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टिकाऊ सड़क पुनर्निर्माण और गड्ढों की मरम्मत के लिए CSIR-CRRI और MCD की रणनीतिक साझेदारी

दिल्ली / सत्ता संदेश

CSIR – केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान और दिल्ली नगर निगम के बीच 10 जून को सड़कों के कार्यात्मक और संरचनात्मक मूल्यांकन, निर्माण गुणवत्ता पर्यवेक्षण और एमसीडी के इंजीनियरों तथा कर्मचारियों की क्षमता निर्माण के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर, सीएसआईआर-सीआरआरआई द्वारा विकसित लौह और इस्पात स्लैग समुच्चय आधारित त्वरित गड्ढा मरम्मत तकनीक – इकोफिक्स के कार्यान्वयन के लिए एक द्विपक्षीय प्रौद्योगिकी प्रबंधन समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए।

इस साझेदारी का उद्देश्य वैज्ञानिक सड़क मूल्यांकन, गुणवत्ता आश्वासन और नवीन रखरखाव प्रौद्योगिकियों को अपनाते हुए दिल्ली के सड़क बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता, स्थायित्व और निरंतरता को बढ़ाना है।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए MCD आयुक्त संजीव खीरवार, आईएएस ने शहरी सड़क नियोजन और रखरखाव में प्रौद्योगिकी आधारित दृष्टिकोणों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह सहयोग एमसीडी की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करेगा और साथ ही इकोफिक्स जैसी तकनीकों के माध्यम से त्वरित और अधिक टिकाऊ मरम्मत को सक्षम बनाएगा।

CSIR- के निदेशक डॉ. चौधरी रवि शेखर ने अतिथिगणों का स्वागत करते हुए सड़क क्षेत्र में संस्थान के सात दशकों के योगदान पर प्रकाश डाला और कहा कि यह साझेदारी एमसीडी को सड़क मूल्यांकन, गुणवत्ता पर्यवेक्षण और टिकाऊ प्रौद्योगिकियों के कार्यान्वयन में तकनीकी सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने आगे कहा कि स्टील स्लैग रोड टेक्नोलॉजी- इकोफिक्स, रेजुपेव और एमएसएस+ जैसी प्रौद्योगिकियां संसाधन संरक्षण, चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों और कार्बन उत्सर्जन में कमी को बढ़ावा देती हैं।

इस पहल का नेतृत्व CSIR-CRRI के फ्लेक्सिबल पेवमेंट डिवीजन के प्रमुख सतीश पांडे कर रहे हैं, जो स्टील स्लैग रोड और इकोफिक्स तकनीक के आविष्कारक भी हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को सहयोग के उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक सड़क मूल्यांकन, गुणवत्ता पर्यवेक्षण और उन्नत रखरखाव तकनीकों को अपनाने से सड़क की उपयोगिता, टिकाऊपन और जीवनचक्र प्रदर्शन में सुधार होगा, साथ ही रखरखाव संबंधी व्यवधानों को भी कम किया जा सकेगा।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण इकोफिक्स के उपयोग के लिए प्रौद्योगिकी प्रबंधन समझौते पर हस्ताक्षर करना था। इकोफिक्स एक त्वरित और टिकाऊ गड्ढा मरम्मत तकनीक है जिसे संसाधित लोहे और इस्पात स्लैग एग्रीगेट का उपयोग करके विकसित किया गया है। यह तकनीक औद्योगिक उप-उत्पादों का उपयोग करके टिकाऊ सड़क रखरखाव के माध्यम से अपशिष्ट से धन-संपन्नता के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का समर्थन करती है, जिससे स्थायित्व में सुधार होता है और वायु प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय प्रभावों को कम किया जा सकता है। बेहतर सड़क स्थिति और समय पर रखरखाव से सड़क पर धूल का उत्पादन कम होने की उम्मीद है, जबकि इस्पात स्लैग और पुनर्चक्रण-आधारित तकनीकों का उपयोग प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देता है और चक्रीय अर्थव्यवस्था प्रथाओं का समर्थन करता है।

जैसलमेर के रामगढ़ में 20 किलोवाट आकाशवाणी एफएम ट्रांसमीटर का उद्घाटन, सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत होगी रेडियो पहुंच

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राजस्थान के जैसलमेर जिले के रामगढ़ में 20 किलोवाट क्षमता वाले आकाशवाणी एफएम ट्रांसमीटर का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम आकाशवाणी जयपुर परिसर से आयोजित किया गया।

