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पंजाब दौरे पर अमित शाह ने AAP सरकार को घेरा, नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की मौत पर उठाए सवाल

लुधियाना / मानसा / सत्ता संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने पंजाब दौरे के दौरान राज्य में नशे की समस्या को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा हमला बोला। मंगलवार को गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में नशे से जुड़े मामलों से प्रभावित परिवारों से मुलाकात के बाद शाह ने आरोप लगाया कि पंजाब में नशीले पदार्थों का कारोबार गंभीर चुनौती बना हुआ है और इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अमित शाह ने गुरदासपुर के विक्रमजीत सिंह, संगरूर के गुलजार सिंह और मानसा के एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा के मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने उन्हें गहरा दुख पहुंचाया है। उन्होंने पंजाब सरकार से सवाल किया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों और उनके परिवारों को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

शाह ने आरोप लगाया कि राज्य में जमीनी हालात चिंताजनक हैं और नशे की समस्या से निपटने के लिए सरकार को ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों से मिलने का उनका उद्देश्य उनके दुख में शामिल होना और उन्हें न्याय का भरोसा दिलाना था।

‘गांव-गांव में बिक रहा नशा’, AAP सरकार से पूछे सवाल

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले पंजाब को नशामुक्त बनाने का वादा किया था, लेकिन उनके अनुसार राज्य में नशीले पदार्थों का कारोबार अब भी चिंता का विषय है। उन्होंने पुलिसकर्मियों से कथित तौर पर नशीले पदार्थों की बरामदगी का उल्लेख करते हुए नशे के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बताई।

शाह ने पंजाब सरकार से PIT-NDPS कानून के तहत की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उनके दावे के अनुसार, पिछले एक साल में इस कानून के तहत 929 मामले दर्ज किए गए, लेकिन नशे के कारोबार से प्रभावित क्षेत्रों में गिरफ्तारियों को लेकर उन्होंने सरकार से जवाब मांगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर गंभीर मामलों की समीक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया। शाह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में केवल बयान देने के बजाय ठोस कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।

‘गालियां देने से फायदा नहीं, नशे का कारोबार बंद करें’

अमित शाह ने कहा कि पंजाब दौरे पर आने का उनका उद्देश्य नशे से प्रभावित परिवारों को सांत्वना देना था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी या उनके प्रति नाराजगी जताने से नशे की समस्या का समाधान नहीं होगा।

शाह ने राज्य सरकार से अपील की कि नशीले पदार्थों के कारोबार को रोकने और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार नशे के खिलाफ अभियान में पंजाब के लोगों के साथ खड़ी है।

BJP सरकार बनने पर 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त पंजाब का वादा

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों और उन्हें संरक्षण देने वालों की पहचान कर कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने पंजाब की जनता से वादा दोहराया कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने पर 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा जाएगा।

शाह ने यह भी कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को न्याय मिलना चाहिए और इस तरह की घटनाओं में शामिल आरोपियों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।

‘पाताल से भी ढूंढ निकाले जाएंगे आरोपी’, CBI जांच पर शाह का बयान

परविंदर सिंह झोटा के मामले का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि आरोपी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के सामने लाया जाना चाहिए। उन्होंने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपे जाने के फैसले का स्वागत किया और दोषियों को सजा दिलाने का भरोसा दिया।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 20 अक्टूबर को झोटा हत्याकांड की जांच CBI को सौंपने की घोषणा की थी। इसके बाद CBI की टीम मानसा पहुंची और मामले की जांच अपने हाथ में लेने की प्रक्रिया शुरू की। शाह ने गुरदासपुर और संगरूर से जुड़े अन्य मामलों की जांच भी CBI को सौंपने की मांग उठाई।

झोटा परिवार से मुलाकात, इंसाफ की मांग पर कायम परिजन

मानसा में अमित शाह ने एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मुलाकात की। परिवार ने उनसे मामले में इंसाफ दिलाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। परिजनों के अनुसार, शाह ने उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया और जांच में कार्रवाई को लेकर इंतजार करने के लिए कहा।

झोटा परिवार और समर्थक मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। CBI जांच शुरू होने के बाद अब इस मामले में जांच की प्रगति और सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी।

