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घर खरीदारों के पैसों की कथित हेराफेरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, ईडी और आरबीआई से मांगा जवाब

नयी दिल्ली / सत्ता संदेश

Supreme Court of India ने घर खरीदारों के पैसों की कथित हेराफेरी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में केंद्र सरकार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और कई रियल एस्टेट कंपनियों से जवाब तलब किया है। यह मामला नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की आवासीय परियोजनाओं में हजारों करोड़ रुपये के कथित दुरुपयोग से जुड़ा बताया जा रहा है।

प्रधान न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi और न्यायमूर्ति Vipul M. Pancholi शामिल थे, ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है और 15 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह याचिका वंदना सभरवाल द्वारा दायर की गई है, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता Prashant Bhushan ने याचिकाकर्ता की ओर से दलीलें पेश कीं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे परियोजनाओं से जुड़े घर खरीदारों से एकत्र किए गए हजारों करोड़ रुपये का कथित रूप से गलत तरीके से उपयोग किया गया और नियामक निगरानी में गंभीर खामियां रही हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है और यदि बड़े पैमाने पर धन के दुरुपयोग के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह हजारों परिवारों को प्रभावित कर सकता है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता की कमी और नियामक संस्थाओं की सीमित निगरानी के कारण इस तरह की समस्याएं बार-बार सामने आती रही हैं। इसी कारण केंद्र सरकार, ईडी और आरबीआई से विस्तृत जवाब मांगा गया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह पहल घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा और रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। इस मामले पर अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी, जिसमें सभी पक्षों के जवाबों पर विचार किया जाएगा।

पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी से आम आदमी की कमर टूटी, केंद्र सरकार महंगाई रोकने में फेल: कुलवंत सिंह सिद्धू

लुधियाना / सत्ता संदेश

डीजल महंगा होने से धान के सीजन में किसानों पर बढ़ेगा बोझ और घरेलू बजट भी हिला, लोग परेशान: विधायक सिद्धू

केंद्र सरकार तुरंत दखल देकर लोगों को राहत दे: कुलवंत सिंह सिद्धू

तेल कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के खिलाफ हलका आत्म नगर के विधायक सिद्धू ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस

विधानसभा हलका आत्म नगर से विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू ने सोमवार को पिछले कुछ दिनों के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी पर भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की सख्त आलोचना करते हुए कहा कि तेल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी को बुरी तरह प्रभावित किया है और घरेलू बजट को हिलाकर रख दिया है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू ने आरोप लगाया कि महंगाई ने जनता की “कमर तोड़” दी है और लोग अपने रोजमर्रा के खर्चों का प्रबंधन करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में राहत देने की बजाय केंद्र सरकार ने आम नागरिकों को अकेला छोड़ दिया है। विधायक सिद्धू ने कहा कि आर्थिक तंगी के समय में लोगों के साथ खड़े होना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन मोदी की अगुवाई वाली सरकार महंगाई को काबू करने और जनता को राहत देने में पूरी तरह असफल रही है।

विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू ने आने वाले झोने के सीजन पर चिंता जताते हुए कहा कि किसानों को अब ट्रैक्टरों, ट्यूबवेलों और अन्य कृषि मशीनरी के लिए डीजल पर ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से ढुलाई की लागत में भी इजाफा होगा, जिससे सब्जियों, फलों, अनाज और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम और बढ़ जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर, मध्यम वर्ग के परिवार और रोजाना दिहाड़ीदार लोग तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे और उन्होंने केंद्र सरकार से लोगों को राहत प्रदान करने के लिए तुरंत दखल देने की मांग की है।

डीपीआईआईटी ने भव्य योजना के कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देश दिए


भव्य योजना के अन्तर्गत एकीकृत औद्योगिक अवसंरचना के माध्यम से भारत के विनिर्माण इकोसिस्टम को सुदृढ़ किया जाएगा

भव्य योजना के अंतर्गत 33,660 करोड़ रुपये के परिव्यय से 100 औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंग

भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने भव्य योजना के कार्यान्वयन के लिए विस्तृत परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं। भव्य योजना एक ऐतिहासिक केंद्रीय क्षेत्र योजना है जिसका उद्देश्य देश भर में निवेश के लिए तैयार, विश्व स्तरीय औद्योगिक पार्क विकसित करना है।

भव्य परियोजना को मेक इन इंडिया, पीएम गति शक्ति और भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण गंतव्य के रूप में स्थापित करने के सरकार के व्यापक दृष्टिकोण के उद्देश्यों के अनुरूप एकीकृत औद्योगिक बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से भारत के विनिर्माण इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के लिए डिजाइन किया गया है।

