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नाईपर मोहाली में उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस

मोहाली / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाईपर), एस.ए.एस. नगर, मोहाली में 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह उत्साह, उल्लास और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। समारोह की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन से हुई। इसके बाद नाईपर के निदेशक प्रो. दुलाल पांडा ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और उपस्थित विद्यार्थियों, कर्मचारियों एवं अन्य सदस्यों ने राष्ट्रगान का सामूहिक गायन किया।

स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को किया नमन

समारोह को संबोधित करते हुए प्रो. दुलाल पांडा ने देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि तिरंगे के नीचे एकत्रित होकर हम उन वीरों के साहस, त्याग और बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिनके संघर्ष से देश को अमूल्य स्वतंत्रता मिली।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के 79 वर्षों में भारत ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। देशवासियों की प्रतिभा, कौशल और बौद्धिक क्षमता ने भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आत्मनिर्भरता और नवाचार पर जोर

प्रो. पांडा ने कहा कि वर्ष 2026 का स्वतंत्रता दिवस ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष और विकसित भारत@2047 के लक्ष्य के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस की भावना स्वदेशी प्रौद्योगिकियों, हरित परिवर्तन और आत्मनिर्भर रक्षा के माध्यम से विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने पर केंद्रित है।

उन्होंने कहा कि वास्तविक स्वतंत्रता केवल राजनीतिक आजादी तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता, नवाचार, वैज्ञानिक सोच और निरंतर विकास भी इसके महत्वपूर्ण आधार हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख

नाईपर निदेशक ने कहा कि वर्ष 2026 में भारत ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) की सफल क्रिटिकलिटी, गगनयान और LuPEX मिशनों में प्रगति तथा क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रही प्रगति का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां भारत की वैश्विक स्तर पर एक मजबूत नवाचार केंद्र के रूप में बढ़ती भूमिका को दर्शाती हैं।

नाईपर मोहाली में दो नए मास्टर डिग्री पाठ्यक्रम शुरू

प्रो. पांडा ने कहा कि नाईपर, मोहाली को स्वास्थ्य सेवा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की विकास यात्रा में योगदान देने पर गर्व है। उन्होंने बताया कि संस्थान में बायोफार्मास्युटिकल्स में मास्टर डिग्री और फार्मास्युटिकल रेगुलेटरी साइंसेज में मास्टर डिग्री के दो नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि ये पाठ्यक्रम फार्मास्युटिकल उद्योग की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

ट्रांसलेशनल रिसर्च और इंडस्ट्री-अकादमिक सहयोग प्राथमिकता

आने वाले वर्षों के लिए नाईपर, मोहाली की संस्थागत प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए प्रो. पांडा ने कहा कि ट्रांसलेशनल रिसर्च, उद्योग-अकादमिक सहयोग, क्लिनिकल रिसर्च इकोसिस्टम, बौद्धिक संपदा का सृजन एवं लाइसेंसिंग, वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्कृष्टता, अनुपालन एवं सुशासन, क्षमता निर्माण और विद्यार्थियों का सशक्तिकरण प्रमुख क्षेत्रों में शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि फार्मास्युटिकल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आज देश के प्रमुख और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में शामिल हैं तथा भारत के भविष्य में इसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने वाली है।

विकसित भारत@2047 में नाईपर की अहम भूमिका

अपने संबोधन के अंत में प्रो. दुलाल पांडा ने कहा कि तिरंगे को नमन करते हुए जब देश विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तब यह समझना जरूरी है कि स्वतंत्रता जिम्मेदारी के साथ ही कायम रहती है।

उन्होंने कहा कि नाईपर, मोहाली की जिम्मेदारी है कि वह भारत के फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र को ऐसे भविष्य की ओर ले जाने में योगदान दे, जो नवाचार, अनुपालन और वैश्विक प्रासंगिकता से परिभाषित हो। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से भारत को और अधिक गौरवशाली एवं सशक्त बनाया जा सकता है।

देशभक्ति प्रस्तुतियों ने बांधा समां

ध्वजारोहण एवं संबोधन के बाद संस्थान में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें नाईपर के विद्यार्थियों और कर्मचारियों के बच्चों ने देशभक्ति की थीम पर विभिन्न प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम का माहौल देखने को मिला।

समारोह का समापन उपस्थितजनों के बीच मिठाई वितरण के साथ हुआ।

PGIMER ने 80वां स्वतंत्रता दिवस रोगी सेवा के प्रति गर्व, जुनून और अटूट प्रतिबद्धता के साथ मनाया

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

PGIMER ने प्रो. विवेक लाल, निदेशक, PGIMER के नेतृत्व में 80वां स्वतंत्रता दिवस उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाया। समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज फहराने और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुई। इसके बाद नर्सिंग अधिकारियों द्वारा भावपूर्ण ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ की प्रस्तुति तथा जीवंत सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किए गए। समारोह में PGI परिवार के सदस्यों ने एकजुट होकर राष्ट्रीय गौरव, संस्थागत एकता और राष्ट्र के प्रति नए संकल्प की भावना को अभिव्यक्त किया।

