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Save the Fields Campaign 2026 : 22 अक्टूबर से शुरू होगा खेत बचाओ अभियान, किसानों को आधुनिक खेती के प्रति किया जाएगा जागरूक

खेत बचाओ अभियान 2026 के तहत किसानों को टिकाऊ खेती, फसल अवशेष प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, जल संरक्षण और केंद्र सरकार की किसान कल्याण योजनाओं के प्रति जागरूक किया जाएगा।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आगामी ‘खेत बचाओ अभियान 2026’ की तैयारियों को लेकर विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की। यह अभियान 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक चलाया जाएगा। बैठक में अभियान की रणनीति, प्रमुख गतिविधियों और किसानों की भागीदारी बढ़ाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, उत्तराखंड, राजस्थान, असम, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, बिहार और महाराष्ट्र के कृषि मंत्रियों ने भाग लिया। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव अतिश चंद्रा तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट भी बैठक में उपस्थित रहे।

शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्यों से अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने और किसानों तक इसकी जानकारी पहुंचाने के लिए सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अभियान केवल औपचारिकता बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके माध्यम से किसानों को वास्तविक लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन को आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी करने तथा राज्य और जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने पर भी जोर दिया।

टिकाऊ खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों पर रहेगा जोर

खेत बचाओ अभियान 2026 के अंतर्गत किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों, फसल अवशेष प्रबंधन, एकीकृत कीट प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य सुधार और जलवायु-अनुकूल खेती के बारे में जागरूक किया जाएगा। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, कृषि यंत्रीकरण, फसल विविधीकरण, अंतरफसली खेती, जल संरक्षण और उर्वरकों के संतुलित उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

अभियान में तिलहन और दलहन फसलों को बढ़ावा देने, धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों का बेहतर उपयोग करने तथा कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। किसानों को किसान पहचान पत्र (फार्मर आईडी), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, बीज वितरण और मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी पहलों की जानकारी दी जाएगी।

लाखों किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य

बैठक में प्रस्तुत योजना के अनुसार, कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (ATMA) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के माध्यम से 50-50 लाख प्रतिभागियों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। कृषि विज्ञान केंद्रों और ATMA को मिलाकर 4,150 टीमों के गठन का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।

अभियान के दौरान कृषि वैज्ञानिक और कृषि विस्तार कार्यकर्ता किसानों के साथ सीधे संवाद करेंगे। उन्नत कृषि तकनीकों का प्रदर्शन, प्रशिक्षण कार्यक्रम और वैज्ञानिकों के साथ चर्चा के माध्यम से किसानों को व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। अभियान की अवधि में कुल 1.5 लाख बैठकों का लक्ष्य रखा गया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्यों, जिला प्रशासन, कृषि वैज्ञानिकों और अन्य संबंधित संस्थानों से मिलकर काम करने का आह्वान किया। अभियान के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने तथा टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।

HBCHRC Punjab में पहला सफल स्टेम सेल ट्रांसप्लांट, 17 साल की बहन ने भाई को दिया जीवनदान

न्यू चंडीगढ़ के HBCH&RC में पहला सफल एलोजेनिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट हुआ। 17 वर्षीय बहन ने ल्यूकेमिया से जूझ रहे 10 वर्षीय भाई को स्टेम सेल दान कर नया जीवन दिया।

न्यू चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (HBCH&RC), न्यू चंडीगढ़ ने एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल में पहली बार सफलतापूर्वक एलोजेनिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया गया। इस उपचार के जरिए 17 वर्षीय बहन ने ब्लड कैंसर से जूझ रहे अपने 10 वर्षीय भाई को अपने स्टेम सेल दान कर नया जीवन दिया।

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर निवासी 10 वर्षीय बच्चे को इस वर्ष अप्रैल में एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (ALL) के दूसरे रिलैप्स का पता चला था। बीमारी दोबारा लौटने के बाद परिवार बेहतर उपचार के लिए पंजाब पहुंचा और बच्चे को परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार के तहत टाटा मेमोरियल सेंटर की इकाई HBCH&RC में भर्ती कराया गया।

अस्पताल में बच्चे को गहन कीमोथेरेपी दी गई, जिसके बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ। हालांकि, बीमारी के दोबारा लौटने के अधिक जोखिम को देखते हुए डॉक्टरों ने एलोजेनिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट को आगे के उपचार के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प माना।

एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट में मरीज की बीमार रक्त-निर्माण प्रणाली को किसी अन्य व्यक्ति से प्राप्त स्वस्थ रक्त-निर्माण स्टेम सेल से बदला जाता है। इस मामले में विस्तृत डोनर मूल्यांकन के बाद बच्चे की 17 वर्षीय बड़ी बहन को सबसे उपयुक्त डोनर पाया गया। उसके स्टेम सेल एकत्र कर बच्चे को दिए गए।

