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विकसित भारत युवा लीडर्स संवाद 2027: हरियाणा के युवाओं के लिए बड़ा मौका, 30 सितंबर तक करें आवेदन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

विकसित भारत के निर्माण में हरियाणा के युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित भारत युवा लीडर्स संवाद-2027 को लेकर चंडीगढ़ के प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान ‘मेरा युवा भारत’, हरियाणा के संयुक्त निदेशक आकर्ष दीक्षित और सहायक निदेशक ईशा गुप्ता ने कार्यक्रम के उद्देश्य, पात्रता, चयन प्रक्रिया और युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों की विस्तृत जानकारी दी।

संयुक्त निदेशक आकर्ष दीक्षित ने प्रदेश के युवाओं से mybharat.gov.in पर पंजीकरण कर विकसित भारत प्रश्नोत्तरी में भाग लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि प्रश्नोत्तरी इस चयन प्रक्रिया का पहला चरण है और इसमें 30 सितंबर 2026 तक भाग लिया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत युवा लीडर्स संवाद-2027 केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपने विचार, नवाचार और नेतृत्व क्षमता प्रस्तुत करने का अवसर देने वाला मंच है। प्रश्नोत्तरी में बेहतर प्रदर्शन करने वाले युवाओं को आगे निबंध, जिला स्तरीय प्रतियोगिता, राज्य स्तरीय संवाद और राष्ट्रीय स्तर की चयन प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलेगा।

जनवरी 2027 में नई दिल्ली में राष्ट्रीय संवाद

विकसित भारत युवा लीडर्स संवाद-2027 का राष्ट्रीय आयोजन 10 से 12 जनवरी 2027 तक नई दिल्ली में प्रस्तावित है। चयनित युवा इस राष्ट्रीय मंच पर विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को लेकर अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत करेंगे।

कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को केवल दर्शक के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार और युवा नेतृत्वकर्ता के रूप में आगे लाना है।

पांच चरणों में होगा युवाओं का चयन

कार्यक्रम की चयन प्रक्रिया को पांच प्रमुख चरणों में बांटा गया है—

प्रश्नोत्तरी → निबंध → जिला चैंपियनशिप → राज्य स्तरीय विकसित भारत युवा लीडर्स संवाद → राष्ट्रीय स्तर का संवाद

पहले चरण में डिजिटल विकसित भारत प्रश्नोत्तरी आयोजित की जा रही है। इसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शीर्ष 10 प्रतिशत प्रतिभागियों को अगले चरण के लिए चुना जाएगा। देशभर में अधिकतम 4 लाख युवा निबंध चरण के लिए पात्र होंगे।

इसके बाद चयनित प्रतिभागियों को 500 शब्दों का निबंध प्रस्तुत करना होगा। प्रत्येक जिले से शीर्ष 50 निबंधों का चयन किया जाएगा। जिला स्तर पर विचार प्रस्तुत करने के बाद प्रत्येक जिले से शीर्ष दो युवाओं को राज्य स्तरीय विकसित भारत युवा लीडर्स संवाद में भाग लेने का अवसर मिलेगा।

चयन प्रक्रिया में विषय विशेषज्ञों और स्वतंत्र निर्णायक मंडल की भूमिका होगी तथा प्रक्रिया को योग्यता और प्रतिभा आधारित रखा गया है।

हरियाणा के युवाओं के लिए सुशासन और शहरी विकास मुख्य विषय

हरियाणा को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र क्लस्टर में शामिल किया गया है। इस क्षेत्र के लिए मुख्य विषय “भविष्य का सुशासन, शहरी परिवर्तन एवं नागरिक सेवाएं” निर्धारित किया गया है।

इस विषय के माध्यम से युवा वर्ष 2047 तक भारत में अधिक प्रभावी, पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था विकसित करने को लेकर अपने विचार और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत कर सकेंगे।

युवा इस विषय को हरियाणा की स्थानीय जरूरतों, शहरी विकास, नागरिक सुविधाओं, तकनीक, प्रशासनिक व्यवस्था और आम नागरिकों से जुड़ी समस्याओं के संदर्भ में देखते हुए अपने अभिनव सुझाव दे सकते हैं।

सांस्कृतिक गतिविधियों से लेकर युवा उद्यमिता तक अवसर

सहायक निदेशक ईशा गुप्ता ने बताया कि यह अभियान केवल प्रश्नोत्तरी तक सीमित नहीं है। युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए भी मंच उपलब्ध कराया जा रहा है।

कार्यक्रम के अंतर्गत विकसित भारत चैलेंज, सांस्कृतिक गतिविधियां, भारत के लिए डिजाइन, सामाजिक सरोकारों के लिए नवाचार, युवा उद्यमिता चुनौती और युवा संसद जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

सांस्कृतिक क्षेत्र में लोक नृत्य, लोक गीत, चित्रकला, भाषण और कविता जैसी गतिविधियों के माध्यम से भी युवा अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर सकेंगे।

15 से 29 वर्ष के युवा ले सकते हैं भाग

प्रेस वार्ता में बताया गया कि 15 से 29 वर्ष की आयु के युवा इस प्रक्रिया में भाग लेने के पात्र हैं। ‘मेरा युवा भारत’ पोर्टल पर पहले से पंजीकृत युवाओं को दोबारा पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं है। वे सीधे विकसित भारत प्रश्नोत्तरी में भाग ले सकते हैं।

आकर्ष दीक्षित ने बताया कि वर्ष 2025 में राष्ट्रीय युवा महोत्सव को विकसित भारत@2047 के संकल्प के अनुरूप पुनर्गठित करते हुए विकसित भारत युवा लीडर्स संवाद का स्वरूप दिया गया था। पिछले संस्करण में देशभर से 50 लाख से अधिक युवाओं ने प्रश्नोत्तरी में हिस्सा लिया था और करीब 3,000 युवाओं का राष्ट्रीय संवाद के लिए चयन किया गया था।

