ब्रेकिंग न्यूज़
उत्तराखंड कांग्रेस नेता अमित तलवार का सूरज सिंह बागड़ी ने किया जोरदार स्वागत, टीम ने जताया स्नेह

लुधियाना / सत्ता संदेश

उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता अमित तलवार के पंजाब आगमन पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता सूरज सिंह बागड़ी एवं उनकी टीम ने जोरदार स्वागत किया। इस अवसर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने आपसी भाईचारे, स्नेह और राजनीतिक सौहार्द की भावना के साथ तलवार जी का अभिनंदन किया।

स्वागत समारोह के दौरान डॉ. सधीश सैनी, अवनीश चौहान, विक्की बोहत, राहुल चौहान, अजय तोमर एवं सार्थक राज विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी ने अमित तलवार का फुलदस्ता एवं गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उनके साथ अपने आत्मीय संबंधों को और मजबूत करने की भावना व्यक्त की।

इस अवसर पर सूरज सिंह बागड़ी ने कहा कि कांग्रेस परिवार की सबसे बड़ी ताकत उसके कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच आपसी प्रेम, सम्मान, विश्वास एवं सहयोग की भावना है। पंजाब और उत्तराखंड के कांग्रेस नेताओं के बीच इस प्रकार के आत्मीय मिलन से न केवल आपसी संबंध मजबूत होते हैं, बल्कि भविष्य में संगठनात्मक स्तर पर भी सकारात्मक सहयोग और बेहतर समन्वय की नई संभावनाएं बनती हैं।

अमित तलवार जी ने पंजाब में मिले स्नेह एवं सम्मान के लिए सूरज सिंह बागड़ी तथा उपस्थित सभी साथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में विचारों के साथ-साथ आपसी संबंध, विश्वास और सद्भाव भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे आत्मीय मिलन कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करते हैं और संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस अवसर पर उपस्थित सभी नेताओं ने पंजाब और उत्तराखंड के बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं नेताओं के आपसी संपर्क को और मजबूत करने, एक-दूसरे के साथ सहयोग बढ़ाने तथा भविष्य में भी ऐसे आत्मीय संवाद एवं मिलन जारी रखने पर जोर दिया।

पूरे कार्यक्रम का वातावरण स्नेह, सम्मान, भाईचारे और सकारात्मक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा। इस आत्मीय मुलाकात ने यह संदेश दिया कि मजबूत राजनीतिक संबंध केवल संगठनात्मक सहयोग तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनमें विश्वास, अपनापन और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। आने वाले समय में यह आपसी जुड़ाव कांग्रेस संगठन के लिए नए संबंधों, बेहतर समन्वय और सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

साहिल अग्रवाल बने पंजाब अग्रवाल कल्याण बोर्ड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, AAP नेताओं ने दी बधाई

लुधियाना / सत्ता संदेश

बुधवार को स्थानीय बचत भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी एकत्रित हुए, जहां साहिल अग्रवाल को पंजाब अग्रवाल कल्याण बोर्ड का वरिष्ठ उपाध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर आम आदमी पार्टी की पूरी टीम ने पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान और पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह नियुक्ति समाज सेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की पहचान है।

नवनियुक्त वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री साहिल अग्रवाल ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने के लिए पार्टी नेतृत्व का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि वह समाज और व्यापारिक वर्ग के हितों के लिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करेंगे।

इस दौरान श्री साहिल अग्रवाल ने पंजाब राज्य व्यापार आयोग के जिला उपाध्यक्ष रोहित वर्मा, उत्तरी विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष राजू चावला, दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष डॉ. इंदरजीत वर्मा, आतम नगर विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष मनप्रीत, पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष अनुज चौधरी, पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष डॉ. दविंदर सिंह घुमन, रूपेश, वीरेंद्र पांडे, वेद तथा अन्य सहयोगियों का भी विशेष रूप से धन्यवाद किया।

