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नियंत्रक संचार लेखा कार्यालय, पंजाब टेलीकॉम सर्किल, चंडीगढ़ में विधिक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के अंतर्गत आने वाले नियंत्रक संचार लेखा कार्यालय, पंजाब टेलीकॉम सर्किल, चंडीगढ़ में “विधिक ढांचा एवं न्यायालयीन मामलों का प्रभावी प्रबंधन” विषय पर एक विधिक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विधिक मामलों के प्रभावी निस्तारण, न्यायालयीन प्रक्रियाओं की समझ, समयबद्ध अनुपालन तथा सरकारी कार्यालयों में कानूनी विषयों के बेहतर प्रबंधन के संबंध में जागरूक करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्री विजेंद्र एन. टंडन, नियंत्रक संचार लेखा, पंजाब द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने सरकारी कार्यालयों में विधिक मामलों के समयबद्ध एवं प्रभावी प्रबंधन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को न्यायालयीन प्रक्रियाओं तथा विधिक अनुपालन के संबंध में उचित समझ, समन्वय एवं जागरूकता विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यशाला में अधिवक्ता श्री के. के. ठाकुर, भारत सरकार के वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता, मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), चंडीगढ़ तथा माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में मामलों के संचालन के अपने व्यापक अनुभव साझा किए तथा विभिन्न विधिक विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।

अपने व्याख्यान के दौरान उन्होंने न्यायालयीन मामलों के प्रभावी प्रबंधन, समयबद्ध उत्तर दाखिल करने, अवमानना याचिकाओं एवं रिट याचिकाओं के संचालन, अभिलेखों के उचित रख-रखाव, विभागीय समन्वय तथा विधिक प्रक्रियाओं के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि प्रभावी विधिक प्रबंधन से अनावश्यक वाद-विवाद एवं प्रशासनिक जटिलताओं को कम किया जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में श्री राजीव रंजन, वरिष्ठ लेखा अधिकारी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों के क्षमता निर्माण में निरंतर सहयोग एवं दूरदर्शी नेतृत्व हेतु श्री विजेंद्र एन. टंडन, नियंत्रक संचार लेखा, पंजाब का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अधिवक्ता श्री के. के. ठाकुर एवं सभी प्रतिभागियों का भी धन्यवाद किया तथा कहा कि यह कार्यशाला सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी सिद्ध हुई।

CCA पंजाब टेलीकॉम ने जालंधर में टलीकॉम आउटरीच कार्यक्रम का किया आयोजन

जालंधर / सत्ता संदेश

संचार मंत्रालय, दूरसंचार विभाग के अंतर्गत कार्यालय नियंत्रक संचार लेखा (CCA), पंजाब टेलीकॉम सर्किल द्वारा बुधवार को WMS, जालंधर में टेलीकॉम आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में शिवम कटियार, उप निदेशक, डब्ल्यूएमएस जालंधर ने सहभागिता की। ज्योति गोयल, सहायक नियंत्रक संचार लेखा, पंजाब, भारत कटारिया, सहायक लेखा अधिकारी तथा राजस्व अनुभाग के अन्य अधिकारी/कर्मचारी भी उपस्थित रहे। विभिन्न टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं (TSPs) एवं इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान राजस्व, लाइसेंस शुल्क ( एवं SARAS का अवलोकन, लाइसेंस अनुबंध की वित्तीय शर्तें तथा SARAS प्लेटफॉर्म एवं शिकायत निवारण तंत्र पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण टेलीकॉम लाइसेंसधारियों के साथ एक-से-एक संवाद सत्र रहा, जिसमें लाइसेंस शुल्क आकलन से संबंधित बकाया मामलों पर चर्चा की गई तथा प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया गया।

ज्योति गोयल, सहायक नियंत्रक संचार लेखा, पंजाब ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य TSPs एवं ISPs को लाइसेंस एवं वित्तीय शर्तों, भूमिकाओं एवं दायित्वों के प्रति जागरूक करना तथा नए एवं मौजूदा लाइसेंसधारियों को स्पष्टता प्रदान करना है। उन्होंने SARAS ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाइसेंस शुल्क भुगतान, दस्तावेज अपलोड, बैंक गारंटी मॉड्यूल तथा शिकायत निवारण प्रणाली की जानकारी भी साझा की। उन्होंने आश्वस्त किया कि सीसीए, पंजाब का कार्यालय सभी TSPs एवं ISPs, विशेषकर नए उद्यमियों को सहयोग प्रदान करने तथा पारदर्शी एवं कुशल दूरसंचार पारितंत्र सुनिश्चित करने हेतु प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम को प्रतिभागियों द्वारा सराहा गया तथा उन्होंने उपयोगी जानकारी एवं मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। प्रतिभागियों ने विजेन्द्र एन. टंडन, सीसीए पंजाब के नेतृत्व की भी सराहना की।