उन्होंने हरियाणा के युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों, युवा संगठनों और अन्य संबंधित हितधारकों से अभियान को व्यापक स्तर तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पात्र युवा 30 सितंबर 2026 तक mybharat.gov.in के माध्यम से विकसित भारत प्रश्नोत्तरी में भाग लेकर राष्ट्रीय स्तर के युवा नेतृत्व मंच तक पहुंचने का अवसर हासिल कर सकते हैं।

प्रेस वार्ता के अंत में कहा गया कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकार का लक्ष्य नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक और विशेष रूप से युवा शक्ति की सामूहिक भागीदारी से पूरा होने वाला राष्ट्रीय संकल्प है। हरियाणा के युवा अपनी प्रतिभा, विचार, नवाचार और नेतृत्व क्षमता के माध्यम से इस संकल्प को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पंजाब के युवाओं के लिए प्रधानमंत्री तक पहुंच का मौका, 30 सितंबर तक खुला ‘विकसित भारत क्विज़’

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब के युवाओं के लिए प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी प्रतिभा और विचार प्रस्तुत करने का अवसर सामने आया है। माय भारत पंजाब ने युवाओं से ‘विकसित भारत क्विज़’ में भाग लेने की अपील की है। यह क्विज़ विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD) 2027 का पहला चरण है और इसमें 30 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन भाग लिया जा सकता है।

प्रेस क्लब, चंडीगढ़ में मीडिया को संबोधित करते हुए माय भारत पंजाब की राज्य निदेशक (प्रभारी) रश्मीत कौर ने बताया कि क्विज़ पांच चरणों वाली पूरी तरह योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया का प्रवेश द्वार है। चयनित युवाओं को जनवरी 2027 में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय संवाद में केंद्रीय मंत्रियों, सचिवों और प्रधानमंत्री के समक्ष अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा।

VBYLD 2027 का आयोजन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है, जबकि माय भारत इसकी कार्यकारी एजेंसी है। वर्ष 1995 से आयोजित राष्ट्रीय युवा महोत्सव को वर्ष 2025 में विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप पुनर्गठित कर विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग का रूप दिया गया था। पिछले संस्करण में देशभर से 50 लाख से अधिक युवाओं ने क्विज़ में हिस्सा लिया था और करीब 3,000 युवाओं का चयन राष्ट्रीय संवाद के लिए हुआ था।

कौन ले सकता है हिस्सा?

17 अगस्त 2026 को 15 से 29 वर्ष की आयु वाला कोई भी युवा इस अभियान में भाग ले सकता है। पंजीकरण और सभी डिजिटल चरण पूरी तरह निःशुल्क हैं तथा माय भारत पोर्टल पर कई भाषाओं में उपलब्ध हैं। जो युवा पहले से माय भारत पोर्टल पर पंजीकृत हैं, उन्हें दोबारा पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी और वे सीधे क्विज़ में हिस्सा ले सकते हैं।

पंजाब के युवाओं के लिए क्या है थीम?

VBYLD 2027 में राष्ट्रीय विषयों के बजाय देश को 10 क्षेत्रीय समूहों में बांटा गया है। पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (नीति नगर) समूह में रखा गया है।

इस समूह की थीम “भविष्य का सुशासन, शहरी रूपांतरण एवं नागरिक सेवाएं” है। प्रतिभागियों के सामने यह विचार रखने की चुनौती होगी कि भारत वर्ष 2047 तक दुनिया की सबसे कुशल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था कैसे विकसित कर सकता है। जिला स्तर के विषयों में इसी थीम को पंजाब की स्थानीय परिस्थितियों से जोड़कर आगे बढ़ाया जाएगा।

पांच चरणों में होगा चयन

  • विकसित भारत क्विज़: माय भारत पोर्टल पर 30 सितंबर 2026 तक
  • विकसित भारत निबंध: चयनित प्रतिभागियों द्वारा 500 शब्दों का निबंध
  • जिला चैंपियनशिप: नवंबर 2026 में; प्रत्येक जिले के शीर्ष 50 प्रतिभागी प्रस्तुति देंगे
  • राज्य VBYLD: नवंबर-दिसंबर 2026 में राज्य मुख्यालय पर
  • राष्ट्रीय संवाद: 10 से 12 जनवरी 2027 तक नई दिल्ली में

VBYLD 2027 में केवल विकसित भारत चैलेंज ट्रैक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, डिजाइन फॉर भारत, हैक फॉर सोशल कॉज़ और यूथ सहित अन्य ट्रैक भी शामिल किए गए हैं। सांस्कृतिक ट्रैक में लोक नृत्य, लोक गीत, चित्रकला, वक्तृत्व और कविता लेखन जैसी विधाओं को शामिल किया गया है।

रश्मीत कौर ने युवाओं से समय सीमा से पहले इसमें भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि यह केवल प्रतिभा प्रदर्शन का मंच नहीं, बल्कि देश के भविष्य के नेतृत्व की खोज का अभियान है। उनके मुताबिक, 2047 में देश की संस्थाओं को नेतृत्व देने वाले युवा आज पंजाब के हर जिले में मौजूद हैं और जरूरत है कि कोई भी युवा इस अवसर से वंचित न रह जाए।

पंजीकरण: mybharat.gov.in

नाईपर मोहाली में उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस

मोहाली / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाईपर), एस.ए.एस. नगर, मोहाली में 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह उत्साह, उल्लास और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। समारोह की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन से हुई। इसके बाद नाईपर के निदेशक प्रो. दुलाल पांडा ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और उपस्थित विद्यार्थियों, कर्मचारियों एवं अन्य सदस्यों ने राष्ट्रगान का सामूहिक गायन किया।

