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डीएम सुसाइड केस: गमगीन माहौल में हुआ रंधावा का अंतिम संस्कार

पंजाब डेस्क: पंजाब वेयरहाउस कॉरपोरेशन के जिला मैनेजर (DM) गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या के मामले में मंगलवार, 24 मार्च 2026 को बड़ी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली। अमृतसर की एक अदालत ने पूर्व जेल मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर को 5 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

कोर्ट की कार्यवाही और रिमांड: अमृतसर पुलिस ने मंगलवार शाम करीब 6 बजे लालजीत भुल्लर को अदालत में पेश किया। पुलिस ने मामले की तह तक जाने और मृतक द्वारा छोड़े गए वीडियो में लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच के लिए 7 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने 5 दिन की रिमांड मंजूर की। सोमवार को दोबारा पेशी तक पुलिस आरोपी से पूछताछ कर तथ्यों की पुष्टि करेगी। पेशी के दौरान अदालत परिसर के बाहर भुल्लर के समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की, जिसे देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।

अंतिम विदाई और सुरक्षा: दूसरी ओर, पीड़ित डीएम गगनदीप सिंह रंधावा का शव मंगलवार को मेडिकल बोर्ड की निगरानी में किए गए पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। शाम करीब साढ़े पांच बजे अमृतसर के शिवपुरी दुर्गियाना मंदिर में भारी सुरक्षा व्यवस्था और गमगीन माहौल के बीच उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग और राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं।

मामले की पृष्ठभूमि: गगनदीप सिंह रंधावा ने शुक्रवार रात जहरीला पदार्थ निगल लिया था, जिसकी शनिवार को अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मरने से पहले रंधावा ने एक वीडियो जारी कर पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। इसके बाद पुलिस ने भुल्लर, उनके पिता सुखदेव सिंह और पीए दिलबाग सिंह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने, धमकी देने और साजिश रचने की धाराओं में मामला दर्ज किया था।

CM ने CBI जांच से किया इनकार: इस संवेदनशील मामले को लेकर पंजाब की सियासत में भी हलचल तेज है। कांग्रेस ने जहां कैंडल मार्च निकाला, वहीं भाजपा ने अमृतसर में प्रदर्शन कर पूर्व मंत्री का पुतला फूंका। हालांकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले की सीबीआई (CBI) जांच से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस इस मामले की जांच करने में पूरी तरह सक्षम है।

DM सुसाइड केस: पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर 5 दिन की पुलिस रिमांड पर; गमगीन माहौल में रंधावा का अंतिम संस्कार, CM का CBI जांच से इनकार

पंजाब डेस्क: अमृतसर में वेयरहाउस के जिला मैनेजर (DM) गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या के मामले में मंगलवार, 24 मार्च को बड़े घटनाक्रम हुए। एक ओर जहां आरोपी पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर को पुलिस रिमांड पर भेजा गया, वहीं दूसरी ओर मृतक रंधावा का उनके पैतृक स्थान पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।

5 दिन की पुलिस रिमांड और समर्थकों का हंगामा : अमृतसर पुलिस ने पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर को कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उन्हें 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। कोर्ट में पेशी के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण रहा क्योंकि भुल्लर के समर्थकों ने कोर्ट परिसर के अंदर जबरन घुसने की कोशिश की और जमकर हंगामा किया, जिन्हें पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद रोका।

भावुक विदाई: 10 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि मंगलवार को चौथे दिन गगनदीप सिंह रंधावा का अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें लाल पगड़ी पहनाकर अंतिम विदाई दी गई और उनके 10 साल के बेटे ने मुखाग्नि दी। इससे पहले सिविल अस्पताल में मजिस्ट्रेट की निगरानी में शव का करीब साढ़े 4 घंटे तक पोस्टमॉर्टम चला, जिसकी पूरी वीडियोग्राफी भी करवाई गई। रंधावा की पत्नी और बच्चे इस दौरान बेहद भावुक नजर आए।

