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नीतिगत गतिरोध से विकसित भारत तक: मोदी युग ने भारत को नए सिरे से परिभाषित किया

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

वर्ष 2014 के बाद से, भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। इसकी अर्थव्यवस्था कहीं अधिक मजबूत हुई है। बुनियादी ढांचा निश्चित रूप से बेहतर हुआ है। महिलाएं बेहद सशक्त हुईं हैं। किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं और गरीब अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित हुए हैं। इन तमाम बदलावों में एक ही बात साझा है: प्रधानमंत्री मोदी की दूरदृष्टि और उनका नेतृत्व।

भारत के लोगों ने उनके दूरदर्शी एवं संवेदनशील नेतृत्व का भरपूर समर्थन किया है और उन्हें देश का सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाला निर्वाचित प्रधानमंत्री बनाया है। बीते 10 जून को उन्होंने राष्ट्र की सेवा में 4,399 दिन पूरे किए और अपनी पहली चुनावी जीत के बाद जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए आगे निकल गए।

यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। देश के लोगों ने ऐसे समय में 2014 में मोदी सरकार को भारी बहुमत से सत्ता सौंपी, जब अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही थी और यूपीए सरकार के बदनाम कार्यकाल के दौरान नीतिगत गतिरोध, भ्रष्टाचार, घोटालों एवं विवादों को लेकर जनता में निराशा लगातार बढ़ रही थी।

संवेदनशील नेतृत्व – 2014 से देश निरंतर बदलाव की यात्रा पर है। मोदी सरकार ने 81 करोड़ से अधिक लोगों के लिए मुफ्त अनाज की व्यवस्था की, 58 करोड़ जन धन बैंक खातों के जरिए वित्तीय समावेशन को संभव बनाया और 16 करोड़ घरों तक नल के पानी का कनेक्शन पहुंचाया। दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना, ‘आयुष्मान भारत’ के जरिए 12 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की गारंटी मिल रही है। 

कई युवा भारतीयों के लिए यह कल्पना करना मुश्किल हो सकता है कि मोदीजी द्वारा – पहले गुजरात के मुख्यमंत्री और बाद में प्रधानमंत्री के रूप में – लाए गए बड़े बदलावों से पहले जीवन कितना चुनौतीपूर्ण था। उनके निर्णायक नेतृत्व और नेक एवं संवेदनशील दृष्टिकोण ने देश को ‘विकसित भारत 2047’ मिशन की दिशा में आगे बढ़ाया है। इस मिशन में भारत की विरासत पर गर्व और विकास का एक महत्वाकांक्षी एजेंडा शामिल है।

नारी शक्ति

प्रधानमंत्री के लिए महिलाएं केवल सहायता की लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माता हैं। सबसे पहले उनकी बुनियादी जरूरतों पर ध्यान दिया गया: स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए। इससे उनकी सुरक्षा और सम्मान में वृद्धि हुई। वहीं, उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए। इससे महिलाओं को धुएं से भरी रसोई के खतरों से मुक्ति मिली।

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की पहल ने बेटियों की शिक्षा एवं उनके कल्याण के महत्व को और ठोस बनाया है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के जरिए, प्रधानमंत्री ने महिलाओं के नेतृत्व में विकास को आगे बढ़ाने के लिए देश की विधायिकाओं में महिलाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की है।

किसानों का कल्याण

किसानों का कल्याण प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का एक मुख्य आधार रहा है। किसानों के योगदान को मान्यता देते हुए, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के जरिए उन्हें सीधे आय संबंधी सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत बांटे गए कुल 4.28 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि से लगभग 10 करोड़ किसान परिवारों को लाभ हुआ है।

सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भी काफी बढ़ोतरी की है, जो अब उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना है। साथ ही, किफायती दरों पर फसलों के लिए पोषक तत्व उपलब्ध कराकर किसानों को वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी से बचाया गया है।