कार्यक्रम में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने साहिल अग्रवाल को नई जिम्मेदारी मिलने पर शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में बोर्ड समाज के कल्याण और विकास के लिए प्रभावी भूमिका निभाएगा।

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने या देशव्यापी गोहत्या प्रतिबंध का कोई प्रस्ताव नहीं: अर्जुन राम मेघवाल

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय कानून मंत्री Arjun Ram Meghwal ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार के पास फिलहाल गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने या पूरे देश में गोहत्या पर एक समान प्रतिबंध लगाने संबंधी कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों की ओर से समय-समय पर ऐसी मांगें उठती रही हैं।

मेघवाल ने कहा कि भारत के संविधान की व्यवस्था के अनुसार पशुपालन, कृषि और गोसंरक्षण से जुड़े कई विषय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसी कारण गोहत्या से संबंधित कानून देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग हैं और राज्य सरकारें अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इस विषय पर निर्णय लेती हैं।

राज्यों में अलग-अलग हैं कानून

कानून मंत्री ने बताया कि देश के कई राज्यों में गोहत्या पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध लागू है, जबकि कुछ राज्यों में अलग-अलग शर्तों के तहत इसकी अनुमति दी जाती है। इसलिए इस विषय पर पूरे देश में एक समान कानूनी व्यवस्था वर्तमान में लागू नहीं है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें अपने-अपने कानूनों और नीतियों के अनुसार इस विषय का प्रबंधन करती हैं और केंद्र सरकार के समक्ष इस समय ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है जिस पर विचार किया जा रहा हो।

लंबे समय से उठती रही है मांग

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने तथा देशव्यापी गोहत्या प्रतिबंध की मांग विभिन्न संगठनों और समूहों द्वारा वर्षों से उठाई जाती रही है। समर्थकों का तर्क है कि गाय का भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विशेष महत्व है। वहीं इस विषय को लेकर अलग-अलग राज्यों और समुदायों में भिन्न दृष्टिकोण भी देखने को मिलते हैं।

संवैधानिक और राजनीतिक महत्व का विषय

विशेषज्ञों का मानना है कि गोसंरक्षण और गोहत्या से जुड़ा मुद्दा केवल धार्मिक या सांस्कृतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक, आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं से भी जुड़ा हुआ है। संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में राज्यों को पशुधन संरक्षण और विशेष रूप से गायों एवं दुधारू पशुओं के संरक्षण के लिए प्रयास करने की सलाह दी गई है, लेकिन कानून बनाने का अधिकार मुख्य रूप से राज्यों के पास है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विषय समय-समय पर सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता रहा है, लेकिन वर्तमान में केंद्र सरकार की ओर से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने अथवा पूरे देश में गोहत्या पर एक समान प्रतिबंध लगाने की दिशा में कोई औपचारिक पहल नहीं की जा रही है।

मेघवाल के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल केंद्र सरकार के एजेंडे में ऐसा कोई प्रस्ताव शामिल नहीं है और इस विषय से जुड़े निर्णय राज्यों की नीतियों और कानूनों के अनुसार ही संचालित होते रहेंगे।

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से शांतनु सेन ने दिया इस्तीफा

कोलकाता / सत्ता संदेश

West Bengal की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत Shantanu Sen ने All India Trinamool Congress के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, शांतनु सेन ने व्यक्तिगत कारणों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के पुनर्गठन का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया है। हालांकि इस्तीफे के पीछे की विस्तृत वजहों पर आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है, लेकिन इस कदम को पार्टी के भीतर चल रहे हालिया बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

शांतनु सेन तृणमूल कांग्रेस के उन प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की नीतियों और रुख को मीडिया में प्रस्तुत करते थे। वे लंबे समय से संगठन से जुड़े हुए हैं और विभिन्न मुद्दों पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते रहे हैं।

उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह कदम पार्टी के भीतर किसी असंतोष या पुनर्गठन की प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि टीएमसी नेतृत्व की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस लगातार अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करती रही है, और ऐसे में प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व इस रिक्त पद को कैसे भरता है और क्या शांतनु सेन भविष्य में किसी अन्य भूमिका में पार्टी में सक्रिय रहते हैं।