नए ट्रांसमीटर के शुरू होने के साथ राजस्थान में एफएम ट्रांसमीटरों की कुल संख्या बढ़कर 39 हो गई है। रामगढ़ स्थित यह ट्रांसमीटर सीमावर्ती क्षेत्र में लगभग 80 किलोमीटर के दायरे में रेडियो कवरेज उपलब्ध कराएगा और जैसलमेर जिले के करीब 20 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करेगा। इससे क्षेत्र के लोगों को सूचनात्मक, शैक्षिक और मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रमों तक बेहतर पहुंच मिलेगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक के दौर में रेडियो प्रसारण को प्रासंगिक और प्रभावशाली बनाए रखने के लिए “डिजिटल फर्स्ट” और “हाइपर-लोकल” दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। उन्होंने प्रसार भारती के अधिकारियों को इस दिशा में एक व्यापक रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए।

उन्होंने प्रसारण सेवाओं में स्थानीय कलाकारों, लोक संस्कृति और शिल्पकारों को अधिक स्थान देने पर भी जोर दिया, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच मिल सके और क्षेत्रीय पहचान को मजबूती मिले।

अश्विनी वैष्णव ने जयपुर में विकसित किए जा रहे आगामी एआई डेटा सेंटर का भी उल्लेख किया और इसे भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

प्रसार भारती के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने कहा कि आकाशवाणी और दूरदर्शन जैसे संस्थान आज भी समाज की जड़ों से जुड़े हुए हैं और देश के दूरदराज क्षेत्रों तक सूचना पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये संस्थान जमीनी स्तर की आवाज को राष्ट्रीय मंच प्रदान करते हैं।

नया एफएम ट्रांसमीटर सीमावर्ती क्षेत्रों में आकाशवाणी और दूरदर्शन की पहुंच को मजबूत करेगा। यह पहल “कश्मीर से कच्छ” तक मजबूत प्रसारण अवसंरचना विकसित करने की परिकल्पना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में संचार और सूचना सेवाओं का विस्तार करना है।

कार्यक्रम में राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, जयपुर की सांसद मंजू शर्मा, आकाशवाणी के महानिदेशक राजीव कुमार जैन सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। वहीं जैसलमेर के सांसद उमेदराम बेनीवाल वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए।

IIT रोपड़ और RGNAU के बीच समझौता, ड्रोन तकनीक में शुरू होगा संयुक्त पीजी डिप्लोमा कार्यक्रम

यूएवी ऑपरेशंस और ड्रोन टेक्नोलॉजी में युवाओं को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण, शोध और कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ और राजीव गांधी नेशनल एविएशन यूनिवर्सिटी के बीच यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) ऑपरेशंस और ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कार्यक्रम शुरू करेंगे।

एमओयू पर आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रोफेसर राजीव आहूजा और आरजीएनएयू के कुलपति प्रोफेसर भृगु नाथ सिंह ने दोनों संस्थानों के शिक्षकों और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।

दो संस्थानों में होगा अध्ययन

संयुक्त पीजी डिप्लोमा कार्यक्रम के तहत पहले सेमेस्टर की पढ़ाई आरजीएनएयू में कराई जाएगी, जबकि दूसरे सेमेस्टर में विद्यार्थी आईआईटी रोपड़ में प्रशिक्षण और अध्ययन करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को ड्रोन और यूएवी तकनीक की गहन सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।

पाठ्यक्रम को इस प्रकार तैयार किया गया है कि छात्रों को ड्रोन संचालन, डिजाइन, तकनीकी अनुप्रयोग, सुरक्षा मानकों और उभरती विमानन तकनीकों की व्यापक समझ विकसित हो सके।

शोध और कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

इस अवसर पर प्रोफेसर राजीव आहूजा ने कहा कि यह साझेदारी ड्रोन तकनीक और यूएवी क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के नए अवसर उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थान मिलकर भविष्य की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।

दोनों संस्थानों ने तकनीकी शिक्षा, क्षमता निर्माण और ड्रोन क्षेत्र में अनुसंधान गतिविधियों को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

बढ़ती मांग को पूरा करेंगे प्रशिक्षित पेशेवर

भारत में ड्रोन और विमानन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। कृषि, रक्षा, निगरानी, लॉजिस्टिक्स, आपदा प्रबंधन और इंफ्रास्ट्रक्चर सर्वेक्षण जैसे क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह संयुक्त कार्यक्रम उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित और कुशल पेशेवर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यह पहल देश में ड्रोन इकोसिस्टम को मजबूत बनाने और युवाओं को उभरती तकनीकों में करियर के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

केंद्रीय मंत्री ने कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए सोलर कम्यूनिटी हब स्किल वैन को दिखाई हरी झंडी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत सरकार में कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री और शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने पांच नए सोलर कम्युनिटी हब स्किल वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह देश भर में डिजिटल पहुंच और भविष्य के लिए तैयार कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