बाल हेमेटोलॉिस्ट-ऑन्कोलॉजिस्ट और BMT चिकित्सक डॉ. जसमीत सिद्धू ने बताया कि प्रत्यारोपित स्टेम सेल सफलतापूर्वक मरीज के शरीर में स्थापित हो गए। ट्रांसप्लांट के बाद बच्चे की लगातार निगरानी और आवश्यक देखभाल की गई। अब बच्चा स्वस्थ है और मंगलवार को अच्छी सेहत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों के मुताबिक, ट्रांसप्लांट के बाद भी उसकी नियमित निगरानी जारी रहेगी।

मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. सीमा गुलिया ने बताया कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें सावधानीपूर्वक योजना, सही डोनर चयन, संक्रमण से बचाव और गहन सहायक देखभाल की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में समर्पित बाल चिकित्सा ऑन्कोलॉजी इकाई के साथ आधुनिक कैंसर उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

अस्पताल में वयस्क और बाल चिकित्सा मरीजों के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी, CAR-T सेल थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और लक्षित उपचार जैसी आधुनिक उपचार सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। अस्पताल के मुताबिक, यहां उपचार अत्यधिक सब्सिडी वाली दरों पर उपलब्ध कराया जाता है।

HBCH&RC पंजाब के निदेशक डॉ. आशीष गुलिया ने इस उपलब्धि को चिकित्सीय सफलता के साथ-साथ एक भावनात्मक मानवीय क्षण बताया। उन्होंने कहा कि भाई-बहन की यह कहानी यह दर्शाती है कि आधुनिक कैंसर उपचार गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवारों के लिए नई उम्मीद पैदा कर सकता है।

उन्होंने बताया कि अस्पताल की मेडिकल सोशल वर्क टीम ने सरकारी योजनाओं और CSR सहायता के माध्यम से परिवार को 14 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई। इसके अलावा उपचार के दौरान परिवार के लिए धर्मशाला में रहने की व्यवस्था भी की गई।

डॉ. आशीष गुलिया के अनुसार, 2024 में BMT कार्यक्रम शुरू होने के बाद से HBCH&RC में अब तक 15 स्टेम सेल ट्रांसप्लांट और तीन CAR-T सेल थेरेपी इंफ्यूजन किए जा चुके हैं। अस्पताल का कहना है कि उसका उद्देश्य उत्तर भारत में कठिन रक्त कैंसर से जूझ रहे मरीजों को किफायती लागत पर आधुनिक और विश्वस्तरीय कैंसर उपचार उपलब्ध कराना है।

मानेसर में EV कलपुर्जा विक्रेता विकास कार्यक्रम, BIS ने मानकों और प्रमाणन पर दी जानकारी

गुरुग्राम / सत्ता संदेश

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), हरियाणा शाखा कार्यालय ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास कार्यालय (MSME-DFO), करनाल की ओर से मानेसर में आयोजित दो दिवसीय विद्युत वाहन (EV) कलपुर्जा विक्रेता विकास कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम का आयोजन 1 और 2 सितंबर 2026 को आईसीएटी कन्वेंशन सेंटर-2, मानेसर, गुरुग्राम में किया गया।

इस कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), ऑटोमोबाइल उद्योग, इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र, तकनीकी एवं शैक्षणिक संस्थानों, नवोदित उद्यमों और विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन कलपुर्जा क्षेत्र में व्यावसायिक अवसरों, तकनीकी आवश्यकताओं, परीक्षण, प्रमाणन, गुणवत्ता मानकों और नियामक प्रावधानों को लेकर उद्योग जगत को जानकारी उपलब्ध कराना रहा।

BIS ने लगाया जागरूकता स्टॉल

कार्यक्रम में BIS हरियाणा शाखा कार्यालय ने BIS फरीदाबाद शाखा कार्यालय के सहयोग से विशेष स्टॉल स्थापित किया। स्टॉल पर इलेक्ट्रिक वाहनों से संबंधित भारतीय मानकों, शोध प्रकाशनों और अध्ययन सामग्री को प्रदर्शित किया गया। इनमें भारत का राष्ट्रीय विद्युत संहिता भी शामिल रही।

इसके अलावा BIS के प्रकाशन ‘विद्युत वाहन चार्जिंग अवसंरचना एवं मानक : एक अवलोकन’ को भी प्रदर्शित किया गया। इसके माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मानकों, सुरक्षा आवश्यकताओं और गुणवत्ता के महत्व को लेकर उद्योग प्रतिनिधियों तथा अन्य हितधारकों को जानकारी दी गई।

BIS स्टॉल पर विभिन्न उद्योगों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने पहुंचकर अधिकारियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपने उत्पादों पर लागू भारतीय मानकों, BIS प्रमाणन और अनुरूपता मूल्यांकन से जुड़ी आवश्यकताओं के बारे में जानकारी हासिल की।

