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PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…24-04-2026

पंजाब डेस्क: आज पंजाब और चंडीगढ़ की हलचल भरी खबरों में राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय घटनाओं तक कई बड़े अपडेट सामने आए हैं।सबसे बड़ी खबर राजनीति के गलियारे से है, जहाँ राघव चड्ढा ने 7 सांसदों के साथ आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है, जिससे प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया है।

दूसरी तरफ, अकाली दल (वारिस पंजाब दे) ने एक बड़ा दांव खेलते हुए जेल में बंद अमृतपाल सिंह को 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर दिया है।कनाडा से भी दो बड़ी और चिंताजनक खबरें आईं, जहाँ एक पंजाबी युवती की पार्क की बेंच पर रहस्यमयी मौत हो गई और एक बुजुर्ग को नस्लीय हमले का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, प्रशासन की ओर से आज रात होने वाली ब्लैकआउट मॉक ड्रिल और ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ वेब सीरीज पर लगा प्रतिबंध भी सुर्खियों में रहा। लुधियाना में एक NRI महिला की बहादुरी और चंडीगढ़ में 2 करोड़ की रंगदारी की मांग ने भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए है।

राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने छोड़ी AAP, BJP में शामिल: राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 2 अन्य सांसदों (संदीप पाठक और अशोक मित्तल) के साथ भाजपा का दामन थाम लिया है। उन्होंने दावा किया कि AAP के कुल 7 सांसद उनके साथ हैं और वे खुद को भाजपा में विलय करेंगे ताकि दलबदल कानून से बचा जा सके।

कनाडा में लुधियाना की बेटी की पार्क की बेंच पर मौत: लुधियाना की रहने वाली 26 वर्षीय अनमोलदीप कौर की कनाडा के ओंटारियो में एक पार्क की बेंच पर बैठे-बैठे मौत हो गई। वह वर्क परमिट पर वहां रह रही थी और अपनी मां को भी वहां बुलाने की तैयारी में थी।

चंडीगढ़ में ससुराल वालों ने की बहू की हत्या: धनास में एक महिला की मौत को उसके पति और सास-ससुर ने कुदरती मौत बताने की कोशिश की। पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पति ने माता-पिता के साथ मिलकर पत्नी प्रतिमा की हत्या की थी।

कनाडा में पंजाबी बुजुर्ग के साथ नस्लीय बदतमीजी: कनाडा के वुडस्टाक में एक नकाबपोश युवक ने एक बुजुर्ग पंजाबी को धक्का दिया और उन्हें ‘इंडिया वापस जाओ’ कहकर नस्लीय टिप्पणियां कीं। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

अमृतपाल सिंह 2027 चुनाव के लिए CM फेस घोषित: अकाली दल (वारिस पंजाब दे) ने घोषणा की है कि जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह 2027 के विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी के मुख्यमंत्री पद का चेहरा होंगे।

चंडीगढ़ के कारोबारी से 2 करोड़ की रंगदारी की मांग: बंबीहा गैंग के नाम पर एक इमिग्रेशन कारोबारी को विदेशी नंबर से कॉल आई और 2 करोड़ रुपए मांगे गए। पुलिस के सामने ही आरोपी ने दोबारा कॉल कर धमकी दी, जिसकी जांच जारी है।

पंजाब में आज रात 15 मिनट का ब्लैकआउट: युद्ध जैसे आपातकालीन हालातों से निपटने के लिए आज रात 8:00 से 8:15 बजे तक पूरे पंजाब में ब्लैकआउट की मॉक ड्रिल की जाएगी। इस दौरान सभी लाइटें, जनरेटर और टॉर्च बंद रखने के निर्देश हैं।

लॉरेंस ऑफ पंजाब’ वेब सीरीज पर केंद्र की रोक: गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन पर आधारित वेब सीरीज पर केंद्र सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है। पंजाब पुलिस और लॉरेंस के परिवार ने इस सीरीज का विरोध किया था।

पंजाब में 30 अप्रैल से जनगणना का पहला चरण: राज्य में जनगणना की प्रक्रिया 30 अप्रैल से शुरू हो रही है। पहले चरण में कर्मचारी घर-घर जाकर मकानों की सूची बनाएंगे और नागरिकों से 33 सवाल पूछेंगे।

लुधियाना में लुटेरे से भिड़ी NRI महिला: ग्रीस से आई एक NRI महिला और उसकी बहन ने अपनी बहादुरी से एक चेन स्नैचर को दबोच लिया और उसकी जमकर पिटाई की। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।

AAP को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका: राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल; दलबदल कानून से बचने का बनाया प्लान

