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मेजर जनरल पवन कुमार सिंह ने गुरु नानक स्टेडियम में आर्मी रिक्रूटमेंट रैली का किया दौरा

लुधियाना / सत्ता संदेश

दिनांक : 6 अक्टूबर 2026

11 कॉर्प्स के चीफ ऑफ स्टाफ (COS) मेजर जनरल पवन कुमार सिंह, SM ने मंगलवार को लुधियाना के गुरु नानक स्टेडियम में चल रही आर्मी रिक्रूटमेंट रैली का दौरा किया और भर्ती प्रक्रिया व व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

जोनल रिक्रूटमेंट ऑफिस (ZRO) पंजाब एवं जम्मू-कश्मीर की देखरेख में आर्मी रिक्रूटिंग ऑफिस (ARO) लुधियाना की ओर से 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक गुरु नानक स्टेडियम में आर्मी रिक्रूटमेंट रैली आयोजित की जा रही है।

दौरे के दौरान मेजर जनरल पवन कुमार सिंह ने भर्ती प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों, रिक्रूटमेंट टीम और उम्मीदवारों से बातचीत की। उन्होंने रैली के सुचारू संचालन के लिए संबंधित सैन्य इकाइयों और विशेष रूप से जिला प्रशासन की ओर से किए गए इंतजामों की सराहना की।

उन्होंने उम्मीदवारों को भारतीय सेना में शामिल होने के अपने सपने को पूरा करने के लिए अनुशासन, दृढ़ संकल्प और शारीरिक फिटनेस पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सेना में भर्ती की प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता, पारदर्शिता और ईमानदारी के उच्चतम मानकों को बनाए रखना बेहद जरूरी है।

यह भर्ती रैली क्षेत्र के योग्य युवाओं को भारतीय सेना में शामिल होने के लिए चयन प्रक्रिया में हिस्सा लेने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से आयोजित की जा रही है।

Uttarakhand : पिथौरागढ़ में भारत-मंगोलिया का सैन्य अभ्यास ‘नोमैडिक एलीफेंट-2026’ शुरू, 90 जवान ले रहे हिस्सा

उत्तराखंड / सत्ता संदेश

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में भारत और मंगोलिया की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘नोमैडिक एलीफेंट-2026’ सोमवार, 21 सितंबर से शुरू हो गया। दोनों देशों के बीच होने वाले इस वार्षिक प्लाटून स्तर के सैन्य अभ्यास का यह 18वां संस्करण है, जो 3 अक्टूबर तक चलेगा। अभ्यास में भारतीय सेना और मंगोलियाई सेना के 45-45 जवान, यानी कुल 90 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं।

इस संयुक्त अभ्यास का मुख्य उद्देश्य पहाड़ी और अर्ध-शहरी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए दोनों देशों की सेनाओं की संयुक्त संचालन क्षमता को मजबूत करना है। सैनिक संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत संयुक्त सैन्य अभियान चलाने की विभिन्न प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण भी करेंगे।

अभ्यास के दौरान घेराबंदी और तलाशी अभियान, इमारतों में प्रवेश कर कार्रवाई, विशेष हेलिबोर्न ऑपरेशन सहित कई सैन्य गतिविधियों का अभ्यास किया जाएगा। आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सैनिकों को ड्रोन के इस्तेमाल, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिक अपने अनुभव, सैन्य रणनीतियां और संचालन संबंधी प्रक्रियाएं साझा करेंगे। इसका उद्देश्य संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर तालमेल विकसित करना और एक-दूसरे की सैन्य कार्यप्रणाली को समझना है।

‘नोमैडिक एलीफेंट’ भारत और मंगोलिया के बीच होने वाला वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास है, जिसका आयोजन बारी-बारी से दोनों देशों में किया जाता है। इसका पिछला संस्करण मई-जून 2025 में मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में आयोजित किया गया था।

पिथौरागढ़ में आयोजित इस संस्करण के जरिए दोनों देशों के सैनिकों को वास्तविक परिचालन परिस्थितियों के अनुरूप संयुक्त प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। अभ्यास से भारत और मंगोलिया के बीच रक्षा सहयोग, आपसी विश्वास और सैन्य तालमेल को और मजबूत करने पर जोर रहेगा।

Amritsar Khasa Dogra War Memorial: 1965 के शहीदों को श्रद्धांजलि, डोगरा डे पर हुआ कार्यक्रम