इस योजना के तहत 2026-27 से 2031-32 तक छह वर्षों की अवधि में 100 औद्योगिक पार्कों के विकास की प्रतिस्पर्धी योजना है, जिसके लिए कुल लगभग 33,660 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय किया गया है। पहले चरण में, प्रतियोगिता-आधारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से अधिकतम 50 औद्योगिक पार्कों का चयन किया जाएगा।

इन दिशा-निर्देशों में योजना के अंतर्गत औद्योगिक पार्कों के लिए पात्रता मानदंड, परियोजना चयन पद्धति, वित्तपोषण संरचना, शासन संरचना, निगरानी प्रणाली और कार्यान्वयन तौर-तरीकों को शामिल करते हुए एक व्यापक ढांचा निर्धारित किया गया है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचे, बहुआयामी लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, विश्वसनीय उपयोगिता प्रणालियों, श्रमिक-सहायक बुनियादी ढांचे, डिजिटल शासन प्रणालियों और सतत विकास सुविधाओं से युक्त “निवेश के लिए तैयार” औद्योगिक इकोसिस्टम का निर्माण करना है।

दिशानिर्देशों में ग्रीनफील्ड और पात्र ब्राउनफील्ड औद्योगिक पार्कों के विकास का प्रावधान है। गैर-पहाड़ी राज्यों के लिए न्यूनतम भूमि की आवश्यकता 100 एकड़ और पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और छोटे राज्यों के लिए 25 एकड़ निर्धारित की गई है। योजना में 1000 एकड़ तक के बड़े पार्कों पर भी विचार करने की अनुमति है।

चुनौती-आधारित चयन ढांचे के अन्तर्गत, प्रस्तावों का मूल्यांकन बहुआयामी कनेक्टिविटी, स्थल की उपयुक्तता, बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता, औद्योगिक इकोसिस्टम की मजबूती, नीतिगत सुविधा, डिजिटल शासन की तैयारी और दीर्घकालिक स्थिरता सहित वस्तुनिष्ठ मापदंडों पर किया जाएगा।

इन दिशानिर्देशों में भूमिगत उपयोगिता प्रणालियों, जल और अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना, सामान्य अपशिष्ट उपचार प्रणालियों, नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना, श्रमिक आवास, परीक्षण प्रयोगशालाओं, डिजिटल सिंगल-विंडो सिस्टम, कौशल विकास सुविधाओं और एकीकृत सामान्य अवसंरचना जैसे घटकों के लिए अवसंरचना की गुणवत्ता के मूल्यांकन का प्रावधान है।

भव्य योजना के अंतर्गत परियोजनाओं का कार्यान्वयन कंपनी अधिनियम, 2013 के अन्तर्गत निगमित विशेष प्रयोजन वाहनों (एसपीवी) के माध्यम से किया जाएगा। एसपीवी परियोजना नियोजन, विकास, संचालन, प्रबंधन, निवेशक सुविधा प्रदान करने और योजना के अंतर्गत निर्मित परिसंपत्तियों के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए जिम्मेदार होंगे।

इस योजना के अन्तर्गत एसपीवी को हस्तांतरित भूमि के मूल्य और निर्धारित परियोजना लक्ष्यों की प्राप्ति से जुड़ी इक्विटी अंशदान के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (एनआईसीडीसी) को योजना के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए परियोजना प्रबंधन एजेंसी (पीएमए) के रूप में नामित किया गया है।

दिशानिर्देशों में परियोजना-विशिष्ट एसपीवी के माध्यम से औद्योगिक पार्क विकास में निजी डेवलपर्स की भागीदारी के लिए संरचित प्रावधान भी दिए गए हैं, जिनमें स्पष्ट रूप से परिभाषित शासन ढांचे, पारदर्शिता सुरक्षा उपाय और जवाबदेही तंत्र शामिल हैं।

प्रभावी कार्यान्वयन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, दिशानिर्देशों में जीआईएस-आधारित निगरानी प्रणाली, आवधिक प्रगति रिपोर्टिंग, लेखापरीक्षा तंत्र और डीपीआईआईटी के सचिव की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति द्वारा निरीक्षण को शामिल किया गया है।

योजना के दिशानिर्देशों में रसद, कौशल विकास, स्थिरता, नवीकरणीय ऊर्जा, उपयोगिता अवसंरचना और औद्योगिक विकास के लिए संबंधित केंद्रीय और राज्य सरकार की पहलों के साथ समन्वय स्थापित करने का प्रावधान भी है।