अमित शाह का यह दौरा पंजाब में नशे की समस्या, कानून-व्यवस्था और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक टकराव को भी सामने लाता है। जहां भाजपा ने राज्य सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, वहीं झोटा मामले को CBI को सौंपने का फैसला पंजाब सरकार की ओर से परिवार की मांग स्वीकार किए जाने के रूप में सामने आया है।

आनंदपुर साहिब मामले में SGPC की शुरुआती जांच रिपोर्ट सार्वजनिक, हरजिंदर सिंह धामी ने प्रोपेगैंडा के आरोपों को नकारा

अमृतसर / सत्ता संदेश

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने आनंदपुर साहिब से जुड़े मामले में गठित सब-कमेटी की शुरुआती जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की। उन्होंने SGPC के खिलाफ चलाए जा रहे कथित प्रोपेगैंडा की कड़ी आलोचना करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।

एडवोकेट धामी ने बताया कि मामले की जांच के लिए सरदार बलदेव सिंह कल्याणपुर, सरदार गुरमीत सिंह बूह, बीबी गुरिंदर कौर भोलूवाला और सरदार गुरबख्श सिंह खालसा की चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। इसके कोऑर्डिनेटर सेक्रेटरी बलविंदर सिंह काहलवां थे। कमेटी को 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देने का समय दिया गया था और निर्धारित अवधि में शुरुआती जांच रिपोर्ट पेश कर दी गई।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एडवोकेट धामी ने कहा कि एक तरफ आपराधिक मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच और कार्रवाई होती है, जबकि दूसरी तरफ इस मामले में SGPC की छवि खराब करने के लिए सोशल मीडिया पर ट्रायल चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना ठोस आधार के हर दिन नई बातें सामने लाई जा रही हैं, जिससे लोगों में भ्रम पैदा हो रहा है।

SGPC अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जांच पूरी होने से पहले अधूरी जानकारियां मीडिया और सोशल मीडिया में सार्वजनिक कर माहौल को प्रभावित करने का अधिकार किसे दिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए जांच को तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने एक बार फिर पूरे मामले की CBI जांच करवाने की मांग की। उन्होंने पंजाब के पुराने मामलों और शहीद भाई जसवंत सिंह खालड़ा के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि गंभीर मामलों में निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने आना जरूरी है।

SGPC के खिलाफ लगाए जा रहे फंड के कथित गलत इस्तेमाल और विदेश में पैसा भेजने के आरोपों को भी एडवोकेट धामी ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि SGPC के धार्मिक प्रचार और चैरिटी फंड का पैसा रिकॉर्ड और पारदर्शिता के साथ खर्च किया जाता है।

जांच रिपोर्ट में संबंधित महिला के अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर ठहरने से जुड़े रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया गया। धामी के अनुसार, महिला के तख्त श्री केसगढ़ साहिब के कमरा नंबर 38, गुरुद्वारा अंब साहिब और श्री दरबार साहिब स्थित गुरु अर्जन देव निवास में अलग-अलग तारीखों पर ठहरने की सरकारी एंट्री, रसीदें और किराए के भुगतान का रिकॉर्ड उपलब्ध है।

धामी ने दावा किया कि इन रिकॉर्ड के आधार पर महिला के लगातार छह महीने एक ही सराय में रहने का दावा सही नहीं है। उन्होंने सराय के रजिस्टर में कथित छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, एंट्री नंबर 246 के बाद की एंट्री में काट-छांट कर आंकड़ों में बदलाव किया गया और 247 से 281 तक की एंट्री में भी कथित तौर पर हेरफेर की गई, ताकि एक गलत लिंक तैयार किया जा सके।

SGPC अध्यक्ष ने दावा किया कि हैंडराइटिंग की जांच में भी इन एंट्री को बाद में दर्ज किए जाने के संकेत मिले हैं। उन्होंने कहा कि SGPC जांच में पूरा सहयोग कर रही है और संगत के सामने सच्चाई लाने के लिए सभी जरूरी कानूनी रास्ते अपनाए जाएंगे।

हंजर बायोटेक एनर्जीज पर 93.44 करोड़ के बैंक फ्रॉड का आरोप, CBI ने दर्ज किया केस

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

हंजर बायोटेक एनर्जीज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित बैंक लोन फ्रॉड मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने केस दर्ज किया है। बैंक की शिकायत के मुताबिक, कंपनी को दी गई करीब 350 करोड़ रुपये की टर्म लोन सुविधा में कथित वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। जांच के दौरान बैंक ने करीब 93.44 करोड़ रुपये की बकाया राशि को NPA घोषित किया था।