युवाओं के लिए अवसर

युवा भारतीयों के लिए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी प्रमुख पहलें शुरू की गई हैं। ‘कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय’ के रूप में एक समर्पित मंत्रालय के गठन से जहां युवाओं को आधुनिक अर्थव्यवस्था के अनुकूल कौशल से लैस करने में मदद मिली है, वहीं भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के क्षेत्र में उभरती हुई क्रांति का लाभ उठाने के लिए तैयार भी किया गया है।

‘स्टार्टअप इंडिया’ और नवाचार को दिए गए व्यापक समर्थन ने कई युवाओं को नौकरी खोजने वाला से हटकर नौकरी देने वाला बनने में मदद की है। इन पहलों ने उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) की एक ऐसी नई लहर की नींव रखी है, जिसमें आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के मामले  में अहम योगदान देने की क्षमता है।

अर्थव्यवस्था और जीवनयापन में सुगमता

वर्ष 2014 से पहले, भारत की गिनती दुनिया की “फ्रैजाइल फाइव” (कमजोर पांच) अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में होती थी। निवेशकों का भरोसा भी लगातार कम हो रहा था। साहसिक सुधारों, निवेशकों के लिए अनुकूल नीतियों, वित्तीय अनुशासन और अपेक्षाकृत कम महंगाई के सहारे, भारत अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है और यह कारोबार व निवेश का एक आकर्षक स्थल बनता जा रहा है।

भारत ने विभिन्न विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। इससे हमारे युवाओं, किसानों, छोटे व्यवसायों, कारीगरों और श्रमिकों के लिए वैश्विक स्तर पर नए अवसर खुले हैं। और ऐसा भारत के हितों से समझौता किए बिना किया गया है। यह यूपीए सरकार द्वारा किए गए कुछ लापरवाही भरे समझौतों से बिल्कुल अलग है।

सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और करों की कम दरों जैसे बड़े सुधारों के जरिए  कारोबार जगत और मध्यम वर्ग का भरोसा भी बढ़ाया है। इंटरनेट की पैठ और डिजिटल भुगतान प्रणाली के तेज विस्तार के साथ मिलकर, ‘डिजिटल इंडिया’ पहल ने अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डालने के साथ-साथ नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन को भी आसान बनाया है।

कई पुराने एवं मामूली अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने तथा अनुपालन के अनावश्यक बोझ को कम करने से कारोबार जगत को और भी अधिक लाभ हुआ है। मध्यम वर्ग को भी काफ़ी राहत मिली है और 12.75 लाख रुपये तक की सालाना आय को आयकर से छूट दे दी गई है।

आधुनिक बुनियादी ढांचा

मोदी सरकार देश के बुनियादी ढांचे में तेजी से बदलाव ला रही है। सक्रिय हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। वर्ष 2014 में सक्रिय हवाई अड्डों की संख्या 74 थी और अब यह 160 से अधिक हो गई है।

बड़े पैमाने पर रेलवे के विद्युतीकरण, महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना और राष्ट्रीय राजमार्गों  व एक्सप्रेसवे के तेज विस्तार ने देश के कई हिस्सों के बुनियादी ढांचे को दुनिया के बेहतरीन बुनियादी ढांचों की बराबरी में ला खड़ा किया है।

प्रधानमंत्री की इस ऐतिहासिक उपलब्धि का वास्तविक महत्व कार्यकाल के दिनों की गिनती में नहीं, बल्कि किए गए व्यापक बदलावों में निहित है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने गरीबों एवं  किसानों के कल्याण, मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं और उभरते भारत की महत्वाकांक्षाओं को शासन के केन्द्र में रखा है।

अब जबकि देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है, 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण के नए संकल्प के साथ बदलाव की यह यात्रा निरंतर जारी रहेगी।

