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फाजिल्का मंडी में भारी बारिश से धान बर्बाद, किसानों ने पंजाब सरकार से मांगा मुआवजा

फाजिल्का अनाज मंडी में भारी बारिश और जलभराव से किसानों की धान की फसल को नुकसान। किसानों ने जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पंजाब सरकार से मुआवजे की मांग की।

फाजिल्का / सत्ता संदेश

पंजाब के फाजिल्का में भारी बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अनाज मंडी में जलभराव के कारण किसानों की धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों का आरोप है कि मंडी में पानी की निकासी के उचित इंतजाम नहीं होने के कारण धान के ढेर पानी में बह गए और कई बोरियों तक पानी पहुंच गया। इससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान होने की आशंका है।

किसानों ने बताया कि उन्हें इस बार धान का अच्छा भाव मिलने की उम्मीद थी। उन्हें भरोसा था कि फसल बेचकर वे अपने पुराने कर्ज चुका सकेंगे और परिवार की आर्थिक स्थिति को कुछ बेहतर बना पाएंगे। लेकिन सुबह हुई भारी बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

किसानों के मुताबिक, कई दिन पहले धान को मंडी में लाकर खुले स्थान पर ढेर लगाकर रखा गया था। बारिश से बचाने के लिए उन्होंने रात को धान के ढेरों को तिरपाल से चारों तरफ से ढक दिया था। इसके बावजूद सुबह जब वे मंडी पहुंचे तो वहां जलभराव के कारण धान के ढेर पानी में बह चुके थे। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत से तैयार की गई फसल को भारी नुकसान हुआ है।

प्रशासन पर उठाए सवाल, निकासी व्यवस्था न होने का आरोप

किसानों ने मंडी में पानी की निकासी के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने पर प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यदि समय रहते पानी की निकासी की व्यवस्था की गई होती, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। किसानों ने पंजाब सरकार से नुकसान का आकलन करवाकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि पहले वे अपनी फसल को आढ़तियों के निजी खेतों में रख देते थे, जिससे बारिश के दौरान मंडी में होने वाले नुकसान से बचाव हो जाता था। लेकिन इस बार प्रशासन की ओर से आढ़तियों को अपने निजी खेतों में धान रखने की अनुमति नहीं दिए जाने के कारण किसानों को मंडी में ही फसल रखनी पड़ी। किसानों का दावा है कि इसी वजह से उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा है।

अब किसानों ने पंजाब सरकार और संबंधित प्रशासन से मांग की है कि मंडी में जलनिकासी की उचित व्यवस्था की जाए, खराब हुई फसल का सर्वे करवाया जाए और प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक संकट से राहत मिल सके।

लुधियाना : धान की सरकारी खरीद शुरू, पंग्रेन चेयरमैन डॉ. तेजपाल सिंह गिल ने किया उद्घाटन

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब में धान की सरकारी खरीद का सीजन शुरू हो गया है। लुधियाना की सुधर मंडी में पंग्रेन के अध्यक्ष डॉ. तेजपाल सिंह गिल ने धान की सरकारी खरीद का उद्घाटन किया। इस मौके पर पंग्रेन निरीक्षक राजेश कुमार भी मौजूद रहे।

डॉ. गिल ने कहा कि पंजाब सरकार धान खरीद के दौरान किसानों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं आने देगी। जिले की सभी मंडियों में खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए हैं, ताकि किसान अपनी फसल जल्द बेचकर घर लौट सकें और उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान मिल सके।

धान खरीद के पहले दिन डॉ. गिल ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों के साथ खड़ी है और उनकी उपज का एक-एक दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे फसल पूरी तरह पकने के बाद ही कटाई करें, ताकि धान में नमी की मात्रा निर्धारित 17 प्रतिशत की सीमा के भीतर रहे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशों के अनुसार जिला और स्थानीय प्रशासन खरीद प्रक्रिया को किसान हितैषी और सुचारू बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। मंडियों में किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए संबंधित विभागों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

डॉ. गिल के अनुसार, लुधियाना जिले में इस वर्ष करीब 2.57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की गई है और लगभग 17.25 लाख मीट्रिक टन धान मंडियों में पहुंचने की उम्मीद है। पिछले खरीद सीजन में जिले में करीब 13.11 लाख मीट्रिक टन धान की सरकारी खरीद हुई थी।

