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40 साल का इंतजार खत्म: पंजाब के ढोलक वादक की निकली ₹1.50 करोड़ की लॉटरी; बेटे के नाम ने बदली आर्टिस्ट की किस्म

पंजाब डेस्क: पंजाब के नवांशहर (SBS नगर) के रहने वाले गुरचरण सिंह के लिए 7 अप्रैल का दिन खुशियों की सौगात लेकर आया। पिछले 4 दशकों से अपनी किस्मत आजमा रहे गुरचरण रातों-रात करोड़पति बन गए हैं। उन्होंने मंथली ड्रॉ में डेढ़ करोड़ रुपये का बंपर इनाम जीता है।

बेटे के नाम से चमकी किस्मत: गुरचरण सिंह ने यह लॉटरी टिकट अपने बेटे मान सिंह के नाम पर खरीदा था,। उनका मानना है कि उनके बेटे के भाग्य ने उनके 40 साल के लंबे इंतजार को एक सुखद अंत दिया है।

पेशे से कलाकार और ढोलक वादक: नवांशहर के गांव उरापड़ के रहने वाले गुरचरण सिंह पेशे से एक पेंटिंग आर्टिस्ट हैं। इसके अलावा, उनका आध्यात्मिक लगाव भी है और वे वर्षों से भगवती जागरणों में ढोलक बजाते आ रहे हैं।

40 साल का लंबा संघर्ष: गुरचरण ने बताया कि वे पिछले 40 वर्षों से लगातार लॉटरी टिकट खरीद रहे थे। कभी कोई बड़ा इनाम नहीं लगा, लेकिन उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई।

इनामी राशि का उपयोग: इतनी बड़ी राशि जीतने के बाद गुरचरण सिंह ने अपनी योजना साझा करते हुए कहा कि वे इन पैसों का उपयोग अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और अपने पुश्तैनी काम को आगे बढ़ाने के लिए करेंगे। उनके परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है।

लॉटरी क्लेम की प्रक्रिया: 4 अप्रैल 2026 को ड्रॉ निकलने के बाद उन्हें लॉटरी विक्रेता का फोन आया था,। मंगलवार (7 अप्रैल) को वे आधिकारिक तौर पर लुधियाना में टिकट विक्रेता के पास पहुंचे और दस्तावेजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद अब चंडीगढ़ लॉटरी ऑफिस के लिए रवाना हो गए हैं।

गुरचरण सिंह की यह कहानी साबित करती है कि यदि आप अटूट विश्वास और धैर्य के साथ प्रयास करते रहें, तो सफलता एक दिन जरूर कदम चूमती है।

PUNJAB TOP-10 NEWS, चुटकियों में पढ़े बड़ी दिन भर की खबरें…

पंजाब डेस्क: पंजाब-चंडीगढ़ टॉप 10 खबरें: नवजोत कौर सिद्धू का नया दांव, DSP के बेटे ने लूटा बैंक और ढोलक वादक बना करोड़पति। चुटकियों में पढ़े दिनभर की अहम 10 खबरें।

1. नवजोत कौर सिद्धू की नई पारी: पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने ‘भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी’ का पोस्टर शेयर कर नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह आगामी विधानसभा चुनाव इसी पार्टी के बैनर तले लड़ेंगी। पार्टी अध्यक्ष अम्लान बिश्वास ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि पार्टी का पूरे देश में रिलांच किया जा रहा है।

2. रिटायर्ड DSP के बेटे ने लूटा बैंक: जालंधर के खुरला किंगरा इलाके में PNB बैंक में हुई दिनदहाड़े लूट का पुलिस ने 24 घंटे में खुलासा कर दिया है। मुख्य आरोपी सिमरनजीत सिंह, जो एक रिटायर्ड DSP का बेटा है, उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके पास से लूट की रकम और वारदात में इस्तेमाल पिस्टल बरामद हुई है।

3. कलयुगी बेटे ने मां पर चढ़ाया ट्रैक्टर: बठिंडा के गांव महिमा सरजा में संपत्ति विवाद में एक बेटे ने अपनी बुजुर्ग मां पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया और उन्हें घसीटकर सड़क किनारे फेंक दिया। यह पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हो गई है और पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।

4. ढोलक वादक बना करोड़पति: नवांशहर के रहने वाले पेंटिंग आर्टिस्ट और जागरणों में ढोलक बजाने वाले गुरचरण सिंह की 1.50 करोड़ रुपये की लॉटरी लगी है। उन्होंने यह टिकट अपने बेटे के नाम पर खरीदा था। गुरचरण पिछले 40 सालों से टिकट खरीद रहे थे।

