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PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…

पंजाब डेस्क: पंजाब-चंडीगढ़ की बड़ी खबरें में राघव चड्ढा की ‘आप’ को चेतावनी, दूसरी तरफ चंडीगढ़ ब्लास्ट में पुलिस की छापेमारी और वेरका दूध के बढ़े दाम आए पढ़े दिनभर की 10 अहम खबरें।

1. राघव चड्ढा की चेतावनी– ‘सैलाब बनकर आऊंगा’: आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि उन्हें खामोश किया गया है, लेकिन वे हारे नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि वे जल्द ही सैलाब बनकर लौटेंगे। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री भगवंत मान और अन्य नेताओं ने उन पर पार्टी लाइन के खिलाफ जाने और सदन में पंजाब के मुद्दे न उठाने के आरोप लगाए हैं। उनकी जगह अब अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई है।

2. चंडीगढ़ ब्लास्ट में नया मोड़: सेक्टर-37 स्थित पंजाब भाजपा कार्यालय के बाहर हुए धमाके के मामले में पुलिस ने रोपड़ के रतनगढ़ गांव में छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार, हमलावर वहां कपड़े बदलने आए थे, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार हो गए। पुलिस ने एक आरोपी के भाई को हिरासत में लिया है और संदिग्ध सामान जब्त किया है।

3. वेरका दूध की खरीद कीमतों में बढ़ोतरी: पंजाब सरकार ने डेयरी किसानों को राहत देते हुए मिल्कफेड (वेरका) के माध्यम से दूध खरीद की दरों में 15 रुपये प्रति किलो फैट की बढ़ोतरी की है। यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गई हैं। हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल दूध के बिक्री रेट पुराने ही रहेंगे।

4. हलवारा एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें: लुधियाना के हलवारा एयरपोर्ट से अब यात्री एक ही टिकट पर पूरी विदेश यात्रा कर सकेंगे। एयर इंडिया ने फ्लाइट्स को इस तरह शेड्यूल किया है कि यात्री दिल्ली से कनेक्टिंग फ्लाइट लेकर सीधे लंदन, रोम या पेरिस जैसे शहरों के लिए उड़ान भर सकें।

5. लुधियाना का ‘कुल्हाड़ी वाला’ हत्यारा गिरफ्तार: कांग्रेस नेता परमिंदर तिवारी की हत्या करने वाले आरोपी विजय कुमार का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह हत्या से ठीक पहले कंधे पर कुल्हाड़ी रखकर घूमता दिख रहा है। पुलिस ने उसे और उसके साथी को पटना से गिरफ्तार कर लिया है।

6. न्यू चंडीगढ़ में लग्जरी कोठियां: पंजाब सरकार ने न्यू चंडीगढ़ में 309 एकड़ में लो-डेंसिटी रेजिडेंशियल टाउनशिप विकसित करने का फैसला किया है। यहाँ पुराने चंडीगढ़ की तरह एक एकड़ से बड़े साइज के प्लॉट काटे जाएंगे।

7. दुबई में गुरुद्वारा बंद: खाड़ी क्षेत्र में ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और सुरक्षा कारणों से दुबई सरकार ने जेबेल अली स्थित गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का आदेश दिया है।

8. खन्ना में 80 लाख की चोरी: एक इंडस्ट्रियलिस्ट के घर में काम करने वाले नौकर ने 80 लाख के गहने चुरा लिए। चोरी का खुलासा तब हुआ जब पता चला कि वह अपने गांव अयोध्या में बड़ी कोठी बनवा रहा है और महंगे आईफोन इस्तेमाल कर रहा है।

9. पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश: लुधियाना के खन्ना में एसएसपी ने पुलिसकर्मियों की मानसिक और शारीरिक सेहत सुधारने के लिए उन्हें हफ्ते में एक दिन की छुट्टी (Weekly Off) देने की नीति लागू की है।

10. CBSE टीचर्स की नाराजगी: पंजाब में सीबीएसई स्कूलों के शिक्षकों को गुड फ्राइडे की छुट्टी के दिन भी 10वीं के पेपर चेक करने के लिए ड्यूटी पर बुलाया गया, जिससे उनमें भारी रोष है।

दिल्ली-NCR और उत्तर भारत में भूकंप के तेज झटके; रिक्टर पैमाने पर 5.9 रही तीव्रता, दहशत में आए लोग

नेशनल डेस्क: भारत के विभिन्न राज्यों में शुक्रवार रात (3 अप्रैल 2026) को भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों के बीच चिंता और डर की लहर दौड़ गई। दिल्ली-NCR के अलावा जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में भी धरती हिल उठी।