मुख्यमंत्री का कड़ा रुख: नहीं होगी CBI जांच चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस केस की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपने की विपक्ष की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आरोपी मंत्री का इस्तीफा लिया जा चुका है, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है और चीफ सेक्रेटरी लेवल की कमेटी को जांच के आदेश दिए गए हैं, इसलिए नियम अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

उन्होंने अमित शाह और राजा वड़िंग जैसे नेताओं का नाम लेते हुए पूर्व के कई मामलों का उदाहरण दिया जहाँ उनके अनुसार न तो इस्तीफे हुए और न ही सीबीआई जांच की गई।

विभागों का बंटवारा : लालजीत भुल्लर के इस्तीफे के बाद उनके विभागों की जिम्मेदारी अन्य मंत्रियों को सौंप दी गई है। अब ट्रांसपोर्ट विभाग वित्त मंत्री हरपाल चीमा संभालेंगे, जबकि जेल विभाग की जिम्मेदारी डॉ. रवजोत को दी गई है।

पत्नी की मांग बरकरार : इधर, मृतक की पत्नी उपिंदर कौर ने सरकार और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर अविश्वास जताते हुए दोहराया है कि उन्हें न्याय के लिए केवल सीबीआई जांच पर ही भरोसा है। गौरतलब है कि रंधावा का सल्फास खाते हुए एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए थे।

13 साल का इंतजार खत्म: देश के पहले ‘पैसिव यूथेनेसिया’ मामले में हरीश राणा का निधन; अंगदान कर दुनिया को कहा अलविदा

नेशनल डेस्क: गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा, जो पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे, का मंगलवार (24 मार्च 2026) को दिल्ली एम्स (AIIMS) में निधन हो गया। सुप्रीम कोर्ट से ऐतिहासिक मंजूरी मिलने के बाद, हरीश का निधन ‘पैसिव यूथेनेसिया’ (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की प्रक्रिया के तहत शाम 4 बजकर 10 मिनट पर हुआ।

13 साल का दर्दनाक संघर्ष और कानूनी लड़ाई: हरीश राणा 13 साल पहले छत से गिरने के कारण सिर में लगी गंभीर चोट के बाद कोमा में चले गए थे। उनके माता-पिता ने देश के बड़े अस्पतालों में उनका इलाज कराया, लेकिन डॉक्टरों ने उनके ठीक होने की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया था। इलाज का भारी आर्थिक बोझ (करीब 60-70 हजार रुपये महीना) और बेटे की असहनीय स्थिति को देखते हुए परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

भारत का पहला ऐसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने हरीश की स्थिति को देखते हुए उन्हें ‘पैसिव यूथेनेसिया’ की अनुमति दी, जो भारत में अपनी तरह का पहला मामला माना जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत एम्स के पैलिएटिव केयर विभाग में डॉक्टरों की निगरानी में उनका पोषण (Nutrition) धीरे-धीरे बंद किया गया। इस दौरान मेडिकल गाइडलाइंस का पालन करते हुए यह सुनिश्चित किया गया कि उन्हें किसी भी तरह की शारीरिक पीड़ा न हो।

जाते-जाते दे गए नई जिंदगी: निधन के बाद हरीश राणा के दो कॉर्निया और हार्ट वाल्व दान किए गए हैं। एम्स से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अंग एवं टिश्यू दान के क्षेत्र में यह एक बड़ा और प्रेरणादायक कदम है, जिससे हरीश ने जाते-जाते भी दूसरों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है।

एनएसएस सम्मेलन का शुभारंभ, युवा नेतृत्व एवं सामुदायिक सहभागिता पर जोर

250 प्रतिभागियों में राज्य एनएसएस अधिकारी, कार्यक्रम समन्वयक, कार्यक्रम अधिकारी, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता एवं स्वयंसेवक शामिल

मोहाली, 24 मार्च 2026: पंजाब एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के लिए राज्य एनएसएस सम्मेलन का आज मोहाली, पंजाब में उत्साहपूर्वक शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर लगभग 250 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें राज्य एनएसएस अधिकारी (पंजाब एवं यूटी चंडीगढ़), एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक, कार्यक्रम अधिकारी, एनएसएस राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता तथा विभिन्न संस्थानों से चयनित स्वयंसेवक शामिल थे।

