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त्रिपुरा में BSF जवानों के बीच पहुंचे अमित शाह, लंकामूरा सीमा चौकी का निरीक्षण कर बढ़ाया हौसला

दिल्ली / सत्ता संदेश

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सीमा सुरक्षा बल की लंकामूरा सीमा चौकी का निरीक्षण किया और बीएसएफ के जवानों के साथ संवाद किया। गृह मंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत अगर पौधे का रोपण किया। इस अवसर पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, केन्द्रीय गृह सचिव, निदेशक, आसूचना ब्यूरो, सचिव, सीमा प्रबंधन और महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अमित शाह ने कहा कि 2019 से लेकर आज तक हमारे सभी केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों ने लगभग 7.5 करोड़ से अधिक वृक्ष लगाने का काम किया है। इस वर्ष 40 लाख से 60 लाख वृक्ष लगाएंगे और लगाए हुए वृक्षों में से जो वृक्ष जीवित नहीं रह सके, उन सभी वृक्षों को दोबारा लगाने का काम किया जाएगा।

गृह मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई प्रकार के कदम एक साथ उठाए हैं। इस दिशा में एक प्रकार से भारत का मॉडल पेरिस सम्मेलन में आदर्श मॉडल के रूप में स्वीकारा गया। उन्होंने कहा कि हमने पेरिस घोषणा के हर बिंदु को समयपूर्व पूरा कर ऋग्वेद के पर्यावरण की रक्षा के संदेश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को विश्व के सामने साबित किया है। उन्होंने कहा कि सीएपीएफ के सभी जवान बड़े मनोयोग के साथ एक वृक्ष को अपना परिजन मानकर इसकी देखभाल कर रहे हैं। यह सरकारी आदेशों से प्रेरित कार्यक्रम नहीं होना चाहिए, बल्कि सहज आदत होनी चाहिए, क्योंकि यही आदत हमें बचा सकती है।

अमित शाह ने कहा कि आज सीमा सुरक्षा बल की 37वीं वाहिनी में जवानों के आवास का ई- लोकार्पण और बीएसएफ 97वीं वाहिनी में क्वार्टर गार्ड परिसर का ई-शिलान्यास किया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सामीओं की रक्षा करने वाले हमारे जवानों की सुविधा बढ़ाने के लिए कई प्रकार के काम किए हैं। जवानों और उनके परिवार के स्वास्थ्य की चिंता और उनके परिवार के रहने के लिए मकान की चिंता भी की है। वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत CAPFs, असम राइफल्स, राष्ट्रीय सुरक्षा गारद, दिल्ली पुलिस, NCB, NCRB, NIA, BPR&D, NDRF, NDMA और ISCS सहित गृह मंत्रालय के सभी कार्यालयों ने देशभर में 5 लाख से अधिक पौधे लगाए।

“विश्व पर्यावरण दिवस पर राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ की हरित पहल, वृक्षारोपण और पौध वितरण कार्यक्रम आयोजित”

दिल्ली / सत्ता संदेश

राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ (आरएवी), नई दिल्ली ने विश्व पर्यावरण दिवस 2026 को वृक्षारोपण अभियान और पौध वितरण कार्यक्रम के माध्यम से मनाया, और इस तरह विद्यापीठ ने पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। यह कार्यक्रम इस वर्ष के विश्व पर्यावरण दिवस के विषय, प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” के अनुरूप आयोजित किया गया था।

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के शासी निकाय के अध्यक्ष वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा; राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ की निदेशक डॉ. वंदना सिरोहा; राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (एनसीआईएसएम) में आचार संहिता और पंजीकरण बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुश्रुत कनौजिया; और एनसीआईएसएम के चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड के पूर्व सदस्य डॉ. बीएल मेहरा ने भाग लिया।

इस उत्सव के अंतर्गत, विद्यापीठ परिसर में संकाय सदस्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों और छात्रों ने वृक्षारोपण अभियान में भाग लिया, जिससे पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक स्थिरता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देना और हरित आवरण बढ़ाने तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सामूहिक कार्रवाई को प्रोत्साहित करना था। इस कार्यक्रम में औषधीय पौधों के संरक्षण के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया, जो आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवा और भारत की समृद्ध पारंपरिक ज्ञान विरासत का आधार हैं।