तीव्रता और केंद्र: भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.9 मापी गई है। इसका केंद्र अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा क्षेत्र में जमीन से 175 किलोमीटर की गहराई में था।

प्रभावित इलाके: दिल्ली और कश्मीर के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ पंजाब के पठानकोट में रात करीब 9:50 बजे हल्के झटके महसूस किए गए। उत्तर प्रदेश के नोएडा में भी कई सेकंड तक झटके महसूस किए गए।

नुकसान की स्थिति: राहत की बात यह है कि अब तक इस भूकंप के कारण किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है। हालांकि, झटकों के बाद कई इलाकों में लोग सुरक्षा के लिहाज से अपने घरों से बाहर निकल आए।

भूकंप का कारण: विशेषज्ञों के अनुसार, भूकंप आने का मुख्य कारण धरती के भीतर मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों का आपस में टकराना, रगड़ना या खिसकना होता है, जिससे जमा ऊर्जा बाहर निकलती है।

भारत समेत दुनिया के कई देशों में पिछले कुछ समय से लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं, जिससे लोगों में सुरक्षा को लेकर डर बना हुआ है।

पंजाब के 2.5 लाख डेयरी किसानों को बड़ी राहत: वेरका ने ₹15 प्रति किलो फैट बढ़ाए दूध के दाम, आज से नई दरें लागू

पंजाब डेस्क: पंजाब की मान सरकार ने राज्य के डेयरी किसानों को आर्थिक मजबूती देने के लिए वेरका (मिल्कफेड) के माध्यम से खरीदे जाने वाले दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह नया फैसला 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी हो गया है।

कितनी हुई बढ़ोतरी: पंजाब सरकार ने दूध खरीद की दरों में 15 रुपये प्रति किलोग्राम फैट के हिसाब से इजाफा किया है। इससे पहले पिछले साल भी कीमतों में 10 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।नई दरें (प्रति किलो फैट):

-गाय का दूध: पुरानी दर ₹770-780 से बढ़ाकर अब ₹780-795 कर दी गई है।

-भैंस का दूध: पुरानी दर ₹810-820 से बढ़ाकर अब ₹820-835 कर दी गई है।

-किसे होगा फायदा: इस फैसले से सीधे तौर पर पंजाब के लगभग 2.5 लाख डेयरी किसानों की आमदनी में इजाफा होगा।

-बढ़ोतरी का कारण: चारे की बढ़ती कीमतों, दुधारू पशुओं के दामों में दोगुना उछाल और वैश्विक युद्ध के कारण बढ़ी महंगाई को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

-आम जनता पर असर: राहत की बात यह है कि वेरका ने फिलहाल दूध की बिक्री दर (Sale Rate) में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उपभोक्ताओं के लिए दूध की कीमतों में संशोधन किया जा सकता है।

जालंधर में निजी डेयरी संचालकों ने पहले ही दूध की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी थी, जिसके बाद अब सरकारी क्षेत्र में भी यह कदम उठाया गया है।

गरीब व मध्यम वर्ग को एक अच्छी सवारी तथा बेहतर अनुभव देने की भारतीय रेलवे की हर सम्भव कोशिश: रेल मंत्री

रेल मंत्री ने रेल दुर्घटनाओं में आई ऐतिहासिक कमी तथा  रिकॉर्ड माल ढुलाई व विशेष ट्रेनों को चलाने के लिए रेल परिवार को दी बधाई

स्टेशन देश के लोगों के सामने हमारा चेहरा, सभी अधिकारी जी तोड़ मेहनत कर साफ़ सुथरे रखें अपने अपने रेलवे स्टेशन: रेल मंत्री

लोगों की आजीविका प्रभावित न हो, इसका रखें ध्यान; रेलवे भूमि अतिक्रमण के संवेदनशील मुद्दे का मानवीय दृष्टिकोण से समाधान करें अधिकारी: रेल मंत्री

रेलवे स्टेशन या फिर स्टेशन परिसर के बाहर की पटरियाँ पार करने के लिए फुटओवर पुलों के बजाय सुविधाजनक व सुगम रेल पुलियाओं के निर्माण को प्राथमिकता दें

प्रविष्टि तिथि: 03 APR 2026 5:02PM by PIB Delhi

गरीब और मध्यम वर्ग को एक अच्छी सवारी तथा बेहतर अनुभव देना रेलवे की हर सम्भव कोशिश है। इस उद्देश्य के लिए हम सभी मिल कर काम करें। रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज देश भर के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक में ये आह्वान किया। ये बैठक रेल भवन, नई दिल्ली से की गई।