पंजाब डेस्क : आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। पार्टी के प्रमुख चेहरे और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार शाम को अपने 6 अन्य साथी सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। चंडीगढ़ में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल को पार्टी की सदस्यता दिलाई।

7 सांसदों ने छोड़ी पार्टी, नहीं लगेगा दलबदल कानून : राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि AAP के कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 ने पार्टी छोड़ दी है। उनके साथ भाजपा में शामिल होने वाले प्रमुख नामों में संदीप पाठक, अशोक मित्तल (LPU चेयरमैन), हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंदर गुप्ता शामिल हैं। राघव ने स्पष्ट किया कि चूंकि पार्टी के दो-तिहाई सांसदों ने यह फैसला लिया है, इसलिए उन पर दलबदल कानून (Anti-defection law) लागू नहीं होगा और वे खुद को भाजपा में मिला लेंगे।

लंबे समय से मिल रहे थे संकेत: राघव चड्ढा का यह कदम अचानक नहीं माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, 2024 में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी और 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में AAP की करारी हार (जहां पार्टी को सिर्फ 22 सीटें मिलीं) के समय से ही राघव ने पार्टी से दूरी बनाना शुरू कर दिया था। उन्होंने अपने सोशल मीडिया से AAP का बैनर हटा दिया था और कई मौकों पर पार्टी व्हिप के खिलाफ जाकर सदन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।

ED छापे और राजनीतिक दबाव: सांसद अशोक मित्तल का भाजपा में जाना भी चर्चा का विषय है, क्योंकि जालंधर में उनके घर पर 15 अप्रैल को ED ने छापेमारी की थी, जिसके ठीक 10वें दिन उन्होंने पाला बदल लिया। वहीं, स्वाति मालीवाल ने कहा कि वह फिलहाल इटानगर में हैं और दिल्ली लौटकर अपना पक्ष रखेंगी। AAP के इतिहास में अब तक 35 बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा 20 नेता पंजाब से हैं।

पंजाब में 30 अप्रैल से शुरू होगा जनगणना 2027 का पहला चरण

चंडीगढ़/सत्ता संदेश

जनगणना 2027 के चरण-I (हाउसलिस्टिंग और आवासीय जनगणना) तथा स्व-गणना की शुरुआत पर विशेष जोर देते हुए मीडिया को जानकारी देने के लिए, पंजाब और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के जनगणना संचालन निदेशालय की निदेशक डॉ. नवजोत खोसा आईएएस और पंजाब के स्थानीय सरकार विभाग के प्रशासकीय सचिव श्री मनजीत सिंह बराड़ आईएएस द्वारा एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया। भारत में जनगणना जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के प्रावधानों के तहत की जाती है। जनगणना 2027 भारत में 16वीं जनगणना होगी और स्वतंत्रता के बाद आठवीं। पिछली जनगणना 2011 में की गई थी, जबकि 2021 की जनगणना को कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था।

यह जानकारी दी गई कि जनगणना का डेटा सामाजिक-आर्थिक और जनसांख्यिकीय जानकारी के एक व्यापक स्रोत के रूप में काम करता है और विकास योजना, कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण और सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी। चरण-I, जिसमें 30 अप्रैल, 2026 से 14 मई, 2026 तक स्व-गणना और इसके बाद 15 मई, 2026 से 13 जून, 2026 तक घर-घर जाकर जनगणना शामिल है और चरण-II जनसंख्या गणना, 9 फरवरी, 2027 से 28 फरवरी, 2027 तक निर्धारित है। चरण-I का ध्यान आवास की स्थिति, सुविधाओं और परिसंपत्तियों पर रहेगा और यह जनसंख्या गणना चरण के लिए आधार का काम करेगा।

डॉ. नवजोत खोसा ने बताया कि जनगणना 2027 पहली बार डिजिटल मोड में मोबाइल एप्लिकेशन के साथ-साथ ऑनलाइन पोर्टल (https://se.census.gov.in) के माध्यम से स्व-गणना शुरू करने के साथ आयोजित की जाएगी। लोग निर्धारित अवधि के दौरान अपना विवरण भरकर जमा करने पर एक अद्वितीय स्व-गणना संदर्भ आईडी प्राप्त करेंगे, जिसे क्षेत्र सत्यापन के दौरान गणना करने वाले कर्मचारी के साथ साझा किया जाएगा। जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली के माध्यम से वास्तविक समय की निगरानी की जाएगी और मकान सूचीकरण ब्लॉक के निर्माण के लिए वेब-आधारित मैपिंग का उपयोग किया गया है।