अमृतसर के खासा स्थित डोगरा वॉर मेमोरियल पर डोगरा डे के अवसर पर 1965 के युद्ध में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। डोगरा ब्रिगेड, स्टूडेंट्स और NCC कैडेट्स हुए शामिल।

  • अमृतसर के खासा में डोगरा वॉर मेमोरियल पर 1965 के शहीदों को श्रद्धांजलि
  • डोगरा डे पर डोगरा ब्रिगेड ने किया शहीदों को नमन, स्कूल स्टूडेंट्स और NCC कैडेट्स भी हुए शामि

अमृतसर / सत्ता संदेश

खासा स्थित डोगरा वॉर मेमोरियल में डोगरा डे के अवसर पर 1965 के युद्ध में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। डोगरा ब्रिगेड की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सेना के जवानों के साथ विभिन्न स्कूलों के स्टूडेंट्स, NCC कैडेट्स और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी भी शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान शहीद सैनिकों की याद में पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके साथ ही डोगरा ब्रिगेड की ओर से हथियारों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे स्टूडेंट्स और NCC कैडेट्स ने देखा। कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को 1965 के युद्ध के इतिहास और सैनिकों के बलिदान से परिचित करवाना भी रहा।

कार्यक्रम में पहुंची स्टूडेंट गौरी ने 1965 के युद्ध के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सैनिकों ने बहादुरी के साथ देश और लोगों के घरों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि मिलिट्री यूनिफॉर्म पहनना किसी भी व्यक्ति के लिए गर्व और सम्मान की बात है।

गौरी ने युवाओं से भारतीय सेना में शामिल होने की कोशिश करने की अपील करते हुए कहा कि डोगरा वॉर मेमोरियल पर हथियारों की प्रदर्शनी देखना और श्रद्धांजलि समारोह का हिस्सा बनना उन्हें काफी प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं में देश सेवा और सेना में शामिल होने की भावना को मजबूत करते हैं और उन्हें NDA के माध्यम से सेना में जाने के लिए भी प्रेरणा मिलती है।

इस अवसर पर रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर कर्नल आर.पी.एस. ढिल्लों ने भी 1965 के युद्ध से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं। युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित और कारगिल ऑपरेशन के दौरान 9 पंजाब के पूर्व कमांडिंग ऑफिसर रहे कर्नल ढिल्लों ने बताया कि एक युवा अधिकारी के रूप में उन्हें इच्छोगिल नहर के दूसरी तरफ जाने का अवसर मिला था।

उन्होंने युद्ध के दौरान देखे गए तबाह पाकिस्तानी टैंकों और उन मोर्चों का जिक्र किया, जहां भारतीय सैनिकों ने बंकरों तक पहुंचकर ग्रेनेड के जरिए वहां मौजूद MMGs को निष्क्रिय किया था। कर्नल ढिल्लों ने युवा पीढ़ी से देश और भारतीय सेना के लिए मेहनत करने तथा सेना में भर्ती होने की दिशा में प्रयास करने का आह्वान किया।

कर्नल ढिल्लों ने बताया कि कार्यक्रम डोगराई दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उनके अनुसार, 1965 के युद्ध के दौरान छंब और खेमकरण सेक्टर में भारत पर दबाव के बीच लाहौर पर दबाव बनाने और अन्य मोर्चों से दबाव कम करने के उद्देश्य से इस क्षेत्र से भी मोर्चा खोलने की कोशिश की गई थी।

कार्यक्रम में शामिल स्टूडेंट्स और NCC कैडेट्स ने भी शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और देश की रक्षा के लिए उनके बलिदान को याद किया। डोगरा वॉर मेमोरियल में आयोजित यह कार्यक्रम युवाओं को भारतीय सेना के इतिहास, युद्ध में सैनिकों की भूमिका और देश सेवा की भावना से जोड़ने का अवसर बना।

भारत-अमेरिका के बीच ‘युद्ध अभ्यास-2026’ शुरू, पहाड़ी युद्ध क्षमता और ड्रोन तकनीक पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली / देहरादून / सत्ता संदेश

भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास-2026’ का 22वां संस्करण मंगलवार से शुरू हो गया। अभ्यास का उद्घाटन उत्तराखंड के औली स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में किया गया। इस संयुक्त सैन्य अभ्यास में भारत और अमेरिका की ओर से करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं।