यह दो दिवसीय सम्मेलन भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत एनएसएस क्षेत्रीय निदेशालय, चंडीगढ़ द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना तथा राष्ट्र निर्माण के लक्ष्यों के अनुरूप युवा-नेतृत्व वाले सामुदायिक विकास को बढ़ावा देना है।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में सुश्री प्रेरणा पुरी, आईएएस, सचिव शिक्षा, चंडीगढ़ प्रशासन उपस्थित रहीं। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों में श्री कोमल सिंह चौधरी, प्रतिनिधि निदेशक, एनएसएस, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार; श्री कुलविंदर सिंह, उप निदेशक, युवा सेवाएं, पंजाब सरकार; श्रीमती रुपिंदर कौर,  राज्य एनएसएस अधिकारी, पंजाब सरकार; डॉ. नेमी चंद गोलिया, राज्य एनएसएस अधिकारी, चंडीगढ़ प्रशासन; प्रो. (डॉ.) रविराजा एन. सीताराम, कुलपति, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय; प्रो. (डॉ.) देविंदर सिंह, प्रो-उपकुलपति, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय; तथा ब्रिगेडियर (डॉ.) गगन दीप सिंह बाठ, कार्यकारी निदेशक, छात्र कल्याण एवं प्रशासन विभाग, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय शामिल रहे।

अपने उद्घाटन संबोधन में मुख्य अतिथि ने सामाजिक रूप से जिम्मेदार युवाओं के निर्माण में एनएसएस की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला और सेवा भावना को बढ़ावा देने में इसकी महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एनएसएस युवाओं को सामुदायिक सहभागिता, जागरूकता अभियानों और जमीनी स्तर की पहलों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का एक सशक्त मंच प्रदान करता है।

उन्होंने यह भी बल दिया कि एनएसएस कार्यक्रम अधिकारियों को आधुनिक उपकरणों, नेतृत्व कौशल और नवाचारपूर्ण दृष्टिकोण से सशक्त बनाना आवश्यक है, ताकि वे स्वयंसेवकों को पर्यावरणीय स्थिरता, जन स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक समावेशन जैसे समकालीन मुद्दों से प्रभावी रूप से निपटने हेतु मार्गदर्शन दे सकें।

श्री जय भगवान, क्षेत्रीय निदेशक, एनएसएस क्षेत्रीय निदेशालय चंडीगढ़, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार ने एनएसएस के अंतर्गत प्रमुख प्राथमिकताओं एवं चल रही पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की और कार्यक्रम अधिकारियों को नवाचारपूर्ण, प्रभावी एवं सामुदायिक उन्मुख दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।

सम्मेलन के प्रथम दिवस में एनएसएस कार्यक्रमों के सुदृढ़ क्रियान्वयन, सामुदायिक सहभागिता को बढ़ाने तथा विभिन्न संस्थानों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान पर केंद्रित संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए। वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और युवाओं को समाजोपयोगी योगदान हेतु सशक्त बनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

सम्मेलन का दूसरा दिन कल आयोजित होगा, जिसमें राष्ट्र निर्माण एवं युवा सशक्तिकरण में एनएसएस की भूमिका को और मजबूत करने पर केंद्रित सत्र आयोजित किए जाएंगे।

