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IIT रोपड़ और आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज में MoU, सेना अधिकारियों को मिलेगी डिफेंस टेक्नोलॉजी में MTech डिग्री

रोपड़ / सत्ता संदेश

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ (IIT Ropar) और आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज, गोपालपुर के बीच भारतीय सेना के अधिकारियों को डिफेंस टेक्नोलॉजी में मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी (MTech) की डिग्री प्रदान करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते से लॉन्ग एयर डिफेंस कोर्स कर रहे सेना अधिकारियों को उच्च तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान का अवसर मिलेगा।

समझौते पर आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा और आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज, गोपालपुर के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल अमित राव ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल सुरिंदर सिंह महल, प्रबंध निदेशक, आईआईटी रोपड़ डिफेंस रिसर्च एंड इनोवेशन फाउंडेशन और ब्रिगेडियर रोहित दास भी उपस्थित रहे।

इस समझौते का समन्वय आईआईटी रोपड़ के डीन (पीजी एंड रिसर्च) डॉ. सारंग गुमफेकर और डीआरआईएफ के निदेशक वीरभद्र सिंह रावत ने किया।

समझौते के तहत आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज, गोपालपुर में लॉन्ग एयर डिफेंस कोर्स कर रहे अधिकारियों को आईआईटी रोपड़ के एमटेक कार्यक्रम के माध्यम से डिफेंस टेक्नोलॉजी में औपचारिक शैक्षणिक मान्यता प्रदान की जाएगी। आईआईटी रोपड़ के संकाय सदस्य अधिकारियों के शोध प्रबंध और अनुसंधान परियोजनाओं के लिए मेंटर के रूप में मार्गदर्शन करेंगे।

इसके अलावा, पूर्व अनुमति के अधीन सेना अधिकारियों को आईआईटी रोपड़ की प्रयोगशालाओं और अन्य बुनियादी ढांचे का उपयोग करने का अवसर भी मिलेगा। संस्थान के विशेषज्ञों की ओर से ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से सेमिनार और व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे।

दोनों संस्थानों ने आपसी हित वाले क्षेत्रों में तकनीकी ज्ञान और अनुसंधान को संयुक्त रूप से आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इससे भारतीय सेना और आईआईटी रोपड़ के बीच शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

दिसंबर 2022 के समझौते पर आधारित है नई साझेदारी

यह नया समझौता दिसंबर 2022 में आर्मी ट्रेनिंग कमांड, इंटीग्रेटेड हेडक्वार्टर्स ऑफ मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस (आर्मी) और आईआईटी रोपड़ के बीच हुए शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग के समझौता ज्ञापन की नींव पर आधारित है।

आईआईटी रोपड़ के अनुसार, दिसंबर 2022 में हुए समझौते के बाद से संस्थान भारतीय सेना के साथ शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में लगातार सहयोग कर रहा है। आईआईटी रोपड़ का डिफेंस रिसर्च एंड इनोवेशन फाउंडेशन (DRIF) इस साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

राष्ट्रीय रक्षा से जुड़े अधिकारियों की तकनीकी शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा

समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा ने कहा कि यह समझौता भारतीय सेना के साथ संस्थान के निरंतर जुड़ाव में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि आईआईटी रोपड़ के संकाय और बुनियादी ढांचे अब सीधे उन अधिकारियों की तकनीकी शिक्षा में योगदान दे रहे हैं जो देश की राष्ट्रीय रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने आने वाले वर्षों में इस सहयोग को और व्यापक तथा मजबूत बनाने की उम्मीद जताई।

इस पहल से सेना के अधिकारियों को रक्षा प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा। साथ ही आईआईटी रोपड़ और भारतीय सेना के बीच तकनीकी विशेषज्ञता एवं अनुसंधान के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

NSNIS पटियाला ने “संडेज़ ऑन साइकिल” रैली और स्वच्छता अभियान के साथ कारगिल विजय दिवस मनायाम

