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अमित शाह ने भुज में G-7 बॉर्डर पोस्ट पर जवानों से संवाद किया, G-7 और G-13 BOP का लोकार्पण किया

गुजरात / सत्ता संदेश

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के भुज में भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित G-7 बॉर्डर आउट पोस्ट पर जवानों से संवाद और G-7 एवं G-13 बॉर्डर आउट पोस्ट का लोकार्पण किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बीएसएफ ने स्थापना से लेकर अब तक बीते 60 साल में देश की दो सबसे कठिन सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाई है। उन्होंने कहा कि इन सीमाओं पर तैनात बीएसएफ जवानों को -45 डिग्री से लेकर +45 डिग्री से अधिक तापमान तक हर परिस्थिति का सामना करना पड़ता है। कहीं कच्छ का दुर्गम रेगिस्तान है, सरक्रीक और हरामी नाले की दलदली जमीन है, तो कहीं राजस्थान के रेत के टीलों के बीच तैनात रह कर बीएसएफ जवानों को काम करना पड़ता है। श्री शाह ने कहा कि कश्मीर की बर्फीली चोटियों और सुंदरबन के जंगलों के बीच गंगासागर के किनारे से लेकर मेघालय और असम के पहाड़ी और वन क्षेत्रों तक बीएसएफ ने बीते छह दशकों में फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस का दायित्व बहुत अच्छे तरीके से निभाया है। बल के 2000 जवानों ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। इसी कारण भारत सरकार और देश की 140 करोड़ जनता हमेशा बीएसएफ के प्रति आदर का भाव रखती है और चैन की नींद भी सोती है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बनासकांठा में एक केन्द्र बनाया गया है, ताकि आम जनता को बीएसएफ जवानों की कठिन ड्यूटी का पता चल सके। उन्होंने कहा कि बीते एक महीने में लगभग 2.5 लाख से ज्यादा लोगों ने इस केन्द्र में जाकर बीएसएफ की ड्यूटी के बारे में जाना-समझा है। श्री शाह ने कहा कि शुरू में फीडबैक फॉर्म के जरिए एक सर्वे करवा कर लोगों से बीएसएफ की ड्यूटी के बारे में उनके विचार पूछे गए थे। उस समय कई महिलाओं ने लिखा था कि अगर उनके बेटे-बेटियां बड़े होकर बीएसएफ में जाएं तो उन्हें गर्व होगा। देश के लिए इतना कठिन जीवन जीना बहुत बड़ी बात है। देश की जनता के लिए फीडबैक फॉर्म को ऑनलाइन कर दिया गया है।

अमित शाह ने कहा कि बीएसएफ की स्थापना के 60वें साल में हमने बीएसएफ की सीमा सुरक्षा की अवधारणा को पूरी तरह बदलने का निर्णय किया है। हम आने वाले दिनों में एक ‘चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड’ बनाएंगे और बॉर्डर की सुरक्षा की जगह ‘टेरिटोरियल सुरक्षा’ का नया कॉन्सेप्ट लॉन्च करेंगे। उन्होंने कहा कि इसमें जनता, सिविल प्रशासन, स्थानीय पुलिस और मिलिट्री के साथ ही बीएसएफ जवानों की भी प्रमुख जिम्मेदारी होगी। श्री शाह ने कहा कि हम स्मार्ट बॉर्डर सिक्युरिटी प्रोजेक्ट के तहत सीमा पर सुरक्षा ग्रिड को मजबूत बनाने का काम कर रहे हैं। इसमें हजारों करोड़ रुपए का निवेश किया जा रहा है और उन्हें विश्वास है कि ड्रोन, रेडार, वॉच टावर, अत्याधुनिक तकनीक और जवानों की तैनाती से एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड खड़ी होगी। इसके बाड़ कोई हमारी सरहद को भेदने की हिम्मत नहीं कर पाएगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि हम नए क्षेत्रों को भी बीएसएफ को देने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सुरक्षा ग्रिड में सबसे बड़ी कमी बंगाल में बॉर्डर पर अधूरी फेंसिंग थी। भौगोलिक परिस्थिति को तो नहीं बदला जा सकता, लेकिन जहां जमीन है और बॉर्डर फेंस बन सकती है, वहां भी हमें जमीन नहीं मिली थी। लेकिन पिछले दिनों बंगाल की जनता के आशीर्वाद से बंगाल में हमारी पार्टी की सरकार बनी और मुख्यमंत्री जी ने एक सप्ताह के भीतर ही बॉर्डर पर फेंसिंग के लिए जमीन देने का फैसला सैद्धांतिक तौर पर कर दिया है और कुछ जमीन दे भी दी है। उन्होंने कहा कि फेंसिंग पूरी होते ही हम घुसपैठ रोकने में सफल होंगे। जंगल एवं नदी-नालों के रास्ते घुसपैठ रोकने के लिए वहाँ भी तकनीकी फेंसिंग का काम तेजी से किया जा रहा है। आने वाले दिनों में बीएसएफ के जवानों के पराक्रम, साहस और कर्तव्य निष्ठा के कारण पूरा बॉर्डर सुरक्षित होगा।

