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Karnataka : सतीश जारकीहोली के ठिकानों पर ED की छापेमारी, परिवार के ठिकाने भी खंगाले

कर्नाटक के लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली से जुड़े ठिकानों पर ED की तलाशी दूसरे दिन भी जारी रही। गोकाक और बेलगावी में परिवार व करीबियों के ठिकानों पर जांच हुई।

कर्नाटक/ सत्ता संदेश

कर्नाटक के लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तलाशी गुरुवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रही। बेलगावी में मंत्री के परिवार के सदस्यों और उनके करीबी लोगों से जुड़े कई ठिकानों पर जांच एजेंसी ने कार्रवाई की। यह जांच कथित अवैध विदेशी निवेश से जुड़े मामले में की जा रही है।

ईडी अधिकारियों ने गोकाक स्थित सतीश जारकीहोली के आवास पर भी तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान उनकी पत्नी और बेटी के अलावा सांसद प्रियंका जारकीहोली भी घर पर मौजूद थीं। इसके साथ ही बेलगावी में मंत्री के परिवार के सदस्य वाई. मंजूनाथ के आवास पर भी जांच एजेंसी ने तलाशी ली।

जांच का दायरा मंत्री के करीबी सहयोगियों और स्टाफ तक भी पहुंचा। ईडी ने सतीश जारकीहोली के करीबी सहयोगी बताए जा रहे गिरीश सोनावलकर के घर की तलाशी ली। इसके अलावा मंत्री के निजी सचिव मालागौड़ा पाटिल के आवास पर भी जांच की गई।

तलाशी के दौरान ईडी अधिकारियों ने सतीश जारकीहोली से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को भी समन किया। अधिकारियों ने चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रदीप कुमार इंदी और सैदप्पा गडागी से वित्तीय लेनदेन और अकाउंटिंग से संबंधित जानकारी मांगी। कार्रवाई के दौरान एक प्रिंटर और कुछ दस्तावेज जब्त किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

ईडी की कार्रवाई के बीच कांग्रेस ने केंद्र की भाजपा सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से केंद्रीय जांच एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। धारवाड़ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सदानंद डंगनावर ने कहा कि ईडी की कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कांग्रेस के मंत्रियों और मुख्यमंत्री के कामकाज की सफलता को स्वीकार नहीं कर पा रही है।

डंगनावर ने दावा किया कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के बावजूद कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को अस्थिर नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री एकजुट होकर राज्य के हित में काम कर रहे हैं।

इससे पहले कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और मंत्री प्रियंक खरगे भी ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठा चुके हैं। दोनों नेताओं ने कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए केंद्र सरकार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया था।

फिलहाल ईडी की तलाशी और जांच जारी है। कथित अवैध विदेशी निवेश से जुड़े मामले में जांच एजेंसी किन दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है, इसका पूरा विवरण जांच आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगा।

धनबाद में ED की कार्रवाई :कोयला माफिया 160 करोड़ का निवेश फ्रीज, 31 ठिकानों पर छापामारी

झारखंड / सत्ता संदेश

झारखंड के धनबाद में अवैध कोयला खनन, अवैध परिवजन, कोयला उठाने पर जबरन वसूली, लेवी से जुड़े मामलों में मनी लांड्रिंग के तहत जांच कर रही ईडी की रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की 31 ठिकानों पर चल रही छापेमारी पूरी हो चुकी है। ईडी ने बुधवार को इससे संबंधित अधिकृत बयान जारी किया है।

यह छापेमारी अनिल गोयल, एलबी सिंह, हरेंद्र चौहान, गणेश यादव, पप्पू मंडल, रोहित यादव, माधे सिंह व इनसे जुड़ी कंपनियों, सहयोगियों, रिश्तेदारों आदि से जुड़े सभी 31 ठिकानों पर चली है। इस छापेमारी में ईडी ने कोयला माफिया एलबी सिंह के माध्यम से म्यूचुअल फंड में किए गए लगभग 160 करोड़ रुपये के निवेश को फ्रीज कर दिया है।

छापामारी के दौरान क्या मिला?

छापामारी के दौरान ईडी को ठिकानों से 1.02 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद हुए हैं। निवेश से जुड़े कई अहम सबूत मिले हैं, जिनमें 200 से ज्यादा अचल संपत्तियाें से जुड़ी जानकारी, डेटा, डिजिटल डिवाइस, सेल डीड आदि शामिल हैं।

ईडी को शक है कि उक्त 200 अचल संपत्तियां अपराध की कमाई से खरीदी गई थी। इसकी कीमत 500 करोड़ रुपये हो सकती है। इसके अलावा आरोपितों के नियंत्रण की संस्थाओं के अकाउंट्स की किताबें आदि भी जब्त की गईं हैं।

ईडी ने सभी 31 ठिकानों पर पीएमएल अधिनियम के तहत मंगलवार की सुबह से छापेमारी शुरू की थी। बुधवार को अंतिम रूप से छापेमारी व जब्ती की कार्रवाई पूरी की जा चुकी है।

झारखंड पुलिस में दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर ईडी ने की थी ECIR

झारखंड पुलिस में दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर ईडी ने इंफोर्समेंट केस इंफार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआइआर) दर्ज की थी। दर्ज प्राथमिकियों में आरोपितों के विरुद्ध धनबाद व आसपास के इलाकों में अवैध कोयला खनन, अवैध रूप से खनन किए गए या चोरी के कोयले की तस्करी, कोयला उठाने पर जबरन वसूली, लेवी और इससे जुड़ी अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था।

पुलिस ने कई मामलों में चार्जशीट भी दाखिल की थी। पीएमएल अधिनियम के तहत जांच में ईडी को पता चला कि उपरोक्त लोगों ने इस तरह के अपराध से बड़ी मात्रा में ‘अपराध से कमाई गई रकम’ जमा की थी।

इस प्रक्रिया में आरोपितों ने अवैध तरीके से अर्जित की गई राशि को इधर-उधर घुमाने (लेयरिंग) और इसे वैध दिखाने के लिए कई संस्थाओं, लोगों का इस्तेमाल किया। बाद में अपराध से कमाई गई इस राशि का इस्तेमाल चल और अचल संपत्ति खरीदने में किया था।

साल 2025 में भी की गई थी छापेमारी

ईडी ने जारी अधिकृत बयान में बताया कि गत वर्ष 21 नवंबर 2025 को भी ईडी ने इस मामले में अनिल गोयल, एलबी सिंह व उनसे जुड़े लोगों व संस्थाओं के ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह छापामारी धनबाद व दुमका के करीब 20 ठिकानों पर एक साथ हुई थी।

इस छापामारी में ईडी को डेढ़ सौ से अधिक जमीन के दस्तावेज और दो करोड़ 20 लाख रुपये नगदी मिले थे। ईडी को छानबीन में अवैध तरीके से कोयला खनन, परिवहन और भंडारण से संबंधित साक्ष्य मिले थे। छानबीन में मिले तथ्यों के आधार पर ईडी ने एक बार फिर छापेमारी की है। ईडी की छानबीन व अनुसंधान अभी जारी है।