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विद्युत क्षेत्र में 5G तकनीक का इस्तेमाल, NPTI फरीदाबाद में कार्यशाला

फरीदाबाद / सत्ता संदेश

विद्युत क्षेत्र में संचार व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, तेज, विश्वसनीय और दक्ष बनाने की दिशा में 5G प्रौद्योगिकी की संभावनाओं पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान (NPTI), फरीदाबाद में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। दूरसंचार विभाग (DoT) और NPTI के संयुक्त सहयोग से आयोजित कार्यशाला का विषय “विद्युत क्षेत्र में विश्वसनीयता एवं दक्षता बढ़ाने में 5G प्रौद्योगिकी का उपयोग” रहा।

कार्यशाला का संयुक्त रूप से उद्घाटन दूरसंचार विभाग के महानिदेशक अनिल कुमार गुप्ता तथा राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान के महानिदेशक श्री हेमंत जैन ने किया। कार्यक्रम में केंद्रीय एवं राज्य विद्युत उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दूरसंचार क्षेत्र, उद्योग, शिक्षाविदों, स्टार्ट-अप्स और अन्य संबंधित हितधारकों ने भाग लिया।

अपने संबोधन में महानिदेशक दूरसंचार श्री अनिल कुमार गुप्ता ने आधुनिक विद्युत प्रणालियों के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और रियल-टाइम संचार व्यवस्था के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्युत उपक्रमों, दूरसंचार क्षेत्र, उद्योग, स्टार्ट-अप्स और शिक्षाविदों से NPTI स्थित 5G यूज़ केस लैब का उपयोग करते हुए विद्युत क्षेत्र के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

NPTI के महानिदेशक श्री हेमंत जैन ने विद्युत क्षेत्र में क्षमता निर्माण, अनुसंधान और उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई। वहीं, अपर महानिदेशक दूरसंचार, हरियाणा LSA श्री आर. शाक्य ने दूरसंचार और विद्युत क्षेत्रों के बीच निरंतर समन्वय को जरूरी बताते हुए उच्च प्रभाव वाले 5G उपयोग मामलों की पहचान और उनके प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर दिया।

कार्यशाला के दौरान तकनीकी विषयों पर अलग-अलग केंद्रित सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में विद्युत उत्पादन और नेटवर्किंग में 5G के उपयोग पर चर्चा हुई। इसमें विद्युत उपक्रमों के लिए प्राइवेट 5G नेटवर्क, उत्पादन-पारेषण-वितरण प्रणालियों के साथ 5G का एकीकरण, SCADA/PLC प्रणालियां, LAN/WAN और नेटवर्क ऑपरेशन सेंटर की आवश्यकताओं के साथ स्मार्ट-ग्रिड संचार वास्तुकला जैसे विषय शामिल रहे।

दूसरे सत्र में विद्युत क्षेत्र के लिए नियामकीय ढांचे और स्पेक्ट्रम उपयोग के उदारीकरण पर चर्चा की गई। इसमें प्राइवेट 5G स्पेक्ट्रम आवंटन, कैप्टिव एवं नॉन-कैप्टिव नेटवर्क, कैप्टिव नॉन-पब्लिक नेटवर्क (CNPN), लाइसेंसिंग एवं अनुपालन आवश्यकताओं तथा विद्युत उपक्रमों के लिए स्पेक्ट्रम नियोजन से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

तीसरे सत्र में विद्युत क्षेत्र में उभरती तकनीकों के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों ने AI/ML आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, अधिक नवीकरणीय ऊर्जा की स्थिति में रियल-टाइम ग्रिड बैलेंसिंग, AI आधारित लोड फोरकास्टिंग और परिसंपत्ति प्रबंधन, IoT एवं एज-कंप्यूटिंग, एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (AMI), एकीकृत संचार तकनीकों तथा विद्युत क्षेत्र में ड्रोन के इस्तेमाल पर चर्चा की।

