13 साल का इंतजार खत्म: देश के पहले ‘पैसिव यूथेनेसिया’ मामले में हरीश राणा का निधन; अंगदान कर दुनिया को कहा अलविदा
नेशनल डेस्क: गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा, जो पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे, का मंगलवार (24 मार्च 2026) को दिल्ली एम्स (AIIMS) में निधन हो गया। सुप्रीम कोर्ट से ऐतिहासिक मंजूरी मिलने के बाद, हरीश का निधन ‘पैसिव यूथेनेसिया’ (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की प्रक्रिया के तहत शाम 4 बजकर 10 मिनट पर हुआ।
13 साल का दर्दनाक संघर्ष और कानूनी लड़ाई: हरीश राणा 13 साल पहले छत से गिरने के कारण सिर में लगी गंभीर चोट के बाद कोमा में चले गए थे। उनके माता-पिता ने देश के बड़े अस्पतालों में उनका इलाज कराया, लेकिन डॉक्टरों ने उनके ठीक होने की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया था। इलाज का भारी आर्थिक बोझ (करीब 60-70 हजार रुपये महीना) और बेटे की असहनीय स्थिति को देखते हुए परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
भारत का पहला ऐसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने हरीश की स्थिति को देखते हुए उन्हें ‘पैसिव यूथेनेसिया’ की अनुमति दी, जो भारत में अपनी तरह का पहला मामला माना जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत एम्स के पैलिएटिव केयर विभाग में डॉक्टरों की निगरानी में उनका पोषण (Nutrition) धीरे-धीरे बंद किया गया। इस दौरान मेडिकल गाइडलाइंस का पालन करते हुए यह सुनिश्चित किया गया कि उन्हें किसी भी तरह की शारीरिक पीड़ा न हो।
जाते-जाते दे गए नई जिंदगी: निधन के बाद हरीश राणा के दो कॉर्निया और हार्ट वाल्व दान किए गए हैं। एम्स से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अंग एवं टिश्यू दान के क्षेत्र में यह एक बड़ा और प्रेरणादायक कदम है, जिससे हरीश ने जाते-जाते भी दूसरों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है।