बैंक की शिकायत के अनुसार, कंपनी ने वर्ष 2009 में अपनी वित्तीय स्थिति और प्रस्तावित परियोजनाओं का विवरण देते हुए करीब 350 करोड़ रुपये की टर्म लोन सुविधा मांगी थी। 9 नवंबर 2009 को बैंक की शाखा प्रबंधन समिति की सिफारिश पर कंपनी को 75 करोड़ रुपये का अतिरिक्त टर्म लोन मंजूर किया गया। इसके अलावा वर्ष 2010 में तत्कालीन ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, जो अब पंजाब नेशनल बैंक (PNB) का हिस्सा है, ने भी 50 करोड़ रुपये का टर्म लोन मंजूर किया था।

शिकायत के मुताबिक, 13 परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित टर्म लोन सुविधा पूरी तरह वितरित की गई थी।

2013 में खाता हुआ NPA

बैंक का आरोप है कि मई 2011 से हंजर समूह के खातों में अनियमितताएं सामने आने लगी थीं। बैंक की ओर से संपर्क, फोन, SMS और बैठकों के जरिए खाते को नियमित करने की कोशिश की गई, लेकिन कथित तौर पर स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

इसके बाद 30 जुलाई 2013 को हंजर बायोटेक एनर्जीज का खाता NPA घोषित कर दिया गया। उस समय बैंक के अनुसार कंपनी पर करीब 93.44 करोड़ रुपये की बकाया देनदारी थी।

फॉरेंसिक ऑडिट में सामने आईं कथित अनियमितताएं

मामले में बैंक ने बाद में खाते का फॉरेंसिक ऑडिट कराया। इसके लिए BDO (India) LLP को नियुक्त किया गया था, जिसने 2 जनवरी 2017 को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

बैंक की शिकायत में फॉरेंसिक ऑडिट के हवाले से कहा गया है कि प्लांट और मशीनरी के एक प्रमुख सप्लायर Navi Infrastructure Engineering Pvt. Ltd. और हंजर बायोटेक एनर्जीज के बीच कथित कारोबारी संबंध थे। रिपोर्ट में कॉमन प्रमोटर, निदेशक/पार्टनर और कॉमन ई-मेल डोमेन जैसी समानताओं का उल्लेख किया गया है।

ऑडिट के मुताबिक, प्लांट और मशीनरी के लिए जारी राशि का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा सप्लायर कंपनियों को ट्रांसफर किया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि कुल राशि का 94.13 प्रतिशत यानी करीब 262.50 करोड़ रुपये पांच प्रमुख सप्लायर कंपनियों को ट्रांसफर किए गए।

इन कंपनियों में Navi Infra, Munshi Manufacturing Company, Navi Engineering Works, Enviro Infratech Company और Yes Engineering Company के नाम शामिल हैं।

फर्नीचरवाला समूह से जुड़ी कंपनियों तक रकम पहुंचने का आरोप

फॉरेंसिक ऑडिट में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ मामलों में सप्लायर कंपनियों से रकम फर्नीचरवाला समूह से जुड़ी कंपनियों तक पहुंची।

शिकायत के अनुसार, Navi Infra ने वित्त वर्ष 2010-11 में Huma Synthetics Pvt. Ltd. को 21.88 करोड़ रुपये का शॉर्ट-टर्म लोन/एडवांस दिया था। बैंक ने इसे इरफान फर्नीचरवाला द्वारा प्रमोट की गई कंपनी बताया है।

ऑडिट में संबंधित सप्लायर कंपनियों के बीच भी कथित संबंधों का उल्लेख किया गया है। इनमें कॉमन प्रमोटर, निदेशक, पार्टनर, प्रमुख प्रबंधन अधिकारी, समान पते और कॉमन ई-मेल डोमेन जैसी समानताएं शामिल होने की बात कही गई है।

गारंटरों ने संपत्तियां गिरवी रखीं

बैंक की शिकायत के मुताबिक, नदीम फर्नीचरवाला, नुज़हत फर्नीचरवाला और नाजिम अशरफ फर्नीचरवाला ने कंपनी के कर्ज की अदायगी के लिए गारंटर के तौर पर काम किया और अपनी संपत्तियां बैंक के पास गिरवी रखीं।