अभ्यास के उद्घाटन अवसर पर भारतीय सेना की ओर से मेजर जनरल अमरेश गुंजन, जीओसी 14 इन्फैंट्री डिवीजन, जबकि अमेरिकी सेना की ओर से कर्नल बेंजामिन जैकमैन, कमांडर, 1st इन्फैंट्री ब्रिगेड कॉम्बैट टीम, 11th एयरबोर्न डिवीजन ने सैनिकों को संबोधित किया।

यह सैन्य अभ्यास उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एक साथ आयोजित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य क्षमता, समन्वय और इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करना है।

पहाड़ी इलाकों में युद्ध क्षमता बढ़ाने पर जोर

‘युद्ध अभ्यास-2026’ के दौरान खासतौर पर पहाड़ी और अर्ध-पहाड़ी इलाकों में सैन्य अभियानों की तैयारी पर जोर दिया जाएगा। सैनिकों को इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (IBG) के इस्तेमाल और इन्फैंट्री आधारित ऑपरेशंस से जुड़ी परिस्थितियों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

अभ्यास के दौरान भारतीय और अमेरिकी सैनिक एक-दूसरे की रणनीति, तकनीक और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं को समझेंगे। इसके साथ ही संयुक्त योजना तैयार करने और मिलकर सैन्य अभियानों को अंजाम देने की क्षमता को भी मजबूत किया जाएगा।

ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम पर खास फोकस

इस बार संयुक्त सैन्य अभ्यास में आधुनिक तकनीक की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। सैनिकों को ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम के जरिए निगरानी और टोही अभियानों को संचालित करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

वहीं, राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया जाएगा। दोनों देशों के सैन्य विशेषज्ञ नई सैन्य तकनीक और मल्टी-डोमेन वॉरफेयर से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने अनुभव साझा करेंगे।

संयुक्त सैन्य कार्रवाई की क्षमता होगी मजबूत

‘युद्ध अभ्यास-2026’ के जरिए दोनों सेनाएं अलग-अलग भौगोलिक और ऑपरेशनल परिस्थितियों में एक-दूसरे के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सैन्य कार्रवाई करने की क्षमता को और मजबूत करेंगी। यह अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भारत और अमेरिका के बीच ‘युद्ध अभ्यास’ एक वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, संयुक्त संचालन क्षमता और सैन्य सहयोग को बढ़ाना है। इस अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे की रणनीति, हथियार प्रणालियों और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं से परिचित होते हैं।

IIT रोपड़ और आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज में MoU, सेना अधिकारियों को मिलेगी डिफेंस टेक्नोलॉजी में MTech डिग्री

रोपड़ / सत्ता संदेश

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ (IIT Ropar) और आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज, गोपालपुर के बीच भारतीय सेना के अधिकारियों को डिफेंस टेक्नोलॉजी में मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी (MTech) की डिग्री प्रदान करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते से लॉन्ग एयर डिफेंस कोर्स कर रहे सेना अधिकारियों को उच्च तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान का अवसर मिलेगा।

समझौते पर आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा और आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज, गोपालपुर के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल अमित राव ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल सुरिंदर सिंह महल, प्रबंध निदेशक, आईआईटी रोपड़ डिफेंस रिसर्च एंड इनोवेशन फाउंडेशन और ब्रिगेडियर रोहित दास भी उपस्थित रहे।

इस समझौते का समन्वय आईआईटी रोपड़ के डीन (पीजी एंड रिसर्च) डॉ. सारंग गुमफेकर और डीआरआईएफ के निदेशक वीरभद्र सिंह रावत ने किया।

समझौते के तहत आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज, गोपालपुर में लॉन्ग एयर डिफेंस कोर्स कर रहे अधिकारियों को आईआईटी रोपड़ के एमटेक कार्यक्रम के माध्यम से डिफेंस टेक्नोलॉजी में औपचारिक शैक्षणिक मान्यता प्रदान की जाएगी। आईआईटी रोपड़ के संकाय सदस्य अधिकारियों के शोध प्रबंध और अनुसंधान परियोजनाओं के लिए मेंटर के रूप में मार्गदर्शन करेंगे।

इसके अलावा, पूर्व अनुमति के अधीन सेना अधिकारियों को आईआईटी रोपड़ की प्रयोगशालाओं और अन्य बुनियादी ढांचे का उपयोग करने का अवसर भी मिलेगा। संस्थान के विशेषज्ञों की ओर से ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से सेमिनार और व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे।