बीकेसी के ‘सिटी पार्क’ को लेकर सियासत तेज, शिवसेना (उबाठा) विधायक ने लगाया ‘निजी इस्तेमाल’ का आरोप

मुंबई / सत्ता संदेश

Shiv Sena (UBT) के विधायक Varun Sardesai ने मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) स्थित एक सार्वजनिक उद्यान को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी Mumbai Metropolitan Region Development Authority द्वारा विकसित “सिटी पार्क” आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं है और इसे केवल एमएमआरडीए अधिकारियों तथा उनके परिवारों के उपयोग तक सीमित कर दिया गया है।

सरदेसाई ने इस संबंध में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis को पत्र लिखकर मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीकेसी इलाके में करीब पांच एकड़ में विकसित यह पार्क सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाया गया था, लेकिन वर्तमान में इसका इस्तेमाल केवल एमएमआरडीए अधिकारियों और उनके परिवारों द्वारा किया जा रहा है, जो पास स्थित जेटवान स्टाफ क्वार्टर में रहते हैं।

विधायक ने अपने पत्र में कहा कि यदि किसी सार्वजनिक परियोजना को आम नागरिकों के टैक्स के पैसे से विकसित किया गया है, तो उस पर सभी लोगों का समान अधिकार होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्क को “निजी एन्क्लेव” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को वहां प्रवेश नहीं मिल पा रहा।

सरदेसाई ने मुख्यमंत्री से मांग की कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि पार्क को सार्वजनिक उपयोग के लिए पूरी तरह खोला जाए। उन्होंने कहा कि मुंबई जैसे महानगर में खुले सार्वजनिक स्थानों की भारी कमी है और ऐसे में किसी पार्क को सीमित लोगों तक रखना उचित नहीं है।

बीकेसी मुंबई का प्रमुख व्यावसायिक और प्रशासनिक क्षेत्र माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में कॉरपोरेट कार्यालय, सरकारी संस्थान और आवासीय परिसर स्थित हैं। ऐसे इलाके में सार्वजनिक पार्क और हरित क्षेत्र नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

इस मुद्दे पर अब राजनीतिक बहस भी तेज होती दिख रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि सार्वजनिक संपत्तियों का उपयोग पारदर्शी और सभी नागरिकों के लिए समान रूप से उपलब्ध होना चाहिए। वहीं अभी तक एमएमआरडीए की ओर से आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि महानगरों में पार्क और सार्वजनिक स्थान केवल मनोरंजन के साधन नहीं होते, बल्कि वे पर्यावरण संतुलन और नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी हैं। ऐसे में यदि किसी सार्वजनिक सुविधा की पहुंच सीमित की जाती है, तो यह शहरी प्रशासन और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

फिलहाल इस मामले ने मुंबई की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार और एमएमआरडीए इस विवाद पर क्या कदम उठाते हैं।

बिहार में सरकारी जमीन की हेराफेरी पर सरकार सख्त, मंत्री दिलीप जायसवाल ने अधिकारियों को दी चेतावनी

पटना / सत्ता संदेश

Bihar के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री Dilip Kumar Jaiswal ने सरकारी जमीनों के गलत हस्तांतरण और हेराफेरी को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि ऐसी अनियमितताओं को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकारी भूमि को नियमों के विरुद्ध किसी व्यक्ति के नाम स्थानांतरित किया गया, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पटना में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि सरकारी जमीन जनता की संपत्ति है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हाल के समय में सरकारी भूमि से जुड़े कई मामलों की शिकायतें सामने आई हैं, जिन्हें सरकार गंभीरता से ले रही है।

जायसवाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भूमि रिकॉर्ड, दाखिल-खारिज और रजिस्ट्री प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही, भ्रष्टाचार या मिलीभगत पाई गई, तो दोषियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी दोनों तरह की कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री ने कहा कि कई बार सरकारी जमीन को फर्जी दस्तावेजों या रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर निजी व्यक्तियों के नाम कर दिया जाता है, जिससे सरकार को भारी नुकसान होता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की पहचान कर तुरंत जांच कराई जाए और अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया तेज की जाए।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अब जमीन रिकॉर्ड को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है। सरकार का मानना है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड और तकनीकी निगरानी से फर्जीवाड़े और अनियमितताओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में मंत्री का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बिहार में जमीन विवाद और भूमि रिकॉर्ड से जुड़े मामलों को लंबे समय से गंभीर समस्या माना जाता रहा है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और फर्जी हस्तांतरण की शिकायतें अक्सर सामने आती रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार जमीन रिकॉर्ड प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाने में सफल होती है, तो इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही आम लोगों को भी भूमि संबंधी मामलों में राहत मिल सकेगी।

मंत्री ने अधिकारियों से यह भी कहा कि जनता की शिकायतों का समय पर समाधान किया जाए और किसी भी तरह की अनियमितता की जानकारी मिलने पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सरकार ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में भूमि प्रबंधन और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

पंजाब में 2027 का लक्ष्य तय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों बोले- राज्य में खिलेगा कमल

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

Bharatiya Janata Party की पंजाब इकाई के नए प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद Keval Singh Dhillon ने बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों में भाजपा पंजाब में अपनी सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी राज्य में संगठन को मजबूत कर नए राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरने की दिशा में तेजी से काम करेगी।

प्रदेश अध्यक्ष घोषित किए जाने के तुरंत बाद ढिल्लों ने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब में जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करेगी और आगामी विधानसभा चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

76 वर्षीय ढिल्लों ने कहा कि उनका पहला और सबसे बड़ा लक्ष्य पंजाब में भाजपा की सरकार बनाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में राज्य की जनता भाजपा की नीतियों और नेतृत्व पर भरोसा जताएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी किसानों, युवाओं, व्यापारियों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देकर जनाधार बढ़ाने का काम करेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब लंबे समय से कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें बेरोजगारी, नशाखोरी, कानून-व्यवस्था और आर्थिक संकट प्रमुख हैं। भाजपा इन मुद्दों का स्थायी समाधान देने के लिए जनता के बीच जाएगी और एक मजबूत राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत करेगी।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, पंजाब में भाजपा के लिए 2027 का चुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन टूटने के बाद भाजपा राज्य में अपने संगठन को स्वतंत्र रूप से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति को पार्टी के विस्तार अभियान के रूप में देखा जा रहा है।

ढिल्लों का राजनीतिक अनुभव लंबा रहा है और वे पंजाब की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में भाजपा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अपने जनाधार को बढ़ाने में सफल होगी।

भाजपा नेताओं ने दावा किया कि केंद्र सरकार की योजनाओं और प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में किए गए विकास कार्यों का लाभ पार्टी को पंजाब में भी मिलेगा। वहीं विपक्षी दलों ने भाजपा के इस दावे को राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है।

पंजाब की राजनीति में आने वाले महीनों में संगठनात्मक बदलाव और चुनावी रणनीतियां और तेज होने की संभावना है। ऐसे में भाजपा का यह दावा कि 2027 में पंजाब में “कमल खिलेगा”, राज्य की राजनीति में नई बहस और चुनावी चर्चाओं को जन्म दे रहा है।

AAP विधायक का बड़ा ऐलान, कैमरे के सामने उतारे जूते10 करोड़ की सरकारी जमीन छुड़ाने तक नंगे पैर प्रचार का प्रण