हालांकि शिकायत के अनुसार, 75 करोड़ और 50 करोड़ रुपये के टर्म लोन के मामलों में कोई कोलेटरल सिक्योरिटी नहीं थी।

हंजर समूह की कुछ अन्य कंपनियां—हंजर बायोटेक वडोदरा प्राइवेट लिमिटेड, हंजर बायोटेक एनर्जीज (वसई) प्राइवेट लिमिटेड और हंजर बायोटेक एनर्जीज सूरत प्राइवेट लिमिटेड—भी बैंक से वित्तीय सुविधाएं ले रही थीं। बैंक ने इनसे जुड़े कथित फ्रॉड को लेकर अलग शिकायतें CBI में दर्ज कराने की बात कही है।

2018 में बैंकों की कुल बकाया राशि 284.05 करोड़

बैंक की शिकायत के अनुसार, 30 जून 2018 तक हंजर बायोटेक एनर्जीज पर कंसोर्टियम बैंकों की कुल बकाया राशि 284.05 करोड़ रुपये थी। इसमें PNB समेत विभिन्न बैंकों की देनदारियां शामिल थीं। हंजर बायोटेक एनर्जीज के खिलाफ अलग-अलग बैंकों की वसूली संबंधी कार्यवाही भी रिकॉर्ड में दिखाई देती है।

2025 में खाते को फ्रॉड के रूप में वर्गीकृत किया गया

बैंक ने मामले में 11 दिसंबर 2013 को SARFAESI कार्रवाई शुरू की थी। बाद में कंपनी और उससे जुड़ी संस्थाओं के लेन-देन की जांच के दौरान फॉरेंसिक ऑडिट कराया गया।

बैंक की शिकायत के मुताबिक, आरोपियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और उनके जवाब तथा व्यक्तिगत सुनवाई के बाद 24 दिसंबर 2025 को खाते को फ्रॉड के रूप में वर्गीकृत किया गया।

बैंक की आंतरिक जांच में कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई योग्य लापरवाही नहीं मिलने की बात भी शिकायत में कही गई है। हालांकि अज्ञात लोगों की भूमिका की जांच का विकल्प खुला रखा गया है।

CBI ने दर्ज किया मामला

इन्हीं आरोपों के आधार पर CBI ने कथित आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। FIR में IPC की धारा 120-B और 420 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) और 13(1)(d) का उल्लेख है।

मामले की जांच CBI इंस्पेक्टर धर्मबीर राणा को सौंपी गई है।

बैंक की शिकायत के मुताबिक, आरोपियों पर बैंक से प्राप्त धन का कथित दुरुपयोग और डायवर्जन करने का आरोप है, जिससे बैंक को करीब 93.44 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात कही गई है। CBI नामजद आरोपियों के साथ-साथ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

गौरतलब है कि ये सभी आरोप बैंक की शिकायत और जांच एजेंसी के मामले पर आधारित हैं। अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में मामले की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।

Neet Paper Leak मामले में CBI ने कोर्ट में पेश की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट, 13 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

दिल्ली / सत्ता संदेश

नीट पेपर लीक से जुड़े मामलों के लिए गठित स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. CBI ने कोर्ट को बताया कि 20 हजार पेज की चार्जशीट है. जिसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, साक्ष्य नष्ट करना, भ्रष्टाचार और लोक परीक्षा अधिनियम के तहत अपराध की धाराएं लगाई गई हैं.

CBI के मुताबिक चार्जशीट में 360 गवाह, 422 दस्तावेज, 43 भौतिक साक्ष्य हैं. 12 मई 2026 को उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत पर FIR दर्ज की गई थी. नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.

92 ठिकानों पर छापेमारी

CBI ने 8 साइबर विशेषज्ञ समेत 72 अधिकारियों की टीम बनाई थी और महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली समेत कई राज्यों में 92 ठिकानों पर छापेमारी की. इस दौरान डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त कर फोरेंसिक जांच की गई. CBI ने बताया कि फोरेंसिक, हैंडराइटिंग और शैक्षणिक रिपोर्ट से लीक की पुष्टि हुई है.

कुल 13 लोगों को किया गिरफ्तार

CBI के मुताबिक पहली गिरफ्तारी 13 मई 2026 को हुई थी. पेपर लीक मामले में कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें NTA के 3 सब्जेक्ट एक्सपर्ट भी शामिल हैं. इसके साथ ही बिचौलियों और कोचिंग से जुड़े 2 लोगों को भी गिरफ्तार किया गया. CBI ने बताया कि मनी ट्रेल की जांच चल रही है. कई बैंक खाते, लॉकर और एक डीमैट खाता फ्रीज किया गया है.

अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी

राउज़ एवेन्यू कोर्ट स्थित स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने CBI की चार्जशीट को रिकॉर्ड पर लिया है. कोर्ट ने CBI को चार्जशीट के एनेक्सचर (Annexure) दाखिल करने के लिए तीन दिन का अतिरिक्त समय दिया है. कोर्ट ने नोट किया कि चार्जशीट में दस्तावेजों, बयानों और वस्तुओं की सूची संलग्न की गई है. कोर्ट ने CBI से पूछा कि चार्जशीट में जिन बयानों और अन्य दस्तावेजों का हवाला दिया गया है, वह कहां हैं.

CBI ने चार्जशीट के एनेक्स्चर दस्तावेज़ को दाखिल करने के लिए समय मांगा. CBI ने कोर्ट को बताया कि 20,000 पृष्ठों के एनेक्स्चर दस्तावेज़ को स्कैन किया जा रहा है. राउज़ एवेन्यू कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी.

15 जून तक बढ़ी NEET-UG पेपर लीक के मुख्य आरोपी शुभम की न्यायिक हिरासत

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ा दी। खैरनार को उनकी पिछली न्यायिक हिरासत समाप्त होने के बाद अदालत में पेश किया गया था।

सीबीआई ने किया वाघमारे की जमानत का विरोध

वहीं, मामले की एक अन्य आरोपी मनीषा वाघमारे की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला 9 जून के लिए सुरक्षित रख लिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने वाघमारे की जमानत का कड़ा विरोध किया, सीबीआई का कहना है कि मनीष वाघमारे NEET-UG पेपर लीक के षड्यंत्र की अहम साजिशकर्ता है।

सीबीआई ने दी जानकारी ?

विशेष CBI न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत में वाघमारे की ओर से अधिवक्ता श्रेयस गच्छे और CBI की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक नीतू सिंह ने अपने-अपने पक्ष रखे। CBI ने अदालत को बताया कि मनीषा वाघमारे ने सेवानिवृत्त रसायन विज्ञान शिक्षक प्रह्लाद कुलकर्णी और पुणे निवासी धनंजय लोखंडे के साथ मिलकर लीक हुआ प्रश्नपत्र हासिल किया और उसे आगे वितरित किया।

जांच एजेंसी के अनुसार, बैंक खातों के रिकॉर्ड और छात्रों के बयानों से यह संकेत मिले हैं कि परीक्षा सामग्री तक पहुंच दिलाने के लिए धन का लेन-देन किया गया था। सीबीआई का दावा है कि धनंजय लोखंडे ने मनीषा वाघमारे से नीट यूजी 2026 की परीक्षा सामग्री प्राप्त की थी, जिसे बाद में शुभम खैरनार तक पहुंचाया गया।

बचाव पक्ष ने क्या कहा?

हालांकि, बचाव पक्ष ने सीबीआई के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मनीषा वाघमारे एक प्रमाणित शैक्षणिक सलाहकार हैं और उनकी आय छात्रों को विभिन्न संस्थानों में रेफर करने पर मिलने वाले कमीशन से होती है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि उनके घर पर की गई तलाशी के दौरान कोई नकदी या अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई।

सुनवाई के दौरान वाघमारे के वकील ने उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी हवाला दिया। उन्होंने बताया कि वाघमारे वर्टिगो (चक्कर आने की बीमारी) से पीड़ित हैं और हाल ही में अस्पताल में भर्ती रही थीं। इस पर अदालत ने बचाव पक्ष को उचित आवेदन दाखिल करने की सलाह देते हुए कहा कि जेल अस्पताल ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाओं से लैस है।

सीबीआई ने अदालत से कहा कि मामले की व्यापक साजिश का खुलासा करने और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए आरोपियों की हिरासत आवश्यक है।

गौरतलब है कि NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को भारत के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में आयोजित की गई थी, जिसमें 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई थी। अब केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा के लिए सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

नीट पेपर लीक मामला: सीबीआई की ताबड़तोड़ कार्रवाई, कई राज्यों में छापेमारी और गिरफ्तारियां शुरू