पटियाला / सत्ता संदेश

‘ऑपरेशन विजय’ के नायकों को सच्ची श्रद्धांजलि देते हुए, नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पोर्ट्स (NSNIS), पटियाला ने कारगिल विजय दिवस पर “संडेज़ ऑन साइकिल” पहल का एक विशेष आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मकसद शारीरिक फिटनेस, देशभक्ति और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना और साथ ही सेना और नागरिकों के बीच संबंधों को मजबूत करना था।

NSNIS पटियाला के अधिकारियों, कोच, स्टाफ और ट्रेनीज़ के साथ-साथ ऐरावत डिवीजन साइकिलिंग टीम और 10 गार्ड्स बटालियन के 100 से ज़्यादा प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सभी टीमों ने मिलकर 30किलोमीटर का साइकिलिंग रूट पूरा किया और राष्ट्रीय एकता, फिटनेस और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दिखाई। इसके अलावा, प्रतिभागियों ने रास्ते में ‘स्वच्छ भारत सफाई अभियान’ भी चलाया, जिससे स्वच्छता और नागरिक जिम्मेदारी की भावना को और बल मिला।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए, NSNIS पटियाला के सीनियर एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (SED) ने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुर सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस देश की संप्रभुता की रक्षा में भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, समर्पण और अटूट प्रतिबद्धता की हमेशा याद दिलाता है।

“संडेज़ ऑन साइकिल” कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, SED ने इस बात पर ज़ोर दिया कि नियमित साइकिलिंग न केवल व्यक्तिगत फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देती है, बल्कि स्वच्छ परिवहन के माध्यम से पर्यावरण को हरा-भरा रखने में भी मदद करती है। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से रोज़ाना व्यायाम को अपनी आदत बनाने और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ के सक्रिय एंबेसडर के तौर पर काम करने का आग्रह किया।

भारतीय सेना को मिलेंगे 840 स्वदेशी कामिकेज ड्रोन, टाटा और निबे को 1600 करोड़ का ऑर्डर

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मंत्रालय ने सेना के लिए 1,600 करोड़ रुपये के टेंडर में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और निबे डिफेंस को ‘लोइटरिंग म्यूनिशंस’ की सप्लाई के लिए चुना है। इस टेंडर के तहत सेना को 100 किलोमीटर की रेंज वाले 840 आधुनिक ड्रोन मिलेंगे।

​टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स का कुल ऑर्डर का 64% हिस्सा टाटा को मिला है. टाटा इसके तहत अपनी पूरी तरह से स्वदेशी ‘ALS सीरीज’ के लोइटरिंग सिस्टम की सप्लाई करेगा।

निबे डिफेंस का ऑर्डर 36% हिस्सा निबे डिफेंस के खाते में गया है। निबे इसके लिए ‘वायु अस्त्र’ ड्रोन की सप्लाई करेगी, जो असल में इजरायल की कंपनी एलबिट सिस्टम्स के ‘स्काईस्ट्राइकर’ का रीब्रांडेड वर्जन है।

जानकारी के मुताबिक टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-1) बनकर उभरी है और उससे सेना की जरूरत का 64 प्रतिशत हिस्सा सप्लाई करने की उम्मीद है। वहीं निबे दूसरी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-2) बनकर उभरी है और उससे बाकी बचे 36 प्रतिशत लोइटरिंग म्यूनिशन की सप्लाई करेगा।

ये पूरी डील ‘फास्ट-ट्रैक’ रूट के जरिए की जा रही है। इसके तहत दोनों कंपनियों को अगले 6 महीने के भीतर ड्रोन की डिलीवरी शुरू करनी होगी. इन ड्रोनों का इस्तेमाल भारतीय सेना की नई बनाई जा रही ‘ड्रोन आर्टिलरी रेजिमेंट्स’ के लिए किया जाएगा, जिससे दुश्मनों के ठिकानों पर बेहद सटीक और लंबी दूरी के हमले किए जा सकें।

यहां टाटा का सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी है, वहीं निबे का ड्रोन इजरायली तकनीक पर आधारित है. इसे रक्षा खरीद में घरेलू विकास के मिले-जुले स्तर के रूप में तैयार किया जाएगा।

Shopian Encounter : शोपियां में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जाकिर गनई ढेर, शव बरामद, कई हथियार किए जब्त