रेल मंत्री ने रेल परिवार को पिछले वर्ष में अच्छा काम करने के लिए बधाई देते हुए, बैठक की शुरुआत की। साथ ही नए उत्साह के साथ, इस वर्ष काम करने के लिए अपनी नई प्राथमिकताएँ तय करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि पिछले साल रेल दुर्घटनाओं में आई एतिहासिक कमी और रिकॉर्ड माल ढुलाई ने देश भर में रेलवे की छवि सुधारने का काम किया है। बड़ी संख्या में विशेष ट्रेन चलाकर त्यौहारों के दौरान रेल यात्रा की बढ़ी हुई माँग को भी बड़ी ही प्रभावी तरीके से अधिकारियों ने पूरा किया है। समय पर रेल चलाने वाले ज़ोन को उनके अच्छे प्रदर्शन पर भी रेल मंत्री ने बधाई दी। देश के उन सभी ज़ोन की भी रेल मंत्री ने प्रशंसा की जिन्होंने 85% से अधिक रेल गाड़ियों को तमाम जमीनी चुनौतियों के बाबजूद समय पर चला कर स्वयं का पुराना प्रदर्शन सुधारा।

रेल मंत्री ने जोर देकर कहा कि रेलवे स्टेशन देश के लोगों के सामने हमारा चेहरा है। वो साफ़ सुथरे होने चाहिए। इस दिशा में देश भर के अधिकारियों को जी तोड़ मेहनत करनी चाहिए। अधिकारियों को प्रेरित करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे में पिछले एक दशक में आधुनिकीकरण के लिए एक रिकार्ड आवंटन हुआ है। अतः अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि इस आवंटन का उचित उपयोग कर देश भर के रेलवे स्टेशनों की तस्वीर बदलें। सुनिश्चित करें कि अपने-अपने कार्य क्षेत्रों में धन राशि का आवंटन, स्टेशन में जन उपयोगी सुविधाओं का विकास करने में खर्च करें। ताकि सामान्य दिनों में यात्रियों का स्टेशन पर अनुभव और बेहतर किया जा सके।

त्यौहारों पर भीड़ को नियंत्रित कर प्लेटफॉर्म तक यात्रियों को बिना किसी भी दिक्कत के पहुँचाना हमारी प्राथमिकता है ताकि रेल गाड़ियों में चढ़ना सुगम हो सके। अधिकारी ये सुनिश्चित करें कि इस दिशा में भी आवंटित धन राशि का उपयोग किया जाए। मौजूदा रेलवे प्रोजेक्ट्स में लंबित भूमि अधिग्रहण का मुद्दा भी बैठक में उठा। रेल मंत्री ने जोर देकर कहा कि लंबित भूमि अधिग्रहण द्रुत गति से आगे बढ़ायें। इसके लिए आवश्यक हो तो राज्य सरकारों के राजस्व व वन विभाग के अनुभवी सेवा निवृत्त अधिकारियों के अनुभव का लाभ भी लें।

रेल मंत्री ने कहा कि लोगों की आजीविका से जुड़े इस संवेदनशील मामले को एक मानवीय दृष्टिकोण से हल किया जाना आवश्यक है। देश के कई शहरी इलाकों में ये एक बड़ी समस्या है, जिसका समयबद्ध तरीके से निदान जरूरी है। अपनी पिछली बैठक में देश भर में भूमिगत रेल पुलियाएँ बनाने के निर्णय पर भी आज की बैठक में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। ये तय किया गया कि रेलवे पटरियों को पार करने के लिए अब जहाँ तक हो सके भूमिगत पुलियाएँ ही बनाई जाएँ। धीरे-धीरे हम रेलवे फुटओवर पुलों को कम बनाएँ, बैठक में चर्चा के दौरान ये महसूस किया गया। रेल मंत्री ने कहा, भले ही रेलवे स्टेशन हो या फिर स्टेशन परिसर के बाहर की पटरियाँ, दोनों में ही पहली कोशिश भूमिगत सुविधाजनक पुलिया बनाने की होनी चाहिए।

स्वाभाविक है कि पुल चढ़ने के बजाय पुलिया को लोग ज्यादा उपयोग करेंगे। चर्चा के दौरान ये निर्णय लिया गया कि देश के कई हिस्सों में एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत ऐसी पुलियाएँ बनवाई जाएँ जो सुविधाजनक हों। पैदल लोगों के साथ साथ ये पुलियाएँ लोगों को साइकिल, स्कूटर व मोटर साइकिल ले जाने में भी सहायक बनें। ज्यादा चौड़ी ऐसी रेल पुलियाएँ भी बनाए जाने का निर्णय लिया गया जिनसे ट्रैक्टर सहित अन्य गाड़ियाँ भी निकल सकें। शहरी व ग्रामीण दोनों इलाकों की अलग अलग जरूरतों के हिसाब से सुविधाजनक रेल पुलियाएँ बन सकें। इस दिशा में सभी अधिकारी प्रयास करेंगे।

