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वित्त मंत्रालय की मासिक समीक्षा: आर्थिक गतिविधियों में नरमी की आशंका, फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था का दृष्टिकोण मजबूत

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Ministry of Finance ने अपनी मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा है कि आने वाले महीनों में सामान्य से कम मानसून और कुछ क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों की संभावित सुस्ती के कारण उपभोग मांग पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का निकट भविष्य का परिदृश्य सतर्क आशावाद के साथ मजबूत बना हुआ है।

वित्त मंत्रालय की समीक्षा के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में आय और उपभोग का स्तर काफी हद तक मानसून पर निर्भर करता है। यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो कृषि उत्पादन, ग्रामीण रोजगार और उपभोक्ता मांग प्रभावित हो सकती है। इसका असर विशेष रूप से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले राज्यों और ग्रामीण बाजारों पर देखने को मिल सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर भी आर्थिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उतार-चढ़ाव, ऊर्जा कीमतों में बदलाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की धीमी वृद्धि जैसी परिस्थितियां वैश्विक आर्थिक वातावरण को प्रभावित कर रही हैं। इसके बावजूद भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहा है।

समीक्षा में यह भी उल्लेख किया गया कि देश में बुनियादी ढांचा निवेश, विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार, सेवा क्षेत्र की मजबूती और सरकारी पूंजीगत व्यय आर्थिक वृद्धि को समर्थन प्रदान कर रहे हैं। सार्वजनिक निवेश के साथ-साथ निजी निवेश में भी धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल घरेलू बाजार और बढ़ती उपभोक्ता मांग है। हालांकि यदि मानसून कमजोर रहता है, तो ग्रामीण खपत पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में विकास की गति प्रभावित हो सकती है।

वित्त मंत्रालय ने संकेत दिया कि मुद्रास्फीति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। खाद्य पदार्थों की कीमतें, मौसम की स्थिति और वैश्विक कमोडिटी बाजार आने वाले महीनों में महंगाई के रुख को प्रभावित कर सकते हैं। सरकार और नीति निर्माता मूल्य स्थिरता बनाए रखने तथा विकास को गति देने के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था, वित्तीय समावेशन, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं और तकनीकी क्षेत्र में निवेश जैसे कारक भारत की दीर्घकालिक विकास क्षमता को मजबूत बना रहे हैं। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, हरित ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में बढ़ते निवेश से भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को और गति मिलने की उम्मीद है।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कुछ अल्पकालिक चुनौतियां अवश्य हैं, लेकिन व्यापक आर्थिक संकेतक अभी भी सकारात्मक बने हुए हैं। मजबूत बैंकिंग प्रणाली, बढ़ता निवेश और सरकारी सुधार कार्यक्रम विकास को सहारा दे सकते हैं।

कुल मिलाकर वित्त मंत्रालय का आकलन यह दर्शाता है कि मानसून और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े जोखिमों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत है और निकट भविष्य में वृद्धि की संभावनाएं बरकरार हैं, हालांकि नीति निर्माताओं को सतर्कता बनाए रखने की आवश्यकता होगी।

कपास उद्योग को बड़ी राहत: सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 तक आयात शुल्क से दी छूट

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्र सरकार ने देश के वस्त्र और कपड़ा उद्योग को राहत देते हुए कपास के आयात पर लगने वाले सीमा शुल्क से 30 अक्टूबर 2026 तक छूट देने की घोषणा की है। यह छूट अगले पांच महीनों तक प्रभावी रहेगी और इसका उद्देश्य घरेलू उद्योग को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराना तथा कपास की कीमतों को नियंत्रित रखना है।

सरकार के इस फैसले से कपड़ा, धागा और परिधान उद्योग को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। उद्योग जगत लंबे समय से कपास की उपलब्धता और बढ़ती लागत को लेकर चिंता जता रहा था। ऐसे में आयात शुल्क हटाए जाने से विदेशी बाजारों से कपास खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कई क्षेत्रों में उत्पादन संबंधी चुनौतियों और वैश्विक मांग में बदलाव के कारण उद्योग पर दबाव बढ़ा था। आयात शुल्क में छूट से कच्चे माल की आपूर्ति बेहतर होने और उत्पादन लागत कम होने की संभावना है।भारत दुनिया के प्रमुख कपास उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन घरेलू मांग और निर्यात आवश्यकताओं को देखते हुए समय-समय पर आयात की जरूरत भी पड़ती है। कपड़ा उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक है और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है।

