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गृह मंत्री ने केन्द्रीय रिज एवं नानकपुरा रिज में वृक्षारोपण कर दिल्ली रिज के पुनर्जीवन अभियान की शुरुआत की

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत मिशन 70 लाख पौधारोपण अभियान का शुभारंभ और दिल्ली सरकार के विभिन्न कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। गृह मंत्री ने दिल्ली में हाई-सिक्योरिटी प्रिजन, नरेला का शिलान्यास, स्वचालित वाहन परीक्षण केंद्र का लोकार्पण, तीन नए डिपो का उद्घाटन और 300 इलेक्ट्रिक बसों का शुभारंभ किया और केन्द्रीय रिज एवं नानकपुरा रिज में वृक्षारोपण कर दिल्ली रिज के पुनर्जीवन अभियान की भी शुरुआत की। इस अवसर पर केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव, दिल्ली के उप-राज्यपाल श्री तरणजीत सिंह संधु, मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता और केन्द्रीय मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि वर्षों से दिल्ली रिज में पर्यावरण के अनुकूल नहीं होने वाले विदेशी और जहरीले बबूल जैसे वृक्षों ने जगह बना ली थी, अब इन्हें हटाकर देशी प्रजातियों के वृक्ष लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1994 में दिल्ली के 7,784 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को भारतीय वन अधिनियम के तहत अधिसूचित किया गया था, लेकिन इसकी अंतिम अधिसूचना 30 वर्षों से लंबित थी। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए इसमें से लगभग 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र को वन क्षेत्र घोषित कर दिया है। श्री शाह ने कहा कि हम पूरी रिज को कानूनी संरक्षण दिलाकर उसकी जैव विविधता, मिट्टी, पानी और दिल्ली के पर्यावरण को नया स्वरूप देने वाले हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के रिज को अगले तीन वर्षों में पीपल, बरगद, नीम, अर्जुन, जामुन जैसे 100 वर्ष से अधिक आयु वाले देशी वृक्ष लगाकर, इसे दिल्ली का फेफड़ा बनाया जाएगा।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान शुरू करके देश में पर्यावरण संतुलन का अद्भुत प्रयोग आरंभ किया है। उन्होंने कहा कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने ओजोन परत में बड़े-बड़े छिद्र बना दिए हैं, जिससे पृथ्वी का तापमान असंतुलित हो रहा है। इस समस्या को रोकने का एक ही रास्ता है कि पृथ्वी से कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड के उत्सर्जन को कम किया जाए। उन्होंने कहा कि यह कार्य केवल वृक्ष ही कर सकते हैं। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी जी ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ का नारा दिया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने लोगों से अपील की कि वे अपनी माँ के नाम और पृथ्वी माँ के लिए पेड़ लगाएं। दोहरे उद्देश्य वाला यह अभियान आगामी दिनों में भारत को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व को यह संदेश दिया है कि पर्यावरण संतुलन की चिंता किए बिना विकास बेईमानी है। श्री शाह ने दिल्लीवासियों से अपील की कि वे अपनी मां के नाम पर एक वृक्ष अवश्य लगाएं और इस कार्य में बच्चों को भी शामिल करें, क्योंकि उन्हें भविष्य में ‘हरित दिल्ली’ के संकल्प को आगे ले जाना है।