उन्होंने बताया कि सरकारी निर्देशों के अनुसार किसानों को उनकी फसल का भुगतान 24 से 36 घंटे के भीतर उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मंडियों में केवल सूखा धान लेकर आएं, जिससे खरीद प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

पंग्रेन अध्यक्ष ने किसानों से पराली न जलाने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों का जिम्मेदारी से प्रबंधन किया जाना चाहिए और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली पराली जलाने की प्रथा से बचना चाहिए।

उन्होंने बताया कि जिले की मंडियों में साफ-सफाई, पर्याप्त रोशनी, स्वच्छ पेयजल, नमी मापने वाले मीटर, तिरपाल सहित खरीद प्रक्रिया से संबंधित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

समराला अनाज मंडी में धान खरीद की औपचारिक शुरुआत, पहली बोली ₹2467 प्रति क्विंटल

समराला / सत्ता संदेश

समराला की अनाज मंडी में धान की फसल की खरीद की औपचारिक शुरुआत हलके के विधायक जगतार सिंह दयालपुरा ने की। इस दौरान मंडी में पहुंचने वाले पहले किसान प्रिंस दीप सिंह की धान की फसल की पहली बोली ₹2467 प्रति क्विंटल तय हुई। अच्छा रेट मिलने पर किसान ने खुशी जाहिर की।

धान खरीद की शुरुआत करते हुए विधायक जगतार सिंह दयालपुरा ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों की फसल का एक-एक दाना खरीदने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अनाज मंडियों में किसानों को बारदाने, पीने के पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

इस मौके पर आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष आलमदीप सिंह ने कहा कि आढ़ती हमेशा किसानों की सेवा के लिए तैयार रहते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मंडी में फसल की कटाई और नीलामी का काम समय पर पूरा किया जाएगा।

आलमदीप सिंह ने प्रशासन से अपील की कि मंडी में पहुंचने वाली कटी हुई धान की फसल की लिफ्टिंग भी साथ-साथ करवाई जाए, ताकि मंडी में अनाज का ढेर न लगे और किसानों को अपनी फसल उतारने में परेशानी का सामना न करना पड़े।

धान खरीद की शुरुआत के मौके पर बड़ी संख्या में किसान, आढ़ती और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

लुधियाना : पराली जलाने के खिलाफ अभियान तेज, डीसी ने 3 अवेयरनेस वैन को दिखाई हरी झंडी

लुधियाना में धान की पराली जलाने के खिलाफ जागरूकता अभियान शुरू किया गया। डीसी हिमांशु जैन ने 3 अवेयरनेस वैन रवाना कीं, जो गांव-गांव जाकर किसानों को पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक करेंगी।

लुधियाना / सत्ता संदेश

धान की पराली जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए लुधियाना प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने मंगलवार को डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेटिव कॉम्प्लेक्स से तीन अवेयरनेस वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

ये वैन कृषि विभाग, लुधियाना की ओर से चलाए जा रहे ‘स्टबल मैनेजमेंट कैंपेन’ के तहत चलाई जा रही हैं। धान की कटाई के सीजन के दौरान ये वैन जिले के सभी ब्लॉकों में जाकर गांव-गांव किसानों को पराली न जलाने और इसे बिना आग लगाए मैनेज करने के लिए जागरूक करेंगी।

डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में जिले में पराली प्रबंधन से जुड़ी 5,000 से अधिक कृषि मशीनें सब्सिडी पर उपलब्ध कराई गई हैं। इस साल भी किसान अब तक करीब 1,300 और मशीनें खरीद चुके हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले साल जिले में पराली जलाने की कुल 219 घटनाएं दर्ज की गई थीं। प्रशासन के मुताबिक, पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाने में सहयोग करने वाले किसानों को कृषि विभाग की ओर से कैंप लगाकर सम्मानित भी किया जा रहा है।

हिमांशु जैन ने कहा कि इस वर्ष भी किसानों के सहयोग और कृषि, सहकारिता, ग्रामीण विकास तथा शिक्षा विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों के जरिए पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने जिले के किसानों से अपील की कि वे पराली को बिना जलाए मैनेज करने के लिए किसान समूहों, सहकारी समितियों और पंचायतों का सहयोग लें। उन्होंने कहा कि पराली का उचित प्रबंधन करके पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने में मदद मिल सकती है।