लुधियाना / सत्ता संदेश

समराला नगर काउंसिल चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। इसी बीच आम आदमी पार्टी के विधायक जगतार सिंह दियालपुरा ने एक ऐसा ऐलान कर दिया, जिसने पूरे पंजाब की राजनीति में हलचल मचा दी है। विधायक ने मीडिया के सामने अपने जूते उतार दिए और बड़ा राजनीतिक प्रण लेते हुए कहा कि जब तक वह विरोधियों के कब्जे से 10 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन को मुक्त नहीं करवा लेते, तब तक नंगे पैर ही रहेंगे और चुनाव प्रचार भी इसी तरह करेंगे। विधायक दियालपुरा ने कहा, “मैं आज ऐलान करता हूं कि जब तक विरोधियों के कब्जे से वह 10 करोड़ की सरकारी प्रॉपर्टी जनता को वापस नहीं दिलवा देता, तब तक मैं खुद नंगे पैर रहूंगा। इस भीषण गर्मी में भी चुनाव प्रचार नंगे पैर ही करूंगा और जूते उसी दिन पहनूंगा, जिस दिन वह जमीन छुड़वाकर जनता को सौंप दूंगा।” दरअसल, यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब शिरोमणि अकाली दल के हलका इंचार्ज परमजीत सिंह ढिल्लों ने भी चुनाव प्रचार नंगे पैर करने का ऐलान किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सत्ताधारी आप सरकार द्वारा उनके साथ राजनीतिक धक्का किया गया है,
जिसके विरोध में और जनता से न्याय मांगने के लिए वह नंगे पैर वोट मांगेंगे। इसी बयान पर पलटवार करते हुए विधायक दियालपुरा ने कहा कि विरोधी दल मगरमच्छ के आंसू बहाकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधियों ने मेन बाईपास पर शहर की करीब 10 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन पर कब्जा किया हुआ है। विधायक ने कहा कि त्याग अगर करना है तो जनता के हित के लिए होना चाहिए, न कि अपनी राजनीति चमकाने के लिए। विधायक द्वारा लाइव कैमरे के सामने जूते उतारने के बाद समराला क्षेत्र में राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। नगर काउंसिल चुनाव अब पूरी तरह “नंगे पैर चुनाव प्रचार” की राजनीति के इर्द-गिर्द घूमते नजर आ रहे हैं। बाजारों, चौकों और सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और लोग अब यह देखने को उत्सुक हैं कि आखिर 10 करोड़ की सरकारी जमीन का मामला किस करवट बैठता है। समराला से परमिंदर वर्मा की रिपोर्ट

विधानसभा सदस्यता से सोमवार को इस्तीफा देने से पहले नितिन नवीन की भावुक अपील

पटना, 30 मार्च (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को बिहार विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने से पहले विधानसभा क्षेत्र की जनता से भावुक अपील की।

दो सप्ताह पहले राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए नवीन ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘आज मैं बिहार विधानसभा के बांकीपुर निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित सदस्य पद से इस्तीफा दे रहा हूं।’’

अपने राजनीतिक को याद करते हुए उन्होंने लिखा, ‘‘जनवरी 2006 में पिताजी के आकस्मिक निधन के बाद पार्टी ने मुझे पटना पश्चिम से उपचुनाव लड़ने का अवसर दिया और 27 अप्रैल 2006 को पहली बार पटना पश्चिम क्षेत्र से निर्वाचित होकर मैंने सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन की शुरुआत की।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 20 वर्षों में पिताजी दिवंगत नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा द्वारा बनाए गए इस क्षेत्र को पारिवारिक भाव से सींचने, संवारने और विकास के पटल पर आगे ले जाने का निरंतर प्रयास किया है।’’

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मैंने सदैव अपने क्षेत्र और बिहार के विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य किया। इसी का प्रतिफल है कि यहां की देवतुल्य जनता ने मुझे लगातार पांच बार सदन में अपना प्रतिनिधि चुनकर सेवा का सौभाग्य प्रदान किया। सदन के अंदर हो या सदन के बाहर, दोनों ही स्थानों का उपयोग मैंने अपने क्षेत्र और बिहार की जनता की आवाज उठाने और उनकी समस्याओं के समाधान का मार्ग निकालने के लिए किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘बिहार विधानसभा के सदस्य के रूप में मुझे सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई वरिष्ठ विधायकों से बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। मैंने अपने क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण विषयों का समाधान जनता और कार्यकर्ताओं के सुझावों से ही निकाला है।’’

