्ञानिक मान्यता, नैतिक मानकों को मजबूत करने और होम्योपैथी को स्वास्थ्य प्रणालियों के मुख्यधारा में एकीकृत करने पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

स्वास्थ्य देखभाल की बढ़ती लागत, पुरानी बीमारियों के बढ़ते बोझ और रोगाणुरोधी प्रतिरोध जैसी बढ़ती चिंताओं के संदर्भ में, यह आयोजन एक स्थायी चिकित्सा प्रणाली के रूप में होम्योपैथी की क्षमता को रेखांकित करेगा – जो न्यूनतम पारिस्थितिक पदचिह्न, संसाधनों के तर्कसंगत उपयोग और शरीर के जन्मजात उपचार तंत्र को उत्तेजित करने पर केंद्रित है।

विशेष सत्रों में निवारक और संवर्धक स्वास्थ्य देखभाल, जीवनशैली संबंधी और पुराने रोगों के प्रबंधन में होम्योपैथी की भूमिका और पारंपरिक औषध चिकित्सा पर निर्भरता कम करने में इसके योगदान पर चर्चा की जाएगी। साथ ही, पर्यावरण के अनुकूल औषधीय पद्धतियों, जैव विविधता संरक्षण और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ पारंपरिक ज्ञान को एकीकृत करने के महत्व पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

पिछले कुछ वर्षों में, देश में और वैश्विक स्तर पर, विशेष रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य देखभाल और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी पहलों में, होम्योपैथी की स्वीकार्यता में वृद्धि देखी गई है। आयुष मंत्रालय साक्ष्य-आधारित पद्धतियों, बेहतर पहुंच और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में एकीकरण के माध्यम से इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

विश्व होम्योपैथी दिवस-2026 से पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने में भारत के नेतृत्व को और मजबूत करने तथा एक लचीला, समावेशी और सतत स्वास्थ्य सेवा इकोसिस्टम बनाने के उद्देश्य से किए जा रहे प्रयासों को नई गति प्रदान करने की उम्मीद है।

यह आयोजन हितधारकों के बीच संवाद, सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में भी काम करेगा जिससे एक ऐसे भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा जहां स्वास्थ्य सेवा न केवल प्रभावी हो बल्कि न्यायसंगत, पर्यावरण के प्रति जागरूक और टिकाऊ भी हो।

उच्च शिक्षा विभाग ने मिशन साधना सप्ताह 2026 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) पर एक संवादपूर्ण सत्र का आयोजन किया

उच्च शिक्षा विभाग ने 2 अप्रैल से 8 अप्रैल, 2026 तक मनाए गए स्ट्रेंथनिंग एडैप्टिव डेवलपमेंट एंड ह्यूमेन एप्टिट्यूड फॉर नेशनल एडवांसमेंट (साधना) सप्ताह 2026 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) पर एक संवादपूर्ण सत्र का सफलतापूर्वक आयोजन किया।

यह सप्ताह क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) के स्थापना दिवस तथा नागरिक-केंद्रित सुशासन के लिए भारत की एक महत्वपूर्ण पहल, मिशन कर्मयोगी के पाँच वर्ष पूरे होने का प्रतीक है।

स्वागत भाषण उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव (प्रशासन) सैयद एकराम रिज़वी द्वारा दिया गया, जिन्होंने मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत क्षमता विकास आयोग की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि यह नागरिक-केंद्रित सुशासन के लिए ज्ञान, कौशल और क्षमता बढ़ाने हेतु विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध कराता है।

