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UIDAI ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक को मजबूत करने के लिए NFSU के साथ साझेदारी की

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय ने डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर सुरक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्रों में एक संरचित, पांच-वर्षीय सहयोग स्थापित करने के लिए हाथ मिलाया है।

यह समझौता ज्ञापन (MoU) सहयोग के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है और यूआईडीएआई के डिजिटल बुनियादी ढांचे में साइबर मजबूती को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से दोनों प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों को एक साथ लाता है, जो भारत के डिजिटल पहचान पारिस्थितिकी तंत्र का आधार है।

इस समझौते का आदान-प्रदान यूआईडीएआई के सीईओ विवेक चंद्र वर्मा और एनएफएसयू के गुजरात परिसर के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) एस.ओ. जुनारे के बीच किया गया। इस अवसर पर यूआईडीएआई के डिप्टी डायरेक्टर जनरल अभिषेक कुमार सिंह सहित दोनों पक्षों के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह सहयोग छह रणनीतिक स्तंभों पर केंद्रित होगा, जिनमें अकादमिक और पेशेवर विकास, सूचना सुरक्षा और सिस्टम एकीकरण, फॉरेंसिक बुनियादी ढांचा और प्रयोगशाला उत्कृष्टता, साइबर सुरक्षा गतिविधियों के लिए तकनीकी सहायता, तकनीकी परामर्श और अनुसंधान (जिसमें एआई, ब्लॉकचेन, डीपफेक डिटेक्शन और क्रिप्टोग्राफिक तकनीकों जैसे उभरते क्षेत्रों में संयुक्त शोध शामिल है), तथा रणनीतिक प्लेसमेंट और आउटरीच शामिल हैं।

यूआईडीएआई के सीईओ विवेक चंद्र वर्मा ने कहा, “यह सहयोग भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को समर्थन देने वाली सुरक्षा, मजबूती और फॉरेंसिक क्षमताओं को और सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे देश की डिजिटल पहचान प्रणालियों की सुरक्षा और अधिक सुनिश्चित होगी।”

यूआईडीएआई ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक सदृढ़ता को बढ़ाने के लिए एनएफएसयू के साथ हाथ मिलाया

यह सहयोग साइबर सुरक्षा ऑडिट, फोरेंसिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण सहित छह प्रमुख क्षेत्रों में केन्द्रित है

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) ने डिजिटल फोरेंसिक, साइबर सुरक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्रों में एक संरचित, पांच वर्षीय सहयोग स्थापित करने के लिए हाथ मिलाया है।

यह समझौता ज्ञापन सहयोग के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करता है और भारत के डिजिटल पहचान इकोसिस्टम को आधार प्रदान करने वाले यूआईडीएआई के डिजिटल इकोसिस्टम में साइबर सदृढ़ता को और मजबूत करने के लिए दो प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों को एक साथ लाया है।

यूआईडीएआई के सीईओ श्री विवेक चंद्र वर्मा और एनएफएसयू गुजरात परिसर के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) एस.ओ. जुनारे के बीच इस समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया। इस समारोह में यूआईडीएआई के उप महानिदेशक श्री अभिषेक कुमार सिंह और दोनों पक्षों के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

यह सहयोग छह रणनीतिक स्तंभों पर केंद्रित होगा: शैक्षणिक और व्यावसायिक विकास, सूचना सुरक्षा और प्रणाली अखंडता, फोरेंसिक अवसंरचना और प्रयोगशाला उत्कृष्टता, साइबर सुरक्षा गतिविधियों के लिए तकनीकी सहायता, तकनीकी परामर्श और अनुसंधान (जिसमें एआई, ब्लॉकचेन, डीपफेक डिटेक्शन और क्रिप्टोग्राफिक प्रौद्योगिकियों जैसे उभरते क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान शामिल है) तथा रणनीतिक प्लेसमेंट और आउटरीच, जिसमें एनएफएसयू के छात्रों के लिए प्लेसमेंट और आउटरीच के अवसर शामिल हैं।

यूआईडीएआई के सीईओ श्री विवेक चंद्र वर्मा ने कहा कि यह सहयोग भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का समर्थन करने वाली सुरक्षा, सदृढ़ता और फोरेंसिक क्षमताओं को और मजबूत करने तथा भारत की डिजिटल पहचान प्रणालियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नए ज़िम्मेदार ऑनलाइन गेमिंग इकोसिस्टम का निर्माण

