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Rajpura Teej Celebration: कलोली गांव में हरियाली तीज का रंग, गिद्धा-चरखा और पंजाबी विरासत की दिखी झलक

राजपुरा / सत्ता संदेश

Report / दीपक कुमार की रिपोर्ट।

राजपुरा के कलोली गांव में हरियाली तीज का पर्व धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने गिद्धा, किकली, चरखा और पारंपरिक वेशभूषा के साथ पंजाबी संस्कृति व विरासत को जीवंत किया।

लुधियाना के राजपुरा में स्थित गांव कलोली में हरियाली तीज का पर्व उत्साह और पारंपरिक अंदाज में मनाया गया। गांव की महिलाओं और युवतियों ने पंजाबी संस्कृति और लोक परंपराओं की शानदार झलक पेश करते हुए समारोह को यादगार बना दिया।

तीज समारोह के दौरान महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक पंजाबी वेशभूषा में सज-धजकर हिस्सा लिया। हरे रंग के लहंगे, चूड़ियां और हाथों में रची मेहंदी ने समारोह की खूबसूरती को और बढ़ा दिया। कार्यक्रम में महिलाओं ने चरखा चलाने के साथ किकली खेली और गिद्धा डालकर पंजाब की समृद्ध लोक संस्कृति को जीवंत किया।

समारोह में पूर्व विधायक हरदयाल सिंह कंबोज की पत्नी और उनकी पुत्रवधू ने भी विशेष रूप से शिरकत की। उन्होंने गांव की महिलाओं और युवतियों के साथ मिलकर तीज का आनंद लिया और पंजाबी संस्कृति एवं विरासत को बढ़ावा देने का संदेश दिया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज के दौर में पंजाब और पंजाबियत की पारंपरिक पहचान को कायम रखने के लिए ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों की बेहद जरूरत है। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और विरासत से जोड़ने के लिए इस तरह के कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने चाहिए।

उन्होंने सभी को हरियाली तीज की शुभकामनाएं देते हुए आपसी भाईचारे और एकता का संदेश दिया। साथ ही पंजाब के पारंपरिक त्योहारों को मिल-जुलकर मनाने की अपील की।

ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों और रीति-रिवाजों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से पंजाब की लोक कला, परंपराओं और विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद मिलती है।

समराला में तीज उत्सव की धूम: हरनाम नगर में गिद्धा, लोकगीत और पंजाबी संस्कृति के रंग बिखरे

समराला / सत्ता संदेश

Report : परमिंदर वर्मा

सावन की फुहारों के बीच समराला का हरनाम नगर रंग-बिरंगे परिधानों, गिद्धे की थाप और पारंपरिक बोलियों से पूरी तरह सराबोर नजर आया। मौका था पंजाब के पारंपरिक तीज पर्व के उत्सव का, जहां महिलाओं ने पूरे उत्साह और उल्लास के साथ अपनी संस्कृति और विरासत का रंग बिखेरा।

तीज समारोह में महिलाओं ने पारंपरिक पंजाबी वेशभूषा पहनकर गिद्धा प्रस्तुत किया, लोक बोलियां गाईं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए पंजाब की समृद्ध विरासत को जीवंत किया। पूरे आयोजन के दौरान लोक संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों की खूबसूरत झलक देखने को मिली।

इस अवसर पर पूर्व पार्षद मैडम काफी ने कहा कि तीज केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व आपसी प्रेम, भाईचारे और पारंपरिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश देता है। साथ ही ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं।

कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने झूले, लोकगीत, गिद्धा और बोलियों के साथ तीज के उत्सव का भरपूर आनंद लिया। सावन के इस पारंपरिक पर्व ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आधुनिक दौर में भी पंजाब की लोक संस्कृति आज भी पूरी जीवंतता के साथ लोगों के दिलों में बसती है।