भारत ने श्रमिकों, किसानों, MSME के लिए खाड़ी देश में अवसरों के द्वार खोले

दिल्ली / सत्ता संदेश

1 जून से लागू हो रहा भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस मिशन की एक निर्णायक उपलब्धि है, जिसका लक्ष्य नए बाजार खोलने और रोजगार सृजन को गति देने के जरिये भारत के छात्रों, कारीगरों, महिलाओं, किसानों, मछुआरों और एमएसएमई के लिए वैश्विक समृद्धि के मार्ग बनाना है।         

भारत और ओमान के बीच गहरे आर्थिक संबंध हैं और लोगों के आपसी संबंध प्रगाढ़ हैं। ओमान में लगभग 7 लाख भारतीय रहते हैं, जिनमें वे व्यापारी परिवार भी शामिल हैं, जिनकी जड़ें 200–300 साल पुरानी हैं। ओमान से भारत को भेजी जाने वाली वार्षिक धनराशि लगभग 2 बिलियन डॉलर है, जबकि देश में 6,000 से अधिक भारतीय उद्यम कार्यरत हैं। 

दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (सीईपीए) आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को महत्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ करता है। यह तुरंत ही ओमान में 98% टैरिफ लाइनों के लिए 100 प्रतिशत शुल्क मुक्त बाजार पहुंच की सुविधा देता है, जिसमें 99.38 प्रतिशत निर्यात शामिल है।

यह सीईपीए से पहले की प्रणाली की तुलना में एक उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है। पहले की प्रणाली में केवल 15.3 प्रतिशत भारतीय निर्यात ओमान में शून्य शुल्क के साथ प्रवेश कर सकते थे। भारत की ऐसी वस्तुएं, जिन पर वर्तमान में ओमान में 5 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है और जिनकी कीमत लगभग 3.64 बिलियन डॉलर के निर्यात के बराबर है, अब काफी अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगी।

भारत के एमएसएमई क्षेत्र के लिए, यह समझौता परिवर्तनकारी हो सकता है, क्योंकि सीईपीए से लाभान्वित होने वाले कई क्षेत्रों में छोटे व्यवसायों की प्रमुखता है। लोहा और इस्पात, वस्त्र, चमड़ा, वाहन कल-पुर्जे और औद्योगिक उपकरण जैसे कुछ क्षेत्रों में एमएसएमई को बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर मिलने की उम्मीद है, जिससे उत्पादन, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

बढ़ती वैश्विक अस्थिरता के युग में, सीईपीए भारतीय निर्यातकों को, जो आर्थिक मंदी और बढ़ते व्यापार बाधाओं का सामना कर रहे हैं, अपने बाजारों को विविध बनाने और परंपरागत बाजारों पर निर्भरता कम करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

रोज़गार सृजन – यह व्यापार समझौता श्रम-गहन क्षेत्रों जैसे वस्त्र और परिधान, चमड़ा और जूते, खाद्य प्रसंस्करण, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण और कुछ इंजीनियरिंग क्षेत्रों को लाभ पहुँचाता है, जो भारत के प्रमुख रोजगार प्रदाता हैं।

ओमान को होने वाले वस्त्र निर्यात में वृद्धि से उत्पादन में बढ़ोतरी होगी और तिरुपुर, सूरत, लुधियाना, पानीपत, कोयंबटूर, करूर, भदोही, मुरादाबाद, जयपुर और अहमदाबाद जैसे प्रमुख क्लस्टर में रोजगार के अवसरों का सृजन होगा। भारत भर के कारीगर और बुनकर भी अपने उत्पादों की उच्च अंतरराष्ट्रीय मांग से लाभान्वित होंगे।

भारत भर में, विशेष रूप से तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में, साथ ही महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों समेत चमड़ा और जूता के प्रमुख केंद्रों में भी रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

