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सावरकर जयंती पर बंगाल में राजनीतिक संदेश, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने वीर सावरकर को बताया राष्ट्रभक्ति का प्रतीक

कोलकाता / सत्ता संदेश

विनायक दामोदर सावरकर की 143वीं जयंती के अवसर पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Shubhendu Adhikari ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अमूल्य विरासत बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर सावरकर का जीवन त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति की ऐसी मिसाल है, जो आज भी देश के करोड़ों युवाओं और राष्ट्रप्रेमियों को प्रेरणा देता है।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने लिखा कि महान स्वतंत्रता सेनानी और दूरदर्शी विचारक स्वातंत्र्यवीर Vinayak Damodar Savarkar को उनकी जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता के लिए सावरकर द्वारा दिए गए बलिदान और संघर्ष को देश कभी भुला नहीं सकता।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि सावरकर का अदम्य साहस, मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण और राष्ट्रीय चेतना के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी समाज को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए सावरकर द्वारा प्रस्तुत विचार और उनके संघर्ष का इतिहास भारतीय राजनीति और सामाजिक चेतना में विशेष स्थान रखता है।

वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। उनका जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर गांव में हुआ था। वे एक प्रखर राष्ट्रवादी, लेखक, समाज सुधारक और हिंदू महासभा के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। सावरकर ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई और उन्हें काला पानी की सजा भी भुगतनी पड़ी। अंडमान की सेल्युलर जेल में बिताए गए उनके वर्षों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में साहस और संघर्ष के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सावरकर की जयंती पर दिया गया यह संदेश केवल श्रद्धांजलि भर नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद और वैचारिक राजनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है। हाल के वर्षों में सावरकर को लेकर देश की राजनीति में लगातार बहस होती रही है, जहां एक ओर उन्हें राष्ट्रवादी विचारधारा का प्रतीक बताया जाता है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल कई मुद्दों पर उनकी आलोचना भी करते रहे हैं।

बंगाल की राजनीति में भी राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दे लगातार प्रमुखता से उठते रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा वीर सावरकर को याद करना राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा और अन्य राष्ट्रवादी संगठनों ने भी देशभर में सावरकर जयंती पर कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

वीर सावरकर का निधन 26 फरवरी 1966 को 82 वर्ष की आयु में हुआ था, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रवादी विचारधारा में उनके योगदान को आज भी बड़े सम्मान के साथ याद किया जाता है।

 *‘हर काम देश के नाम’*

*लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह साही ने पश्चिमी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ का पदभार संभाला*

*चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह साही, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, एसएम ने 26 मई 2026 को चंडीमंदिर सैन्य स्टेशन में मुख्यालय पश्चिमी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल पुनीत आहूजा, एवीएसएम, एसएम, वीएसएम का स्थान लिया है, जिन्होंने सेना मुख्यालय में महानिदेशक रणनीतिक योजना (डायरेक्टर जनरल स्ट्रैटेजिक प्लानिंग) का पदभार संभालने हेतु कार्यभार ग्रहण किया है।

पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून के पूर्व छात्र लेफ्टिनेंट जनरल साही को दिसंबर 1988 में राजपूत रेजिमेंट की 23वीं बटालियन में कमीशन प्राप्त हुआ था और वर्तमान में वे राजपूत रेजिमेंट के कर्नल के प्रतिष्ठित पद पर आसीन हैं।

जनरल अधिकारी को उत्तरी, पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों सहित सियाचिन ग्लेशियर में व्यापक परिचालन अनुभव प्राप्त है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) तथा काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स (किलो) में अपनी बटालियन और एक इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली। उन्हें भारतीय सेना की सबसे बड़ी कोर, 3 कोर, की कमान संभालने का विशिष्ट गौरव प्राप्त है, जिसकी जिम्मेदारी पूर्वी सीमाओं, भारत-म्यांमार सीमा तथा उत्तर-पूर्व के छह राज्यों के आंतरिक क्षेत्रों तक फैली हुई है। मई 2023 में मणिपुर में हुए जातीय संघर्ष के दौरान उन्होंने अपने जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में आधारभूत संरचना के उन्नयन और स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस नियुक्ति से पूर्व वे आर्मी वॉर कॉलेज, महू के कमांडेंट के रूप में कार्यरत थे, जहाँ उन्होंने पेशेवर सैन्य शिक्षा को उभरती परिचालन आवश्यकताओं और तकनीकी प्रगति के अनुरूप बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कीं। उनके नेतृत्व में संस्थान को 15 जनवरी 2026 को प्रतिष्ठित “चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ यूनिट अप्रिसिएशन” से सम्मानित किया गया।