समारोह को संबोधित करते हुए प्रो. लाल ने संस्थान के कर्मयोगियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “ये वे लोग हैं जो PGI के मरीजों के लिए अपने पसीने की एक-एक बूंद बहाते हैं। मरीज के कल्याण से बढ़कर इनके लिए कुछ भी मायने नहीं रखता; मरीज के हित से ऊपर कुछ नहीं है।” उन्होंने मरीज सेवा के प्रति कर्मयोगियों की इस अटूट प्रतिबद्धता को PGIMER की सबसे बड़ी उपलब्धि और उसकी स्थायी शक्ति का स्रोत बताया।

इस अवसर को विशेष बताते हुए प्रो. लाल ने पिछले महीने चंडीगढ़ में प्रधानमंत्री की यात्रा और PGIMER के उन्नत स्वास्थ्य सेवा केंद्रों के उद्घाटन को स्नेहपूर्वक याद किया। उन्होंने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री ने PGI की गौरवगाथा को स्वीकार करने के लिए विशेष रूप से समय निकाला।” निदेशक ने आगे कहा, “मेरे मन से केवल एक बात निकली—उनके शब्द हम सभी की विजय थे।”

PGIMER में उपचार के लिए आने वाले 30 लाख से अधिक मरीजों का उल्लेख करते हुए प्रो. लाल ने संस्थान की विशाल जिम्मेदारी को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “हमारे पास मरीजों को देने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन जब करीब 30 लाख मरीज हमारे पास आते हैं, तो कभी-कभी यह सब भी इतनी बड़ी मांग को पूरा करने के लिए कम पड़ जाता है। लेकिन आपकी प्रतिबद्धता और आपका समर्पण—यही PGI को आगे बढ़ाता है।”

13 कुमाऊँ रेजिमेंट के रेजांग ला में अदम्य साहस और वीरता से प्रेरणा लेते हुए प्रो. लाल ने विषम परिस्थितियों में सैनिकों के दृढ़ संकल्प का उल्लेख किया। PGIMER की मरीजों के प्रति जिम्मेदारी से इसकी तुलना करते हुए उन्होंने कहा, “युद्ध का मैदान अलग है, लेकिन प्रतिबद्धता वही है। जब परिस्थितियाँ विपरीत हों तो सैनिक पीछे नहीं हटता; उसी तरह PGI में जब कोई मरीज हमारे पास आता है, तो चुनौती कठिन होने के कारण हम पीछे नहीं हट सकते। हमारे पास जो भी संसाधन हैं, उनसे हम अपने मरीजों के लिए जो कुछ कर सकते हैं, हमें करना है।”

हर कर्मयोगी से साहस और गरिमा के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “अपना सिर मत झुकाइए। और अगर कभी सिर झुकाना पड़े, तो केवल उस मरीज के सामने झुकाइए, जो आपको दिल से आशीर्वाद देता है। सिर ऊँचा रखकर काम कीजिए। किसी से डरिए मत।”

प्रो. लाल ने 1992 से लंबित लगभग 1,200 पदोन्नतियों के मुद्दे के समाधान के लिए टीम को बधाई दी और इसे दशकों से संस्थान की सेवा कर रहे कर्मचारियों के योगदान की महत्वपूर्ण मान्यता बताया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी कल्याण और समय पर करियर प्रगति, मनोबल और प्रतिबद्धता बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।

अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में PGIMER की राष्ट्रीय उपलब्धि का उल्लेख करते हुए प्रो. लाल ने लगातार तीसरी बार सर्वश्रेष्ठ ROTTO पुरस्कार प्राप्त करने पर प्रकाश डाला। पुरस्कार समारोह में माननीय केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल द्वारा की गई सराहना पर अपनी प्रतिक्रिया को याद करते हुए उन्होंने कहा, “हम अपने मरीजों के लिए, अपने पास उपलब्ध हर साधन के साथ, जो कुछ कर सकते हैं, करते हैं। उपलब्ध संसाधनों के साथ जो भी संभव है, हम करते हैं और आगे भी करते रहेंगे।”

उन्होंने प्रोजेक्ट SARATHi का भी उल्लेख किया और बताया कि PGIMER से एक छोटी-सी पहल के रूप में शुरू हुआ यह प्रयास आज मरीज सेवा एवं सुविधा के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय आंदोलन बन चुका है तथा इसे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय का समर्थन और मान्यता प्राप्त हुई है। उन्होंने इसे करुणा और प्रतिबद्धता से प्रेरित एक ऐसी पहल बताया, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव पैदा किया है।