स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को किया नमन

समारोह को संबोधित करते हुए प्रो. दुलाल पांडा ने देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि तिरंगे के नीचे एकत्रित होकर हम उन वीरों के साहस, त्याग और बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिनके संघर्ष से देश को अमूल्य स्वतंत्रता मिली।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के 79 वर्षों में भारत ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। देशवासियों की प्रतिभा, कौशल और बौद्धिक क्षमता ने भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आत्मनिर्भरता और नवाचार पर जोर

प्रो. पांडा ने कहा कि वर्ष 2026 का स्वतंत्रता दिवस ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष और विकसित भारत@2047 के लक्ष्य के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस की भावना स्वदेशी प्रौद्योगिकियों, हरित परिवर्तन और आत्मनिर्भर रक्षा के माध्यम से विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने पर केंद्रित है।

उन्होंने कहा कि वास्तविक स्वतंत्रता केवल राजनीतिक आजादी तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता, नवाचार, वैज्ञानिक सोच और निरंतर विकास भी इसके महत्वपूर्ण आधार हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख

नाईपर निदेशक ने कहा कि वर्ष 2026 में भारत ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) की सफल क्रिटिकलिटी, गगनयान और LuPEX मिशनों में प्रगति तथा क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रही प्रगति का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां भारत की वैश्विक स्तर पर एक मजबूत नवाचार केंद्र के रूप में बढ़ती भूमिका को दर्शाती हैं।

नाईपर मोहाली में दो नए मास्टर डिग्री पाठ्यक्रम शुरू

प्रो. पांडा ने कहा कि नाईपर, मोहाली को स्वास्थ्य सेवा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की विकास यात्रा में योगदान देने पर गर्व है। उन्होंने बताया कि संस्थान में बायोफार्मास्युटिकल्स में मास्टर डिग्री और फार्मास्युटिकल रेगुलेटरी साइंसेज में मास्टर डिग्री के दो नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि ये पाठ्यक्रम फार्मास्युटिकल उद्योग की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

ट्रांसलेशनल रिसर्च और इंडस्ट्री-अकादमिक सहयोग प्राथमिकता

आने वाले वर्षों के लिए नाईपर, मोहाली की संस्थागत प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए प्रो. पांडा ने कहा कि ट्रांसलेशनल रिसर्च, उद्योग-अकादमिक सहयोग, क्लिनिकल रिसर्च इकोसिस्टम, बौद्धिक संपदा का सृजन एवं लाइसेंसिंग, वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्कृष्टता, अनुपालन एवं सुशासन, क्षमता निर्माण और विद्यार्थियों का सशक्तिकरण प्रमुख क्षेत्रों में शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि फार्मास्युटिकल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आज देश के प्रमुख और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में शामिल हैं तथा भारत के भविष्य में इसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने वाली है।

विकसित भारत@2047 में नाईपर की अहम भूमिका

अपने संबोधन के अंत में प्रो. दुलाल पांडा ने कहा कि तिरंगे को नमन करते हुए जब देश विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तब यह समझना जरूरी है कि स्वतंत्रता जिम्मेदारी के साथ ही कायम रहती है।

उन्होंने कहा कि नाईपर, मोहाली की जिम्मेदारी है कि वह भारत के फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र को ऐसे भविष्य की ओर ले जाने में योगदान दे, जो नवाचार, अनुपालन और वैश्विक प्रासंगिकता से परिभाषित हो। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से भारत को और अधिक गौरवशाली एवं सशक्त बनाया जा सकता है।

देशभक्ति प्रस्तुतियों ने बांधा समां

ध्वजारोहण एवं संबोधन के बाद संस्थान में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें नाईपर के विद्यार्थियों और कर्मचारियों के बच्चों ने देशभक्ति की थीम पर विभिन्न प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम का माहौल देखने को मिला।

समारोह का समापन उपस्थितजनों के बीच मिठाई वितरण के साथ हुआ।

चंडीगढ़ में ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ जिला स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित, 200 युवाओं ने लिया भाग

माय भारत चंडीगढ़ द्वारा देव समाज कॉलेज फॉर वूमेन में ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। करीब 200 युवाओं ने हिस्सा लिया। विजेता अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेंगे।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में माय भारत चंडीगढ़ द्वारा देव समाज कॉलेज फॉर वूमेन, सेक्टर-45, चंडीगढ़ में “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” जिला स्तरीय प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 200 युवाओं ने आठ विभिन्न प्रतियोगी श्रेणियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में चंडीगढ़ प्रशासन के खेल निदेशक श्री सौरभ कुमार अरोड़ा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और दूसरों को भी नशामुक्त भारत अभियान से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में देश के युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है।

देव समाज कॉलेज फॉर वूमेन की प्राचार्य प्रो. (डॉ.) नीरू मलिक ने इस आयोजन की मेजबानी का अवसर मिलने पर माय भारत चंडीगढ़ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने युवाओं में नशे के प्रति जागरूकता फैलाने वाली इस पहल को समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेगी प्रतियोगिता

कार्यक्रम के दौरान आठ अलग-अलग श्रेणियों में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। जिला स्तर पर विजेता प्रतिभागी अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद चयनित प्रतिभागियों को नई दिल्ली में प्रस्तावित राष्ट्रीय “नशा मुक्त युवा कॉन्क्लेव” में भाग लेने का अवसर मिलेगा।