श्री एस. कृष्णन

ऑनलाइन गेमिंग के लिए एक राष्ट्रीय ढाँचा स्थापित करने की दिशा में भारत की पहल अवसर और जोखिम के संगम से उत्पन्न हुई है। बीते एक दशक में डिजिटल गेमिंग का तेजी से विस्तार हुआ है, जिसे बड़े पैमाने पर स्मार्टफोन अपनाने, किफायती इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीक का उपयोग करने और उस पर निर्भर रहने वाली युवा आबादी का समर्थन मिला है। इस विकास ने नवाचार, कौशल विकास, रचनात्मक उद्योगों और रोजगार सृजन के लिए सार्थक अवसरों का सृजन किया है । मनोविनोद के लिए  गेमिंग और संगठित प्रतिस्पर्धी प्रारूपों ने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता भी प्रदर्शित की है।

इन अवसरों के साथ-साथ, ऑनलाइन मनी गेमिंग—विशेष रूप से सट्टेबाजी और दांव लगाने वाले (यानी बेटिंग वेजरिंग) प्लेटफॉर्मों के अनियंत्रित विस्तार ने गंभीर सामाजिक और आर्थिक चिंताओं को भी जन्‍म दिया। ऐसे अनेक सेवा प्रदाता राज्य सीमाओं के पार या विदेशी क्षेत्रों से संचालित होते थे, जो घरेलू सुरक्षा उपायों को नज़रअंदाज़ करते थे और कानूनों को लागू करना कठिन बनाते थे। दबाव बनाने वाले विज्ञापनों और मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित करने वाले डिज़ाइन फीचर्स ने कमजोर उपयोगकर्ताओं में लत जैसी प्रवृत्तियों और वित्तीय नुकसान को बढ़ावा दिया। वित्तीय संकट, डिजिटल भुगतान प्रणालियों के दुरुपयोग और अस्पष्ट अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन की रिपोर्ट्स ने धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अस्थिरता से जुड़े जोखिमों को उजागर किया। इन परिस्थितियों ने एक ऐसे राष्ट्रीय ढाँचे की आवश्यकता को रेखांकित किया, जो व्यक्तियों—विशेषकर युवाओं—की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए गेमिंग इकोसिस्टम के वैध हिस्सों को जिम्मेदारी से विकसित होने में सक्षम बनाए।  

ऑनलाइन सोशल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स नामक संगठित प्रतिस्पर्धी प्रारूपों जैसे वैध गेमिंग क्षेत्रों की सहायता के लिए एकीकृत संस्थागत ढाँचे का अभाव भी उतना ही महत्वपूर्ण था। डेवलपर्स के पास श्रेणीकरण की ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं थी, जिसका पहले से अनुमान लगाया जा सके और उपयोगकर्ताओं को अक्सर वैध मनोरंजन और अवैध  सट्टेबाजी के बीच फर्क समझने में कठिनाई होती थी। अत: इसका उद्देश्य केवल हानिकारक गतिविधियों पर रोक लगाना नहीं, बल्कि एक संतुलित ढाँचा भी स्थापित करना था, जो उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे और जिम्मेदार नवाचार को भी संभव बनाए।

ऑनलाइन खेल संवर्धन और विनियमन अधिनियम, 2025, (पीआरओजीए) इसी संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसे डेवलपर्स, ई-स्पोर्ट्स संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों, प्रौद्योगिकी पेशेवरों और सामाजिक संगठनों के हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद अंतिम रूप दिया गया है। प्राप्त प्रतिक्रियाओं में लगातार पारदर्शी श्रेणीकरण, पूर्वानुमेय अनुपालन दायित्वों और वैध प्रारूपों के लिए व्‍यवस्थित व सरल मान्यता प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर जोर दिया गया। हितधारकों ने अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्मों  के खिलाफ समन्वित कार्रवाई मजबूत करते हुए वैध मनोरंजक और प्रतिस्पर्धी गेमिंग को बढ़ावा देने का समर्थन किया।

