दक्षिण एशिया में रोजगार और विकास की नई राह बनेगा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र: विश्व बैंक
कृषि से आगे बढ़कर खाद्य प्रणालियों में निवेश से खुलेंगे आर्थिक विकास के नए अवसर
नई दिल्ली / सत्ता संदेश
विश्व बैंक समूह ने कहा है कि दक्षिण एशिया अपने विकास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहां हर वर्ष लाखों युवा कार्यबल में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में स्थायी और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन इस क्षेत्र की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक बन गया है। विश्व बैंक के अनुसार कृषि से आगे बढ़कर खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण, लॉजिस्टिक्स और मूल्यवर्धन आधारित खाद्य प्रणालियों का विस्तार रोजगार, निवेश, आर्थिक विकास और गरीबी उन्मूलन के व्यापक अवसर प्रदान कर सकता है।
विश्व बैंक समूह ने बताया कि दक्षिण एशिया का कृषि क्षेत्र सालाना 700 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का है और क्षेत्र के लगभग 43 प्रतिशत कार्यबल को रोजगार प्रदान करता है। इसके बावजूद कृषि का क्षेत्रीय सकल घरेलू उत्पाद में योगदान केवल 16 प्रतिशत है। चिंता की बात यह है कि क्षेत्र में उत्पादित कुल खाद्य पदार्थों का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हर वर्ष बर्बाद हो जाता है, जो लगभग 30 करोड़ लोगों का पेट भरने के लिए पर्याप्त है।
विशेषज्ञों ने कहा कि कृषि परिवर्तन का अगला चरण केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउसिंग, सप्लाई चेन, विपणन और मूल्यवर्धन गतिविधियों के विस्तार से लाखों नए रोजगार सृजित किए जा सकते हैं। इससे खाद्य हानि कम होगी और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि देश का खाद्यान्न उत्पादन वर्ष 1950-51 के 51 मिलियन टन से बढ़कर आज 330 मिलियन टन से अधिक हो चुका है। वहीं पिछले दशक में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का निर्यात लगभग 4.9 बिलियन डॉलर से बढ़कर 10 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। वर्तमान में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र देश के विनिर्माण मूल्यवर्धन में लगभग 9 प्रतिशत और कुल निर्यात में करीब 13 प्रतिशत योगदान दे रहा है।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत का अनुभव दर्शाता है कि प्रभावी नीतियां और लक्षित निवेश कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को बदल सकते हैं। प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के औपचारिकरण योजना और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना जैसी पहलों ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, निवेश आकर्षित करने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विश्व बैंक समूह ने कहा कि तीव्र शहरीकरण, बढ़ता मध्यम वर्ग, समृद्ध कृषि जैव-विविधता और सुरक्षित व उच्च गुणवत्ता वाले प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग दक्षिण एशिया को खाद्य प्रणालियों के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ा सकती है।
इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए विश्व बैंक समूह एग्रीकनेक्ट और सैपलिंग जैसी पहलों पर काम कर रहा है। एग्रीकनेक्ट का उद्देश्य वर्ष 2030 तक 3 करोड़ किसानों को बाजारों से जोड़ना है, जबकि सैपलिंग सरकारों, निवेशकों, उद्योग जगत और विकास साझेदारों को एक मंच पर लाकर नीति सुधारों और निवेश को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है।
नीति संवाद में भाग लेने वाले विशेषज्ञों ने कोल्ड चेन, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स हब, प्रोसेसिंग क्लस्टर और कृषि-औद्योगिक पार्कों में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही डिजिटल तकनीकों के उपयोग, गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने और कौशल विकास कार्यक्रमों के विस्तार की आवश्यकता भी बताई गई।
यह विचार दो दिवसीय क्षेत्रीय उच्च स्तरीय नीति संवाद “मूल्य को उजागर करना: दक्षिण एशिया में रोजगार सृजन और सतत विकास के लिए खाद्य प्रसंस्करण को आगे बढ़ाना” के उद्घाटन अवसर पर सामने आए। इस कार्यक्रम का आयोजन 9 जून 2026 को अहमदाबाद, गुजरात में भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और विश्व बैंक समूह की सैपलिंग पहल के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, निवेशकों और दक्षिण एशियाई देशों के प्रतिनिधियों सहित लगभग 200 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जो क्षेत्र में मजबूत, समावेशी और दीर्घकालिक खाद्य प्रणालियों के निर्माण पर चर्चा कर रहे हैं।