रेल मंत्री ने दोहराया कि सतत प्रयासों, प्रभावी योजना और यात्री-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ, भारतीय रेल देशभर के यात्रियों के लिए सुरक्षा, सेवा गुणवत्ता और समग्र यात्रा अनुभव को लगातार बेहतर बनाती रहेगी।

शत प्रतिशत रहा डॉ. एवीएम पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल का पांचवीं का नतीजा

स्कूल प्रबंधक कमेटी के डायरेक्टर राजीव कुमार लवली ने सभी छतों और स्टाफ के सदस्यों को बधाई दी

लुधियाना, 2 अप्रैल: डॉ एवीएम पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, नज़दीक ईसा नगरी पुली का पांचवीं कक्षा का परिणाम हर साल की तरह इस बार भी शत प्रतिशत रहा और लड़कियों ने एक बार फिर से सभी प्रमुख स्थानों पर कब्जा किया।

स्कूल प्रबंधक कमेटी के डायरेक्टर राजीव कुमार लवली और स्कूल की प्रिंसीपल मनीषा गाबा ने परीक्षा के शानदार नतीजों के लिए सभी छात्रों और समूह स्टाफ के सदस्यों को बधाई दी। उन्होंने छात्रों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए, आगे चलकर भी इसी तरह मेहनत करने की प्रेरणा दी और कहा कि आज के बच्चे देश का आने वाला भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि एक पढ़ा लिखा नागरिक ही अपने परिवार, समाज और देश के लिए जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभा सकता है।

गौरतलब है कि पांचवी कक्षा के लिए कुल 120 विद्यार्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया था, जिनमें से दिलजीत कौर ने 97.4 प्रतिशत अंक लेकर पहला स्थान हासिल किया है। जबकि सामिया इस्लाम 94.8 प्रतिशत नंबर लेकर दूसरा और एंजेल गर्ग व टिया 94.4 प्रतिशत अंक लेकर संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहे। इसी तरह, मनप्रीत कौर ने 94.2 प्रतिशत अंकों के साथ चौथा स्थान हासिल किया। बाकी विद्यार्थी 94 से लेकर 60 प्रतिशत अंक हासिल करने में सफल रहे।

इस अवसर पर स्कूल की वाइस प्रिंसिपल अमित राजन, सोनिया, हर्ष बाला, जगदीप कौर, तरनजीत कौर, गुरप्रीत कौर, नेहा बजाज, ज्योति और स्टाफ के अन्य सदस्यों ने भी सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए, उनके सुनहरी भविष्य के लिए कामना की।

वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपए तक पहुंचा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत ज्‍यादा है


रक्षा मंत्री ने कहा-डीपीएसयू के निर्यात में 151 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है, निजी क्षेत्र का योगदान 14 प्रतिशत बढ़ा है

भारत वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है

प्रधानमंत्री मोदी के प्रेरणादायक नेतृत्व में रक्षा निर्यात की प्रभावशाली सफलता की कहानी लिखी जा रही है: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है, जो अब तक का सर्वोच्‍च स्‍तर है। यह पिछले वित्त वर्ष के 23,622 करोड़ रुपए के आंकड़े से 14,802 करोड़ रुपए (62.66 प्रतिशत) की भारी वृद्धि दर्शाता है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) और निजी क्षेत्र का योगदान क्रमशः 54.84 प्रतिशत और 45.16 प्रतिशत रहा है। भारतीय रक्षा उद्योग की यह उपलब्धि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के भारत को विश्व के शीर्ष रक्षा निर्यातकों में स्थान दिलाने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने रक्षा उत्पादन विभाग, भारतीय रक्षा निर्यातकों और अन्य सभी हितधारकों के इस अनुकरणीय प्रदर्शन की सराहना की है। उन्‍होंने कहा है कि भारत रक्षा उपकरणों का वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रक्षा मंत्री ने एक्‍स पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रेरणादायक नेतृत्व में भारत रक्षा निर्यात में प्रभावशाली सफलता की कहानी लिख रहा है।

रक्षा उपक्रमों (डीपीएसयू) के निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 151 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसमें निजी कंपनियों ने 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है। रक्षा निर्यात में निजी क्षेत्र का योगदान 17,353 करोड़ रुपए का रहा, जबकि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का योगदान 21,071 करोड़ रुपए रहा। पिछले वित्त वर्ष में उनका यह आंकड़ा क्रमशः 15,233 करोड़ रुपए और 8,389 करोड़ रुपए था।