5. मोहाली में सेल्सगर्ल पर चाकू से हमला: न्यू चंडीगढ़ में एक कपड़ा शोरूम की सेल्सगर्ल पर उसके पति ने सरेआम चाकू से हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि कोर्ट द्वारा तय किए गए गुजारा भत्ते (मेंटेनेंस) को लेकर पति नाराज था। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

6. ज्वेलरी शॉप में ‘फिल्मी’ लूट: लुधियाना में एक बदमाश चांदी का कड़ा लेकर भागा और उसे पकड़ने की कोशिश कर रहे दुकानदार को बाइक के पीछे 500 मीटर तक घसीटता ले गया। इस दौरान ज्वेलर गंभीर रूप से घायल हो गया।

7. फ्लाइट शेड्यूल पर भिड़े मंत्री: लुधियाना के हलवारा एयरपोर्ट से दिल्ली की फ्लाइट की टाइमिंग को लेकर केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा के बीच जुबानी जंग छिड़ गई। दोनों ने अलग-अलग वेबसाइट्स का हवाला देकर एक-दूसरे के दावों को गलत बताया।

8. अर्शदीप सिंह की ‘मिस्ट्री गर्ल‘: भारतीय क्रिकेटर अर्शदीप सिंह की एक स्नैपचैट स्टोरी ने सोशल मीडिया पर खलबली मचा दी है, जिसमें वह एक लड़की का हाथ थामे नजर आ रहे हैं। फैंस लड़की के हाथ पर बने टैटू के जरिए उसका संबंध एक पंजाबी मॉडल से जोड़ रहे हैं।

9. जालंधर में दर्दनाक हादसा: जालंधर के गुरु नानक पुरा वेस्ट में घर के बाहर खेल रही 7 साल की बच्ची को एक कार ने कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी ड्राइवर को हिरासत में ले लिया है।

10. चंडीगढ़ में तोड़फोड़ का विरोध: सेक्टर-45 में हाउसिंग बोर्ड (CHB) द्वारा की गई डिमोलिशन ड्राइव के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे 25 सालों से यहाँ रह रहे हैं और अब की जा रही यह कार्रवाई अनुचित है।

ईरान में ‘सभ्यता खत्म’ होने की आहट? ट्रंप की भीषण धमकी के बाद भारतीय दूतावास का अलर्ट; नागरिकों को 48 घंटे घर में रहने की सलाह

इंटरनेशनल डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई “सभ्यता के अंत” की चेतावनी के बाद, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एक आपातकालीन सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है।

ट्रंप की विनाशकारी धमकी: डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए ईरान को मंगलवार की समय सीमा (डेडलाइन) दी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए लिखा कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो “आज रात एक पूरी सभ्यता का अंत हो जाएगा”, जिसे फिर कभी जीवित नहीं किया जा सकेगा। ट्रंप ने इसे इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण क्षण बताया है।

भारतीयों के लिए 48 घंटे का ‘कर्फ्यू‘: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय दूतावास ने ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से अगले 48 घंटों तक घरों के अंदर रहने की सख्त अपील की है।इन जगहों से दूर रहने के निर्देश: एडवाइजरी में नागरिकों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे बिजली के प्रतिष्ठानों, सैन्य ठिकानों और बहुमंजिला इमारतों की ऊपरी मंजिलों से दूर रहें। साथ ही, राजमार्गों पर आवाजाही के लिए दूतावास से समन्वय करना अनिवार्य कर दिया गया है।

होटल छोड़ने पर पाबंदी: जो भारतीय व्यवस्थित आवासों या होटलों में ठहरे हैं, उन्हें अपने कमरे न छोड़ने और दूतावास की टीमों के साथ लगातार संपर्क में रहने को कहा गया है।

आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर: दूतावास ने किसी भी सहायता के लिए 24 घंटे चालू रहने वाले हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:

+989128109115

+989128109102

+989128109109

+989932179359

ईमेल: cons.tehran@mea.gov.in

व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि वे परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर विचार नहीं कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप के कड़े रुख ने पूरे क्षेत्र में युद्ध का खौफ पैदा कर दिया है।

यूआईडीएआई क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ ने लापता बच्चे जग्गा सिंह को उसके परिवार से फिर से मिलाने में मदद की