गणमान्य हस्तियों ने आयुर्वेद के पारिस्थितिक दर्शन पर प्रकाश डाला, जो मनुष्य और प्रकृति के अंतर्संबंध पर बल देता है। पंचमहाभूत सिद्धांत और लोक-पुरुष साम्य की अवधारणाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय संतुलन मानव स्वास्थ्य और कल्याण के लिए मूलभूत है। उन्होंने आगे कहा कि आयुर्वेदिक सिद्धांत अनवरत जीवनशैली, सजग उपभोग और प्राकृतिक संसाधनों के उत्तरदायित्वपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करते हैं, जिससे समकालीन पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों की प्रासंगिकता और भी पुष्ट होती है।

इस कार्यक्रम की एक ख़ास विशेषता विद्यापीठ के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच पौधों का वितरण था। इस पहल का उद्देश्य प्रतिभागियों को अपने समुदायों में वृक्षारोपण और देखभाल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करना था।

प्रतिभागियों ने सतत जीवन शैली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, वहीं इस आयोजन ने पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और प्रकृति के साथ सामंजस्य को बढ़ावा देने में आयुर्वेद की निरंतर प्रासंगिकता पर जोर दिया।

सीयू पंजाब की पहल—‘घोंसला बनाओ, धरती बचाओ’ से युवाओं को पक्षी संरक्षण का संदेश

बठिंडा/सत्ता संदेश


पर्यावरण जागरूकता को सार्थक जन-आंदोलन में बदलते हुए पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 28 और 29 अप्रैल को दो दिवसीय कार्यशाला “बिल्ड अ नेस्ट: सेव द अर्थ – हैंड्स ऑन वर्कशॉप ऑन बर्ड नेस्ट मेकिंग” का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं और बच्चों को पक्षी संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और जैव विविधता के महत्व के प्रति जागरूक करना था।


यह कार्यक्रम पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सहयोग से पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम एवं मिशन लाइफ के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसे भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का समर्थन प्राप्त था। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं संरक्षक के रूप में भाग लिया।


कार्यशाला में 232 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें विश्वविद्यालय के विद्यार्थी और चार स्कूलों—गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, झुम्बा; गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल, घुद्दा; डिफरेंट कॉन्वेंट पब्लिक स्कूल, घुद्दा; और श्री गुरु गोबिंद सिंह पब्लिक स्कूल, बल्लुआना—के छात्र शामिल थे।


अपने प्रेरणादायी अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने कहा कि मनुष्य को पृथ्वी का सर्वाधिक संगठित प्राणी होने के नाते अन्य जीवों और जैव विविधता की रक्षा का नैतिक दायित्व निभाने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पक्षियों के लिए सुरक्षित घोंसले तैयार करना जैसे छोटे लेकिन सार्थक प्रयास सह-अस्तित्व, संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन के सशक्त प्रतीक बन सकते हैं। उन्होंने युवाओं में ऐसी व्यावहारिक पर्यावरणीय कौशल विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्हें प्रकृति के संवेदनशील संरक्षक बनने का आह्वान किया।


ईकोरूट फाउंडेशन के मनोज लीला भट्ट ने प्रतिभागियों को पक्षियों के लिए सुरक्षित और उपयोगी घोंसले बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि ऐसे छोटे प्रयास पक्षियों की सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।


कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट एंड अर्थ साइंसेज की डीन एवं कार्यशाला संयोजक प्रो. योगलक्ष्मी के.एन. के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला बच्चों और युवाओं में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता विकसित करने का एक प्रयास है। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आवास कम होने के कारण पक्षियों की सुरक्षा आज बहुत जरूरी हो गई है। प्रो. सुनील मित्तल ने भी प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण, जिम्मेदार जीवनशैली और भूजल बचाने के लिए प्रेरित किया।


कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार गर्ग ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगी संस्थाओं का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला ने पर्यावरण शिक्षा को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ते हुए युवाओं को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित किया। सीयू पंजाब की यह पहल युवाओं को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाकर उन्हें जिम्मेदार नागरिक और प्रकृति के सच्चे संरक्षक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।