यह सत्र समकालीन शिक्षा, अनुसंधान और शासन में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता पर संरचित सहकर्मी अधिगम (पियर लर्निंग) तथा सार्थक विचार-विमर्श को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार किया गया था। इसमें यह भी रेखांकित किया गया कि भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपराएँ समस्या-समाधान, नवाचार और नीतिनिर्माण के आधुनिक दृष्टिकोणों को कैसे दिशा प्रदान कर सकती हैं।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण आईआईटी हैदराबाद के बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहन राघवन् का संबोधन था। ये हेरिटेज साइंस एंड टैक्नोलॉजी विभाग के संस्थापक प्रमुख रहे हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से भी जुड़े हुए हैं। डॉ. राघवन् ने अपने अंतर्विषयी कार्य से प्राप्त अनुभव साझा किए, जो प्रौद्योगिकी, विज्ञान और भारत की ज्ञान परंपराओं के बीच सेतु का कार्य करते हैं।

प्रोफेसर महोदय ने रेखांकित किया कि भले ही भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) की बाजार संभावनाएँ व्यापक हैं, किंतु इसकी वास्तविक शक्ति उच्च शिक्षा में इसकी परिवर्तनकारी भूमिका में निहित है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आईकेएस को एक अलग विषय के रूप में नहीं, बल्कि एक बहु-विषयी रूपरेखा के रूप में देखा जाना चाहिए, जो विज्ञान, अभियांत्रिकी, मानविकी और प्रबंधन जैसे मौज़ूदा शैक्षणिक क्षेत्रों को समृद्ध कर सकती है। उच्च शिक्षा में आईकेएस के एकीकरण के माध्यम से विश्वविद्यालय रटने पर आधारित लर्निंग से आगे बढ़कर ऐसे समग्र मॉडल की ओर अग्रसर हो सकते हैं, जो ज्ञान, अनुप्रयोग और मूल्यों (धर्म) का समन्वय करता है। प्रोफेसर ने इस बात का भी उल्लेख किया कि यह दृष्टिकोण समकालीन शैक्षिक सुधारों के अनुरूप है, जो भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत पर आधारित अनुसंधान, नवाचार और समालोचनात्मक चिंतन को प्रोत्साहित करता है। आईकेएस को अपनाने वाले संस्थान अंतर्विषयी कार्यक्रम विकसित कर सकते हैं, मौलिक अनुसंधान को बढ़ावा दे सकते हैं तथा ऐसे स्नातक तैयार कर सकते हैं, जो न केवल दक्ष पेशेवर हों, बल्कि सांस्कृतिक रूप से सजग और सामाजिक रूप से उत्तरदायी नागरिक भी हों। उन्होंने बल दिया कि इस प्रकार का एकीकरण एक ऐसे शिक्षा तंत्र के निर्माण के लिए आवश्यक है, जो भविष्य के लिए तैयार हो, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो और अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ हो।

इसके पश्चात एक रोचक प्रश्नोत्तर सत्र के रूप में प्रतिभागियों के साथ संवाद हुआ। सत्र में एक समेकित शिक्षा प्रणाली को आकार देने में भारतीय ज्ञान प्रणाली की निरंतर प्रासंगिकता तथा सतत् राष्ट्रीय प्रगति के लिए शासन प्रक्रियाओं में पारंपरिक ज्ञान को समाहित करने के महत्व पर बल दिया गया।

इस सत्र में शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। विचार प्रवर्तक नेताओं और व्यवहारिक विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर, उच्च शिक्षा विभाग ने मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत ज्ञान-आधारित, अनुकूलनशील और मानवीय शासन तंत्र के संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की।

स्वच्छ भारत मिशन- अर्बन 2.0 के तहत नवाचार, गरिमा और समावेशी विकास की नई कहानी

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सैनिटेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर और नागरिक सहभागिता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिले हैं। राज्यों ने बुनियादी ढांचे के विकास से लेकर व्यवहार परिवर्तन तक, कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। इन उपलब्धियों के बीच गुजरात ने तकनीकी नवाचार और सामाजिक कल्याण को जोड़कर स्वच्छता कर्मियों के जीवन स्तर को सुधारने कि दिशा में एक अग्रणी और प्रेरक मॉडल प्रस्तुत किया है।