खेलो इंडिया जनजातीय खेल: भारत के ओलंपिक सपनों की ओर एक मजबूत कदम

डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा
भारत की खेल यात्रा अद्भुत विविधता से भरी हुई है। उत्तर-पूर्व के पहाड़ों से लेकर मध्य
भारत के जंगलों तक, हमारे देश के हर कोने में प्रतिभा मौजूद है। खेलो इंडिया कार्यक्रम की
शुरुआत को अब आठ वर्ष हो चुके हैं, और इतने कम समय में यह एक राष्ट्रीय आंदोलन के
रूप में विकसित हो चुका है। युवा खेल, विश्वविद्यालय खेल, बीच गेम्स और विंटर गेम्स जैसे
विभिन्न आयामों के माध्यम से, खेलो इंडिया ने देशभर के युवा खिलाड़ियों की विविध
प्रतिभाओं को पहचानने और उभारने में सफलता प्राप्त की है।
खेलो इंडिया जनजातीय खेल (केआईटीजी) का समावेश इस यात्रा में एक और महत्वपूर्ण कदम
है। इसका पहला संस्करण 25 मार्च से 3 अप्रैल तक छत्तीसगढ़ में आयोजित किया जाएगा,
जिसमें 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 3,000 खिलाड़ी भाग लेंगे। इन खेलों में
सात पदक खेल शामिल होंगे—एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, भारोत्तोलन , तीरंदाजी, तैराकी और
कुश्ती प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
इन खेलों का आयोजन बस्तर क्षेत्र के जनजातीय बहुल जिलों, जो प्राचीन दंडकारण्य क्षेत्र का
हिस्सा हैं, के साथ-साथ सरगुजा क्षेत्र, रायगढ़ और मानपुर जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। यह
केवल एक और खेल प्रतियोगिता की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह हमारे माननीय प्रधानमंत्री
श्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प का हिस्सा है, जिसके तहत भारत के खेल पारिस्थितिकी तंत्र
(इकोसिस्टम) को व्यापक बनाते हुए हर खिलाड़ी तक अवसर पहुँचाना है—चाहे वह किसी भी
भौगोलिक या सामाजिक पृष्ठभूमि से आता हो। सीधे शब्दों में कहें तो यह हाशिए पर पड़े
खिलाड़ियों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास है।

जनजातीय क्षेत्रों के खिलाड़ियों ने लंबे समय से देश को गौरवान्वित किया है। राजस्थान के
महान तीरंदाज लिम्बा राम से लेकर झारखंड की तीरंदाजी स्टार दीपिका कुमारी तक, और
अनेक हॉकी खिलाड़ियों से लेकर ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू तक, उनकी उपलब्धियाँ
लाखों लोगों को प्रेरित करती हैं। ये उदाहरण इन क्षेत्रों में निहित अपार संभावनाओं को दर्शाते
हैं।
कई जनजातीय क्षेत्र ऐसे भी हैं जो ऐतिहासिक रूप से सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का
सामना करते रहे हैं। इन क्षेत्रों के युवाओं के लिए पहचान और विकास के अवसर सीमित रहे
हैं। ऐसे में, इन क्षेत्रों में संगठित खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन युवाओं की ऊर्जा को
सकारात्मक और राष्ट्र निर्माण की दिशा में मोड़ने का कार्य करता है। यह अनिश्चितता को
अवसर में और अलगाव को समावेशन में बदलने का प्रयास है।
वास्तव में, हमारे माननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण—“खेलेगा भारत तो
खिलेगा भारत”—आज साकार हो रहा है। खेल आज एक सशक्त माध्यम और समान अवसर
प्रदान करने वाला साधन बन चुका है, जो वंचित वर्गों के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और
अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने का अवसर देता है। जनजातीय क्षेत्रों में खेलो
इंडिया का विस्तार इसी दृष्टि का स्वाभाविक विस्तार है और यह इस विश्वास को मजबूत
करता है कि खेल राष्ट्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
खेलो इंडिया जनजातीय खेलों का आयोजन स्थानीय खेल पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) पर
भी दीर्घकालिक प्रभाव डालेगा। इससे जनजातीय क्षेत्रों में खेल अवसंरचना का विकास और
उन्नयन होगा, साथ ही स्थानीय कोच, प्रशिक्षकों और सहयोगी कर्मचारियों के लिए रोजगार के
अवसर भी उत्पन्न होंगे। स्कूलों और सामुदायिक संस्थानों को दैनिक जीवन में खेल को
शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे जमीनी स्तर पर एक स्थायी और
समावेशी खेल संस्कृति विकसित हो सके।
ये खेलो इंडिया जनजातीय खेल केवल एक बार आयोजित होने वाला आयोजन नहीं हैं, बल्कि
इन्हें खेलो इंडिया के वार्षिक कैलेंडर में स्थायी स्थान दिया जाएगा। इससे देशभर के
जनजातीय खिलाड़ियों को निरंतर और नियमित मंच मिलेगा, जो उनके दीर्घकालिक विकास
के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक संस्करण के साथ ये खेल व्यापक खेलो इंडिया
(इकोसिस्टम) पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक आधार के रूप में कार्य करेंगे। इस दृष्टि से,
जनजातीय खेल केवल एक मंच नहीं, बल्कि एक समृद्ध खेल संसार में प्रवेश का द्वार हैं।
इन खेलों के माध्यम से हम प्रतिभाओं की पहचान और उनके विकास का लक्ष्य रखते हैं।
राष्ट्रीय कोच, उच्च प्रदर्शन निदेशक और भारतीय खेल प्राधिकरण के तकनीकी विशेषज्ञ इन