दिशानिर्देशों का प्रकाशन भव्य योजना के संचालन और वैश्विक स्तर पर मानकीकृत औद्योगिक बुनियादी ढांचे के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो बड़े पैमाने पर विनिर्माण निवेश को आकर्षित करने, घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, रोजगार सृजित करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ भारत के एकीकरण को बढ़ाने में सक्षम है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए


नई दिल्ली / सत्ता संदेश

BSF के जवानों का सम्मान, राष्ट्र के प्रति अडिग निष्ठा, कर्तव्यपरायणता और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है

मोदी सरकार अगले एक साल में ड्रोन, राडार, आधुनिक कैमरा और तकनीकों से लैस ‘Smart Border Project’ लाकर अभेद्य बॉर्डर ग्रिड बनाएगी

त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में घुसपैठ रोकने के लिए संकल्पित सरकारें हैं, BSF इनके साथ मिलकर काम करें

गृह मंत्री ने त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में BSF को जिला प्रशासनों, पुलिस थानों, पंचायत और पटवारियों के साथ मिलकर घुसपैठ रोकने के लिए काम करने के निर्देश दिए

बॉर्डर सिक्योरिटी आइसोलेटेड ड्यूटी नहीं, टेरिटोरियल रिस्पॉन्सिबिलिटी है

मोदी सरकार का इंटरनल सिक्योरिटी का विजन – समस्याओं को जड़ से उखाड़ फेंकना है, ‘नक्सलवाद के बाद अब घुसपैठ समाप्त होगी’

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा साइबर थ्रेट्स, हाइब्रिड वॉरफेयर और ड्रोन वॉरफेयर से निपटने के लिए ‘नई बॉर्डर सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी’ लायेंगे

मोदी सरकार बॉर्डर पर ‘टेक्नोलॉजी-ड्रिवन स्मार्ट सिक्योरिटी ग्रिड’ खड़ी करने का रोडमैप तैयार कर रही है

वह जमाना चला गया, जब आतंकी हमले और नक्सलवादी बेखौफ नरसंहार करते थे और सरकारें सिर्फ़ वार्ता करती थीं, यह नई डिफेंस डॉक्ट्रिन है, मोदी डॉक्ट्रिन है

मोदी जी ने High Powered Demography Mission की घोषणा की, जल्दी ही इसकी कमेटी बना कर काम शुरू हो जाएगा

हम भारत में Unnatural Demographic Change नहीं होने देंगे, एक-एक घुसपैठियों को बाहर निकालेंगे

दो महीने के अंदर ही मोदी सरकार सभी CAPF जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए एक बहुत बड़ा कार्यक्रम लेकर आएगी

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर निदेशक, आसूचना ब्यूरो, सचिव, सीमा प्रबंधन और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि यह अलंकरण समारोह बल की अडिग निष्ठा, कतर्व्यपरायणता और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। 1965 के युद्ध के बाद सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था में पाए गए गैप्स और कमियों का गहन अध्ययन करने के बाद एक ऐसे बल की आवश्यकता महसूस की गई जो शांति काल में भी हमारी सीमाओं की सुरक्षा करे। उस समय पद्म विभूषण श्री के एफ रुस्तम जी के नेतृत्व में बीएसएफ का गठन हुआ और तब से इस बल ने पूरे देश की सीमाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा कि श्री रुस्तम जी ने सीमा सुरक्षा बल की जो नींव डाली उस पर सुरक्षा के क्षेत्र में एक भव्य इमारत बनाने का काम आज बीएसएफ ने किया है जो देश के लिए गौरव की बात है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने बीएसएफ की महिला टीम द्वारा माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण करने की ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए दल के सभी सदस्यों और सीमा सुरक्षा बल के सभी जवानों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि एवरेस्ट की चोटी पर जब वंदे मातरम गाया जाता है तो यहां दिल्ली में बैठकर भी हमारे मन में बहुत आनंद और संतोष की अनुभूति होती है। गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल की वीरांगनाओं को विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर वंदे मातरम का गान करने का सौभाग्य मिला है।