इस मौके पर मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. गुरदीप सिंह ने बताया कि अवेयरनेस वैन किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और इसके उचित प्रबंधन के फायदों के बारे में जानकारी देंगी। वैन में ऑडियो सिस्टम भी लगाया गया है, जिसके माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएंगे।

डॉ. गुरदीप सिंह ने बताया कि अवेयरनेस वैन के अलावा गांवों में किसान प्रशिक्षण कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। स्कूलों में कार्यक्रमों, अखबारों, WhatsApp संदेशों और दीवारों पर लिखे स्लोगन के जरिए भी किसानों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

इस अवसर पर खेतीबाड़ी विभाग के इंजीनियर अमनप्रीत सिंह घई, खेतीबाड़ी अधिकारी ब्लॉक लुधियाना डॉ. हरिंदर सिंह और एडीओ डॉ. करमजीत सिंह ने भी किसानों से विभाग की मुहिम में सहयोग करने की अपील की।

धान खरीद को लेकर SKM का ऐलान, 19 सितंबर को पूरे पंजाब में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन

पंजाब / सत्ता संदेश

धान खरीद और MSP को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। SKM ने कहा कि किसानों के सामने अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किसान नेताओं ने कहा कि दूसरे राज्यों में किसानों को धान का MSP नहीं मिल रहा है और वहां भी किसानों के साथ लूट हो रही है। वहीं पंजाब के किसान भी धान की खरीद और MSP को लेकर परेशान हैं। किसान नेताओं ने मांग की कि धान की खरीद MSP पर सुनिश्चित की जाए।

SKM ने कहा कि किसानों के खिलाफ रेलवे द्वारा दर्ज किए गए मामलों का मुद्दा भी सरकार के सामने उठाया गया है। किसान नेताओं के मुताबिक, इस संबंध में उन्होंने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से भी बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान किसानों को आश्वासन दिया गया था कि जो कुछ भी लंबित है, उसे पूरा करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। SKM ने सरकार से इस आश्वासन को लागू करने की मांग की है।

किसान नेताओं ने ऐलान किया कि 19 सितंबर को पूरे पंजाब में जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। SKM ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान किसानों की मांगों और उनके मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

SKM नेताओं ने यह भी कहा कि वे उन लोगों को बेनकाब करेंगे, जिन्हें वे “पुलिस स्टेट” बनाने की कोशिश करने वाला मानते हैं। किसान नेताओं ने सरकार से किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों और उनकी अन्य समस्याओं का समाधान करने की मांग की।

इसके अलावा 27 सितंबर को चंडीगढ़ में बैठक आयोजित करने का भी ऐलान किया गया है। बैठक में आगे की रणनीति और किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

SKM ने कहा कि किसानों की मांगों को लेकर आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और सरकार पर उनकी मांगों को पूरा करने के लिए दबाव बनाया जाएगा।

टांडा के रसूलपुर में अकाली दल की बैठक, अरविंदर सिंह रसूलपुर बोले- ‘AAP सरकार से हर वर्ग दुखी’

होशियारपुर / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : जसप्रीत सिंह सैनी

होशियारपुर में शिरोमणि अकाली दल की ओर से टांडा के गांव रसूलपुर में एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में हलके के अलग-अलग गांवों से बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला और कई लोग अपने साथ अन्य गांवों के लोगों को भी बैठक में लेकर पहुंचे।

बैठक को संबोधित करते हुए अरविंदर सिंह रसूलपुर ने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में मौजूदा सरकार के कार्यकाल से किसान, व्यापारी, कर्मचारी और नौजवान समेत विभिन्न वर्गों के लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किए गए दावों और गारंटियों को लेकर भी लोगों में निराशा बढ़ रही है।

अरविंदर सिंह रसूलपुर ने पंजाब की कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने नौजवानों से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में युवाओं के साथ कथित तौर पर बदसलूकी के मामले सामने आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण पंजाब के लोगों को पिछली सरकारों का समय याद आने लगा है। अरविंदर सिंह रसूलपुर ने शिरोमणि अकाली दल को पंजाब की क्षेत्रीय पार्टी बताते हुए कहा कि पार्टी की नीतियां और मुद्दे पंजाब तथा पंजाबियों के हितों से जुड़े हुए हैं।