CCPA ने खतरनाक और विस्फोटक पदार्थों की ऑनलाइन बिक्री पर सख्त कार्रवाई शुरू की

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के अंतर्गत डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर खतरनाक रसायनों, विस्फोटक पदार्थों और संबंधित अग्रदूतों की अनधिकृत ऑनलाइन बिक्री और विज्ञापन के खिलाफ नियामक कार्रवाई शुरू की है। इस कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ता सुरक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा और जिम्मेदार ई-कॉमर्स प्रथाओं को मजबूत करना है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर खतरनाक और विनियमित पदार्थों की ऑनलाइन लिस्टिंग और बिक्री के संबंध में मिली सूचनाओं के बाद यह कार्रवाई शुरू की है, जिसमें शामिल इंडियामार्ट, जस्टडायल, सिग्मा-एल्ड्रिच इंडिया, डायल4ट्रेड, एक्सपोर्टर्स इंडिया हैं।

पहचाने गए पदार्थों में विस्फोटक कारक और खतरनाक रसायन शामिल हैं जो उचित सुरक्षा उपायों और सत्यापन प्रक्रिया के बिना बेचे जाने पर सार्वजनिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। ऐसे खतरनाक पदार्थों तक अनधिकृत ऑनलाइन पहुंच उपभोक्ताओं को गंभीर सुरक्षा जोखिमों और अवैध आपूर्ति चैनलों के संपर्क में ला सकती है।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने प्रारंभिक जांच के दौरान पाया कि ऑनलाइन सूचीबद्ध या विज्ञापित किए जा रहे कई खतरनाक रसायन और विस्फोटक पदार्थ सार्वजनिक सुरक्षा और खतरनाक पदार्थों के प्रबंधन को नियंत्रित करने वाले विभिन्न कानूनों और नियामक ढांचों के अंतर्गत विनियमित, प्रतिबंधित, नियंत्रित या निषिद्ध हैं।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण द्वारा शुरू की गई हस्तक्षेप और प्रवर्तन कार्रवाइयों के बाद कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और संस्थाओं ने खतरनाक रसायनों और विस्फोटक पदार्थों से संबंधित सूचियों को हटाना, अवरुद्ध करना, प्रतिबंधित करना या सूची से हटाना शुरू कर दिया है।

यह कार्रवाई सरकार की इस प्रतिबद्धता को मजबूत करती है कि डिजिटल बाजार यह सुनिश्चित करें कि वे लागू कानूनों और उपभोक्ता सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते हुए विनियमित या खतरनाक पदार्थों तक अनधिकृत पहुंच को बढ़ावा न दें।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करने, सुरक्षित डिजिटल बाज़ार सुनिश्चित करने, अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने और तेजी से विकसित हो रहे ई-कॉमर्स इकोसिस्टम में उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।