रत्न और आभूषण क्षेत्र एक अन्य उदाहरण है, जो दिखाता है कि सीईपीए रोजगार वृद्धि को किस प्रकार तेज करेगा। भारत के पास पहले से ही कटे और पॉलिश किए हुए हीरे, सोने और चांदी के आभूषण तथा हस्तनिर्मित आभूषण उत्पादन में मजबूत क्षमताएं हैं। शुल्क बाधाओं के हटने से, भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय और एशियाई प्रतिस्पर्धियों पर निर्णायक बढ़त मिलेगी। उद्योग जगत का अनुमान है कि अगले तीन वर्षों में ओमान को होने वाला निर्यात बढ़ कर 150 मिलियन डॉलर तक हो सकता है। इससे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के आभूषण निर्माण केन्द्रों में महत्वपूर्ण रोजगार संभावनाएं सृजित होने की उम्मीद है।

किसान और मछुआरे – घरेलू किसानों और संवेदनशील कृषि हितों की सुरक्षा के लिए, भारत ने गेहूं, चावल, मक्का, मोटे अनाज, डेयरी, फल, सब्जियां, खाद्य तेल, तिलहन, चाय, कॉफी और शहद जैसे प्रमुख उत्पादों पर कोई टैरीफ छूट नहीं दी है।

घी, शहद, मीठे बिस्कुट, अंडे और कुछ मिष्ठान्न उत्पादों में भारत को प्रतिद्वंद्वियों पर प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा, जिससे देश के कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी और ग्रामीण आय में वृद्धि होगी।

यह समझौता भारत के राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) प्रमाणन की स्वीकृति और मान्यता भी प्रदान करता है, जो भारतीय किसानों को ओमान में, जो एक प्रमुख खाद्य आयातक है, जैविक उत्पाद बेचने के लिए विशाल अवसर देगा।

समुद्री उत्पादों में भी विशाल संभावनाएँ हैं, जिनका अब तक उपयोग नहीं हो पाया है। 2022 और 2024 के बीच ओमान का समुद्री उत्पादों का आयात लगभग 119 मिलियन डॉलर था। भारत से आयात केवल 7.75 मिलियन डॉलर था, जिससे भारतीय समुद्री खाद्य निर्यात जैसे झींगा और जमे हुए कटलफिश के लिए विशाल अवसर मौजूद हैं। श्रम-गहन समुद्री उत्पाद उद्योग मछली पकड़ने, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, शीत-श्रृंखला लॉजिस्टिक्स और निर्यात संचालन में अतिरिक्त नौकरियाँ उत्पन्न कर सकता है।  

दवा और पारंपरिक चिकित्सा – यूएसएफडीए, ईएमए, यूके एमएचआरए और टीजीए जैसे नियामकों द्वारा अनुमोदित भारतीय दवाएं 90 दिनों के भीतर ओमान में स्वचालित विपणन प्राधिकार प्राप्त करेंगी — जो भारतीय फार्मा निर्यातकों के लिए एक बड़ी सफलता है।

यह भी महत्वपूर्ण है कि सीईपीए भारत की पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के लिए अवसर पैदा करता है। यह पारंपरिक चिकित्सा में संयुक्त अनुसंधान की व्यवस्था करता है।  

सेवाएँ और आवागमन – समझौते का एक और महत्वपूर्ण पहलू सेवा और आवागमन में निहित है। ओमान ने भारत के लिए विशिष्ट निर्यात क्षेत्रों में व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएँ व्यक्त की है, जिनमें पेशेवर सेवाएँ, कंप्यूटर और आईटी सेवाएँ, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन, अनुसंधान और विकास तथा पर्यावरण सेवाएँ शामिल हैं। लेखा, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, निर्माण, शिक्षा और परामर्श जैसे क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों को बेहतर बाज़ार पहुँच से लाभ मिलने की उम्मीद है।  

महत्त्वपूर्ण रूप से, ओमान ने भारतीय पेशेवरों और श्रमिकों के लिए आवागमन प्रतिबद्धताओं में वृद्धि पर सहमति व्यक्त की है। अंतर-कॉर्पोरेट स्थानांतरित कर्मियों और संविदा सेवा प्रदाताओं को चार साल तक रहने की अनुमति दी जाएगी, जबकि व्यवसाय आगंतुकों और स्वतंत्र पेशेवरों को आसान अस्थायी प्रवेश की सुविधा मिलेगी। इसने अंतर-कॉर्पोरेट स्थानांतरित कर्मियों के लिए ऊपरी-सीमा को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है।

