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वोटर लिस्ट के SIR की तैयारियां तेज, DC हिमांशु जैन ने अधिकारियों संग की समीक्षा बैठक

लुधियाना / सत्ता संदेश

डिप्टी कमिश्नर-कम-डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर हिमांशु जैन ने जिले में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)-2026 एक्टिविटीज़ को आसानी से चलाने और असरदार मैनेजमेंट के लिए डिस्ट्रिक्ट लेवल के नोडल ऑफिसर्स और असिस्टेंट नोडल ऑफिसर्स को अपॉइंट किया है। डिप्टी कमिश्नर ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की एक्टिविटीज़ का रिव्यू करने के लिए लोकल बचत भवन लुधियाना में इन नोडल ऑफिसर्स और असिस्टेंट नोडल ऑफिसर्स के साथ मीटिंग की।

डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर ने बताया कि इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के लिए प्रोग्राम जारी किया है और SIR से जुड़ी हर एक्टिविटी को आसानी से करने के लिए डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन की सीधी देखरेख में डेडिकेटेड टीमें बनाई गई हैं।

हिमांशु जैन ने बताया कि नियुक्त नोडल ऑफिसर शिकायत निवारण, IT से जुड़ी समस्याओं का समाधान, ट्रेनिंग मैनेजमेंट, कंटेंट मैनेजमेंट, सोशल मीडिया कोऑर्डिनेशन, SWEEP अवेयरनेस एक्टिविटी, SIR से जुड़े ज़रूरी मुद्दों की रिपोर्टिंग, कानूनी मामले, BLO की भलाई और हेल्प डेस्क ऑपरेशन जैसे ज़रूरी कामों की देखरेख करेंगे।

उन्होंने बताया कि रिवीजन प्रोसेस के बेहतर कोऑर्डिनेशन और असरदार तरीके से लागू करने के लिए असिस्टेंट नोडल ऑफिसर भी तैनात किए गए हैं। डिप्टी कमिश्नर ने आगे बताया कि ये टीमें SIR प्रोसेस के दौरान लोगों की मदद भी करेंगी और यह पक्का करेंगी कि योग्य वोटरों को डॉक्यूमेंटेशन और वेरिफिकेशन प्रोसेस के दौरान किसी भी तरह की दिक्कत न हो।

डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर ने डिस्ट्रिक्ट लेवल नोडल ऑफिसर और असिस्टेंट नोडल ऑफिसर को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को ध्यान में रखते हुए दिए गए काम के बारे में पूरी लगन, ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी के साथ काम करने का निर्देश दिया। हिमांशु जैन ने कहा कि सभी नोडल टीमों के काम और प्रोग्रेस पर एडिशनल डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर पूनम सिंह नज़र रखेंगी ताकि दी गई ज़िम्मेदारियों को समय पर पूरा किया जा सके। इसके अलावा, SIR से जुड़ी लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेटिव कॉम्प्लेक्स में एक डेडिकेटेड हेल्प डेस्क भी बनाया गया है।

डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर ने कहा कि पंजाब राज्य में SIR का काम 15 जून से शुरू किया जाना है। पंजाब राज्य में वोटर लिस्ट की वैलिडिटी 1 अक्टूबर तय की गई है। जिसके अनुसार, 15 जून से 24 जून तक गिनती के फॉर्म की तैयारी, ट्रेनिंग और प्रिंटिंग का समय होगा। 25 जून से 24 जुलाई तक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर गिनती के फॉर्म बांटेंगे। गिनती के फॉर्म में वोटर की सारी डिटेल्स होंगी और BLO तीन बार वोटर के घर जाएंगे।

उन्होंने कहा कि भारत के चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, हर पोलिंग बूथ पर 1200 से ज़्यादा वोट वाले बूथों का रैशनलाइज़ेशन 24 जुलाई को किया जाएगा। इस दौरान अगर किसी पोलिंग बूथ की बिल्डिंग शिफ्ट होने वाली है या किसी पोलिंग बूथ की बिल्डिंग का नाम ठीक किया जाने वाला है, तो उसे भी ठीक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट पब्लिकेशन 3 अगस्त को किया जाएगा और 3 अगस्त से 2 सितंबर तक दावे और आपत्तियां ली जाएंगी। मिले दावों और आपत्तियों का निपटारा 28 सितंबर तक इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर करेंगे और वोटर लिस्ट का फाइनल पब्लिकेशन 1 अक्टूबर को किया जाएगा।

एडीसी पूनम सिंह ने कटाई के अंतिम दिनों में किसी भी घटना को रोकने के लिए कड़ी निगरानी के आदेश दिए हैं।

लुधियाना / सत्ता संदेश

जैसे-जैसे लुधियाना में गेहूं की कटाई का मौसम अंतिम चरण में पहुंच रहा है, अतिरिक्त उपायुक्त (जनरल) पूनम सिंह ने बुधवार को इन महत्वपूर्ण अंतिम दिनों में पराली जलाने की शून्य घटनाएं सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

विभिन्न विभागों—कृषि एवं किसान कल्याण, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB), राजस्व, पुलिस, पंचायत, मंडी बोर्ड, सहकारिता तथा अन्य हितधारकों के अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए सिंह ने बताया कि इस वर्ष लगभग 2.38 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती हुई है, जिससे कटाई का अंतिम चरण सख्त निगरानी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

सिंह ने उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDMs) और नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कड़ी निगरानी बनाए रखें और पराली जलाने के किसी भी मामले पर तुरंत कार्रवाई करें। उन्होंने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने पर जोर देते हुए सभी विभागों के बीच समन्वित और तीव्र प्रयासों की आवश्यकता बताई।

उन्होंने अधिकारियों से किसानों के बीच जागरूकता अभियान को और तेज करने की अपील की, जिसमें कैंप, मोबाइल वैन और जानकारी सामग्री के माध्यम से पराली जलाने के दुष्प्रभावों—जैसे वायु प्रदूषण, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट, पोषक तत्वों की हानि तथा धुएं और सूक्ष्म कणों से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम—के बारे में बताया जाए।

प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों के बारे में मार्गदर्शन और सहायता प्रदान की जाएगी। कृषि, प्रदूषण नियंत्रण, राजस्व, सहकारिता और पंचायत सहित सभी विभागों को मिलकर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कटाई के अंत में पर्यावरण को कोई नुकसान न हो।