खेलों में उपस्थित रहेंगे। चयनित खिलाड़ियों को उन्नत प्रशिक्षण के लिए भाखेप्रा केंद्रों में
भेजा जाएगा, जिससे वे अपने खेल करियर को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकें।
जैसे-जैसे भारत 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है और 2036
ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए प्रयासरत है, वैसे-वैसे प्रतिभाओं का दायरा बढ़ाना और
भी आवश्यक हो जाता है। इसका अर्थ है देश के हर कोने तक पहुँचना और यह सुनिश्चित
करना कि हर युवा खिलाड़ी—विशेषकर जनजातीय समुदायों से—अवसरों से वंचित न रहे।
जनजातीय खेलों की शुरुआत इसी सोच का परिणाम है और यह भारत के विकसित होते खेल
तंत्र की मजबूती को दर्शाता है।
खेल उत्कृष्टता की यात्रा अक्सर उन गाँवों और समुदायों से शुरू होती है जहाँ सपने तो होते
हैं, लेकिन अवसर सीमित होते हैं। खेलो इंडिया जनजातीय खेलों के माध्यम से, सरकार खेल
को इन्हीं क्षेत्रों तक पहुँचा रही है। इस प्रक्रिया में हम न केवल भविष्य के चैंपियनों को खोज
रहे हैं, बल्कि भारत की प्रतिभा श्रृंखला को भी सशक्त बना रहे हैं, ताकि हम एक वैश्विक खेल
महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें और 2036 तक शीर्ष 10 तथा 2047 तक शीर्ष 5
खेल राष्ट्र बनने के प्रधानमंत्री के लक्ष्य को साकार कर सकें।
(लेखक भारत सरकार में युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री हैं।)

जे सी आई लुधियाना सेंट्रल द्वारा ईपीएस वर्कशॉप का आयोजन; बड़ी संख्या में सदस्यों ने पब्लिक स्पीकिंग के हुनर सीखे

लुधियाना, 24 मार्च: जूनियर चैंबर इंटरनेशनल (जे सी आई) लुधियाना सेंट्रल के सदस्यों में पब्लिक स्पीकिंग के हुनर को बढ़ाने के उद्देश्य से जे सी आई लुधियाना सेंट्रल द्वारा एक इफेक्टिव पब्लिक स्पीकिंग (ई पी एस) वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में सदस्यों ने भाग लेकर अपने बोलने और अभिव्यक्ति के कौशल को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया।

जे सी आई लुधियाना सेंट्रल के अध्यक्ष एडवोकेट सिमरनप्रीत सिंह ने बताया कि इफेक्टिव पब्लिक स्पीकिंग (ई पी एस) वर्कशॉप का आयोजन सदस्यों में मंच पर बोलने, संवाद की शैली विकसित करने और माइक के माध्यम से प्रभावी ढंग से संबोधन करने जैसे कौशल को मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस वर्कशॉप के माध्यम से सदस्यों को अपने कार्यस्थल, घर और दैनिक जीवन में संवाद करने के तरीकों को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह वर्कशॉप पूरी तरह निःशुल्क है और आने वाले दिनों में भी इसी प्रकार की अन्य गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। एन जी ओ द्वारा सदस्यों के कौशल विकास के लिए लगातार प्रयास किए जाते हैं।

