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भारी बारिश से जलमग्न हुआ पठानकोट, लोगों ने खराब ड्रेनेज सिस्टम पर उठाए सवाल

पठानकोट / सत्ता संदेश

पंजाब के पठानकोट में हुई भारी बारिश ने शहर की व्यवस्था की पोल खोल दी। लगातार हुई बारिश के बाद शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सड़कों पर कई फीट तक पानी भर गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बारिश के बाद शहर में यही हालात बन जाते हैं। उनका आरोप है कि ड्रेनेज सिस्टम की खराब व्यवस्था और समय पर नालों की सफाई न होने के कारण बारिश का पानी सड़कों और रिहायशी इलाकों में जमा हो जाता है।

बारिश के कारण कई घरों और दुकानों में भी पानी घुस गया, जिससे लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। कई वाहन पानी में फंस गए और लोगों को लंबा समय जाम में बिताना पड़ा। स्कूल, बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी जलभराव के कारण आवाजाही प्रभावित रही।

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि शहर के ड्रेनेज सिस्टम को आधुनिक बनाया जाए और बरसात से पहले नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचा जा सके।

हालांकि, प्रशासन का कहना है कि जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने का काम युद्ध स्तर पर जारी है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने दावा किया है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जल्द ही सामान्य हालात बहाल कर दिए जाएंगे।

भारी बारिश के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि हर मानसून में सामने आने वाली जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान आखिर कब निकलेगा।

बाढ़ प्रभावित अरुणाचल का शिवराज सिंह चौहान, किरेन रिजिजू और पेमा खांडू ने किया हवाई व जमीनी दौरा

अरुणाचल प्रदेश / सत्ता संदेश

अरुणाचल प्रदेश में आई भीषण बाढ़ के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के साथ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई और जमीनी दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।

केंद्रीय मंत्री ने केयी पान्योर जिले समेत कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके साथ ही वे सड़क मार्ग से भी गांवों में पहुंचे और प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा और जिनके घर बह गए हैं, उनके लिए नए मकान बनवाए जाएंगे। खेतों में हुए नुकसान, फसलों की बर्बादी, पशुधन हानि; सभी का आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाएगा। तत्काल राहत के रूप में राशन और आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।

दौरे के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने स्थानीय लोगों द्वारा किए जा रहे सामुदायिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत और सुरक्षा दीवार बनाने के काम में खुद भी हाथ बंटाया और कहा कि समाज की यह भागीदारी प्रेरणादायक है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बाढ़ से भारी तबाही हुई है और नुकसान का लगातार आकलन किया जा रहा है, लेकिन इसके बीच सबसे सराहनीय बात यह है कि स्थानीय समुदाय ने सरकार का इंतजार किए बिना खुद आगे बढ़कर समाधान की पहल की है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार पूरी तत्परता से कार्य कर रही है और प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार भी हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी ताकि प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन जल्द से जल्द सामान्य हो सके।

जम्मू-कश्मीर के डोडा में फटा बादल, मलबा आने से सड़कें हुई बंद

जम्मू-कश्मीर / सत्ता संदेश

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भारी बारिश और बादल फटने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। प्राकृतिक आपदा के कारण व्यापक स्तर पर फसलों, बाग-बगीचों और निजी संपत्ति को हानि पहुंची है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है।

डोडा जिले के भलेसा के खलजुगासर इलाके में बादल फटने की घटना हुई। इससे अचानक आई बाढ़ ने कृषि भूमि को बुरी तरह प्रभावित किया है। किसानों की खड़ी फसलें और फलदार बाग-बगीचे पूरी तरह बर्बाद हो गए। कई मकानों और अन्य निजी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है। 

भारी बारिश के कारण कई प्रमुख सड़कें बंद हो गईं। इससे भलेसा का भट्यास इलाका घंटों तक शेष क्षेत्रों से कटा रहा। डोडा जिले के कश्तीगढ़ क्षेत्र में भी मूसलाधार बारिश हुई। बारिश के कारण यहां अचानक बाढ़ की स्थिति बन गई। हालांकि, कश्तीगढ़ में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

बादल फटने से क्षेत्र में कई जल स्रोत उफान पर आ गए। इससे निचले इलाकों में पानी भर गया और मिट्टी का कटाव भी हुआ। सड़कों के बंद होने से आवश्यक सेवाओं की आवाजाही बाधित हुई। स्थानीय लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने सड़कों को खोलने के लिए मशीनरी लगाई है।