डेल टेक्नोलॉजीज द्वारा राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के सहयोग से विकसित और लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन द्वारा कार्यान्वित यह पहल डिजिटल विभाजन को पाटने के डेल के सबसे महत्वाकांक्षी वैश्विक प्रयासों में से एक का अगला चरण है। ये स्किल वैन उत्तर प्रदेश, दिल्ली/एनसीआर, कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र के समुदायों की सेवा करेंगी। सौर ऊर्जा से चलने वाली प्रौद्योगिकी, एआई-सक्षम शिक्षा और रोजगार के अवसर सीधे युवाओं, महिलाओं और वंचित आबादी तक पहुंचाएंगी।

यह विस्तार बुनियादी डिजिटल साक्षरता से कहीं आगे जाता है। ये कौशल प्रशिक्षण वैन अनुकूलित कौशल मॉड्यूल और संरचित रोजगार मार्ग प्रदान करते हैं। जिससे 50 से अधिक व्यावसायिक, उच्च शिक्षा और सामुदायिक संस्थानों को प्रौद्योगिकी-आधारित सहायता मिलती है। प्रत्येक इकाई नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित है और लैपटॉप, इंटरैक्टिव स्क्रीन, इंटरनेट कनेक्टिविटी और एआई-सक्षम शिक्षण उपकरणों से सुसज्जित है जिन्हें समुदायों की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है, न कि बुनियादी ढांचे की उपलब्धता के अनुसार।

जयंत चौधरी ने कहा कि सोलर कम्युनिटी हब स्किल वैन भारत के हर कोने तक प्रौद्योगिकी और अवसरों को सुलभ बनाने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। ये स्किल वैन सिर्फ डिजिटल स्पेस से कहीं अधिक हैं, ये आकांक्षाओं के केंद्र हैं जो स्वच्छ ऊर्जा, एआई-सक्षम शिक्षा और उद्योग-अनुरूप कौशल विकास को मिलाकर युवाओं को उभरते अवसरों के लिए तैयार करते हैं।

डेल टेक्नोलॉजीज इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मनीष गुप्ता ने कहा कि डेल टेक्नोलॉजीज भारत के समावेशी, प्रौद्योगिकी-आधारित विकास के दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध है। सोलर कम्युनिटी हब स्किल वैन इस बात का प्रमाण हैं कि जब सरकार, उद्योग और समुदाय एक साझा मिशन के लिए एकजुट होते हैं तो क्या संभव हो सकता है। ये स्किल वैन शिक्षार्थियों और कामगारों की एक नई पीढ़ी को उनके अपने समुदायों में ही भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करेंगी।

इन कौशल प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से प्रदान किया जाने वाला प्रशिक्षण उभरती बाजार मांगों के अनुरूप है, जो प्रतिभागियों को न केवल मौजूदा भूमिकाओं के लिए बल्कि भविष्य में सृजित होने वाली भूमिकाओं के लिए भी तैयार करता है।

भारत में वित्त वर्ष 2023 में पहली सोलर कम्युनिटी हब स्किल वैन शुरू होने के बाद से, यह कार्यक्रम 14 राज्यों के 18 जिलों तक पहुंच चुका है और इससे 26.7 लाख लाभार्थियों को सीधा लाभ मिला है। वैश्विक स्तर पर, यह पहल 12 देशों में 63 स्किल वैन संचालित करती है।

ट्राई ने चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला शहरी क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की गुणवत्ता का आकलन किया

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने अप्रैल 2026 के महीने में चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला शहरी क्षेत्र (पंजाब एलएसए ) में किए गए स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट (आईडीटी) निष्कर्ष सामान्‍य दूरसंचार उपभोक्‍ताओं की जानकारी के लिए जारी किए। ड्राइव टेस्ट का उद्देश्य दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) द्वारा प्रदान की जाने वाली मोबाइल नेटवर्क सेवाओं (वॉयस और डेटा दोनों) की वास्तविक समय गुणवत्ता का आकलन और सत्यापन करना है। आईडीटी के दौरान, ट्राई द्वारा कवरेज, कॉल ड्रॉप रेट (सीडीआर), कॉल सेटअप सक्‍सेज रेट (सीएसएसआर), डाटा डाउनलोड (डीएल) और अपलोड (यूएल) थ्रूपुट आदि जैसे प्रमुख गुणवत्ता (क्यूओएस) पैरामीटरों को दर्ज किया जाता है और उन्‍हे उपभोक्ताओं की सूचना के लिए और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रकाशित किया जाता है ताकि दूरसंचार सेवा प्रदाता अपनी सेवाओं में सुधार कर सकें।  

