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भारत–यूरोपीय संघ TTC के तहत EV बैटरी रीसाइक्लिंग के लिए 169 करोड़ की संयुक्त पहल

दिल्ली/सत्ता संदेश

भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) के हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी कार्य समूह-2 के ढांचे के अंतर्गत, भारत सरकार और यूरोपीय संघ ने 5 मई 2026 को इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरियों के पुनर्चक्रण पर केंद्रित तीसरे समन्वित प्रस्‍ताव आमंत्रण की घोषणा की। इसके लिए प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 है।

प्रस्ताव आमंत्रण पहल का उद्देश्य महत्वपूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करना, वैश्विक स्तर पर चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव को गति देना और भारत तथा यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। 15.2 मिलियन यूरो (लगभग 169 करोड़ रुपये) के संयुक्त वित्त पोषण के साथ, इस पहल को यूरोपीय संघ के होराइजन यूरोप कार्यक्रम के माध्यम से वित्त पोषित किया जाएगा, जबकि भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) भारतीय घटक का समर्थन करेगा।

यह कार्यक्रम भारत में भारत-यूरोपीय संघ की संयुक्त पायलट लाइन की स्थापना में भी सहयोग करेगा, जिससे वास्तविक स्तर पर सत्यापन और औद्योगिक तैनाती संभव हो सकेगी और अग्रणी शोधकर्ताओं, उद्योगों तथा स्टार्टअप्स को एक साथ लाया जा सकेगा। प्रस्ताव आमंत्रित करने की प्रक्रिया में उच्च पुनर्प्राप्ति दर; मिश्रित रसायन प्रबंधन; लॉजिस्टिक्‍स एवं समावेशन और लिथियम, ग्रेफाइट एवं कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के लिए सुरक्षा तथा द्वितीयक जीवन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

इन प्रस्तावों की शुरुआत के अवसर पर, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने कहा कि यह शुरुआत भारत-यूरोपीय संघ की रणनीतिक साझेदारी में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के तेजी से विस्तार के साथ, एक मजबूत घरेलू पुनर्चक्रण प्रणाली का निर्माण हमारी संसाधन सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं के लिए आवश्यक है।

भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फ़िन ने हरित परिवर्तन के मूल में स्थित बैटरियों के महत्व पर प्रकाश डाला। इसका लक्ष्य विकास चरण से नवाचारों को वास्तविक दुनिया में लागू करना है; जिससे खनिज सुरक्षा और साझा जलवायु लक्ष्यों में प्रत्यक्ष निवेश हो सके।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के वैज्ञानिक सचिव डॉ . परविंदर मैनी ने बताया कि यह संयुक्त पहल भारत की चक्रीय अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कदम है और एक डिजिटल, समावेशी लॉजिस्टिक्स मॉडल को आगे बढ़ाने के लिए गति प्रदान करती है। यह अनौपचारिक क्षेत्र को एकीकृत करता है और साथ ही साथ द्वितीय-जीवन अनुप्रयोगों के लिए उच्चतम सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करता है।

यूरोपीय आयोग के अनुसंधान और नवाचार महानिदेशालय (आरटीडी) के महानिदेशक मार्क लेमैत्रे ने हरित नवाचार के क्षेत्र में यूरोपीय संघ और भारत के बीच मजबूत होते संबंधों तथा एक सुदृढ़, अंतर-महाद्वीपीय मूल्य श्रृंखला के सह-निर्माण पर जोर दिया। इससे यह सुनिश्चित होगा कि भविष्य की रणनीतिक सामग्रियां हमारी अर्थव्यवस्थाओं के भीतर ही रहें।

टीडीबी-डीएसटी ने भारत-ब्रिटेन सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम के तहत एडवांस्‍ड ईवी चार्जिंग इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के लिए एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड को सहयोग प्रदान किया

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने “इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नवोन्‍मेषण सशक्तिकरण” नामक परियोजना के लिए मेसर्स एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है। यह परियोजना औद्योगिक स्थिरता के लिए भारत-ब्रिटेन सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम के तहत समर्थित है और ब्रिटेन स्थित अल्ब्राइट प्रोडक्ट डिजाइन लिमिटेड के साथ साझेदारी में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग अवसंरचना के लिए उन्नत और कुशल समाधान विकसित करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।

इस समर्थित परियोजना का मुख्य उद्देश्य वाणिज्यिक बेड़े और डिपो संचालन के लिए तैयार किए गए अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग समाधान का विकास करना है। यह प्रौद्योगिकी एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित एक नवोन्‍मेषी इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर चार्ज कंट्रोलर को ब्रिटेन के भागीदार के पेटेंट प्राप्त स्वचालित केबल प्रबंधन प्रणाली के साथ एकीकृत करती है। इस एकीकृत दृष्टिकोण को उच्च मांग वाले इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग वातावरण में परिचालन दक्षता, सुरक्षा और उपयोगिता में सुधार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

यह समाधान विशेष रूप से फ्लीट-आधारित अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन की गई एक मोटरयुक्त ओवरहेड केबल प्रबंधन प्रणाली प्रस्तुत करता है, जो मैन्युअल हैंडलिंग को कम करके, केबलों की क्षति को न्यूनतम करके और उपयोगकर्ता की सुविधा को बढ़ाकर चार्जिंग संचालन को सुव्यवस्थित करता है। यह प्रणाली विद्यमान एसी टाइप-2 ईवी चार्जर के अनुकूल है और डिपो में सुरक्षित तथा व्यवस्थित अवसंरचना सुनिश्चित करते हुए चार्जिंग टर्नअराउंड समय को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखती है।

केबल प्रबंधन, उपकरण सुरक्षा और कार्यप्रवाह अनुकूलन जैसी प्रमुख परिचालन चुनौतियों का समाधान करने के जरिए इस प्रौद्योगिकी द्वारा इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग डिपो की दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि किए जाने की उम्मीद है। साथ ही, केबल क्षति, तोड़फोड़ और परिचालन संबंधी खतरों को कम करके यह सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने में भी योगदान देती है।

एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड एक उभरती हुई भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन प्रौद्योगिकी कंपनी है, जो उन्नत पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्ट चार्जिंग सिस्टम विकसित करने पर केंद्रित है। इस परियोजना के माध्यम से, कंपनी का लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं को सुदृढ़ करना और बढ़ते इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्‍टर के लिए परिमाणयोग्‍य और टिकाऊ बुनियादी ढांचा तैयार करना है।

टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने इस अवसर पर कहा कि भारत-ब्रिटेन कार्यक्रम जैसी सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास पहलें उन्नत, उद्योग-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के विकास में तेजी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से अपनाने और भारत में एक मजबूत, कुशल और भविष्य के लिए तैयार इकोसिस्‍टम के निर्माण के लिए ईवी चार्जिंग बुनियादी ढांचे में नवोन्‍मेषण आवश्यक हैं।

एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर ने समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और रेखांकित किया कि यह परियोजना कंपनी को बाजार में अभिनव, विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी ईवी चार्जिंग समाधान लाने में सक्षम बनाएगी, जिससे फ्लीट ऑपरेटरों और बुनियादी ढांचा प्रदाताओं की बढ़ती आवश्‍यकताओं को पूरा किया जा सकेगा।