प्रो. लाल ने समर्पित कार्डियक इमरजेंसी का भी उल्लेख किया, जो 26 जनवरी 2026 को शुरू हुई और अब पूरी क्षमता से कार्य कर रही है। इस सुविधा ने हृदय संबंधी आपात स्थितियों में त्वरित एवं विशेषज्ञ उपचार को मजबूत करने के साथ-साथ मरीजों के प्रवाह को बेहतर बनाया है। उन्होंने आगे बताया कि PGIMER कर्मचारियों और उनके निकट संबंधियों के लिए इमरजेंसी में 12 बेड आरक्षित किए गए हैं, जिसे समय के साथ कार्डियक सेंटर में भी और मजबूत किया जाएगा।

तकनीकी एवं सुरक्षा कर्मचारियों से लेकर लॉन्ड्री और किचन में कार्यरत कर्मचारियों तक, प्रत्येक श्रेणी के स्टाफ के योगदान को स्वीकार करते हुए प्रो. लाल ने कहा कि मरीज सेवा में सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। लॉन्ड्री के अपने हालिया दौरे को याद करते हुए उन्होंने कर्मचारियों के समर्पण की सराहना की, जिसके बाद उनके काम को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए एक महीने के भीतर नए उपकरण उपलब्ध कराए गए। उन्होंने मरीजों के लिए चौबीसों घंटे भोजन उपलब्ध कराने और खाद्य सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के लिए किचन स्टाफ की भी सराहना की।

पीडियाट्रिक इमरजेंसी का एक प्रसंग साझा करते हुए प्रो. लाल ने बताया कि वे एक ओवरऑल पहनकर वहां गए थे और उन्हें निदेशक के रूप में पहचाना नहीं गया। उन्होंने कहा, “सभी लोग इमरजेंसी में इतने व्यस्त होकर काम कर रहे थे कि उन्हें निदेशक की भी परवाह नहीं थी। मुझे बहुत खुशी हुई।” उन्होंने इसे “प्रतिबद्धता की शक्ति” बताया।

रेजिडेंट्स को संबोधित करते हुए प्रो. लाल ने PGIMER में प्रशिक्षण और क्लिनिकल अनुभव की गुणवत्ता पर पूरा विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “आप दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं।” संस्थान की रेजिडेंसी व्यवस्था में अपने विश्वास को दोहराते हुए उन्होंने कहा, “मेरा दृढ़ विश्वास है कि पूरी दुनिया में सबसे अच्छी रेजिडेंसी PGI चंडीगढ़ में है।” उन्होंने रेजिडेंट्स से एक अग्रणी चिकित्सा संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त करने के साथ जुड़ी जिम्मेदारी को समझने और PGIMER की उत्कृष्टता, करुणा एवं सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

भविष्य की ओर देखते हुए प्रो. लाल ने कहा कि PGIMER को मानवीय प्रतिबद्धता को बनाए रखते हुए तकनीक को अपनाने की अपनी क्षमता पर विश्वास रखना होगा। उन्होंने कहा, “अगर आपको लगता है कि हम तकनीक के आधार पर दुनिया का मुकाबला नहीं कर सकते, तो आप बहुत गलत हैं। जहाँ प्रतिबद्धता है, वहाँ विजय है। जहाँ प्रतिबद्धता है, वहाँ गौरव है।”

प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के संबंध में उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा, “हमें उम्मीद है कि माननीय प्रधानमंत्री फिर आएँगे और इसकी आधारशिला रखेंगे तथा अगले वर्ष तक MBBS की पढ़ाई शुरू हो जानी चाहिए।”

PGIMER में हाल ही में स्थापित विशाल राष्ट्रीय ध्वज का उल्लेख करते हुए प्रो. लाल ने कहा, “मुझे लगा कि इस ध्वज के साथ-साथ PGI का गौरव और प्रतिष्ठा भी इसी ऊँचाई तक उठेगी और हमेशा यहीं बनी रहेगी।” उन्होंने कहा, “PGI की जिम्मेदारी दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। लेकिन PGI के कंधे कभी नहीं झुकते।”

हर कर्मयोगी से साहस और गरिमा के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए निदेशक, PGIMER ने अपने संबोधन का समापन PGI परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया। उन्होंने कहा, “यह प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है। और हमें इस प्रतिबद्धता को आगे लेकर जाना है।”

समारोह का समापन इंजीनियरिंग विभाग के नेतृत्व में वृक्षारोपण अभियान के साथ हुआ। प्रो. विवेक लाल ने प्लूमेरिया एक्यूटिफोलिया (चंपा) का पौधा रोपकर मानसून के दौरान 300 पौधे लगाने की पहल का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य परिसर की सुंदरता बढ़ाने, हरित आवरण को मजबूत करने और सूक्ष्म जलवायु को बेहतर बनाना है।

समारोह का समापन मिठाइयों के वितरण के साथ हुआ, जो एकता और सौहार्द का प्रतीक रहा। इस अवसर पर करुणा, प्रतिबद्धता और समर्पण के संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने का सामूहिक संकल्प भी लिया गया।