बैठक के दौरान पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं से अकाली दल की नीतियों और विचारधारा को घर-घर तक पहुंचाने तथा आम लोगों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने की अपील की। इस मौके पर बड़ी संख्या में अकाली दल के कार्यकर्ता और क्षेत्र के लोग मौजूद रहे।

टांडा में ब्यास नदी का बढ़ता खतरा, किसानों ने प्रशासन से बांध मजबूत करने की लगाई गुहार

टांडा/उड़मुड़ / सत्ता संदेश

होशियारपुर के टांडा उड़मुड़ क्षेत्र के रड़ा गांव स्थित ब्यास दरिया के मंड इलाके में संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए किसानों ने प्रशासन से तुरंत सुरक्षा प्रबंध करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि पिछले वर्षों में आई बाढ़ के दौरान दरिया किनारे बने तटबंध (गेट बांध) क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिससे सैकड़ों एकड़ फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो गई थी।

लगातार हो रही बारिश और ब्यास नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी किनारे क्षतिग्रस्त तटबंधों की तुरंत मरम्मत और मजबूती का कार्य कराया जाए, ताकि इस बार बाढ़ की स्थिति में किसानों की फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।

किसानों ने कहा कि पिछले नुकसान की भरपाई अभी तक पूरी तरह नहीं हो पाई है और एक बार फिर बाढ़ की आशंका ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से अपील की कि ब्यास नदी के किनारे सुरक्षा प्रबंधों को प्राथमिकता के आधार पर मजबूत किया जाए।

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते तटबंधों की मरम्मत नहीं कराई गई तो आगामी दिनों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति से क्षेत्र में बड़ा नुकसान हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।

ग्रामीण टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए फार्म स्टे पॉलिसी 2026 पर अवेयरनेस वर्कशॉप का आयोजन
  • लुधियाना में फार्म स्टे पॉलिसी-2026 पर अवेयरनेस वर्कशॉप हुई, बड़ी संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया
  • फार्म स्टे पॉलिसी 2026, ग्रामीण पंजाब की विरासत को ग्लोबल लेवल पर एक प्लेटफॉर्म देगी: डॉ. दमप्रीत वालिया
  • पंजाब सरकार का ग्रामीण टूरिज्म पर जोर, किसानों को फार्म स्टे अपनाने के लिए मोटिवेट किया
  • फार्म स्टे पॉलिसी-2026 किसानों को एक्स्ट्रा इनकम के मौके देगी

लुधियाना / सत्ता संदेश

ग्रामीण टूरिज्म को बढ़ावा देने और किसानों के लिए रोजी-रोटी के एक्स्ट्रा मौके बनाने के लिए, पंजाब सरकार के टूरिज्म और कल्चरल अफेयर्स डिपार्टमेंट ने मंगलवार को बचत भवन लुधियाना में फार्म स्टे पॉलिसी 2026 पर एक अवेयरनेस वर्कशॉप रखी। इस वर्कशॉप में अलग-अलग सरकारी डिपार्टमेंट के ऑफिसर और जिले भर से 80 किसानों ने हिस्सा लिया।

जॉइंट डायरेक्टर, टूरिज्म और कल्चरल अफेयर्स डिपार्टमेंट, पंजाब डॉ. दमप्रीत वालिया, चीफ एग्रीकल्चर ऑफिसर लुधियाना डॉ. गुरदीप सिंह, मैनेजर प्रोजेक्ट श्रीमती शीतल बहल, टूरिज्म ऑफिसर गुरजोत सिंह और डिपार्टमेंट ऑफ टूरिज्म एंड कल्चरल अफेयर्स, पंजाब सरकार के नॉलेज पार्टनर्स के साथ-साथ अलग-अलग सरकारी डिपार्टमेंट के ऑफिसर और दूसरे स्टेकहोल्डर्स ने हिस्सा लिया।