संचालन स्तर पर, यह ढाँचा परस्पर संबद्ध तीन चरणों—अवधारण, मान्यता और पंजीकरण—पर आधारित एक व्‍यवस्थित श्रृंखला प्रस्तुत करता है। ये चरण क्रमिक रूप से कार्य करते हैं और इन्हें पीआरओजीए तथा उसके नियमों में दी गई वैधानिक परिभाषाओं के साथ समझना आवश्यक है।

अवधारण एक नियामक प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है, जिसके माध्यम से किसी भी गेम की जांच और उसका श्रेणीकरण किया जाता है। यह प्रत्‍येक ऑनलाइन गेम के लिए अनिवार्य नहीं है, बल्कि केवल सीमित और निर्धारित परिस्थितियों में ही आवश्यक होता है। सबसे ज्‍यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि ई-स्पोर्ट्स की मान्यता से पहले अवधारण अनिवार्य होता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रतिस्पर्धी प्रारूप वैधानिक सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं और सट्टेबाजी के तत्वों से मुक्त रहते हैं। इसके अलावा, अवधारण आमतौर पर उन स्थितियों में आवश्यक होता है, जब किसी गेम के ऑनलाइन मनी गेमिंग की परिभाषा के दायरे में आने की आशंका हो, जब अधिसूचित ऑनलाइन सोशल गेम्स की श्रेणियों के लिए श्रेणीकरण जरूरी हो, जब शिकायतों या खुफिया सूचनाओं से प्रतिबंधित गतिविधियों को सक्षम करने वाले संभावित वित्तीय तत्वों का संकेत मिले, या जब भारतीय ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण (ओजीएआई) जनहित में जांच का निर्देश दे। अवधारण प्रारंभिक श्रेणीकरण को संभव बनाकर, अवैध वित्तीय मॉडलों को गेमिंग इकोसिस्‍टम में प्रवेश करने से रोकता है, जबकि वैध प्रारूपों को नियामक स्पष्टता के साथ आगे बढ़ने की अनुमति देता है।

अवधारण के बाद, पात्र प्रारूपों को मान्यता दी जा सकती है। ई-स्पोर्ट्स की मान्यता राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के अंतर्गत विनियमित होती है, जिसमें संगठित मल्टीप्लेयर गेमप्ले, पूर्व-निर्धारित प्रतिस्पर्धात्मक नियम और परिणाम केवल मानसिक कौशल, शारीरिक दक्षता या रणनीतिक निर्णय लेने जैसे कारकों पर आधारित होना आवश्यक है। प्रतिभागिता शुल्क की अनुमति केवल प्रतियोगिता से संबंधित प्रशासनिक खर्चों और प्रदर्शन-आधारित पुरस्कार संरचनाओं को समर्थन देने के लिए ही दी जा सकती है। हालांकि, किसी भी रूप में सट्टेबाजी या दांव लगाना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहता है। मान्यता से पहले अनिवार्य अवधारण यह सुनिश्चित करता है कि मान्यता प्राप्त ई-स्पोर्ट्स प्रारूप सभी वैधानिक सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं।

इसके समानांतर, यह ढाँचा ऑनलाइन सोशल गेम्स के पंजीकरण के लिए एक मार्ग स्थापित करता है, जो वित्तीय सट्टेबाजी के लिए नहीं, बल्कि मुख्यतः मनोरंजन और सामाजिक सहभागिता के उद्देश्य से बनाए गए होते हैं। ऑनलाइन सोशल गेम्स की केवल उन्‍हीं श्रेणियों का ही पंजीकरण करने की आवश्‍यकता होगी, जिन्‍हें सरकार द्वारा विशेष रूप से अधिसूचित किया गया हो। जहाँ श्रेणीकरण की निश्चितता होना आवश्यक है, वहाँ पंजीकरण से पहले अवधारण किया जा सकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनमें सट्टेबाजी के तत्व मौजूद नहीं हैं।