कार्यशाला के चौथे सत्र में विद्युत क्षेत्र से जुड़ी साइबर सुरक्षा चुनौतियों पर विचार किया गया। इसमें IoT उपकरणों और नेटवर्क की सुरक्षा, SCADA एवं IoT नेटवर्क की सुरक्षा, साइबर खतरों का परिदृश्य, साइबर घटना के प्रति प्रतिक्रिया और सुरक्षा के बेहतर उपायों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने NPTI स्थित 5G यूज़ केस लैब का दौरा किया। यह प्रयोगशाला दूरसंचार विभाग की “100 5G Use Case Labs” पहल के अंतर्गत स्थापित की गई है। इसे विद्युत क्षेत्र के लिए 5G आधारित समाधानों के विकास, परीक्षण एवं सत्यापन, क्षमता निर्माण तथा क्षेत्र-विशिष्ट अनुप्रयोगों के विकास के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में रेखांकित किया गया।

कार्यशाला के दौरान साझेदारियों को बढ़ावा देने, प्राथमिकता वाले पायलट प्रोजेक्ट्स की पहचान करने और 5G सहित उभरती तकनीकों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से अधिक विश्वसनीय, सुरक्षित, दक्ष और भविष्य के लिए तैयार विद्युत क्षेत्र के निर्माण की साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

भारत-नेपाल के बीच काठमांडू में होगी बैठक, ऊर्जा सहयोग पर करेंगे चर्चा

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारत और नेपाल के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से इस हफ्ते काठमांडू में संयुक्त कार्य समूह और संयुक्त संचालन समिति की बैठकें आयोजित की जाएंगी. एक अधिकारी ने रविवार को जानकारी दी कि ये बैठकें 14 और 15 जुलाई को होंगी. नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय के संयुक्त प्रवक्ता संदीप कुमार देव ने बताया कि सचिव स्तर की इन बैठकों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत के ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल करेंगे, जबकि नेपाली प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय की सचिव सरिता दवाड़ी करेंगी.

उन्होंने बताया कि संयुक्त कार्य समूह की बैठक में नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय के संयुक्त सचिव और भारत के ऊर्जा मंत्रालय के उनके समकक्ष अधिकारी शामिल होंगे. वहीं, संयुक्त संचालन समिति की बैठक में दोनों देशों के संबंधित विभागों के सचिव हिस्सा लेंगे.

काठमांडू में उर्जा सहयोग के मुद्दे पर बैठकें

दरअसल एक अधिकारी ने बताया कि भारत और नेपाल इस हफ्ते काठमांडू में उर्जा सहयोग के मुद्दे पर ‘जॉइंट वर्किंग ग्रुप’ और ‘जॉइंट स्टीयरिंग कमेटी’ की बैठकें करने वाले हैं. ये बैठकें 14 और 15 जुलाई को होंगी. नेपाल के मंत्रालय के संयुक्त प्रवक्ता संदीप कुमार देव के अनुसार, पावर सेक्रेटरी स्तर की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत के पावर सेक्रेटरी पंकज अग्रवाल करेंगे, जबकि नेपाली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ऊर्जा और जल संसाधन मंत्रालय की सेक्रेटरी सरिता दवाडी करेंगी.

दोनों देशों के उर्जा विभागों के सचिव होंगे शामिल

‘जॉइंट वर्किंग ग्रुप’ की बैठक में नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय के संयुक्त सचिव और भारतीय ऊर्जा मंत्रालय के उनके समकक्ष अधिकारी शामिल होंगे, जबकि ‘जॉइंट स्टीयरिंग कमेटी’ की बैठक में दोनों देशों के संबंधित विभागों के सचिव शामिल होंगे. अधिकारी ने बताया कि इन बैठकों में नेपाल और भारत के बीच एनर्जी सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी.

रिन्यूएबल एनर्जी में सहयोग के लिए MoU पर हस्ताक्षर

इससे पहले, जनवरी में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की नेपाल यात्रा के दौरान, नेपाल ने भारत को 10,000 मेगावाट बिजली निर्यात करने के लिए एक दीर्घकालिक समझौते और रिन्यूएबल एनर्जी में सहयोग के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए थे, और संयुक्त रूप से तीन क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन लाइनों का उद्घाटन किया था.