मनजीत बराड़, जनगणना के राज्य नोडल अधिकारी, ने सूचित किया कि व्यापक प्रशासनिक व्यवस्थाएं की गई हैं। इनमें पूरे राज्य में मकान सूचीकरण ब्लॉक का निर्माण और अनुमानित 67,000 गणना करने वाले कर्मचारियों तथा पर्यवेक्षकों (आरक्षित सहित) की नियुक्ति शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि जनगणना कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण एक व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से किया गया है। पंजाब में, 52 मास्टर प्रशिक्षकों (राज्य से 36 और डीसीओ, पंजाब से 16) और 932 फील्ड प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। गणना करने वाले कर्मचारियों और पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण 16 अप्रैल से 9 मई 2026 तक राज्य भर के विभिन्न स्थानों पर चल रहा है, जो जनगणना कार्य के सुचारु और प्रभावी संचालन के लिए तैयारी सुनिश्चित करता है।

मीडिया की भूमिका पर ज़ोर देते हुए कहा गया कि मीडिया लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है। मीडिया से जन जागरूकता फैलाने, सार्वजनिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने और गलत सूचना, विशेष रूप से अंकीय गणना और डेटा की गोपनीयता से संबंधित भ्रांतियों को दूर करने में सक्रिय भूमिका निभाने का अनुरोध किया गया था। निवासियों से जनगणना में सक्रिय रूप से भाग लेने, सटीक जानकारी प्रदान करने और गणना करने वालों को पूर्ण सहयोग देने का आग्रह किया गया। यह दोहराया गया कि एकत्र की गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

जनगणना 2027 के लिए एक राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर (1855) पंजाब में 30.04.2026 से जनता को स्वयं-जनगणना, मकान सूचीकरण अभियानों और शिकायत निवारण से संबंधित प्रश्नों में सहायता करने के लिए चालू रहेगा।

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की IMPCC बैठक में सरकारी योजनाओं के प्रचार को मजबूत करने और फेक जानकारी से निपटने पर जोर

चंडीगढ़/सत्ता संदेश

भारत सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) ने केंद्र सरकार के विशेष कार्यक्रमों के लिए प्रचार और संचार रणनीति को बेहतर बनाने पर विचार विमर्श के लिए इंटर मीडिया पब्लिसिटी कोऑर्डिनेशन कमेटी (IMPCC) की एक मीटिंग आयोजित की। मीटिंग में जनगणना और पेट्रोलियम व एलपीजी की उपलब्धता पर विशेष ज़ोर दिया गया।

यह मीटिंग हरियाणा जनगणना संचालन निदेशालय, जनगणना भवन, सेक्टर-19, चंडीगढ़ में हुई। मीटिंग में केंद्र और राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

लोगों को संबोधित करते हुए, हरियाणा के जनगणना निदेशालय के निदेशक डॉ. ललित जैन ने राज्य में  जनगणना गतिविधियों में मदद करने और ज़्यादा लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राज्य में चल रहे आउटरीच कार्यक्रमों का विवरण दिया।

 पेट्रोलियम सप्लाई से जुड़ी जागरूकता बढ़ाने के बारे में जानकारी देते हुए, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के  महाप्रबंधक, श्री अंजनी कुमार ने क्षेत्र में पेट्रोलियम व एलपीजी की उपलब्धता और सप्लाई के बारे में मौजूदा स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बिना किसी रुकावट के कंज्यूमर की डिमांड पूरी करने के लिए सभी रिटेल आउटलेट्स और एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरस पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। श्री कुमार ने इंडियन ऑयल द्वारा एलपीजी और पेट्रोलियम की पैनिक खरीद और जमाखोरी को रोकने के लिए चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के बारे में भी बताया और विभागों से जनता तक सही जानकारी पहुँचाने में मदद करने की अपील की।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए, प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ कम्युनिकेशन, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की डिप्टी डायरेक्टर, सुश्री सपना ने सरकारी योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुँचाने में एकीकृत मीडिया आउटरीच कार्यक्रमों की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया। पीआईबी और सीबीसी की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, उन्होंने सभी विभागों को टारगेटेड पब्लिसिटी मुहिम तैयार करने, स्थानीय भाषाओं पर कंटेंट बनाने, और जनगणना की गतिविधियों और पेट्रोलियम संरक्षण जैसी विशेष मुहिम बढ़ाने में पूरा सपोर्ट देने का भरोसा दिलाया।

 इससे पहले, सूचना और प्रसारण मंत्रालय की PIB और CBC की असिस्टेंट डायरेक्टर सुश्री शीनम जैन ने ट्राइसिटी के अलग-अलग सेंट्रल गवर्नमेंट डिपार्टमेंट के प्रतिनिधियों का स्वागत किया और मिलकर प्रवंचार प्रसार की कोशिशों की अहमियत पर ज़ोर दिया।