यह रिकॉर्ड उच्च आंकड़ा पिछले पांच वर्षों में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्शाता है।इस तीव्र वृद्धि से भारत में निर्मित रक्षा उत्पादों की बढ़ती वैश्विक स्वीकृति और अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में इस क्षेत्र के बढ़ते एकीकरण का पता चलता है। प्रणालियों/उप-प्रणालियों के लिए एक सफल वैश्विक भागीदार होने के अलावा भारत वित्त वर्ष 2025-26 तक 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। निर्यातकों की संख्या पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 13.3 प्रतिशत  बढ़कर 128 से 145 हो गई है।

व्यापार सुगमता और रक्षा निर्यातकों को सुविधा प्रदान करने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों ने प्रदर्शन-उन्मुख और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी रक्षा उद्योग के विकास का मार्ग प्रशस्त किया है। रक्षा उत्पादन विभाग ने इस विकास पथ पर रक्षा निर्यातकों की सहायता के लिए एक नए ऑनलाइन पोर्टल और प्राधिकरणों के लिए सरलीकृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के माध्यम से रक्षा निर्यात नियामक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया है।

भारत का सीफूड निर्यात: वृद्धि से वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक

भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र खाद्य सुरक्षा, रोजगार, निर्यात आय और सतत् आजीविका में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में उभरा है, जिसे साल 2015 के बाद से भारत सरकार द्वारा किए गए रिकॉर्ड ₹39,272 करोड़ के निवेश ने मजबूती प्रदान की है। यह क्षेत्र प्राथमिक स्तर पर लगभग 3 करोड़ मछुआरों और मत्स्य किसानो को समर्थन देता है और मूल्य श्रृंखला में इसका प्रभाव लगभग दोगुना है। वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा जल कृषि उत्पादक होने के नाते, भारत वैश्विक मछली उत्पादन में लगभग 8% हिस्से का योगदान देता है। कभी अधिकांशतः पारंपरिक रहा यह क्षेत्र, पिछले दशक में एक वाणिज्यिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में बदल गया है, जहां छोटे स्तर के मछुआरों के लिए समावेशी विकास सुनिश्चित किया गया है। यह परिवर्तन उत्पादन में हुई वृद्धि से रूपष्‍ट प्रतिबिम्‍बित होता है, जहाँ मछली उत्पादन 2019–20 में 141.64 लाख टन से बढ़कर 2024–25 में 197.75 लाख टन हो गया, औसत वार्षिक वृद्धि लगभग 7% दर्ज की गई।

भारत का सीफूड निर्यात मजबूत और सतत् वृद्धि दर्ज कर रहा है, जो पिछले 11 वर्षों में 7%  की औसत वार्षिक दर से बढ़ा है। इस अवधि में समुद्री उत्पादों का निर्यात दोगुने से अधिक बढ़ा, जो 2013–14 में ₹30,213 करोड़ से बढ़कर 2024–25 में ₹62,408 करोड़ हो गया, जिसमें प्रमुख योगदान ₹43,334 करोड़ के झींगा (श्रिंप) निर्यात का है।

भारत का सीफूड निर्यात एक व्यापक और विविध उत्पाद श्रृंखला को कवर करता है, जिसमें 350 से अधिक प्रकार के उत्पाद लगभग 130 वैश्विक बाजारों में भेजे जाते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका निर्यात का सबसे बड़ा गंतव्य बना हुआ है, जिसका साल 2024–25 के कुल निर्यात मूल्य में 36.42%  का हिस्सा रहा, इसके बाद चीन, यूरोपीय संघ, दक्षिण पूर्व एशिया, जापान और मध्य पूर्व का स्थान है, जबकि अन्य बाजारों का संयुक्त योगदान लगभग 9% का है। निर्यात मिश्रण में मुख्य रूप से फ्रोज़न श्रिंप का प्रभुत्व है, जो भारत का एक प्रमुख सीफूड उत्पाद है, इसके बाद फ्रोज़न मछली, स्क्विड, सुखाए हुए उत्पाद, फ्रोज़न कटलफ़िश, सुरिमी आधारित उत्पाद और ताजा एवं ठंडा सीफूड शामिल हैं, जो वैश्विक मांग की मजबूती और उत्पाद विविधीकरण में विस्तार को दर्शाते हैं। सीफूड निर्यात में मूल्य संवर्धित उत्पादों का हिस्सा 2.5% से बढ़कर 11% हो गया है, जिसका निर्यात मूल्य 74.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर है।

कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने और वैश्विक सीफूड बाजारों में भारत की उपस्थिति को बढ़ाने के लिए, सरकार निर्यात उत्पाद श्रृंखला के विविधीकरण को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत, मत्स्य विभाग मूल्य श्रृंखला में कई प्रकार के हस्तक्षेपों का समर्थन करता है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण मछली बीज उत्पादन, खारे पानी की जलीय कृषि का विस्तार और विविधीकरण, निर्यात उन्मुख प्रजातियों को बढ़ावा, प्रौद्योगिकी अपनाना, रोग प्रबंधन, ट्रेसबिलिटी सिस्टम और क्षमता विकास शामिल हैं। साथ ही, निवेश पोस्ट-हार्वेस्ट अवसंरचना, निर्बाध शीत श्रृंखला नेटवर्क, मछली पकड़ने के आधुनिक बंदरगाहों और मछली उतारने के केंद्रों को मजबूत करने में किया जा रहा है। इसके साथ ही, सरकार उच्च मूल्य वाली प्रजातियों जैसे टूनासीबासकोबियापॉम्पानोमड क्रैबजीआईएफटी तिलापियाग्रुपरटाइगर श्रिंप (पीमोनोडॉन), स्कैम्पी और सीवीड पर केंद्रित विविधीकृत जलीय कृषि को बढ़ावा दे रही है, जिसका उद्देश्य भारत के उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार करना और अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम बाजारों तक पहुंच में सुधार करना है।

प्रमुख निर्यात बाजारों तक पहुँच सुरक्षित करने के लिए, भारत लगातार अपने मत्स्य पालन क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय नियमों और स्थिरता मानकों के अनुरूप बना रहा है। इसका मुख्य ध्यान अमेरिकी अनुपालन आवश्यकताओं को पूरा करने पर रहा है, विशेषकर मरीन मैमल प्रोटेक्शन एक्ट (एमएमपीए) के तहत, जो समुद्री स्तनधारी अप्रत्यक्ष पकड़ (बाय-कैच) को कम करने के उपायों की मांग करता है। निरंतर प्रयासों, जिसमें वैज्ञानिक स्टॉक आकलन और हितधारक परामर्श शामिल थे, के परिणामस्वरूप भारत ने साल 2025 में अमेरिकी अधिकारियों से तुल्यता की पुष्टि प्राप्त की, जिससे दिसंबर 2025 की समय सीमा के बाद भी अमेरिकी बाजार में सीफूड का निरंतर निर्यात सुनिश्चित हुआ। साथ ही, जंगली पकड़ वाली श्रिंप के निर्यात पर प्रतिबंधों को दूर करने के लिए श्रिंप ट्रॉलर पर टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (टीईडी) स्थापित करने के कदम उठाए जा रहे हैं, और तटीय राज्यों में इसका बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन प्रगति पर है। सरकार ने ट्रेसबिलिटी और प्रमाणन प्रणालियों को भी मजबूत किया है, और एक राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा लॉन्च किया है जिससे पूरे प्रसंस्करण चक्र की निगरानी, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित किया जा सके। भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईज़ेड) में स्थायी मत्स्य पालन को नियंत्रित करने वाले नए नियमों के साथ मिलकर, ये उपाय भारत को एक जिम्मेदार और वैश्विक रूप से अनुपालन करने वाले सीफूड निर्यातक के रूप में स्थापित करने की संगठित पहल को दर्शाते हैं।

मत्स्य पालन क्षेत्र में व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए, मत्स्य विभाग ने कई नियामक और आयात प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया है। सैनिटरी इम्पोर्ट परमिट (एसआईपी) प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल किया गया है और राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे अनुमोदन का समय 30 दिन से घटकर केवल 72 घंटे हो गया है। एसआईपी आवश्यकताओं को एसपीएफ श्रिंप ब्रूडस्टॉक, मछली के तेल, सीमित अनुसंधान एवं विकास नमूनों और केवल मूल्य संवर्धन और पुनः निर्यात के लिए लायी गई जंगली मछली आयात पर छूट दी गई है, जिससे व्यापार संचालन में आसानी हुई है। हाल के कानूनी सुधारों ने जलीय कृषि इकाइयों के लिए अनुपालन बोझ को और कम किया है, जो इस क्षेत्र को अधिक व्यापार अनुकूल और निवेश के लिए तैयार बनाने के व्यापक प्रयास को दर्शाता है।

आगामी पांच वर्षों में, सरकार उच्च मूल्य वाले निर्यात, व्यापक बाजार पहुँच और मजबूत गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करके भारत की वैश्विक सीफूड रणनीति को प्रभावपूर्ण बनाने की योजना बना रही है। मूल्य वर्धित उत्पादों का हिस्सा बढ़ाने का लक्ष्य है, जिसे प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार, कुशल कार्यबल विकास और प्रमाणन प्रणालियों में सुधार द्वारा प्राप्त किया जाएगा। प्रयासों को यूकेईयूआसियान और पश्चिम एशिया जैसे बाजारों में निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ अंतर्देशीय निर्यात केंद्र और मीठे पानी की आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण की दिशा में भी लगाया जाएगा। उन्नत शीत श्रृंखला नेटवर्क, डिजिटल ट्रेसबिलिटी और अनुपालन ढांचे भारत की महत्वाकांक्षा को समर्थन देंगे, जिससे आने वाले वर्षों में भारत एक भरोसेमंद और प्रीमियम सीफूड निर्यातक के रूप में उभर सके।