इस अवसर पर माय भारत चंडीगढ़ के यूटी निदेशक श्री शिवधन शर्मा, माय भारत पंजाब की राज्य निदेशक रश्मीत कौर तथा सहायक निदेशक श्री विक्रम सिंह ने विजेताओं को प्रशस्ति प्रमाण-पत्र और सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान किए।

चंडीगढ़ ने नशा मुक्ति शपथ अभियान में बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

जिला युवा अधिकारी श्री विनय कुमार ने बताया कि माय भारत पोर्टल पर चलाए गए नशा मुक्ति शपथ अभियान में चंडीगढ़ ने 380 प्रतिशत उपलब्धि हासिल करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान प्राप्त किया है।

उन्होंने विजेताओं को शुभकामनाएं देते हुए देव समाज कॉलेज फॉर वूमेन के प्रबंधन, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों का कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही सभी नागरिकों से माय भारत पोर्टल पर पंजीकरण कर नशा मुक्ति शपथ लेने और नशा मुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ में ‘नशा मुक्ति युवा फॉर विकसित भारत’ शपथ समारोह आयोजित
  • PEC चंडीगढ़ में युवाओं ने ली नशामुक्त भारत की शपथ, पीएम मोदी का संदेश भी सुना
  • ‘विकसित भारत 2047’ के लिए युवाओं का संकल्प, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में नशा मुक्ति अभियान
  • नशे के खिलाफ युवाओं का संकल्प, PEC चंडीगढ़ में शपथ समारोह और नुक्कड़ नाटक का आयोजन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC), चंडीगढ़ में रविवार को ‘नशा मुक्ति युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान के तहत शपथ समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम कॉलेज सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें निदेशक प्रो. राजेश कुमार भाटिया, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. पुनीत चावला, एसोसिएट डीन (ADSA), संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत नशा मुक्ति शपथ से हुई, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने नशीले पदार्थों से दूर रहने और समाज में इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऑनलाइन संबोधन प्रसारित किया गया, जिसमें उन्होंने नशामुक्त भारत के निर्माण और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की अहम भूमिका पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ युवा-नेतृत्व वाले जनआंदोलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए काशी घोषणा-पत्र को मार्गदर्शक बताया तथा देशभर में जागरूकता फैलाने में माई भारत (MY Bharat) स्वयंसेवकों के प्रयासों की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से नशे के सामाजिक दुष्प्रभावों को उजागर किया गया और युवाओं को स्वस्थ एवं नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने ‘नशा मुक्ति युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान को सफल बनाने और नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प दोहराया।

PM करेंगे ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान का शुभारंभ, युवाओं से करेंगे वर्चुअल संवाद

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के तहत माय भारत और चंडीगढ़ प्रशासन के सहयोग से रविवार 2 अगस्त 2026 को ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ का आयोजन किया जाएगा। चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में होने वाले इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के युवाओं को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करेंगे।

इस राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे के खिलाफ एकजुट करना और उन्हें जागरूकता, खेल, संस्कृति तथा सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से स्वस्थ एवं जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। यह पहल ‘नशा मुक्त भारत’ और ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

कार्यक्रम के दौरान देशभर के करीब 10 हजार स्थानों पर एक साथ आयोजन होंगे, जिनमें एक करोड़ से अधिक युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें माय भारत स्वयंसेवक, एनएसएस स्वयंसेवक, युवा क्लब, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी, गैर-सरकारी संगठन और विभिन्न सहयोगी संस्थाएं भाग लेंगी।

इस अवसर पर सभी प्रतिभागी नशा मुक्ति की सामूहिक शपथ लेंगे और नशामुक्त जीवनशैली अपनाने का संकल्प करेंगे। साथ ही 100 सप्ताह के राष्ट्रव्यापी रविवार सहभागिता अभियान की भी शुरुआत होगी, जिसके तहत खेल, फिटनेस, सांस्कृतिक कार्यक्रम, जागरूकता अभियान, ध्यान और सामुदायिक गतिविधियां नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी।

अभियान के अगले चरण में 3 अगस्त 2026 को देव समाज कॉलेज फॉर वूमेन, सेक्टर-45, चंडीगढ़ में जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें समूह नृत्य, समूह लोकगीत, माइम एक्ट, शॉर्ट फिल्म/रील, पेंटिंग, वाद-विवाद और स्लोगन लेखन जैसी प्रतियोगिताएं शामिल होंगी।

माय भारत चंडीगढ़ और चंडीगढ़ प्रशासन ने विद्यार्थियों, शिक्षण संस्थानों, युवा संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने तथा नशा मुक्त भारत के संकल्प को सशक्त बनाने की अपील की है।

PAU में “विकसित भारत हेतु स्मार्ट एवं सतत कृषि” विषय पर यंग प्रोफेशनल्स राउंडटेबल का सफल आयोजन

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत माई भारत (MY Bharat) द्वारा एनएसएस इकाई, पंजाब विश्वविद्यालय के सहयोग से राजीव गांधी कॉलेज भवन, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD) 2026 – यंग प्रोफेशनल्स राउंडटेबल का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “विकसित भारत हेतु स्मार्ट एवं सतत कृषि” था। यह आयोजन देशव्यापी VBYLD पहल के अंतर्गत किया गया, जिसका उद्देश्य युवाओं एवं युवा पेशेवरों को नीति-निर्माण संबंधी संवाद में सहभागी बनाना तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने हेतु व्यवहारिक एवं प्रभावी सुझाव प्राप्त करना है।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात अतिथियों का स्वागत एवं विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सुखजिंदर ऋषि, निदेशक, युवा कल्याण विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय रहे। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में सुश्री रश्मीत कौर, राज्य निदेशक, माई भारत पंजाब, श्री शिवधन शर्मा, यूटी निदेशक, माई भारत चंडीगढ़ तथा श्री आकर्ष दीक्षित, राज्य निदेशक, माई भारत हरियाणा उपस्थित रहे।