जम्मू-कश्मीर / सत्ता संदेश

दक्षिण कश्मीर के शोपियां इलाके में चल रहे आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशन के दौरान लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े एक आतंकवादी मारा गया है। लश्कर के टॉप कमांडर जाकिर गनई ढेर हुआ है। उसका शव बरामद कर लिया गया है। आतंकी के पास हथियार भी मिले हैं। एक आतंकी की तलाश जारी है। अभी इलाके में सर्च अभियान चलाया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा कि “तुम भाग तो सकते हो, लेकिन छिप नहीं सकते! SOG शोपियां ने सेना की राष्ट्रीय राइफल्स (RR) और CRPF के साथ मिलकर चलाए गए एक जॉइंट ऑपरेशन में लश्कर के एक आतंकवादी को मार गिराया।”

इस इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की पक्की खुफिया जानकारी मिलने के बाद चार दिन पहले यह आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशन शुरू किया गया था। यह रिपोर्ट लिखे जाने तक ऑपरेशन जारी था। मारे गए आतंकवादी की पहचान हो गई है।

अधिकारियों के अनुसार, आतंकियों को 3 जुलाई को मीमंदर इलाके के एक घने बाग में लगे निगरानी कैमरों में देखा गया था। यह क्षेत्र सात गांवों में फैला हुआ है। इसके बाद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की संयुक्त टीमों ने इलाके की घेराबंदी कर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया था।

सेना की काउंटर-इंसर्जेंसी यूनिट विक्टर फोर्स ने इलाके में अतिरिक्त जवान तैनात किए थे, ताकि आतंकियों के भागने के सभी संभावित रास्तों को बंद किया जा सके। सुरक्षा रिकॉर्ड के मुताबिक, दोनों आतंकी दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के रहने वाले हैं। इनमें जाकिर वर्ष 2024 से लश्कर से जुड़ा बताया जा रहा है, जबकि लतीफ पिछले साल आतंकी संगठन में शामिल हुआ था। जाकिर का नाम पहलगाम हमले में भी था।



Operation Amistad: वेनेजुएला में भारत का राहत अभियान तेज, भारतीय सेना का फील्ड अस्पताल 24 घंटे दे रहा मुफ्त इलाज

वेनेजुएला / वर्ल्ड डेस्क / सत्ता संदेश

ऑपरेशन अमिस्ताद के तहत भूकंप से प्रभावित वेनेजुएला में तैनात भारतीय सेना का फील्ड अस्पताल पूरी तरह से काम करने लगा है और चौबीसों घंटे मुफ्त मेडिकल सेवाएं दे रहा है। वेनेजुएला में भारतीय दूतावास ने बताया कि बहुत अनुभवी डॉक्टरों वाली एक भारतीय मेडिकल टीम ने काराकस के अंतरराष्ट्रीय ला रिंकोनाडा रेसट्रैक पर शिविर लगाया है।

सोमवार को बताया गया कि यह शिविर अब पूरी तरह से काम कर रहा है और सभी सेवाएं निशुल्क दे रहा है। बुधवार शाम को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंप वेनेजुएला में एक सदी से भी अधिक समय में आए सबसे तेज भूकंपों में से है। रविवार को भूकंप से मरने वालों की संख्या भी बढ़कर 1,700 हो गई, जबकि हजारों लोग घायल हुए और कई लोग लापता हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, सेना का फील्ड अस्पताल भूकंप से प्रभावित लोगों की पूरी क्षमता के साथ मदद कर रहा है।

भारतीय वायु सेना के मुताबिक, ऑपरेशन अमिस्ताद के तहत दो सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों ने 66 टन राहत सामग्री वेनेजुएला पहुंचाई है। इसमें भारतीय सेना का फील्ड अस्पताल, 35 टन से अधिक राहत सामान, दवाइयां, मेडिकल उपकरण और दो भीष्म क्यूब्स शामिल हैं। सहयोग, हित और मैत्री’ (भीष्म) क्यूब्स के तहत भारत स्वास्थ्य पहल असल में मोबाइल अस्पताल हैं, जिनका मकसद आपातकालीन मेडिकल सुविधाएं देना है।