श्री अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा के क्षेत्र में आज कई प्रकार की नई चुनौतियां हमारे सामने खड़ी हैं। अवैध घुसपैठ, नारकोटिक्स की तस्करी, गौ तस्करी, नकली करेंसी, संगठित अपराध, ड्रोन से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी सहित कई प्रकार की चुनौतियां सीमा सुरक्षा बल के सामने हैं, लेकिन बीएसएफ ने लगातार इन चुनौतियों से निपटने का सुनियोजित प्रयास किया है। श्री शाह ने कहा कि बीएसएफ ने अपने पास उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करते हुए इन सभी चुनौतियों के बखूबी सामना कर देश की सुरक्षा करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इस बल की भूमिका को और अधिक समन्वित और व्यापक करना होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि अब हम केवल पारंपरिक तरीके से सीमाओं की सुरक्षा नहीं कर सकते। हमें राज्य पुलिस, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs), अन्य सशस्त्र बल, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), खुफिया एजेंसियों और राज्य प्रशासन के साथ मिलकर सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करना पड़ेगा तभी हम इन नई चुनौतियों का सामना कर सकेंगे। हमें सीमा सुरक्षा को एक आइसोलेटेड ज़िम्मेदारी के रूप में देखने की जगह एक टेरिटोरियल रिस्पांसिबिलिटी के रूप में देखना होगा तभी हम इन सभी चुनौतियों को पार करने में सफल होंगे। श्री शाह ने यह भी कहा कि हमें आने वाले खतरों को भी देखना पड़ेगा। हमारी जिम्मेदारी है कि सीमापार से घुसपैठ द्वारा कृत्रिम तरीके से जनसांख्यिकी में किए जा रहे बदलाव को रोकने के लिए भी हमें सतर्क और सजग रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नार्कोटिक्स और फेक करंसी के हमले से हमारे अर्थ तंत्र को खोखला करने के प्रयास के प्रति भी हमें सतर्क रहना होगा। साइबर चुनौतियां, हाइब्रिड वॉरफेयर और ड्रोन के खतरों के लिए एक नई रणनीति के साथ हमें काम करना होगा।  

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सियाचिन और कश्मीर की बर्फीली पहाड़ियां, कुपवाड़ा, केरन और उरी जैसे दुर्गम क्षेत्र, राजस्थान का रण, कच्छ का छोटा रण, सरक्रीक के दलदली नाले, सुंदरवन के घने जंगल, त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम की कठिन पूर्वी सीमाएं और ब्रह्मपुत्र से जुड़े कठिन संवेदनशील नदी क्षेत्रों के बीच सीमा सुरक्षा बल डटा हुआ है। इसी कारण 1965 में महज 25 बटालियनों से अल्प संसाधनों के साथ शुरू हुआ सीमा सुरक्षा बल, आज 2,70,000 की नफरी के साथ विश्व का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल बन गया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद हमारी रक्षा नीति और सीमाओं की सुरक्षा के बारे में हमारे नजरिए में आमूलचूल परिवर्तन आया है। पाकिस्तान द्वारा किए गए तीनों हमलों का हमने जवाब दिया है, चाहे उरी हो, पुलवामा हो या पहलगाम हो। हमने सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से पाकिस्तान के अंदर उनके मर्मस्थान पर प्रहार कर मुंहतोड़ जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि वह ज़माना गया कि आतंकी हमलों के बाद वार्ताएं होती थीं, नक्सलवादी बेखौफ होकर जनसंहार करते थे और सरकारें सिर्फ़ वार्ता करती थीं। हमने अपने सुरक्षा परिदृश्य को भारत के संविधान की स्पिरिट के साथ मज़बूत बनाने का काम किया है। यह एक प्रकार से नए Defence Doctrine की घोषणा है और इसमें सीमा सुरक्षा बल का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत सरकार और गृह मंत्रालय, सीमा को एक स्मार्ट बॉर्डर बनाने में सीमा सुरक्षा बल को तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि बीएसएफ़ द्वारा किए जा रहे कई प्रयोगों के साथ एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बनाने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले 1 साल के अंदर ही स्मार्ट बॉर्डर कंसेप्ट के साथ सीमा सुरक्षा की सुरक्षा में सभी प्रकार की तकनीक को समाहित कर एक अभेद्य बॉर्डर का सुरक्षा ग्रिड बनाने का काम आगे बढ़ रहा है। गृह मंत्रालय बहुत जल्दी, ड्रोन, रडार, आधुनिक कैमरा और अन्य नई तकनीक के साथ एक स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट को देश के सामने लेकर आएगा। गृह मंत्री ने कहा कि इस शुरूआत के बाद सीमा सुरक्षा बल का काम काफी सरल भी हो जाएगा और इसे मजबूती भी मिलेगी।