उद्योग संगठनों का मानना है कि इस निर्णय से सूती धागे और कपड़ों के निर्माताओं को प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद मिलेगी। इससे निर्यात क्षेत्र को भी लाभ मिल सकता है, क्योंकि कम लागत पर उत्पादन होने से भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

हालांकि कुछ किसान संगठनों ने आशंका जताई है कि सस्ते आयात से घरेलू किसानों को कीमतों के मोर्चे पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को उद्योग और किसानों दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सरकार विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। कपास आयात पर शुल्क छूट से वस्त्र उद्योग की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल उद्योग जगत ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे आने वाले महीनों में कपड़ा क्षेत्र की वृद्धि को नई गति मिलेगी।

भारत 2035 तक 150 अरब डॉलर की सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन बनाने की दिशा में बढ़े: नीति आयोग

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

NITI Aayog ने शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत को 2035 तक वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में केवल भागीदार की भूमिका तक सीमित रहने के बजाय नेतृत्वकारी स्थिति हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसके लिए देश में 120 से 150 अरब डॉलर तक की सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला विकसित करने की आवश्यकता बताई गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले दशक में सेमीकंडक्टर उद्योग वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे रणनीतिक और तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र रहेगा, क्योंकि यह इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा, टेलीकॉम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी प्रमुख तकनीकों की रीढ़ है।

नीति आयोग के अनुसार, भारत पहले ही इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और निर्माण क्षमता विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है, लेकिन दीर्घकालिक सफलता के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित करना जरूरी है, जिसमें डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और सप्लाई चेन सभी शामिल हों।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हाल के वर्षों में आए व्यवधानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देशों के लिए सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। कोविड-19 महामारी और उसके बाद की भू-राजनीतिक तनावों ने इस उद्योग की संवेदनशीलता को और उजागर किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास इस क्षेत्र में बड़ी क्षमता है, खासकर उसके विशाल इंजीनियरिंग टैलेंट, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और बढ़ते घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार के कारण। हालांकि, उच्च तकनीकी निवेश, अनुसंधान एवं विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सरकार को निजी क्षेत्र के साथ मिलकर दीर्घकालिक नीति स्थिरता, कर प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।

नीति आयोग ने कहा कि यदि भारत इस दिशा में सफल होता है, तो वह न केवल आयात पर निर्भरता कम कर सकेगा, बल्कि वैश्विक तकनीकी सप्लाई चेन में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।

फिलहाल यह लक्ष्य भारत की औद्योगिक और तकनीकी नीति में एक बड़े रणनीतिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है, जो आने वाले दशक में देश की आर्थिक संरचना को भी प्रभावित कर सकता है।

आरबीआई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: वित्तीय संस्थानों में 48,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 10,000 से ज्यादा मामले दर्ज

मुंबई / सत्ता संदेश

Reserve Bank of India की ताजा वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश के वित्तीय संस्थानों में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 48,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी से जुड़े 10,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट ने बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली में बढ़ते साइबर जोखिम तथा वित्तीय अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

आरबीआई के अनुसार, धोखाधड़ी के मामलों में डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान, ऋण लेनदेन और फर्जी दस्तावेजों के जरिए की गई वित्तीय अनियमितताएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ वित्तीय अपराधों के तरीके भी अधिक जटिल होते जा रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया कि धोखाधड़ी के कुल मामलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि इनमें से कई मामलों का संबंध पुराने ऋण खातों और पूर्व अवधि की अनियमितताओं से भी है, जिन्हें अब रिपोर्ट किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन लेनदेन में तेजी आने से ग्राहकों को सुविधा तो मिली है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी, फर्जीवाड़ा और डेटा सुरक्षा की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। बैंकिंग क्षेत्र में तकनीकी सुरक्षा और निगरानी तंत्र को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

आरबीआई ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को जोखिम प्रबंधन प्रणाली मजबूत करने, साइबर सुरक्षा उपायों को उन्नत करने और संदिग्ध लेनदेन की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने ग्राहकों को भी सतर्क रहने और अनजान लिंक, कॉल या डिजिटल भुगतान अनुरोधों से बचने की सलाह दी है।

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि बड़ी रकम से जुड़े धोखाधड़ी मामलों का असर केवल संबंधित संस्थानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे निवेशकों और आम ग्राहकों का भरोसा भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए समय पर पहचान, सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है।

