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भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्ञान और मूर्त संसाधनों के योगदान को मापने के लिए रूपरेखा” पर आधारित शोधपत्र पर जानकारी और सुझाव आमंत्रित

दिल्ली /सत्ता संदेश

एक प्रतिस्पर्धी वातावरण में तकनीकी में तेजी से परिवर्तन, जटिल कौशल मांग और संगठनात्मक नवाचार अर्थव्यवस्था में ज्ञान के बढ़ते महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। इस संदर्भ में, अर्थव्यवस्था में ज्ञान के योगदान का आकलन करना और इसमें हो रहे परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए नीतिगत उपायों की सिफारिश करना आवश्यक हो गया है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्ञान और मूर्त संसाधनों के योगदान को मापने के लिए एक रूपरेखा विकसित करने का प्रयास कर रहा है। इस दिशा में पहले से कोई समान पहल न होने के कारण, यह प्रयास एक नई पहल है और इसमें विशेषज्ञों एवं अन्य हितधारकों के सहयोग की आवश्यकता है।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद की अध्यक्षता में फरवरी 2025 में हुई एक बैठक की सिफारिशों के आधार पर, इस उद्देश्य के लिए एक तकनीकी सलाहकार समूह (टीएजी) का गठन किया गया था। इसकी अध्यक्षता उस समय क्षमता विकास आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने की। इस समूह में विचार मंच, उद्योग निकायों, शिक्षाविदों और केंद्र सरकार के मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल थे। सितंबर 2025 में एक विचार-विमर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य मूर्त संसाधनों का वर्गीकरण विकसित करना और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उनके योगदान को मापने के लिए संभावित मात्रात्मक संकेतकों और डेटा स्रोतों की पहचान करना था। टीएजी के सुझावों, विचार-विमर्श सत्र से प्राप्त विचारों और विशेषज्ञों के साथ हुई बाद की चर्चाओं के आधार पर, भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्ञान और मूर्त संसाधनों के योगदान को मापने के लिए एक रूपरेखा पर एक आधार पत्र मंत्रालय में तैयार किया गया है। यह आधार पत्र https://mospi.gov.in/announcements पर उपलब्ध है।

इस शोधपत्र में निम्‍नलिखित चार अध्याय हैं:

अध्याय 1: ज्ञान और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था—अवधारणात्‍मक विचार

अध्याय 2: उपलब्ध पद्धतियाँ और मात्राएँ

अध्याय 3: भारत का पारंपरिक ज्ञान—आयाम एवं चुनौतियाँ, और

अध्याय 4: अर्थव्यवस्था में ज्ञान के योगदान का मूल्यांकन; एक रूपरेखात्मक परिचय।

पहले अध्याय में ज्ञान के आयामों, उसके सृजन और विकास पर वैचारिक विचार-विमर्श किया गया है, साथ ही इसमें अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव से संबंधित हालिया चर्चाओं पर भी विचार किया गया है। दूसरे अध्याय में अनुसंधान एवं विकास, बौद्धिक संपदा अधिकार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और अकादमिक संसाधनों के मूल्यांकन के लिए उपलब्ध पद्धतियों का वर्णन किया गया है और ज्ञान के इन घटकों के मूल्यांकन के लिए कुछ मापदंड प्रस्तुत किए गए हैं। तीसरे अध्याय में भारतीय अर्थव्यवस्था में पारंपरिक ज्ञान की भूमिका और विभिन्न कार्यों में इस पारंपरिक ज्ञान की भूमिका का विश्लेषण किया गया है। इसमें इसके संरक्षण, प्रलेखन और वर्गीकरण से संबंधित साहित्य और पहलों की समीक्षा की गई है और संबंधित मापदंड प्रस्तुत किए गए हैं। अध्याय 4 में अर्थव्यवस्था पर ज्ञान के प्रभाव को समझने के लिए साक्ष्यों को एक व्यापक ढांचे में समेकित करने का प्रारंभिक प्रयास किया गया है और इसके आवश्यक घटकों को परिभाषित किया गया है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य सचिव श्री रतन पी. वाटल की अध्यक्षता में ज्ञान प्रणाली पर एक समिति का गठन किया है। इस समिति को अर्थव्यवस्था में ज्ञान और मूर्त संसाधनों के योगदान को मापने के लिए एक व्यावहारिक नीति पत्र तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है। उपर्युक्त आधार पत्र ही व्यावहारिक नीति पत्र का आधार बनेगा।

सभी हितधारकों और आम जनता से परामर्श प्रक्रिया के अंतर्गत आधार पत्र पर टिप्पणियाँ और सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं। अपनी जानकारी 15 जून 2026 तक   maneesh.jindal@mospi.gov.in और neeraj.kumar007[at]nic[dot]in ईमेल पतों पर इस मंत्रालय को भेजी जा सकती हैं। इससे इस रूपरेखा को शीघ्र अंतिम रूप देने में सहायता मिलेगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर),

