भारतीय औषध संहिता आयोग ने ब्राजील में विश्व औषध संहिताओं की 16वीं अंतर्राष्ट्रीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय औषध संहिता आयोग के एक प्रतिनिधिमंडल ने सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक, डॉ. वी. कलाइसेल्वन के नेतृत्व में, डॉ. पवन सैनी और डॉ. श्रुति रस्तोगी के साथ 15 से 17 जून के दौरान ब्राजील के ब्रासीलिया में आयोजित विश्व औषध संहिता की 16वीं अंतर्राष्ट्रीय बैठक और इससे संबंधित हितधारकों की बैठकों में हिस्सा लिया।
WHO के सहयोग से आयोजित इस बैठक में ब्राजीलियन फार्माकोपिया (ब्राजील), यूरोपीय फार्माकोपिया (यूरोप), भारतीय फार्माकोपिया (भारत), जापानी फार्माकोपिया (जापान), कोरियाई फार्माकोपिया (दक्षिण कोरिया), मैक्सिकन फार्माकोपिया (मेक्सिको), रूसी फार्माकोपिया (रूस), ब्रिटिश फार्माकोपिया (यूनाइटेड किंगडम), यूनाइटेड स्टेट्स फार्माकोपिया (संयुक्त राज्य अमेरिका), उज्बेकिस्तान गणराज्य की फार्माकोपिया (उज्बेकिस्तान), वियतनामी फार्माकोपिया (वियतनाम) और WHO की अंतर्राष्ट्रीय फार्माकोपिया सहित दुनिया भर की प्रमुख औषध संहिता आयोग के प्रतिनिधि एक मंच पर जुटे।
बैठक के दौरान, डॉ. कलाइसेल्वन ने भारतीय औषध संहिता पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने औषध संहिता मानकों में हालिया प्रगति, आधुनिकीकरण की पहल और औषधि गुणवत्ता मानकों के वैश्विक सामंजस्य में भारत के योगदान का उल्लेख किया। बैठक के दौरान हुई चर्चाओं से साबित हुआ कि भारतीय औषध संहिता के मानक अग्रणी अंतरराष्ट्रीय औषध संहिताओं के समकक्ष हैं। तपेदिक रोधी दवाओं, कैंसर रोधी दवाओं, रक्त और रक्त उत्पादों, एनीमिया में प्रयुक्त दवाओं और अन्य जटिल औषधीय अणुओं के लिए गुणवत्ता मानकों के विकास और स्थापना में भारत के नेतृत्व को भी सराहा गया। यह देश की बढ़ती वैज्ञानिक, नियामक और औषध संहिता संबंधी क्षमताओं को दर्शाता है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने आधुनिक सूक्ष्मजीव विज्ञान तकनीकों, औषध संहिता के अभिसरण और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण चर्चा में सक्रिय भागीदारी निभाई। हितधारकों की बैठक के दौरान, डॉ. कलाइसेल्वन ने विज्ञान-आधारित मानकों और नियामक सहयोग के माध्यम से जन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भारत की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता को सुनिश्चित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर भी चर्चा की। सम्मेलन में भारत की भागीदारी ने वैश्विक औषध संहिताओं के साथ सहयोग को और मजबूत किया। यह भी दर्शाया कि भारत अब दवाओं की वैश्विक गुणवत्ता मानकों को तय करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, जिससे विश्वभर के रोगियों को लाभ मिल रहा है।