नई दिल्ली/जयपुर: नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026) पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार की सख्ती के बाद सीबीआई (CBI) ने कमान संभालते ही अपनी जांच तेज कर दी है। शिक्षा मंत्रालय की लिखित शिकायत पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के बाद जांच एजेंसी ने कई स्थानों पर छापेमारी की और महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां की हैं।

जमवारामगढ़ से पहली हिरासत: सीबीआई ने अपनी पहली बड़ी कार्रवाई राजस्थान के जमवारामगढ़ में की है, जहां एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। बताया जा रहा है कि इस शख्स के दोनों बेटे पेशे से डॉक्टर हैं।नासिक में मेडिकल छात्र गिरफ्तार: जांच एजेंसियों ने महाराष्ट्र के नासिक से डॉ. शुभम खैरनार नाम के एक आरोपी को पकड़ा है। शुभम खुद भोपाल के एक कॉलेज में BAMS (आयुर्वेदिक चिकित्सा) के अंतिम वर्ष का छात्र है, जिससे इस नेटवर्क के गहरे और प्रोफेशनल संबंधों का पता चलता है।

गंभीर धाराओं में केस दर्ज: सीबीआई ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं जैसे आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, चोरी और सबूत मिटाने के तहत दर्ज किया है। इसके अलावा, ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट 2024’ और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं।

परीक्षा की पवित्रता पर सवाल: शिकायत के अनुसार, 3 मई 2026 को आयोजित हुई परीक्षा से पहले ही कुछ दस्तावेजों का अनधिकृत प्रसार किया गया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को इस संबंध में इनपुट मिले थे, जिसके बाद सीबीआई अब दोषियों की पहचान के लिए विशेष टीमें गठित कर जांच कर रही है।

सस्पेंड DIG भुल्लर पर ED का शिकंजा: चंडीगढ़ समेत 11 ठिकानों पर छापेमारी, करोड़ों की बेनामी संपत्ति का खुलासा

पंजाब डेस्क : भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे पंजाब पुलिस के सस्पेंड डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर की मुसीबतें लगातार बढ़ती जा रही हैं,। सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत भुल्लर और उनके सहयोगियों से जुड़े 11 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। यह छापेमारी चंडीगढ़, लुधियाना, पटियाला, नाभा और जालंधर में की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य बेनामी संपत्तियों और अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का पता लगाना है।

सीबीआई की जांच में मिला था कुबेर का खजाना : इससे पहले सीबीआई (CBI) द्वारा की गई छापेमारी में भुल्लर के ठिकानों से चौंकाने वाली बरामदगी हुई थी। जांच एजेंसी को लगभग ₹7.36 करोड़ कैश, 2.5 किलो सोना, और ₹2.32 करोड़ के चांदी के आभूषण मिले थे। इसके अलावा, उनके पास से 26 लग्जरी घड़ियां (रोलेक्स और राडो), मर्सिडीज और ऑडी जैसी कारें, और 108 विदेशी शराब की बोतलें बरामद की गई थीं। दस्तावेजों के अनुसार, उनके परिवार के नाम पर 50 से अधिक अचल संपत्तियां दर्ज हैं।

क्या है पूरा मामला? डीआईजी भुल्लर को 16 अक्टूबर 2025 को एक कबाड़ कारोबारी से 8 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और 5 लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। उन पर आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज किया गया है। फिलहाल वे चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। हाल ही में, 10 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद : चंडीगढ़ की विशेष अदालत ने सीबीआई को अन्य अज्ञात लोक सेवकों और बिचौलियों के खिलाफ नई जांच की अनुमति दे दी है। जांच के दौरान मिली एक डायरी और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से संकेत मिले हैं कि पंजाब के कई अन्य वरिष्ठ आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारी भी इस संगठित भ्रष्टाचार नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं।

DM सुसाइड केस: पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर 5 दिन की पुलिस रिमांड पर; गमगीन माहौल में रंधावा का अंतिम संस्कार, CM का CBI जांच से इनकार

पंजाब डेस्क: अमृतसर में वेयरहाउस के जिला मैनेजर (DM) गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या के मामले में मंगलवार, 24 मार्च को बड़े घटनाक्रम हुए। एक ओर जहां आरोपी पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर को पुलिस रिमांड पर भेजा गया, वहीं दूसरी ओर मृतक रंधावा का उनके पैतृक स्थान पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।

