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कैबिनेट ने बिहार में NH-31 और NH-231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड के उन्नयन को मंजूरी दी, लागत ₹3,936 करोड़

दिल्ली / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने बिहार में एनएच-31 और एनएच-231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड (143.529 किलोमीटर) को बीओटी (टोल) मोड पर 3936.05 करोड़ रुपये की लागत से 4-लेन मानक में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है।

बिहार में एनएच-31 और एनएच-231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड के प्रस्तावित उन्नयन से खगड़िया, भागलपुर, कटिहार और पूर्णिया जिलों के शहरी क्षेत्रों में विद्यमान गंभीर भौगोलिक खामियों, तीखे मोड़ों और भीड़भाड़ की समस्या का समाधान होगा। इस परियोजना के अंतर्गत पूर्णिया शहर के लिए 6.729 किलोमीटर लंबा एक विस्तारित ग्रीनफील्ड बाईपास विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से औसत यात्रा गति बढ़ेगी, यात्रा का समय लगभग दो घंटे कम होगा और सड़क सुरक्षा, ईंधन दक्षता और वाहन परिचालन लागत में सुधार होगा। इससे क्षेत्रीय आवागमन और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

यह परियोजना पूरे बिहार में प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स नोड को निर्बाध रूप से जोड़ती है। इसके अतिरिक्त, उन्नत कॉरिडोर 5 पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों (1 टैक्सटाइल क्लस्टर, 2 मेगा फूड पार्क, 2 मत्स्य और समुद्री खाद्य पार्क) और 11 लॉजिस्टिक्स केंद्रों (4 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 1 हवाई अड्डा, 4 राष्ट्रीय राजमार्ग, 2 राष्ट्रीय राजमार्ग) से जुड़कर बहु-मोडल एकीकरण को बढ़ावा देगा, जिससे पूरे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही तेज हो सकेगी।

केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने उत्तर प्रदेश में 11,672 किलोमीटर लंबे


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की गुणवत्ता और रखरखाव की समीक्षा की

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त फीडबैक के आधार पर आज नई दिल्ली में आयोजित एक बैठक में उत्तर प्रदेश में 11,672 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता और रखरखाव की प्रगति की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अजय टमटा और श्री हर्ष मल्होत्रा ​​के साथ-साथ सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी और परियोजना के संवेदक उपस्थित थे।

समीक्षा के दौरान, श्री गडकरी ने टिकाऊ और कुशल राजमार्ग इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध कार्यान्वयन, गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन और उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि मजबूत सड़क नेटवर्क कनेक्टिविटी बढ़ाने, आर्थिक विकास को गति देने और यात्रियों की सुविधा में सुधार के लिए महत्वपूर्ण हैं।

श्री गडकरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे रोकथाम के उपायों को लागू करते हुए पूरे नेटवर्क में सड़क सुरक्षा और स्थायित्व बनाए रखने के लिए प्रभावी प्रत्‍युत्तर प्रणाली स्थापित करके मानसून की व्यापक तैयारियों को सुनिश्चित करें।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण- एनएचएआई ने पानीपत-जालंधर राजमार्ग परियोजना विवाद में मध्यस्थता दावों का सफलतापूर्वक बचाव किया

चंडीगढ़/सत्ता संदेश

रियायतधारकों के 8,375 करोड़ रुपये से अधिक के दावों और एनएचएआई द्वारा 2,888.64 करोड़ रुपये के प्रतिदावों से जुड़े दो प्रमुख मध्यस्थता मामलों का निपटारा एनएचएआई के पक्ष में 819.96 करोड़ रुपये की राशि के साथ हुआ