श्री अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल की स्थापना के 60वें साल में ही हम स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट की शुरूआत कर बांग्लादेश और पाकिस्तान की पूरी सीमा को अभेद्य बना देंगे जिससे बीएसएफ़ को बहुत बड़ी तकनीकी सहायता उपलब्ध हो जाएगी। इससे पराक्रम, शौर्य, समर्पण, देशभक्ति के साथ-साथ एक मजबूत तकनीकी सपोर्ट भी बल के पास उपलब्ध होगा जिससे हम दोनों सीमाओं को और अधिक सुरक्षित कर देंगे।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने तय किया है कि हम न केवल घुसपैठ को रोकेंगे, बल्कि एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुन कर देश से बाहर निकाल देंगे और अपनी जनसांख्यिकी में कृत्रिम बदलाव नहीं होने देंगे। सीमा सुरक्षा बल को जनसांख्यिकी में बदलाव करने के षड्यंत्र को रोकना होगा। उन्होंने कहा कि अब त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में ऐसी सरकारें हैं जो नीतिगत रूप से मानती है कि देश में घुसपैठ नहीं होनी चाहिए। यह सीमा सुरक्षा बल की जिम्मेदारी है कि हम न केवल सीमाओं की सुरक्षा करें बल्कि गांव के पटवारी, थाने, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, DDO, जिला पुलिस अधीक्षक के साथ हमारा संवाद होना चाहिए। कौन नया घुसपैठिया आया है, उसके आने का क्या रूट है, कहां से तस्करी, गौ तस्करी हो रही है? इन सभी रूट्स को चुन-चुन कर बंद करना और समाप्त करना बीएसएफ की जिम्मेदारी है। इनसे मिली हुई सारी सूचना का उपयोग कर घुसपैठियों को निकालने और रोकने की एक सुचारू व्यवस्था बनानी चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि सालों से बेरोक-टोक चल रही घुसपैठ को हमें रोकना होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार के अडिग और दृढ़ निश्चय के कारण पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या आज समाप्त हो गई है और भारत नक्सल मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि हमारे जवानों ने यह कर दिखाया है। गृह मंत्री ने कहा कि समस्या को बनाए रखना या कंट्रोल में रखना सुरक्षा का दृष्टिकोण नहीं हो सकता, बल्कि समस्या को समूल समाप्त करना ही सुरक्षा का दृष्टिकोण हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब घुसपैठ के लिए भी बीएसएफ को इसी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि वाइब्रेंट विलेजेज-1 और वाइब्रेंट विलेजेज -2 सीमा सुरक्षा बल के सहयोग से एक लोकतांत्रिक तरीके से चलाया गया विकास कार्यक्रम है। बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर हमने 50 किलोमीटर किया है और पश्चिम बंगाल सरकार को जो भूमि देनी थी उसका निर्णय भी हो चुका है।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने High-Powered Demography Mission की घोषणा की है और जल्दी ही इसकी कमेटी बना कर काम शुरू हो जाएगा। हमें दोनों देशों की सीमाओं पर आने वाले दिनों में एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बनानी होगी और इसके लिए एक बहुत बड़ा अभियान भी चलाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बीएसएफ का 60वां वर्ष एक स्मार्ट बॉर्डर बनाने और  बीएसएफ के जवानों के कल्याण का भी वर्ष है। श्री शाह ने कहा कि दो महीने के अंदर ही नरेन्द्र मोदी सरकार बीएसएफ और सभी सीएपीएफ के जवानों के कल्याण के लिए एक बहुत बड़ा कार्यक्रम लाएगी। इसके बाद हमारे जवान सुनिश्चित होकर सीमाओं की सुरक्षा कर सकेंगे और उनके परिवारजनों की चिंता भारत सरकार का गृह मंत्रालय करेगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नारकोटिक्स के खिलाफ भी हम देश में एक बहुत बड़ा अभियान चलाने जा रहे हैं और इसमें भी सीमा सुरक्षा बल की बहुत अहम भूमिका होगी। बीएसएफ़ की सतर्कता से दोनों तरफ की सूचनाएं एकत्रित कर नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई में भी इस बल का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि आने वाले तीन-चार साल सीमा सुरक्षा में संपूर्ण बदलाव के वर्ष होंगे। उन्होंने कहा कि तकनीकी सहायता मिलने से जवानों की जिम्मेदारी कम नहीं होती, बल्कि बढ़ती है। श्री शाह ने कहा कि तकनीक को आत्मसात कर, स्थानीय लोगों से संवाद प्रस्थापित कर, स्थानीय प्रशासन से तालमेल बढ़ाते हुए हमें इस देश को घुसपैठ से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल करना है।