मीटिंग के दौरान, सदस्यों ने संचार को असरदार बनाने के लिए अपनी राय और सुझाव शेयर किए। उन्होंने अपने-अपने डिपार्टमेंट द्वारा हाल ही में शुरू की गई पब्लिसिटी की पहल पर अपडेट भी दिए और आने वाले महीनों के लिए प्लान की गई एक्टिविटीज़ के बारे में बताया।

26 अप्रैल को लुधियाना में होगा अकाली दल “वारिस पंजाब दे” का विशाल पंथक एकत्र

लुधियाना/ सत्ता संदेश

भाई अमृतपाल सिंह खालसा पर पंजाब के मामलों को डिब्रूगढ़ की बजाय पंजाब में चलाने की मांग; कहा: जब केस पंजाब के हैं तो अदालती कार्रवाई असम में क्यों चले

2027 विधानसभा चुनावों के लिए भाई अमृतपाल सिंह खालसा होंगे अकाली दल “वारिस पंजाब दे” के मुख्यमंत्री चेहरा: जौहल, लवली

लुधियाना, 24 अप्रैल: अकाली दल “वारिस पंजाब दे” द्वारा 26 अप्रैल को लुधियाना में एक विशाल पंथक एकत्र का आयोजन किया जा रहा है। इस संबंध में आज यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस को पार्टी के पंजाब कोऑर्डिनेटर परमजीत सिंह जौहल, वरिष्ठ नेता राजीव कुमार लवली, श्री फतेहगढ़ साहिब के कोऑर्डिनेटर संदीप सिंह रुपालों और पंथक सभा के आयोजक गुरप्रीत सिंह सोनू ने संबोधित किया।

इस मौके पर वरिष्ठ नेता राजीव कुमार लवली और गुरप्रीत सिंह सोनू ने कहा कि अकाली दल “वारिस पंजाब दे” राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि 26 अप्रैल को दोपहर 12 बजे लुधियाना स्थित आशा रानी पार्क, 33 फुटा रोड, राम नगर के पास, मुंडियां कलां में यह विशाल पंथक एकत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें पार्टी के सरपरस्त बापू तरसेम सिंह सहित वरिष्ठ नेतृत्व शामिल होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी की नीतियों के प्रति लोगों में भारी उत्साह है और बड़ी संख्या में लोग इसमें भाग लेंगे।

वहीं पर, परमजीत सिंह जौहल ने लोगों से पंथक सभा में बढ़-चढ़कर शामिल होने की अपील की। उन्होंने बताया कि बैसाखी के मौके पर पार्टी द्वारा अब तक की सबसे बड़ी कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। उन्होंने सांसद भाई अमृतपाल सिंह खालसा के बारे में कहा कि उन्होंने पंजाब की भलाई के लिए काम किया, लेकिन राज्य और केंद्र की सरकारों ने साजिश के तहत उन पर एनएसए का झूठा मामला लगाकर डिब्रूगढ़ जेल भेज दिया। उन्होंने कहा कि अब एनएसए हट चुका है और यदि कोई अपराध बनता है, तो उसका केस पंजाब में ही चलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केस पंजाब में दर्ज हैं तो उनकी सुनवाई असम में क्यों हो रही है, और इसे सरकार का निंदनीय रवैया बताया।

उन्होंने कहा कि राज्य इस समय गैंगस्टरवाद, नशे और कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे हालात में अकाली दल “वारिस पंजाब दे” ही राज्य को विकास और खुशहाली के रास्ते पर ले जा सकता है। उन्होंने ऐलान किया कि 2027 के विधानसभा चुनावों में भाई अमृतपाल सिंह खालसा पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे।

पत्रकारों के सवालों के जवाब में, जौहल ने कहा कि पार्टी की विचारधारा में सभी वर्गों का स्वागत है, चाहे वे हिंदू, सिख या मुस्लिम किसी भी धर्म से हों, बशर्ते उनका चरित्र साफ हो। वहीं पर, अकाली दल “पुनर सुरजीत” के साथ गठबंधन के बारे में उन्होंने बताया कि इस विषय और समान विचारधारा वाली अन्य संस्थाओं के साथ तालमेल के लिए 8 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।

इसी तरह, संदीप सिंह रुपालों ने कहा कि पार्टी को मिल रहा भारी जनसमर्थन इस बात का संकेत है कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों में राज्य में पंथक सरकार बनने जा रही है, जो सभी वर्गों को साथ लेकर चलेगी।