इस दौरान वर्कशॉप में शामिल होने पहुंचे सदस्यों ने जे सी आई लुधियाना सेंट्रल की ई पी एस वर्कशॉप की सराहना की और कहा कि इससे उन्हें काफी लाभ मिलेगा। इस अवसर पर अन्य लोगों के अलावा पूर्व अध्यक्ष प्रदीप सिंह मुंडी, ट्रेनर आभा सिकरी, ट्रेनर सौम्या भनोट, ट्रेनर गौतम सिकरी, सचिव विनायक कश्यप, संयुक्त सचिव रसलीन कौर, कोषाध्यक्ष भूपिंदर सिंह, संयुक्त कोषाध्यक्ष अवतार सिंह, वीपी ट्रेनिंग जसपाल ग्रेवाल, डायरेक्टर ऋतिक पलाहा, डायरेक्टर गुरविंदर सिंह, वीपी मैनेजमेंट कुलजीत सिंह, डायरेक्टर जतिंदर पाल सिंह मक्कड़, डायरेक्टर गुरप्रीत सिंह रियात, डायरेक्टर तेजस्वी धीमान, डायरेक्टर परमजीत सिंह, डायरेक्टर तरुण गोयल सहित जेसीआई लुधियाना सेंट्रल के कई अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।

आधार परिवर्तनकारी शासन, पारदर्शिता और प्रत्यक्ष लाभ वितरण को बढ़ावा देता है

श्री गुलाब चंद कटारियाकल्याण से जीएसटी लाभ तक: आधार भारत के डिजिटल शासन प्रणाली की रीढ़ की हड्डी के रूप में उभरता है

चंडीगढ़, 24 मार्च 2026: चंडीगढ़ में 24 मार्च 2026 को आयोजित आधार पारिस्थितिकी तंत्र पर उच्च स्तरीय कार्यशाला में, माननीय पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया ने आधार को आधुनिक शासन के परिवर्तनकारी स्तंभ के रूप में वर्णित किया, जिसने सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में पारदर्शिता, जवाबदेही और गरिमा को काफी बढ़ाया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि आधार को सीधे बैंक हस्तांतरण (Direct Bank Transfers) के साथ जोड़ने से यह सुनिश्चित हुआ है कि सरकारी लाभ अब बिना किसी बिचौलिए के सीधे उन लाभार्थियों तक पहुँचते हैं जिनके लिए वे बने हैं। इससे उन व्यापक लीकेज की समस्या खत्म हो गई है, जिसने कभी आपदा राहत, छात्रवृत्ति और स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रमों जैसी कल्याणकारी योजनाओं को बुरी तरह प्रभावित किया था।

उन्होंने बताया कि वन नेशन वन राशन कार्ड जैसी पहलें आधार के कारण संभव हुई हैं, जो लाभार्थियों को पूरे देश में सहजता से पात्रताओं तक पहुंचने की अनुमति देती हैं, जबकि इसके व्यापक आर्थिक प्रभाव को भी नोट किया, जिसमें बेहतर कर अनुपालन और जीएसटी राजस्व में लगभग ₹66,000 करोड़ प्रति माह से ₹2 लाख करोड़ से अधिक की पर्याप्त वृद्धि शामिल है। राज्यपाल ने जीवंत चुनौतियों को भी स्वीकार किया, जिसमें बुजुर्ग नागरिकों में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की समस्याएं, आधार नामांकन में देरी, और यह सुनिश्चित करने के लिए अधिक नागरिक-अनुकूल और समावेशी प्रशासनिक दृष्टिकोण की आवश्यकता शामिल है कि कोई भी पात्र व्यक्ति प्रणाली से बाहर न रहे।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भुवनेश कुमार ने सभा को संबोधित किया और आधार पारिस्थितिकी तंत्र में प्रमुख विकासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने नवीन रूप से लॉन्च किए गए आधार एप्लिकेशन के बारे में बात की और विदेशी आधार पंजीकरण पहल के महत्व पर जोर दिया, जो विदेश में रहने वाले भारतीय निवासियों को सेवाएं प्रदान करने में विस्तार करता है। उन्होंने आगे विस्तार से बताया कि आधार ने सरकारी सेवाओं तक सहज पहुंच सक्षम करके, पारदर्शिता में सुधार कर और पूरे देश में डिजिटल पहचान को मजबूत करके जीवन को सकारात्मक रूप से परिवर्तित किया है।