चंडीगढ़/ सत्ता संदेश

चंडीगढ़ के 39वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कियाकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पीजीआई चंडीगढ़ की विरासत, प्रतिष्ठित साख और अग्रणी चिकित्सा अनुसंधान, सर्जरी तथा एक मजबूत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में इसके योगदान पर प्रकाश डालापीजीआई चंडीगढ़ उत्तर भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में से एक है और विश्वस्तरीय चिकित्सा देखभाल, उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान का केंद्र है: श्री नड्डाप्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत ने स्वास्थ्य सेवा सहित सभी क्षेत्रों में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है: श्री नड्डा ने 2014 के बाद से चिकित्सा बुनियादी ढांचे के परिवर्तनकारी विस्तार पर प्रकाश डाला: एम्स की संख्या बढ़कर 23 हुई, मेडिकल कॉलेज 818 हुए और कुल मेडिकल सीटों की संख्या 2 लाख से अधिक हो गई दीक्षांत समारोह में 61 पीएचडी और 114 डीएम सहित 682 स्नातकों ने डिग्रियां प्राप्त कीं और 95 पदक प्रदान किए गए

चंडीगढ़, 30 अप्रैल 2026: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ के 39वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया और नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. विनोद के. पॉल भी उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए, श्री नड्डा ने स्नातक पूरा करने वाले छात्रों को “एक महत्वपूर्ण उपलब्धि” हासिल करने के लिए बधाई दी, जो उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ-साथ उनके शिक्षकों, संकाय सदस्यों और उनके माता-पिता के प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने भारत में चिकित्सा विज्ञान शिक्षा और रोगी देखभाल को आगे बढ़ाने में पीजीआईएमईआर के योगदान की सराहना की।

श्री नड्डा ने रेखांकित किया कि “पीजीआई चंडीगढ़ उत्तर भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है और विश्वस्तरीय चिकित्सा देखभाल, उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान का केंद्र है।” उन्होंने कहा कि दशकों से डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य पेशेवरों की पीढ़ियों के समर्पित प्रयासों ने पीजीआई को एक प्रतिष्ठित ब्रांड के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि पीजीआई के स्नातकों के साथ संस्थान की साख जुड़ी होती हैं और इस प्रतिष्ठित संस्थान से उत्तीर्ण होने पर सभी छात्रों को बधाई दी।

श्री नड्डा ने पथ-प्रदर्शक क्लिनिकल अनुसंधान और अग्रणी सर्जरी में संस्थान के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा “वर्तमान में पीजीआई में 850 से अधिक बाह्य (extramural) परियोजनाएं और 100 से अधिक आंतरिक (intramural) परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जो न केवल एक स्नातकोत्तर संस्थान के रूप में बल्कि शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में इसकी स्थिति को दर्शाती हैं।” उन्होंने एक साथ अग्न्याशय-गुर्दा प्रत्यारोपण, गुर्दा प्रत्यारोपण और यकृत प्रत्यारोपण में संस्थान की विशेषज्ञता की भी सराहना की।

श्री नड्डा ने कहा कि “इतने प्रतिष्ठित संस्थान से स्नातक होना छात्रों के लिए गर्व की बात है” और उन्होंने स्वयं पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के अध्यक्ष के रूप में इस कार्यक्रम का हिस्सा होने पर गर्व व्यक्त किया।

श्री नड्डा ने जोर देकर कहा कि “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत ने स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है।” उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे के विस्तार में नीतिगत निर्णयों की भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि “20वीं सदी के अंत तक, भारत में केवल एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स ) और एक स्नातकोत्तर संस्थान था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छह नए एम्स की स्थापना शुरू की थी और पिछले 10 वर्षों में 16 और एम्स जोड़े गए हैं, जिससे कुल संख्या 23 हो गई है।”

श्री नड्डा ने आगे कहा कि सरकार का लक्ष्य देश भर में तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करना है। चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में सरकार के प्रयासों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि “मेडिकल कॉलेजों की संख्या एक दशक पहले के 387 से बढ़कर आज 818 हो गई है। स्नातक (यूजी) मेडिकल सीटें 51,000 से बढ़कर 1,26,000 से अधिक हो गई हैं, अगले पांच वर्षों में 75,000 और यूजी और पीजी सीटें जोड़ने का लक्ष्य है, जिनमें से 28,000 सीटें पिछले दो वर्षों में ही जोड़ने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया हैं। इसी तरह, स्नातकोत्तर (पीजी) सीटें 31,000 से बढ़कर लगभग 81,000-85,000 हो गई हैं।”