इस श्रृंखला का अंतिम चरण पंजीकरण है, जो नियामक दृश्यता प्रदान करता है तथा संतुलित निगरानी और लागू की जा सकने वाली जवाबदेही सुनिश्चित करता है। पंजीकरण आमतौर पर ई-स्पोर्ट्स की मान्यता के बाद होता है या फिर ऑनलाइन सोशल गेम्स की अधिसूचित श्रेणियों पर लागू होता है। यह उन मामलों में भी निर्देशित किया जा सकता है, जहाँ  निर्धारण के परिणाम औपचारिक निगरानी की आवश्यकता दर्शाते हैं या जहाँ ओजीएआई जनहित में ऐसी निगरानी को आवश्यक समझता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि  पंजीकरण पूरे प्लेटफॉर्म पर नहीं ,बल्कि प्रत्येक ऑनलाइन गेम सेवा प्रदाता के अलग-अलग खेलों पर लागू होता है, जिससे अनुपालन यथोचित बना रहता है और साथ ही प्राधिकरणों को अधिकृत खेलों का एक विश्वसनीय रिकॉर्ड बनाए रखने में सहायता मिलती है।

यह वर्तमान ढाँचा प्रतिक्रियात्मक प्रवर्तन से आगे बढ़कर सक्रिय और निवारक शासन की ओर परिवर्तन दर्शाता है। अनुकूल अवधारण प्रारंभिक फिल्‍टर के रूप में कार्य करता है, मान्यता वैधता का स्पष्ट फर्क स्थापित करती है, और पंजीकरण नियामक दृश्यता प्रदान करते हुए सही निगरानी और लागू की जा सकने वाली जवाबदेही सुनिश्चित करता है। साथ ही, अवैध ऑनलाइन मनी गेमिंग के खिलाफ कार्यान्‍वयन को, विशेष रूप से विदेशी ऑपरेटरों को लक्षित करते हुए समन्वित ब्लॉकिंग, जांच-आधारित ओजीएआई की कार्रवाई और वित्तीय व्यवधान के उपायों के माध्यम से मजबूत किया गया है। यह दो-स्तरीय दृष्टिकोण ढाँचे की मूल विचारधारा: वैध संस्थाओं के लिए हल्के फुल्‍के नियमन तथा अवैध संचालकों के खिलाफ सख्त कार्यान्‍वयन  को प्रतिबिंबित करता है।

कार्यान्‍वयन  के अलावा, यह ढाँचा जिम्मेदार इकोसिस्‍टम के विकास के लिए भी अनुकूल परिस्थितियाँ तैयार करता है। स्पष्ट नियामक मार्ग वैध गेमिंग के विकास, प्रतिस्पर्धी अवसंरचना और सहायक डिजिटल सेवाओं में निवेश को प्रोत्साहित करते हैं। ई-स्पोर्ट्स की मान्यता संगठित प्रतियोगिताओं और पेशेवर भागीदारी को सक्षम बनाती है, जबकि विनियमित श्रेणियाँ विकास, अनुपालन, साइबर सुरक्षा और इवेंट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों में सहायता देती हैं।

पीआरओजीए के माध्यम से शुरू किया गया यह परिवर्तन बिखरी हुई प्रतिक्रियाओं से आगे बढ़कर पूर्वानुमेय शासन की ओर बदलाव को दर्शाता है। निवारक श्रेणीकरण, वैध मान्यता और जवाबदेह पंजीकरण को एक साथ जोड़कर यह ढाँचा एक स्थिर वातावरण तैयार करता है, जहाँ नवाचार जनहित की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए जिम्मेदारी के साथ विकसित हो सकता है।

(लेखक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार में सचिव हैं।)

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भारत के साइबर सुरक्षा ऑडिट इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन का

विषय : ‘भविष्य के लिए तैयार ऑडिट के माध्यम से डिजिटल भारत को सुरक्षित करना: अनुकूलन, आश्वासन, प्रगति’

दिल्ली /सत्ता संदेश

भारत के साइबर सुरक्षा ऑडिट इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने और देश की समग्र साइबर लचीलापन को मजबूत करने के लिए, सीईआरटी-इन ने तीन दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन – “सीईआरटी-इन संवाद 2026” – का सफलतापूर्वक आयोजन किया, जिसमें नीति निर्माताओं, उद्योग और नियामक निकायों के मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ), सीईआरटी-इन सूचीबद्ध ऑडिटिंग संगठनों के प्रतिनिधियों और देश भर के साइबर सुरक्षा पेशेवरों सहित 500 से अधिक प्रतिनिधियों को एक साथ लाया गया।