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि वित्तीय क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और उन्नत डेटा विश्लेषण तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है, ताकि धोखाधड़ी के मामलों का जल्दी पता लगाया जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता भारतीय बैंकिंग प्रणाली की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगी।

हैपिएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजीज का मुनाफा 79.9 प्रतिशत बढ़ा, चौथी तिमाही में 61.17 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Happiest Minds Technologies ने वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की इस कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ 79.9 प्रतिशत बढ़कर 61.17 करोड़ रुपये पहुंच गया।

कंपनी के इस मजबूत प्रदर्शन को आईटी सेवाओं की बढ़ती मांग, डिजिटल समाधान कारोबार में विस्तार और परिचालन क्षमता में सुधार से जोड़कर देखा जा रहा है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही की तुलना में लाभ में यह उल्लेखनीय वृद्धि निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लाउड सेवाओं, साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधानों की बढ़ती मांग ने आईटी कंपनियों के कारोबार को मजबूती प्रदान की है। हैपिएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजीज भी इन क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति लगातार बढ़ा रही है।

कंपनी ने हाल के वर्षों में वैश्विक ग्राहकों के साथ साझेदारी बढ़ाने और नई तकनीकी सेवाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। इससे उसके राजस्व और लाभप्रदता दोनों में सुधार देखने को मिला है।

आईटी उद्योग से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय आईटी कंपनियां तकनीकी सेवाओं और डिजिटल समाधान के क्षेत्र में मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं। विशेष रूप से मध्यम आकार की टेक कंपनियां नए बाजारों और विशेषीकृत सेवाओं के जरिए तेजी से विकास कर रही हैं।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर तिमाही नतीजों से कंपनी के शेयरों में निवेशकों की रुचि बढ़ सकती है। हालांकि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, विदेशी ग्राहकों का खर्च और मुद्रा विनिमय दरें आने वाले समय में आईटी क्षेत्र की वृद्धि को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बने रहेंगे।

फिलहाल कंपनी का यह प्रदर्शन भारतीय आईटी सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर तकनीकी निवेश और डिजिटल सेवाओं की मांग लगातार बदल रही है।

आरबीआई का बही-खाता 20.6 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, सोना और निवेश बने प्रमुख कारण

मुंबई / सत्ता संदेश

Reserve Bank of India का बही-खाता (बैलेंस शीट) वित्त वर्ष 2025-26 में 20.6 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि के साथ 91.97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। केंद्रीय बैंक की शुक्रवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई के बही-खाते का आकार 31 मार्च 2025 को 76,25,421.93 करोड़ रुपये था, जो 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 91,97,121.08 करोड़ रुपये हो गया। इस प्रकार एक वर्ष में इसमें 15,71,699.15 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

केंद्रीय बैंक ने बताया कि इस वृद्धि के पीछे घरेलू निवेश, सोने के भंडार और विदेशी निवेश में हुई बढ़ोतरी प्रमुख कारण रहे। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोने में निवेश और विदेशी परिसंपत्तियों के मूल्य में बढ़ोतरी ने आरबीआई की कुल संपत्ति को मजबूत किया।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट उसकी वित्तीय क्षमता, विदेशी मुद्रा प्रबंधन और मौद्रिक स्थिरता का महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है। आरबीआई की बैलेंस शीट में यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि भारत की वित्तीय प्रणाली और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में हैं।

आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि केंद्रीय बैंक ने वित्तीय स्थिरता बनाए रखने, मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के लिए विभिन्न नीतिगत कदम जारी रखे। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सोने के भंडार में वृद्धि केंद्रीय बैंकों की वैश्विक रणनीति का हिस्सा बनती जा रही है, क्योंकि इसे आर्थिक अनिश्चितता के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है। भारत सहित कई देशों के केंद्रीय बैंक हाल के वर्षों में अपने स्वर्ण भंडार को लगातार बढ़ा रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि विदेशी निवेश और घरेलू परिसंपत्तियों के मूल्य में सुधार से आरबीआई की आय और परिसंपत्तियों की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, आरबीआई की मजबूत बैलेंस शीट देश की बैंकिंग और मौद्रिक प्रणाली के लिए भरोसे का संकेत है। इससे वित्तीय बाजारों में स्थिरता और निवेशकों का विश्वास बनाए रखने में मदद मिलती है।

फिलहाल आर्थिक जगत की नजर इस बात पर भी है कि आने वाले समय में वैश्विक बाजारों की स्थिति, तेल कीमतें और ब्याज दरों का आरबीआई की नीतियों और बैलेंस शीट पर क्या प्रभाव पड़ता है।