  1. ये आईडीटी शहरों, हॉटस्पॉट, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों आदि जैसे विविध उपयोग वाले वातावरण में सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के ऑनग्राउंड मोबाइल नेटवर्क प्रदर्शन को कैप्चर करने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं। इस प्रकार के ड्राइव परीक्षण में, 2G, 3G, 4G और 5G नेटवर्क पर सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के सिम कार्ड का उपयोग करके लाइव डेटा और वॉयस सैशन स्थापित किए जाते हैं। कई उन्नत परीक्षण हैंडसेट का उपयोग किया जाता है, और उन्नत सॉफ्टवेयर सिस्टम का उपयोग करके वास्तविक समय में सत्रों की निगरानी और विश्लेषण किया जाता है।
  1. ट्राई ने अपनी नियुक्त एजेंसी के माध्यम से पंजाब एलएसए में 6 अप्रैल 2026 से 10 अप्रैल 2026 के दौरान चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला शहरी क्षेत्र में 453.2 किलोमीटर के सिटी ड्राइव टेस्ट, 15 हॉटस्पॉट लोकेशंस और 1.5 किलोमीटर के वॉक टेस्ट किए। ये टेस्ट भादूविप्रा के क्षेत्रीय कार्यालय, जयपुर की देखरेख में किए गए। ड्राइव टेस्ट रिपोर्ट में प्रस्तुत अवलोकन ड्राइव टेस्ट आयोजित करने के दिन/समय पर परीक्षण के तहत क्षेत्र/मार्ग पर दूरसंचार सेवा प्रदाता के प्रदर्शन को दर्शाते हैं।
  1. ड्राइव टेस्ट रूट मैप : निम्नलिखित मानचित्र, मानचित्र पर दिखाए गए रास्‍ते के अनुसार, सिटी ड्राइव, इंटर-ऑपरेटर कॉलिंग, हॉटस्पॉट और वॉक टेस्ट को इंगित करने वाले ड्राइव टेस्ट मार्गों को बताता है: –
  1.   प्रमुख मूल्‍यांकित मानदंड: 
  1. कवरेज गैप : नमूनों का प्रतिशत, जिनका सिग्नल स्ट्रेंथ संबंधित तकनीक (2G/3G/4G/5G) के लिए न्यूनतम निर्धारित सिग्नल स्ट्रेंथ  से कम पाया गया । 
  2.  वॉयस सर्विसेज : कॉल सैट अप सक्‍सेज रेट (CSSR), ड्रॉप कॉल रेट (DCR), कॉल सेटअप टाइम, कॉल साइलेंस रेट, स्‍पीच क्‍वालिटी (MOS).
  3. कॉल साईलेंस इंस्‍टांस: कॉल के दौरान कितनी कॉल साइलेंस इंस्टेंस हुईं। 
  4. डाटा सर्विसेज : डाउनलोड/अपलोड थ्रूपुट, लेटेंसी, जिटर, पैकेट ड्राप रेट.
  1. प्रमुख मापदंडों के लिए चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला शहरी क्षेत्र में समग्र मोबाइल नेटवर्क प्रदर्शन का सारांश नीचे दिया गया है: 
  1. कवरेज गैप – ऑटो-सिलेक्शन मोड (5G/4G/3G/2G) में ड्राइव टेस्ट रूट पर वॉयस टेस्टिंग के दौरान लिए गए खराब सिग्नल वाले नमूनों से कुल नमूनों का अनुपात, Airtel के लिए 97/63149, BSNL के लिए 7755/61140, RJIL के लिए 356/59297 और VIL के लिए 382/62915 रहा। कवरेज गैप का विवरण संलग्न मानचित्र में दर्शाया गया है। 
  2. ड्राप्‍ड कॉल्‍स– ड्रॉप कॉल की संख्या से सफलतापूर्वक स्थापित कॉल की संख्या का अनुपात, Airtel के लिए 0/566, BSNL के लिए 24/534, RJIL के लिए 4/554 और VIL के लिए 2/542 रहा। ड्रॉप किए गए कॉल स्थानों का विवरण संलग्न मानचित्र में दर्शाया गया है।
  1. कॉल साईलेंस इंस्‍टांस – 3 सेकंड से ज्यादा के लिए पाई गई साइलेंस इंस्टेंस  की संख्या का स्थापित कुल कॉल से अनुपात, Airtel के लिए 7/543, BSNL के लिए 16/447, RJIL के लिए 9/551 और VIL के लिए 3/552 रहा। कॉल साइलेंस इंस्टेंस स्थानों का विवरण संलग्न मानचित्र में दर्शाया गया है।

घ) डाटा डाउनलोड एवं अपलोड थ्रूपुट :