यह सम्मेलन बीआईटीएस पिलानी, गोवा के सहयोग से आयोजित किया गया और 27 से 29 अप्रैल, 2026 तक बीआईटीएस पिलानी के केके बिरला गोवा परिसर में हुआ। सम्मेलन का विषय “भविष्य के लिए तैयार ऑडिट के माध्यम से डिजिटल भारत को सुरक्षित करना: अनुकूलन, आश्वासन, प्रगति”।

उद्घाटन समारोह में गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत उपस्थित थे। सम्मेलन का आयोजन और संचालन सीईआरटी-इन के महानिदेशक डॉ. संजय बहल के मार्गदर्शन में किया गया। इसमें गोवा के पुलिस महानिरीक्षक श्री के.आर. चौरसिया (आईपीएस), वरिष्ठ निदेशक श्री एस.एस. शर्मा, सीईआरटी-इन, निदेशक प्रो. सुमन कुंडू, बीआईटीएस पिलानी, के.के. बिरला गोवा परिसर, निदेशक डॉ. निरुपम मेहरोत्रा, निदेशक बैंकर्स इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट (बीआईआरडी), लखनऊ, वैज्ञानिक ‘ई’ और टीम लीड एश्योरेंस श्री आशुतोष बहुगुणा, सीईआरटी-इन, प्रबंध निदेशक श्री शशि धरन, भारत प्रदर्शनी, और वैज्ञानिक ‘डी’ श्री अभिषेक सोलंकी उपस्थित हुए।

अपने उद्घाटन भाषण में, गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा कि गोवा पारंपरिक रूप से अपने “सूरज, रेत और समुद्र” के लिए जाना जाता है, लेकिन राज्य अब साइबर सुरक्षा के केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। उन्होंने कहा कि देश और विदेश से प्रतिनिधि न केवल गोवा की प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करने के लिए, बल्कि भारत के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सार्थक विचार-विमर्श में शामिल होने के लिए भी एकत्र हुए थे। उन्होंने राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा तैयारियों का मार्गदर्शन करने में भारत की नोडल साइबर सुरक्षा एजेंसी के रूप में सीईआरटी-इन द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।

अपने मुख्य भाषण में, सीईआरटी-इन के वरिष्ठ निदेशक श्री सरमा ने इस आयोजन के महत्व को रेखांकित किया और उभरते साइबर खतरों से निपटने में सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संवाद 2026 ऑडिटिंग संगठनों को अपनी प्रथाओं को उन्नत करने, ज्ञान का आदान-प्रदान करने और सामूहिक रूप से अधिक साइबर-सुगम भारत के निर्माण में योगदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।

बीआईटीएस पिलानी, केके बिरला गोवा कैंपस के निदेशक प्रोफेसर सुमन कुंडू ने भारतीय संगठनों के सामने उभरते साइबर खतरों के बारे में बात की और डिजिटल बुनियादी ढांचे, महत्वपूर्ण प्रणालियों और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा ऑडिट को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। सीईआरटी-इन के कदम की प्रशंसा की, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन सूचना सुरक्षा ऑडिटिंग संगठनों को अपनी क्षमताओं को बढ़ाने और ऑडिट मानकों को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

गोवा इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और कार्यकारी निदेशक सुश्री रेवती कुमार ने एक विशेष संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने गोवा सरकार द्वारा शुरू की गई पहलों पर प्रकाश डाला और राज्य की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सीईआरटी-इन के साथ सहयोग हेतु एक दूरदर्शी रोडमैप की रूपरेखा प्रस्तुत की।

इस कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा क्षेत्र में कई ऐतिहासिक विकास हुए। इनमें एएमबीएके (ऑडिट मॉनिटरिंग, बेंचमार्किंग, एनालिसिस और काइनेटिक इंटरवेंशन) का शुभारंभ और उभरते डोमेन पर कार्य समूहों द्वारा प्रगति रिपोर्ट जारी करना शामिल था। इसके अतिरिक्त, सीईआरटी-इन ने बीआईआर और नाबार्ड के सहयोग से ग्रामीण वित्तीय संस्थानों (आरएफआई) के लिए एक उन्नत साइबर सुरक्षा प्रमाणन पाठ्यक्रम शुरू किया, जो कौशल विकास, संस्थागत क्षमता निर्माण और जमीनी स्तर पर सक्षमता के लिए एक मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण श्री एस.एस. शर्मा द्वारा संचालित भविष्य का ऑडिट: अगली पीढ़ी के साइबर सुरक्षा ऑडिट के माध्यम से उभरती प्रौद्योगिकियों को सुरक्षित करना” विषय पर पैनल चर्चा थी। इस पैनल में भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई), सैटकॉम इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीआरआईएस, बीएसई लिमिटेड और एयरटेल पेमेंट्स बैंक के प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के अग्रणी विशेषज्ञों ने भी कई ज्ञानवर्धक सत्र प्रस्तुत किए।