चंडीगढ़, 12 मई 2026: राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में सार्वजनिक धन बचाते हुए, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण-एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के पानीपत-जालंधर खंड से संबंधित दो प्रमुख मध्यस्थता मामलों में अपने पक्ष का सफलतापूर्वक बचाव किया है। इन विवादों में रियायतधारकों के राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के निष्पादन और संचालन से संबंधित एनएचएआई के विरुद्ध उच्च मूल्य दावे शामिल थे। दोनों मध्यस्थता मामलों में कथित सेवा समाप्ति भुगतान, टोल राजस्व हानि मुआवजा, परियोजना विस्तार लागत, मूल्य वृद्धि, रियायत अवधि विस्तार, परियोजना में देरी से हुई हानि और अन्य वित्तीय दावों सहित 8,375 करोड़ रुपये से अधिक के दावे किए गए थे।

व्यापक सुनवाई और संविदा प्रावधानों, तकनीकी रिकॉर्ड, साक्ष्यों और विशेषज्ञों की राय पर विस्तृत रुप से गौर करने के बाद, माननीय मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने एनएचएआई की कई महत्वपूर्ण दलीलों को सही ठहराते हुए उसके पक्ष में अंतिम निर्णय दिया।

पहली मध्यस्थता कार्यवाही में, रियायत समझौते के तहत टोल वसूली में कथित नुकसान, अवसर हानि, सेवा समाप्ति भुगतान और कार्यक्षेत्र में बदलाव संबंधी विवादों में 5,443 करोड़ रुपये से अधिक के क्षतिपूर्ति दावे किए गए थे। एनएचएआई ने इन दावों का जोरदार खंडन करते हुए कहा कि संविदात्मक की समाप्ति वैध थी और यह रियायतधारक की चूक और कमियों के कारण हुई।

विस्तृत अधिनिर्णय के बाद, माननीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने एनएचएआई के विरुद्ध मौद्रिक दावे खारिज कर दिए। न्यायाधिकरण ने अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन, परियोजना दायित्वों और व्यय देनदारियों से संबंधित एनएचएआई के कई प्रतिदावों और बचाव को भी स्वीकार किया। दावों और प्रतिदावों पर सुनवाई के बाद, न्यायाधिकरण ने अपने अंतिम निर्णय में एनएचएआई के पक्ष में ब्याज सहित लगभग 115.73 करोड़ रुपये का फैसला सुनाया।

दूसरे मध्यस्थता मामले में 2,931.79 करोड़ रुपये से अधिक के दावे में दावेदार ने परियोजना निष्पादन के दौरान कथित देरी से हुए नुकसान, लागत में बढ़ोतरी, परियोजना लंबा खींचने से संबंधित खर्च, निष्क्रियता लागत और अन्य वित्तीय प्रभावों के लिए मुआवजे की मांग की। एनएचएआई ने संविदात्मक अधिकार न होने, सहायक साक्ष्य अपर्याप्त होने, वजह बताने में विफल रहने और संविदात्मक प्रक्रियाओं तथा दस्तावेजी आवश्यकताओं के अनुपालन न करने का तर्क देते  हुए इन दावों का पूरी तरह विरोध किया।

मामले पर विचार के बाद, माननीय न्यायाधिकरण ने एनएचएआई के विरुद्ध दावों को काफी हद तक खारिज कर दिया और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रमुख प्रतिदावों को बरकरार रखा। राशि समायोजन और भरपाई के बाद, न्यायाधिकरण ने एनएचएआई के पक्ष में लगभग 704.23 करोड़ रुपये की राशि प्रदान करने का निर्णय दिया।

इससे पहले, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने गुजरात में एनएच-48 के कामरेज-चलथान खंड के छह लेन के निर्माण से संबंधित एक अन्य मध्यस्थता मामले का सफलतापूर्वक बचाव किया था, जिससे सार्वजनिक धन की काफी बचत हुई थी। ठेकेदार के लगभग 174.49 करोड़ रुपये के दावों पर मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने मामले के निपटान के लिए केवल 54 लाख रुपये का मुआवजा दिया था।