  1. डाटा डाउनलोड थ्रूपुट (समग्र): Airtel (5G/4G) के लिए औसत डाउनलोड स्पीड 169.66Mbps, BSNL(4G/3G/2G) के लिए 11.00Mbps, RJIL(5G/4G) के लिए 203.16Mbps और VIL(5G/4G/2G) के लिए 48.27Mbps मापी गई। डाउनलोड थ्रूपुट का विवरण संलग्न मानचित्र में दर्शाया गया है। 
  1. डाटा अपलोड थ्रूपुट (समग्र): Airtel (5G/4G), के लिए औसत अपलोड स्पीड 23.28 Mbps, BSNL (4G/3G/2G) के लिए 4.96Mbps, RJIL (5G/4G), के लिए 23.85Mbps और VIL (5G/4G/2G) के लिए 17.97Mbps मापी गई। अपलोड थ्रूपुट का विवरण संलग्न मानचित्र में दर्शाया गया है। 

मानचित्र पर लाल बिंदु पर क्लिक करके ड्रॉप कॉल और कॉल साइलेंस की स्थिति देखी जा सकती है।

  1. आईडीटी के दौरान ड्राइव टेस्ट मार्ग और कवर किए गए क्षेत्र का विवरण इस प्रकार है: 

शहर:  चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला अरबन एरिया में चंडी मंदि‍र, पंचकूला, जीरकपुर, डेरा बस्सी, डप्पर, अजीजपुर, गमाडा एयरोसिटी, तंगोरी, चोलता खुर्द, मोरिंडा, कुराली, खरड़, न्यू चंडीगढ़, नयागांव,          सेक्टर-15, सेक्टर-42, साहिबजादा अजीत सिंह नगर, ग्रेटर मोहाली, सेक्टर-68, सेक्टर-46, सेक्टर-27 इंडस्ट्रियल एरि‍या फेज-I, II आदि शामिल हैं। 

  1. आईडीटी के निष्कर्षों के बारे में सभी संबंधित दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को उनके स्‍तर पर  आवश्‍यकता के अनुसार (यदि हो) आवश्‍यक कार्रवाई करने के लिए सूचित किया जा चुका है। ड्राइव टेस्‍ट की विस्तृत रिपोर्ट ट्राई की वेबसाइट www.trai.gov.in पर उपलब्ध है। अतिरिक्‍त जानकारी के लिए ट्राई क्षेत्रीय कार्यालय, जयपुर से ईमेल adv.jaipur@trai.gov.in या दूरभाष सं 0141-2701919 पर संपर्क किया जा सकता है।                     
रुद्रपुर, हल्द्वानी और काशीपुर में TRAI ने परखी मोबाइल नेटवर्क की गुणवत्ता, सेवाओं का किया विस्तृत आकलन

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण- ट्राई ने रुद्रपुर शहर में गदरपुर, दिनेशपुर, जयनगर, खेमपुर/खानपुर, बिंद्ट खेड़ा, रुद्रपुर, बिलहरा, लालपुर और किच्छा तथा हल्द्वानी शहर में काठगोदाम, हलद्वानी, ट्रांसपोर्ट नगर, गोरापड़ाव और मोटाहल्दू तथा काशीपुर शहर में प्रतापपुर, कचनालगाजी, काशीपुर, धमार खेड़ा, रामनगर, ढकिया कलां, सुल्तानपुर और पट्टी कलां में मोबाइल नेटवर्क गुणवत्ता जांच की।

ट्राई ने उत्तर प्रदेश लाइसेंस सेवा क्षेत्र – यूपीडब्ल्यू एलएसए के तहत अप्रैल 2026 में रुद्रपुर, हल्द्वानी और काशीपुर शहरों में आयोजित स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट- आईडीटी के निष्कर्ष से दूरसंचार उपभोक्ताओं को अवगत कराने के लिए इसे जारी किया है। इस ड्राइव टेस्ट का उद्देश्य दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रदान की जाने वाली मोबाइल नेटवर्क सेवाओं (वॉयस और डेटा दोनों) की वास्तविक समय गुणवत्ता आकलन और इसका सत्यापन करना है। स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट के दौरान, ट्राई, कॉल ड्रॉप रेट, कॉल सेटअप सक्सेस रेट, डेटा डाउनलोड और अपलोड प्रदर्शन आदि प्रमुख सेवा गुणवत्ता मापदंडों के लिए दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के प्रदर्शन को रिकॉर्ड करता है, जिन्हें बाद में उपभोक्ताओं को सूचित करने और सेवा प्रदाताओं को अपनी सेवा में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु प्रकाशित किया जाता है।

इंटरनल डेटा टेस्टिंग डिवाइस को शहरों, भीडभाड वाले सार्वजनिक स्‍थलों, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों आदि विभिन्न उपयोग परिवेशों में सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के मोबाइल नेटवर्क प्रदर्शन आकलन के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस प्रकार के ड्राइव टेस्टिंग में, 2जी, 3जी, 4जी और 5जी नेटवर्क पर सभी सेवा प्रदाताओं के सिम कार्ड का उपयोग कर लाइव डेटा और वॉयस सेशन किए जाते हैं। इसमें कई उन्नत टेस्ट हैंडसेट का इस्‍तेमाल किया जाता है, और उन्नत सॉफ्टवेयर सिस्टम का उपयोग कर इस पूरे कार्य की वास्तविक समय में निगरानी और विश्लेषण किया जाता है।