श्री अमित शाह ने सभी दिल्लीवासियों से अपील करते हुए कहा कि वे ग्रीन ड्राइव पोर्टल पर जाकर वृक्षारोपण के लिए अपना स्लॉट बुक करें और अपने आसपास के स्कूलों, कॉलोनियों, मंदिरों, सोसाइटियों में, – जहां भी भूमि उपलब्ध हो – वहाँ वृक्ष लगाकर हरी-भरी दिल्ली का संकल्प साकार करें। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा शुरू किए गए वृक्ष रथ पोर्टल के जरिए लोगों को मुफ्त पौधा उपलब्ध कराया जा रहा है और नर्सरी लोकेटर की सुविधा से पास की नर्सरी का पता भी उपलब्ध है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत सरकार और दिल्ली सरकार का संकल्प है कि हम आने वाले चार वर्षों में 6,300 हेक्टेयर हरित रिज क्षेत्र को पूर्ण रूप से वन क्षेत्र में विकसित करेंगे और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। यह 6,300 हेक्टेयर हरित रिज दिल्ली के lungs बनकर राजधानी के पर्यावरण की रक्षा करेगी। इसके अंतर्गत 1 करोड़ से अधिक देशी पौधे, 65 लाख से अधिक बड़े वृक्षों तथा 65 लाख अन्य पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने भारत सरकार की मदद से वर्किंग प्लान डॉक्यूमेंट (2026 से 2036) तैयार किया है। दिल्ली सरकार का वर्किंग प्लान डॉक्यूमेंट (2026–36), असोला भाटी अभयारण्य प्रबंधन योजना और बायो-डायवर्सिटी एटलस पूरे ग्रीन ईको-सिस्टम को पुनर्जीवित करने का व्यापक प्रयास है।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा की रिज के अंदर 70 से अधिक तालाब और छोटे-छोटे रेस्टोरेंट होंगे, साथ ही वहाँ हमारी पुरातात्विक संरचनाओं का संरक्षण भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम रिज क्षेत्र में आठ विशेष वन लगाएंगे — नक्षत्र वन, मेल वन, ऋषि वन, तीर्थंकर वन, शंकर वन, वामन वृक्ष वन और पुरानी वाटिका। इनके माध्यम से हम लोगों को प्रकृति से जोड़ने का प्रयास करेंगे।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने यमुना नदी के शुद्धिकरण के लिए जो लक्ष्य दिया है, उसे पूरा करने के लिए हम तेजी से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली की डेयरियों का गोबर अब सीधे यमुना नदी में नहीं जाएगा। गृह एवं सहकारिता मेंट्री ने कहा कि हम जल्दी ही राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ समझौता करके यह व्यवस्था करेंगे कि एक किलो गोबर भी यमुना में न जाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली की पिछली सरकार ने प्रतिदिन 1,500 मीट्रिक टन गोबर यमुना नदी में डालने का काम किया था। अब मोदी सरकार और दिल्ली सरकार के बीच समझौते के तहत इस गोबर को प्रोसेस करके गैस और प्राकृतिक खाद बनाया जाएगा, जो यमुना नदी के शुद्धिकरण में बहुत बड़ा योगदान होगा। श्री शाह ने कहा कि दिल्ली, हरियाणा और यूपी में अब तक 129 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चालू हो चुके हैं और 2027 के अंत तक 59 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बन जाएंगे। ये प्लांट यमुना में शुद्ध किया हुआ जल पहुंचाएंगे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इन प्लांटों से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता सभी निर्धारित मानकों पर खरी उतरे।

गृह मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति लॉन्च की है। यमुना शुद्धिकरण, रिज क्षेत्र का समग्र परिवर्तन, पर्यावरणीय इकोसिस्टम की बहाली और ईवी पॉलिसी – इन सभी प्रयासों के जरिए हम हरित दिल्ली की संकल्पना को साकार करेंगे।

दिल्ली में प्रदूषण से जंग के लिए ₹8,300 करोड़ का मेगा प्लान, 65% फंड देगा वर्ल्ड बैंक

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए 8,300 करोड़ रुपये के सात साल के प्रोग्राम का ऐलान किया है। इस प्रोग्राम के लिए 65 फीसदी धनराशि वर्ल्ड बैंक दे रही है और 35 फीसदी फंड दिल्ली सरकार से मिलेगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ‘स्वच्छ वायु, स्वस्थ दिल्ली’ टाइटल वाला प्रोजेक्ट सितंबर 2026 से अगस्त 2033 तक चलेगा। उन्होंने कहा कि इसका मकसद एयर क्वालिटी मैनेजमेंट को मजबूत करना और पूरे शहर में प्रमुख प्रदूषण स्रोतों से उत्सर्जन में कटौती करना है। तैयारियों को अंतिम रूप देने और सभी स्टेकहोल्डर के बीच कोऑर्डिनेशन में सुधार के लिए 10 जुलाई को एक स्पेशल वर्कशॉप आयोजित किया जाएगा।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, “वर्कशॉप में कई विभागों और एजेंसियों की भूमिकाओं को परिभाषित करेगी और परियोजना के प्रभावी और समय पर इम्प्लीमेंटेशन के लिए रोडमैप पर चर्चा होगी। यह कार्यक्रम दिल्ली के एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन प्लान को गति देगा, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के टारगेट्स में मदद करेगा और विकसित भारत 2047 उद्देश्य की मदद करेगा।