तीन दिवसीय कार्यक्रम में समानांतर प्रबंधन और तकनीकी ट्रैक शामिल थे, जिसमें 200 से अधिक प्रस्तुतियों में से 87 से अधिक प्रस्तुतियों का चयन किया गया था, जो अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा ऑडिट प्रथाओं का प्रतिनिधित्व करते थे। इनमें शामिल विषयों में यूएवी और उपग्रहों जैसी अंतरिक्ष संपत्तियों की साइबर सुरक्षा; स्वचालित ऑडिट के लिए उभरते उपकरण; आईओटी सहित अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों को सुरक्षित करना, उन्नत साइबर क्षमताओं के साथ उभरते फ्रंटियर एआई मॉडल, ब्लॉकचेन और क्वांटम संचार और पोस्ट क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (पीक्यूसी) जैसे एआई संचालित साइबर जोखिम; एसबीओएम, सीबीओएम, क्यूबीओएम और एचबीओएम कार्यान्वयन; एआई संचालित रेड टीमिंग के तरीके; आपूर्ति श्रृंखला ऑडिट; और क्लाउड सिस्टम, एपीआई और परिचालन प्रौद्योगिकी जैसे जटिल वातावरण के ऑडिट के लिए अभिनव दृष्टिकोण।

प्रतिभागियों ने साइबर सुरक्षा ऑडिट के भविष्य को आकार देने वाले नवीनतम रुझानों, उपकरणों और कार्यप्रणालियों की गहन जानकारी प्राप्त की। मुख्य चर्चा में उभरते स्वचालन उपकरण, रणनीतिक जोखिम प्रबंधन, ऑडिट फ्रेमवर्क और जटिल डिजिटल वातावरण के आकलन के लिए समान दृष्टिकोण शामिल थे। प्रतिनिधियों ने साइबर सुरक्षा ऑडिट की तैयारी को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक रणनीतियों के साथ प्रस्थान किया, जिसमें सक्रिय जोखिम मूल्यांकन, आसान परीक्षण, प्रक्रिया स्वचालन और अनुपालन सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया

लुधियाना NCC: 100% रिजल्ट के साथ JW कैडेट्स को ‘A’ सर्टिफिकेट वितरित, प्रशिक्षकों के लिए ओरिएंटेशन कैडर शुरू

राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) की 3 पंजाब गर्ल्स बटालियन, लुधियाना द्वा    रा जूनियर विंग (JW) कैडेट्स के लिए एक गरिमामय एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें NCC ‘A’ सर्टिफिकेट सफलतापूर्वक प्राप्त करने वाली कैडेट्स को औपचारिक रूप से प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर बटालियन के अधिकारियों, प्रशिक्षकों और कैडेट्स की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।

कार्यक्रम की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि यह रही कि NCC ‘A’ सर्टिफिकेट परीक्षा का परिणाम 100 प्रतिशत रहा। यह न केवल कैडेट्स की कड़ी मेहनत और अनुशासन को दर्शाता है, बल्कि प्रशिक्षकों के समर्पण, मार्गदर्शन और प्रभावी प्रशिक्षण प्रणाली का भी प्रमाण है। अधिकारियों ने इस सफलता को टीमवर्क, नियमित अभ्यास और सकारात्मक वातावरण का परिणाम बताया।

इस मौके पर कैडेट्स के चेहरे पर खुशी और गर्व साफ झलक रहा था। कई कैडेट्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि NCC प्रशिक्षण ने उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदारी की भावना विकसित की है। उन्होंने कहा कि यह सर्टिफिकेट उनके भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।