ट्राई ने अपनी निर्धारित एजेंसी के माध्यम से 6 अप्रैल 2026 से 9 अप्रैल 2026 के दौरान उत्तर प्रदेश पश्चिमी क्षेत्र में रुद्रपुर, हल्द्वानी और काशीपुर शहरों में 408 किलोमीटर (सिटी ड्राइव), 14 हॉटस्पॉट स्थानों और 3.2 किलोमीटर (वॉक टेस्ट) संचालित किया। ये परीक्षण ट्राई के भोपाल स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के परिवीक्षण में किए गए। ड्राइव टेस्ट रिपोर्ट में प्रस्तुत अवलोकन, ड्राइव टेस्ट के दिन/समय पर परीक्षण क्षेत्र/मार्ग पर दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के प्रदर्शन दर्शाते हैं।

IIFT में ग्लोबल बिजनेस रिसर्च कॉन्फ्रेंस 2026 का शुभारंभ, वैश्विक व्यापार चुनौतियों पर मंथन

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) में ग्लोबल बिजनेस रिसर्च कॉन्फ्रेंस (GBRC) 2026 का उद्घाटन किया। “वैश्विक उथल-पुथल के बीच व्यापार प्रबंधन” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविद, नीति निर्माता, शोधकर्ता और उद्योग विशेषज्ञ शामिल हुए।

अपने संबोधन में जितिन प्रसाद ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत व्यापार, विनिर्माण, नवाचार और नई तकनीकों के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर और वैश्विक व्यापार साझेदारियों में भारत की प्रगति इसकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका को दर्शाती है।

उन्होंने IIFT जैसे संस्थानों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्थान शोध आधारित सुझावों के माध्यम से नीति निर्माण और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

IIFT के कुलपति प्रो. राकेश मोहन जोशी ने कहा कि वैश्विक व्यापार, भू-राजनीतिक बदलाव और तकनीकी विकास दुनिया की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और शिक्षाविदों के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देना है।

AI, व्यापार और शिक्षा पर विशेष चर्चा

सम्मेलन में बिजनेस स्कूलों के अंतरराष्ट्रीयकरण, प्रबंधन शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग, भू-राजनीतिक चुनौतियों और उच्च शिक्षा में नवाचार जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

इसके अलावा वित्त, मार्केटिंग, रणनीति, वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, सूचना प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक नीति जैसे विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

BRICS देशों की भूमिका पर विशेष सत्र

सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण “बहुध्रुवीय दुनिया में भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच ब्रिक्स” विषय पर विशेष चर्चा है। इसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में BRICS देशों की बदलती भूमिका पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

शोधार्थियों को मिलेगा बड़ा मंच

कॉन्फ्रेंस में डॉक्टरेट शोधार्थियों के लिए विशेष संगोष्ठी भी आयोजित की गई है, जहां उन्हें वरिष्ठ शिक्षाविदों और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

देश के प्रमुख संस्थानों की भागीदारी

इस सम्मेलन में IIM, IIT बॉम्बे, ISB, MDI गुरुग्राम, BIMTECH, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, IIMC, IILM यूनिवर्सिटी और जिंदल ग्लोबल बिजनेस स्कूल सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के कुलपति, निदेशक और शिक्षाविद भाग ले रहे हैं।

5 जून को होगा समापन

दो दिवसीय सम्मेलन का समापन 5 जून 2026 को होगा। समापन समारोह में सम्मेलन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी और विभिन्न श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र, सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति और सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरेट शोध पत्र को सम्मानित किया जाएगा।

भारत-दक्षिण अफ्रीका ने एआई, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण में सहयोग बढ़ाने पर जताई सहमति

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और दक्षिण अफ्रीका ने भविष्य की प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देने पर सहमति व्यक्त की है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल अवसंरचना, उन्नत विनिर्माण, जैव प्रौद्योगिकी और नवाचार आधारित साझेदारी दोनों देशों के संबंधों के अगले चरण की प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में उभरकर सामने आई हैं।

यह सहमति केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और दक्षिण अफ्रीका की विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार उपमंत्री डॉ. नोमालुंगेलो जीना के बीच नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में आयोजित उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक के दौरान बनी। बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ वैज्ञानिक, नीति निर्माता और अधिकारियों ने भाग लिया।