पार्टिसिपेंट्स को एड्रेस करते हुए, डिपार्टमेंट ऑफ़ टूरिज्म एंड कल्चरल अफेयर्स, पंजाब के जॉइंट डायरेक्टर डॉ. दमप्रीत वालिया ने फार्म स्टे पॉलिसी 2026 के विज़न और मकसद पर रोशनी डाली और किसानों को बढ़ते टूरिज्म सेक्टर से फायदा उठाने के लिए पॉलिसी के तहत रजिस्टर करने के लिए बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद भारत और विदेश के टूरिस्ट्स को पंजाब की रिच कल्चर, हेरिटेज, ट्रेडिशन और एग्रीकल्चरल लाइफस्टाइल दिखाते हुए गांव के इनकम सोर्स में डाइवर्सिटी लाना है।

वर्कशॉप के दौरान, पार्टिसिपेंट्स को पॉलिसी के प्रोविज़न, एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया, रजिस्ट्रेशन प्रोसेस और पॉलिसी के तहत मिलने वाली मदद के तरीकों के बारे में बताया गया। सस्टेनेबल रूरल टूरिज्म, कैपेसिटी बिल्डिंग, लोकल क्राफ्ट्स को बढ़ावा देने, फार्म-बेस्ड एक्सपीरियंस और कम्युनिटी पार्टिसिपेशन पर खास ज़ोर दिया गया। प्रेजेंटेशन और इंटरैक्टिव सेशन को EY टीम के रिप्रेजेंटेटिव्स के साथ-साथ सरकारी अधिकारियों ने आसान बनाया, जिन्होंने पार्टिसिपेंट्स को पॉलिसी के खास प्रोविज़न्स के बारे में गाइड किया और रजिस्ट्रेशन और इम्प्लीमेंटेशन से जुड़े सवालों के जवाब दिए।

अपने राज्य भर में अवेयरनेस कैंपेन के हिस्से के तौर पर, डिपार्टमेंट पूरे पंजाब में अवेयरनेस वर्कशॉप की एक सीरीज़ ऑर्गनाइज़ कर रहा है ताकि ज़्यादा से ज़्यादा पार्टिसिपेशन को बढ़ावा दिया जा सके और पूरे राज्य में फार्म स्टे के डेवलपमेंट को आसान बनाया जा सके।

इंटरैक्टिव सेशन ने किसानों को पॉलिसी को लागू करने के बारे में जानकारी लेने और अधिकारियों से सीधे बात करने के लिए एक प्लेटफ़ॉर्म दिया। हिस्सा लेने वालों ने इस पहल की तारीफ़ की और राज्य में टूरिज़्म को बढ़ावा देने के लिए पंजाब सरकार के साथ काम करने के लिए अपना उत्साह दिखाया, साथ ही फ़ार्म स्टे और ग्रामीण टूरिज़्म की कोशिशों के ज़रिए रोज़ी-रोटी के स्थायी मौके बनाने के लिए भी कहा।

वर्कशॉप हिस्सा लेने वालों से मिले अच्छे जवाब के साथ खत्म हुई, जो किसानों में टूरिज़्म को इनकम के एक और ज़रिया बनाने और पंजाब के असली ग्रामीण अनुभवों को बढ़ावा देने में बढ़ती दिलचस्पी को दिखाता है।

दोआबा में पंजाब किसान कमेटी ने गन्ने की राशि और बिजली कटौती को लेकर की मीटिंग

टांडा उमरार / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : जसप्रीत सिंह सैनी

दोआबा किसान कमेटी पंजाब ने गन्ने की बकाया राशि वसूलने और बिजली कटौती को लेकर मीटिंग की। दोआबा किसान कमेटी पंजाब की मीटिंग बाबा बूटा भगत हॉल टांडा में अध्यक्ष जंगवीर सिंह चौहान और महासचिव प्रितपाल सिंह गोराया के नेतृत्व में हुई, जिसमें उन्होंने कहा कि गन्ने की बकाया राशि 68.50 रुपये जो सरकार ने देनी है, वह अभी तक नहीं दी गई है।

पंजाब सरकार पिछले दो महीने से अपने अधिकारियों को गन्ना विभाग की कसमें खिलवा रही है। इससे पहले 18 मई को दोआबा किसान कमेटी पंजाब ने जालंधर प्रोजेक्टिंग ऑफिसर के दफ्तर के सामने धरना दिया था और उस दिन गन्ना विभाग के सभी अधिकारियों ने माना था कि पंजाब सरकार ने 68.50 रुपये भेजे हैं। खातों में 142 करोड़ जमा होने थे, लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी किसी भी ज़मीन मालिक के खाते में एक भी रुपया नहीं आया है। किसानों को अपना ही पैसा पाने के लिए शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है। उन्हें धरने देने पड़ रहे हैं। एक तरफ सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है और लोगों को कसमें खिला रही है, और दूसरी तरफ गन्ने का बकाया पैसा किसानों के खातों में नहीं डाल रही है। तीन-चार महीने में फिर से सीजन शुरू होने वाला है और ज़मीन मालिकों का पिछला बकाया करीब डेढ़ सौ करोड़ है।