इस पर आधारित, पंजाब के मुख्य सचिव श्री के.ए.पी. सिन्हा ने राज्य के अनुभव को प्रस्तुत किया, यह कहते हुए कि आधार एकीकरण ने कल्याण और खरीद प्रणालियों को अत्यधिक मजबूत और लगभग लीकेज-रहित बना दिया है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली में, आधार प्रमाणीकरण ने लाभार्थी पहचान को सुव्यवस्थित किया है, अयोग्य प्राप्तकर्ताओं को छान लिया है, और वास्तविक लाभार्थियों के लिए स्थान बनाया है, जिसमें फिंगरप्रिंट पहचान में कठिनाई का सामना करने वाले व्यक्तियों, विशेष रूप से मैनुअल श्रमिकों की सहायता के लिए फेस प्रमाणीकरण जैसी नवाचारों का समर्थन प्राप्त है। इसके अतिरिक्त, आधार को जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रियों के साथ एकीकरण ने लाभार्थी डेटाबेस को स्वचालित रूप से अपडेट करने सक्षम किया है, जिससे योजनाओं में रिसाव को और कम किया गया और सटीकता में सुधार हुआ। मुख्य सचिव ने गतिशील डेटा प्रबंधन के लिए छोटे बच्चों और विदेशी नागरिकों या दोहरी दस्तावेजीकरण से संबंधित मामलों में संभावित दुरुपयोग की निगरानी सहित चल रही चुनौतियों की भी ओर इशारा किया।

इस मौके पर मौजूद मुख्य मेहमानों ने डिजिटल शासन के आधारशिला के रूप में आधार का लाभ उठाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया, निरंतर सुधार, तकनीकी नवाचार, और समावेशी कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करते हुए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि लाभ कुशलता से, पारदर्शी रूप से, और केवल उचित लाभार्थियों को प्रदान किए जाएं।

भगदड़ में मारे गए लोगों की याद में अभ्यास के दौरान 11 नंबर की जर्सी पहनेंगे आरसीबी के खिलाड़ी

बेंगलुरु, 24 मार्च (भाषा) रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के खिलाड़ी पिछले साल टीम की जीत के जश्न के दौरान भगदड़ में मारे गए 11 लोगों की याद में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के आगामी सत्र में मैच से पहले अभ्यास के दौरान 11 नंबर की जर्सी पहनेंगे।

आरसीबी ने पिछले साल पहली बार आईपीएल ट्रॉफी जीती थी। इस जीत के जश्न के लिए चार जून को एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में समारोह का आयोजन किया गया था। सुरक्षा की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण भगदड़ मच गई जिसमें 11 लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद आरसीबी को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था।

आरसीबी के सीईओ राजेश मेनन ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा, ‘‘मैच वाले दिन खिलाड़ी अभ्यास के दौरान 11 नंबर की जर्सी पहनेंगे। मैच के दौरान वे अपनी जर्सी नंबर में ही नजर आएंगे। अभ्यास के दौरान सभी खिलाड़ियों की पीठ पर जर्सी नंबर 11 लिखा होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा उस दिन वे काले रंग के धूप के चश्मे भी पहनेंगे। हम चिन्नास्वामी स्टेडियम में 11 स्थायी सीटें बनाने पर भी विचार कर रहे हैं। ये उन 11 प्रशंसकों के लिए हैं जो हमेशा हमारे साथ रहेंगे।’’