रेखा गुप्ता ने कहा कि यह पहल ‘सिर्फ प्रदूषण कंट्रोल प्रोग्राम नहीं, बल्कि एक लंबे वक्त का इन्वेस्टमेंट’ है, जिसका मकसद दिल्ली के लोगों को साफ हवा, बेहतर पब्लिक हेल्थ और ज्यादा टिकाऊ शहरी माहौल देना है। उन्होंने कहा कि यह पहल दो मुख्य स्तंभों पर टिकी है: हवा की क्वालिटी मैनेजमेंट को मजबूत करना और प्रदूषण के मुख्य स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना।

पहले हिस्से के तहत, सरकार एक खास प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट बनाएगी, एडवांस्ड एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करेगी, डेटा एनालिटिक्स क्षमताएं तैयार करेगी और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम बनाएगी। इस प्रोजेक्ट में इंडो-गैंगेटिक प्लेन के राज्यों के साथ बेहतर तालमेल, वैज्ञानिक प्लानिंग, जन-जागरूकता अभियान और नई टेक्नोलॉजी को अपनाने की योजना भी शामिल है।

दूसरा हिस्सा पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को धीरे-धीरे हटाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के लिए एडवांस्ड ‘पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल’ मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि इस प्रोग्राम को पर्यावरण विभाग, दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमेटी, ट्रांसपोर्ट विभाग, पब्लिक वर्क्स विभाग, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली विकास प्राधिकरण, नई दिल्ली नगर परिषद और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस मिलकर लागू करेंगे. आर्थिक मामलों का विभाग और वर्ल्ड बैंक भी इसमें मुख्य पार्टनर होंगे।

साफ हवा को हर नागरिक का अधिकार बताते हुए रेखा गुप्ता ने कहा कि यह प्रोजेक्ट राजधानी में हवा की क्वालिटी और पब्लिक हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक, समन्वित और टिकाऊ समाधानों के प्रति दिल्ली सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है।

कुल मिलाकर, दिल्ली सरकार का नया प्रोग्राम हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने, प्रदूषण के मुख्य स्रोतों से निपटने और शहर में पब्लिक हेल्थ के उपायों को मजबूत करने के लंबे वक्त के प्रयास के लिए अलग-अलग विभागों के बीच फंडिंग, टेक्नोलॉजी और तालमेल को एक साथ लाएगा।

दिल्ली : पहली बार होगा बिजली कंपनियों का होगा CAG ऑडिट, 38 हजार करोड़ का होगा खुलासा

दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली में पहली बार बिजली वितरण कंपनियों का CAG ऑडिट करेगी। दिल्ली सरकार ने डिस्कॉम्स के CAG ऑडिट का आदेश जारी कर दिया है। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा की दिल्ली के डिस्कॉम्स के CAG ऑडिट का औपचारिक आदेश दिल्ली के बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि यह दिल्ली के प्रत्येक बिजली उपभोक्ता और प्रत्येक ईमानदार करदाता की जीत है।

सूद ने कहा कि बिजली क्षेत्र के निजीकरण के बाद वर्षों तक अनेक वित्तीय निर्णय, विशेष व्यवस्थाएं और लगातार बढ़ती देनदारियां की सार्वजनिक जांच नहीं हो सकी। पिछली आम आदमी पार्टी सरकार ने व्यवस्था की जांच करने के बजाय उसे संरक्षण देने का काम किया था। जो कार्य वे दस वर्षों में नहीं कर सके, हमारी सरकार ने कुछ ही महीनों में उसकी शुरुआत कर दी है।

38 हजार करोड़ का होगा खुलासा

सूद ने यह भी कहा की दिल्ली की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि लगभग 38,000 करोड़ रुपये के रेगुलेटरी एसेट्स लगातार कैसे बढ़ते गए और इसका लाभ किसे मिला, जबकि इसका बोझ दिल्ली के लोगों पर पड़ा। CAG ऑडिट इन सभी तथ्यों को सामने लाएगा। ऊर्जा मंत्री ने आगे कहा की यह केवल पूर्व सरकार के कामों की जांच नहीं है बल्कि यह ऑडिट तो दिल्ली के बिजली क्षेत्र में व्यापक सुधारों की आधारशिला है। इसकी वास्तविक सफलता उन सुधारात्मक कदमों, अधिक प्रभावी नियमन और मजबूत जवाबदेही से तय होगी जो इसके बाद लागू किए जाएंगे।