राजकोट ने उन्नत रोबोटिक तकनीक को अपनाकर सीवर सफाई में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। 2.29 करोड़ रुपये की लागत वाली इस पहल ने खतरनाक मैनुअल सफाई को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब सफाईमित्र ‘रोबोट ऑपरेटर’ के रूप में काम कर रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा, सामाजिक स्थिति और कार्य दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह पहल “जीरो-ह्यूमन-एंट्री” विज़न को साकार करने की दिशा में एक मजबूत प्रयास है ताकि सफाईमित्रों को सीवर में सीधे प्रवेश का जोखिम ना उठाना पड़े।

साथ ही, राजकोट नगर निगम द्वारा सफाई कर्मियों के लिए आधुनिक सामुदायिक भवन का निर्माण इस दिशा में एक सराहनीय कदम है। यह भवन न केवल सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए समर्पित स्थान प्रदान करेगा, बल्कि सफाई कर्मियों को गरिमा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर भी देगा। इसमें विवाह एवं कार्यक्रम हॉल, रसोई, भोजन कक्ष, पार्किंग और अन्य आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं, जो लगभग 5000 से अधिक सफाई कर्मियों के परिवारों को लाभान्वित करेंगी।

वहीं, भरूच नगर पालिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला सफाईमित्रों के लिए आयोजित स्वास्थ्य शिविर भी गुजरात की संवेदनशीलता को दर्शाता है। 108 महिला कर्मियों के लिए आयोजित इस शिविर में स्वास्थ्य जांच, दवाइयों का वितरण और पोषण एवं स्वच्छता पर नियमित मार्गदर्शन दिया जा रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य और जागरूकता में वृद्धि हुई। इन पहलों के माध्यम से स्पष्ट होता है कि गुजरात न केवल स्वच्छता के क्षेत्र में अग्रणी है, बल्कि वह अपने स्वच्छता कर्मियों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए भी प्रतिबद्ध है। SBM-U 2.0 के तहत राज्य ने तकनीक, संरचना और सामाजिक कल्याण को एक साथ जोड़कर एक संतुलित और सस्टेनेबल डेवलपमेंट मॉडल प्रस्तुत किया।  

अंततः, गुजरात की ये सारी पहल यह दर्शाती हैं कि स्वच्छता केवल दैनिक सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सम्मान, सुरक्षा और समानता से जुड़ी एक व्यापक सोच है। यदि इसी तरह नवाचार और समावेशी दृष्टिकोण अपनाया जाता रहा, तो “स्वच्छ भारत” का सपना न केवल साकार होगा, बल्कि एक सशक्त और गरिमामय समाज की नींव भी मजबूत होगी।

कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने पी.ए.यू. लुधियाना में उत्तरी भारत की पहली केंद्रीय धुरवी सिंचाई प्रणाली का किया उद्घाटन

मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने पानी संरक्षण के लिए नई तकनीक अपनाने पर दिया जोर

सिर्फ एक चक्र में 3 एकड़ खेत की होगी सिंचाई, खेती में ए.आई. और नवाचार अपनाने की अपी

पंजाब के मिट्टी एवं जल संरक्षण, खान एवं भू-विज्ञान तथा जल संसाधन मंत्री श्री बरिंदर कुमार गोयल ने बुधवार को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पी.ए.यू.), लुधियाना में राज्य की पहली केंद्रीय धुरवी सिंचाई प्रणाली का उद्घाटन किया। यह उत्तरी भारत में आधुनिक, स्वचालित सिंचाई तकनीक की पहली स्थापना है।

इस अवसर पर पी.ए.यू. के वाइस चांसलर डॉ. सतबीर सिंह गोसल, डी.जी.एम. नाबार्ड अमित गर्ग तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। प्रगतिशील किसान, वैज्ञानिक, फैकल्टी सदस्य तथा मृदा एवं जल संरक्षण, कृषि, बागवानी और अन्य संबद्ध विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उद्घाटन समारोह में शामिल हुए।