चंडीगढ़, 7 अप्रैल 2026: समन्वित प्रयासों और आधार-आधारित पहचान के प्रभावी उपयोग के एक उल्लेखनीय उदाहरण में, क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ ने लापता बच्चे जग्गा सिंह को महीनों की जुदाई के बाद उसके परिवार से सफलतापूर्वक फिर से मिलाने में मदद की है।

जग्गा सिंह, लगभग 50-60% बौद्धिक अक्षमता वाला बच्चा, 20 अगस्त को स्थानीय मेले के दौरान लापता हो गया था। उसी रात करीब 1:30 बजे, स्थानीय पुलिस ने उसे यमुनानगर के गांव छाछरौली के पास पाया। संवाद करने की उसकी सीमित क्षमता के कारण, बच्चा अपनी पहचान या परिवार के बारे में विवरण साझा करने में असमर्थ था, जिससे ट्रेसिंग प्रक्रिया विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो गई।

स्थानीय पुलिस के निरंतर प्रयासों के बावजूद, जिसमें बच्चे के वीडियो प्रसारित कर लीड्स इकट्ठा करना शामिल था, परिवार के बारे में कोई तत्काल जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। बच्चे को उसके बाद एक बाल देखभाल संस्थान के संरक्षण में रख दिया गया, जहां उसकी पहचान के लिए प्रयास जारी रखे गए।

पहचान प्रक्रिया के हिस्से के रूप में, बच्चे के लिए आधार नामांकन शुरू किया गया। हालांकि, नामांकन डुप्लिकेट के रूप में अस्वीकार कर दिया गया, जो पूर्व आधार रिकॉर्ड के अस्तित्व का संकेत था। इस लीड की संभावना को पहचानते हुए, मामला क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ को बढ़ा दिया गया।

मिस बबीता रानी, असिस्टेंट मैनेजर (हरियाणा) के मार्गदर्शन में और मिस्टर दीपक, बाल देखभाल संस्थान के लीगल एडवाइजर के समर्थन से, उन्नत आधार खोज तंत्रों का उपयोग किया गया। इससे बच्चे का पता और परिवार के संपर्क विवरण सहित महत्वपूर्ण जानकारी सफलतापूर्वक प्राप्त हो गई।

सत्यापन और समन्वय के बाद, जग्गा सिंह को 28 मार्च 2026 को उसके माता-पिता से सफलतापूर्वक मिला दिया गया, जिससे परिवार को अपार राहत और खुशी मिली।

यह मामला आधार की पहचान सत्यापन में महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है और दर्शाता है कि कैसे तकनीक, दृढ़ प्रशासनिक और संस्थागत प्रयासों के साथ मिलकर, परिवारों को बहाल करने और कमजोर व्यक्तियों को आशा प्रदान करने में मदद कर सकती है।

सीसीए पंजाब ने भारतनेट कार्यक्रम के तहत क्वालिटी एफटीटीएच कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने हेतु फील्ड चेक किए

चंडीगढ़, 07 अप्रैल 2026: संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के अंतर्गत, नियंत्रक संचार लेखा कार्यालय, पंजाब, डिजिटल भारत निधि से वित्त पोषित संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत प्रदान की जा रही एफटीटीएच (फाइबर टू द होम) कनेक्शनों की भौतिक सत्यापन हेतु राज्य के विभिन्न जिलों में फील्ड विजिट्स कर रहा है।

यह सत्यापन अभियान सेवा वितरण की स्थिति का आकलन करने व कार्यक्रम के उद्देश्यों के अनुरूप घरेलू उपभोक्ताओं को किफायती दामों पर हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाएं सुनिश्चित करने के लक्ष्य से संचालित है। विजिट्स के दौरान सीसीए टीमें सब्सक्राइबर्स व स्थानीय हितधारकों से बातचीत कर सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच व प्रभावशीलता पर इनपुट ले रही हैं।

उपभोक्ताओं से प्राप्त इनपुट बताते हैं कि एफटीटीएच कनेक्टिविटी ऑनलाइन शिक्षा, ई-गवर्नेंस सेवाओं, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स व संचार सुविधाओं तक पहुंच सक्षम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी की उपलब्धता ग्रामीण व दुर्गम क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में सुधार ला रही है।

यह पहल माननीय प्रधानमंत्री की “सभी के लिए इंटरनेट” सुनिश्चित करने व डिजिटल डिवाइड को पाटने हेतु डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की दृष्टि से मेल खाती है। प्रयास हर घर में इंटरनेट पहुंच प्रदान करने व समावेशी डिजिटल विकास को बढ़ावा देने के व्यापक उद्देश्य से भी जुड़े हैं।