पांच दिन बाद जिंदा निकला युवक

वेनेजुएला में भूकंप आने के पांच दिन बाद ला गुआइरा राज्य में 21 साल के एक युवक को मलबे से जिंदा निकाला गया है। शख्स को  वेनेजुएला, मेक्सिको और अल साल्वाडोर की बचाव टीमों ने जिंदा बाहर निकाला है। यह जानकारी एल साल्वाडोर के राष्ट्रपति नायिब बुकेले ने दी। बचाए गए युवक का नाम आरोन लेवी कैंटिलो वर्गास है, जो काराबायेदा शहर में मलबे के नीचे जिंदा पाया गया। आरोन अब विशेष मेडिकल देखभाल में है।

दिहाड़ी मजदूरी से भारतीय सेना तक का सफर: लहरागागा के साका ने रचा इतिहास

गरीब परिवार के बेटे ने मेहनत के दम पर हासिल की बड़ी सफलता, आर्मी मेडिकल कोर में हुआ चयन

लहरागागा / सत्ता संदेश

संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश करते हुए लहरागागा के रहने वाले युवा साका ने भारतीय सेना में भर्ती होकर अपने परिवार, समुदाय और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से संबंध रखने वाले साका का चयन आर्मी मेडिकल कोर, लखनऊ में हुआ है।

जानकारी के अनुसार, जोगी समुदाय से जुड़े साका ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने दुकानों पर दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार की आर्थिक मदद की और अपनी शिक्षा जारी रखी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर भारतीय सेना में जगह बनाई।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

स्थानीय लोगों के अनुसार, साका ने बचपन से ही कई आर्थिक चुनौतियों का सामना किया। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और सेना में भर्ती होने का सपना देखा। लगातार मेहनत और तैयारी के बाद उनका चयन आर्मी मेडिकल कोर में हो गया, जिससे पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई।

लहरागागा पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत

सेना में चयन के बाद जब साका अपने गृह नगर लहरागागा पहुंचे तो मोहल्ले और क्षेत्र के लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। लोगों ने फूल-मालाएं पहनाकर और मिठाइयां बांटकर उनकी उपलब्धि का जश्न मनाया।

परिवार के सदस्यों ने भावुक होते हुए बताया कि उनकी जानकारी के अनुसार जोगी समुदाय से भारतीय सेना में भर्ती होने वाले युवाओं में साका का नाम एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में सामने आया है।

माता-पिता को किया सैल्यूट

कार्यक्रम के दौरान भावुक पल उस समय देखने को मिला जब साका ने अपने माता-पिता को सैल्यूट कर उनके संघर्ष, त्याग और सहयोग के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और सभी ने युवा सैनिक के जज्बे की सराहना की।

गौरव गोयल ने किया सम्मानित

इस अवसर पर पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल के पुत्र गौरव गोयल ने भी साका को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि साका की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने साका के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।

साका की यह सफलता साबित करती है कि यदि इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो आर्थिक कठिनाइयां भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। आज साका की कहानी हजारों युवाओं को अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा दे रही है।

मेजर जनरल भारत महतानी को एन सी सी निदेशालय हेडक्वार्टर से कर्नाटका और केरला सब-एरिया हेडक्वार्टर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) के तौर पर तैनात किया गया है।

भारत / सत्ता संदेश

मेजर जनरल भारत महतानी अभी एन सी सी निदेशालय में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़  के लिए एडिशनल डायरेक्टर जनरल (ADG) के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने 1 नवंबर, 2025 को यह प्रतिष्ठित कमान संभाली थी, और निवर्तमान अधिकारी, मेजर जनरल जगदीप सिंह चीमा से पारंपरिक बैटन लिया था।      7 महीने के सफल और प्रभावशाली कार्यकाल के बाद, यह जनरल ऑफिसर बेंगलुरु में कर्नाटका और केरला सब-एरिया हेडक्वार्टर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) के तौर पर कमान संभालने जा रहे हैं।

मेजर जनरल भारत महतानी अपने नए पद पर व्यापक अनुभव लेकर आए हैं। एन सी सी के एडिशनल डायरेक्टर जनरल का पद संभालने से पहले, उन्होंने पश्चिमी सेक्टर में एक इन्फैंट्री ब्रिगेड, झारखंड और बिहार सब-एरिया में और पश्चिमी सेक्टर में एक इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाली थी। अपनी विशिष्ट सेवा के लिए, उन्हें GOC-in-Chief, पश्चिमी कमान प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया है।