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना निष्पादन संबंधी मध्यस्थता मामलों में मिली सफलताओं से सार्वजनिक धन की सुरक्षा, संविदा दायित्वों का सख्त अनुपालन और एनएचएआई का सुसंगत दृष्टिकोण सुदृढ़ होता है।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोड वाहनों के लिए शुल्क को सरल बनाने हेतू संशोधन अधिसूचित किया

दिल्ली / सत्ता संदेश

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रह) चौथे संशोधन नियम, 2026 को अधिसूचित किया है। इनका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोड वाहनों के लिए प्रवर्तन को मजबूत करना और तर्कसंगत शुल्क संग्रह सुनिश्चित करना है।

संशोधित नियम 15 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे।

अधिसूचना के अनुसार, नियम 10 के अंतर्गत अनुमेय सकल वाहन भार (जीवीडब्ल्यू) से अधिक भार ले जाने वाले वाहनों पर शुल्क लगाने के लिए एक संशोधित प्रारूप प्रस्तुत किया गया है।

इस संशोधन का उद्देश्य निर्धारित भार सीमा के अनुपालन को बढ़ावा देना और राजमार्ग अवसंरचना की देखभाल करते हुए सड़क सुरक्षा को बढ़ाना है।

मुख्य विशेषताएं:

ओवरलोडिंग के लिए संशोधित शुल्क संरचना:

निर्धारित भार ले जाने वाले वाहनों पर ओवरलोडिंग के प्रतिशत के आधार पर शुल्क लगाया जाएगा:

10 प्रतिशत तक अतिरिक्त भार: ओवरलोड शुल्क नहीं।

10 प्रतिशत से अधिक और 40 प्रतिशत तक: मूल दर से दोगुनी दर पर शुल्क लिया जाएगा।

40 प्रतिशत से अधिक: मूल दर से चार गुना शुल्क लिया जाएगा

वैज्ञानिक तरीके से वजन मापन:

ओवरलोडिंग का निर्धारण शुल्क प्लाजा पर स्थापित प्रमाणित वजन मापन उपकरणों का उपयोग करके किया जाएगा।

वजन की सुविधा के बिना कोई शुल्क नहीं:

यदि शुल्क प्लाजा पर वजन करने की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो ओवरलोड शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

डिजिटल भुगतान अनिवार्य:

ओवरलोडिंग शुल्क केवल फास्‍टैग के माध्यम से ही वसूला जाएगा।

अनिवार्य रिपोर्टिंग:

अधिक भार वाले वाहनों का विवरण दर्ज किया जाएगा और राष्ट्रीय वाहन रजिस्टर (वाहन) को सूचित किया जाएगा।

फास्‍टैग अनुपालन:

वैध फास्‍टैग के बिना राष्ट्रीय राजमार्गों में प्रवेश करने वाले वाहनों पर वर्तमान नियमों के अंतर्गत लागू प्रावधान लागू होंगे।

प्रयोज्यता खंड:

ये प्रावधान प्रारंभ होने से पहले निष्पादित कुछ निजी निवेश परियोजनाओं पर लागू नहीं होंगे, जब तक कि रियायतग्राही संशोधित नियमों को अपनाने के लिए सहमति न दें।

नियमों में उदाहरण दिया गया है:

इस अधिसूचना में अनुमेय वजन सीमा के आधार पर वाहनों की विभिन्न श्रेणियों के लिए ओवरलोड शुल्क की गणना को स्पष्ट करने वाला एक विस्तृत विवरण शामिल है, जिससे कार्यान्वयन में स्पष्टता और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।

इस संशोधन से अनुपालन में सुधार होने, ओवरलोड वाहनों के कारण होने वाले सड़क नुकसान में कमी आने और राष्ट्रीय राजमार्गों पर माल की सुरक्षित और अधिक कुशल आवाजाही को बढ़ावा मिलने की आशा है और यह डब्ल्यूआईएम के साथ निर्बाध रूप से संचालित होगी।