फील्ड सत्यापन अभियान सीसीए पंजाब के निरंतर निगरानी तंत्र का हिस्सा है जो डिजिटल कनेक्टिविटी पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन व अंतिम छोर तक सहज कनेक्टिविटी सुनिश्चित करता है। सीसीए पंजाब ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने व सरकारी कार्यक्रमों के लाभ राज्य के हर कोने तक पहुंचाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत की विकास गाथा के केंद्र में महिलाएँ
  • श्रीमती विजया रहाटकर

भारत की विकास गाथा को अक्सर संख्याओं, विकास दरों, अवसंरचना विस्तार और आर्थिक उपलब्धियों के रूप में व्यक्त किया जाता है। लेकिन, पिछले दशक का सबसे बड़ा बदलाव आँकड़ों से परे है। यह एक गहरे सामाजिक बदलाव में परिलक्षित होता है—महिलाओं का केवल भागीदार के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य को आकार देने वाले अग्रिम व्यक्तियों के रूप में उभरना।

महिलाओं के नेतृत्व में विकास की ओर यह बदलाव न तो आकस्मिक है और न ही अलग-थलग है। यह एक सोच-समझकर किये गये सतत प्रयास का परिणाम है, जो जीवन के हर चरण में महिलाओं को समर्थन देने के लिए एक सक्षम इकोसिस्टम का निर्माण करता है। लड़की के जन्म से लेकर उद्यमी, पेशेवर, या सार्वजनिक प्रतिनिधि के रूप में उसकी यात्रा तक, यह दृष्टिकोण समग्र, सतत और परिवर्तनकारी रहा है।               

राजनीतिक भागीदारी में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखा गया है। निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या 12,14,885 है, जिनकी कुल 24,41,781 निर्वाचित प्रतिनिधियों में हिस्सेदारी 49.75% है—इस प्रकार, महिलाएँ जमीनी स्तर पर शासन में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। इस क्रम में, नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी उपलब्धि है, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण की व्यवस्था की गयी है। यह उच्च विधायी क्षेत्रों में महिलाओं की नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने में राष्ट्र की अडिग प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है। इस ऐतिहासिक सुधार की वास्तविक क्षमता केवल इसके प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से ही हासिल की जा सकती है। अधिनियम की प्रावधानों को जल्द से जल्द लागू करने की आवश्यकता है, ताकि महिलाओं की आवाज़ को सिर्फ मान्यता ही न मिले, बल्कि देश की लोकतांत्रिक संरचना में इसे संस्थागत रूप से समाहित किया जा सके। इसके जल्द लागू होने से न केवल समावेशी शासन को गति मिलेगी, बल्कि यह बेहतर प्रतिनिधित्व और न्यायसंगत राजनीतिक परिदृश्य के लिए एक शक्तिशाली उत्प्रेरक के रूप में भी कार्य करेगा।  

दशकों तक, लैंगिक पक्षपात ने भारत के जनसांख्यिकीय और सामाजिक संकेतकों को प्रभावित किया। आज, वह कहानी धीरे-धीरे फिर से लिखी जा रही है। ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जैसी पहलों ने गहरी  जड़ें जमा चुकी मानसिकताओं को चुनौती देने और लड़की के मूल्य को सुदृढ़ करने का प्रयास किया है। इसका प्रभाव राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) में दिखाई देता है, जिसमें 1,000 पुरुषों पर 1,020 महिलाओं का लैंगिक अनुपात दर्ज किया गया है, जो सिर्फ संख्यात्मक सुधार ही नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव का भी संकेत देता है। ‘मिशन इंद्रधनुष’ जैसे कार्यक्रम जीवन के प्रारंभिक चरण में पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करते हैं। ‘मिशन सक्षम आंगनवाड़ी’, ‘पोषण 2.0’, तथा ‘पोषण अभियान’ के प्रयास कुपोषण का समाधान करते हैं—यह मानते हुए कि स्वस्थ बचपन, सशक्त वयस्कता की ओर पहला कदम होता है।  

माताओं के लिए, संस्थागत समर्थन में काफी विस्तार हुआ है। पीएमएमवीवाई के तहत, 4.28 करोड़ से अधिक महिलाओं को 20,149 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि वितरित की गयी है, जो गर्भावस्था के दौरान वित्तीय सहायता प्रदान करती है। 

