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‘स्वच्छता ही सेवा 2026’: PIB-CBC चंडीगढ़ ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत किया पौधारोपण

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के तहत पत्र सूचना कार्यालय (PIB) और केंद्रीय संचार ब्यूरो (CBC), चंडीगढ़ की ओर से केंद्रीय सदन, सेक्टर-9 में ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत पौधारोपण अभियान आयोजित किया गया। इस दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों ने केंद्रीय सदन के लॉन में छह पौधे लगाए।

अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सामूहिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

सफाई मित्रों को किया सम्मानित

‘विशेष अभियान 6.0’ के तहत CBC चंडीगढ़ ने कार्यालय परिसर में स्वच्छता बनाए रखने में उल्लेखनीय योगदान देने वाले तीन सफाई मित्रों को सम्मानित किया। उन्हें प्रमाण पत्र, शील्ड, स्वच्छता किट और टिफिन बॉक्स प्रदान किए गए।

इस अवसर पर PIB चंडीगढ़ के निदेशक प्रीतम सिंह ने कहा कि पेड़ लगाना केवल पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधि नहीं है, बल्कि प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम भी है। उन्होंने लोगों से पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल करने की भी अपील की।

PIB चंडीगढ़ की उप निदेशक सपना ने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि अपने आसपास का वातावरण साफ रखना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने सफाई मित्रों के योगदान की सराहना की।

PIB चंडीगढ़ की सहायक निदेशक शीनम जैन ने पौधारोपण के बाद पौधों की देखभाल के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ की भावना केवल पौधा लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके विकास और संरक्षण की जिम्मेदारी लेना भी जरूरी है।

मीडिया एवं संचार अधिकारी अहमद खान ने कहा कि स्वच्छता एक साझा जिम्मेदारी है, जिसके लिए नागरिकों, संस्थाओं और समुदायों की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।

परिसर में चलाया स्वच्छता अभियान

पौधारोपण के साथ कर्मचारियों ने केंद्रीय सदन परिसर और आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता अभियान भी चलाया। इस दौरान स्वच्छ और साफ सार्वजनिक स्थानों को बनाए रखने का संदेश दिया गया।

आयोजकों के अनुसार, इन गतिविधियों के माध्यम से ‘स्वच्छता ही सेवा 6.0’ के तहत पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और जिम्मेदार नागरिकता के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

स्वच्छता ही सेवा 6.0: पीआईबी-सीबीसी चंडीगढ़ ने जनभागीदारी बढ़ाने के लिए चलाया स्वच्छता अभियान

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और नागरिकों में जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से पत्र सूचना कार्यालय (PIB) चंडीगढ़ और केंद्रीय संचार ब्यूरो (CBC) चंडीगढ़ की ओर से ‘स्वच्छता ही सेवा 6.0’ के तहत विभिन्न स्वच्छता एवं जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। यह अभियान 17 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।

पीआईबी चंडीगढ़ के निदेशक प्रीतम सिंह ने कहा कि स्वच्छता को केवल विशेष अवसरों या एक-दिवसीय अभियान तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक आदत और सामूहिक जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब प्रत्येक व्यक्ति अपने घर, कार्यस्थल, आसपास के क्षेत्र और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी निभाता है, तो इससे अनुशासन, जिम्मेदारी और अपने परिवेश के प्रति सम्मान की संस्कृति विकसित होती है।

पीआईबी चंडीगढ़ की उप निदेशक सपना ने भी स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण के निर्माण में जनभागीदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर किए गए छोटे प्रयास जब सामूहिक रूप से किए जाते हैं तो उनका प्रभाव व्यापक हो सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ संदेश के साथ लोगों से स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

अभियान के तहत कार्यालय परिसर में स्वच्छता, जागरूकता और जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर कई गतिविधियां आयोजित की गईं। 18 सितंबर को बैठक के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें स्वच्छता शपथ भी दिलाई गई। इसके अलावा बेसमेंट में रखे पुराने अखबारों को व्यवस्थित कर वहां सफाई की गई। कर्मचारियों और सफाई मित्रों को डेटॉल हैंडवॉश, मास्क, दस्ताने और डस्टर वितरित किए गए। कार्यालय की अलमारियों एवं स्टोरेज क्षेत्रों की सफाई और व्यवस्था के साथ-साथ स्वच्छता जागरूकता के लिए पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई गई।

अभियान के दौरान सफाई मित्रों के योगदान को भी सम्मानित किया गया। उन्हें बैग, स्मृति चिह्न और प्रमाण पत्र देकर कार्यस्थलों एवं सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखने में उनकी सेवाओं को सराहा गया।

जनभागीदारी और युवाओं की भूमिका को बढ़ावा देने के लिए पीआईबी और सीबीसी चंडीगढ़ ने माई भारत (MY Bharat) के सहयोग से युवाओं के साथ भी संवाद किया। चैतन्य टेक्नो स्कूल, सेक्टर-44, चंडीगढ़ के पास स्थित सार्वजनिक मैदान में विद्यार्थियों के साथ स्वच्छता अभियान, स्वच्छता शपथ और जागरूकता रैली आयोजित की गई। इस दौरान विद्यार्थियों को अपने घरों, शिक्षण संस्थानों और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता का संदेश फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।