हम बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध

सूद ने आगे बताया की मैं पूरी स्पष्टता के साथ कहना चाहता हूं कि दिल्ली का कोई भी ईमानदार करदाता किसी के निजी हितों, विशेष कृपा या गलत निर्णयों की कीमत चुकाने के लिए मजबूर नहीं होगा। जनता के धन का प्रत्येक रुपया सुरक्षित रखना हमारी सरकार की जिम्मेदारी है। हमारी सरकार ने पूरी प्रक्रिया कानून के अनुरूप और पूर्ण पारदर्शिता के साथ पूरी की है। अब हमें सभी डिस्कॉम्स से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा है। दिल्ली की जनता के आशीर्वाद से हम बिजली क्षेत्र को पारदर्शी, जवाबदेह और पूरी तरह जनहित में कार्य करने वाली व्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

दिल्ली सरकार ने नई ईवी पॉलिसी को दी मंजूरी, 1 जुलाई से लागू होगी पॉलिसी

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

दिल्ली सरकार ने सोमवार को नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) पॉलिसी को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सचिवालय में आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि यह नीति दिल्ली की वर्षों पुरानी प्रदूषण और परिवहन संबंधी चुनौतियों के समाधान की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल की संस्तुति के बाद यह नीति एक जुलाई से लागू होगी और 31 अगस्त 2031 तक प्रभावी रहेगी।

15 हजार करोड़ रुपये का लाभ मिलने का अनुमान

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई ईवी पॉलिसी से आम लोगों को करीब 15 हजार करोड़ रुपये का लाभ मिलने का अनुमान है। सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिलने वाली सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि में वृद्धि की है, ताकि अधिक से अधिक लोग इलेक्ट्रिक वाहन अपनाएं। उन्होंने कहा कि दोपहिया, चारपहिया, तिपहिया, ट्रक और ग्रामीण परिवहन वाहनों को भी इस नीति के दायरे में शामिल किया गया है।

पॉलिसी का मसौदा उपराज्यपाल को भेजा गया

प्रेसवार्ता की शुरुआत करते हुए शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने सोमवार को नई ईवी पॉलिसी का मसौदा मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसे बाद में मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। उन्होंने कहा कि इस नीति को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न हितधारकों के साथ कई दौर की बैठकें की गईं। परिवहन विभाग की सचिव निहारिका ने बताया कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद पॉलिसी का मसौदा उपराज्यपाल को भेज दिया गया है। 

इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों के दिया जाएगा प्रोत्साहन

उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि मंगलवार तक उनकी मंजूरी भी मिल जाएगी। नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों के लिए 30 हजार से 50 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा। इलेक्ट्रिक ट्रक खरीदने पर एक लाख रुपये तथा ग्रामीण सेवा वाहनों के लिए 20 हजार रुपये का स्क्रैपिंग इंसेंटिव मिलेगा। सरकार ने चरणबद्ध तरीके से पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाने का भी निर्णय लिया है। इसके तहत वर्ष एक जनवरी 2027 से नए तीनपहिया और वर्ष अप्रैल 2028 से नए दोपहिया वाहनों का पंजीकरण केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के रूप में किया जाएगा।

विकसित किया जाएगा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। साथ ही डिस्कॉम के साथ मिलकर घरों में ईवी चार्जिंग के लिए अलग मीटर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस नीति के तहत खरीदे गए इलेक्ट्रिक वाहन तीन वर्ष तक दिल्ली के बाहर बेचे नहीं जा सकेंगे। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि नई ईवी पॉलिसी से राजधानी में वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने लोगों से इस नीति को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि परिवहन विभाग ने इसे तैयार करने में व्यापक मेहनत की है और इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। परिवहन विभाग को इस नीति के क्रियान्वयन का नोडल विभाग बनाया गया है।

चरणबद्ध तरीके से दी जाएगी सब्सिडी

नई ईवी पॉलिसी में इलेक्ट्रिक दोपहिया, ऑटो और मालवाहक वाहनों के लिए चरणबद्ध खरीद सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। दोपहिया वाहन पर पहले वर्ष अधिकतम 30 हजार रुपये, इलेक्ट्रिक ऑटो पर 50 हजार रुपये और एन1 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रक पर पहले वर्ष एक लाख रुपये तक की खरीद सब्सिडी मिलेगी। निजी इलेक्ट्रिक कारों पर खरीद सब्सिडी नहीं होगी, लेकिन पुराने बीएस-4 या उससे नीचे के वाहन को स्क्रैप करने पर एक लाख रुपये तक का स्क्रैपिंग इंसेंटिव दिया जाएगा। 