इसके साथ ही, बटालियन द्वारा 21 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 तक एक विशेष ओरिएंटेशन कैडर का भी आयोजन किया गया। इस कैडर का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षकों को NCC जूनियर विंग के सिलेबस में हुए नवीनतम बदलावों से अवगत कराना और उनके प्रशिक्षण कौशल को और अधिक सशक्त बनाना था। इस पहल के माध्यम से प्रशिक्षण की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने का प्रयास किया गया।

ओरिएंटेशन कैडर के दौरान प्रशिक्षकों को विभिन्न महत्वपूर्ण और समकालीन विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। इनमें साइबर सुरक्षा, अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, जीवन कौशल, नैतिक एवं आचारिक मूल्य जैसे विषय प्रमुख रहे। विशेषज्ञों द्वारा इन विषयों पर व्याख्यान और व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए, जिससे प्रशिक्षकों को अद्यतन जानकारी प्राप्त हुई और वे इसे कैडेट्स तक प्रभावी ढंग से पहुंचा सकें।

विशेष रूप से साइबर सुरक्षा पर दिए गए प्रशिक्षण ने डिजिटल युग में बढ़ते खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं अग्निवीर भर्ती से संबंधित जानकारी ने कैडेट्स और प्रशिक्षकों दोनों को भारतीय सशस्त्र बलों में करियर के नए अवसरों के बारे में जागरूक किया। स्वास्थ्य एवं स्वच्छता पर सत्रों ने व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया।

जीवन कौशल और नैतिक मूल्यों पर आधारित प्रशिक्षण ने कैडेट्स के समग्र व्यक्तित्व विकास पर जोर दिया। इन सत्रों में अनुशासन, नेतृत्व, टीमवर्क और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे गुणों को विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रशिक्षकों ने इस कैडर को अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर 3 पंजाब गर्ल्स बटालियन NCC, लुधियाना के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आर.एस. चौहान ने कैडेट्स और प्रशिक्षकों को संबोधित करते हुए उनकी मेहनत और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि NCC न केवल युवाओं को अनुशासित बनाता है, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में भी तैयार करता है।

कर्नल चौहान ने यह भी कहा कि 100 प्रतिशत परिणाम हासिल करना एक बड़ी उपलब्धि है, जो बटालियन के उच्च प्रशिक्षण मानकों को दर्शाता है। उन्होंने प्रशिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे इसी तरह कैडेट्स को मार्गदर्शन देते रहें और उन्हें राष्ट्र सेवा के लिए तैयार करें।

इस पूरे आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षण ढांचे को और अधिक मजबूत बनाना तथा प्रशिक्षकों को आधुनिक और प्रभावी तरीकों से कैडेट्स को प्रशिक्षित करने के लिए सक्षम बनाना था। यह पहल न केवल वर्तमान कैडेट्स के लिए लाभकारी रही, बल्कि भविष्य में भी NCC की गुणवत्ता और प्रभाव को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

सी-डॉट ने “साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित गेमिफिकेशन प्लेटफॉर्म के सहयोगात्मक विकास” के लिए जंप्स ऑटोमेशन के साथ साझेदारी की

दिल्ली \ सत्ता संदेश

इस प्लेटफॉर्म में गेमिंग एरिना, लीडरबोर्ड, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, चर्चा मंच और वास्तविक सिमुलेशन-आधारित परिदृश्य शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य साइबर जागरूकता पैदा करना और संगठनों की साइबर सुरक्षा तैयारियों को बढ़ाना है

सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) ने सी-डॉट कोलैबोरेटिव रिसर्च प्रोग्राम (सीसीआरपी) के तहत जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य व्यक्तियों और उद्यमों में साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए एक नवोन्‍मेषी गेमिफिकेशन प्लेटफॉर्म विकसित करना है।

एक समारोह के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किया गया, जिसमें सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय, जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के प्रौद्योगिकी प्रमुख श्री रोहन चंदक, बोर्ड के सदस्य और सी-डॉट के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इस महत्वपूर्ण साझेदारी का मुख्य उद्देश्य साइबर सुरक्षा जागरूकता को सुदृढ़ करना, साइबर सुरक्षा तैयारियों को बढ़ाना और पारंपरिक प्रशिक्षण को एक आकर्षक, संवादमूलक और प्रभावी शिक्षण अनुभव में बदलना है। इस प्लेटफॉर्म में गेमिंग एरिना, लीडरबोर्ड, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, चर्चा मंच और फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग, मैलवेयर से बचाव और समय सीमा के भीतर संकट प्रबंधन जैसे विषयों पर आधारित वास्तविक सिमुलेशन परिदृश्य शामिल होंगे। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से संगठन साइबर सुरक्षा को और अधिक मजबूत बना सकते हैं।