इस मौके पर अन्य नेताओं में, इंदरजीत सिंह एडवोकेट, दीप सिद्धू के पूर्व सहयोगी गुरदीप सिंह प्रिंस, हरपाल सिंह कोहली, मनजीत सिंह बल्ल, बाबा दर्शन सिंह पंच, प्रगट सिंह, रिंकू राठौर, मधु सूदन, अवतार सिंह, सुरजीत सिंह, गुरविंदर सिंह, जोरा सिंह, मनमोहन सिंह, जसराज सिंह, जसवीर सिंह, अमृतपाल सिंह, हरप्रीत सिंह, गुरप्रीत सिंह, गुरजीत सिंह, गुरचरण सिंह चौहान, शुभ शर्मा, हरमीत सिंह और दान सिंह भी उपस्थित रहे।

लखनऊ में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा उत्तर क्षेत्र कृषि सम्मेलन का आयोजन

लखनऊ/सत्ता संदेश

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्र कृषि सम्मेलन ने भारतीय कृषि के भविष्य को लेकर एक स्पष्ट और व्यवहारिक दिशा प्रस्तुत की। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और किसान प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि कृषि के बदलते परिदृश्य में नई सोच, नई रणनीति और किसान-केंद्रित दृष्टिकोण को जमीन पर उतारने का गंभीर प्रयास था।

क्षेत्रीय दृष्टिकोण की जरूरत: एक देश, कई कृषि वास्तविकताएं

भारत की कृषि विविधताओं से भरी हुई है—मिट्टी, जलवायु, फसल पैटर्न और संसाधनों के आधार पर हर क्षेत्र अलग है। ऐसे में पूरे देश के लिए एक जैसी नीति बनाना अक्सर प्रभावी नहीं होता। इसी सोच के तहत जोनल कॉन्फ्रेंस की अवधारणा को आगे बढ़ाया गया है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पहले खरीफ और रबी को लेकर एक ही राष्ट्रीय बैठक होती थी, जिसमें सभी राज्यों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करना संभव नहीं होता था। अब क्षेत्रीय स्तर पर सम्मेलन आयोजित कर स्थानीय समस्याओं के समाधान और संभावनाओं के उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

उत्तर भारत की कृषि संरचना भी विविध है—पंजाब और हरियाणा जहां हरित क्रांति के अग्रदूत हैं, वहीं उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में अग्रणी है। पहाड़ी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बागवानी और उच्च मूल्य वाली फसलों का विशेष महत्व है। इस विविधता को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाना समय की मांग है।

कृषि के तीन बड़े लक्ष्य

सम्मेलन में देश के कृषि क्षेत्र के सामने तीन प्रमुख लक्ष्य रखे गए—

  • खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना
  • किसानों की आय बढ़ाना
  • पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराना

इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ लागत कम करना, बाजार तक पहुंच बढ़ाना, मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहन देना और फसल नुकसान से सुरक्षा देना भी जरूरी है।

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब कृषि को केवल “उत्पादन आधारित” नहीं बल्कि “आय आधारित” दृष्टिकोण से देखना होगा।

उर्वरक उपयोग और मिट्टी का संतुलन

उर्वरकों के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि उर्वरक का उपयोग वैज्ञानिक जरूरत के अनुसार हो रहा है या आदत के कारण। अत्यधिक रासायनिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे दीर्घकालिक उत्पादन घट सकता है।

उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती की दिशा में बढ़ने की अपील की। मिट्टी के स्वास्थ्य को भविष्य की कृषि का आधार बताया गया।

जलवायु परिवर्तन: खेती के लिए नई चुनौती

जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की अनिश्चितता बढ़ रही है। कम बारिश, असमय वर्षा और तापमान में बदलाव किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब खेती की योजना पुराने पैटर्न पर नहीं बन सकती। किसानों को जलवायु के अनुरूप बीज, फसल और तकनीक का चयन करना होगा। वैज्ञानिकों और कृषि संस्थानों की भूमिका यहां बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

नकली बीज और खाद: एक बड़ा संकट

सम्मेलन में नकली बीज, खाद और पेस्टिसाइड की समस्या पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। यह समस्या सीधे किसानों की आय और उत्पादन को प्रभावित करती है।

सरकार ने इस दिशा में सख्त कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। राज्यों को निर्देश दिया गया कि वे इस समस्या के खिलाफ अभियान चलाएं और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाएं।

किसान सशक्तिकरण: किसान आईडी और KCC

किसान आईडी और किसान क्रेडिट कार्ड को किसानों के सशक्तिकरण का अहम माध्यम बताया गया। किसान आईडी से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाया जा सकेगा, जबकि KCC के माध्यम से किसानों को सस्ती दर पर ऋण मिलेगा।