मौजूदा चैंपियन टीम 28 मार्च को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ यहां अपना पहला मैच खेलेगी, जो इस मैदान पर खेले जाने वाले उनके पांच घरेलू मैचों में से पहला मैच होगा।

आरसीबी इस आईपीएल में अपने शेष दो घरेलू मैच रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेलेगा।

दक्षिण अफ्रीका के एक प्रांत के प्रशासन ने सामुदायिक कार्यों के लिए हिंदू संगठन की सराहना की

जोहानिसबर्ग, 24 मार्च (भाषा) दक्षिण अफ्रीका के गौटेंग प्रांत के प्रमुख के कार्यालय ने देश में सामाजिक सामंजस्य व मानवतावाद को बढ़ावा देने में प्रमुख हिंदू संगठन ‘एसए हिंदूज’ की भूमिका की सराहना की।

जोहानिसबर्ग के लीनासिया में आयोजित संगठन के 10वें वार्षिकोत्सव समारोह के मौके पर उसकी यह सराहना की गई।

गौटेंग के प्रमुख पनयाजा लेसुफी का प्रतिनिधित्व करने वाले एक प्रतिनिधिमंडल ने ‘एसए हिंदूज’ की संस्थापक पंडिता लूसी की भूमिका की भी प्रशंसा की और बताया कि उनकी योजनाएं प्रशासन की योजनाओं से मेल खाती हैं। लेसुफी खुद इस समारोह में शामिल नहीं हो सके।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्य उनाथी एमफेंडु ने कहा, ‘‘हम यह भी देख रहे हैं कि देश में भ्रष्टाचार के मुद्दों का हल कैसे निकाला जा सकता है, और पंडिता लूसी भी इसी तरह काम कर रही हैं। यही कारण है कि हम यहां उन्हें अपना समर्थन देने आए हैं।’’

उन्होंने ‘एसए हिंदूज’ की ओर से जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए उठाए गए कई कदमों का उल्लेख किया, जिनमें खाद्य सामग्री वितरण और सामाजिक एवं कल्याण से जुड़ी सहायता शामिल हैं।

पालम अग्निकांड का मुद्दा उठा रास में : आप सांसद संजय सिंह ने जवाबदेही तय करने की मांग की

नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) राजधानी दिल्ली के पालम इलाके में बीते सप्ताह हुए अग्निकांड का मुद्दा उठाते हुए राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने मंगलवार को कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए सिंह ने कहा कि इस अग्निकांड में एक ही परिवार के नौ सदस्य मारे गए। इससे पता चलता है कि आग कितनी भयावह रही होगी।

उन्होंने कहा कि लेकिन विडंबना यह है कि वहां जब दमकल वाहन पहुंचा तो उसकी हाइड्रोलिक सीढ़ी खुल नहीं रही थी तथा अग्निशमन कर्मियों के पास सेफ्टी जाल भी नहीं था।

उन्होंने कहा ‘‘बगल में ही गद्दे की दुकान थी। गद्दे की दुकान वाला बार बार कहता रहा कि हम यहां गद्दा लगा देते हैं, बच्चे ऊपर से उस पर कूद कर बच जाएंगे। लेकिन वहां पर गद्दे नहीं लगाने दिये गये। और एक ही परिवार के नौ लोग असमय काल के गाल में समा गये। इस प्रशासनिक लापरवाही के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है?’’

उन्होंने कहा ‘‘बात इतनी ही नहीं है। कल दिल्ली सरकार के एक मंत्री ने कहा कि गलती तो उसी परिवार की थी जिसने अपनी दुकान में कॉस्मेटिक्स आदि रखा था जिसमें आग लगने से यह हादसा हुआ।’’

आप सदस्य ने कहा ‘‘यह तो हद हो गई। इतनी क्रूरता आप लाते कहां से हैं?’’

सिंह ने कहा कि जब आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल वहां शोक व्यक्त करने गए तो वहां व्यवधान डाला गया, हंगामा किया गया।

उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की गहन जांच की जानी चाहिए, प्रशासनिक लापरवाही को लेकर जवाबदेही तय की जानी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।