महिलाएं केवल भाग ही नहीं ले रही हैं—वे नेतृत्व भी कर रही हैं। भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में संस्थापक और निर्णयकर्ताओं के रूप में महिलाओं की भूमिका में लगातार वृद्धि हो रही है और वे नवाचार और उद्यम में भी योगदान दे रही हैं। इस परिवर्तन में वित्तीय समावेश ने अहम भूमिका निभाई है। पीएमएमवाई के तहत, 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 57.79 करोड़ ऋण प्रदान किए गए हैं, जिनमें लगभग 66% लाभार्थी महिलाएं हैं। प्रत्येक ऋण केवल वित्तीय सहायता का ही नहीं, बल्कि महिलाओं की आकांक्षाओं में विश्वास का भी प्रतीक है। इसके पूरक रूप में, जन धन योजना के तहत वित्तीय समावेश और गहरा हुआ है, जिसके अंतर्गत 57.93 करोड़ बैंक खाते खोले गए हैं, जिनमें से 32.29 करोड़ (55.7%) महिलाओं के हैं।

जमीनी स्तर पर, परिवर्तन का पैमाना और भी अधिक प्रभावशाली है। लगभग 10 करोड़ महिलाओं को 90 लाख से अधिक स्वयं-सहायता समूहों में संगठित किया गया है, जिससे सामूहिक सहनशीलता, वित्तीय स्वतंत्रता और सामाजिक आत्मविश्वास को बढ़ावा मिला है। इस इकोसिस्टम ने 3 करोड़ से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी के रूप में उभरने में सक्षम बनाया है और स्वयं सहायता समूहों को 12.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बैंक ऋण प्राप्त हुआ है। इसके अलावा, 84 लाख ग्रामीण महिलाएं उद्यमी बन चुकी हैं, जबकि 5 करोड़ महिला किसानों ने उन्नत और सतत कृषि प्रथाओं में प्रशिक्षण प्राप्त किये हैं।

स्वाभाविक रूप से अगला सवाल उठता है—क्या सशक्तिकरण, आजीविका से समृद्धि की ओर बढ़ सकता है? लखपति दीदी जैसी पहलों का लक्ष्य आय सृजन को मजबूत करना है, जबकि ड्रोन दीदी पहल, जिसका लक्ष्य 15,000 महिलाओं को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित करना है, एक दूरदर्शी दृष्टिकोण को परिलक्षित करती है—ग्रामीण महिलाओं को प्रौद्योगिकी-संचालित कृषि इकोसिस्टम में एकीकृत करना।

सशक्तिकरण का मतलब रोजमर्रा के बोझ को आसान बनाना भी है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10.56 करोड़ से अधिक धुँआ-रहित रसोई घरों ने स्वास्थ्य में सुधार किया है और कठिनाइयों को कम किया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 11.8 करोड़ से अधिक शौचालयों के निर्माण ने गरिमा और सुरक्षा में वृद्धि की है। प्रधानमंत्री आवास योजना, जिसकी 73% लाभार्थी महिलाएं हैं, के तहत निर्मित घरों ने स्वामित्व और सुरक्षा को मजबूत किया है। साथ मिलकर ये सभी पहलें दैनिक जीवन में गरिमा की परिभाषा को नए सिरे से स्थापित करती हैं।

इसके साथ ही, महिलाएं उन स्थानों में भी प्रवेश कर रही हैं, जिन्हें कभी उनकी पहुँच से बाहर माना जाता था। सशस्त्र बल इस बदलती हुई वास्तविकता को दर्शाते हैं, जहाँ महिलाएँ नेतृत्व और जिम्मेदारी की भूमिकाएँ निभा रही हैं, जिसमें युद्ध क्षेत्र भी शामिल हैं। सवाल अब यह नहीं है कि महिलाएँ सेवा कर सकती हैं या नहीं, बल्कि यह है कि वे कितनी दूर तक नेतृत्व कर सकती हैं।

कार्यस्थल सुधारों ने भी इस बदलाव में योगदान दिया है। नयी श्रम संहिताएँ महिला कर्मचारियों को उचित सुरक्षा उपायों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में, जिसमें रात की शिफ्ट भी शामिल है, काम करने में सक्षम बनाकर समावेश को बढ़ावा देती हैं। ये संहिताएँ समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान पर जोर देती हैं—सुरक्षा से सशक्तिकरण की ओर बदलाव को रेखांकित करती हैं।