स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि उनकी उपलब्धियां दृढ़ता, कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता का परिणाम हैं। साथ ही, उन्होंने उन्हें याद दिलाया कि “जहां बुनियादी शिक्षा एक अधिकार है, वहीं उच्च और व्यावसायिक शिक्षा एक विशेषाधिकार है जो महत्वपूर्ण सार्वजनिक निवेश द्वारा समर्थित है।” उन्होंने बताया कि “सरकार द्वारा प्रति छात्र प्रति वर्ष लगभग 30-35 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं, और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने के लिए अगले पांच वर्षों में प्रति छात्र 1.5 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।”

स्वास्थ्य सेवा के भविष्य के बारे में बात करते हुए, श्री नड्डा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), स्टेम सेल अनुसंधान, जीन थेरेपी, प्रिसिजन मेडिसिन और टेलीहेल्थ सहित तकनीक की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देते हुए कहा “हालांकि तकनीकी प्रगति स्वास्थ्य सेवा को बदल रही है, लेकिन मानवीय भूमिका भी बनी रहनी चाहिए।” उन्होंने कहा “करुणा की अपनी ताकत होती है और यह चिकित्सा पद्धति के केंद्र में होनी चाहिए।” उन्होंने छात्रों को रोगियों और समाज के लाभ के लिए तकनीक का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि सहानुभूति और करुणा उनके काम का मार्गदर्शन करती रहे।

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा को समाज के लिए कुछ करने की जिम्मेदारी के रूप में देखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे इसमें सार्थक योगदान देंगे, और साथ ही यह भी कहा कि दीक्षांत समारोह स्नातकों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाने का एक अवसर होता है। उन्होंने उन्हें बाहरी मान्यताओं से परे देखने के लिए भी प्रोत्साहित किया, और ईमानदारी से अपना आत्म-मूल्यांकन करने, लगातार सुधार करने, तथा अपने प्रयासों और समर्पण के माध्यम से बेहतर पेशेवर और बेहतर इंसान बनते हुए उत्कृष्टता के उच्च मानकों को प्राप्त करने के लिए प्रयास करने के महत्व पर ज़ोर दिया।

अपने संबोधन के अंत में श्री नड्डा ने कहा कि स्नातक छात्र जीवन के एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं, जहां सीखना व्यावहारिक और जिम्मेदारी आधारित होगा। उन्होंने उन्हें इस समझ के साथ आगे बढ़ने और पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ के मानकों और मूल्यों को बनाए रखने की सलाह दी।

दीक्षांत समारोह में 682 उम्मीदवारों को डिग्री दी गई, जिनमें 61 पीएचडी, 114 डीएम, 67 एमसीएच, 323 एमडी, 103 एमएस और 14 एमडीएस स्नातक शामिल थे। इसके अतिरिक्त, संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाते हुए 95 पदक (18 स्वर्ण, 37 रजत और 40 कांस्य) प्रदान किए गए।

इस अवसर पर प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआईएमईआर और केंद्र सरकार तथा पंजाब एवं चंडीगढ़ सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि: 1962 में स्थापित और 1967 में ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ घोषित पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़, तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए भारत के प्रमुख संस्थानों में से एक है। एनआईआरएफ 2025 की मेडिकल श्रेणी में संस्थान ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है।

क्षमता: संस्थान में 47 विशेषज्ञता विभागों में 2,233 बिस्तरों की क्षमता है।

रोगी सेवा: वार्षिक रूप से लगभग 27-28 लाख ओपीडी विजिट, 1 लाख इनपेशेंट प्रवेश और 95,000 से अधिक सर्जरी की जाती हैं।

आयुष्मान भारत: पीएम-जेएवाई (पीएम -जे ए वाई ) योजना के तहत लगभग 1.81 लाख मरीजों का इलाज किया गया है।

प्रत्यारोपण: 2025 में 250 गुर्दा प्रत्यारोपण किए गए। संस्थान एक साथ अग्न्याशय-गुर्दा प्रत्यारोपण (एसपीके) में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बना हुआ है।

अनुसंधान: डब्ल्यूएचओ, आईसीएमआर और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा समर्थित 800 से अधिक परियोजनाएं चल रही हैं।

विस्तार: संगरूर (पंजाब), ऊना (हिमाचल प्रदेश) और फिरोजपुर (पंजाब) में सैटेलाइट केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं ताकि क्षेत्रीय पहुंच बढ़ सके।

नवाचार: संस्थान ने दवाओं की आपूर्ति के लिए ‘ऑनलाइन इंडेंटिंग सिस्टम’ और मरीजों की सहायता के लिए ‘प्रोजेक्ट सारथी’ जैसे नवाचार लागू किए हैं।