टी20 सीरीज में भारत की दमदार शुरुआत, इंग्लैंड को 38 रन से हराया; रोड्रिग्स, यास्तिका और नंदनी चमकीं

लंदन / सत्ता संदेश

India women’s national cricket team ने इंग्लैंड दौरे की टी20 श्रृंखला में शानदार शुरुआत करते हुए England women’s national cricket team को 38 रन से हराकर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। भारतीय टीम की जीत में Jemimah Rodrigues, Yastika Bhatia और पदार्पण कर रहीं Nandini Kashyap का प्रदर्शन बेहद अहम रहा।

भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए संतुलित और आक्रामक बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। जेमिमा रोड्रिग्स ने मध्यक्रम में शानदार पारी खेलकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। उन्होंने तेज रन गति बनाए रखते हुए इंग्लैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया।

यास्तिका भाटिया ने भी महत्वपूर्ण योगदान देते हुए टीम की पारी को स्थिरता दी। दोनों बल्लेबाजों के बीच हुई साझेदारी ने भारत को प्रतिस्पर्धी स्कोर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।

मैच की सबसे खास बात रही युवा खिलाड़ी नंदनी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण। पहली बार भारतीय टीम की ओर से खेलते हुए उन्होंने आत्मविश्वास से भरा प्रदर्शन किया और अपने खेल से सभी का ध्यान आकर्षित किया। क्रिकेट विशेषज्ञों ने उनके प्रदर्शन को भारतीय महिला क्रिकेट के लिए सकारात्मक संकेत बताया।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने लगातार संघर्ष करती नजर आई। भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा और नियमित अंतराल पर विकेट हासिल किए। इंग्लैंड की बल्लेबाजी कभी भी लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ती नहीं दिखी।

भारतीय टीम की क्षेत्ररक्षण भी बेहद प्रभावशाली रही। खिलाड़ियों ने कैच पकड़ने और रन बचाने में शानदार तालमेल दिखाया, जिससे इंग्लैंड की टीम पर दबाव लगातार बना रहा।

इस जीत के साथ भारत ने श्रृंखला में बढ़त हासिल कर ली है और टीम का आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा खिलाड़ियों और अनुभवी बल्लेबाजों के संयोजन ने भारतीय टीम को संतुलन दिया है।

महिला क्रिकेट में भारत का लगातार बेहतर प्रदर्शन यह संकेत देता है कि टीम आने वाले बड़े टूर्नामेंटों के लिए मजबूत तैयारी कर रही है। अब सभी की नजर श्रृंखला के अगले मुकाबले पर टिकी है, जहां इंग्लैंड वापसी की कोशिश करेगा जबकि भारत अपनी बढ़त मजबूत करना चाहेगा।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में तेजी, अंतरिम समझौते के करीब पहुंचे दोनों देश: पीयूष गोयल

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और United States के बीच चल रही व्यापार वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने कहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत “उत्साहजनक” दिशा में आगे बढ़ रही है और एक अंतरिम व्यापार समझौता जल्द होने की संभावना है।

गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच विभिन्न व्यापारिक मुद्दों पर लगातार सकारात्मक चर्चा हो रही है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्ष कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहमति के करीब पहुंच चुके हैं और जल्द ही एक अंतरिम व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देश वस्तुओं, सेवाओं, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और निवेश के क्षेत्र में व्यापक आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। व्यापार वार्ता का उद्देश्य शुल्क, बाजार पहुंच, आपूर्ति श्रृंखला और निवेश से जुड़े मुद्दों को सरल बनाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरिम समझौता होता है तो इससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई गति मिल सकती है। भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिलने की संभावना है, वहीं अमेरिकी कंपनियों को भी भारत के बड़े उपभोक्ता बाजार तक अधिक पहुंच मिल सकती है।

गोयल ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और व्यावहारिक समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बदलते व्यापारिक समीकरणों और आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन के बीच भारत और अमेरिका के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। तकनीक, रक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग तेजी से बढ़ा है।

फिलहाल व्यापार जगत की नजर इस संभावित अंतरिम समझौते पर टिकी है, क्योंकि इससे निवेश माहौल और निर्यात क्षेत्र को सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में: आरबीआई