यह कदम विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अक्सर वित्तीय संसाधनों की कमी से जूझते हैं।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग: छोटे किसानों के लिए समाधान

भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं। ऐसे में केवल एक फसल पर निर्भर रहना जोखिम भरा होता है। इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल इस समस्या का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है।

इस मॉडल में किसान फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्यपालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन और मधुमक्खी पालन जैसे कार्यों को अपनाकर आय के कई स्रोत विकसित कर सकते हैं।

योगी आदित्यनाथ का दृष्टिकोण: प्रयोगशाला से खेत तक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कृषि विकास तभी संभव है जब वैज्ञानिक शोध का लाभ सीधे खेत तक पहुंचे। उन्होंने विकसित कृषि संकल्प अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल ने वैज्ञानिकों और किसानों के बीच संवाद को मजबूत किया है।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में कृषि विज्ञान केंद्रों को सक्रिय करने और उन्हें किसानों से जोड़ने का सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है। जब वैज्ञानिक खेत पर जाकर प्रदर्शन करते हैं और किसानों को नई तकनीक सिखाते हैं, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होता है।

फसल विविधीकरण और बाजार से जुड़ाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अब किसान एक फसल से आगे बढ़कर दो और तीन फसलों के मॉडल को अपना रहे हैं। यह बदलाव जानकारी, तकनीक और बाजार तक पहुंच के कारण संभव हुआ है।

उन्होंने उत्पादन, प्रसंस्करण और बाजार के बीच तालमेल को मजबूत करने की जरूरत बताई। कृषि को फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन से जोड़कर ही किसानों की आय को स्थायी रूप से बढ़ाया जा सकता है।

प्रख्यात मृदा वैज्ञानिक डॉ. मुकुंद सिंह बराड़ की आत्मकथा “रेतीली सड़कों से” का विमोचन, प्रेरणादायक जीवन यात्रा पेश

लुधियाना/सत्ता संदेश

पीएयू के सेवानिवृत्त अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त मृदा वैज्ञानिक डॉ. मुकुंद सिंह बराड़ की आत्मकथा "रेतीली सड़कों से" को प्रोफेसर गुरभजन सिंह गिल द्वारा जनता को प्रस्तुत किया गया। गुरभजन सिंह गिल ने जनसेवा करते हुए कहा है कि तपती रेत पर चलने वाले निर्दोष पैरों के पदचिह्न मिटाए जा सकते हैं, लेकिन दर्द नहीं।

पुस्तक “रेटले राहन तो” के संदर्भ में उन्होंने कहा कि तपती रेत में भी सूखा गुलाब खिल सकता है और महक सकता है, इसका एक उदाहरण डॉ. मुकुंद सिंह बराड़ की आत्मकथा है।