MSME की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता पर चर्चा

MSME-DFO, करनाल के अपर विकास आयुक्त संजीव चावला ने भी अपने सहयोगियों के साथ BIS स्टॉल का दौरा किया। इस दौरान खास तौर पर तेजी से उभर रहे इलेक्ट्रिक वाहन कलपुर्जा क्षेत्र में काम कर रहे MSMEs की गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धात्मकता और बाजार में स्वीकार्यता को मजबूत करने में भारतीय मानकों तथा अनुरूपता मूल्यांकन की भूमिका पर चर्चा हुई।

EV मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों पर तकनीकी सत्र

कार्यक्रम के पहले दिन 1 सितंबर को BIS हरियाणा शाखा कार्यालय की ओर से ‘विद्युत वाहनों के लिए मानक एवं गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों में नवीनतम विकास’ विषय पर तकनीकी सत्र में भाग लिया गया।

इस सत्र में BIS के वैज्ञानिक-डी सौरभ चंद्र ने प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने MSMEs और अन्य हितधारकों को इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र से जुड़े उत्पादों पर लागू भारतीय मानकों, अनिवार्य प्रमाणन आवश्यकताओं और गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों में हुए नवीनतम विकास की जानकारी दी।

प्रतिभागियों को इलेक्ट्रिक वाहन कलपुर्जों और संबंधित उत्पादों के लिए लागू मानकों तथा प्रमाणन प्रक्रिया से जुड़े सवाल पूछने और अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त करने का अवसर भी मिला।

‘मानक बाधा नहीं, गुणवत्ता और सुरक्षा का माध्यम’

कार्यक्रम में ‘हरियाणा में विद्युत वाहन पारिस्थितिकी तंत्र की सुविधा’ विषय पर भी सत्र आयोजित किया गया। इसमें हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण/नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, हरियाणा सरकार के परियोजना अधिकारी सुख चैन सिंह ने भारतीय मानकों के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि मानकों को किसी बाधा या समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मानक गुणवत्ता, सुरक्षा और विश्वसनीयता को बेहतर बनाने तथा बेहतर भविष्य के निर्माण का माध्यम हैं। उन्होंने मानकों को व्यापक रूप से अपनाने को भारत को गुणवत्ता-सचेत राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

कार्यक्रम के दौरान इलेक्ट्रिक वाहन पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। इनमें विक्रेता विकास, निवेश एवं संयुक्त उपक्रम के अवसर, ऊर्जा दक्षता, इलेक्ट्रिक वाहनों के परीक्षण की आवश्यकताएं और MSMEs के लिए उपलब्ध सरकारी योजनाएं प्रमुख रहीं।

दूसरे दिन उद्योग और हितधारकों के साथ व्यापक संवाद

कार्यक्रम के दूसरे दिन 2 सितंबर को BIS अधिकारियों ने इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक संवाद किया। इनमें शैक्षणिक एवं तकनीकी संस्थानों, स्टार्टअप्स, विनिर्माताओं और सरकारी विभागों के प्रतिनिधि शामिल रहे।

हितधारकों ने BIS प्रमाणन, लागू भारतीय मानकों, प्रमाणन प्राप्त करने की प्रक्रिया और विभिन्न इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादों के लिए अनुरूपता मूल्यांकन से संबंधित जानकारी हासिल की। BIS अधिकारियों ने प्रतिभागियों के सवालों और आवश्यकताओं के आधार पर मानकों तथा प्रमाणन प्रक्रिया को लेकर मार्गदर्शन प्रदान किया।

इस दौरान उपभोक्ता शिकायतों और उनकी रिपोर्टिंग प्रक्रिया को लेकर भी व्यावहारिक सवाल उठाए गए। विशेष रूप से ऐसे मामलों पर चर्चा हुई, जब BIS प्रमाणित उत्पाद में बाद में गुणवत्ता या प्रदर्शन से जुड़ी समस्या सामने आती है। अधिकारियों ने शिकायतों की रिपोर्टिंग और समाधान के लिए उपलब्ध माध्यमों की जानकारी दी।

66 प्रदर्शनी स्टॉल, 1,000 से अधिक लोगों ने लिया हिस्सा

दो दिवसीय कार्यक्रम के प्रदर्शनी हिस्से में इलेक्ट्रिक वाहन और ऑटोमोटिव इकोसिस्टम से जुड़े उत्पादों, तकनीकों, सेवाओं और पहलों को प्रदर्शित करने वाले करीब 66 स्टॉल लगाए गए।

प्रदर्शनी में 1,000 से अधिक आगंतुकों ने हिस्सा लिया। इनमें उद्योग प्रतिनिधि, MSMEs, स्टार्टअप्स, तकनीकी एवं शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी और अन्य हितधारक शामिल रहे।

EV सेक्टर में गुणवत्ता और मानक जागरूकता को बढ़ावा

मानेसर में आयोजित यह दो दिवसीय कार्यक्रम इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, MSMEs, स्टार्टअप्स, तकनीकी संस्थानों और सरकारी प्रतिनिधियों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बना। BIS की सहभागिता के माध्यम से भारतीय मानकों, अनुरूपता मूल्यांकन, प्रमाणन आवश्यकताओं, गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों और उपभोक्ता शिकायतों से जुड़ी प्रक्रियाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।