संस्थागत समर्थन एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने शिकायत निवारण से आगे बढ़कर सक्रिय जुड़ाव और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में भी अपना विस्तार किया है। ‘शी सर्व्स’ जैसी पहल महिला अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन करती हैं, जबकि ‘यशोदा एआई’ उन्हें उभरते तकनीकी कौशल प्रदान करती है। ‘कैंपस कॉलिंग’ युवाओं में जागरूकता बढ़ाता है, ‘शी इज अ चेंज मेकर’ कार्यक्रम जमीनी स्तर पर नेतृत्व क्षमता को मजबूत करता है और ‘महिला जनसुनवाई’ सुलभ शिकायत निवारण सुनिश्चित करता है।

जो उभरकर सामने आता है, वह प्रयासों का एक शक्तिशाली समन्वय है, जो महिला-नेतृत्व वाले विकास के नए युग को आकार दे रहा है।   

(लेखिका राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष हैं)

तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने पहली बार क्रिटिकल अवस्था प्राप्त कर ली है

भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि में 500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने 6 अप्रैल, 2026 को रात 8:25 बजे सफलतापूर्वक प्रथम क्रिटिकैलिटी (नियंत्रित विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया की शुरुआत) प्राप्त कर ली है, जो दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने और स्वदेशी परमाणु प्रौद्योगिकी क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

यह महत्वपूर्ण उपलब्धि परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) द्वारा संयंत्र प्रणालियों की सुरक्षा की गहन समीक्षा के बाद जारी की गई मंजूरी के बाद प्राप्त की गई, जिसमें डीएई के सचिव और एईसी के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती, आईजीसीएआर के निदेशक श्री श्रीकुमार जी. पिल्लई, भाविनी के प्रभारी सीएमडी श्री अल्लू अनंत और भाविनी के पूर्व सीएमडी और होमी सेथना अध्यक्ष श्री के.वी. सुरेश कुमार उपस्थित थे।

पीएफबीआर की प्रौद्योगिकी का विकास और डिजाइन स्वदेशी रूप से इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर) द्वारा किया गया था, जो परमाणु ऊर्जा विभाग का एक अनुसंधान एवं विकास केंद्र है और इसका निर्माण और संचालन भारतीय परमाणु विद्युत निगम लिमिटेड (भविनी) द्वारा किया गया था, जो परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) भारत की दीर्घकालिक परमाणु रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पारंपरिक थर्मल रिएक्टरों के विपरीत, पीएफबीआर यूरेनियम-प्लूटोनियम मिक्स्ड ऑक्साइड (एमओएक्स) ईंधन का उपयोग करता है। पीएफबीआर का कोर यूरेनियम-238 की परत से घिरा होता है। तीव्र न्यूट्रॉन उपजाऊ यूरेनियम-238 को विखंडनीय प्लूटोनियम-239 में परिवर्तित करते हैं, जिससे रिएक्टर अपनी खपत से अधिक ईंधन का उत्पादन कर पाता है। रिएक्टर को अंततः परत में मौजूद थोरियम-232 का उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। रूपांतरण के माध्यम से थोरियम-232 यूरेनियम-233 में परिवर्तित हो जाएगा, जो भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तीसरे चरण के लिए ईंधन का काम करेगा।

यह अनूठी क्षमता परमाणु ईंधन संसाधनों के उपयोग को काफी हद तक बढ़ाती है और देश को अपने सीमित यूरेनियम भंडार से कहीं अधिक ऊर्जा निकालने में सक्षम बनाती है, साथ ही भविष्य में थोरियम के बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए भी तैयारी करती है।

प्रथम चरण की महत्वपूर्णता प्राप्त करने के साथ भारत अपने तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की पूर्ण क्षमता को साकार करने के करीब पहुंच गया है। फास्ट ब्रीडर तकनीक वर्तमान में मौजूद भारी जल रिएक्टरों और भविष्य में स्थापित होने वाले थोरियम-आधारित रिएक्टरों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती है, जिससे देश के प्रचुर थोरियम संसाधनों का लाभ उठाकर दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकेगा।

इस उपलब्धि से भारत के स्वदेशी डिजाइन, इंजीनियरिंग और विनिर्माण तंत्र की मजबूती का पता चलता है। इस रिएक्टर में उन्नत सुरक्षा प्रणालियां, उच्च तापमान वाले तरल सोडियम शीतलक की तकनीक और एक बंद ईंधन चक्र दृष्टिकोण शामिल है, जो परमाणु सामग्रियों के पुनर्चक्रण को सक्षम बनाता है, जिससे स्थिरता में सुधार होता है और अपशिष्ट कम होता है।

