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विधानसभा सदस्यता से सोमवार को इस्तीफा देने से पहले नितिन नवीन की भावुक अपील

पटना, 30 मार्च (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को बिहार विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने से पहले विधानसभा क्षेत्र की जनता से भावुक अपील की।

दो सप्ताह पहले राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए नवीन ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘आज मैं बिहार विधानसभा के बांकीपुर निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित सदस्य पद से इस्तीफा दे रहा हूं।’’

अपने राजनीतिक को याद करते हुए उन्होंने लिखा, ‘‘जनवरी 2006 में पिताजी के आकस्मिक निधन के बाद पार्टी ने मुझे पटना पश्चिम से उपचुनाव लड़ने का अवसर दिया और 27 अप्रैल 2006 को पहली बार पटना पश्चिम क्षेत्र से निर्वाचित होकर मैंने सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन की शुरुआत की।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 20 वर्षों में पिताजी दिवंगत नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा द्वारा बनाए गए इस क्षेत्र को पारिवारिक भाव से सींचने, संवारने और विकास के पटल पर आगे ले जाने का निरंतर प्रयास किया है।’’

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मैंने सदैव अपने क्षेत्र और बिहार के विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य किया। इसी का प्रतिफल है कि यहां की देवतुल्य जनता ने मुझे लगातार पांच बार सदन में अपना प्रतिनिधि चुनकर सेवा का सौभाग्य प्रदान किया। सदन के अंदर हो या सदन के बाहर, दोनों ही स्थानों का उपयोग मैंने अपने क्षेत्र और बिहार की जनता की आवाज उठाने और उनकी समस्याओं के समाधान का मार्ग निकालने के लिए किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘बिहार विधानसभा के सदस्य के रूप में मुझे सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई वरिष्ठ विधायकों से बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। मैंने अपने क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण विषयों का समाधान जनता और कार्यकर्ताओं के सुझावों से ही निकाला है।’’

नवीन ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी ने जब मुझे बिहार सरकार के मंत्री के रूप में काम करने का अवसर दिया, तब मुझे कई अहम फैसलों, नीतियों और योजनाओं का क्रियान्वयन करने में सफलता मिली। इसके लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद व्यक्त करता हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने यह हमेशा कहा है कि जनता ने मुझे समस्याएं भी बताई, और उन समस्याओं के समाधान का रास्ता भी मुझे जनता ने हीं दिखाया। कार्यकर्ताओं ने मुझे भाई के रूप में, परिवार के सदस्य के रूप में और अभिभावक के रूप में उंगली पकड़कर आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। मैं पटना और बिहार की जनता को आश्वस्त करता हूं कि जो परिवार का भाव उन्होंने मुझे दिया है, उसका मैं सदैव सम्मान करता रहूंगा।’’

नवीन ने कहा, ‘‘पार्टी ने मुझे जो नयी भूमिका दी है, उसके माध्यम से भी मैं अपने क्षेत्र और बिहार के विकास के लिए सदैव तत्पर एवं संकल्पित रहूंगा। मेरे कार्यकर्ताओं और बिहार की जनता के साथ मेरा जो अटूट संबंध है, वह सदैव बना रहेगा और मुझे हमेशा नई ऊर्जा, प्रेरणा और मार्गदर्शन देता रहेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2047 के ‘विकसित भारत एवं विकसित बिहार’ बनाने के सपने को साकार करने की दिशा में मैं निरंतर प्रयासरत रहूंगा। ’’

बिहार: यूजीसी के निंयमों से जुड़े मुद्दे को लेकर विधानसभा में हंगामा

पटना, 20 फरवरी (भाषा) बिहार विधानसभा में शुक्रवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 के मुद्दे को लेकर जोरदार हंगामा हुआ।

हालांकि इन विनियमों पर उच्चतम न्यायालय ने अंतरिम रोक लगा दी है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा)-मार्क्सवादी लेनिनवादी (माले) लिबरेशन के विधायक संदीप सौरभ ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक विशेष जाति और मानसिकता ने यूजीसी विनियमों का विरोध किया, जिसके कारण उच्चतम न्यायालय ने इस पर अंतरिम स्थगन लगा दिया।

उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह इस संबंध में संसद के माध्यम से कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार से पहल करे।

सौरभ ने तर्क दिया कि विश्वविद्यालय परिसरों में जातिगत पूर्वाग्रह समाप्त करने और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए इस प्रकार का विधिक ढांचा आवश्यक है।

भाकपा (माले) लिबरेशन के विधायक ने चर्चा के दौरान एक आपत्तिजनक जातिसूचक शब्द का प्रयोग किया गया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कार्यवाही से हटा दिया।

अध्यक्ष ने कहा कि इस प्रकार के शब्दों का प्रयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि भाकपा (माले) लिबरेशन के विधायक द्वारा जातिसूचक शब्द का प्रयोग पूरे विपक्ष की मानसिकता को दर्शाता है।

उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उपमुख्यमंत्री की टिप्पणी पर विपक्षी सदस्य आक्रोशित हो गए।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक आलोक मेहता ने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगी दल दलित-विरोधी व आरक्षण-विरोधी हैं, इसी कारण वे यूजीसी के इन विनियमों का विरोध कर रहे हैं।

स्थिति बिगड़ने पर अध्यक्ष ने हस्तक्षेप कर सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित कराया।