स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन: विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की प्रगति का व्यावहारिक रास्ता

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता दृढ़ता, नवाचार, सहयोग और स्थायित्व पर आधारित व्यावहारिक रास्तों को आगे बढ़ाने का अवसर देती है

वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, ऊर्जा की बढ़ती मांग और जलवायु से जुड़ी गंभीर चुनौतियों के इस दौर में, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसी ऊर्जा प्रणालियों का निर्माण करने की जरूरत है जो स्वच्छ व अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित, सस्ती एवं भरोसेमंद होने के साथ-साथ विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की विकास संबंधी जरूरतों तथा आर्थिक आकांक्षाओं के अनुरूप भी हों।

स्वच्छ ऊर्जा दरअसल ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और दीर्घकालिक विकास की दृष्टि से तेजी  से अहम होती जा रही है। यह ईंधन बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले जोखिमों  को कम कर सकती है, ऊर्जा को अपेक्षाकृत अधिक सुलभ बना सकती है, रोजगार सृजित कर सकती है, घरेलू उद्योगों को मजबूत कर सकती है और देश को अपेक्षाकृत अधिक सुदृढ़ बना सकती है। फिर भी, स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ने के रास्ते एक जैसे नहीं हो सकते। इन रास्तों को राष्ट्रीय परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और विकास की प्राथमिकताओं के हिसाब से निर्धारित किया जाना चाहिए।

इसी बिंदु पर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपसी सहयोग महत्वपूर्ण हो जाता है। ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच बेहतर सहयोग से स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और समावेशी विकास के साझा लक्ष्यों को भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

भारत का अपना अनुभव यह बताता है कि स्वच्छ ऊर्जा की शुरुआत लोगों से ही होनी चाहिए।

पिछले दशक में, प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) के तहत लगभग 28.6 मिलियन घरों को बिजली के कनेक्शन दिए गए। इससे सभी तक बिजली पहुंचाने का काम आगे बढ़ा और ग्रामीण व कम सुविधा वाले इलाकों में लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत महिलाओं को 105 मिलियन से अधिक एलपीजी कनेक्शन दिए गए। इससे खाना पकाने के साफ-सुथरे तरीकों को बढ़ावा मिला, घर में सेहत बेहतर हुई और कठिन श्रम का बोझ कम हुआ।

ये पहल एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को रेखांकित करती हैं: स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने को केवल स्थापित मेगावाट या जोड़ी गई क्षमता के आधार पर नहीं मापा जा सकता, बल्कि इससे पैदा हुए अवसरों, सुदृढ़ हुई आजीविका और बेहतर हुए जीवन स्तर के आधार पर भी मापा जाना चाहिए।

लोगों को प्राथमिकता देने वाले इस दृष्टिकोण के साथ-साथ बड़े पैमाने पर काम और सहयोगी  बुनियादी ढांचे की भी जरूरत है। भारत की स्वच्छ ऊर्जा की कहानी में नवीकरणीय ऊर्जा अहम हो गई है। लेकिन इसकी सफलता इसे समर्थन प्रदान करने वाली प्रणालियों पर निर्भर करती है। सौर  और पवन ऊर्जा को तेजी से अपनाया जा सकता है, लेकिन इनकी पूरी क्षमता का लाभ तभी मिल पाएगा जब पारेषण (ट्रांसमिशन), वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन), भंडारण (स्टोरेज) और ग्रिड प्रबंधन एकसाथ मिलकर काम करें।

भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार में सहायता प्रदान करने वाली प्रणालियों को मजबूत करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। पारेषण संबंधी बुनियादी ढांचे (ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर) का निरंतर विस्तार हुआ है। इसके साथ-साथ ऊर्जा के भंडारण (एनर्जी स्टोरेज) और ग्रिड की सुदृढ़ता (ग्रिड फ्लेक्सिबिलिटी) के क्षेत्र में भी निवेश बढ़ा है। वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) संबंधी सुधारों और उन्नत ग्रिड तकनीक को अपनाने से एक ऐसी बेहतर एवं भरोसेमंद ऊर्जा प्रणाली बनाने में मदद मिली है, जो नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी को समन्वित करने में सक्षम है।

भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन पर आधारित क्षमता अब 288 गीगावॉट से अधिक हो गई है। बड़े पैमाने की परियोजनाओं के अलावा, वितरित नवीकरणीय ऊर्जा (डीआरई) प्रणालियां – जैसे कि रूफटॉप सोलर, सोलर पंप, मिनी-ग्रिड और माइक्रो-ग्रिड – ग्रामीण और कम सुविधा वाले इलाकों में स्वच्छ ऊर्जा को और अधिक सुलभ बना रही हैं। ये प्रणालियां सिंचाई, कोल्ड स्टोरेज, स्कूलों, हेल्थकेयर सेंटरों तथा स्थानीय व्यवसायों को मदद पहुंचाने के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका और स्थानीय आर्थिक सुदृढ़ता को भी बढ़ावा दे रही हैं।

भारत की ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ बड़े पैमाने पर इस दृष्टिकोण को दर्शाती है। इस योजना से अब तक लगभग 4 मिलियन परिवारों को लाभ हुआ है, जिससे उपभोक्ता अपेक्षाकृत अधिक विकेन्द्रीकृत एवं भागीदारी वाली ऊर्जा प्रणाली में योगदान देने वाले बन पाए हैं।

हालांकि, स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार में वित्त पोषण सबसे अहम तत्वों में से एक बना रहेगा। कई विकासशील देशों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इन संभावनाओं को बड़े पैमाने पर लागू करने तथा बैंक से ऋण पाने योग्य परियोजनाओं में बदलने हेतु सस्ती और दीर्घकालिक पूंजी की जरूरत होती है।

आने वाले वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा, वितरण संबंधी बुनियादी ढांचा, ग्रिड के आधुनिकीकरण, भंडारण प्रणाली और कम ऊर्जा खर्च करने वाली तकनीकों में निवेश बेहद जरूरी होगा। न्यू डेवलपमेंट बैंक जैसे संस्थान वित्त पोषण, तकनीक संबंधी साझेदारी और क्षमता विकास के जरिए विकासशील देशों की मदद करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी तकनीकों के लिए सुदृढ़ एवं विविधतापूर्ण आपूर्ति श्रृंखला बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए सुरक्षित, सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा प्रणालियां  सुनिश्चित करने हेतु मैन्यूफैक्चरिंग, तकनीक, नवाचार और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना जरूरी होगा।

अब जबकि ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता आगे बढ़ रही है, सहयोग की एक ऐसी भविष्योन्मुखी रूपरेखा को मजबूत करने का अवसर है जो सामर्थ्य, बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमता, विश्वसनीयता, तकनीक की सुलभता, सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला और सतत विकास का समर्थन करे।

चुनौती सिर्फ स्वच्छ ऊर्जा की क्षमता को बढ़ाने की ही नहीं, बल्कि ऐसे ऊर्जा प्रणाली के निर्माण की भी है जो सबके लिए सुलभ, किफायती एवं भरोसेमंद होने के साथ-साथ दीर्घकालिक आर्थिक विकास और मानव विकास को कायम रखने में सक्षम हों।

 (लेखक विद्युत राज्यमंत्री हैं)

अदाणी ग्रीन एनर्जी ने खावड़ा में बढ़ाई ऊर्जा भंडारण क्षमता, बीईएसएस 3.37 गीगावाट घंटा तक पहुंचा

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Adani Green Energy Limited ने गुजरात के खावड़ा में अपनी बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) क्षमता में बड़ा विस्तार किया है। कंपनी ने मंगलवार को जानकारी दी कि उसकी परिचालन बीईएसएस क्षमता बढ़कर 3.37 गीगावाट घंटा (GWh) तक पहुंच गई है।

कंपनी के बयान के अनुसार, मार्च 2026 में 1.37 गीगावाट घंटा की अतिरिक्त क्षमता जोड़ने के बाद कुल परिचालन क्षमता में यह महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस विस्तार के साथ अदाणी ग्रीन एनर्जी ने देश में नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।