इस मौके पर बोलते हुए कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने वैज्ञानिकों, अधिकारियों और विद्यार्थियों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) के उभरते युग में नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने और अत्याधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की। उन्होंने पंजाब में भूजल की नाजुक स्थिति को उजागर करते हुए जल संरक्षण के लिए आधुनिक सिंचाई तरीकों को बढ़ावा देने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

बरिंदर गोयल ने पंजाब सरकार की भूजल संरक्षण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कृषि में सतही जल के उपयोग को बढ़ाने के लिए किए गए महत्वपूर्ण प्रयासों की सराहना की। उन्होंने पंजाब में उन्नत केंद्रीय धुरवी सिंचाई प्रणाली की शुरुआत के लिए मृदा एवं जल संरक्षण विभाग की प्रशंसा की तथा पी.ए.यू. में इस अग्रणी प्रदर्शन परियोजना को वित्तीय सहायता देने के लिए नाबार्ड का धन्यवाद किया।

तकनीक का वर्णन करते हुए मंत्री ने कहा कि केंद्रीय धुरी सिंचाई प्रणाली एक बार में पूर्णतः स्वचालित सिंचाई समाधान प्रदान करती है, जो विशेष रूप से श्रमिकों की कमी से जूझ रहे पंजाब के खेतों के लिए लाभदायक है। इस प्रणाली को किसी भी प्रकार के मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती और 3 एकड़ के खेत के लिए सटीक सिंचाई केवल आवश्यक डेटा दर्ज करके प्राप्त की जा सकती है, जिससे पूरा कार्य एक ही चक्र में पूरा हो जाता है।
उन्होंने पंजाब के कृषि और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में नाबार्ड द्वारा लागू की जा रही विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने इस प्रकार की नवाचारी और मार्गदर्शक पहलों के लिए पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया, साथ ही चल रहे और आगामी परियोजनाओं के लिए निरंतर सहयोग का भी भरोसा दिलाया।

विधायक अशोक पाराशर पप्पी के नेतृत्व में विभिन्न दलों के नेता आम आदमी पार्टी में शामिल हुए।

विधायक अशोक पाराशर पप्पी के नेतृत्व में विभिन्न दलों के नेता आम आदमी पार्टी में शामिल हुए और जनहितैषी नीतियों पर भरोसा जताया। आज आम आदमी पार्टी के जनहितैषी और विकासोन्मुखी कार्यों से प्रभावित होकर विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े कई प्रमुख नेताओं ने पार्टी में शामिल होने की घोषणा की। इस अवसर पर समारोह में उत्साहपूर्ण वातावरण के बीच, नए सदस्यों ने पार्टी की नीतियों और जन-केंद्रित सोच की सराहना करते हुए अपना विश्वास व्यक्त किया।

आम आदमी पार्टी में शामिल होने वालों में कावलजीत सिंह बावा ओबेरॉय, एकजोत ओबेरॉय, सिमरनजीत सहगल, जशन ढल, जस नूर, नरिंदर कौर, आशा, ममता, मनदीप सिंह और विजय गुजराती शामिल हैं। इन सभी ने आम आदमी पार्टी की सिद्धांतवादी राजनीति और पारदर्शी शासन से प्रभावित होकर यह कदम उठाया है।

इस अवसर पर विधायक अशोक पाराशर पप्पी ने सभी नए सदस्यों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी हमेशा से आम जनता की आवाज को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध रही है।
उन्होंने कहा कि पार्टी में शामिल होने वाले प्रत्येक सदस्य को उचित सम्मान दिया जाएगा और उनकी योग्यता और अनुभव का उपयोग जन कल्याण कार्यों में किया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा चलाए जा रहे विकास कार्यों और जन कल्याण योजनाओं के कारण जनता का विश्वास लगातार बढ़ रहा है, जिसका स्पष्ट प्रमाण विभिन्न दलों के नेताओं का पार्टी में शामिल होना है।
अंत में, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नए सदस्यों के शामिल होने से पार्टी और मजबूत होगी और लोगों की सेवा अधिक तेजी से और प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।