आम चुनाव और उपचुनाव 2026: मतदान के दिन सवेतन अवकाश
  1. भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुदुच्‍चेरी, तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड तथा त्रिपुरा के 8 (आठ) विधानसभा क्षेत्रों के लिए उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया।
  2. राज्यों में मतदान निम्नलिखित कार्यक्रम के अनुसार किया जाएगा:
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश जहां आम चुनाव/उपचुनाव होने हैंमतदान की तिथि
असम, केरल, पुदुच्‍चेरी, गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा09.04.2026
तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र23.04.2026
पश्चिम बंगाल23.04.2026  (पहला चरण)
29.04.2026  (दूसरा चरण)
  1. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135B के अनुसार, किसी भी व्यवसाय, व्यापार, औद्योगिक उपक्रम या किसी अन्य संस्था में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति, जिसे लोक सभा या राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के चुनाव या किसी संसदीय/विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव में मतदान का अधिकार प्राप्त है, उसे मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश प्रदान किया जाएगा।
  2. ऐसे सवैतनिक अवकाश के कारण किसी भी कर्मचारी के वेतन में कटौती नहीं की जाएगी। कोई भी नियोक्ता जो इन प्रावधानों का उल्लंघन करता है, उसे जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। सभी दैनिक वेतन भोगी और आकस्मिक मजदूरों को भी मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश का अधिकार होगा।
  3. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे मतदाता (जिसमें आकस्मिक और दैनिक वेतन भोगी श्रमिक शामिल हैं) जो अपने निर्वाचन क्षेत्र के बाहर स्थित औद्योगिक या वाणिज्यिक संस्थानों में कार्यरत हैं लेकिन मतदान होने वाले किसी निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत हैं, उन्हें भी मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश का लाभ मिलेगा, जिससे वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
  4. आयोग ने सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को निर्देश दिया है कि वे सभी संबंधित अधिकारियों को इन प्रावधानों के सख्त पालन के लिए आवश्यक निर्देश जारी करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी मतदाता अपने मताधिकार का स्वतंत्र और सुविधाजनक रूप से प्रयोग कर सकें।
राज्यसभा को स्कूली छात्रों के लिए शुरू किए गए अंतरिक्ष संबंधी कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी गई

सरकार समावेशी अंतरिक्ष शिक्षा प्रणाली का विस्तार कर रही है; युविका पूरे भारत में युवा प्रतिभाओं को सशक्त बना रही है: डॉ. जितेंद्र सिंह

राज्यसभा में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष शिक्षा पहल युविका में ग्रामीण छात्रों को प्राथमिकता मिल रही है

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसरो का व्यावहारिक प्रशिक्षण अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की अगली पीढ़ी को प्रेरित कर रहा ह

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम (युविका) जैसी समावेशी और भविष्योन्मुखी पहलों के माध्यम से स्कूली छात्रों में वैज्ञानिक सोच को व्यवस्थित रूप से पोषित कर रही है, जिससे देश भर के ग्रामीण, वंचित और महत्वाकांक्षी युवाओं को समान अवसर मिल सकें।

राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए, श्री रायगा कृष्णाया द्वारा उठाए गए तारांकित प्रश्न के साथ-साथ श्री नीरज डांगी, डॉ. परमार जसवंतसिंह सलामसिंह और राजथी द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों के उत्तर में, मंत्री ने युविका कार्यक्रम की रूपरेखा, पहुंच और प्रभाव के बारे में विस्तार से बताया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2019 में शुरू की गई युविका एक अनूठी पहल है जिसका उद्देश्य कक्षा 9 के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी से प्रारंभिक अवस्था में ही परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को इस तरह से संरचित किया गया है कि लोकतांत्रिक और समान भागीदारी सुनिश्चित हो सके, जिसमें प्रत्येक राज्य से 10 और प्रत्येक केंद्र शासित प्रदेश से 8 विद्यार्थियों का वार्षिक चयन किया जाता है, जिससे संतुलित क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व बना रहता है।