उनके प्रभावशाली कार्यकाल, नेतृत्व और युवा विकास में उनके योगदान का सम्मान करने के लिए, एन सी सी निदेशालय ने इस जनरल ऑफिसर के लिए एक औपचारिक विदाई समारोह आयोजित किया।

बहुपक्षीय अभ्यास प्रगति-2026 का उमरोई, मेघालय में शुभारंभ हुआ

मेघालय / सत्ता संदेश

मेघालय के उमरोई सैन्य स्टेशन में आज बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास प्रगति-2026 का शुभारंभ हुआ। इस सैन्य अभ्यास में भूटानकंबोडियाइंडोनेशियालाओसमलेशियामालदीवम्यांमारनेपालफिलीपींससेशेल्सश्रीलंका और वियतनाम सहित 12 मित्र देशों ने भागीदारी कर रहे हैं। भारतीय सेना ने इन सैन्य टुकड़ियों के आगमन पर उनका गर्मजोशी और पारंपरिक रूप से स्वागत किया और यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आतिथ्य सत्कार को दर्शाता है।

प्रगति (पीआरएजीएटीआई) , जिसका अर्थ हिंद महासागर क्षेत्र में विकास और परिवर्तन के लिए क्षेत्रीय सेनाओं की साझेदारी है, समानता, मित्रता और आपसी सम्मान की भावना से आयोजित की जा रही है। यह अभ्यास भाग लेने वाली सेनाओं को पेशेवर आदान-प्रदान करने, एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और घनिष्ठ सैन्य संबंध बनाने के लिए एक साझा मंच प्रदान करता है।

उद्घाटन समारोह में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। अपने संबोधन में भारतीय सेना के अपर महानिदेशक (इन्फैंट्री) मेजर जनरल सुनील शेओरान ने सभी टुकड़ियों का स्वागत किया और समकालीन सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सामूहिक भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को खुलेपन, आपसी सम्मान और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने की तत्परता के साथ भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही इस बात पर भी बल दिया कि प्रत्येक राष्ट्र की क्षमता और दृष्टिकोण अभ्यास के सामूहिक उद्देश्यों को हासिल करने में सार्थक योगदान देंगे।

इस अभ्यास के उद्देश्यों में संयुक्त अभियानों में भाग लेने वाले देशों के बीच निर्बाध समन्वय स्थापित करना और सहयोग के सामान्य क्षेत्रों की पहचान करना; विशेषज्ञता साझा करना एवं व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से विकसित सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों के आदान-प्रदान के लिए एक संस्थागत तंत्र स्थापित करना; संयुक्त प्रशिक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से रक्षा संबंधों और सौहार्द को मजबूत करने के साथ-साथ बहुराष्ट्रीय परिवेश में खुफिया जानकारी के प्रबंधन और साझाकरण के लिए सामान्य अवधारणाओं को विकसित करना शामिल है।

दो सप्ताह तक संचालित होने वाले इस अभ्यास में अर्ध-पहाड़ी और जंगली इलाकों में आतंकवाद-विरोधी अभियानों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में संयुक्त योजना अभ्यास, सामरिक स्तर के अभ्यास और समन्वित अभियान शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य भाग लेने वाले सैनिकों की अनुकूलन क्षमता, सहनशक्ति और सामरिक दक्षता में सुधार करना है। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संचालन के दौरान शारीरिक फिटनेस, अनुशासन और समन्वय पर विशेष बल दिया जाएगा।

इस अभ्यास के अंतर्गत, भारतीय प्रौद्योगिकी और रक्षा कंपनियां आत्मनिर्भर भारत पहल के अंतर्गत स्वदेशी उपकरणों और नवाचारों का प्रदर्शन करेंगी, जो ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करेगा और रक्षा उत्पादन, नवाचार और आत्मनिर्भरता में भारत की बढ़ती क्षमताओं को उजागर करेगा।