दोनों संस्थानों ने आपसी हित वाले क्षेत्रों में तकनीकी ज्ञान और अनुसंधान को संयुक्त रूप से आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इससे भारतीय सेना और आईआईटी रोपड़ के बीच शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

दिसंबर 2022 के समझौते पर आधारित है नई साझेदारी

यह नया समझौता दिसंबर 2022 में आर्मी ट्रेनिंग कमांड, इंटीग्रेटेड हेडक्वार्टर्स ऑफ मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस (आर्मी) और आईआईटी रोपड़ के बीच हुए शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग के समझौता ज्ञापन की नींव पर आधारित है।

आईआईटी रोपड़ के अनुसार, दिसंबर 2022 में हुए समझौते के बाद से संस्थान भारतीय सेना के साथ शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में लगातार सहयोग कर रहा है। आईआईटी रोपड़ का डिफेंस रिसर्च एंड इनोवेशन फाउंडेशन (DRIF) इस साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

राष्ट्रीय रक्षा से जुड़े अधिकारियों की तकनीकी शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा

समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा ने कहा कि यह समझौता भारतीय सेना के साथ संस्थान के निरंतर जुड़ाव में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि आईआईटी रोपड़ के संकाय और बुनियादी ढांचे अब सीधे उन अधिकारियों की तकनीकी शिक्षा में योगदान दे रहे हैं जो देश की राष्ट्रीय रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने आने वाले वर्षों में इस सहयोग को और व्यापक तथा मजबूत बनाने की उम्मीद जताई।

इस पहल से सेना के अधिकारियों को रक्षा प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा। साथ ही आईआईटी रोपड़ और भारतीय सेना के बीच तकनीकी विशेषज्ञता एवं अनुसंधान के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

NSNIS पटियाला ने “संडेज़ ऑन साइकिल” रैली और स्वच्छता अभियान के साथ कारगिल विजय दिवस मनायाम

पटियाला / सत्ता संदेश

‘ऑपरेशन विजय’ के नायकों को सच्ची श्रद्धांजलि देते हुए, नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पोर्ट्स (NSNIS), पटियाला ने कारगिल विजय दिवस पर “संडेज़ ऑन साइकिल” पहल का एक विशेष आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मकसद शारीरिक फिटनेस, देशभक्ति और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना और साथ ही सेना और नागरिकों के बीच संबंधों को मजबूत करना था।

NSNIS पटियाला के अधिकारियों, कोच, स्टाफ और ट्रेनीज़ के साथ-साथ ऐरावत डिवीजन साइकिलिंग टीम और 10 गार्ड्स बटालियन के 100 से ज़्यादा प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सभी टीमों ने मिलकर 30किलोमीटर का साइकिलिंग रूट पूरा किया और राष्ट्रीय एकता, फिटनेस और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दिखाई। इसके अलावा, प्रतिभागियों ने रास्ते में ‘स्वच्छ भारत सफाई अभियान’ भी चलाया, जिससे स्वच्छता और नागरिक जिम्मेदारी की भावना को और बल मिला।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए, NSNIS पटियाला के सीनियर एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (SED) ने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुर सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस देश की संप्रभुता की रक्षा में भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, समर्पण और अटूट प्रतिबद्धता की हमेशा याद दिलाता है।

“संडेज़ ऑन साइकिल” कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, SED ने इस बात पर ज़ोर दिया कि नियमित साइकिलिंग न केवल व्यक्तिगत फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देती है, बल्कि स्वच्छ परिवहन के माध्यम से पर्यावरण को हरा-भरा रखने में भी मदद करती है। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से रोज़ाना व्यायाम को अपनी आदत बनाने और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ के सक्रिय एंबेसडर के तौर पर काम करने का आग्रह किया।

भारतीय सेना को मिलेंगे 840 स्वदेशी कामिकेज ड्रोन, टाटा और निबे को 1600 करोड़ का ऑर्डर

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मंत्रालय ने सेना के लिए 1,600 करोड़ रुपये के टेंडर में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और निबे डिफेंस को ‘लोइटरिंग म्यूनिशंस’ की सप्लाई के लिए चुना है। इस टेंडर के तहत सेना को 100 किलोमीटर की रेंज वाले 840 आधुनिक ड्रोन मिलेंगे।

​टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स का कुल ऑर्डर का 64% हिस्सा टाटा को मिला है. टाटा इसके तहत अपनी पूरी तरह से स्वदेशी ‘ALS सीरीज’ के लोइटरिंग सिस्टम की सप्लाई करेगा।