तकनीकी सत्र में डॉ. संजीव चौहान एवं श्री लिवअर्पित संधू ने पैनल विशेषज्ञ के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए, जबकि श्री पंचम काजला ने राउंडटेबल चर्चा का सफल संचालन किया। विशेषज्ञों ने तकनीक आधारित कृषि, जलवायु-अनुकूल खेती, युवा कृषि उद्यमिता, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सशक्त बनाने, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा कृषि उत्पादकता एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल नवाचारों के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी और कृषि क्षेत्र में नवाचार की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया।

कार्यक्रम में लगभग 200 प्रतिभागियों, जिनमें माई भारत स्वयंसेवक, एनएसएस स्वयंसेवक, युवा पेशेवर एवं युवा नेता शामिल थे, ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने स्मार्ट, सतत एवं प्रौद्योगिकी आधारित कृषि प्रणाली के निर्माण हेतु अपने विचार एवं सुझाव साझा किए। खुली चर्चा (Open Floor Discussion) के दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद स्थापित कर अपने सुझाव प्रस्तुत किए, जो भविष्य की नीतियों के लिए महत्वपूर्ण योगदान सिद्ध होंगे।

इस कार्यक्रम का सफल आयोजन श्री विनय कुमार, जिला युवा अधिकारी, माई भारत चंडीगढ़ के नेतृत्व में डॉ. भारत बजाज, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी, पंजाब विश्वविद्यालय तथा डॉ. किरण बांद्रा, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी, पंजाब विश्वविद्यालय के सहयोग से किया गया। उनके समन्वित प्रयासों से कार्यक्रम का सफल संचालन एवं युवाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हुई।

कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि भारत के युवा स्मार्ट, समावेशी एवं सतत कृषि प्रणाली के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएंगे। राउंडटेबल के दौरान प्राप्त सुझाव एवं अनुशंसाएँ विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के व्यापक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी तथा विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होंगी।

20वें स्टैटिस्टिक्स डे पर डॉ. पी.के. मिश्रा बोले—‘डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस ही विकसित भारत की नींव’
  • प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने 20वें सांख्यिकी दिवस 2026 को संबोधित किया
  • GDP, कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन इंडेक्स जैसे मुख्य मैक्रोइकॉनॉमिक इंडिकेटर्स को नए बेस ईयर के साथ अपडेट किया जा रहा है ताकि भारत की बदलती इकोनॉमी को बेहतर ढंग से दिखाया जा सके: डॉ. पी.के. मिश्रा
  • जैसा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सोचा है, गवर्नेंस का भविष्य डेटा-ड्रिवन फैसले लेने में है; विकसित भारत की ओर यात्रा भरोसेमंद डेटा पर आधारित होनी चाहिए: डॉ. पी.के. मिश्रा
  • डॉ. पी.के. मिश्रा ने डेटा की क्वालिटी, प्राइवेसी, ट्रांसपेरेंसी और इंडिपेंडेंस के हाई स्टैंडर्ड सुनिश्चित करने के लिए मजबूत इंस्टीट्यूशनल फ्रेमवर्क बनाने की कोशिशों को याद किया।
  • भारत के तेजी से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन ने एडमिनिस्ट्रेशन डेटा के बड़े रिपॉजिटरी बनाए हैं जिन्हें स्ट्रेटेजिक नेशनल एसेट माना जाना चाहिए: डॉ. पी.के. मिश्रा

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी डॉ. पी.के. मिश्रा आज 20वें स्टैटिस्टिक्स डे सेलिब्रेशन में चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हुए। 20वें स्टैटिस्टिक्स डे सेलिब्रेशन को संबोधित करते हुए डॉ. पी.के. मिश्रा ने प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की, भारत की सांख्यिकी प्रणाली के निर्माण में उनके मौलिक योगदान को याद किया और सूचित शासन के लिए मजबूत सांख्यिकी के स्थायी महत्व को रेखांकित किया। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय को अपने विजन दस्तावेज 2026-31, सतत विकास लक्ष्यों पर प्रगति रिपोर्ट और श्रम बाजारों और अनौपचारिक उद्यमों के पहले शहर-स्तरीय अनुमानों के विमोचन पर बधाई देते हुए, उन्होंने सुखात्मे राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने पर प्रोफेसर अरूप बोस को भी सम्मानित किया।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के डेटा-संचालित शासन और विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. मिश्रा ने कहा, “इस वर्ष के सांख्यिकी दिवस का विषय, ‘प्रशासनिक डेटा की क्षमता को अनलॉक करना’ भारत के सांख्यिकीय पारिस्थितिकी तंत्र और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम को दर्शाता है” बहुत ही प्रासंगिक और समय पर है। मिश्रा ने कहा कि देश ने 1950 के दशक में दुनिया के सबसे बेहतरीन सर्वे-बेस्ड स्टैटिस्टिकल सिस्टम में से एक बनाया, जिसमें नेशनल सैंपल सर्वे दुनिया भर में मशहूर मॉडल के तौर पर उभरा, जिसने विकासशील दुनिया में रिसर्च और पॉलिसी बनाने को आकार दिया। उन्होंने बताया, “प्रोफेसर पी.सी. महालनोबिस, जिन्होंने इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट और जर्नल संख्या की स्थापना की, उनके दूरदर्शी योगदान ने भारत में मॉडर्न स्टैटिस्टिकल साइंस की नींव रखी और उनके विचारों ने दूसरी पंचवर्षीय योजना को जानकारी दी।” अपने एकेडमिक अनुभव पर बात करते हुए, डॉ. मिश्रा ने कहा कि भारतीय स्टैटिस्टिकल डेटा और तरीकों को बड़े इंटरनेशनल रिसर्चर लंबे समय से महत्व देते रहे हैं और उन्होंने प्रोफेसर सी.आर. राव और प्रोफेसर पी.वी. सुखात्मे जैसे जाने-माने स्टैटिस्टिशियन के हमेशा रहने वाले योगदान को श्रद्धांजलि दी, जिनका शुरुआती काम दुनिया भर में इस फील्ड पर असर डालता रहता है।