गुजरात का खावड़ा क्षेत्र देश के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना केंद्रों में शामिल हो चुका है। यहां सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के साथ आधुनिक बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनाया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि बीईएसएस तकनीक भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यह नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को स्टोर कर जरूरत के समय उपयोग में लाने में मदद करती है। इससे ग्रिड स्थिरता बढ़ती है और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलता है।

अदाणी ग्रीन एनर्जी ने कहा कि कंपनी भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन को गति देने और बड़े पैमाने पर हरित ऊर्जा अवसंरचना विकसित करने के लिए लगातार निवेश कर रही है।

स्वच्छ ऊर्जा भंडारण के लिए विकसित किफायती और उच्च-प्रदर्शन वाली थर्मल बैटरी सामग्री

दिल्ली / सत्ता संदेश

शोधकर्ताओं ने एक किफायती और कुशल तापीय ऊर्जा भंडारण सामग्री विकसित की है जो केंद्रित सौर ऊर्जा संयंत्रों और औद्योगिक अपशिष्ट ताप पुनर्प्राप्ति प्रणालियों में उपयोग की जाने वाली तापीय बैटरियों की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार कर सकती है।

सौर ऊर्जा (सीएसपी) के कुशल उपयोग और औद्योगिक अपशिष्ट ऊष्मा को संग्रहित करने के लिए प्रभावी तापीय ऊर्जा भंडारण (टीईएस) प्रणालियां आवश्यक हैं। वैज्ञानिक तापीय ऊर्जा भंडारण प्रणाली के बेहतर प्रदर्शन के लिए विशिष्ट ताप क्षमता, तापीय चालकता और परिचालन तापमान सीमा बढ़ाने वाली सामग्रियों को विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स (एआरसीआई) के शोधकर्ताओं ने थर्मल ऊर्जा भंडारण अनुप्रयोगों के लिए विशिष्ट ताप क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि के साथ स्पिनेल नैनो कम्पोजिट फेज चेंज मटेरियल (पीसीएम) के उत्पादन के लिए एक लागत प्रभावी, स्केलेबल प्रक्रिया विकसित की है।

डॉ. मणि कार्तिक के नेतृत्व में इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स टीम द्वारा विकसित प्रक्रिया, नियंत्रित कण आकार वाले स्पिनेल-प्रकार के धातु ऑक्साइड नैनोकणों के उत्पादन के लिए एक सरल सह-अवक्षेपण विधि का उपयोग करती है। इन नैनो सामग्रियों ने उत्कृष्ट तापीय स्थिरता और एकसमान फैलाव प्रदर्शित किया, जिससे वे उच्च-प्रदर्शन वाले नैनोकंपोजिट फेज चेंज मटेरियल के उत्पादन के लिए उपयुक्त बन गए।

फेज चेंज मटेरियल में केवल 1 प्रतिशत स्पिनेल ऑक्साइड नैनोकणों को मिलाने से, नैनोकंपोजिट चरण परिवर्तन सामग्री में नैनोकंपोजिट रहित फेज चेंज मटेरियल की तुलना में विशिष्ट ताप क्षमता (ऊष्मीय ऊर्जा को संग्रहित करने की क्षमता) में 45 प्रतिशत तक की उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई।

जब ये नैनोकण फेज चेंज मटेरियल में अच्छी तरह से फैल जाते हैं, तो वे विशिष्ट सतह क्षेत्र को बढ़ाकर इसके तापीय गुणों में उल्लेखनीय सुधार करते हैं। इससे इंटरफेस पर एक स्थिर स्पिनेल ऑक्साइड परत का निर्माण होता है, जो सतह ऊर्जा को बढ़ाती है और आधार फेज चेंज मटेरियल की तुलना में नैनोकंपोजिट की उच्च विशिष्ट ऊष्मा क्षमता में योगदान देती है।