5 दिन की पुलिस रिमांड और समर्थकों का हंगामा : अमृतसर पुलिस ने पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर को कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उन्हें 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। कोर्ट में पेशी के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण रहा क्योंकि भुल्लर के समर्थकों ने कोर्ट परिसर के अंदर जबरन घुसने की कोशिश की और जमकर हंगामा किया, जिन्हें पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद रोका।

भावुक विदाई: 10 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि मंगलवार को चौथे दिन गगनदीप सिंह रंधावा का अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें लाल पगड़ी पहनाकर अंतिम विदाई दी गई और उनके 10 साल के बेटे ने मुखाग्नि दी। इससे पहले सिविल अस्पताल में मजिस्ट्रेट की निगरानी में शव का करीब साढ़े 4 घंटे तक पोस्टमॉर्टम चला, जिसकी पूरी वीडियोग्राफी भी करवाई गई। रंधावा की पत्नी और बच्चे इस दौरान बेहद भावुक नजर आए।

मुख्यमंत्री का कड़ा रुख: नहीं होगी CBI जांच चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस केस की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपने की विपक्ष की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आरोपी मंत्री का इस्तीफा लिया जा चुका है, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है और चीफ सेक्रेटरी लेवल की कमेटी को जांच के आदेश दिए गए हैं, इसलिए नियम अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

उन्होंने अमित शाह और राजा वड़िंग जैसे नेताओं का नाम लेते हुए पूर्व के कई मामलों का उदाहरण दिया जहाँ उनके अनुसार न तो इस्तीफे हुए और न ही सीबीआई जांच की गई।

विभागों का बंटवारा : लालजीत भुल्लर के इस्तीफे के बाद उनके विभागों की जिम्मेदारी अन्य मंत्रियों को सौंप दी गई है। अब ट्रांसपोर्ट विभाग वित्त मंत्री हरपाल चीमा संभालेंगे, जबकि जेल विभाग की जिम्मेदारी डॉ. रवजोत को दी गई है।

पत्नी की मांग बरकरार : इधर, मृतक की पत्नी उपिंदर कौर ने सरकार और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर अविश्वास जताते हुए दोहराया है कि उन्हें न्याय के लिए केवल सीबीआई जांच पर ही भरोसा है। गौरतलब है कि रंधावा का सल्फास खाते हुए एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए थे।

50 से ज्यादा बच्चों के साथ दरिंदगी: बांदा कोर्ट ने हैवान पति-पत्नी को सुनाई फांसी की सजा, डार्क वेब पर बेचते थे अश्लील वीडियो

नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले में पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को 50 से अधिक बच्चों के साथ यौन शोषण करने और उनके अश्लील वीडियो बनाकर डार्क वेब पर बेचने के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई है।

“रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मामला और मुआवजा: कोर्ट ने 160 पन्नों के अपने विस्तृत फैसले में इस घटना को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” (दुर्लभतम से दुर्लभ) करार दिया। अदालत ने आदेश दिया कि दोनों दोषियों को मरते दम तक फांसी पर लटकाया जाए। इसके साथ ही, कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

यूं देते थे वारदात को अंजाम: दोषी रामभवन चित्रकूट में सिंचाई विभाग में तैनात था। यह दंपति गरीब घरों के 5 से 16 साल के बच्चों (कुछ तो 3 साल से भी कम उम्र के थे) को लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। दोनों मिलकर नाबालिगों के साथ कुकर्म करते थे और उनके वीडियो बनाकर अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क के माध्यम से डार्क वेब पर विदेशों में बेचते थे।

इंटरपोल की सूचना पर CBI ने की थी कार्रवाई: इस जघन्य अपराध का खुलासा तब हुआ जब सीबीआई (CBI) को इंटरपोल से इस नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली। सीबीआई ने अक्टूबर 2020 में मुकदमा दर्ज किया और नवंबर 2020 में रामभवन को गिरफ्तार किया, जबकि उसकी पत्नी को गवाहों को धमकाने के आरोप में दिसंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान 74 गवाहों को पेश किया गया।

बर्बरता की हदें पार : सीबीआई की जांच में सामने आया कि आरोपियों द्वारा किए गए अपराध इतने बर्बर थे कि कुछ बच्चों के गुप्तांगों पर गंभीर चोटें आईं और उन्हें सालों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। कई बच्चे अब भी इस दरिंदगी के कारण गहरे मानसिक आघात (ट्रॉमा) से जूझ रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधियों में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है।