बठिंडा जिले के कोइर सिंह वाला गांव के बाबुल के पुत्र मलुकरा जेहा मुकंद सिंह ने अपने गांव दो बोहर स्थित स्कूल से चार कक्षाएं उत्तीर्ण कीं और फिर पट्टो स्थित हीरा सिंह सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दाखिला लिया। पढ़ाई के दौरान, वे अपने मामा डॉ. अमर सिंह धालीवाल से प्रेरित हुए और अपने मामा के बेटे एस. जरनैल सिंह धालीवाल के कुशल मार्गदर्शन में, उन्होंने नौवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद कृषि स्ट्रीम में दाखिला लिया ताकि वे उच्च शिक्षा के लिए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना पहुँच सकें।
उनके दादाजी की शिक्षा के प्रति लगन और निरंतर प्रेरणा ने उन्हें हर कदम पर सहारा दिया। उन्होंने जीवन भर इसी विश्वविद्यालय में पढ़ाया और यहीं से उन्होंने विश्वप्रसिद्ध मृदा वैज्ञानिक बनने का गौरव प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि मुकुंद सिंह बराड़ जी की यह आत्मकथा ऐसी कृति है कि इसे पढ़कर पता चलता है कि कैसे ऊंट से गिरने वाला और रेत के टीलों की सुगंध का आनंद लेने वाला यह बच्चा स्कूल जाने के बजाय अपने दोस्तों के साथ कपास के खेतों में जाया करता था। उसने अपना समय छिपकर बिताया। कपास चुनने वालों की बातों से आहत इस छात्र ने कम सुविधाओं वाले स्कूलों में लगन और मेहनत से पढ़ाई करके नई ऊंचाइयों को छुआ।
उसने अपनी आत्मकथा को बहुत ही सरल, स्पष्ट और बेबाक शैली में लिखा है।
इस अवसर पर बोलते हुए पंजाबी साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष त्रिलोचन लोची ने कहा कि यह स्पष्ट लेखन मात्र एक जीवनी नहीं बल्कि ग्रामीण पंजाब के पुत्र-पुत्रियों के लिए प्रेरणादायक कृति है। इसलिए, यह केवल उनकी जीवनी ही नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक के जीवन की रोचक ढंग से लिखी गई यात्रा भी है। सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष एस. जसमेर सिंह धत्त ने कहा कि चूंकि हम लंबे समय से पड़ोसी रहे हैं, इसलिए मैं कह सकता हूं कि यह आत्मकथा पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने जो कुछ जाना, देखा, अनुभव किया और समझा, उसका परिणाम है।
लुधियाना नगर निगम के संयुक्त आयुक्त एस. जसदेव सिंह सेखों ने कहा कि डॉ. बरार की इस पुस्तक को पढ़ते हुए मुझे यह महसूस हुआ कि यह पुस्तक मृदा विज्ञान के क्षेत्र में प्रवेश करने वाले छात्रों के लिए लाभदायक होगी और प्रत्येक पंजाबी पाठक को कड़ी मेहनत के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।
नगर पार्षद तनवीर सिंह धालीवाल ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. मुकुंद सिंह बराड़ हमारे मार्गदर्शक हैं क्योंकि वे हमारे चाचा समान हैं और उनका यह बहुमूल्य लेखन हमारे मार्ग को भी रोशन करेगा। हालांकि वे लंबे समय से एडमोंटन (कनाडा) में रह रहे हैं, फिर भी संकट के हर क्षण में हम उन्हें अपने साथ महसूस करते हैं।
धन्यवाद ज्ञापन में बोलते हुए डॉ. मुकुंद सिंह बराड़ ने कहा कि प्रो. गुरभजन गिल और मैंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना में लगभग 25 वर्षों तक साथ-साथ पढ़ाया है और इसी सहयोग के कारण मैं अपनी आत्मकथा लिखने का सपना पूरा कर पाया हूँ। उन्होंने अनौपचारिक समारोह में उपस्थित मित्रों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ग्रेसियस बुक्स पटियाला ने इस पुस्तक को खूबसूरती से प्रकाशित किया है, जिसके लिए मैं उनका आभारी हूँ।
पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय एशिया रैंकिंग 2026 में 251–300 बैंड में, शीर्ष 300 में भारत के 6 केंद्रीय विश्वविद्यालय शामिल

बठिंडा/सत्ता संदेश

केंद्रीय पंजाब विश्वविद्यालय ने प्रतिष्ठित टाइम्स हायर एजुकेशन  एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 में 251–300 रैंक बैंड प्राप्त कर एशियाई शैक्षणिक परिदृश्य में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। सीयू पंजाब सहित भारत के कुल 6 केंद्रीय विश्वविद्यालयों को एशिया के शीर्ष 300 उच्च शिक्षण संस्थानों की सूची में स्थान मिला है। सीयू पंजाब को 40.2–42.7 का समग्र स्कोर प्राप्त हुआ है, साथ ही 69.0 का उल्लेखनीय रिसर्च क्वालिटी स्कोर भी हासिल हुआ है।

उच्च शिक्षण संस्थानों का मूल्यांकन पाँच प्रमुख मानकों टीचिंग, रिसर्च एनवायरनमेंट, रिसर्च क्वालिटी, इंडस्ट्री और इंटरनेशनल आउटलुक के आधार पर किया गया, जिन सभी में केंद्रीय पंजाब विश्वविद्यालय ने सराहनीय प्रदर्शन किया है।

विश्वविद्यालय ने टाइम्स हायर एजुकेशन रैंकिंग्स के पूर्व संस्करणों में भी उल्लेखनीय उपलब्धियाँ दर्ज की हैं। जनवरी 2026 में जारी टीएचई वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स बाय सब्जेक्ट 2026 में विश्वविद्यालय ने मेडिसिन एंड हेल्थ में 251–300, फिजिकल साइंसेज में 401–500 तथा लाइफ साइंसेज में 601–800 रैंक बैंड प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त, नवंबर 2025 में जारी टीएचई वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 में विश्वविद्यालय ने वैश्विक स्तर पर 601–800 रैंक बैंड बनाए रखा। राष्ट्रीय स्तर पर भी विश्वविद्यालय ने निरंतर प्रगति करते हुए नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क 2025 में 77वां स्थान प्राप्त किया है तथा अन्य राष्ट्रीय रैंकिंग्स में भी अपनी स्थिति में सुधार किया है।