परिणामस्वरूप, यह पदार्थ प्रति इकाई द्रव्यमान अधिक ऊष्मीय ऊर्जा संग्रहित कर सकता है, जिससे ऊर्जा भंडारण दक्षता में सुधार होता है। इस सुधार से कम निर्माण सामग्री वाले छोटे भंडारण टैंक बनते हैं, जिससे पूंजीगत और परिचालन लागत दोनों में काफी कमी आती है।

यह विकास कुल मिलाकर एक कॉम्पैक्ट और लागत प्रभावी थर्मल ऊर्जा भंडारण समाधान प्रदान करता है, जो बेहतर प्रदर्शन वाली अगली पीढ़ी की सामग्रियों के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।

मैटेरियल्स टुडे केमिस्ट्री (एल्जेवियर) में प्रकाशित यह शोध, अगली पीढ़ी के ऊर्जा भंडारण सामग्रियों में स्वदेशी विशेषज्ञता को बढ़ावा देकर भारत के स्वच्छ ऊर्जा उद्देश्यों और आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप है। इन सामग्रियों की बेहतर तापीय क्षमता अधिक सघन, उच्च-प्रदर्शन और लागत-प्रभावी तापीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास को संभव बनाती है।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन राष्ट्र को समर्पित की

दिल्ली/ सत्ता संदेश

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा प्रधानमंत्री मोदी द्वारा निर्धारित वर्ष 2070 तक भारत के नेट-जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी

सीईएल की 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन का राष्ट्र को समर्पण विकसित भारत 2047 की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम: डॉ. जितेंद्र सिंह

भारत के स्वच्छ ऊर्जा और रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र सार्वजनिक-निजी भागीदारी तथा स्वदेशी नवाचार से प्रेरित परिवर्तनकारी दौर में प्रवेश कर रहे हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र अभूतपूर्व स्तर पर खुल रहे हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) की 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन राष्ट्र को समर्पित की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विकास यात्रा में नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है और भारत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा तथा महासागर-आधारित ऊर्जा प्रणालियों सहित विभिन्न गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का तेजी से विस्तार कर रहा है।

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रत्येक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत की अपनी उपयोगिता और महत्ता है तथा भारत स्वच्छ ऊर्जा विस्तार और सतत विकास के लिए एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है।

इस अवसर पर वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) की सचिव तथा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी, सीईएल के सीएमडी श्री चेतन जैन, वरिष्ठ वैज्ञानिक, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के निदेशक, सीईएल के अधिकारी तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में नवीकरणीय ऊर्जा और स्वदेशी प्रणालियों के विकास से जुड़े क्षेत्रों में सीएसआईआर प्रयोगशालाओं और सीईएल के बीच महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी सहयोग पहलों की भी शुरुआत हुई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन के संचालन को भारत के स्वच्छ ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि यह सुविधा स्वदेशी विनिर्माण तथा नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के प्रति देश के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाती है।

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा में सीईएल के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत का पहला सौर सेल वर्ष 1977 में सीईएल द्वारा निर्मित किया गया था तथा देश का पहला सौर संयंत्र भी वर्ष 1979 में इसी संगठन द्वारा स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा कि इतनी अग्रणी उपलब्धियों के बावजूद उस समय सीईएल के योगदान को वह पहचान नहीं मिल सकी जिसकी वह हकदार थी, लेकिन अब यह संस्था पुनः राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और प्रासंगिकता प्राप्त कर रही है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विनिवेश के कगार पर पहुंच चुकी संस्था से लाभ अर्जित करने वाली और राजस्व उत्पन्न करने वाली मिनी रत्न कंपनी के रूप में सीईएल का परिवर्तन संस्थागत पुनरुत्थान का उल्लेखनीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव दृढ़ नेतृत्व, नीतिगत समर्थन, संचालन अनुशासन तथा संगठन से जुड़े वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

मंत्री ने नई निर्माण लाइन की स्थापना की गति की सराहना की। उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए निविदा आमंत्रण 24 अप्रैल 2025 को जारी किया गया था, एक माह के भीतर सफल बोलीदाता का चयन कर लिया गया और एक वर्ष से भी कम समय में विनिर्माण सुविधा का संचालन प्रारंभ हो गया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीईएल अब वर्टिकल एक्सिस पवन टर्बाइन, हाइब्रिड नवीकरणीय प्रणालियां, डेटा सेंटर, उन्नत रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली तथा छोटे हथियार प्रणालियों जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है, जो भारत के बढ़ते तकनीकी आत्मविश्वास और रणनीतिक तैयारी को दर्शाता है।