भारत के स्टैटिस्टिकल सिस्टम के मॉडर्नाइजेशन पर बात करते हुए, डॉ. पी.के. मिश्रा ने माना कि दशकों की बेहतरीन परफॉर्मेंस के बाद, सिस्टम को पुराने डेटासेट, डेटा फैलाने में देरी, बिखरे हुए स्टैटिस्टिकल आर्किटेक्चर, डेटा की क्वालिटी में अंतर और घटती प्रोफेशनल क्षमता से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने आगे कहा, “इन चिंताओं की वजह से मिनिस्ट्री ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MoSPI) ने एक्सपर्ट्स, खास इंस्टीट्यूशन्स और स्टेकहोल्डर्स के साथ गहरी सलाह-मशविरा करके एक बड़े सुधार की कवायद शुरू की। इन बातचीत के आधार पर, MoSPI ने एक इंस्टीट्यूशनल ओवरसाइट सिस्टम के तहत समय पर लागू करने के लिए 216 सिफारिशें मान लीं।” डॉ. मिश्रा ने बताया कि इन सुधारों से पहले ही नए और यूज़र डिमांड-बेस्ड सर्वे शुरू हुए हैं, मैक्रोइकोनॉमिक इंडिकेटर्स को अपडेट किया गया है, डेटा का बेहतर डिसेमिनेशन हुआ है, और ज़रूरी प्रोसीजरल और प्रोसेस-ओरिएंटेड सुधार हुए हैं, जिससे एक ज़्यादा मज़बूत, भरोसेमंद और भविष्य के लिए तैयार स्टैटिस्टिकल सिस्टम की नींव रखी गई है।

2020 से 2025 तक पांच सालों के दौरान सुधार प्रोसेस को चलाने के लिए MoSPI की लीडरशिप की तारीफ़ करते हुए, डॉ. मिश्रा ने बताया कि कैसे साल 2020 से प्राइम मिनिस्टर ऑफिस (PMO) और MoSPI ने मुद्दों का एनालिसिस करने, उपायों की पहचान करने और चुनौतियों का सामना करने के लिए कई कदम उठाए। डॉ. मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक कैटलिस्ट और फैसिलिटेटर के तौर पर काम किया, जिससे मंत्रालय अपनी इंस्टीट्यूशनल एक्सपर्टीज़ और क्षमताओं का इस्तेमाल करके एक मज़बूत, ज़्यादा भरोसेमंद और भविष्य के लिए तैयार स्टैटिस्टिकल सिस्टम बना सका।

इस साल के स्टैटिस्टिक्स डे की थीम, “एडमिनिस्ट्रेटिव डेटा की क्षमता को अनलॉक करना” पर ज़ोर देते हुए, डॉ. पी.के. मिश्रा ने कहा कि भारत के तेज़ी से हो रहे डिजिटल बदलाव ने एडमिनिस्ट्रेटिव डेटा के बड़े भंडार बनाए हैं जो सबूतों पर आधारित पॉलिसी बनाने और गवर्नेंस को काफ़ी मज़बूत कर सकते हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “एडमिनिस्ट्रेटिव डेटा को एक स्ट्रेटेजिक नेशनल एसेट माना जाना चाहिए, जिससे बेहतर प्रोग्राम डिज़ाइन, टारगेटेड सर्विस डिलीवरी और समय पर फ़ैसले लेने में मदद मिले।” केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच ज़्यादा तालमेल की अपील करते हुए, उन्होंने इंटरऑपरेबल और इंटीग्रेटेड सिस्टम बनाने की वकालत की।

MSME दिवस 2026 पर विशेष: कैसे डिजिटल पोर्टल भारत के 8 करोड़ MSME के कामकाज के तरीके में चुपचाप बड़ा बदलाव ला रहे हैं

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

एक दशक पहले किसी भी सरकारी जिला कार्यालय में जाइए। वहां कागजों की फाइलों का ढेर, काम के बोझ से परेशान कर्मचारी और पंजीकरण प्रमाणपत्र या भुगतान विवाद के निपटारे के लिए कई दिनों, कभी-कभी कई हफ्तों तक इंतजार करते उद्यमी आम दृश्य हुआ करते थे। आज देश के किसी भी कोने में बैठा एक कारीगर अपने मोबाइल से कुछ ही मिनटों में अपना उद्यम पंजीकृत कर सकता है, अपने उत्पादों को राष्ट्रीय ऑनलाइन बाजार में बेचने के लिए सूचीबद्ध कर सकता है और अपनी कार्यशाला से बाहर निकले बिना बकाया भुगतान की शिकायत भी दर्ज करा सकता है। यह केवल प्रशासनिक सुविधा नहीं, बल्कि व्यवस्था में आया एक बड़ा बदलाव है।

भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) देश की अर्थव्यवस्था का छोटा हिस्सा नहीं हैं। वर्ष 2026 के एमएसएमई दिवस पर यह समझना जरूरी है कि इनका योगदान कितना बड़ा है। ये देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 31.1 प्रतिशत, विनिर्माण उत्पादन में 35 प्रतिशत से अधिक और कुल निर्यात में लगभग 48.58 प्रतिशत का योगदान देते हैं। साथ ही, ये लगभग 38 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं, जो दुनिया के अधिकांश देशों की कुल आबादी से भी अधिक है। इसके बावजूद, कई दशकों तक ये उद्यम औपचारिक व्यवस्था से दूर रहे। इन्हें संस्थागत ऋण आसानी से नहीं मिला, बड़े सरकारी और निजी खरीद बाजारों तक पहुंच सीमित रही और जटिल नियम-कायदों का सामना करना पड़ा, जिनका लाभ अक्सर बड़े उद्योगों को मिलता था।

अब स्थिति तेजी से बदल रही है। एमएसएमई के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए कई डिजिटल पोर्टल शुरू किए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक उनकी किसी खास समस्या का समाधान करता है। इन पहलों ने सरकार और छोटे उद्यमियों के बीच संबंधों को पूरी तरह बदलना शुरू कर दिया है।

अंगुलियों पर औपचारिक पहचान

सबसे बड़ी और बुनियादी समस्या यह थी कि बिना औपचारिक पंजीकरण के कोई भी उद्यम सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण या सरकारी ठेकों का लाभ नहीं ले सकता था। उद्यम पोर्टल पर कागज रहित, आधार आधारित सत्यापन और स्व-घोषणा की व्यवस्था ने पहले की लंबी और जटिल प्रक्रिया को कुछ ही मिनटों की ऑनलाइन प्रक्रिया में बदल दिया। आज 8.7 करोड़ उद्यम इस पोर्टल के माध्यम से औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं। उभरती अर्थव्यवस्थाओं के इतिहास में इतने बड़े स्तर पर औपचारिक पंजीकरण का यह एक दुर्लभ उदाहरण है।

लेकिन केवल औपचारिक पंजीकरण ही पर्याप्त नहीं है। यदि सबसे छोटे और कमजोर उद्यम इससे बाहर रह जाएं, तो इसका पूरा लाभ नहीं मिल सकता। इसी उद्देश्य से उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म शुरू किया गया। यह उन सूक्ष्म और अनौपचारिक उद्यमों के लिए बनाया गया है, जिनके पास सामान्य पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज नहीं थे। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, इस मंच पर अब तक 3.28 करोड़ ऐसे उद्यम जुड़ चुके हैं। इससे पहली बार लाखों छोटे कारोबार सरकारी सहायता और योजनाओं की पहुंच में आए हैं, जो पहले किसी भी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे।

सरकारी खरीद में समान अवसर

पहले छोटे उद्यमों के लिए ग्राहकों तक पहुंच बनाना आसान नहीं था। यह अक्सर भौगोलिक दूरी, सीमित संपर्कों और सरकारी खरीद की जटिल प्रक्रियाओं पर निर्भर करता था। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया। यह एक पारदर्शी ऑनलाइन मंच है, जहां कोई भी पंजीकृत एमएसएमई सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को सीधे सामान और सेवाएं बेच सकता है। इससे सरकारी खरीद प्रणाली अधिक खुली और सभी के लिए समान अवसर वाली बन गई है।

आज जेम पर 11.14 लाख से अधिक एमएसएमई विक्रेता पंजीकृत हैं। इनमें 2.03 लाख महिला उद्यमियों के स्वामित्व वाले और 61 हजार अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के स्वामित्व वाले उद्यम शामिल हैं। जेम के माध्यम से अब तक 18.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी खरीद हो चुकी है। यह केवल कारोबार का आंकड़ा नहीं है, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका, छोटे उद्यमों की मजबूती और आपूर्ति श्रृंखला के विस्तार का भी प्रमाण है।

नकदी की उपलब्धता आसान बनाना

यदि पंजीकरण और बाजार तक पहुंच एमएसएमई सुधारों की मजबूत नींव हैं, तो समय पर धन उपलब्ध होना उसकी सबसे बड़ी ताकत है। लंबे समय तक सबसे बड़ी समस्या यह रही कि बड़े खरीदार छोटे उद्यमों के भुगतान 60, 90 या कभी-कभी 180 दिनों तक रोककर रखते थे। इससे छोटे कारोबारियों को महंगे अनौपचारिक कर्ज का सहारा लेना पड़ता था। इस समस्या के समाधान के लिए व्यापार प्राप्तियों के छूटकरण प्रणाली (टीआरईडीएस) शुरू की गई। अब एमएसएमई अपने बिल इस डिजिटल मंच पर अपलोड कर सकते हैं, जहां बैंक और वित्तीय संस्थान उन बिलों के बदले तुरंत धन उपलब्ध कराते हैं। इससे कारोबार के लिए आवश्यक कार्यशील पूंजी समय पर मिल जाती है।

वर्ष 2021 से 2026 के बीच टीआरईडीएस के माध्यम से 8.35 लाख करोड़ रुपये के बिलों का भुगतान कराया जा चुका है। इसका अर्थ है कि हजारों छोटे उद्यम अपने कर्मचारियों का वेतन समय पर दे सके, उन्हें साहूकारों से महंगा कर्ज नहीं लेना पड़ा और केवल भुगतान में देरी के कारण उनका कारोबार बंद नहीं हुआ।

शिकायतों का समाधान और न्याय तक आसान पहुंच

सबसे अच्छी व्यवस्था में भी कभी-कभी समस्याएं आती हैं। इन्हें दूर करने के लिए एमएसएमई चैंपियंस पोर्टल बनाया गया है। यह एक डिजिटल मंच है, जहां उद्यमी सलाह ले सकते हैं, अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 24 जून 2026 तक इस पोर्टल पर प्राप्त कुल शिकायतों में से 1,85,253 शिकायतों यानी 99.66 प्रतिशत का समाधान किया जा चुका है।