विक्रेता विकास कार्यक्रम के माध्यम से BIS हरियाणा शाखा कार्यालय ने इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में गुणवत्ता, मानक जागरूकता और नियामक अनुपालन को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। साथ ही BIS और MSME-DFO, करनाल के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा उद्योगों को प्रासंगिक भारतीय मानकों और वैधानिक आवश्यकताओं के अनुपालन के लिए मार्गदर्शन देने का अवसर भी मिला।

‘खेदां वतन पंजाब दियां-2026’ में 10 लाख खिलाड़ियों की भागीदारी का लक्ष्य, 23 जिलों में निकलेगा मशाल जुलूस

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ‘खेदां वतन पंजाब दियां-2026’ को लेकर पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि इस बार खेलों का आयोजन बड़े स्तर पर किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य पंजाब में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ युवाओं को नशे से दूर रखना है। इस वर्ष करीब 10 लाख खिलाड़ियों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि खेल प्रतियोगिताएं गांव स्तर से लेकर राज्य स्तर तक आयोजित की जाएंगी। ‘खेदां वतन पंजाब दियां-2026’ से पहले पंजाब के सभी 23 जिलों में 12 अगस्त से 5 सितंबर तक मशाल जुलूस निकाला जा रहा है।

इसके बाद 5 सितंबर को बठिंडा में खेलों का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष कुल 38 खेल प्रतियोगिताएं करवाई जाएंगी, जिनमें 14 वर्ष से कम आयु के खिलाड़ियों से लेकर 70 वर्ष से अधिक उम्र के खिलाड़ी भी हिस्सा ले सकेंगे।

पहली बार टेनिस बॉल क्रिकेट शामिल

इस बार ‘खेदां वतन पंजाब दियां’ में पहली बार टेनिस बॉल क्रिकेट को शामिल किया गया है। इसके अलावा पैरा-एथलीटों के लिए एथलेटिक्स, पावरलिफ्टिंग, बैडमिंटन और व्हीलचेयर बास्केटबॉल सहित चार खेलों में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले तीन सत्रों में इन खेलों में 11.85 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया है। वहीं, पिछले साढ़े चार वर्षों में 40,415 खिलाड़ियों को 135 करोड़ रुपये से अधिक की नकद पुरस्कार राशि दी जा चुकी है।

खिलाड़ियों के लिए रजिस्ट्रेशन पूरी तरह मुफ्त

‘खेदां वतन पंजाब दियां-2026’ में भाग लेने के लिए खिलाड़ियों का पंजीकरण पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है। खिलाड़ी खेल विभाग के पोर्टल या उपलब्ध QR कोड के जरिए अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

खेलों का समापन समारोह 29 नवंबर को पटियाला में आयोजित किया जाएगा।

ओलंपिक और एशियन गेम्स की तैयारी के लिए आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों की तैयारियों के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करवा रही है। ओलंपिक की तैयारी के लिए खिलाड़ियों को 15 लाख रुपये, जबकि एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी के लिए 8 लाख रुपये की सहायता दी जाती है।

इस वर्ष 85 खिलाड़ियों को महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा, 11 शीर्ष खिलाड़ियों को PCS/DSP स्तर पर सरकारी नौकरियां भी दी गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पंजाब के खिलाड़ियों को बेहतर मंच, सुविधाएं और आर्थिक सहयोग मिले, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन कर सकें।

आधार ऐप का नया रिकॉर्ड … 5 करोड़ डाउनलोड पार

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आधार ऐप ने 5 करोड़ डाउनलोड का आंकड़ा पार कर लिया है। यूआईडीएआई के अनुसार, यह उपलब्धि लोगों के बीच सुविधाजनक और डिजिटल आधार सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाती है।

आधार ऐप को आधार नंबर धारकों और यूआईडीएआई के बीच एक डिजिटल इंटरफेस के रूप में विकसित किया गया है। इसके जरिए लोग अपने स्मार्टफोन से कई आधार सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। इनमें मोबाइल नंबर अपडेट, पता अपडेट, ईमेल अपडेट, बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक और ई-आधार डाउनलोड जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

लाखों लोगों ने ऐप से अपडेट की जानकारी

यूआईडीएआई के मुताबिक, आधार ऐप के जरिए अब तक 60 लाख से अधिक लोगों ने अपना मोबाइल नंबर, जबकि 15 लाख से अधिक लोगों ने अपना पता अपडेट किया है। इसके अलावा 23 लाख से अधिक लोगों ने अपना ईमेल भी अपडेट किया है।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि बड़ी संख्या में लोग आधार केंद्र जाने के बजाय डिजिटल माध्यम से आधार से जुड़ी सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।