मुंबई / सत्ता संदेश

Reserve Bank of India ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, घरेलू मांग, स्थिर वित्तीय प्रणाली और सरकारी सुधारों के कारण भारत की आर्थिक स्थिति अन्य कई देशों की तुलना में बेहतर बनी हुई है।

आरबीआई ने अपने ताजा आकलन में कहा कि दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई, ऊंची ब्याज दरें और वैश्विक व्यापार में सुस्ती जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत की विकास दर, बैंकिंग प्रणाली और निवेश गतिविधियां सकारात्मक संकेत दे रही हैं।

केंद्रीय बैंक के अनुसार, देश में उपभोग और निवेश दोनों क्षेत्रों में गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। साथ ही, बुनियादी ढांचा विकास, विनिर्माण क्षेत्र में सुधार और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार ने आर्थिक वृद्धि को सहारा दिया है।

आरबीआई ने यह भी कहा कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली पहले की तुलना में अधिक मजबूत और पूंजीगत रूप से बेहतर स्थिति में है। बैंकों की बैलेंस शीट में सुधार, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में कमी और ऋण वितरण में वृद्धि आर्थिक स्थिरता के संकेत माने जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक दबावों के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है। सरकार की पूंजीगत व्यय योजनाएं, डिजिटल भुगतान प्रणाली का विस्तार और सेवा क्षेत्र की मजबूती भी विकास को गति दे रही हैं।

हालांकि आरबीआई ने यह भी संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक वित्तीय जोखिमों पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना उसकी प्राथमिकता रहेगी।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत की बड़ी घरेलू बाजार क्षमता और सुधार आधारित नीतियां उसे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में बनाए हुए हैं। आने वाले महीनों में मानसून, वैश्विक मांग और निवेश प्रवाह जैसे कारक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

मुकेश अंबानी ने लगातार छठे साल नहीं लिया वेतन, लाभांश बना आय का प्रमुख स्रोत

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति Mukesh Ambani ने एक बार फिर अपनी वेतन नीति को लेकर सुर्खियां बटोरी हैं। जानकारी के अनुसार, उन्होंने लगातार छठे वर्ष अपनी कंपनी Reliance Industries Limited से कोई वेतन नहीं लिया है। इसके बावजूद उनकी आय का प्रमुख स्रोत कंपनी द्वारा दिया जाने वाला लाभांश (डिविडेंड) बना हुआ है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के शीर्ष नेतृत्व में लंबे समय से सक्रिय मुकेश अंबानी ने पिछले कई वर्षों से अपना वेतन शून्य रखा है। कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस ढांचे के तहत निदेशक मंडल द्वारा तय पारिश्रमिक नीति के अनुसार उनका वेतन निर्धारित होता है, लेकिन उन्होंने स्वेच्छा से इसे नहीं लेने का निर्णय जारी रखा है।

कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड के अनुसार, मुकेश अंबानी की कुल आय का बड़ा हिस्सा उनकी शेयरधारिता और उससे मिलने वाले लाभांश से आता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज में उनकी और परिवार की हिस्सेदारी उन्हें देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट डिविडेंड प्राप्तकर्ताओं में शामिल करती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की नीति कॉर्पोरेट जगत में एक अलग संदेश देती है, जहां प्रमोटर-चेयरमैन का वेतन नहीं लेना कंपनी की दीर्घकालिक छवि और निवेशकों के विश्वास से जोड़ा जाता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की कंपनियों में से एक है, जिसका कारोबार ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स, टेलीकॉम और रिटेल जैसे कई क्षेत्रों में फैला हुआ है।

हालांकि वेतन नहीं लेने के बावजूद कंपनी के प्रदर्शन और शेयरहोल्डिंग के कारण अंबानी की संपत्ति पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा कंपनी के शेयर मूल्य और बाजार प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है।

कॉर्पोरेट विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम पिछले कई वर्षों से जारी एक स्थिर नीति का हिस्सा है, जो यह दर्शाता है कि कंपनी का नेतृत्व वेतन से अधिक लंबे समय के निवेश मूल्य और शेयरधारक लाभ पर केंद्रित है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के भीतर यह भी माना जाता है कि शीर्ष नेतृत्व द्वारा वेतन न लेना एक प्रतीकात्मक निर्णय है, जो कंपनी की वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक रणनीति को दर्शाता है।

इस बीच, भारतीय कॉर्पोरेट जगत में अंबानी की यह नीति एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि यह बड़े कॉरपोरेट घरानों के पारिश्रमिक मॉडल से अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।