विकसित देशों के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की मोदी सरकार की पहल  प्रत्येक भारतीय के जीवन को बेहतर बनाने के प्रधानमंत्री के मिशन का हिस्सा है।

ओमान के साथ समझौता याद दिलाता है कि व्यापार; विकास, रोजगार सृजन और साझा समृद्धि का एक शक्तिशाली उपकरण है। एक विभाजित और संरक्षणवादी दुनिया में, पीएम मोदी स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि एक नया, आत्मविश्वासी भारत पीछे नहीं हटेगा। यह साझेदारियों, प्रतिस्पर्धा और वैश्विक सहभागिता के माध्यम से आगे बढ़ेगा।

(लेखक केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री हैं।)

‘बिरसा लिव्स इन न्यू भारत वीक’ के तहत राष्ट्रपति छात्रवृत्ति लाभार्थी जनजातीय छात्रों से करेंगी संवादात्मक बैठक

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

जनजातीय गरिमा उत्सव के राष्ट्रव्यापी समारोह के अंतर्गत, जनजातीय कार्य मंत्रालय अपनी प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र छात्रवृत्ति योजनाओं के लाभार्थियों के साथ राष्ट्रपति की एक विशेष संवादात्मक बैठक का आयोजन करेगा।

यह संवाद “बिरसा लिव्स इन न्यू भारत वीक” के दौरान आयोजित किया जा रहा है जो 25 मई से 2 जून तक भगवान बिरसा मुंडा की प्रेरणादायक विरासत की स्मृति में मनाया जा रहा है। भगवान बिरसा मुंडा साहस, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के प्रतीक थे। 10 मई से 9 जून 2026 तक मनाया जा रहा “जनजातीय गरिमा उत्सव” भारत के राष्ट्र निर्माण में जनजातीय समुदायों की समृद्ध विरासत, सांस्कृतिक धरोहर और अमूल्य योगदान का सम्मान करता है और आदिवासी युवाओं को शिक्षा, नेतृत्व, नवाचार और प्रधानमंत्री की विकसित भारत की परिकल्पना में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है।

मंत्रालय की छात्रवृत्ति योजनाओं से लाभान्वित देशभर के लगभग 200 जनजातीय विद्यार्थी राष्ट्रपति के साथ इस संवाद कार्यक्रम में भाग लेंगे। ये विद्यार्थी जनजातीय समुदायों के कुछ सबसे प्रतिभाशाली युवा हैं जो उच्च शिक्षा, उन्नत अनुसंधान और अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रयासरत हैं। इस प्रकार का संवाद शिक्षा सशक्तिकरण, सामाजिक समावेशन और राष्ट्र निर्माण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता के बारे में एक सशक्त और सकारात्मक संदेश देगा, जिससे विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को साकार किया जा सकेगा।

अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप एक वित्तपोषित केंद्रीय क्षेत्र योजना है जो देश में पीएचडी कर रहे मेधावी अनुसूचित जनजाति छात्रों को सहायता प्रदान करती है। प्रतिवर्ष 750 नई फेलोशिप प्रदान की जाती हैं और वर्तमान में लगभग 3,000 विद्यार्थी इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं।

उच्च शिक्षा के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कानून, प्रबंधन और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में 265 प्रमुख संस्थानों में स्नातक और स्नातकोत्तर अध्ययन कर रहे एसटी छात्रों को सहायता प्रदान करती है। प्रतिवर्ष लगभग 2,500 नई छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं, जबकि वर्तमान में लगभग 7,000 छात्र इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं।

राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति योजना मेधावी एसटी छात्रों को विदेशों में विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम बनाती है। विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों के समन्वय से कार्यान्वित यह योजना प्रतिवर्ष 20 वित्तीय सहायता प्रदान करती है। वर्तमान में, लगभग 70 छात्र इस योजना के अंतर्गत अग्रणी अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं।