समावेशिता पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि चयन मानदंडों में ग्रामीण छात्रों को विशेष महत्व दिया गया है, जिसमें पंचायत स्तर के विद्यालयों के छात्रों को 15% वरीयता शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि चयन प्रक्रिया व्यापक है, जिसमें प्रश्नोत्तरी प्रदर्शन, विज्ञान मेलों में भागीदारी, ओलंपियाड और राष्ट्रीय सामाजिक सेवा (एनएसएस) और स्काउट्स जैसी पाठ्येतर गतिविधियों को ध्यान में रखा जाता है, जिससे छात्रों का समग्र मूल्यांकन सुनिश्चित होता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सहभागिता का विवरण देते हुए बताया कि अब तक पांच संस्करणों में 1,320 छात्र इस कार्यक्रम से लाभान्वित हो चुके हैं। कोविड-19 महामारी के कारण 2020 और 2021 में कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सका। हालांकि, हाल के वर्षों में भागीदारी लगातार बढ़ रही है और प्रतिवर्ष लगभग 350 छात्रों का चयन किया जा रहा है, जो इसकी बढ़ती पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है।

मंत्री जी ने आगे बताया कि युविका कार्यक्रम ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान एक महीने का आवासीय कार्यक्रम है, जिसमें चयनित छात्र इसरो के प्रमुख केंद्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं, वैज्ञानिकों से बातचीत करते हैं और अत्याधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों से परिचित होते हैं। वर्तमान में, यह कार्यक्रम सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (श्रीहरिकोटा), विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (तिरुवनंतपुरम) और अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (अहमदाबाद) सहित सात प्रमुख केंद्रों में संचालित किया जा रहा है। क्षमता को और बढ़ाने के लिए महेंद्र गिरि (तमिलनाडु) और जोधपुर (राजस्थान) में दो अतिरिक्त केंद्र जोड़े जा रहे हैं।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कार्यक्रम की पहुंच और जागरूकता से संबंधित चिंताओं को दूर करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोहराया कि यह कार्यक्रम समावेशी है और इसमें सरकारी स्कूलों सहित केंद्रीय और राज्य दोनों बोर्डों के छात्र शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रव्यापी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं, विज्ञान मेलों और जिला एवं राज्य स्तर पर शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता और भागीदारी को बढ़ावा दिया जाता है।

वैज्ञानिक प्रतिभाओं के पोषण के लिए विकसित किए जा रहे व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रकाश डालते हुए, मंत्री ने विज्ञान ज्योति जैसी पूरक पहलों का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य कक्षा 9 से 12 तक की लड़कियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, और विभिन्न करियर चरणों में महिलाओं का समर्थन करने वाले अन्य फैलोशिप कार्यक्रमों का भी जिक्र किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की तीव्र विकास पर भी जोर दिया और बताया कि यह एक मामूली आधार से बढ़कर लगभग 9 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गया है, और अनुमान है कि 2033 तक यह 44 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि भारत द्वारा किए गए 90% से अधिक विदेशी उपग्रह प्रक्षेपण पिछले दशक में हुए हैं, जो इस क्षेत्र में किए गए परिवर्तनकारी सुधारों को दर्शाते हैं।

मंत्री जी ने अपने संबोधन का समापन यह कहते हुए किया कि युविका जैसी पहल न केवल भविष्य के वैज्ञानिकों की एक मजबूत श्रृंखला का निर्माण कर रही है, बल्कि 2047 तक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और नवाचार में वैश्विक नेता बनने के भारत के दीर्घकालिक दृष्टिकोण में भी योगदान दे रही है।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने छत्रपति शिवाजी महाराज को उनकी पुण्यतिथि पर नमन किया

छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय स्वाभिमान के अमर प्रतीक और राष्ट्र-गौरव के रक्षक हैं

समुद्र पर नियंत्रण के महत्व को समझते हुए उनके द्वारा बनाई गई शक्तिशाली नौसेना उनके अद्वितीय रणनीतिक कौशल और दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता का प्रतिबिंब है

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया।

X पर एक पोस्ट में, श्री अमित शाह ने कहा, “भारतीय स्वाभिमान के अमर प्रतीक और राष्ट्र-गौरव के रक्षक छत्रपति शिवाजी महाराज जी का स्मरण कर उनके चरणों में वंदन करता हूँ। धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए उन्होंने लोगों को एकजुट किया और हिंदवी स्वराज की स्थापना की। समुद्र पर नियंत्रण के महत्व को समझते हुए उनके द्वारा बनाई गई शक्तिशाली नौसेना उनके अद्वितीय रणनीतिक कौशल और दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता का प्रतिबिंब है। एक शासक कैसे एक साथ स्वसंस्कृति और स्वभाषा की रक्षा कर सकता है तथा लोककल्याण के आदर्श भी स्थापित कर सकता है, उनका जीवन इसका आदर्श है। उनका अथक संघर्ष और जीवनगाथा अनंतकाल तक देशवासियों को मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देती रहेगी।”