दूसरी तरफ किसान धान लगा रहे हैं। बिना बताए बिजली कटौती हो रही है। ज़मीन मालिकों के धान के खेत सूख गए हैं, गन्ने की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, धान की फसल खराब हो गई है, जो धान लगना था, वह लेट हो गया है। सरकार अपने वादों से मुकर गई है। सरकार कहती थी कि मोटरों को लगातार आठ घंटे बिजली सप्लाई दी जाएगी, जबकि मोटरों को तीन-चार घंटे भी सप्लाई नहीं दी जा रही है।

दोआबा किसान कमेटी पंजाब ने आज अपनी मीटिंग में फैसला किया है कि अगर सरकार कल, 30 जून तक मकान मालिकों के अकाउंट में पैसे जमा नहीं करती है और बिजली सप्लाई ठीक नहीं करती है, तो 1 जुलाई को टांडा उड़मुड़ में बिजली घर चौक पर नेशनल हाईवे जम्मू-पठानकोट को ब्लॉक कर दिया जाएगा, जिसकी सीधी जिम्मेदारी पंजाब सरकार के केन डिपार्टमेंट और पावर डिपार्टमेंट की होगी। जंगवीर सिंह चौहान, स्टेट प्रेसिडेंट दोआबा किसान कमेटी पंजाब, स्टेट जनरल सेक्रेटरी पृथपाल सिंह गोराया, सेक्रेटरी सतपाल सिंह मिर्जापुर वगैरह मौजूद थे।

नहरी पानी का उपयोग 78 प्रतिशत से अधिक होना पंजाब की कृषि के लिए एक अच्छा प्रयास है : परमवीर सिंह एडवोकेट

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के सक्षम नेतृत्व में राज्य में कृषि को फिर से लाभदायक व्यवसाय बनाने के लिए गंभीर कदम उठाए जा रहे हैं। पंजाब मीडियम इंडस्ट्री बोर्ड के वाइस चेयरमैन परमवीर सिंह एडवोकेट ने विचार साझा करते हुए बताया कि पंजाब में सिंचाई के लिए नहरी पानी से जुड़े जो कार्य चल रहे हैं, उनकी देखरेख मुख्यमंत्री स्वयं कर रहे हैं।

2022 में जब मान सरकार ने कार्यभार संभाला था, उस समय पिछली सरकारों के कार्यकाल में केवल 22 प्रतिशत नहरी पानी का ही उपयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा था। मान सरकार पिछले चार वर्षों से खेतों की सिंचाई सीधे नहरी पानी से सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

इसके तहत टेल तक पानी पहुंचाने के लिए नहरों और कच्ची नालियों (कस्सियों) की मरम्मत की गई है। सैकड़ों किलोमीटर नई कच्ची नालियां और पाइपलाइनें बिछाई गई हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप पंजाब अब 78 प्रतिशत से अधिक नहरी पानी का उपयोग कर रहा है। सरकार का लक्ष्य आने वाले कुछ महीनों में इस आंकड़े को 90 प्रतिशत से अधिक तक पहुंचाना है।

इस पहल से पंजाब की भूमि को कई लाभ हुए हैं। राज्य के भूजल स्तर में सुधार हुआ है और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पंजाब का भूजल स्तर लगभग 2 मीटर ऊपर आया है। पिछले 20 वर्षों में यह पहली बार दर्ज किया गया सुधार है।

इसके अलावा, बड़े पैमाने पर मोटरें कम चलने के कारण बिजली की भारी बचत हुई है, जिसे अन्य कार्यों में उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार नहरी पानी के उपयोग से फसल की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है, जिससे किसानों को अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच और प्रयासों के कारण पंजाब तेजी से प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। नहरी पानी की आपूर्ति व्यवस्था को सुधारकर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब को कई स्तरों पर लाभ पहुंचाया है।