एमएसएमई समाधान पोर्टल विशेष रूप से छोटे उद्यमों के बकाया भुगतान की समस्या को दूर करने के लिए बनाया गया है। इसके साथ ही एमएसएमई ऑनलाइन विवाद समाधान (ओडीआर) पोर्टल न्याय तक पहुंच को और आसान बनाता है। इस पोर्टल के माध्यम से छोटे उद्यम अपने व्यावसायिक विवादों का समाधान ऑनलाइन सुलह और मध्यस्थता के जरिए कर सकते हैं। इससे देश के सबसे छोटे कारोबारियों के लिए न्याय प्राप्त करना पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल और सुलभ हो गया है।

नई पीढ़ी के डिजिटल मंच

इस वर्ष का एमएसएमई दिवस केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं है, बल्कि डिजिटल बदलाव के एक नए दौर की शुरुआत भी है। भारत अब अपनी डिजिटल व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पीएमईजीपी 2.0 पोर्टल आवेदन से लेकर अनुदान मिलने तक की पूरी प्रक्रिया को और सरल बनाएगा। एमएसएमई समाधान 2.0 बकाया भुगतान के मामलों का और तेज़ी से निपटारा करेगा। वहीं, एमएसएमई ग्लोबल मार्ट 2.0 एक सरकारी सहयोग वाला ऑनलाइन बाजार होगा, जो ओएनडीसी व्यवस्था से जुड़ा रहेगा। इसके माध्यम से छोटे उद्यम एक-दूसरे के साथ और सीधे ग्राहकों को भी अपने उत्पाद बेच सकेंगे, साथ ही वैश्विक बाजार तक पहुंच बना सकेंगे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक के इस दौर में सरकार का संकल्प स्पष्ट है कि इस परिवर्तन की यात्रा में कोई भी उद्यमी पीछे न छूटे।

बड़ी तस्वीर

ये सभी डिजिटल मंच अलग-अलग काम नहीं करते, बल्कि मिलकर एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था बनाते हैं, जो नियमों का पालन आसान करती है, विभिन्न सरकारी आंकड़ों को आपस में जोड़ती है और सरकार तथा उद्यमों के बीच तुरंत सूचना का आदान-प्रदान संभव बनाती है। इनसे केवल सुविधा ही नहीं बढ़ी है, बल्कि उन पुराने लाभों को भी खत्म किया गया है, जो पहले केवल बड़े, शहरी और प्रभावशाली कारोबारों को मिलते थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प में एमएसएमई क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता है। “सबका साथ, सबका विकास” केवल एक नारा नहीं, बल्कि सरकार की कार्यशैली का आधार है। 1 अप्रैल 2014 को एमएसएमई क्षेत्र को दिया गया बैंक ऋण 10.40 लाख करोड़ रुपये था, जो 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर 36.79 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी 12 वर्षों में इसमें 268 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो बड़े उद्योगों की तुलना में अधिक तेज रही। इस दृष्टि से एमएसएमई के लिए तैयार की गई डिजिटल व्यवस्था, विकसित भारत के संकल्प को साकार करने का मजबूत आधार बन चुकी है।

देश में भविष्य के अधिकांश नए रोजगार एमएसएमई क्षेत्र से ही आएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों का विस्तार भी इसी क्षेत्र के माध्यम से होगा और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था से औपचारिक व्यवस्था की ओर बदलाव भी इसी के जरिए पूरा होगा। इसलिए एमएसएमई के लिए तैयार की जा रही डिजिटल व्यवस्था विकसित भारत की मजबूत नींव है। हर नया पंजीकरण, हर समय पर मिला भुगतान और हर ऑनलाइन सुलझा विवाद वर्ष 2047 के विकसित भारत की दिशा में उठाया गया एक स्थायी कदम है।

आज लाखों छोटे उद्यमों को बाजार, वित्त और सरकारी सेवाओं से जोड़ने वाले ये डिजिटल मंच केवल तकनीकी सुविधा नहीं हैं। वे एक ऐसे भारत की मजबूत आधारशिला हैं, जहां हर छोटे उद्यमी को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले और कोई भी पीछे न रह जाए।

(लेखक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं।)

बिश्केक में SCO विमेन्स फोरम 2026 में भारत ने महिला-नेतृत्व वाले विकास के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री, श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने आज किर्गिज़ गणराज्य के बिश्केक में आयोजित एससीओ विमेन्स फोरम 2026 को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) तथा उसके पारस्परिक सम्मान, समानता और सर्वसम्मति के सिद्धांतों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि की और साझेदारी को सुदृढ़ करने तथा संगठन के साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका विषय पर आयोजित पैनल सत्र में भारत का उद्घाटन वक्तव्य और प्रारंभिक टिप्पणी प्रस्तुत करते हुए मंत्री महोदया ने इस बात पर बल दिया कि महिलाएं केवल विकास की लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि उसकी सबसे सशक्त प्रेरक शक्तियों में से एक हैं। यही महिला-नेतृत्व वाले विकास के संबंध में भारत की परिकल्पना और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का मूल आधार है।

मंत्री महोदया ने उल्लेख किया कि लगभग 10 करोड़ महिलाएं 90 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं, जिनमें से 30 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने मिशन शक्ति और मिशन पोषण 2.0 को महिलाओं की सुरक्षा, देखभाल तथा आर्थिक भागीदारी को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख स्तंभों के रूप में रेखांकित किया।

भारत ने पूरे क्षेत्र में महिलाओं के आर्थिक नेतृत्व और कल्याण को आगे बढ़ाने के लिए एससीओ के साझेदार देशों के साथ अपने अनुभव साझा करने तथा सहयोग को और सुदृढ़ करने की अपनी तत्परता भी दोहराई।