नवाचार आधारित साझेदारी पर जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंधों को पारंपरिक अनुसंधान सहयोग से आगे बढ़ाकर नवाचार-संचालित साझेदारी में बदलने की आवश्यकता है, जो आर्थिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक प्रभाव पैदा कर सके।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास पूरक क्षमताएं हैं, जिनका उपयोग कर विकासशील देशों के लिए किफायती, समावेशी और विस्तार योग्य तकनीकी समाधान विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप्स, नवाचार एजेंसियों और उद्योग जगत के बीच गहन सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

एआई, क्वांटम तकनीक और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर फोकस

बैठक के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर-भौतिक प्रणालियां, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और स्टार्टअप आधारित नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल है और राष्ट्रीय स्तर पर चल रही विभिन्न तकनीकी पहलों के कारण अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर पैदा हुए हैं।

उन्होंने कहा कि विज्ञान का उद्देश्य केवल शोध तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे ऐसे समाधानों में परिवर्तित किया जाना चाहिए जो लोगों के जीवन को बेहतर बनाएं, रोजगार सृजित करें और अर्थव्यवस्था को मजबूती दें।

स्वास्थ्य, जैव प्रौद्योगिकी और वैक्सीन अनुसंधान में नए अवसर

दोनों देशों ने जैव प्रौद्योगिकी, जीनोमिक्स, टीका विकास, स्वास्थ्य तकनीकों और महामारी तैयारी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कोविड-19 महामारी के अनुभव ने मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों और वैज्ञानिक साझेदारियों की आवश्यकता को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन निर्माण, किफायती स्वास्थ्य तकनीक और जैव प्रौद्योगिकी में भारत की विशेषज्ञता दक्षिण अफ्रीका के साथ सहयोग के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।

उन्नत विनिर्माण और डिजिटल तकनीकों में साझेदारी

बैठक में उन्नत सामग्री, विनिर्माण, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी और डिजिटल अवसंरचना को भारत-दक्षिण अफ्रीका संयुक्त समिति के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया। दोनों पक्षों ने वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच संवाद बढ़ाकर इन क्षेत्रों में ठोस परियोजनाएं विकसित करने पर सहमति व्यक्त की।

दक्षिण अफ्रीका ने नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, स्वास्थ्य विज्ञान, डिजिटल तकनीक, कौशल विकास और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई।

खगोल विज्ञान में सहयोग की समीक्षा

बैठक के दौरान दोनों देशों ने खगोल विज्ञान के क्षेत्र में चल रहे सहयोग की भी समीक्षा की। डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्क्वायर किलोमीटर ऐरे (SKA) परियोजना को 21वीं सदी की सबसे महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक पहलों में से एक बताते हुए कहा कि यह वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना से वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग, तकनीकी नवाचार और मानव संसाधन विकास को बढ़ावा मिलेगा।

ब्रिक्स और वैश्विक दक्षिण की भूमिका

डॉ. जितेंद्र सिंह ने दक्षिण अफ्रीका को अगस्त 2026 में चेन्नई में आयोजित होने वाली ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्रिस्तरीय बैठक में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सहयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग, जल संसाधन प्रबंधन और सटीक कृषि जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार के नए अवसर प्रदान कर रहा है।

वहीं, दक्षिण अफ्रीका ने भारत को साइंस फोरम साउथ अफ्रीका-2026 में भाग लेने का निमंत्रण दिया, जो अफ्रीका के प्रमुख वैज्ञानिक संवाद मंचों में से एक माना जाता है।

30 वर्षों से मजबूत वैज्ञानिक साझेदारी

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग की नींव वर्ष 1995 में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समझौते से पड़ी थी। तब से दोनों देश खगोल विज्ञान, स्वास्थ्य विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, भूविज्ञान और उन्नत सामग्रियों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं।

दोनों देशों ने अब तक लगभग 150 सह-वित्तपोषित अनुसंधान परियोजनाओं को समर्थन दिया है और भविष्य में इस सहयोग को और व्यापक बनाने पर सहमति जताई है।

बैठक का समापन इस साझा संकल्प के साथ हुआ कि भारत और दक्षिण अफ्रीका अनुसंधान उत्कृष्टता, प्रौद्योगिकी विकास, स्टार्टअप सहयोग और वैज्ञानिक आदान-प्रदान के माध्यम से एक मजबूत एवं भविष्य उन्मुख नवाचार साझेदारी का निर्माण करेंगे, जो दोनों देशों के विकास के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं को भी नई दिशा देगी।

Triumph 400 सीरीज हुई महंगी: बाइक की कीमतों में ₹5,000 तक का इजाफा, देखें सभी मॉडलों की नई प्राइस लिस्ट