रणनीतिक क्षेत्रों में सरकार के नीतिगत सुधारों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को अधिक निजी भागीदारी के लिए खोला है तथा उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टरों से जुड़ी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर आगे बढ़ रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्वचालित मौसम अवलोकन प्रणाली (एडब्ल्यूओएस) तथा नई पीढ़ी की दृष्टि ट्रांसमिसोमीटर प्रणाली के लिए सीएसआईआर-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाओं और सीईएल के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पहलों का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में विकसित प्रौद्योगिकियों को उद्योग साझेदारी के माध्यम से व्यावसायीकरण और जन उपयोग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

मंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि नई पीढ़ी की दृष्टि ट्रांसमिसोमीटर प्रणाली अब पूर्ण रूप से स्वदेशी बन चुकी है और कहा कि स्वदेशी प्रौद्योगिकियां राष्ट्रीय आत्मविश्वास, विनिर्माण क्षमता और रणनीतिक आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करती हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन का राष्ट्र को समर्पण विकसित भारत 2047 की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है तथा यह वैज्ञानिक उत्कृष्टता को राष्ट्रीय विकास में परिवर्तित करने की भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

विश्व पृथ्वी दिवस 2026: ‘हमारी शक्ति, हमारा ग्रह’ के जश्न की तैयारी

दिल्ली/ सत्ता संदेश

राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र विद्यार्थियों के लिए ओपन हाउस क्विज का आयोजन करेगा

इसरो के अंतरिक्ष विभाग के प्रतिष्ठित प्रोफेसर अंटार्कटिक अन्वेषण

दिल्ली स्थित राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र, विद्यार्थियों और विज्ञान प्रेमियों को 22 अप्रैल, 2026, बुधवार को विश्व पृथ्वी दिवस 2026 मनाने के लिए सादर आमंत्रित करता है। इस वर्ष का यह कार्यक्रम “हमारी शक्ति, हमारा ग्रह” की वैश्विक थीम पर आधारित है, जो पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी को दर्शाता है।

कार्यक्रम में “अंटार्कटिका अन्वेषण: श्वेत महाद्वीप की यात्रा” शीर्षक से एक लोकप्रिय विज्ञान व्याख्यान प्रस्तुत किया जाएगा, जिसका संचालन इसरो के अंतरिक्ष विभाग के प्रतिष्ठित प्रोफेसर डॉ. अमिताभ सेन गुप्ता करेंगे। यह व्याख्यान सुबह 10 बजे आरंभ होगा जो प्रतिभागियों को बर्फीले महाद्वीप के वैज्ञानिक रहस्यों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करेगा।

व्याख्यान के उपरांत, सुबह 11 बजे केंद्र में एक ओपन हाउस क्विज प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। यह संवादात्मक सत्र का उद्देश्य युवा प्रतिभागियों के पर्यावरण विज्ञान और पृथ्वी की जैव विविधता से जुड़े ज्ञान को परखना है। साथ ही, यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और वैज्ञानिक जिज्ञासा की भावना को प्रोत्साहित करने के लिए आयोजित किया गया है।

व्याख्यान के उपरांत, सुबह 11 बजे एक ओपन हाउस क्विज प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इस संवादात्मक सत्र का उद्देश्य युवा प्रतिभागियों के पर्यावरण विज्ञान और पृथ्वी की जैव विविधता से जुड़े ज्ञान का परीक्षण करना है। यह प्रतियोगिता स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ावा देने के लिए  आयोजित की गई है।

राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र छात्रों को अग्रणी विशेषज्ञों से जोड़ने, उन्हें प्रेरित करने और हमारे ग्रह की सुरक्षा में विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाने के अपने मिशन को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।

कार्यक्रम का विवरण: