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पंजाब को राजनीति नहीं, आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता चाहिए : मनिंदरजीत सिंह बिट्टा

पंजाब / सत्ता संदेश

पंजाब में लगातार हो रहे धमाकों और बढ़ती आतंकी घटनाओं को लेकर ऑल इंडिया एंटी टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों में पंजाब में तीन ब्लास्ट हो चुके हैं और इससे पहले दो पुलिसकर्मियों को भी शहीद किया गया। बिट्टा ने पाकिस्तान पर पंजाब में नार्को टेररिज्म फैलाने का आरोप लगाया और राजनीतिक दलों से एकजुट होने की अपील की।
ऑल इंडिया एंटी टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने कहा कि पाकिस्तान लगातार पंजाब में दहशत फैलाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि नार्को टेररिज्म के जरिए पंजाब को अस्थिर करने की साजिश रची जा रही है।
बिट्टा ने राजनीतिक दलों को भी नसीहत देते हुए कहा कि चुनावी राजनीति के चलते एक-दूसरे पर आरोप लगाने की बजाय पंजाब को बचाने के लिए एकजुट होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक पार्टियों का एक ही मकसद होना चाहिए कि आईएसआई को करारा जवाब कैसे दिया जाए।
एमएस बिट्टा ने कहा कि अगर पंजाब के राजनीतिक दल मजबूत होकर एकजुट हो जाएं तो ऐसी ताकतों का मुकाबला आसानी से किया जा सकता है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले भी पंजाब ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ी है और अब फिर उसी एकता की जरूरत है।

भारत का ऑपरेशन सिंदूर: रणनीतिक जीत का एक वर्ष
  • मेजर जनरल रवि मुरुगन (सेवानिवृत्त)

आज से एक साल पहले, 7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसने केवल नीति की घोषणा से आगे बढ़कर उसे निर्णायक कार्रवाई में बदल दिया। यह भारत की धरती पर दशकों से जारी पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ जवाब देने के तरीके में एक बड़ा बदलाव था। कई मायनों में, ऑपरेशन सिंदूर भारत के उस लंबे संघर्ष में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया, जिसमें पाकिस्तान द्वारा गैर-राज्य तत्वों को प्रॉक्सी हिंसा के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का जवाब दिया गया।

इस अभियान के पीछे भारत का राजनीतिक इरादा पूरी तरह स्पष्ट और दृढ़ था। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में पाकिस्तान-प्रशिक्षित आतंकवादियों के बर्बर हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत के बाद भारत की प्रतिक्रिया केवल प्रतीकात्मक या सीमित नहीं थी। यह पूरी तरह योजनाबद्ध, समयबद्ध और स्पष्ट उद्देश्य वाली कार्रवाई थी। 88 घंटे तक चले इस अभियान ने साफ दिखाया कि भारत ने तय लक्ष्यों के साथ संगठित जवाबी रणनीति अपनाई और अपने उद्देश्यों को पूरा करने के बाद अपनी शर्तों पर इसे समाप्त किया।

राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से इस अभियान की दो बातें विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। पहली, हमलों का दायरा पहले से कहीं अधिक व्यापक था। लक्ष्य केवल नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पाकिस्तान के पंजाब के अंदरूनी क्षेत्रों तक भी पहुंचे। यह एक सोची-समझी रणनीतिक पहल थी, जिसने पाकिस्तान की कथित परमाणु सीमाओं और उसकी प्रतिरोधक नीति को सीधे चुनौती दी।

दूसरा, इस अभियान ने दिखाया कि आज के सूचना युग के युद्धों में तकनीक कितनी केंद्रीय भूमिका निभाती है। क्रूज़ मिसाइलों, लोइटरिंग हथियारों, नेटवर्क-आधारित प्रणालियों और बहु-स्तरीय वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणाली के उपयोग ने स्पष्ट किया कि अब युद्ध सटीकता, गति और बेहतर समन्वय तथा युद्धक्षेत्र की समझ पर आधारित हैं। ऑपरेशन सिंदूर केवल जवाबी कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह भारत की उस नई युद्ध रणनीति का प्रदर्शन भी था, जिसमें दूर से मार करने की क्षमता, तेज निर्णय प्रक्रिया और कई मोर्चों पर एकीकृत कार्रवाई प्रमुख है।

7 मई 2025 को शुरू हुआ यह अभियान पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी ढांचे पर तेज, सटीक और योजनाबद्ध कार्रवाई था। यह भारत की समन्वित सैन्य क्षमता का नियंत्रित लेकिन अत्यंत प्रभावशाली प्रदर्शन था, जिसका उद्देश्य दुश्मन पर कीमत थोपना था, बिना संघर्ष को अनावश्यक रूप से बढ़ाए। एक साल बाद, ऑपरेशन सिंदूर भारत की बढ़ती रणनीतिक परिपक्वता का प्रमाण माना जाता है—अर्थात, परमाणु शक्ति से लैस दुश्मन को जवाबदेह बनाने की क्षमता, वह भी स्पष्ट उद्देश्य, दृढ़ संकल्प और संतुलित रणनीति के साथ।

आज के कई युद्ध जहां लंबे और अनिर्णायक बन जाते हैं, वहीं ऑपरेशन सिंदूर स्पष्ट लक्ष्यों और ठोस कार्रवाई के कारण अलग दिखाई देता है। इसका राजनीतिक उद्देश्य स्पष्ट था—आतंकवाद के ढांचे और उसे समर्थन देने वालों पर सीधा और प्रभावी प्रहार करना। लक्ष्य प्राप्त होते ही अभियान को सीमित रखा गया। टारगेट चयन में भी संयम और दृढ़ता दोनों दिखाई दिए। लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों से जुड़े महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया, ताकि उनकी क्षमता कमजोर हो, लेकिन आम नागरिकों को नुकसान और सहायक क्षति न्यूनतम रहे।

सैन्य संचालन के स्तर पर यह अभियान भारत की दूर से सटीक प्रहार करने की युद्ध क्षमता के परिपक्व होने का संकेत था। लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइलों और प्रिसीजन हथियारों से लैस राफेल, साथ ही ब्रह्मोस प्रणाली से जुड़े सुखोई SU-30MKI जैसे प्लेटफॉर्म ने व्यापक दायरे में गहराई तक समन्वित हमले संभव बनाए। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से आगे बढ़कर पाकिस्तान के पंजाब के भीतर तक कार्रवाई का विस्तार इस बात का संकेत था कि भारत ने अपनी पुरानी स्व-निर्धारित सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए कथित सुरक्षित ठिकानों को भी चुनौती दी।

इस अभियान की रक्षा व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही। एकीकृत वायु और मिसाइल रक्षा प्रणालियों ने ड्रोन और मिसाइलों के जरिए किसी भी जवाबी हमले को प्रभावी ढंग से विफल कर दिया। आक्रामक क्षमता और मजबूत रक्षात्मक सुरक्षा के इस संयोजन ने स्पष्ट रूप से दिखाया कि आधुनिक युद्ध में नेटवर्क-आधारित समन्वय और बहु-स्तरीय सुरक्षा कितनी आवश्यक हो चुकी है।

रणनीतिक सिद्धांत के स्तर पर ऑपरेशन सिंदूर ने एक साथ तीन महत्वपूर्ण सीमाएं पार कीं—जिम्मेदार लक्ष्य चयन, संतुलित सैन्य शक्ति का उपयोग और स्पष्ट दबावकारी संदेश। इसने दिखाया कि जब कार्रवाई स्पष्ट राजनीतिक इरादे, सटीक सैन्य लक्ष्यों और मजबूत प्रतिरोधक क्षमताओं के साथ की जाए, तो दुश्मन को दंडित किया जा सकता है बिना स्थिति को अनियंत्रित युद्ध में बदले। भारत ने युद्ध के दायरे को पूरी तरह बढ़ाने के बजाय उसे सीमित लेकिन प्रभावशाली ढंग से बढ़ाया, जिससे पूर्ण युद्ध से बचते हुए भी दुश्मन पर ठोस कीमत थोपी गई।

इस अभियान की एक और बड़ी विशेषता थी—तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और पूरे रक्षा तंत्र का एकीकृत संचालन। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की स्थापना के बाद विकसित नए रक्षा ढांचे का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दिया। समुद्री मोर्चा, हवाई शक्ति और जमीनी लक्ष्य—ये अलग-अलग अभियान नहीं थे, बल्कि एक ही संयुक्त रणनीति के हिस्से थे।

इसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की बढ़ती ताकत ने और मजबूत बनाया। स्वदेशी प्लेटफॉर्म, प्रिसीजन हथियार प्रणालियां, काउंटर-ड्रोन तकनीक और ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉनिसेंस) जैसी घरेलू क्षमताओं की बढ़ती भूमिका ने दिखाया कि भारत धीरे-धीरे लेकिन मजबूती से रक्षा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। इस तरह, ऑपरेशन सिंदूर केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि भारत की औद्योगिक और तकनीकी गहराई का भी प्रमाण था। अब मजबूत रक्षा तैयारी सीधे तौर पर देश की औद्योगिक क्षमता से जुड़ चुकी है।

कूटनीतिक स्तर पर भी यह अभियान बेहद सोच-समझकर चलाया गया। भारत ने अपनी कार्रवाइयों को आतंकवाद के खिलाफ जवाब और आत्मरक्षा के दायरे में प्रस्तुत किया, जिससे ऑपरेशन सिंदूर के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत नैतिक और रणनीतिक आधार तैयार हुआ। सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक संदेशों के बीच यह तालमेल भारत के लिए रणनीतिक स्पेस बनाए रखने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।

अंततः, ऑपरेशन सिंदूर की सबसे बड़ी विशेषता उसका सही समय पर और स्पष्ट तरीके से समापन था। अपने लक्ष्य हासिल करने के बाद भारत ने तय समय-सीमा के भीतर अभियान रोक दिया, जिससे वह उन लंबे और दिशाहीन संघर्षों से बचा रहा जो आज कई आधुनिक युद्धों की पहचान बन चुके हैं। इसकी शुरुआत, संचालन और समाप्ति—तीनों में दिखाई गई स्पष्टता और सटीकता ही इस अभियान की सबसे बड़ी पहचान रही।

एक साल बाद, ऑपरेशन सिंदूर की वास्तविक विरासत केवल दुश्मन को हुए नुकसान में नहीं, बल्कि उस नई मिसाल में है जो इसने स्थापित की। इसने दिखाया कि संतुलित, तकनीक-सक्षम और राजनीतिक नेतृत्व द्वारा निर्देशित सैन्य कार्रवाई दुश्मन पर भारी कीमत थोप सकती है, उसकी रणनीति बदल सकती है और फिर भी नियंत्रण के दायरे में रह सकती है। यह परमाणु जोखिम के बीच सीमित युद्ध के लिए भारत के उभरते मॉडल को दर्शाता है—इरादों में मजबूत, कार्रवाई में सटीक और संयम में अनुशासित।

पाकिस्तान ने काबुल और नंगरहार में तालिबान के ठिकानों को निशाना बनाया

इस्लामाबाद, 17 मार्च (भाषा) पाकिस्तान ने रात भर हवाई हमले कर काबुल और नंगरहार में अफगान तालिबान के ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में उनके सैन्य अड्डों तथा आतंकी ढांचे को नष्ट कर दिया गया। मंगलवार को यह जानकारी प्राप्त हुई।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, ये नवीनतम हमले 26 फरवरी से शुरू किए गए ऑपरेशन ‘गजब-लिल-हक’ (इंसाफ के लिए गुस्सा) के तहत किए गए हैं।

पाकिस्तान ने 16 मार्च की रात काबुल और नंगरहार में अफगान तालिबान तथा फ़ितना अल-ख्वारिज के अड्डों और आतंकवदियों के ठिकानों को सटीक रूप से निशाना बनाया। इन ठिकानों में तकनीकी उपकरण भंडारण और गोला-बारूद भंडारण शामिल थे, जिनका उपयोग पाकिस्तान के निर्दोष नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा था।

मंत्रालय ने तालिबान के इस बयान को खारिज कर दिया कि पाकिस्तान ने नागरिक स्थानों को निशाना बनाया और कहा कि पाकिस्तान का लक्ष्य सटीक था और सावधानीपूर्वक किया गया था ताकि कोई भी अप्रत्यक्ष नुकसान न हो।

इसके अलावा सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में पाकिस्तानी सेना ने अफगान तालिबान के चार सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

सूत्रों ने यह भी बताया कि इन ठिकानों के आसपास मौजूद रसद सामग्री, गोला-बारूद और तकनीकी बुनियादी ढांचे को भी नष्ट कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि नंगरहार और काबुल में ड्रोन वर्कशॉप (वह मुख्यालय जहां से ड्रोन भेजे जाते थे) और हथियारों के भंडार भी नष्ट कर दिए गए।

सूत्रों ने बताया कि काबुल और नंगरहार में छह ठिकानों को निशाना बनाया गया है, साथ ही कई आतंकवादियों के मारे जाने की भी खबरें हैं।

पाकिस्तान के साथ मेरे अच्छे संबंध हैं और वे बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं: ट्रंप

न्यूयॉर्क/वाशिंगटन, 28 फरवरी (भाषा) पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनके पाकिस्तान के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं और वह देश ‘‘बहुत अच्छा’’ प्रदर्शन कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान के साथ मेरे संबंध बहुत अच्छे हैं। आपके पास एक महान प्रधानमंत्री हैं, एक महान जनरल हैं। आपके पास एक अच्छा नेता हैं, दो ऐसे लोग जिनका मैं वास्तव में बहुत सम्मान करता हूं और मुझे लगता है कि पाकिस्तान बहुत बढ़िया प्रदर्शन कर रहा है।’’

ट्रंप से पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के खिलाफ शुरू किए गए ‘‘खुले युद्ध’’ को लेकर सवाल किया गया था और यह भी पूछा गया था कि क्या वह लड़ाई रोकने के लिए हस्तक्षेप करेंगे।

अमेरिका की राजनीतिक मामलों की उप विदेश मंत्री एलिसन हुकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने शुक्रवार को पाकिस्तान की विदेश मंत्री आमना बलूच से बात की तथा ‘‘पाकिस्तान और तालिबान के बीच हाल में हुए संघर्ष में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

उन्होंने कहा, ‘‘हम स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और तालिबान के हमलों के खिलाफ आत्मरक्षा करने के पाकिस्तान के अधिकार के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हैं।’’