जनरल अधिकारी ने कई महत्वपूर्ण स्टाफ नियुक्तियों पर भी कार्य किया है, जिनमें एक ऑपरेशनल कोर के ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ, अतिरिक्त महानिदेशक सैन्य संचालन तथा सेना मुख्यालय में महानिदेशक सूचना युद्ध (इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर) शामिल हैं।

उन्होंने सभी महत्वपूर्ण पेशेवर पाठ्यक्रम पूरे किए हैं, जिनमें डीएसएससी वेलिंगटन का स्टाफ कोर्स, आर्मी वॉर कॉलेज महू का हायर कमांड कोर्स तथा राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नई दिल्ली का एनडीसी कोर्स शामिल है। लेफ्टिनेंट जनरल साही के पास दो एमफिल डिग्रियाँ तथा रक्षा एवं सामरिक अध्ययन में मास्टर डिग्री है।

उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल तथा सेना मेडल से सम्मानित किया गया है।

पदभार ग्रहण करने के उपरांत लेफ्टिनेंट जनरल साही ने वीर स्मृति युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर राष्ट्र सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने परिचालन तत्परता, क्षमता विकास तथा सभी रैंकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

आयकर विभाग ने चंडीगढ़ में शहीदी दिवस का आयोजन किया, शहीदों के परिजनों का सम्मान; सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दी गई

प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त, उत्तर-पश्चिम क्षेत्र, श्री अशोक कुमार सरोहा के संरक्षण में आयकर विभाग द्वारा एनआईटीटीटीआर सभागार, सेक्टर-26, चंडीगढ़ में शहीदी दिवस का गरिमामय आयोजन किया गया।इस अवसर पर विभाग द्वारा क्षेत्र के उन शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। मेजर अनुज राजपूत, कैप्टन सतीश चंद्र सहगल, कैप्टन रमेश चंदर शर्मा, लांस नायक हरचंद तथा लांस नायक विक्रम सिंह के अदम्य साहस एवं बलिदान को गहरी श्रद्धा एवं कृतज्ञता के साथ स्मरण किया गया।

कार्यक्रम में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें मुख्य आयकर आयुक्त, पंचकूला एवं शिमला, सुश्री विदिशा कालरा, आई.आर.एस.; महानिदेशक आयकर (अन्वेषण), सुश्री वत्सला झा, आई.आर.एस.; मुख्य आयकर आयुक्त, अमृतसर, डॉ. जी. एस. फणी किशोर, आई.आर.एस.; तथा मुख्य आयकर आयुक्त (ओएसडी), सुश्री कोमल जोगपाल, आई.आर.एस. शामिल थीं।

शहीदों के परिजनों को विभाग की ओर से सम्मान एवं कृतज्ञता के प्रतीक स्वरूप विशेष रूप से निर्मित स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।

सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत सतलुज पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा देशभक्ति गीतों की समूह एवं एकल प्रस्तुतियाँ दी गईं। इसके अतिरिक्त, चंडीगढ़ के प्रख्यात नाट्य समूह “मंथन” द्वारा भगत सिंह एवं अन्य स्वतंत्रता सेनानियों पर आधारित एक प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

इस अवसर को चिह्नित करते हुए, पूर्वाह्न में आयकर भवन, चंडीगढ़ एवं पंचकूला में रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया। ये शिविर पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़, नेशनल इंटीग्रेटेड फोरम ऑफ आर्टिस्ट्स एंड एक्टिविस्ट्स (निफा), श्री राकेश कुमार सांगड़ के नेतृत्व में, तथा श्री शिव कांवड़ महासंघ चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित किए गए।

कार्यक्रम का सफल संचालन सुश्री पूनम राय, आई.आर.एस. द्वारा किया गया तथा इसमें विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। यह आयोजन राष्ट्रभक्ति एवं बलिदान की भावना को समर्पित एक गरिमामय एवं स्मरणीय श्रद्धांजलि के रूप में संपन्न हुआ।