अभियान के आगामी चरण में पार्किंग क्षेत्र और कार्यालय परिसर के प्रवेश द्वार के आसपास स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत कार्यालय परिसर में 10 पौधे लगाए जाएंगे। ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ के संदेश को आगे बढ़ाते हुए सेक्टर-10 स्थित लीजर वैली में भी स्वच्छता अभियान आयोजित किया जाएगा।

अभियान के तहत एकत्र किए गए पुराने अखबारों को रीसाइक्लिंग के लिए बेचने की भी योजना है। इसके माध्यम से जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन और कचरे के उत्पादक उपयोग का संदेश दिया जाएगा।

‘स्वच्छता ही सेवा 6.0’ की गतिविधियां 2 अक्टूबर को संपन्न होंगी। पीआईबी और सीबीसी चंडीगढ़ का उद्देश्य स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित रखने के बजाय इसे नागरिकों की दैनिक आदत और सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करना है।

2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य, PIB चंडीगढ़ ने NCB के साथ किया ‘वार्तालाप’

भारत सरकार ने 2029 तक नशामुक्त भारत बनाने का लक्ष्य रखा है। PIB चंडीगढ़ ने NCB के सहयोग से ‘वार्तालाप’ आयोजित कर विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 की रणनीति पर चर्चा की।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने वर्ष 2029 तक देश को ‘नशामुक्त भारत’ बनाने का संकल्प लिया है। इसी दिशा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जून 2026 में ‘नशामुक्त भारत’ के लिए विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 का शुभारंभ किया गया था। इस विजन डॉक्यूमेंट के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पत्र सूचना ब्यूरो (PIB), चंडीगढ़ ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के सहयोग से बुधवार को चंडीगढ़ में ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम आयोजित किया।

कार्यक्रम के दौरान विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 के प्रमुख पहलुओं, उद्देश्यों और रणनीतियों पर चर्चा की गई। मीडिया प्रतिनिधियों को नशामुक्त भारत अभियान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने और समाज तक प्रमाणिक जानकारी पहुंचाने में मीडिया की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई।

भारत सरकार के अनुसार, वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वस्थ, अनुशासित और नशामुक्त युवा शक्ति महत्वपूर्ण आधार है। नशीले पदार्थों का दुरुपयोग स्वास्थ्य, परिवार, सामाजिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करता है। ऐसे में ‘नशामुक्त भारत 2029’ को ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ पर जोर

जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक की तीन वर्षीय कार्ययोजना को निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से हासिल करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। विजन डॉक्यूमेंट चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—खुफिया सूचना एवं अभियान आधारित प्रवर्तन, प्रीकर्सर एवं सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण, मांग एवं हानि में कमी तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय।

इन चारों स्तंभों के लिए ‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ (Detect, Disrupt and Destroy) को परिचालन मंत्र बनाया गया है।

डिटेक्ट (Detect): मादक पदार्थों के स्रोत, तस्करी के मार्ग, तस्करों, तकनीक, भुगतान माध्यमों और प्रमुख संचालकों की पहचान करना।

डिसरप्ट (Disrupt): मादक पदार्थों के परिवहन, लॉजिस्टिक्स, प्रीकर्सर की आपूर्ति, डार्कनेट नेटवर्क, हवाला और ड्रग्स से जुड़े वित्तीय नेटवर्क को निशाना बनाना।

डिस्ट्रॉय (Destroy): अवैध ड्रग लैब, अवैध खेती, तस्करी से अर्जित संपत्तियों, गिरोहों के नेतृत्व और वितरण नेटवर्क को समाप्त करने पर जोर देना।

NCB और PIB अधिकारियों ने मीडिया को दी जानकारी

‘वार्तालाप’ का संचालन NCB चंडीगढ़ के जोनल डायरेक्टर अमनजीत सिंह, गृह मंत्रालय के अपर महानिदेशक (मीडिया) राज कुमार तथा PIB चंडीगढ़ की उप निदेशक सपना द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में मीडिया प्रतिनिधियों को देशभर में मादक पदार्थों के खिलाफ की गई कार्रवाई की प्रमुख उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी गई। इसमें नशीले पदार्थों की जब्ती, गिरफ्तारियां, जांच और जब्त किए गए मादक पदार्थों को नष्ट करने जैसी कार्रवाई शामिल रही।

विजन डॉक्यूमेंट में गुप्त ड्रग प्रयोगशालाओं के विनष्टीकरण, मादक पदार्थों से जुड़े अपराधियों एवं भगोड़ों को वापस लाने, विभिन्न प्रणालियों के एकीकरण और मापनीय राष्ट्रीय परिणाम हासिल करने पर भी जोर दिया गया है।