‘दिखाएं, साझा करें और सत्यापित करें’ के सिद्धांत पर आधारित है ऐप

आधार ऐप को ‘दिखाएं, साझा करें और सत्यापित करें’ के सिद्धांत पर डिजाइन किया गया है। इसका उद्देश्य आधार नंबर धारकों को अपनी आधार जानकारी के इस्तेमाल पर अधिक नियंत्रण देना और सुविधाजनक पहचान सत्यापन उपलब्ध कराना है।

यूआईडीएआई के अनुसार, ऐप की बढ़ती लोकप्रियता के साथ ऑफलाइन आधार सत्यापन से जुड़े इकोसिस्टम का भी विस्तार किया जा रहा है।

200 से अधिक संस्थाएं OVSE के रूप में शामिल

यूआईडीएआई ने बताया कि जनवरी में ऑफलाइन सत्यापन व्यवस्था की शुरुआत के बाद से 200 से अधिक संस्थाओं को ऑफलाइन सत्यापन चाहने वाली संस्थाओं (OVSEs) के रूप में शामिल किया गया है।

इसके माध्यम से सेवा प्रदाताओं को सुरक्षित, सहमति-आधारित और पेपरलेस तरीके से पहचान सत्यापित करने की सुविधा मिलती है। आधार ऑफलाइन सत्यापन में QR कोड आधारित सत्यापन और सुरक्षित डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेजों जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस प्रक्रिया में संस्थाओं को यूआईडीएआई के केंद्रीय डेटाबेस से रियल-टाइम कनेक्टिविटी की आवश्यकता नहीं होती। साथ ही, आधार नंबर धारक अपनी जरूरत के अनुसार केवल आवश्यक जानकारी साझा कर सकते हैं।

यूआईडीएआई के अनुसार, ये पहल डिजिटल इंडिया विजन के अनुरूप सुरक्षित, सुविधाजनक, सुलभ और तकनीक आधारित सार्वजनिक सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

आधार ऐप 40 मिलियन डाउनलोड के पार, डिजिटल पहचान सेवाओं को दे रहा बढ़ावा
  • आधार ऐप 40 मिलियन डाउनलोड के पार, सुविधाजनक डिजिटल पहचान सेवाओं को दे रहा बढ़ावा
  • लगभग 49 लाख निवासियों ने मोबाइल नंबर अपडेट किया; 11.65 लाख ने आधार ऐप का उपयोग करके पता अपडेट किया
  • निवासियों ने बायोमेट्रिक्स को लॉक/अनलॉक करने के लिए 19 मिलियन से अधिक बार आधार ऐप का उपयोग किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

आधार ऐप ने 40 मिलियन (4 करोड़) डाउनलोड का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है, जो सुविधाजनक और डिजिटल-प्रथम पहचान सेवाओं में निवासियों के बढ़ते भरोसे को रेखांकित करता है।

आधार ऐप का बढ़ता उपयोग घर बैठे पता अपडेट करने, मोबाइल नंबर अपडेट, ईमेल अपडेट, बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक और ई-आधार डाउनलोड सहित आधार से जुड़ी सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुँचने के लिए एक वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में इसके उभरने को दर्शाता है।

अपने लॉन्च के बाद से, आधार ऐप ने 11.65 लाख पते के अपडेट की सुविधा प्रदान की है, जिससे निवासी आधार केंद्र पर जाए बिना आसानी से अपने आधार विवरण को अपडेट रख सकते हैं।

इस ऐप ने लगभग 49 लाख मोबाइल नंबर अपडेट को भी सक्षम बनाया है, जिससे निवासियों को अपने आधार से जुड़े सटीक संपर्क विवरण बनाए रखने में मदद मिली है।

1 जुलाई को ईमेल अपडेट सुविधा शुरू होने के बाद से, आधार ऐप के माध्यम से लगभग 12.5 लाख ईमेल पते जोड़े या अपडेट किए गए हैं, जिससे जहां भी लागू हो, निवासियों और यूआईडीएआई (UIDAI) के बीच संचार को और मजबूती मिली है। यह सुविधा, जिसके लिए पहले ₹75 का शुल्क लिया जाता था, आधार ऐप पर 31 दिसंबर 2026 तक निःशुल्क कर दी गई है।

इस ऐप ने अपनी गोपनीयता (प्राइवेसी) और सुरक्षा सुविधाओं के मामले में भी मजबूत स्वीकार्यता देखी है। निवासियों ने बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक सुविधा का 19.1 मिलियन (1.91 करोड़) से अधिक बार उपयोग किया है। यह सुविधा आधार नंबर धारकों को आवश्यकता पड़ने पर अपने बायोमेट्रिक्स को तुरंत लॉक या अनलॉक करने की अनुमति देकर उनकी व्यक्तिगत जानकारी पर अधिक नियंत्रण प्रदान करती है, जिससे मात्र कुछ टैप के साथ सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जुड़ जाती है।

आधार ऐप को आधार नंबर धारकों को अपनी पहचान दिखाने, साझा (शेयर) करने और सत्यापित करने के लिए एक सुविधाजनक और गोपनीयता-प्रथम तरीका प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है और यह विकसित भारत के लिए डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप जीवन की सुगमता (ईज ऑफ लिविंग) को और बेहतर बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