इस सॉल्‍यूशन में एक सशक्त पुरस्कार और प्रदर्शन ट्रैकिंग प्रणाली के साथ-साथ एक एआई-संचालित व्यवहार विश्लेषण इंजन शामिल होगा जो उपयोगकर्ता के प्रदर्शन का निरंतर मूल्यांकन करेगा, चुनौती की जटिलता को गतिशील रूप से समायोजित करेगा और उभरते साइबर खतरों के साथ सामग्री को अपडेट रखेगा। इसे जंप्स ऑटोमेशन की एआई और स्वचालन विशेषज्ञता एवं सी-डॉट की स्वदेशी दूरसंचार तथा सुरक्षा प्रौद्योगिकी क्षमताओं के संयोजन से बनाया जाएगा।

यह भारत में स्वदेशी प्रौद्योगिकी का उपयोग करके सामाजिक प्रभाव डालने और साइबर सुरक्षा की मजबूत संस्कृति विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना नई दिल्ली स्थित सी-डॉट सुविधाओं में संपूर्ण सत्यापन के साथ एक संरचित विकास, परीक्षण और स्वीकृति प्रक्रिया का पालन करेगी। इस प्लेटफॉर्म को भविष्य में उद्यमों के साथ एकीकृत करने के प्रावधानों के साथ एक वाणिज्यिक-स्तरीय एसएएएस सॉल्‍यूशन के रूप में तैनात किए जाने की उम्मीद है।

साइबर सुरक्षा विभाग (सी-डॉट) के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने एक प्रभावी साइबर सुरक्षा जागरूकता मंच विकसित करने में इस सहयोग के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला और आत्मनिर्भर भारत के विजन के प्रति सी-डॉट की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस मंच का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को साइबर खतरों को प्रभावी ढंग से पहचानने और उनसे निपटने, घटना प्रतिक्रिया क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाने में सक्षम बनाना है, जिससे देश में साइबर सुरक्षा जागरूकता और लचीलेपन की संस्कृति को मजबूत करने में योगदान मिलेगा।

इस अवसर पर श्री रोहन चंदक ने साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण को संवादमूलक और प्रभावशाली बनाने में प्लेटफॉर्म की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य व्यवहारिक परिवर्तन लाना और मानव-संबंधित साइबर जोखिमों को कम करना है।

सी-डॉट के बारे में:

टेलीमैटिक्स विकास केंद्र (सी-डॉट) भारत सरकार का प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास केंद्र है, जो देश की रणनीतिक और सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक संचार प्रौद्योगिकियों के डिजाइन, विकास और तैनाती से जुड़ा है। सी-डॉट ने उद्योग, शिक्षा जगत, स्टार्टअप और अन्य हितधारकों के साथ साझेदारी के माध्यम से दूरसंचार और संबंधित प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देने के लिए सी-डॉट सहयोगी अनुसंधान कार्यक्रम (सीसीआरपी) आरंभ किया है। इस सहयोगी अनुसंधान एवं विकास नीति ढांचे के तहत, सी-डॉट अपने नेतृत्व वाली परियोजनाओं की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारतीय स्टार्टअप, संगठनों, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी आमंत्रित करता है। फंडों के अतिरिक्‍त, सी-डॉट स्वदेशी अनुसंधान और उत्पाद विकास को बढ़ावा देने के लिए एक सूत्रधार, एकीकरणकर्ता और संसाधन प्रदाता के रूप में कार्य करता है।

जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के बारे में:

जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी एक प्रौद्योगिकी सॉल्‍यूशन कंपनी है जिसकी एआई, स्वचालन और अनुकूलित उद्यम एआई सॉफ्टवेयर विकास में विशेषज्ञता है। कंपनी जटिल व्यावसायिक और सामाजिक चुनौतियों को हल करने के लिए नवोनमेषी, डेटा-संचालित समाधान प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करती है।