मांग, आपूर्ति और हानि में कमी पर फोकस

कार्यक्रम के दौरान नशामुक्त भारत के लिए आपूर्ति में कमी, मांग में कमी और हानि में कमी से जुड़े रोडमैप पर भी चर्चा हुई। सरकार के अनुसार मादक पदार्थों के नेटवर्क, वित्तीय संसाधनों और भगोड़ों को लक्षित करने के साथ-साथ समस्या से निपटने के लिए ‘संपूर्ण सरकार’ (Whole-of-Government) दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।

नीति निर्माण से लेकर अभियोजन तक विभिन्न एजेंसियों के बीच संयुक्त कार्रवाई और समन्वय को मजबूत करना भी विजन डॉक्यूमेंट की प्राथमिकताओं में शामिल है।

यह विजन डॉक्यूमेंट संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों, मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसमें मादक पदार्थों की समस्या से जुड़े मांग में कमी, आपूर्ति में कमी और हानि में कमी के पहलुओं के लिए साझा रोडमैप तैयार किया गया है।

युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों पर विशेष ध्यान

रोडमैप में सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट के जरिए होने वाली तस्करी से निपटने, युवाओं में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने, उपचार एवं पुनर्वास केंद्रों तक पहुंच बढ़ाने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने के उपाय शामिल किए गए हैं।

शिक्षा मंत्रालय, युवा एवं खेल क्षेत्र से जुड़े हितधारकों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर शिक्षण संस्थानों को नशामुक्त बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा NCC, NSS और My Bharat के माध्यम से ‘नशामुक्त भारत मित्र’ तैयार करने की योजना है, जो समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने में भूमिका निभाएंगे।

‘वार्तालाप’ कार्यक्रम के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाने और समाज तक सही एवं प्रमाणिक जानकारी पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम में मीडिया को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने और नशामुक्त भारत के लक्ष्य को जन-अभियान में बदलने के लिए महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया।

पीआईबी चंडीगढ़ के पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने सीमा सुरक्षा बल की सीमा संबंधी गतिविधियों का किया अवलोकन


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में पहुँच रहा है विकास सीमा पर्यटन विकास कार्यक्रम के अंतर्गत श्री तनोट माता मंदिर कॉम्प्लेक्स परियोजना का किया अवलोकन
पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने तनोट माता के किए दर्शन

पीआईबी चंडीगढ़ द्वारा राजस्थान दौरे पर गए पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने आज सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा लोंगेवाला, तनोट तथा सीमा क्षेत्र में संचालित विभिन्न परियोजनाओं और गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सीमा क्षेत्र में सुरक्षा, प्रशिक्षण तथा सामरिक तैयारियों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। बीएसएफ अधिकारियों ने सीमा क्षेत्र में कार्य करने की विशेष परिस्थितियों और उसकी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
पीआईबी के पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने बीएसएफ की विभिन्न पहल, नवाचार, स्थानीय समुदायों के साथ समन्वय तथा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इस दौरान पत्रकार दल ने लोंगेवाला युद्ध स्थल एवं संग्रहालय का दौरा किया।
प्रतिनिधिमंडल ने तनोट में सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों से मुलाकात की और तनोट माता मंदिर के इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त की। जैसलमेर स्थित ऐतिहासिक श्री मातेश्वरी तनोट राय मंदिर का अद्भुत इतिहास है। ऐसी मान्यता है कि तनोट माता जवानों को दुश्मनों से लड़ने की शक्ति देती हैं और युद्ध के दौरान देश की रक्षा करती हैं।
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान श्री तनोट राय माता मंदिर परिसर में पाकिस्तान द्वारा कई बम गिराए गए थे, लेकिन मान्यता के अनुसार तनोट माता के चमत्कार से कोई भी बम नहीं फटा। इसी कड़ी में प्रतिनिधिमंडल ने जैसलमेर में सीमा पर्यटन विकास कार्यक्रम के अंतर्गत श्री तनोट मंदिर कॉम्प्लेक्स परियोजना का भी अवलोकन किया। इस परियोजना के तहत यहाँ आने वाले युवा श्री तनोट माता मंदिर के दर्शन करने के साथ-साथ देश के बहादुर सैनिकों के शौर्य और बलिदान के इतिहास को भी करीब से जान पाएंगे।
इस परियोजना के अंतर्गत प्रतीक्षालय, रंगभूमि, इंटरप्रिटेशन केंद्र, बच्चों के लिए कक्ष तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में पहली बार सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास पहुँच रहा है। बॉर्डर टूरिज्म की दूरदर्शी पहल के परिणामस्वरूप न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का जीवनस्तर बेहतर हो रहा है, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा को भी मजबूती मिल रही है।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सीमा क्षेत्र के दौरे के दौरान सीमा सुरक्षा बल द्वारा सीमा की सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी भी प्राप्त की। बीएसएफ द्वारा नवीन तकनीकों और आधुनिक संसाधनों के उपयोग पर भी विशेष बल दिया जा रहा है।
अवलोकन के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने रेगिस्तानी क्षेत्र में सीमा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों, तकनीकी संसाधनों के उपयोग, कठिन पर्यावरणीय परिस्थितियों में किए जाने वाले प्रशिक्षण तथा सीमा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।