अभ्यास प्रगति-2026 से सैन्य सहयोग को और मजबूत करने, पेशेवर संबंधों को परिपुष्ट करने और क्षेत्रीय भागीदारों के बीच सामान्य सुरक्षा चुनौतियों के लिए एक साझा दृष्टिकोण में योगदान देने की उम्मीद है।

‘भारत आतंकवाद के आगे कभी नहीं झुकेगा’: पहलगाम हमले की पहली बरसी पर पीएम मोदी का कड़ा संदेश

नेशनल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की पहली बरसी (22 अप्रैल) पर जान गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी है। इस मौके पर उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख को स्पष्ट करते हुए दुनिया को एक कड़ा संदेश दिया है।

आतंकियों के मंसूबे कभी नहीं होंगे कामयाब: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस हमले में अपनी जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को राष्ट्र कभी नहीं भुला सकता। उन्होंने लिखा, “एक राष्ट्र के तौर पर, हम दुख और संकल्प में एकजुट हैं। भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के आगे कभी नहीं झुकेगा और आतंकवादियों के नापाक मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे”। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं भी व्यक्त कीं।

भारतीय सेना का जवाब: ‘न्याय होकर रहेगा’ इस अवसर पर भारतीय सेना ने भी आतंकवादियों और उनके आकाओं को चेतावनी दी है। सेना ने स्पष्ट किया कि भारत के खिलाफ किसी भी घिनौनी हरकत का जवाब मिलना तय है और न्याय हमेशा मिलकर रहेगा। सेना ने ‘ऑपरेशन महादेव’ का भी जिक्र किया, जिसके तहत पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकियों को ढेर कर दिया गया था।

पहलगाम हमले का काला दिन : गौरतलब है कि पिछले साल (2025) जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में पर्यटकों को निशाना बनाकर यह कायरतापूर्ण हमला किया गया था। इस घटना में कई निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च कर सीमा पार आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था।

नई दिल्ली में सेना कमांडरों का सम्मेलन संपन्न हुआ

नई दिल्ली / सत्ता संदेश

द्विवार्षिक सेना कमांडरों का सम्मेलन (एसीसी) 16 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुआ। यह सम्मेलन 13 अप्रैल से शुरु हुआ था। सेना प्रमुख (सीओएएस) की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने भाग लिया। कैबिनेट सचिव, रक्षा प्रमुख, रक्षा सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (एनएसबीए) अध्यक्ष के अलावा नौसेना प्रमुख सहित सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने संबोधित किया। ‘भविष्य के लिए तैयार बल’ के रूप में विकसित होने की परिकल्पना के अनुरूप भारतीय सेना ने वर्ष 2026 को “नेटवर्किंग और डेटा केंद्रितता” का वर्ष घोषित किया है।

सम्मेलन में आधुनिकीकरण, युद्ध अभियानों में प्रौद्योगिकी का समावेश, सैद्धांतिक और प्रशिक्षण संबंधी आवश्यकताओं के साथ-साथ परिचालन तत्परता बढ़ाने और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए नेटवर्किंग और डेटा केंद्रितता से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की गई। ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक और वैश्विक स्तर पर मौजूदा परिचालन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए, वरिष्ठ सेना नेतृत्व ने मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) और प्रतिमानवरहित हवाई प्रणालियों (सी-यूएएस) के उपयोग सहित परिचालन क्षमता संबंधी आवश्यकताओं पर भी ध्यान केंद्रित किया।

विशिष्ट वक्ताओं ने बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और उभरते वैश्विक, क्षेत्रीय और आंतरिक सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर प्रकाश डाला। वैश्विक संघर्षों से प्राप्त सबकों का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए, वक्ताओं ने देश की रणनीतिक और सुरक्षा हितों की गारंटीकृत सुरक्षा के लिए कठोर शक्ति की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अंतर-मंत्रालयी समन्वय, नागरिक और सैन्य संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल और जटिल सुरक्षा चुनौतियों के समन्वित राष्ट्रीय समाधान के लिए राष्ट्रव्यापी दृष्टिकोण पर जोर दिया। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि वर्तमान आपूर्ति श्रृंखला संकट को देखते हुए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और दीर्घकालिक रणनीतिक लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशी उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है।