दिल्ली सरकार ने नई ईवी पॉलिसी को दी मंजूरी, 1 जुलाई से लागू होगी पॉलिसी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली सरकार ने सोमवार को नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) पॉलिसी को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सचिवालय में आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि यह नीति दिल्ली की वर्षों पुरानी प्रदूषण और परिवहन संबंधी चुनौतियों के समाधान की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल की संस्तुति के बाद यह नीति एक जुलाई से लागू होगी और 31 अगस्त 2031 तक प्रभावी रहेगी।

15 हजार करोड़ रुपये का लाभ मिलने का अनुमान

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई ईवी पॉलिसी से आम लोगों को करीब 15 हजार करोड़ रुपये का लाभ मिलने का अनुमान है। सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिलने वाली सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि में वृद्धि की है, ताकि अधिक से अधिक लोग इलेक्ट्रिक वाहन अपनाएं। उन्होंने कहा कि दोपहिया, चारपहिया, तिपहिया, ट्रक और ग्रामीण परिवहन वाहनों को भी इस नीति के दायरे में शामिल किया गया है।

पॉलिसी का मसौदा उपराज्यपाल को भेजा गया

प्रेसवार्ता की शुरुआत करते हुए शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने सोमवार को नई ईवी पॉलिसी का मसौदा मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसे बाद में मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। उन्होंने कहा कि इस नीति को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न हितधारकों के साथ कई दौर की बैठकें की गईं। परिवहन विभाग की सचिव निहारिका ने बताया कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद पॉलिसी का मसौदा उपराज्यपाल को भेज दिया गया है। 

इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों के दिया जाएगा प्रोत्साहन

उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि मंगलवार तक उनकी मंजूरी भी मिल जाएगी। नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों के लिए 30 हजार से 50 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा। इलेक्ट्रिक ट्रक खरीदने पर एक लाख रुपये तथा ग्रामीण सेवा वाहनों के लिए 20 हजार रुपये का स्क्रैपिंग इंसेंटिव मिलेगा। सरकार ने चरणबद्ध तरीके से पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाने का भी निर्णय लिया है। इसके तहत वर्ष एक जनवरी 2027 से नए तीनपहिया और वर्ष अप्रैल 2028 से नए दोपहिया वाहनों का पंजीकरण केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के रूप में किया जाएगा।

विकसित किया जाएगा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। साथ ही डिस्कॉम के साथ मिलकर घरों में ईवी चार्जिंग के लिए अलग मीटर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस नीति के तहत खरीदे गए इलेक्ट्रिक वाहन तीन वर्ष तक दिल्ली के बाहर बेचे नहीं जा सकेंगे। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि नई ईवी पॉलिसी से राजधानी में वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने लोगों से इस नीति को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि परिवहन विभाग ने इसे तैयार करने में व्यापक मेहनत की है और इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। परिवहन विभाग को इस नीति के क्रियान्वयन का नोडल विभाग बनाया गया है।

चरणबद्ध तरीके से दी जाएगी सब्सिडी

नई ईवी पॉलिसी में इलेक्ट्रिक दोपहिया, ऑटो और मालवाहक वाहनों के लिए चरणबद्ध खरीद सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। दोपहिया वाहन पर पहले वर्ष अधिकतम 30 हजार रुपये, इलेक्ट्रिक ऑटो पर 50 हजार रुपये और एन1 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रक पर पहले वर्ष एक लाख रुपये तक की खरीद सब्सिडी मिलेगी। निजी इलेक्ट्रिक कारों पर खरीद सब्सिडी नहीं होगी, लेकिन पुराने बीएस-4 या उससे नीचे के वाहन को स्क्रैप करने पर एक लाख रुपये तक का स्क्रैपिंग इंसेंटिव दिया जाएगा। 

इसके अलावा सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, व्यावसायिक वाहन और 30 लाख रुपये तक की इलेक्ट्रिक कारों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट मिलेगी। वहीं स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों को 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी, जबकि 30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों को कोई टैक्स या रजिस्ट्रेशन शुल्क छूट नहीं मिलेगी।

अमित शाह नई दिल्ली में NAFED के ऑक्शन पोर्टल ‘NAFEX.in’ का शुभारंभ करेंगे

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 23 जून को नई दिल्ली स्थित अटल अक्षय ऊर्जा भवन में NAFED के ऑक्शन पोर्टल ‘NAFEX.in’ का शुभारंभ करेंगे। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान अमित शाह NAFED की कई महत्वपूर्ण डिजिटल और किसान-केंद्रित पहलों का शुभारंभ करेंगे। इनमें किसानों के बच्चों के लिए NAFED-KALYAN छात्रवृत्ति, दलहन एवं तिलहन के इन्वेंटरी मैनेजमेंट के लिए DRISHTI पोर्टल, एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग को मजबूत करने के लिए ERP पोर्टल और ऑक्शन पोर्टल NAFEX.in शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान ऑक्शन पोर्टल पर लाइव पंजीकरण का प्रदर्शन और नीलामी प्रक्रिया का शुभारंभ भी किया जाएगा।