दूरसंचार विभाग, हरियाणा एलएसए द्वारा सिरसा, हरियाणा में सुरक्षित दूरसंचार प्रथाओं एवं साइबर धोखाधड़ी रोकथाम पर हितधारक कार्यशाला एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

सिरसा/ सत्ता संदेश

सिरसा दूरसंचार विभाग (DoT), हरियाणा एलएसए ने सिरसा पुलिस के सहयोग से टैगोर ऑडिटोरियम, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा में एक प्रभावी संवाद कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता श्री राधाचरण शाक्य, अतिरिक्त महानिदेशक दूरसंचार, हरियाणा एलएसए एवं श्री दीपक सहारण, पुलिस अधीक्षक (SP) सिरसा ने की। इस कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, दूरसंचार सेवा प्रदाता (TSP) के अधिकारी तथा जिले भर के प्वाइंट्स ऑफ सेल (PoS) शामिल थे। यह कार्यक्रम सुरक्षित दूरसंचार प्रथाओं को बढ़ावा देने एवं साइबर धोखाधड़ी के विरुद्ध सामूहिक प्रयासों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिरिक्त महानिदेशक, हरियाणा एलएसए ने राष्ट्र निर्माण एवं माननीय प्रधानमंत्री के डिजिटल भारत दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में सुरक्षित संचार की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने दूरसंचार सेवाओं के दुरुपयोग के माध्यम से बढ़ते साइबर धोखाधड़ी एवं ठगी के मामलों पर चिंता व्यक्त की और सभी हितधारकों द्वारा सतर्कता एवं सक्रिय उपाय अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए दूरसंचार विभाग द्वारा अपनाए गए विभिन्न तंत्रों की जानकारी दी, जिनमें अवैध गतिविधियों में संलिप्त मोबाइल नंबरों की पहचान एवं ट्रैकिंग हेतु सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (CEIR) तथा संचार साथी पोर्टल का उपयोग शामिल है। अतिरिक्त महानिदेशक ने यह भी बताया कि गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) तथा बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के सेवा केंद्रों के सहयोग से वित्तीय जोखिम संकेतक (FRIs) विकसित किए जा रहे हैं, जो दूरसंचार के दुरुपयोग से उत्पन्न संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की पहचान एवं चिन्हांकन में सहायक हैं।

नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग हेतु प्रमुख माध्यमों की जानकारी भी दी गई, जिनमें त्वरित रिपोर्टिंग के लिए 1930 हेल्पलाइन तथा www.cybercrime.gov.in पोर्टल शामिल हैं, जिससे समय पर हस्तक्षेप कर वित्तीय नुकसान से बचाव किया जा सकता है। प्रतिभागियों को सुरक्षित बैंकिंग एवं वित्तीय लेन-देन के लिए 1600 श्रृंखला के उपयोग के बारे में भी अवगत कराया गया तथा दूरसंचार सेवाओं के जिम्मेदार उपयोग एवं सतर्कता के महत्व पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में सिम प्राप्ति प्रक्रिया का भी विस्तार से विवरण दिया गया तथा PoS संचालकों एवं TSPs के लिए आवश्यक सावधानियों पर प्रकाश डाला गया, जिससे सिम के दुरुपयोग को रोका जा सके। संचार साथी प्लेटफॉर्म के अंतर्गत विभिन्न नागरिक-केंद्रित पहलों की जानकारी भी साझा की गई, जिनमें संदिग्ध कॉल एवं संदेशों की रिपोर्टिंग हेतु ‘चक्षु’, खोए/चोरी हुए मोबाइल को ब्लॉक करने की सुविधा, अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी, ‘नो योर मोबाइल हैंडसेट’ (KYM) तथा अंतरराष्ट्रीय कॉल ट्रैकिंग हेतु RICWIN शामिल हैं।

चर्चा के दौरान एसपी सिरसा ने नागरिकों की साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताओं के समाधान हेतु DoT की पहल की सराहना की तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs), TSPs एवं DoT के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कॉल्स, वर्चुअल कॉल्स एवं वीपीएन के दुरुपयोग से संबंधित मुद्दों पर भी सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की। DoT ने आश्वासन दिया कि इन मुद्दों का समाधान विधि के प्रचलित प्रावधानों के अंतर्गत पूर्ण क्षमता एवं समन्वय के साथ किया जाएगा।

कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें PoS संचालकों एवं पुलिस अधिकारियों के प्रश्नों का संतोषजनक समाधान किया गया। DoT ने जन-जागरूकता, निवारक उपायों एवं कानून प्रवर्तन एजेंसियों एवं सेवा प्रदाताओं के साथ समन्वित प्रयासों के माध्यम से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे एक सुरक्षित, विश्वसनीय एवं जिम्मेदार दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो सके।