गैजेट डेस्क: अगर आप ट्रायम्फ (Triumph) की दमदार 400cc सीरीज की बाइक खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपकी जेब पर अब थोड़ा ज्यादा बोझ पड़ने वाला है। कंपनी ने भारत में अपनी लोकप्रिय मोटरसाइकिल रेंज की कीमतों में 2,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है।इन मॉडलों की बढ़ी कीमतें यह बदलाव ट्रायम्फ की 350cc और 400cc मोटरसाइकिल रेंज के सभी चार प्रमुख मॉडलों पर लागू किया गया है।

स्पीड टी4 (Speed T4): इस मॉडल की कीमत में 4,000 रुपये की वृद्धि हुई है। अब यह 1.95 लाख रुपये के बजाय 1.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम, दिल्ली) में मिलेगी। लॉन्च के बाद से इस मॉडल की कीमत में यह पहली बार बदलाव किया गया है।

स्पीड 400 (Speed 400): इसमें 2,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिससे इसकी नई कीमत 2.34 लाख रुपये हो गई है।

स्क्रैम्बलर 400 एक्ससी (Scrambler 400 XC): इसकी कीमत 5,000 रुपये बढ़कर अब 2.94 लाख रुपये हो गई है।

थ्रक्सटन 400 (Thruxton 400): इस मॉडल की कीमत में भी 5,000 रुपये का इजाफा हुआ है, और अब इसकी नई कीमत 2.70 लाख रुपये है।

इंजन और परफॉर्मेंस: कीमतों में बदलाव के साथ ही इंजन आउटपुट में भी कुछ अंतर देखे गए हैं। स्पीड टी4 अब 29 hp की पावर और 31 Nm का टॉर्क जनरेट करती है। वहीं, स्पीड 400 और स्क्रैम्बलर 400 XC अब 37 hp की पावर देती हैं, जबकि थ्रक्सटन 400 40 hp की पावर के साथ रेंज में सबसे ऊपर है।

लोकप्रियता बरकरार: भारत में ट्रायम्फ की ये बाइक्स अपने शानदार डिजाइन और दमदार परफॉर्मेंस के कारण काफी लोकप्रिय हैं। हालांकि अब इन्हें खरीदने के लिए ग्राहकों को पहले के मुकाबले अधिक पैसे खर्च करने होंगे, फिर भी एक्सपर्ट्स इसे बाजार में एक अच्छा विकल्प मान रहे हैं।

मेटा का बड़ा धमाका: अब वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और फेसबुक चलाने के लिए देने होंगे पैसे; लॉन्च हुए ‘Plus’ प्लान

टेक डेस्क: सोशल मीडिया दिग्गज Meta ने एक क्रांतिकारी बदलाव करते हुए फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप के लिए नए पेड सब्सक्रिप्शन प्लान यानी ‘प्लस वर्जन’ (Plus Version) पेश कर दिए हैं। कंपनी ने यह कदम रेवेन्यू बढ़ाने के लिए उठाया है ताकि वह केवल विज्ञापनों पर निर्भर न रहे।

कितनी होगी इन प्लान्स की कीमत? मेटा ने फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों का खुलासा किया है:

इंस्टाग्राम और फेसबुक प्लस: 3.99 डॉलर (लगभग 387 रुपये) प्रति माह।

वॉट्सऐप प्लस: 2.99 डॉलर (लगभग 290 रुपये) प्रति माह।भारत के लिए अभी विशेष कीमतों का ऐलान होना बाकी है।पैसे देने पर मिलेंगे ये खास फीचर्स:

वॉट्सऐप प्लस (WhatsApp Plus): सब्सक्राइबर्स को कस्टम थीम, यूनिक रिंगटोन, प्रीमियम स्टिकर्स और अधिक चैट्स को पिन करने की सुविधा मिलेगी।

इंस्टाग्राम और फेसबुक प्लस: यूजर्स देख सकेंगे कि उनकी स्टोरी कितनी बार दोबारा देखी गई है। इसके अलावा, स्टोरी को 24 घंटे से ज्यादा समय तक दिखाने और बिना व्यूअर्स लिस्ट में आए दूसरों की स्टोरी देखने (प्रीव्यू) जैसे एडवांस फीचर्स भी मिलेंगे।

AI और बिजनेस के लिए भी नए प्लान: मेटा ने केवल सोशल मीडिया ही नहीं, बल्कि AI और बिजनेस यूजर्स के लिए भी ‘Meta One’ नाम से प्लान पेश किए हैं। इसमें मेटा वन प्लस ($7.99) और मेटा वन प्रीमियम ($19.99) शामिल हैं, जो उन लोगों के लिए हैं जो इमेज और वीडियो बनाने के लिए मेटा AI का भारी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, सामान्य यूजर्स के लिए मेटा AI चैटबॉट का फ्री इस्तेमाल जारी रहेगा।