यह परियोजना उन असंख्य वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और उद्योग भागीदारों के समर्पण को भी दर्शाती है, जिन्होंने मुख्यतः स्वदेशी तकनीकों और घटकों का उपयोग करते हुए रिएक्टर के डिजाइन, निर्माण और संरचना में योगदान दिया है। उनके प्रयासों से उन्नत परमाणु अभियांत्रिकी में राष्ट्र की बढ़ती क्षमता उजागर होती है और आत्मनिर्भर भारत के अनुरूप तकनीकी आत्मनिर्भरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को बल मिलता है।

ऊर्जा उत्पादन के अलावा, फास्ट ब्रीडर कार्यक्रम परमाणु ईंधन चक्र प्रौद्योगिकियों, उन्नत सामग्रियों, रिएक्टर भौतिकी और बड़े पैमाने की इंजीनियरिंग में रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विकसित ज्ञान और बुनियादी ढांचा भविष्य के रिएक्टर डिजाइनों और अगली पीढ़ी की परमाणु प्रौद्योगिकियों का समर्थन करेगा।

भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अपने विस्तार को जारी रखते हुए, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर उच्च तापीय दक्षता के साथ विश्वसनीय, कम कार्बन उत्सर्जन वाली और आधारभूत ऊर्जा आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। प्रथम क्रिटिकैलिटी का प्राप्त होना न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि विकसित भारत के लिए एक सतत और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम भी है।

विधायक छिना ने गियासपुरा में विकास कार्यों का उद्घाटन किया
- कहा! पंजाब सरकार लोगों को प्राथमिकता के आधार पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। लुधियाना, 6 अप्रैल (000) - लुधियाना दक्षिण विधानसभा क्षेत्र की विधायक राजिंदरपाल कौर छिना ने आज गियासपुरा में मिनी गार्डन के पास वाली सड़क के निर्माण कार्यों का उद्घाटन किया।
विधायक छिना ने कहा कि यह इस क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग थी, जो अब पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि इन विकास कार्यों के पूरा होने से क्षेत्र के निवासियों को काफी सुविधा मिलेगी और बुनियादी ढांचा और मजबूत होगा।

इस अवसर पर स्थानीय निवासियों को संबोधित करते हुए विधायक राजिंदर पाल कौर छिना ने कहा पंजाब सरकार जनता को प्राथमिकता के आधार पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और लुधियाना दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्य निरंतर जारी हैं। उन्होंने कहा कि जनता की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हर वार्ड में काम किया जा रहा है ताकि किसी भी क्षेत्र में कोई कमी न रहे।

उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि आने वाले समय में भी विकास कार्य तेज गति से जारी रहेंगे और जनता की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।
खेल विभाग ने डे स्कॉलर स्कूल विंग के लिए चयन ट्रायल आयोजित किए।
  • दो दिवसीय ट्रायल में कुल 1063 खिलाड़ियों ने भाग लिया।
  • इनमें 627 लड़के और 436 लड़कियां शामिल थीं।

लुधियाना, 6 अप्रैल (000) – पंजाब के खेल विभाग ने विभिन्न स्कूलों के खेल विभागों में 14, 17 और 19 आयु वर्ग की लड़कियों के लिए चयन ट्रायल आयोजित किए।

जिला खेल अधिकारी कुलदीप चुघ ने जानकारी देते हुए बताया कि इन खेलों में एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, साइकिलिंग, फुटबॉल, फेंसिंग, जिम्नास्टिक्स, हॉकी, हैंडबॉल, जूडो, कबड्डी (राष्ट्रीय शैली), खो-खो, नेटबॉल, पावर लिफ्टिंग, सॉफ्टबॉल, शूटिंग, वॉलीबॉल, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि दो दिवसीय ट्रायल में कुल 1063 खिलाड़ियों ने भाग लिया, जिनमें से पहले दिन 627 लड़के और दूसरे दिन 436 लड़कियां थीं।

दूसरे दिन के ट्रायल में भाग लेने वाले खिलाड़ियों का विवरण साझा करते हुए जिला खेल अधिकारी ने बताया कि एथलेटिक्स में लड़कियों की संख्या 22, बॉक्सिंग में 31, साइकिलिंग में 27, फेंसिंग में 5, फुटबॉल में 25, जिम्नास्टिक में 31, हॉकी में 124, हैंडबॉल में 5, जूडो में 21, कबड्डी में 16, नेटबॉल में 10, पावरलिफ्टिंग में 5, सॉफ्टबॉल में 30, शूटिंग में 14, वॉलीबॉल में 26, वेटलिफ्टिंग में 32 और कुश्ती में 12 लड़कियों ने भाग लिया। लुधियाना के जिला खेल अधिकारी कुलदीप चुघ ने बताया कि इन शाखाओं में चयनित खिलाड़ियों को पंजाब सरकार द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा और डी-स्कॉलर्स शाखा में प्रति खिलाड़ी प्रति दिन 125 रुपये की दर से जलपान भी उपलब्ध कराया जाएगा।