हाल ही में प्रकाशित टीएचई एशिया रैंकिंग्स 2026 में केंद्रीय पंजाब विश्वविद्यालय सहित भारत के 31 उच्च शिक्षण संस्थानों जिनमें आईआईटी और एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। एशिया के शीर्ष 300 संस्थानों में स्थान दिया गया है।

इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति आचार्य राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी ने कहा कि केंद्रीय पंजाब विश्वविद्यालय का टीएचई एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 में 205–300 रैंक बैंड में शामिल होना अत्यंत गर्व का विषय है। विश्वविद्यालय के शोध उत्पादन और उद्धरण प्रभाव में निरंतर वृद्धि उसके शोध पारिस्थितिकी तंत्र की गुणवत्ता और मजबूती को दर्शाती है, जिसे इन रैंकिंग्स में मान्यता मिली है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और सभी हितधारकों के सतत प्रयासों का परिणाम है, जो उच्च शिक्षा और शोध में उत्कृष्टता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करती है।

टीएचई एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 में पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय का सराहनीय प्रदर्शन उसके बढ़ते शैक्षणिक स्तर, शोध उत्कृष्टता और वैश्विक मंच पर प्रभावशाली एवं उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने के प्रति समर्पण का प्रमाण है।

पंजाब में गर्मी का प्रचंड रूप: 44 डिग्री पहुंचा पारा, भीषण हीट वेव के साथ 8 घंटे के बिजली कटों ने बढ़ाई मुसीबत

पंजाब डेस्क : पंजाब में अप्रैल के महीने में ही गर्मी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है, जहाँ पारा 44 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को छू गया है। राज्य के बठिंडा जिले में सबसे अधिक 44.0 डिग्री तापमान दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने शुक्रवार और शनिवार के लिए पूरे राज्य में हीट वेव (लू) का ‘यलो अलर्ट’ जारी किया है, जिससे तापमान में अभी 2 से 3 डिग्री की और बढ़ोतरी होने की संभावना है।

लंबे बिजली कटों से बेहाल जनता: इस भीषण तपिश के बीच पंजाब के लोगों को भारी बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। पावरकाम ने लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, बठिंडा और पटियाला जैसे प्रमुख शहरों में 7 से 8 घंटे के घोषित कट लगा दिए हैं। विभाग का कहना है कि बिजली वितरण प्रणाली के रखरखाव और मरम्मत के कारण 26 अप्रैल तक यह कटौती जारी रहेगी। गौरतलब है कि वीरवार को बिजली की मांग 10,891 मेगावाट तक पहुंच गई, जो पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है।

26 अप्रैल से राहत की उम्मीद : गर्मी से राहत के संकेत भी मिल रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, 26 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे मौसम का मिजाज बदलेगा। 26 अप्रैल से तीन दिनों के लिए पठानकोट, अमृतसर, गुरदासपुर और पटियाला सहित कई जिलों में बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है, जिसके लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है।

लुधियाना में 44 शिक्षकों पर प्रशासन की सख्ती: BLO ड्यूटी जॉइन न करने पर सैलरी रोकने और FIR की चेतावनी

लुधियाना: नगर निगम (लुधियाना ईस्ट) ने 44 शिक्षकों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें 24 अप्रैल तक हर हाल में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ड्यूटी पर रिपोर्ट करने का आदेश दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शिक्षक ड्यूटी पर हाजिर नहीं होते हैं, तो उनका वेतन रोक दिया जाएगा और उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जा सकती है।

ड्यूटी से अनुपस्थिति: ये सभी शिक्षक स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत BLO ड्यूटी के लिए नियुक्त किए गए थे, लेकिन बार-बार निर्देशों के बावजूद ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। प्रशासन ने इसे सर्विस रूल्स का उल्लंघन करार दिया है।शिक्षकों का विरोध: शिक्षकों में इस फैसले को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि वे पहले से ही जनगणना, चुनावी कार्यों और स्कूलों में चल रहे एडमिशन सीजन के कारण काम के भारी बोझ तले दबे हुए हैं।

विवादास्पद मामले: शिक्षकों ने बताया कि जमालपुर अवाना के एक स्कूल में मातृत्व अवकाश (maternity leave) पर चल रही एक शिक्षिका को भी BLO ड्यूटी पर लगा दिया गया है, जिससे शिक्षकों का रोष और बढ़ गया है।

अधिकारियों का पक्ष: डिप्टी डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर मनोज कुमार ने शिक्षकों की परेशानियों को स्वीकार किया है, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया है कि BLO और जनगणना जैसी चुनावी ड्यूटियां बेहद जरूरी हैं। उन्होंने ब्लॉक प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर्स को निर्देश दिए हैं कि शिक्षकों को स्कूलों से रिलीव कर इन ड्यूटी पर भेजा जाए।