NAFEX.in का शुभारंभ नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और संचालन की सुगमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पोर्टल नीलामी से संबंधित गतिविधियों को व्यवस्थित करने और किसानों, सदस्य संस्थाओं तथा हितधारकों के हित में NAFED की समग्र कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगा।

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री किसानों के बच्चों को NAFED-KALYAN छात्रवृत्ति के चेक भी वितरित करेंगे। यह पहल किसान कल्याण और किसानों के बच्चों की शिक्षा को सहयोग देने की दिशा में NAFED की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

शुभारंभ कार्यक्रम के बाद श्री अमित शाह NAFED के निदेशक मंडल के सदस्यों से भेंट करेंगे। इस बैठक में NAFED द्वारा अपनी गतिविधियों और प्रगति पर प्रस्तुति दी जाएगी, जिसमें केन्द्रीय मंत्री द्वारा पिछले दौरे के दौरान दिए गए निर्देशों पर की गई कार्रवाई तथा NAFED के भविष्य के रोडमैप पर चर्चा होगी ।

NAFED किसानों को सहयोग देने, कृषि विपणन, खरीद और सहकारिता आधारित कृषि व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन डिजिटल और कल्याणकारी पहलों का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के विज़न को साकार करने और सहकारी संस्थाओं को तकनीक, पारदर्शिता तथा किसान-केंद्रित सुधारों के माध्यम से सशक्त बनाने के सरकार के प्रयासों के अनुरूप है।

RRU ने 261 पंजाब पुलिस अधिकारियों को क्लाउड AI और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग का प्रशिक्षण दिया

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

गांधीनगर, गुजरात – राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) ने अपने सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा संकाय (SITAICS) के माध्यम से 15 से 17 जून 2026 तक पंजाब पुलिस के 261 अधिकारियों के लिए तीन दिवसीय फाउंडेशन कोर्स “क्लाउड AI 101 और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग” का सफलतापूर्वक ऑनलाइन लाइव वर्चुअल मोड में आयोजन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय की डीन (प्रभारी) डॉ. जसबीरकौर थधानी के उद्घाटन भाषण से हुआ, जिन्होंने बताया कि AI उपकरण अधिकारियों को बढ़ती सूचनाओं के प्रबंधन और नियमित कागजी कार्रवाई को स्वचालित करने में मदद करते हैं, जिससे उनका निर्णय उन मामलों पर केंद्रित हो पाता है जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है। कार्यक्रम का संचालन SITAICS के निदेशक डॉ. चंद्रेश पारेख ने किया और इसका समन्वय SITAICS के सहायक प्रोफेसर श्री पूजन शाह ने किया।

नौ सत्रों और छह घंटे के व्यावहारिक प्रशिक्षण में फैला यह पाठ्यक्रम विशेष रूप से कानून प्रवर्तन अधिकारियों के लिए तैयार किया गया था। पहले दिन एआई के मूल सिद्धांतों, लार्ज लैंग्वेज मॉडल आर्किटेक्चर और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग को शामिल किया गया, जिसमें प्रभावी प्रॉम्प्टिंग के चार स्तंभों – भूमिका, कार्य, संदर्भ और आउटपुट प्रारूप – का परिचय दिया गया। प्रतिभागियों ने ओलामा और एलएम स्टूडियो जैसे ऑफ़लाइन एआई उपकरणों का भी अध्ययन किया, जिससे गूगल एआई एज गैलरी जैसे ऐप्स के साथ इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना सुरक्षित एआई उपयोग संभव हो सका।

दूसरे दिन दस्तावेज़ इंटेलिजेंस पर ध्यान केंद्रित किया गया, जहां प्रतिभागियों ने क्लाउड प्रोजेक्ट्स और नोटबुकएलएम का उपयोग करके क्रॉस-डॉक्यूमेंट नॉलेज बेस बनाए और उद्धरण-आधारित बहु-दस्तावेज़ विश्लेषण किया। इस सत्र में भासिनी का भी परिचय दिया गया, जो भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ और वाक् प्रसंस्करण के लिए एक मेक-इन-इंडिया एआई टूल है। तीसरे दिन जैपियर के माध्यम से जिम्मेदार एआई गवर्नेंस, रेड-टीमिंग और नो-कोड ऑटोमेशन को एक साथ लाया गया। समापन भाषण रजिस्ट्रार (प्रभारी) डॉ. धर्मेशकुमार प्रजापति ने दिया, जिन्होंने प्रशिक्षण के सफल समापन पर सभी प्रतिभागियों को बधाई दी और इस बात पर जोर दिया कि एआई-सहायता प्राप्त सभी कार्यप्रवाहों में मानवीय भागीदारी अपरिहार्य है।