निबे डिफेंस का ऑर्डर 36% हिस्सा निबे डिफेंस के खाते में गया है। निबे इसके लिए ‘वायु अस्त्र’ ड्रोन की सप्लाई करेगी, जो असल में इजरायल की कंपनी एलबिट सिस्टम्स के ‘स्काईस्ट्राइकर’ का रीब्रांडेड वर्जन है।

जानकारी के मुताबिक टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-1) बनकर उभरी है और उससे सेना की जरूरत का 64 प्रतिशत हिस्सा सप्लाई करने की उम्मीद है। वहीं निबे दूसरी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-2) बनकर उभरी है और उससे बाकी बचे 36 प्रतिशत लोइटरिंग म्यूनिशन की सप्लाई करेगा।

ये पूरी डील ‘फास्ट-ट्रैक’ रूट के जरिए की जा रही है। इसके तहत दोनों कंपनियों को अगले 6 महीने के भीतर ड्रोन की डिलीवरी शुरू करनी होगी. इन ड्रोनों का इस्तेमाल भारतीय सेना की नई बनाई जा रही ‘ड्रोन आर्टिलरी रेजिमेंट्स’ के लिए किया जाएगा, जिससे दुश्मनों के ठिकानों पर बेहद सटीक और लंबी दूरी के हमले किए जा सकें।

यहां टाटा का सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी है, वहीं निबे का ड्रोन इजरायली तकनीक पर आधारित है. इसे रक्षा खरीद में घरेलू विकास के मिले-जुले स्तर के रूप में तैयार किया जाएगा।

Shopian Encounter : शोपियां में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जाकिर गनई ढेर, शव बरामद, कई हथियार किए जब्त

जम्मू-कश्मीर / सत्ता संदेश

दक्षिण कश्मीर के शोपियां इलाके में चल रहे आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशन के दौरान लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े एक आतंकवादी मारा गया है। लश्कर के टॉप कमांडर जाकिर गनई ढेर हुआ है। उसका शव बरामद कर लिया गया है। आतंकी के पास हथियार भी मिले हैं। एक आतंकी की तलाश जारी है। अभी इलाके में सर्च अभियान चलाया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा कि “तुम भाग तो सकते हो, लेकिन छिप नहीं सकते! SOG शोपियां ने सेना की राष्ट्रीय राइफल्स (RR) और CRPF के साथ मिलकर चलाए गए एक जॉइंट ऑपरेशन में लश्कर के एक आतंकवादी को मार गिराया।”

इस इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की पक्की खुफिया जानकारी मिलने के बाद चार दिन पहले यह आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशन शुरू किया गया था। यह रिपोर्ट लिखे जाने तक ऑपरेशन जारी था। मारे गए आतंकवादी की पहचान हो गई है।

अधिकारियों के अनुसार, आतंकियों को 3 जुलाई को मीमंदर इलाके के एक घने बाग में लगे निगरानी कैमरों में देखा गया था। यह क्षेत्र सात गांवों में फैला हुआ है। इसके बाद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की संयुक्त टीमों ने इलाके की घेराबंदी कर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया था।

सेना की काउंटर-इंसर्जेंसी यूनिट विक्टर फोर्स ने इलाके में अतिरिक्त जवान तैनात किए थे, ताकि आतंकियों के भागने के सभी संभावित रास्तों को बंद किया जा सके। सुरक्षा रिकॉर्ड के मुताबिक, दोनों आतंकी दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के रहने वाले हैं। इनमें जाकिर वर्ष 2024 से लश्कर से जुड़ा बताया जा रहा है, जबकि लतीफ पिछले साल आतंकी संगठन में शामिल हुआ था। जाकिर का नाम पहलगाम हमले में भी था।



Operation Amistad: वेनेजुएला में भारत का राहत अभियान तेज, भारतीय सेना का फील्ड अस्पताल 24 घंटे दे रहा मुफ्त इलाज

वेनेजुएला / वर्ल्ड डेस्क / सत्ता संदेश

ऑपरेशन अमिस्ताद के तहत भूकंप से प्रभावित वेनेजुएला में तैनात भारतीय सेना का फील्ड अस्पताल पूरी तरह से काम करने लगा है और चौबीसों घंटे मुफ्त मेडिकल सेवाएं दे रहा है। वेनेजुएला में भारतीय दूतावास ने बताया कि बहुत अनुभवी डॉक्टरों वाली एक भारतीय मेडिकल टीम ने काराकस के अंतरराष्ट्रीय ला रिंकोनाडा रेसट्रैक पर शिविर लगाया है।

सोमवार को बताया गया कि यह शिविर अब पूरी तरह से काम कर रहा है और सभी सेवाएं निशुल्क दे रहा है। बुधवार शाम को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंप वेनेजुएला में एक सदी से भी अधिक समय में आए सबसे तेज भूकंपों में से है। रविवार को भूकंप से मरने वालों की संख्या भी बढ़कर 1,700 हो गई, जबकि हजारों लोग घायल हुए और कई लोग लापता हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, सेना का फील्ड अस्पताल भूकंप से प्रभावित लोगों की पूरी क्षमता के साथ मदद कर रहा है।

भारतीय वायु सेना के मुताबिक, ऑपरेशन अमिस्ताद के तहत दो सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों ने 66 टन राहत सामग्री वेनेजुएला पहुंचाई है। इसमें भारतीय सेना का फील्ड अस्पताल, 35 टन से अधिक राहत सामान, दवाइयां, मेडिकल उपकरण और दो भीष्म क्यूब्स शामिल हैं। सहयोग, हित और मैत्री’ (भीष्म) क्यूब्स के तहत भारत स्वास्थ्य पहल असल में मोबाइल अस्पताल हैं, जिनका मकसद आपातकालीन मेडिकल सुविधाएं देना है।

पांच दिन बाद जिंदा निकला युवक

वेनेजुएला में भूकंप आने के पांच दिन बाद ला गुआइरा राज्य में 21 साल के एक युवक को मलबे से जिंदा निकाला गया है। शख्स को  वेनेजुएला, मेक्सिको और अल साल्वाडोर की बचाव टीमों ने जिंदा बाहर निकाला है। यह जानकारी एल साल्वाडोर के राष्ट्रपति नायिब बुकेले ने दी। बचाए गए युवक का नाम आरोन लेवी कैंटिलो वर्गास है, जो काराबायेदा शहर में मलबे के नीचे जिंदा पाया गया। आरोन अब विशेष मेडिकल देखभाल में है।

दिहाड़ी मजदूरी से भारतीय सेना तक का सफर: लहरागागा के साका ने रचा इतिहास

गरीब परिवार के बेटे ने मेहनत के दम पर हासिल की बड़ी सफलता, आर्मी मेडिकल कोर में हुआ चयन

लहरागागा / सत्ता संदेश

संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश करते हुए लहरागागा के रहने वाले युवा साका ने भारतीय सेना में भर्ती होकर अपने परिवार, समुदाय और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से संबंध रखने वाले साका का चयन आर्मी मेडिकल कोर, लखनऊ में हुआ है।

जानकारी के अनुसार, जोगी समुदाय से जुड़े साका ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने दुकानों पर दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार की आर्थिक मदद की और अपनी शिक्षा जारी रखी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर भारतीय सेना में जगह बनाई।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

स्थानीय लोगों के अनुसार, साका ने बचपन से ही कई आर्थिक चुनौतियों का सामना किया। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और सेना में भर्ती होने का सपना देखा। लगातार मेहनत और तैयारी के बाद उनका चयन आर्मी मेडिकल कोर में हो गया, जिससे पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई।

लहरागागा पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत

सेना में चयन के बाद जब साका अपने गृह नगर लहरागागा पहुंचे तो मोहल्ले और क्षेत्र के लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। लोगों ने फूल-मालाएं पहनाकर और मिठाइयां बांटकर उनकी उपलब्धि का जश्न मनाया।

परिवार के सदस्यों ने भावुक होते हुए बताया कि उनकी जानकारी के अनुसार जोगी समुदाय से भारतीय सेना में भर्ती होने वाले युवाओं में साका का नाम एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में सामने आया है।

माता-पिता को किया सैल्यूट

कार्यक्रम के दौरान भावुक पल उस समय देखने को मिला जब साका ने अपने माता-पिता को सैल्यूट कर उनके संघर्ष, त्याग और सहयोग के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और सभी ने युवा सैनिक के जज्बे की सराहना की।

गौरव गोयल ने किया सम्मानित

इस अवसर पर पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल के पुत्र गौरव गोयल ने भी साका को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि साका की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने साका के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।

साका की यह सफलता साबित करती है कि यदि इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो आर्थिक कठिनाइयां भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। आज साका की कहानी हजारों युवाओं को अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा दे रही है।