पराली प्रबंधन मशीनों पर सब्सिडी प्राप्त करने के लिए किसानों को आवेदन पत्र जमा करना होगा: मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. गुरदीप सिंह
कृषि मशीनों पर 50% से 80% तक सब्सिडी—किसान 24 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं

जागरूकता और सब्सिडी के चलते लुधियाना में पराली जलाने की घटनाएं कम हुईं

किसानों से पराली प्रबंधन के लिए ऑनलाइन आवेदन करने का आग्रह किया गया
लुधियाना के मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. गुरदीप सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष लुधियाना जिले में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में 2023 से 87 प्रतिशत और 2024 से 34 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जो पंजाब के कई अन्य जिलों से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि यह कमी जिले के किसानों के सहयोग, 9000 से अधिक कृषि मशीनों पर दी गई सब्सिडी और कृषि विभाग द्वारा चलाए गए व्यापक जागरूकता अभियान के कारण ही संभव हो पाई है। इस क्रम में, पंजाब सरकार इस वर्ष धान की पराली आदि जैसे फसल अवशेषों के प्रबंधन में सहायक कृषि मशीनों पर भी सब्सिडी प्रदान कर रही है। कृषि मशीनों पर सब्सिडी के लिए जिले के किसानों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। किसान कृषि विभाग के पोर्टल agrimachinerypb.com पर 24 अप्रैल 2026 को शाम 5 बजे तक ऑनलाइन माध्यम से आवेदन जमा कर सकते हैं।
उन्होंने जिले के सभी किसानों से अपील की कि वे इस योजना के तहत दी जा रही सब्सिडी का अधिकतम लाभ उठाएं ताकि लुधियाना जिले में धान की पराली जलाने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जा सके और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि अधिक जानकारी के लिए किसान संबंधित ब्लॉक कृषि अधिकारी/सहायक कृषि अभियंता (सन्ध) या मुख्य कृषि अधिकारी के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि धान के भूसे को संभालने वाली मशीनें जैसे बेलर, रोक, हैप्पी सीडर, स्मार्ट सीडर, सुपर सीडर, जीरो टिल ड्रिल, रिवर्सिबल प्लो, धान के भूसे को काटने/श्रेडर/मल्चर, क्रॉप रीपर, श्रब मास्टर/रोटरी स्लैशर और कंबाइन पर लगे सुपर एसएमएस आदि की खरीद के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इन मशीनों पर 50 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक या योजना के निर्देशों के अनुसार सब्सिडी दी जाएगी। इस संबंध में नियम और शर्तें पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
लुधियाना के सहायक कृषि अभियंता इंजीनियर अमनप्रीत सिंह घेई ने बताया कि आवेदन भरते समय किसानों के पास आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र आदि की स्कैन की हुई प्रतियां होनी चाहिए। ये किसान कस्टम हायरिंग सेंटर या धान के भूसे की आपूर्ति श्रृंखला योजना के लिए भी आवेदन कर सकते हैं।
डॉ. गुरदीप सिंह ने बताया कि आवेदन प्राप्त होने के बाद, विभाग से मिले निर्देशों के अनुसार, यदि आवश्यक हुआ तो, पात्र आवेदकों का चयन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। किसानों को पोर्टल के माध्यम से ही अनुमोदन पत्र जारी किए जाएंगे, जिसके बाद किसान विभाग द्वारा अनुमोदित और पोर्टल पर पंजीकृत किसी भी मशीनरी निर्माता या डीलर से निर्धारित समय के भीतर मशीन खरीद सकेंगे। उन्होंने किसानों से आवेदन करने के लिए कृषि विभाग से लगातार संपर्क बनाए रखने और आवश्यकता पड़ने पर या किसी भी समस्या के लिए कृषि विभाग के कार्यालयों से संपर्क करने की अपील की। ​​उन्होंने किसानों से पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध मशीनों का अधिकतम उपयोग करके पर्यावरण प्रदूषण को कम करने की भी अपील की।