प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया अत्यंत सकारात्मक रही। अधिकारियों ने प्रशिक्षण को अत्यधिक ज्ञानवर्धक बताया और कहा कि सुव्यवस्थित सामग्री, व्यावहारिक उदाहरण और प्रत्यक्ष अभ्यास सत्रों ने एआई उपकरणों और त्वरित इंजीनियरिंग तकनीकों के बारे में उनकी समझ को काफी बढ़ाया है। कई प्रतिभागियों ने प्रौद्योगिकी के विकास के साथ-साथ अद्यतन रहने की उत्सुकता भी व्यक्त की और अनुरोध किया कि भविष्य के कार्यक्रमों में एआई में नवीनतम प्रगति को शामिल किया जाए – एक ऐसी आवश्यकता जिसे राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय निरंतर और अद्यतन पाठ्यक्रमों के माध्यम से पूरा करने का इरादा रखता है।

राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय का उद्देश्य विश्व स्तर पर राज्य पुलिस बलों और राष्ट्रीय सुरक्षा संगठनों को विभिन्न एआई उपकरणों को अपनाने और प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि उनकी क्षमताओं को मजबूत किया जा सके और परिचालन प्रभावशीलता में सुधार किया जा सके।

ट्राई ने दिल्ली-एनसीआर मेट्रो मार्गों पर मोबाइल नेटवर्क गुणवत्ता का आकलन किया

दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने सेक्टर -51 नोएडा से डिपो स्टेशन (एक्वा लाइन), द्वारका सेक्टर-21 से नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी (ब्लू लाइन 1), वैशाली से यमुना बैंक (ब्लू लाइन 2), कीर्ति नगर से ब्रिगेडियर होशियार सिंह (ग्रीन लाइन), द्वारका से ढांसा बस स्टैंड (ग्रे लाइन), बॉटनिकल गार्डन से कृष्णा पार्क एक्सटेंशन (मैजेंटा लाइन), दीपाली चौक से मजलिस पार्क (मैजेंटा लाइन एक्सटेंशन), नई दिल्ली से यशोभूमि द्वारका सेक्टर-25 (ऑरेंज लाइन), मयूर विहार-1 से मौजपुर-बाबरपुर (पिंक लाइन), शिव विहार से मयूर विहार-1 (पिंक लाइन एक्सटेंशन), सेक्टर 55-56 से फेज-3 (रैपिड मेट्रो), शहीद स्थल से रिठाला (रेड लाइन), राजा नहर सिंह (बल्लभगढ़) से कश्मीरी गेट (वायलेट लाइन), समयपुर बादली से मिलेनियम सिटी सेंटर (येलो लाइन) और दिल्ली से मेरठ (नमो भारत आरआरटीएस) तक के मेट्रो मार्गों पर मोबाइल नेटवर्क की गुणवत्ता का आकलन किया।


ट्राई ने अप्रैल 2026 के दौरान दिल्ली मेट्रो रेल निगम, नोएडा मेट्रो रेल निगम और दिल्ली एलएसए के अंतर्गत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम के मेट्रो मार्गों पर किए गए स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट (आईडीटी) के निष्कर्ष आम दूरसंचार उपभोक्ताओं की जानकारी के लिए जारी किए हैं। इस ड्राइव टेस्ट का उद्देश्य दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) द्वारा प्रदान की जाने वाली मोबाइल नेटवर्क सेवाओं (वॉयस और डेटा दोनों) की वास्तविक समय गुणवत्ता का आकलन और सत्यापन करना है। इस परीक्षण के दौरान ट्राई कवरेज, कॉल ड्रॉप रेट (सीडीआर), कॉल सेटअप सक्सेस रेट (सीएसआर), डेटा डाउनलोड (डीएल) और अपलोड (यूएल) थ्रूपुट आदि जैसे प्रमुख सेवा गुणवत्ता (क्यूओएस) मापदंडों के लिए टीएसपी के प्रदर्शन को रिकॉर्ड करता है, जिन्हें बाद में उपभोक्ताओं को सूचित करने और टीएसपी को अपनी सेवाओं में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु प्रकाशित किया जाता है।


इन परिक्षणों को शहरों, हॉटस्पॉट, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों आदि जैसे विभिन्न उपयोग परिवेशों में सभी टीएसपी (ट्रांसपोर्टर सेवा प्रदाता) के मोबाइल नेटवर्क प्रदर्शन को मापने के उद्देश्‍य से तैयार किया गया है। इस प्रकार के ड्राइव टेस्टिंग में, 2जी, 3जी, 4जी और 5जी नेटवर्क पर सभी दूरसंचार कंपनियों के सिम कार्ड का उपयोग करके लाइव डेटा और वॉयस सेशन स्थापित किए जाते हैं। कई उन्नत टेस्ट हैंडसेट का उपयोग किया जाता है और उन्नत सॉफ्टवेयर सिस्टम का उपयोग करके सेशन की वास्तविक समय में निगरानी और विश्लेषण किया जाता है।