इसके अलावा सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, व्यावसायिक वाहन और 30 लाख रुपये तक की इलेक्ट्रिक कारों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट मिलेगी। वहीं स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों को 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी, जबकि 30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों को कोई टैक्स या रजिस्ट्रेशन शुल्क छूट नहीं मिलेगी।

भलस्वा लैंडफिल को सितंबर तक साफ करने का लक्ष्य, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने दिए सख्त निर्देश

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

New Delhi में स्थित भलस्वा लैंडफिल साइट को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री Manohar Lal Khattar ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि भलस्वा में मौजूद कूड़े के पहाड़ को इस साल सितंबर तक पूरी तरह से साफ किया जाए।

मंत्री ने बृहस्पतिवार को साइट का दूसरी बार निरीक्षण करते हुए कहा कि राजधानी में कचरा प्रबंधन को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि रोजाना उत्पन्न होने वाले नए कचरे का तत्काल प्रसंस्करण किया जाए, ताकि भविष्य में कचरे का नया ढेर न बन सके।

भलस्वा लैंडफिल दिल्ली के सबसे बड़े कचरा डंप साइट्स में से एक माना जाता है, जहां वर्षों से जमा कचरे के कारण पर्यावरण और आसपास रहने वाले लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता रहा है। इनमें प्रदूषण, बदबू, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और जल-निकासी की समस्याएं शामिल हैं।

मंत्री ने कहा कि कचरा प्रबंधन केवल सफाई का काम नहीं है, बल्कि यह शहरी नियोजन और पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर कचरे के वैज्ञानिक निपटान की प्रक्रिया को तेज किया जाए।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, भलस्वा साइट पर जमा पुराने कचरे के निस्तारण के लिए विशेष परियोजना चलाई जा रही है, जिसमें बायो-माइनिंग और रीसाइक्लिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के माध्यम से कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर पुनः उपयोग योग्य सामग्री को निकाला जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि शहर में किसी भी स्थान पर नया कूड़े का पहाड़ बनने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए नगर निकायों को नियमित निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली जैसे बड़े महानगरों में ठोस कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। यदि समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए भलस्वा जैसे लैंडफिल साइट्स का पुनर्विकास और वैज्ञानिक सफाई अत्यंत आवश्यक मानी जा रही है।

फिलहाल सरकार ने सितंबर तक का लक्ष्य तय कर दिया है और अब सभी की नजर इस बात पर है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर यह बड़ा सफाई अभियान कितना सफल हो पाता है।

दिल्ली में प्रदूषण पर सख्त फैसला: कल से सरकारी और प्राइवेट ऑफिस में 50% ‘वर्क फ्रॉम होम’ ज़रूरी, वर्कर्स को 10,000 रुपये का मुआवजा

नेशनल डेस्क: देश की राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण की वजह से हालात गंभीर हो गए हैं, जिसके चलते ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) 4 लागू है। इस खतरनाक हालात को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कल से शहर के सभी सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में 50% ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) ज़रूरी कर दिया है। इसका मतलब है कि इन संस्थानों में सिर्फ़ 50% अटेंडेंस की ही इजाज़त होगी। इस फैसले की जानकारी दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने दी।

वर्कर्स को मुआवजा

सरकार ने यह भी ऐलान किया है कि GRAP-3 के दौरान काम बंद होने से प्रभावित रजिस्टर्ड कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को 10,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। मिश्रा ने कहा कि GRAP 3 में 16 दिनों तक कंस्ट्रक्शन का काम बंद रहा था, और दिल्ली सरकार यह 10,000 रुपये सीधे रजिस्टर्ड वर्कर्स के अकाउंट में जमा करेगी।नियमों से छूट

हालांकि, यह 50% WFH नियम सभी सुविधाओं पर लागू नहीं होगा। हेल्थ केयर हॉस्पिटल, फायर सर्विस, जेल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसी ज़रूरी सेवाओं को इस नियम से छूट दी गई है।सरकार ने साफ़ कर दिया है कि जो लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन पर जुर्माना लगाया जाएगा।