नवीन ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी ने जब मुझे बिहार सरकार के मंत्री के रूप में काम करने का अवसर दिया, तब मुझे कई अहम फैसलों, नीतियों और योजनाओं का क्रियान्वयन करने में सफलता मिली। इसके लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद व्यक्त करता हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने यह हमेशा कहा है कि जनता ने मुझे समस्याएं भी बताई, और उन समस्याओं के समाधान का रास्ता भी मुझे जनता ने हीं दिखाया। कार्यकर्ताओं ने मुझे भाई के रूप में, परिवार के सदस्य के रूप में और अभिभावक के रूप में उंगली पकड़कर आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। मैं पटना और बिहार की जनता को आश्वस्त करता हूं कि जो परिवार का भाव उन्होंने मुझे दिया है, उसका मैं सदैव सम्मान करता रहूंगा।’’

नवीन ने कहा, ‘‘पार्टी ने मुझे जो नयी भूमिका दी है, उसके माध्यम से भी मैं अपने क्षेत्र और बिहार के विकास के लिए सदैव तत्पर एवं संकल्पित रहूंगा। मेरे कार्यकर्ताओं और बिहार की जनता के साथ मेरा जो अटूट संबंध है, वह सदैव बना रहेगा और मुझे हमेशा नई ऊर्जा, प्रेरणा और मार्गदर्शन देता रहेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2047 के ‘विकसित भारत एवं विकसित बिहार’ बनाने के सपने को साकार करने की दिशा में मैं निरंतर प्रयासरत रहूंगा। ’’

कांग्रेस का कैप्टन को ‘घर वापसी’ का ऑफर: ईडी नोटिस के बाद गरमाई पंजाब की सियासत; बेटी बोली- ‘भाजपा में ही रहेंगे पिता’

पंजाब डेस्क : पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को लेकर राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा एक पुराने मामले में कैप्टन को समन (Notice) जारी किए जाने के बाद, कांग्रेस ने उन्हें पार्टी में वापस लौटने का न्योता दिया है।

भूपेश बघेल ने दिया ऑफर: कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने कैप्टन के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए उन्हें ‘घर वापसी’ का ऑफर दिया है। बघेल ने कहा कि यदि कैप्टन कांग्रेस में लौटने पर विचार करते हैं, तो पार्टी इस पर विचार कर सकती है, हालांकि अंतिम फैसला हाईकमान ही लेगा। उन्होंने कैप्टन को पंजाब की राजनीति का एक बड़ा और प्रभावशाली चेहरा बताया।

बेटी जय इंदर कौर का दो टूक जवाब: कांग्रेस की इस पेशकश पर कैप्टन अमरिंदर सिंह की बेटी और पंजाब भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष जय इंदर कौर ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि उनके पिता भाजपा में ही रहेंगे और कहीं नहीं जा रहे हैं। ईडी नोटिस पर उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब उन्हें नोटिस मिला है, और वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।

सियासी बयानबाजी और आरोप: कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने आरोप लगाया है कि जैसे ही कैप्टन ने पंजाब के मुद्दों और भाजपा की समझ पर सवाल उठाए, उन्हें ईडी का समन भेज दिया गया। उन्होंने इसे केंद्रीय एजेंसियों के जरिए दबाव बनाने की रणनीति करार दिया। दूसरी ओर, 84 वर्षीय कैप्टन अमरिंदर सिंह लगातार पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के गठबंधन की वकालत कर रहे हैं ताकि 2027 के चुनावों में मजबूती से उतरा जा सके।

कैप्टन का राजनीतिक सफर: कैप्टन अमरिंदर सिंह तीन बार पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष और दो बार मुख्यमंत्री रहे हैं। 2021 में मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी और अपनी नई पार्टी ‘पंजाब लोक कांग्रेस’ बनाई, जिसका सितंबर 2022 में उन्होंने भाजपा में विलय कर दिया था।