इस विशेष संवाद का उद्देश्य जनजातीय समुदाय के छात्रों को अकादमिक उत्कृष्टता, नेतृत्व और नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है, साथ ही समावेशी और परिवर्तनकारी जनजातीय सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करना है।

जी. किशन रेड्डी ने बेंगलुरु समीक्षा बैठक में लंबित खनन परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सोमवार को मंत्रालय के अधीन सभी खनन एवं अन्वेषण एजेंसियों को लंबित परियोजनाओं में तेजी लाने और भारत की खनिज सुरक्षा एवं रणनीतिक विकास उद्देश्यों को सुदृढ़ करने के लिए मिशन-मोड दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश दिया।

किशन रेड्डी ने बेंगलुरु में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, राष्ट्रीय रॉक मैकेनिक्स संस्थान, भारतीय खान ब्यूरो और रिमोट सेंसिंग और एरियल सर्वे विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकों की एक श्रृंखला की अध्यक्षता करते हुए कहा, “सभी संगठनों को लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और दक्षता प्रत्येक संस्थागत प्रक्रिया की नींव बनें। भारत की जनता और भारत सरकार इस सेक्टर में कार्यरत प्रत्येक एजेंसी से गति, जवाबदेही और स्पष्ट परिणाम की अपेक्षा करती है।”

इन बैठकों में खनिज अन्वेषण में तेजी लाने, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय क्षमताओं को मजबूत करने, टिकाऊ खनन कार्य प्रणालियों को बढ़ावा देने और संस्थागत प्रयासों को विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ संयोजित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

श्री रेड्डी ने समीक्षा के दौरान देश भर में जारी परियोजनाओं, प्रौद्योगिकीय प्रगति और अन्वेषण कार्यकलापों, विशेष रूप से दुर्लभ पृथ्वी तत्व, लिथियम, निकेल, कोबाल्ट, टंगस्टन, वैनेडियम और पीजीई सहित महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र का आकलन किया। इन संगठनों ने भारत की खनिज सुरक्षा और रणनीतिक विकास उद्देश्यों को सुद़ृढ़ करने के लिए लागू की जा रही संसाधन संवर्धन, खनिज लक्ष्यीकरण, वैज्ञानिक सर्वेक्षण, खान स्थिरता, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों और उन्नत अन्वेषण प्रणालियों पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

रेड्डी ने भारत के अन्वेषण इको-सिस्टम को मजबूत करने में उन्नत प्रौद्योगिकियों, डेटा एकीकरण और वैज्ञानिक नवाचार के महत्व पर भी बल दिया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय रॉक मैकेनिक्स संस्थान ने राष्ट्रीय महत्व की अवसंरचना और खनन सुरक्षा परियोजनाओं में अपने योगदान को प्रदर्शित किया, जिनमें जलविद्युत, मेट्रो रेल, सुरंग अभियांत्रिकी, भूकंपीय निगरानी और संवेदनशील अवसंरचनाओं के निकट नियंत्रित विस्फोट शामिल हैं। संस्थान ने रॉक मैकेनिक्स, अभियांत्रिकी भूविज्ञान, सूक्ष्म भूकंपीय निगरानी और रणनीतिक राष्ट्रीय विकास परियोजनाओं को सहयोग देने वाले भू-तकनीकी समाधानों में अपनी क्षमताओं का भी प्रदर्शन किया।

भारतीय खान ब्यूरो ने सतत खनन पद्धतियों, नीलाम किए गए खनिज ब्लॉकों के संचालन, वैज्ञानिक खान परिसमापन, खनिज संवर्धन और पर्यावरण सुरक्षा उपायों में हुई प्रगति की समीक्षा की। आईबीएम ने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के तहत विद्यमान खनन इको-सिस्टम से महत्वपूर्ण खनिजों के संवर्धन और पुनर्प्राप्ति क्षमता से संबंधित निष्कर्ष भी प्रस्तुत किए।